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                <title>मार्च - योग संदेश</title>
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                <description>मार्च RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>श्रद्धेय योगऋषि परम पूज्य स्वामीजी महाराज की शाश्वत प्रज्ञा से नि:सृत शाश्वत सत्य...</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हम शाश्वत सत्ता के सच्चे प्रतिनिधि बनें अपना कत्र्तव्य निभाएं</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्यता का बीज:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सभी माता-पिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुजनों व बड़ों को बचपन से ही सभी बच्चों के मन-मस्तिष्क में कुछ बातों का तर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तथ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमाण व उदाहरण आदि के साथ स्थापित करने की आवश्यकता है। उसमें सबसे पहली बात यह है कि जैसे बीज में वृक्ष होने का सामथ्र्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही हम सब मनुष्यों में चाहे हम कितसी भी जाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्प्रदाय या देश में पैदास हुए हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम सब मनुष्यों में मानव से महामानव बनने की शक्ति सामथ्र्य है।</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2339/shashwat-pragya-march-2017"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/812.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हम शाश्वत सत्ता के सच्चे प्रतिनिधि बनें अपना कत्र्तव्य निभाएं</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्यता का बीज:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सभी माता-पिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुजनों व बड़ों को बचपन से ही सभी बच्चों के मन-मस्तिष्क में कुछ बातों का तर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तथ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमाण व उदाहरण आदि के साथ स्थापित करने की आवश्यकता है। उसमें सबसे पहली बात यह है कि जैसे बीज में वृक्ष होने का सामथ्र्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही हम सब मनुष्यों में चाहे हम कितसी भी जाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्प्रदाय या देश में पैदास हुए हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम सब मनुष्यों में मानव से महामानव बनने की शक्ति सामथ्र्य है। हाँ बीज को उपजाऊ भूमि में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उचित खाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकाश व सुरक्षित वातावरण देना पड़ता है। उसकी निरन्तर देखभाल करनी पड़ती है तो वह बीज एक दिन पूरा विकसित हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फल-फूलों से सजा हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक बहुत सुन्दर विराट रूप ले लेता है और अपने फल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औषधीय गुणों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आक्सीजन व अन्त में लकड़ी आदि के रूप में संसार की सेवा व सबको सुख पहुंचाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही हमें भी अपने जीवन में अपने श्रेष्ठ प्रारब्ध को आधार बनाकर श्रेष्ठ पुरुषार्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रेष्ठ वातावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रेष्ठ प्रशिक्षण व श्रेष्ठ प्रशिक्षकों- इन पाँच साधनों से अपना सर्वांगीण विकास करके खुद सुखी रहते हुए सबको सुख पहुंचाना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबकी सेवा करनी है। यद्यपि गुरुकुलम् या आचार्यकुलम् जैसे श्रेष्ठ शिक्षा संस्थानों में इन उपरोक्त पांच साधनों की बहुत अधिक अनुकूलता रहती है फिर भी देश के करोड़ों विद्यार्थियों का पतंजलि के शिक्षा संस्थनों में शिक्षा पाना संभव नहीं है। वैसे भगवान् की दिव्य प्रेरणा से  हमारा यह भी ध्येय है कि हम एक दिन भारत की समूची शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाना चाहते हैं और सभी बच्चों को उनके श्रेष्ठ प्रारब्ध के आधार का अनुभव कराते हुए उनके पुरुषार्थ को पूरा जगाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी सभी प्रकार की क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिभा एवं कुशलताओं को पूर्ण रूप से विकसित होने का अवसर व दिव्यताओं से भरा एक श्रेष्ठतम सुन्दर वातावरण उपलब्ध करना चाहते हैं। ज्ञान-विज्ञान युक्त प्राचीन व आधुनिकतम शिक्षण-प्रशिक्षण तथा ऐसे श्रेष्ठ प्रशिक्षक उपलब्ध हों जो विभिन्न विद्याओं में पूर्ण निष्णात होने के साथ-साथ एक दिव्यतायुक्तआचरण करते हों। आंशिक तौर पर तो हम ऐसा प्रयास हरिद्वार तथा धीरे-धीरे देश भर में करेंगे परन्तु जब तक यह प्रक्रिया पूरे देश में हम लेकर अयें तब तक सभी माता-पिता व राष्ट्र के जिम्मेदार बड़े महापुरुषों को इस दिशा में सबसे अधिक पुरुषार्थ करने की आवश्यकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मनुष्य की महिमा:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सम्पूर्ण सृष्टि भगवान् का दिव्य विधान है। सबका मूलकत्र्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियन्ता व संहर्ता एकमात्र ईश्वर ही है। भगवान् के ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृत्ति एवं विधान व्यवस्था में यद्यपि सब प्रकार की पूर्णता व दिव्यता है। भगवान् की सम्पूर्ण रचना ही अपने आप में रहस्यपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्थक व महान् है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु समस्त रचनाओं में मनुष्य भगवान् की सर्वश्रेष्ठ रचना है क्योंकि भगवान् द्वारा रची गई इस दिव्य सृष्टि की महान् रचना का प्रत्यक्ष रूप से संचालन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियन्त्रण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संरक्षण एवं निरन्तर विकास का भी दायित्व भगवान् के प्रतिनिधि के तौर पर मनुष्य को ही करना होता है। अत: भगवान् में अपने प्रतिनिधि के रूप में ही मनुष्य का निर्माण किया है। अत: हम शाश्वत सत्ता भगवान् के सच्चे प्रतिनिधि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूर्तरूप होकर ईश्वर की सच्ची सन्तान के रूप में अपना कर्त्तव्य पूर्ण प्रामाणिकता के साथ निभाएं। ईश्वर प्रदत्त दिव्य ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्य संवेदनाओं एवं दिव्य कर्मों से युक्त दिव्य आचरण करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही भगवान् की सच्ची भक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सच्ची आध्यात्मिकता व जीवन मुक्ति है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शाश्वत प्रज्ञा</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:59:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वर्णिम भारत की राह</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">आचार्य बालकृष्ण</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2340/swarnim-bharat-ki-rah"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/105.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">2050 तक एकमात्र भारत ही ऐसा देश दिखता है जो पुन: पूरे विश्व को आध्यात्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक व राजनैतिक दृष्टि से मार्गदर्शन व नेतृत्व दे सकता है।</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत करोड़ों वर्ष पुराना ज्ञान-विज्ञान अपराविद्या-पराविद्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भौतिक व आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से विश्व के सर्वोच्च शिखर पर था। उस राष्ट्र के नागरिकों को अपनी महान् मातृभूमि तथा महान् पूर्वजों की तरह आचरण करना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी हम स्वयं का तथा अपने राष्ट्र सहित समूची मानवता का हित कर पायेंगे।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महादेवी वर्मा का यह कथन कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिना वर्तमान के अतीत गतिहीन है और बिना अतीत के वर्तमान दिशाहीन है</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">आज भी प्रासङ्गिक है। जिस व्यक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज या राष्ट्र को अपने गरिमामय अतीत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामथ्र्य भरे वर्तमान तथा स्वर्णिम भविष्य का बोध नहीं होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह इस विश्व में अपना अस्तित्व ही खो देता है। अतीत के गौरव-गरिमा के साथ वर्तमान के अखण्ड-प्रचण्ड पुरुषार्थ से आशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्साह व उपलब्धियों भरा भविष्य हमें तभी उपलब्ध होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम अतीत की कुप्रथाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूढिय़ों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्धविश्वासों एवं सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक तथा सांस्कृतिक गलत परम्पराओं से मुक्त होंगे। वर्तमान की चुनौतियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संकटों व समस्याओं को आग्रह युक्त होकर समग्रता पूर्वक समझते हुए उनके समग्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थाई एवं न्यायपूर्ण तात्कालिक व दीर्घकालिक समाधान खोजकर उनको साहस पूर्वक क्रियान्वित करने हेतु घनघोर पुरुषार्थ करेंगे। भविष्य के प्रति आशान्वित हुए बिना हम एक भी कदम आगे नहीं बढ़ा सकते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अत: तथाकथित भविष्य वक्ताओं की अनहोनी का डर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खराब किस्मत तथा झूठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाखण्ड भरे मिथ्या उपायों से बचकर अपने कर्म को अपना धर्म मानकर अपनी प्रखर ऊर्जा से हमें आगे बढऩा होगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अतीत:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनियां के कुछ धूर्त व चालाक लोगों ने कुछ सामथ्र्यवान एवं महान् देशों को आगे बढऩे से रोकने के लिए प्रायोजित तरीके से इतिहास व विकास के नाम पर ऐसे झूठ गढ़ें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कि कोई भी दुनियां का गरीब या विकासशील देश इन तथाकथित विकसित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रगतिशील व महान् सभ्य देशों के मुकाबले आगे न बढ़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु उनकी राजनैतिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक व बौद्धिक गुलामी स्वीकार कर ले और वे जैसे उसे चलावें वैसे चले। भारत जैसे महान् राष्ट्र में भी पिछले लगभग २ हजार वर्षों से कुछ देशी व कुछ विदेशी लोगों के द्वारा हमारे गौरवपूर्ण इतिहास के स्थान पर हमें जंगली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांपों व भूत प्रेतों की झूठी कहानियों में विश्वास रखने वाले असभ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल-बुद्धि व कौशलहीन बताया तथा विनाशकारी एकाङ्गी विकास को महिमामण्डित करके मनुष्य के आध्यात्मिक विकास को भुलाकर केवल भौतिक विकास को ही सर्वस्व बताकर मानवता व भगवान् की सुन्दर सृष्टि के साथ क्रूर अत्याचार किया है।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/105.jpg" alt="10"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अत: भारत सहित दुनियां के गरीब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकासशील तथा कमजोर समझे जाने वाले सभी राष्ट्रों को पूरे स्वाभिमान के साथ अपने-अपने राष्ट्रों के सच्चे इतिहास व सर्वांगीण विकास के दर्शन के साथ आगे बढऩे की आवश्यकता है। भारत करोड़ों वर्ष पुराना ज्ञान-विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराविद्या-पराविद्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भौतिक व आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से विश्व के सर्वोच्च शिखर पर था। उस राष्ट्र के नागरिकों को अपनी महान् मातृभूमि तथा महान् पूर्वजों की तरह आचरण करना होगा तभी हम स्वयं का तथा अपने राष्ट्र सहित समूची मानवता का हित कर पायेंगे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अपने देश में अपार भू-संपदा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बौद्धिक सम्पदा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपार मानव संसाधन एवं असीम कुशलताओं व संभावनाओं से भरा एक दिव्य वातावरण है। वहीं आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैर-बराबरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असमानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वार्थपरता तथा अभावों व अशिक्षा के साथ-साथ अनियन्त्रित आबादी का बोझ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कालाधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रष्टाचार तथा अधिकांश क्षेत्रों में एक अन्यायपूर्ण भ्रष्ट व्यवस्था हमारे देश के लिए बहुत बड़ा संकट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समस्या एवं चुनौति भी है तथा इन सभी विकट संकटों से बाहर निकलने का आज भी हममें पूरा सामथ्र्य है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान में पूरे विश्व का जब हम निष्पक्ष मूल्याङ्कन करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो २०५० तक एकमात्र भारत ही ऐसा देश दिखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पुन: पूरे विश्व को आध्यात्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक व राजनैतिक दृष्टि से मार्गदर्शन व नेतृत्व दे सकता है। सवा सौ करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले इस महान् राष्ट्र के महान् नागरिकों को जहाँ भी वे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेत-खलियान से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसंधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा आदि अपने-अपने क्षेत्रों में पूरे स्वाभिमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शौर्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पराक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहस व प्रखर पुरुषार्थ के साथ सारी कुण्ठाओं एवं निराशाओं से बाहर निकलकर निरन्तर चरैवेति-चरैवेति के संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहना है। जैसे एक बीज में वृक्ष होने का सामथ्र्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही हम सब मनुष्यों में भगवान् ने बीज रूप में समस्त शक्तियां व दिव्यताएं दी हुई हैं। हमें प्रथम अपनी सामथ्र्य को जगाना व बढ़ाना है तथा फिर बिना किसी स्वार्थपरता व संकीर्णता के नि:स्वार्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्काम भाव से अनासक्त कर्मयोग के मार्ग पर चलते हुए निरन्तर विकास का इतिहास घडऩा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी भूमिका:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे मैंने तथा श्रद्धेय स्वामी जी ने सभी प्रकार की कुण्ठाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुप्रथाओं व रूढि़वादी परम्पराओं से ऊपर उठकर या बाहर निकलकर योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संन्यास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी एवं वैदिक सत्य सनातन संस्कृति को वैज्ञानिकता व समग्रता पूर्वक समझकर अपने पूर्ण पुरुषार्थ से आध्यात्मिकता व आधुनिकता को साथ लेकर सेवा व साधना करते हुए अपनी एक नि:स्वार्थ भूमिका का निश्चय करके उसमें अपने आपको पूरा  समाहित किया हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही जिस दिन भारत सहित सभी देशों के नागरिक अपने-अपने महान् देशों के लिए अपनी-अपनी एक छोटी या बड़ी भूमिका अपने-अपने सामथ्र्य के अनुसार तय कर लेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस दिन हमारा जीवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र एवं यह संसार बहुत सुन्दर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुखमय एवं दिव्य बन जायेगा। यही वेद का भी संदेश है।</span></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(230,126,35);" xml:lang="hi">इन्द्रंवर्धन्तोऽप्तुर:कृण्वन्तोविश्वमार्यम्।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(230,126,35);" xml:lang="hi">अपघ्नन्तोऽराव्य: ।। वेद।।</span></strong></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2340/swarnim-bharat-ki-rah</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:57:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति भवन, दिल्ली में आयोजित पतंजलि योगपीठ का दो दिवसीय योग शिविर</title>
                                    <description><![CDATA[<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि का योग-आयुर्वेद आंदोलन देश का गौरव : डॉ. प्रणव मुखर्जी</span></strong></span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी:</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति भवन परिसर के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सर्वोदय विद्यालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में 18 व 19 फरवरी को पतंजलि योगपीठ का ऐतिहासिक योग शिविर सम्पन्न हुआ। राष्ट्रपति भवन परिसर में निवास करने वाले अधिकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी एवं अन्य भाई-बहिनों के साथ-साथ अन्य हजारों बच्चों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं एवं युवाओं ने पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य बलाकृष्ण जी महाराज के मार्गदर्शन में भारत को परम वैभवशाली बनाने के संकल्प के साथ योगाभ्यास किया। पूज्य योगऋषि स्वामी जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य जी महाराज के साथ</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2341/rashtrapati-bhawan-dilli-me-ayojit-patanjali-yogpeeth-ka-do-divasiya-yog-shivir"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/028.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि का योग-आयुर्वेद आंदोलन देश का गौरव : डॉ. प्रणव मुखर्जी</span></strong></span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी:</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति भवन परिसर के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सर्वोदय विद्यालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में 18 व 19 फरवरी को पतंजलि योगपीठ का ऐतिहासिक योग शिविर सम्पन्न हुआ। राष्ट्रपति भवन परिसर में निवास करने वाले अधिकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी एवं अन्य भाई-बहिनों के साथ-साथ अन्य हजारों बच्चों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं एवं युवाओं ने पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य बलाकृष्ण जी महाराज के मार्गदर्शन में भारत को परम वैभवशाली बनाने के संकल्प के साथ योगाभ्यास किया। पूज्य योगऋषि स्वामी जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य जी महाराज के साथ महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने पतंजलि के इस योग शिविर का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारम्भ किया। अनेक गणमान्य सहित उपस्थित विशाल जनसमूह को राष्ट्रपति महोदय ने शुभकामनायें देते हुए पतंजलि योगपीठ के योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद आंदोलन को देश के लिए गौरव बताते हुए कहा कि योगऋषि स्वामी रामदेव जी एवं श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी देशवासियों को स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रसन्नता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शांति एवं भारतीय संस्कृति से जोड़कर सशक्त बनाये रखने में अहर्निश योगदान दे रहे हैं।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/235.jpg" alt="23"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/496.jpg" alt="49"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिविर के दौरान राष्ट्रपति भवन में पतंजलि की ओर से स्वदेशी वाहन पर लगाई गयी स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शिनी का राष्ट्रपति महोदय ने आचार्य श्री के साथ अवलोकन किया और पतंजलि के आयुर्वेदिक स्वदेशी उत्पादों एवं औषधियों की जानकारी ली। पूज्यस्वामी जी व आचार्य श्री को वहां के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति भवन एवं उसके सुरम्य बगीचे का अवलोकन कराया। पतंजलि के योगशिविर से जहां असंख्य लोगों  ने योगाभ्यास का लाभ लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं सम्पूर्ण राष्ट्रपति परिसर योगमय हो उठा।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/247.jpg" alt="24"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/247.jpg" alt="24"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/028.jpg" alt="02"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/058.jpg" alt="05"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/235.jpg" alt="23"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/783.jpg" alt="78"></img></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्था समाचार</category>
                                            <category>योग एवं आयुर्वेद</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:54:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वृक्कवस्ति, अस्थिसंधि व त्वचा रोग का आयुर्वेदिक उपचारक-पलाश</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य बालकृष्ण</span></h5>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2342/rkkavasti--asthisandhi-va-tvacha-rog-ka-aayurvedik-upachaarak-palaash"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/476.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्राचीनकाल से ही एक दिव्य औषधि रूप में काम आता रहा है। वैदिक काल में पलाश का प्रमुख उपयोग यज्ञकर्मार्थ समिधा के लिए किया जाता था। कौशिकसूत्र में मेधाजनन कर्मार्थ एवं पलाश कल्क का प्रयोग जलोदर के लिए वर्णित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि बृहत्त्रयी में पलाश का प्रमेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लीहोदर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदारिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपतानक अर्श</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अतिसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्तपित्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुष्ठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्तगुल्म में प्रयोग मिलता है। चरक ने वात श्लेष्महर गण तथा सुश्रुत ने रोध्रादि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुष्कादि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अम्बष्ठादि व न्यग्रोधादि गणों में इसका प्रयोग वर्णित किया है। यह भारत के मैदानी क्षेत्रों तथा गुजरात आदि के पर्णपाती वनों में लगभग 1200 मी. तक की ऊँचाई पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उष्णकटिबंधीय हिमालय में 800 मी. तक की ऊँचाई तक एवं दक्षिण की ओर श्रीलंका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दक्षिण पूर्वी एशिया एवं मलेशिया में पाया जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>वैज्ञानिक नाम :</strong>  B</span>utea monosperma (lam.) Taub<span lang="hi" xml:lang="hi">. (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा) </span>Synb utea frondosa Roxb.<span lang="hi" xml:lang="hi"> कुलनाम : </span>Fabaceae <span lang="hi" xml:lang="hi">(फेबेसी)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">अंग्रेजी नाम : </span>The Forest flame <span lang="hi" xml:lang="hi">(द फॉरेस्ट फ्लेम)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृत :  पलाश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंशुक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्तपुष्पक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षारश्रेष्ठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वाततोय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रह्मवृक्ष</span>;  <span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दी : ढाक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेसु</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">उर्दू : पलाश पापरा (</span>Palas-papra<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">उडिय़ा : पोलासो (</span>Polaso<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कन्नड़ : मोदुगु (</span>modugu<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुथुगा (</span>muthuga<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजराती : खाखडा (</span>Khakda<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">तमिल : पलासु (</span>Palasu<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलुगु : मोडूगा (</span>moduga<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बंगाली : पलाश गाछ (</span>Palash gach<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>;  <span lang="hi" xml:lang="hi">नेपाली : पलासी (</span>Palasi<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मराठी : पलस (</span>Palas<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मलयालम : किमशुकम (</span>Kimshukam<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पलासी (</span>Palasi<span lang="hi" xml:lang="hi">)। अंग्रेजी : बास्टर्ड  टीक (B</span>astard teak<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बंगाल कीनो (B</span>engal kino<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूटिया गम (</span>butea gum<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">फारसी : पलाह (</span>Palah<span lang="hi" xml:lang="hi">).</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प</span><span lang="hi" xml:lang="hi">लाश टेढ़ा-मेढ़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">12-15 मी ऊँचा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यम आकार का पर्णपाती वृक्ष होता है। इसके काण्ड धूसर अथवा भूरे वर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुलायम रोमश होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काण्डत्वक् खुरदरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीलाभ-धूसर अथवा हल्के भूरे वर्ण की होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवीन काण्ड-त्वक् रोमश अथवा मृदु रोमश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गोंदयुक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असमान्य शल्कों में निकलती हुई होती है। इसके पत्र बृहत्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एकांतर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्रि-पत्रकयुक्त (बीच का पत्र बड़ा तथा किनारे के दोनों पत्र छोटे होते हैं)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरे रंग के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खुरदरे तथा स्पष्ट शिरायुक्त होते हैं। भारतवर्ष में इसके पत्रों का प्रयोग दोना तथा पत्तल बनाने के लिए किया जाता है। इसके पुष्प सुंदर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बृहत्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चमकीले नारंगी-रक्त वर्ण के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कदाचित् पीत वर्ण के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कठोर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">15 सेमी लम्बे असीमाक्ष में पर्णरहित शाखाओं पर लगे होते हैं। इसकी फली बड़ी तथा अग्र की तरफ एक बीज युक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूरे वर्ण की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चपटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">12.5-20 सेमी लम्बी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2.5-5 सेमी चौड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पष्ट वृंतयुक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जालिकास्वरूपी सिरायुक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुलायम तथा घनरोमश होती है। प्रत्येक फली में एक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्काकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">3.3-3.8 सेमी लम्बा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2.2-2.5 सेमी चौड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्ताभ-भूरे वर्ण का तथा चमकीला व चपटा बीज होता है। ग्रीष्म ऋतु में इसकी त्वचा को क्षत करने पर एक रस निकलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो रक्तवर्णी होता है तथा सूखने पर कृष्णाभ-रक्त वर्ण युक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भंगुर तथा चमकदार हो जाता है। इसका पुष्पकाल फरवरी से मई तक तथा फलकाल मई से जून तक होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रासायनिक संघटन:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके बीज में </span>α-<span lang="hi" xml:lang="hi">एमायरिन</span>, β-<span lang="hi" xml:lang="hi">सिटोस्टेरॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्लुकोसाईड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुक्रोस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवाष्पशील तैल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पॉमिटिक अम्ल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टेयरिक अम्ल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिगनोसेरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओलिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिनोलिक अम्ल तथा पेलासोजिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोटीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फाईबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैल्शियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फॉस्फोरस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्युट्रिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आईसोब्युट्रिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कारियोप्सिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आईसोकोरियोप्सिन एवं सलफ्युरेन पाया जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पौधे में कौमेरानोन ग्लुकोसाईड़-पेलासिट्रिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोनोस्र्पमोसाईड आइसोमोनोस्पर्मोसाईड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्युट्रिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आइसोब्यूट्रिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोरियाप्सिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आइसोकोरियोप्सिन तथा सल्फ्युरिन पाया जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पलाश के पुष्प में ब्यूटीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्युटेन एवं ब्युटिन पाया जाता है। त्वक् एवं गोंद में किनोटेनिक एवं गेलिक अम्ल मिलता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/803.jpg" alt="80"></img></span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">औषधीय प्रयोग:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नेत्र रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश की त</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ाजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ जड़ों का अर्क निकालकर एक-एक बूंद आंखों में डालते रहने से फूली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोतियाबिंद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रतौंधी इत्यादि सब प्रकार के नेत्र रोग नष्ट होते हैं।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">नासा रोग:</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नकसीर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">-</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रात्रि</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">भर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> 100 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मिली</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">शीतल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">भीगे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हुए</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> 5-7 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पुष्पों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">को</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">छानकर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मि</span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री मिलाकर सुबह पीने से नकसीर बंद हो जाती है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कण्ठ रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">  गलगंड-पलाश की जड़ को घिसकर कान के नीचे लेप करने से गलगंड में लाभ मिलता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उदर रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>मंदाग्नि-</strong>पलाश की ताजी मूल का अर्क निकालकर अर्क की 4-5 बूंदें पान के पत्ते में रखकर खाने से भूख बढ़ती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अफारा-</strong>पलाश की छाल और शुंठी का काढ़ा बनाकर 30-40 मिली मात्रा में दिन में दो बार पिलाने से अफारा तथा उदरशूल का शमन होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश के पत्तों का क्वाथ बनाकर 30-40 मिली मात्रा में पिलाने से अफारा और उदरशूल दूर होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">उदरकृमि-एक चम्मच पलाश बीज चूर्ण को दिन में दो बार खाने से पेट के सब कीड़े मरकर बाहर आ जाते हैं।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश के बीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निसोत्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किरमानी अजवायन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कबीला तथा वायविडंग को समभाग मिलाकर 3 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ देने से सब प्रकार के कृमि नष्ट हो जाते हैं।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमेह-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश की कोंपलों को छाया में सुखाकर कूट-छानकर गुड़ मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">9 ग्राम की मात्रा में प्रात:-काल सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश की जड़ों का रस निकाल कर उस रस में 3 दिन तक गेहूं के दानों को भिगो दें। तत्पश्चात् इन दानों को पीसकर हलवा बनाकर खाने से प्रमेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शीघ्रपतन और कामशक्ति की कमजोरी दूर होती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">1 चम्मच पलाश बीज क्वाथ में 1 चम्मच बकरी का दूध मिलाकर खाना खाने के पश्चात् दिन में तीन बार सेवन करने से अतिसार में लाभ होता है। पथ्य में बकरी का उबला हुआ शीतल दुग्ध और चावल ही लेने चाहिए।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">गुदा रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>रक्तार्श-</strong>1-2 ग्राम पलाश के पञ्चाङ्ग की राख को गुनगुने घी के साथ पिलाने से खूनी बवासीर में लाभ होता है। इसका कुछ दिन लगातार सेवन करने से मस्से सूख जाते हैं।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अर्श-</strong>पलाश के पत्रों में घी की छौंक लगाकर दही की मलाई के साथ सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्क वस्ति रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>मूत्रकृच्छ्र-</strong>पलाश के फूलों को उबाल व पीसकर सुखोष्ण करें। इसे पेडू पर बांधने से मूत्रकृच्छ्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शोथ का शमन होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">20 ग्राम पलाश के पुष्पों को रात भर 200 मिली ठंडे पानी में भिगोकर सुबह थोड़ी मिश्री मिलाकर पिलाने से गुर्दे की वेदना तथा मूत्र के साथ रक्त का आना बंद हो जाता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश की सूखी हुई कोपलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ढाक का गोंद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ढाक की छाल और ढाक के फूलों को मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में समभाग मिश्री मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2 से 4 ग्राम चूर्ण को प्रतिदिन दूध के साथ सायंकाल लेने से मूत्रकृच्छ्र (मूत्र त्याग में कठिनता) में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रजननसंस्थान रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अंडकोष शोथ-</strong>पलाश के फूलों की पुल्टिस बनाकर नाभि के नीचे बांधने से मूत्राशय के रोग मिटते हैं और अंडकोष शोथ का शमन होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश की छाल को पीस लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसे 4 ग्राम की मात्रा में जल के साथ दिन में दो बार लेने से अंडवृद्धि में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्थिसंधि रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सन्धिवात-पलाश के बीजों को महीन पीसकर मधु के साथ मिलाकर वेदना स्थान पर लेप करने से संधिवात में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">बंदगांठ-ढाक के पत्तों की पुल्टिस बांधने से बंदगांठ में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">3 से 5 ग्राम पलाश मूल छाल चूर्ण को दूध के साथ पीने से बंदगांठ में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">पित्तशोथ-पलाश की गोंद को पानी में गलाकर नियमित लेप करने से कष्ट साध्य पित्तशोथ में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">कटिशूल-पलाश पुष्प का क्वाथ बनाकर कमर में बफारा देने से तथा क्वाथ का परिषेचन करने से कटिशूल का शमन होता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">शाखा रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">श्लीपद-100 मिली मूल स्वरस में समभाग सफेद सरसों का तेल मिलाकर दो चम्मच सुबह-शाम पीने से श्लीपद रोग में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश एवं कुसुम्भ के फूल तथा शैवाल को मिलाकर क्वाथ बनाकर शीतल होने पर 10-20 मिली क्वाथ में मिश्री मिलाकर पिलाने से पित्त प्रमेह में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">त्वचा रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>घाव-</strong>घावों पर पलाश के गोंद का चूर्ण बुरकने से लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>कुष्ठ-</strong>पलाश बीज तैल को लगाने में कुष्ठ में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>दाद-</strong>ढाक के बीजों को नींबू के रस के साथ पीसकर लगाने से दाद और खुजली में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>नारू</strong>-पलाश के बीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुचला के बीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रस कपूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सादा कपूर और गुग्गुलु इन सब औषधियों को समभाग लेकर बारीक पीसकर पानी के साथ खरल कर लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर एक पीपल के पत्ते पर उनका लेप करके उस पीपल के पत्ते को नारू के फोले के ऊपर बांध देना चाहिए। इस पट्टी को तीन दिन तक बांधने से लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>त्वग्रोग-</strong>पलाश वृक्ष के मूल से प्राप्त रस (3 लीटर) में तुषोदक तथा 12-12 ग्राम मन:शिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुटज त्वक्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कूठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वचा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चक्रमर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करमज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूर्ज ग्रन्थि तथा कनेरमूल की त्वचा मिलाकर व पकाकर गाढ़ा करके लेप करने से त्वक रोगों का शमन होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कुष्ठ</span><span lang="hi" xml:lang="hi">-</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दूध</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">उबाले</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> हुए पलाश बीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गंधक तथा चित्रक को शुष्क कर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूक्ष्म चूर्ण बनाकर इसे 2 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1 मास तक जल के साथ लेने से मण्डल कुष्ठ में अतिशय लाभ होता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मानस रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">मिर्गी-पलाश की </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जड़ों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">को</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पीसकर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> 4-5 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बूंद</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">नाक</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">टपकाने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मिर्गी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">का</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">दौरा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">बंद</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हो</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जाता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वशरीर रोग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>शीत ज्वर-</strong>ज्वर में यदि ठंडी का आभास हो तो पलाश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुलसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्जक तथा सहिजन के पत्रों के कल्क का लेप करना चाहिए।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>रक्तपित्त-</strong>चार गुने पलाश स्वरस से पकाए हुए घृत को 15 से 25 ग्राम की मात्रा में मधु के साथ सेवन करने से रक्तपित्त में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश पत्र वृंतों के स्वरस एवं कल्क से विधिवत् घृतपाक कर मात्रानुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधु मिलाकर सेवन करने से रक्तपित्त में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>शोथ-</strong>शीतल जल में पिसे हुए पलाश बीज कल्क का लेप करने से समुद्रफेन घर्षणजन्य शोथ का शमन होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सूजन-इसके फूलों की पुल्टिस बनाकर बांधने से सूजन बिखर जाती है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रसायन वाजीकरण:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>रसायन-</strong>छाया शुष्क 1 चम्मच पञ्चाङ्ग चूर्ण में मधु एवं घृत (मधु एवं घृत विषम मात्रा में) मिलाकर प्रात: और सायंकाल सेवन करने से मनुष्य निरोगी और दीर्घायु होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>वाजीकरण-</strong>5-6 बूंद पलाश मूल अर्क को दिन में दो बार सेवन करने से अनैच्छिक वीर्यस्राव रुकता है और कामशक्ति प्रबल होती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>रसायन-</strong>एक मास तक समभाग पलाश बीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विडङ्ग बीज तथा आँवला के चूर्ण में 2-4 ग्राम के अनुपात में घी तथा मधु मिलाकर सेवन करने से रसायन गुणों की प्राप्ति होती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">समभाग घी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आँवला चूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शर्करा तथा पलाश बीज चूर्ण (2-4 ग्राम) को रात को सोने से पहले खाने से बल एवं बुद्धि की वृद्धि होती है। वस्तुत: पलाश स्वास्थ्य वर्धक बनौषधि है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही इसके पुष्प प्रदूषण रहित रंग बनाने में भी प्रयुक्त होते हैं। हम सब मिलकर इसी प्रकार भारत के कोने-कोने में फैली विविध बनौषधियों को महत्व दिलायें और राष्ट्र को स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समर्थ व प्रदूषण मुक्त बनायें। </span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>पोषक उत्पाद</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:53:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंडियन योग एसोसिएशन की विशेष बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविश्ंकर जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेकानंद योगपीठ बंगलौर के प्रमुख डॉ नागेन्द्र जी एवं पतंजलि योगपीठ के परमाध्यक्ष योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज सहित अनेक गणमान्य के बीच सम्पन्न एक विशेष वैठक में लिया गया यह निर्णय।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने भारतीय योग को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई। परम पूज्य स्वामी जी महाराज आज योग के एक साक्षात मूर्तरूप व योग के पर्याय पुरुष के रूप में विश्वविख्यात हैं। 5 फरवरी 2017 को गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में इण्डियन योग</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2343/indian-yog-association-ki-vishesh-baithak"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/427.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविश्ंकर जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेकानंद योगपीठ बंगलौर के प्रमुख डॉ नागेन्द्र जी एवं पतंजलि योगपीठ के परमाध्यक्ष योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज सहित अनेक गणमान्य के बीच सम्पन्न एक विशेष वैठक में लिया गया यह निर्णय।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने भारतीय योग को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई। परम पूज्य स्वामी जी महाराज आज योग के एक साक्षात मूर्तरूप व योग के पर्याय पुरुष के रूप में विश्वविख्यात हैं। 5 फरवरी 2017 को गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में इण्डियन योग एसोसिएशन गवर्निंग काउंसिल में डॉ प्रणव पण्ड्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्री श्री रविशंकर जी एवं डॉ नागेन्द्र जी व अन्य सभी सम्माननीय सदस्यों ने श्रद्धेय स्वामी जी महाराज को इंडियन योग एसोसिएशन गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष पद को सुशोभित करने का प्रस्ताव रखा। सभी अनुमोदन कर्ताओं के आग्रह को विनम्रता पूर्वक स्वीकार करते हुए पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज सबके सहयोग से इस योगविद्या को विश्व भर में प्रचारित करने व इसे और अधिक गौरव दिलाने का संकल्प व्यक्त किया। साथ ही योगमय आध्यात्मिक विश्व के निर्माण हेतु राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी ने सामूहिक रूप से इस प्राचीन भारतीय ऋषियों द्वारा अनुसंधित योग विद्या के विकास और विस्तार का  मिलकर संकल्प व्यक्त किया।</span></h5>
<p><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/438.jpg" alt="43"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह पुनर्गठित इंडियन योग एसोसिएशन योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिकाधिक प्रोत्साहित करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की यौगिक ऊर्जा को नयी प्रभावशाली शक्ति देने व इस ऋषि अनुसंधित विद्या के माध्यम से भारत को वैश्विक शक्ति बनाने पर अभियान स्तर पर कार्य करेगा। इस निमित्त योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज को एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया। इस बैठक में देशभर  के अनेक प्रतिष्ठित योग संस्थाओं से जुड़ी प्रमुख हस्थियां भी शामिल थीं। इस अवसर पर 6 मार्च से 10 मार्च तक दिल्ली में बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के आयोजन का निर्णय लिया गया तथा इससे संबंधित अन्य एजेन्डों पर चर्चा हुई।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/449.jpg" alt="44"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> जिसमें योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने योग के विकास और विस्तार के लिए देश के भीतर विभिन्न प्रांतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के योग रिसर्च सेंटर खोलने का प्रस्ताव रखा तथा योग को उसके मूलरुप में लाने के साथ-साथ इस विधा को आम आदमी की रोजमर्रा की आदत में शुमार करने के लिए स्कूल कॉलेज व विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में इसे सम्मिलित कराने पर बल दिया।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/458.jpg" alt="45"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक के बाद शांतिकुंज मेें आयोजित तीनों प्रमुख संतों की संयुक्त पत्रकार वार्ता में योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीश्री रविशंकर और डॉ. प्रणव पंड्या ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि इंडियन योग एसोसिएशन का गठन वर्ष 2008 में किया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे भविष्य को ध्यान में रखकर नया स्वरुप देने पर निर्णय हुआ था। बैठक में इसकी गवर्निंग काउंसिल गठित करने पर भी चर्चा हुई। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बताया गया कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित होने के बाद विश्व स्तर पर भारतीय योग और योग प्रशिक्षकों की बढ़ती मांग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग के प्रचार-प्रसार एवं इसके व्यवस्थित प्रबंधन और विकास सहित कुल नौ बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/466.jpg" alt="46"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योगऋषि पूज्य स्वामी जी ने बताया कि योग एक जीवन पद्धति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो व्यक्ति को रोग मुक्त जीवन जीने का अवसर तो प्रदान करती ही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि  व्यक्ति को संस्कारित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयमित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धैर्य व सामर्थ्यवान भी बनाती है। इसके नियमित अभ्यास से व्यक्तित्व ऊर्जावान बनेगा तथा राष्ट्रीय समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवसर पर शांतिकुंज प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या और श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि दुनियां भर को भारतीय योग की पहचान कराने में स्वामी रामदेव जी का अहम योगदान रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासतौर पर योग दिवस घोषित कराने में स्वामी जी की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। अब इंडियन योग एसोसिएशन के पुनर्जीवन और पुनर्गठन के साथ-साथ उसके नियमित और व्यवस्थित संचालन के द्वारा सभी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख व्यक्तित्व मिलकर योग के व्यापक प्रचार-प्रसार करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग के प्रचलित विविध स्वरुपों को प्रामाणिकता प्रदान करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विविध स्तर पर योग  से संबंधित डिग्रियों का निर्धारण करने पर कार्य करेंगे। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी तय किया गया कि इस एसोसिएशन के माध्यम से भारतीय योग को उसके मूल रूप में लाने के साथ-साथ आम आदमी की रोजमर्रा की आदत में शुमार करने के लिए इसे स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कालेज और विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी शामिल कराया जा सकेगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">2008 से सुप्ता अवस्था में रही इंडियन योग एसोसिएशन को जाग्रत करेगी समिति</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञातव्य कि इंडियन योग एसोसिएशन का गठन वर्ष 2008 में हो चुका था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके सचिव बस्वा रेड्डी को नियुक्त किया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर यह एसोसिएशन एक तरह से सुप्त अवस्था में थी। 07 फरवरी को भारतीय योग के वैश्विक विस्तार के लिए प्रसिद्ध योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्ट आफ लिविंग के प्रमुख श्रीश्री रविशंकर और गायत्री  तीर्थ प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने इसे पूरा करने का बीड़ा उठाया। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एसोसिएशन के अध्यक्ष योगऋषि बाबा रामदेव जी महाराज को बनाया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि बस्वा रेड्डी उसके सचिव होंगे। इसके अलावा डॉ. प्रणव पंड्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीश्री रविशंकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल्यधाम गुजरात के श्री ओपी तिवारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेकानंद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगपीठ बंगलौर के प्रमुख नागेन्द्र जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार के डॉ ईश्वर भारद्वाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेन्नई के महादेवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहारनपुर के भारत भूषण को इसका सदस्य मनोनीत किया गया। एसोसिएशन का आगामी सर्वप्रथम उद्धेश्य 6 से 10 मार्च तक दिल्ली में वृहद पैमाने पर आयोजित किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव को सफल बनाने का है। तत्पश्चात 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और फिर देश के विभिन्न प्रांतों में योग के विकास के लिए समितियों का गठन कर कार्ययोजना को आगे बढ़ाया जाना है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्था समाचार</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2343/indian-yog-association-ki-vishesh-baithak</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:51:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करें मार्निंग वाक इन 22 सावधानियों के साथ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi"><span> </span>डॉ. नागेन्द्र कुमार </span>'</strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">नीरज</span>’, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">निदेशक-पतंजलि योगग्राम</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2344/kare-morning-walk-in-22-savdhaniyon-ke-sath"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/626.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिकतम</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">शोध के अनुसार टहलने से मस्तिष्क तथा शरीर के अन्य हिस्सों में कुछ ऐसे जैव रसायन पैदा होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शरीर के दु:ख-दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोग एवं बेचैनी से राहत दिलाते हैं। टहलने से सारे शरीर में रक्त संचार तीव्र होने से समस्त अवयवों को भरपूर पोषण मिलता है। ऑक्सीजन धारण करने तथा कार्बन-डाई-ऑक्साइड निष्कासन तथा चयापचय की अन्य क्रियाएँ उन्नत होती हैं। पाचन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्वसन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्सर्जन तथा स्नायु संस्थान सबल एवं स्वस्थ होते हैं। वास्तव में टहलने से मस्तिष्क से जादुई न्यूरोट्रान्समोटर्स एंडोर्फिन तथा फिनाइल इथाइन एमिन निकलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने शामक एवं मादक प्रभाव से तन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन एवं आत्मा को आह्लाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उल्लास एवं आनन्द के अवर्णनीय एहसास से भर देता है।  पर जिस दिन व्यक्ति नहीं टहलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस दिन उसे अधूरापन महसूस होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खा</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ली पेट ही टहलना ज्यादा फायदेमंद है। पेट भरा होने पर टहलना शरीर क्रिया विज्ञान की दृष्टि से उत्तम नहीं है। भोजन के बाद शरीर की अधिकांश शक्ति खून तथा ऑक्सीजन भोजन को पचाने के लिये पेट की तरफ दौडऩे लगते हैं। उस समय हृदय रोगियों में हृदय की धमनियां बन्द होने से हृदय को भरपूर पोषण तथा ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। साथ ही भोजन के बाद टहलने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी प्रकार का शारीरिक या मानसिक श्रम करने से अतिरिक्तऊर्जा तथा ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में दिल निर्णय नहीं कर पाता कि पचाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टहलने या अन्य श्रम अथवा स्वयं के लिय किसे रक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑक्सीजन और ऊर्जा की आपूर्ति करें। फलत: वह संशयग्रस्त हो जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें दिल का दौरा पड़ चुका है व मधुमेह की बीमारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिये टहलना एक बेहतरीन ईलाज है। टहलने से रक्त में हृदय को पोषण देने वाला मित्र कोलेस्ट्रॉल हाइडेन्सिटी लाइपोप्रोटीन (एच.डी.एल.) तथा एपोलियो प्रोटीन ए-1 बढ़ जाता है तथा हृदय एवं रक्त वाहिनियों को क्षतिग्रस्त करने वाले शत्रु कोलेस्ट्रॉल लोडेंसिटी लाइपाप्रोटीन (एल.डी.एल.) की मात्रा कम हो जाती है। हृदय की क्षमता बढ़ जाती है। रुकी हुई कोरोनरी धमनियों से हृदय को पोषण देने के लिये नई कोंपलों की तरह नई रक्त धमनियाँ तक फूटने लगती हैं तथा बन्द धमनियाँ धीरे-धीरे खुलने लगती हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तव में खुले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शान्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदूषण रहित वायु में सैर करना चुस्ती एवं तंदुरुस्ती दोनों के लिये अत्यन्त लाभदायक है। टहलने से शरीर की जैव रासायनिक प्रक्रियाएँ प्रभावित होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फेफड़े की जैव क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्त का शुद्धीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर की चयापचय क्रिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोग प्रतिरोधक क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहन शक्ति तथा विष-निष्कासन की क्षमता बढ़ती है। टहलने का उत्तम लाभ पाने के लिए टहलने के समय निम्र बिन्दुओं पर अवश्य चिन्तन करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैर का लाभ कई गुना बढ़ जायेगा-</span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">चुस्ती तथा तेजी से सैर करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोगियों जैसी सुस्त चाल से टहलने पर सैर से पूरा लाभ नहीं मिलता।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">निश्चित समय पर निश्चित गति से टहलें</span>, 10<span lang="hi" xml:lang="hi"> से 15 मिनट प्रति किलोमीटर की आदत डालें। यह गति निरन्तर रखे। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">अशक्तमरीज गति सीमा को धीरे-धीरे बढ़ायें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस गति की निरन्तरता बनायें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">गति बढ़ाने के लिये सैर करते समय मौन रखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बातचीत न करें। साथ ही अपनी शारीरिक एवं मानसिक गतिविधियों व विचारों का निरीक्षण एवं अवलोकन करते हुए टहलें। कौन टहल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आप या आपका शरीर</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रश्न का उत्तर अन्दर से आने दें। तब आप महसूस करेंगे कि शरीर का अंग-प्रत्यंग अन्तरतम चेतना चला रही है। अपूर्व साक्षीभाव का उदय होगा। सैर की यह गति सम्यक् एवं स्वास्थ्यप्रद होगी। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर के समय बोलने से ऊर्जा व्यर्थ में नष्ट होती है। सैर करने वाला स्वास्थ्य साधक जल्दी थक जाता है। जबकि मौन के साथ टहलने से आपका स्वास्थ्य ऊर्जा एवं स्वास्थ्य के स्रोत से जुड़ा रहता है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">गति बढ़ाने के लिये कोहनियों को 90 डिग्री कोण से मोड़कर कदम के साथ आगे-पीछे स्विंग करते हुए टहलें। प्रारम्भ मेें अटपटा महसूस होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभ्यस्त हो जाने पर सुखानुभूति होती है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">बाँहों को मोड़कर टहलने से शरीर की बायेमैक्नेक्स रिद्म में टहलने में गतिशीलता पैदा होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैर तथा हाथों के मध्य एक ऐसा संतुलन बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर चुस्ती से आगे फिसलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रवाहित होता चलता है और थकान महसूस नहीं होती।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलते समय साँस का निरीक्षण करें। आते-जाते साँस की संवेदना को महसूस करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि टहलते समय जल्दी-जल्दी साँस लेने से जल्दी थकान महसूस होती है। साँस को लयबद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गहरी तथा नियंत्रित रखें। जितनी देर में श्वास लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके दुगुने समय में श्वास निकालते हुए टहलें।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलते समय कमर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रीढ़ एवं गर्दन सीधी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छाती आगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेहरा किंचित निम्राभिमुख तथा कदम गरिमा युक्त एवं गति तेज रखें। कदम की लम्बाई न तो ज्यादा हो और न कम। पैरों को जोर से जमीन पर पटकते हुए सैर न करे। चाल एक लय-ताल में एवं आरामदेह होनी चाहिये। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलते समय महसूस करें कि नाभि से पैर गतिशील हो रहे हैं। ऊपर की माँसपेशियाँ कदम चाल के साथ गतिशील हैं। सैर के समय पैर की गति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर तथा मन में किसी प्रकार का तनाव न रखें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">आड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तिरछे कूबड़ निकालकर टहलने से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फेफड़े तथा रीढ़ के स्नायुओं पर व्यर्थ का दबाव पड़ता है और तनाव तथा थकान पैदा होती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलते समय थकने पर बीच-बीच में कुछ देर के लिये विश्राम करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर टहलना प्रारम्भ करें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर के समय साँस फूलने लगे व अन्य कोई परेशानी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर पूर्णतया थक गया हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस अवस्था में टहलना बन्द करके पूर्ण विश्राम करें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर का श्रेष्ठतम समय प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त तथा सायंकाल है। नदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्र के किनारे या पहाडिय़ों पर ओजोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑक्सीजन तथा ऋणायनों की मात्रा अधिक होने से शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य में आशातीत लाभ होता है। ब्रह्ममुहूर्त के वातावरण में नव सृजन के नये विचार पल्लवित एवं प्रस्फुटित होते हैं। शरीर की कोशिकाओं का स्वस्थ नव सृजन होता है</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्य जीवनी शक्ति भी जाग्रत होकर रोगों का संहार करती है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रात:काल सुविधानुसार 3-4 गिलास जल पीकर टहलने से कब्ज दूर होता है। टहलने के मध्य या बाद में प्यास लगने पर थोड़ा सा पानी पीयें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे कमजोरी महसूस नहीं होती। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर के 25 मिनट बाद दूध या फलों का एक गिलास रस लें तथा एक घंटे बाद भोजन करें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर करने से शिराओं के मध्य रक्त संचार नियंत्रित एवं व्यवस्थित होता है। शिराओं में वाल्व होने से रक्त संचार सिर्फ हृदय की ओर ही होता है। सैर करने या अन्य व्यायाम करते समय पेशियों के सिकडुने से पास की शिराएँ दबती हैं तथा उठते समय दबाव कम हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार टहलने से शिराओं के अन्दर रक्त-प्रवाह तेज होता है और रक्त का शुद्धीकरण बढ़ जाता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलने से मधुमेह रोगियों की कोशिकाएँ एवं ऊतक अतिरिक्त शर्करा का उपयोग करने में समर्थ हो जाते हैं और यकृत व अग्नाशय की क्रियाशीलता बढऩे से रक्त शर्करा पर नियंत्रण होने लगता है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">तेजी से टहलने से अतिरिक्त चर्बी (</span>Calorie<span lang="hi" xml:lang="hi">) भस्म होती है। अनियंत्रित अंत:स्रावी ग्रंथियां संतुलित स्राव छोडऩे लगती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा कम होता है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर करने से रक्त संचार एवं हृदयगति तथा निम्न रक्तचाप संतुलित होकर सामान्य होने लगता है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलने के लिये सूती ट्रेक सूट पहनें अथवा मौसम के अनुसार कपड़े पहनें। कपड़े तथा जूते ऐसे हों जो सैर को चुस्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुरुस्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्फूर्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गतिमान तथा आनन्दमयी बनायें। घुटने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमर तथा पैरों में दर्द वाले रोगी चप्पल पहन कर कदापि न टहलें।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एम्फिसिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संधियों में सूजन तथा दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैरों में सूजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गठिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संधिवात तथा अन्य रोग जिसमें रोगी को टहलने में तकलीफ महसूस  होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें चिकित्सक की राय लेकर ही टहलना चाहिये। </span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतत: कहा जा सकता है कि ब्रह्ममुहूर्त में प्रात:काल सूर्योदय के आधे घंटे पूर्व एवं बाद तक सैर करने से वायुस्नान तथा धूपस्नान का भी लाभ मिलता है। प्रात:कालीन स्वास्थ्यदायिनी पराबैंगनी किरणें हृदय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्थि एवं अन्त:स्रावी संस्थान को सक्रियता प्रदान करती हैं। रक्त कोलेस्ट्रॉल कम होता है। दुर्गुणों को विनाश एवं सद्गुणों का विकास होता है। दिनभर चुस्ती एवं स्फूर्ति रहती है। स्वास्थ्य की खुशबू से जीवन महक उठता है। आइये हम सब ब्रह्ममुहूर्त में उठें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगऋषि के संदेश को सुने और सैर पर जायें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे राष्ट्र स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत हो तथा जीवन खुशहाली से भर उठे।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>योग एवं आयुर्वेद</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2344/kare-morning-walk-in-22-savdhaniyon-ke-sath</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:50:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आधुनिक आचार्यकुलम एवं पतंजलि वि&quot;वविद्यालय का शिलान्यास एवं भूमि पूजन कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि विश्वविद्यालय एवं नव आचार्यकुलम परिसर का भूमि पूजन हर्षोल्लास पूर्वक सम्पन्न</span></strong></span></h5>
<ul>
<li>
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">स्पोट्र्स स्टेडियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशाल सभागार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्विमिंगपुल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक अनुसंधान शाला से सुसज्जित होगा यह विश्वविद्यालय परिसर</span></h5>
</li>
<li>
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंग्रेजी सहित विश्व की अन्य भाषाओं का अध्ययन कर सकेंगे विद्यार्थी।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">16 फरवरी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> 5000 विद्यार्थियों वाले इस आवासीय पतंजलि विश्वविद्यालय एवं आचार्यकुलम के नवनिर्मित परिसर का शिलान्यास एवं भूमिपूजन पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ के महामंत्री एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के पावन कर कमलों से हर्षपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। पतंजलि</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2345/adhunik-acharyakulam-evm-patanjali-vishwavidyalaya-ka-shilanyas-evm-bhumi-pujan-karyakram"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/0610.jpg" alt=""></a><br /><h5 align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि विश्वविद्यालय एवं नव आचार्यकुलम परिसर का भूमि पूजन हर्षोल्लास पूर्वक सम्पन्न</span></strong></span></h5>
<ul>
<li>
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">स्पोट्र्स स्टेडियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशाल सभागार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्विमिंगपुल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक अनुसंधान शाला से सुसज्जित होगा यह विश्वविद्यालय परिसर</span></h5>
</li>
<li>
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंग्रेजी सहित विश्व की अन्य भाषाओं का अध्ययन कर सकेंगे विद्यार्थी।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">16 फरवरी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> 5000 विद्यार्थियों वाले इस आवासीय पतंजलि विश्वविद्यालय एवं आचार्यकुलम के नवनिर्मित परिसर का शिलान्यास एवं भूमिपूजन पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ के महामंत्री एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के पावन कर कमलों से हर्षपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। पतंजलि विश्वविद्यालय का यह परिसर विश्व स्तर की शैक्षिक एवं अनुसंधा नात्मक गुणवत्ता से सुशोभित होगा। यहां के विद्यार्थी संस्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रभाषा हिन्दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंग्रेजी सहित विश्व स्तर की अनेक भाषाओं का भी अध्ययन कर सकेंगे तथा यह परिसर योग के साथ-साथ साइंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेक्नोलोजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैनेजमेंट सहित अनेक आधुनिक विषयों की विश्व स्तरीय क्वालिटी एजूकेशन के लिए जाना जायेगा। चतुर्भाषा सिद्धांत के आधार पर देश के प्रत्येक प्रांत में पतंजलि विश्वविद्यालय की शाखाएं विस्तारित की जायेंगी।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/096.jpg" alt="09"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भूमिपूजन अवसर पर पूज्य स्वामी जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा प्राचीन काल से ही ऋषि ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिकज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्षज्ञान परम्परा युगधर्म के अनुरूप अनुसंधान के साथ आगे बढ़ती रही है। यह शुभारम्भ उसी ऋषि परम्परा को आगे बढ़ाने का दिव्य प्रयोग है। स्वामी जी ने कहा यह नव निर्मित आचार्यकुलम व पतंजलि विश्वविद्यालय परिसर मनुष्य गढऩे की टकशाल रूप में प्रतिष्ठित होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे देश व विश्व स्तर पर दिव्य व्यक्तित्व युक्त नेतृत्व का विकास सम्भव बन सके।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/086.jpg" alt="08"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी जी ने बताया कि इस परिसर के समान सम्पूर्ण देश भर में पतंजलि विश्वविद्यालय एवं आचार्यकुलम स्थापना की एक विराट श्रृंखला प्रारम्भ की जायेगी। स्वामी जी ने कहा ऋषियों की भाषा संस्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रभाषा हिन्दी एवं अंग्रेजी के साथ ही युग की आवश्यकता के अनुरूप विश्व की अनेक भाषाओं को इसके पाठ्यक्रम में समाहित किया जायेगा। स्वामी जी ने कहा पतंजलि के शिक्षा अभियान की ओर से अन्य प्रांतों में स्थापित होने वाले ऐसे ही शाखा परिसरों में संस्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंग्रेजी के साथ-साथ एक प्रांतीय भाषा को मिलाकर चतुर्भाषा सिद्धांत पर बल दिया जायेगा।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/0610.jpg" alt="06"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवसर पर अपने उद्बोधन में श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने बताया कि पतंजलि विश्वविद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता विश्व स्तर की होगी। आचार्य श्री ने कहा कि अभी तक हमारा पतंजलि विश्वविद्याल योग के रूप में जाना जाता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब यह परिसर योग के साथ-साथ साइंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेक्नोलोजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैनेजमेंट सहित अनेक आधुनिक विषयों की विश्व स्तरीय क्वालिटी एजूकेशन के लिए भी जाना जायेगा।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/743.jpg" alt="74"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य श्री ने कहा पतंजलि संकल्प एवं दृढ़ निश्चय का परिणाम है। श्रद्धेय स्वामी जी के संकल्प से योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद एवं स्वदेशी को नई ऊचाइयां मिली हैं। देश में स्वदेशी ऋषि प्रणीत प्राचीन एवं अर्वाचीन शिक्षा के समन्वय से नयी पीढ़ी गढऩे का स्वप्न इस नवनिर्मित आचार्यकुलम एवं पतंजलि विश्वविद्यालय परिसर से पूरा होगा। इस परिसर से देश की शिक्षा व्यवस्था से मैकाले का बहिष्कार एवं तक्षशिला-नालंदा वाली शिक्षा व्यवस्था की सर्व स्वीकार्यता बनेगी तथा भारत को विश्व मेें नयी पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/554.jpg" alt="55"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ यशदेव शास्त्री जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुदेव प्रद्युम्न जी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी विवेकानन्द जी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहिन डॉ सुमन जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ जयदीप आर्य जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्री राकेश कुमार जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एवं अन्य अधिकारीगण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ कुलवंत सिंह जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम के निदेशक सहित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राचार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्य शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रगण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी संख्या में पतंजलि योगपीठ के कर्मयोगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि वैदिक गुरुकुलम के छात्र-छात्राएं एवं कनाडा से पधारी नवदीक्षित संयासिनी बहिने व अन्य जनमानस की उपस्थित में वैदिक वास्तुपूजन एवं वैदिक यज्ञ के साथ भूमिपूजन का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की छात्राओं द्वारा वैदिक राष्ट्रगान एवं विश्वविद्यालय के कुलगीत गायन के साथ अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों द्वारा भारत की शैक्षिक महानता को प्रदर्शित किया गया। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/732.jpg" alt="73"></img></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>भारतीय शिक्षा </category>
                                            <category>संस्था समाचार</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:48:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सतां संगो हि भेषजम्</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">आचार्य प्रद्युम्न जी महाराज</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2346/satam-sango-hi-bheshjam"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/517.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संसार </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में जब दो व्यक्ति साथ-साथ रहते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या परस्पर मिलते रहते हैं तो स्वाभाविक रूप से उनके गुण-दोषों का शनै:-शनै: एक दूसरे पर प्रभाव पडऩे लगता है। उनकी वाणी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका आचरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी मान्यताएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका दर्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिन्तन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभिरुचियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी विशेषताएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका व्यवहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वभाव अज्ञातरूप से एक-दूसरे को अपने अनुरूप गढऩे लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावित करता रहता है। स्पष्ट ही जिसकी योग्यता जितनी अधिक होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका ज्ञान का स्तर जितना उच्च होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी साधना जितनी गहरी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी शक्ति जितनी अधिक होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जितना सजग व जागरूक होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जितना निभ्र्रान्त होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी दृष्टि को जिसने जितना परिष्कृत कर लिया होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जितना संदेह रहित होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह उसी अनुपात में अपने से कम या अवर को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने से नीचे खड़े हुये को ऊपर खींचता रहता है। श्रेष्ठ आचार्य अपने विद्यार्थियों का इसी पद्धति से निर्माण करते हैं। किन्तु जहाँ ऐसा आदर्श व्यक्तित्व नहीं होता और सामान्य रूप से लगभग समान स्तर के ही दो व्यक्ति मिलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे भी एक-दूसरे से प्रभावित होने लगते हैं। ऐसे में चञ्चल के सम्पर्क से शान्त प्रकृति वाला व्यक्ति भी अशान्त हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी शान्त के सम्पर्क से चञ्चल भी शान्त रहने लगता है। इसी प्रकार पुरुषार्थी के सम्पर्क से आलसी पुरुषार्थी हो जाता है। दूसरे शब्दों में दोनों में जिसकी शक्ति ज्यादा होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अपने से कम शक्ति वाले को अपने अनुरूप ढाल ही लेता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व्य</span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्तित्व विश्लेषकों का मत है कि एक व्यक्ति के दूसरे व्यक्ति के साथ सम्पर्क में आने पर गुणों व दोषों दोनों क्षेत्रों में तीन स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">गुणों के सन्दर्भ में: </span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उच्</span><span lang="hi" xml:lang="hi">चतम स्थिति:</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> इसके तहत व्यक्ति अपने गुणों को छोड़ता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर दूसरे के गुणों को ग्रहण कर लेता है। जैसे एक व्यक्ति विद्याप्रेमी तो है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर शरीर से पुरुषार्थी नहीं है। उसे शरीर से श्रम करने में रुचि लेने वाला एक साथी मिल जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके सम्पर्क से वह धीरे-धीरे परिश्रमी भी हो जाता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी प्रकार कोई व्यक्ति किसी एक महापुरुष या कसी एक ही शास्त्र से बँधा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर वह किसी ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सभी शास्त्रों के सत्य का आदर करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो धीरे-धीरे वह भी इसी दृष्टि से सम्पन्न हो जाता है। किसी वैयाकरणी के सम्पर्क से दार्शनिक वैयाकरणी हो जाता है और दार्शनिक के सान्निध्य में वैयाकरणी दार्शनिक हो जाता है। इसी प्रकार कोई विचारक किसी सन्त के संग से सन्त हो जाता है। एक व्यायामशील व्यक्ति किसी स्वाध्यायशील के सम्पर्क में आने से स्वाध्याय करने लगता है। ऐसे ही एक कठोर सत्य बोलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा मधुरभाषी है। कटु सत्य बोलने वाला मधुरभाषी के सम्पर्क से मधुर सत्य अर्थात् सत्य को मधुर बोलना प्रारम्भ कर देता है। एक बहुत परिश्रमी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु समय का पालन करने में बहुत लापरवाह है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा समय पालन में बहुत सावधान (क्कह्वठ्ठष्ह्लह्वड्डद्य) है। परिश्रमी व्यक्ति समय पालक के सम्पर्क में आने से समय पालन के गुण को भी सीख लेता है।</span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यम स्थिति:</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस स्थिति में व्यक्ति अन्य के गुणों को ग्रहण कर लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु अपने गुणों को छोड़ देता है। जैसे एक व्यक्ति गीता का पाठ करता था। यह एक ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आया जो अंग्रेजी का विद्वान् था। अब इसने गीता पाठ छोड़ दिया और अंग्रेजी पढऩे लगा। इसी प्रकार- एक व्यक्ति बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा व्यक्ति बड़ा दानशील था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमा-कमा कर दूसरों में खूब साधन-सम्पत्ति बाँटता रहता था। अब पहले व्यक्ति ने अपना नि:शुल्क पढ़ाने का काम छोड़कर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धन-दान करना आरम्भ कर दिया। एक व्यक्ति विद्वान् होते हुये भी मौन साधना में लीन रहता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा पढ़ाने में लगा रहता था। पर संपर्क में आने से वह पहला भी अपने मौन को छोड़कर पढ़ाने में ही लग गया।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अधम स्थिति:</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> परस्पर गुण परिवर्तन की इस अवस्था में व्यक्ति दूसरे के गुणों को तो ग्रहण नहीं कर पाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु अपने गुणों को भी छोड़ देता है। जैसे एक व्यक्ति वार्तालाप में बहुत धीमी संयत वाणी से बोलता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा व्यक्ति ऊँची तेज आवाज में बोलता था और बड़ा पुरुषार्थी भी था। इसके सम्पर्क में आने से साथी ने धीमा बोलना तो छोड़ ही दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु पुरुषार्थ को भी नहीं अपनाया। इसी प्रकार एक व्यक्ति मात्र स्वाध्यायशील था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा मात्र दानशील। सानिध्य में आकर उस स्वाध्यायशील ने दूसरे की दानशीलता को तो अपनाया नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु उसकी देखा देखी अपना स्वाध्याय छोड़ बैठा।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उक्त तीनों स्थितियों में सर्वाधिक जरूरत होती है जागरूकता की। अन्यथा अच्छी संगति भी दोषकारी साबित होती है। इसी क्रम में संगति से दुर्गुणों का भी तेजी से आदान-प्रदान होता है। जो सर्वाधिक खतरनाक है। प्रस्तुत है दोषों के संदर्भ में संगति की तीन स्थितियां:-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दोषों के सन्दर्भ में तीन स्थितियाँ: </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अपने दोषों को छोडऩा:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें व्यक्ति अपने दोषों को छोड़ देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु दूसरों के दोषों को ग्रहण नहीं करता। गुणों के प्रसंग में जैसे उत्तम स्थिति मानी जाती है कि व्यक्ति अपने गुणों को छोड़े नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु दूसरे के गुणों को ग्रहण कर ले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी प्रकार यदि व्यक्ति किसी के सम्पर्क में आकर अपने दोषों को छोड़ दे तथा दूसरे के दोषों को ग्रहण न करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह उत्तम स्थिति मानी जायेगी। जैसे एक व्यक्ति विनम्र तो है पर लोभी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा व्यक्ति अहंकारी है किन्तु उदार है। अब विनम्र के सम्पर्क से अहंकारी विनम्र हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु उसके समान लोभी नहीं बनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तथा उदार के सम्पर्क से लोभी उदार हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु उसके समान अहंकारी नहीं बनता।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(224,62,45);" xml:lang="hi">अपने दोष छोड़कर दूसरों के दोष ग्रहण करना:</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कि व्यक्ति अपने दोषों को छोड़ दे किन्तु दूसरे के दोषों को ग्रहण कर ले। जैसे एक व्यक्ति कामी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु क्रोधी नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा व्यक्ति क्रोधी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर कामी नहीं है। अब ये दोनों व्यक्ति जब एक दूसरे के सम्पर्क में आते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्रोधी अक्रोधी तो हो गया किन्तु साथ में कामी भी हो गया। इसी प्रकार किसी सरल व्यक्तिके सम्पर्क से कोई जटिल व्यक्ति अपनी जटिलता को छोड़ देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु साथ में सरल व्यक्ति के किसी दोष को भी ग्रहण कर लेता है। किसी उदार व्यक्ति के सम्पर्क से लोभी ने अपना लोभ तो छोड़ दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु उदार व्यक्ति के किसी दोष को भी साथ में ग्रहण कर लिया। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अपने व दूसरे दोनों के दोष ग्रहण कर लेना:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस स्थिति में व्यक्ति अपने दोष को तो त्यागता नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु दूसरे के दोष को भी ग्रहण कर लेता है। जैसे एक व्यक्ति अहंकारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरे किसी लोभी व्यक्ति के सम्पर्क से वह अहंकारी के साथ-साथ लोभी भी हो गया। इसी प्रकार एक  व्यक्ति बहुत स्वार्थी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा व्यक्ति बड़ा असत्यवादी है। पर परस्पर सम्पर्क से स्वार्थी व्यक्ति असत्यवादी भी हो जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तव में मानव जीवन में कोई भी व्यक्ति संग के सुप्रभाव-दुष्प्रभाव को जब चाहे व्यापक रूप से देख सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु यह भी है कि कुछ विशेष व्यक्ति सूर्य-किरणों की तरह अच्छे या बुरे के साथ संश्लिष्ट होने पर भी अप्रभावित बने रहते हैं। इसके विपरीत सामान्य जन तो ठीक वायु की तरह होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस प्रकार वायु ठण्ड के प्रभाव से शीतल और उष्णता के प्रभाव में गर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी सुगन्धित-कभी दुर्गन्धित होती रहती है। साधु पुरुष खल-संगम से खल नहीं बनते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु उनके सम्पर्क से खल साधु बन जाते हैं या बन सकते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपर्युक्त विश्लेषकों के बीच सत्संगति की आदर्श स्थिति यह है कि व्यक्ति गुणग्राही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुग्राही बन कर रहे। जहाँ कहीं भी कोई विशेष गुण दिखाई दे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे भौंरे या मधुमक्खी की तरह तत्काल ग्रहण कर ले। साथ ही भ्रमर या मधुमक्खी जैसे गंदगी पर नहीं बैठते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही व्यक्ति किसी के दुर्गुण या हीन गुण की ओर न जाये। व्यक्ति को मक्खी जैसे स्वभाव वाला तो कभी नहीं होना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो गंदगी पर बैठती रहती है और मिठाई पर भी। जो व्यक्ति सच्चे अर्थों में गुणग्राही या मधुग्राही बनकर जीवन जीते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे निरन्तर उन्नति करते रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका जीवन सतत परिष्कृत व उज्जवल होता रहता है। आवश्यक बात यही है कि व्यक्ति में ऊँचा उठने की अभीप्सा रूपी आग सदा प्रज्वलित रहनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर अपने आप रास्ता निकलता रहता है। जहाँ गुण और दोष दोनों दिखाई दे रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ व्यक्ति दोषों की उपेक्षा करके केवल गुणों को ही देखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही व्यक्तित्व का तकाजा है। गुण ग्राहिता का यह कठिन मार्ग अवश्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर इसे सहजता में पाया जा सकता है। क्योंकि सज्जनों की संगति औषधि के समान रोगों-दोषों-दु:खों व तापों को दूर करने वाली होती है। </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>सनातन वैभव</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:47:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनुभूति आपकी</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">किडनी के दर्द से मिली राहत</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मैं बाबुलु मुण्डा गाँव जगपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उड़ीसा का रहने वाला हूँ। मुझे किडनी में परेशानी के कारण 6 वर्ष से दौडऩे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चलने व काम करने से हाथ-पैर में दर्द होता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चक्कर आता था। भुवनेश्वर कलिंगा चिकित्सालय में दिखाने के बाद पता चला कि किडनी में खराबी आ गयी। अंग्रेजी दवा करायी पर कोई लाभ नहीं हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन पर दिन परेशानी बढ़ती चली गयी। 3 वर्ष अंग्रेजी इलाज कराने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे छोड़कर आयुर्वेद चिकित्सालय पतंजलि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार में उपचार हेतु सम्पर्क किया। अभी कुछ ही माह हुए हैं</span>, </h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h5 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">किडनी के दर्द से मिली राहत</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मैं बाबुलु मुण्डा गाँव जगपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उड़ीसा का रहने वाला हूँ। मुझे किडनी में परेशानी के कारण 6 वर्ष से दौडऩे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चलने व काम करने से हाथ-पैर में दर्द होता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चक्कर आता था। भुवनेश्वर कलिंगा चिकित्सालय में दिखाने के बाद पता चला कि किडनी में खराबी आ गयी। अंग्रेजी दवा करायी पर कोई लाभ नहीं हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन पर दिन परेशानी बढ़ती चली गयी। 3 वर्ष अंग्रेजी इलाज कराने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे छोड़कर आयुर्वेद चिकित्सालय पतंजलि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार में उपचार हेतु सम्पर्क किया। अभी कुछ ही माह हुए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यहां की चिकित्सा लेने पर पहले से काफी हद तक आराम महसूस हो रहा है। क्रिटनीन व यूरिया भी काफी कम हुई है। वहां के चिकित्सक महोदय ने मुझे नित्य सर्वकल्प क्वाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्कदोषहर क्वाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वसंतकुसमाकर रस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमृतासत्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हजरूल यहूद भस्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुनर्नवादि मण्डूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्वेत पर्पटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुक्तावटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्कदोषहर वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चन्द्रप्रभा वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गोक्षुरादि गुग्गुल आदि लेने व योग-प्राणायाम सहित कुछ अन्य अनुशासन पालन हेतु कहा। जिसका मुझे सकारात्मक लाभ मिल रहा है। मैं डॉक्टर साहब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्यवर व श्रद्धेय आचार्यश्री का हृदय से आभारी हूँ जिनके इस योग-आयुर्वेद अभियान से हमारे जैसे असंख्य लोग स्वास्थ्य लाभ पा रहे हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">छाती के कैंसर से मिली निजात</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मैं हेमा शर्मा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पत्नी श्री रामकेश शर्मा निवासी चूरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान। मुझे छाती में गांठ थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाँच कराने पर पता चला की यह कैंसर है। हम पतंजलि आयुर्वेद चिकित्सालय पहुँचे। वहाँ हमने चिकित्सक से परामर्श कर ईलाज प्रारम्भ करवाया। दवायी लेते एक महीना ही हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">60-65 प्रतिशत तक सुधार है। इसके लिए चिकित्सक डॉ. एस.सी. मिश्रा ने मुझे औषधियों में सर्वकल्प क्वाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कायाकल्प क्वाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संजीवनी वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिला सिन्दूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताम्र भस्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभ्रक भस्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हीरक भस्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वर्ण वसंतमालती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रवाल पंचामृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गिलोय घन वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैशोर गुग्गुल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृद्धिवाधिका वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काचंनार गुग्गुल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरोग्यवर्धनी वटी तथा साथ ही 30 मिली. गेहूँ के ज्वारे का रस</span>, 25<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली. गिलोय रस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">२५ मिली. घृतकुमारी स्वरस</span>, 25<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली. गोधन अर्क</span>, 7<span lang="hi" xml:lang="hi"> नीम के पत्ते का रस तथा 20 तुलसी पत्र स्वरस मिलाकर लेने के लिए कहा। इसके अतिरिक्त प्राणायाम में भस्त्रिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कपालभाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुलोम-विलोम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रामरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्गीथ आदि करने की भी सलाह दी। मैं उनके निर्देशानुसार आज भी औषधि ले रहा हूँ। पूर्ण लाभ सुनिश्चित दिख रहा है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">गले का कैंसर हुआ पस्त</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुझे यह कहते हुए हर्ष हो रहा है कि तीन महीने लगातार दवाई खाने के पश्चात मेरा गले का कैंसर ठीक हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं सम्पूर्ण पतंजलि परिवार का दिल से आभार प्रकट करता हूँ और प्रभु की अपार कृपा से ही यह ठीक हो पाया है। मैंने इससे पूर्व अनेक चिकित्सकों व बड़े हास्पिटलों में उपचार कराया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर ऑपरेशन जैसे महंगे उपचार से नीचे कहीं बात ही नहीं हो रही थी। तब किसी ने मुझे पतंजलि चिकित्सालय से संपर्क के लिए कहा। मैंने यहां आकर चिकित्सक डॉ. एस.सी. मिश्रा जी से संपर्क किया। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया और औषधियों के क्रम में सर्वकल्प क्वाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कायाकल्प क्वाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभ्रक भस्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वर्ण वसंत मालती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रवाल पंचामृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताम्र भस्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हीरक भस्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुक्ता पिष्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संजीवनी वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिला सिन्दूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गिलोय सत्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गिलोय घनवटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांचनार गुग्गुल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृद्धिवाधिका वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरोग्यवर्धनी वटी आदि अपने निर्देशानुसार लेने को कहा। साथ ही 30 मिली. गेहूँ के ज्वारे का रस</span>, 25<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली. गिलोय रस</span>, 25<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली. घृतकुमारी स्वरस</span>, 25<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली. गोधन अर्क</span>, 7<span lang="hi" xml:lang="hi"> नीम के पत्ते का रस तथा २० तुलसी पत्र स्वरस मिलाकर लेने का परामर्श दिया। अब हमें काफी राहत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आशा है कि मैं पूर्ण स्वस्थ हो जाऊँगा। इसके लिए मैं पूज्य स्वामी रामदेव जी व श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी को हृदय से धन्यवाद देता हूँ। </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>दिव्य अनुभूति</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2347/anubhuti-apki</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:44:26 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पतंजलि के राष्ट्रव्यापी मोटापा मुक्ति योग अनुसंधान अभियान के चमत्कारी निष्कर्ष</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">डॉ. शरली टेल्लस</span></strong><strong><span>, </span></strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">सचिन कुमार शर्मा<span>  </span>एवं निरंजन काला</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2348/patanjali-ke-rashtravyapi-motapa-mukti-yog-anusandhan-abhiyan-ke-chamatkari-nishkarsh"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/792.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतवर्ष के 55 जिलों में राष्ट्रव्यापी मोटापा मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के पावन मार्गदर्शन एवं आर्शीवाद से यह अभियान वर्ष 2016 रामनवमी को प्रारंम्भ हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें सम्पूर्ण भारतवर्ष में लगभग 4000 लोग पंजीकृत हुये। इन शिविरों में पंजीकृत लोगों की जीवन गुणवत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा सहित विभिन्न प्रकार की शारीरिक माप (</span>anthropometric Variables<span lang="hi" xml:lang="hi">) जैसे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">-</span> waist Circumference, Hip Circumference, Sagittal abodominal Diameter, body Composition, muscle Strength, Cholesterol, Fasting blood Sugar<span lang="hi" xml:lang="hi"> आदि में उत्साहवर्धक सार्थक सुधारात्मक परिणाम पाये गये। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तव में देखा गया है कि वर्तमान में गलत खान-पान व गलत जीवनशैली के कारण मोटापा महामारी का रुप ले रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मोटापा अकेले नहीं आता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु यह अनेक रोगों जैसे- उच्च रक्तचाप (</span>high blood presure<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुमेह (</span>diabetes<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय रोग (</span>coronary heart disease<span lang="hi" xml:lang="hi">) आदि का जनक भी है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि मोटापा मुक्ति अनुसंधान के तहत तीन माह के योगाभ्यास के पश्चात हमनें पाया कि नियमित योगाभ्यास से लोगों के वजन में औसत ५ किलोग्राम तथा अधिकतम २३ किलोग्राम तक कमी देखने को मिली। इससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि नियमित योगाभ्यास करने से वजन कम करने में अपेक्षित परिणाम अवश्य मिलते हैं। निम्रलिखित आंकलन तकनीकों के आधार पर हमने इस पर निष्कर्षात्मक दृष्टि डालने का प्रयास किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इस प्रकार है:</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा मापक सूत्र:</span> (Body Index mass<span lang="hi" xml:lang="hi">):</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">body mass Index (BMI) <span lang="hi" xml:lang="hi">  जो मोटापे का मुख्य निर्धारक माना जाता है। इसका सूत्र है-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">               WEIGHT ( IN KG)</h5>
<h5 style="text-align:justify;">BMI<span lang="hi" xml:lang="hi">=   </span>HEIGHT<span lang="hi" xml:lang="hi">2 ( </span>IN M)</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात् सामान्य स्वस्थ व्यक्ति</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">का </span>BMI <span lang="hi" xml:lang="hi">18.5 </span>kg/m<span lang="hi" xml:lang="hi">2 -</span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">22.9 </span>kg/m<span lang="hi" xml:lang="hi">2 होना चाहिये। आधुनिक समय में </span>BMI<span lang="hi" xml:lang="hi"> मोटापे के निर्धारण का मुख्य सूचकांक माना जाता है। नियमित योगाभ्यास करने वाले मोटापा पीडि़त साधकों में योगाभ्यास के पश्चात </span>BMI<span lang="hi" xml:lang="hi"> में 3 </span>kg/m<span lang="hi" xml:lang="hi">2 तक सार्थक कमी देखने को मिली। लेकिन मोटापे का निर्धारण मात्र वजन से नहीं किया जा सकता। इसके लिये </span>anthropometric Variables <span lang="hi" xml:lang="hi"> (मोटापे की शारीरिक मापें) का भी प्रयोग किया जाता है। प्रस्तुत हैं मोटापा संबंधी विविध मापें और उसके परिणाम-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कमर की माप:</span> (Waist Circumference<span lang="hi" xml:lang="hi">):</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके द्वारा कमर एवं पेट की चर्बी (</span>Fat<span lang="hi" xml:lang="hi">)  का निर्धारण किया जाता है। भारत में कमर की मानक माप (</span>Standard waist Circumference<span lang="hi" xml:lang="hi">) पुरुषों के लिये 90 से कम तथा महिलाओं के लिये 80 से कम निर्धारित है। यह इससे अधिक नहीं होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि अधिक होने पर यह हृदय रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुमेह आदि रोगों का कारण बनती है। पतंजलि अनुसंधान अभियान में तीन माह के योग अभ्यास के बाद </span>waist Circumference <span lang="hi" xml:lang="hi">में </span>26cm <span lang="hi" xml:lang="hi">तक की कमी देखने को मिली है। अर्थात् जो लोग नियमित योगाभ्यास करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके कमर पर चर्बी बढऩे की संभावना नही होती तथा जिन लोगों के कमर पर अधिक चर्बी जमा हो भी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियमित योगाभ्यास से इसे सार्थक रूप से कम किया जा सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नितम्बों की माप:</span> (Hip Circumference<span lang="hi" xml:lang="hi">):</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कमर एवं नितम्बों की चर्बी का निर्धारक है। यह अधिक होने से </span>Constipation, Piles <span lang="hi" xml:lang="hi">आदि रोगों के होने का खतरा बढ़ता है। तीन माह के योगाभ्यास के बाद </span> Hip Circumference<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>12.6cm <span lang="hi" xml:lang="hi">तक कमी देखने को मिली।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एस ए डी की माप:</span> (Sagittal abdominal Diameterh<span lang="hi" xml:lang="hi">):</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह </span>abdominal obesity <span lang="hi" xml:lang="hi">की माप है। वैज्ञानिक अनुसंधानों में देखा गया है कि </span>SaD <span lang="hi" xml:lang="hi">की माप 25</span>cm <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक होने पर  </span> Coronary Disease, High b.P., Diabetes<span lang="hi" xml:lang="hi"> की संभावना बढ़ जाती है। पतंजलि के तीन माह के योगाभ्यास अभियान के पश्चात </span>SAD <span lang="hi" xml:lang="hi">में 3.3</span>cm <span lang="hi" xml:lang="hi">तक कमी देखने को मिली। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">बाडी कम्पोजीशन एनालसिस:</span> (Body Compositio<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे हम शरीर के वजन में उपस्थित वसा (</span>Fat<span lang="hi" xml:lang="hi">) की सही मात्रा का पता लगा सकते हैं। इसके लिये हमने </span>body Composition analyzer<span lang="hi" xml:lang="hi"> उपकरण का प्रयोग किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर में कुल वसा की मात्रा (</span>Fat mass<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माँसपेशियों की मात्रा (</span>muscle mass<span lang="hi" xml:lang="hi">) तथा जल की मात्रा (</span>water mass<span lang="hi" xml:lang="hi">) का पता लगाया गया। तीन माह के नियमित योगाभ्यासियों में हमने पाया कि वसा की मात्रा में 3.5</span>Kg<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक कमी आयी है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">माँसपेशियों की शक्ति: </span>(Hand Grip &amp; leg and back Strength<span lang="hi" xml:lang="hi">):</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने लोगों की शारीरिक शक्ति को मापने के लिये </span>Hand Grip Dynamometer <span lang="hi" xml:lang="hi">तथा </span>leg &amp; back Dynamometer<span lang="hi" xml:lang="hi"> का प्रयोग किया। अधिकतर व्यक्ति जो मोटापा कम करने के लिये केवल आहार को नियन्त्रित या अत्यन्त न्यून मात्रा में प्रयोग करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी मांसपेशियों की ताकत कम हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु योग द्वारा वजन कम करने पर ऐसा नहीं होता। हमने पाया कि योगाभ्यास से जहाँ शरीर में वसा की मात्रा में कमी आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं लोगों की शारीरिक शक्ति में बढ़ोत्तरी हुई। नियमित योगाभ्यासियों में हाथों से पकडऩे की शक्ति में 10.3</span>Kg<span lang="hi" xml:lang="hi">/</span>Area<span lang="hi" xml:lang="hi">तक की वृद्धि पाई गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं पैरों व कमर की मांसपेशियों की शक्ति में 54.2</span>kg/area <span lang="hi" xml:lang="hi">तक की वृद्धि पायी गयी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात् योगाभ्यास से न केवल वजन ही कम होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हाथों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैरों व कमर की मांसपेशियों की क्षमता में भी वृद्धि होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कोलेस्ट्राल की माप: (</span>Cholesterol<span lang="hi" xml:lang="hi">) </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आम मान्यता है कि कोलेस्ट्राल हानिकारक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर ऐसा नहीं है। यह शरीर की महत्त्वपूर्ण क्रियाओं यथा कोशिकाओं के निर्माण तथा चयापचय में मुख्य भूमिका निभाने वाला घटक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु आवश्यकता से अधिक होने पर यह </span>Heart Disease, Stroke <span lang="hi" xml:lang="hi">तथा चयापचय के रोगों का कारक बनता है। चिकित्सकीय अनुसार इसकी मात्रा 200</span>mg/dl <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक नहीं होनी चाहिये। हमारे आंकलन में तीन माह के योगाभ्यास के पश्चात कोलेस्ट्राल के बढ़े हुये स्तर में 73</span>mg/dl <span lang="hi" xml:lang="hi">तक की कमी देखने को मिली।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">निगेटिव कोलेस्ट्राल: </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>(Low Density Lipoprotein<span lang="hi" xml:lang="hi">) </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बुरे कोलेस्ट्राल के बढऩे से </span>Heart blockage, High blood Pressure <span lang="hi" xml:lang="hi">आदि रोगों का जन्म होता है। अत: इसकी मात्रा 100</span>mg/dl <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक नहीं होनी चाहिये। तीन माह के योगाभ्यास के पश्चात </span>low Density lipopratein (lDl)<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बढ़े हुये स्तर में 54</span>mg/dl <span lang="hi" xml:lang="hi">तक की कमी  देखने को मिली। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रिग्लीसेराइड की माप: </span>(Triglycerides<span lang="hi" xml:lang="hi">)  </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह एक तरह का वसा (</span>lipid<span lang="hi" xml:lang="hi">)है। इनके बढ़े हुये स्तर से </span>Heart Diseases <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Diabetes <span lang="hi" xml:lang="hi">आदि के खतरे बढ़ते हैं। इनकी मात्रा 150</span>mg/dl <span lang="hi" xml:lang="hi">तक होनी चाहिए। तीन माह के योगाभ्यास के बाद </span>Triglycerides <span lang="hi" xml:lang="hi">के बढ़े हुये स्तर में 65</span>mg/dl<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक की कमी देखने को मिली।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रक्त में शर्करा: </span>(Fasting blood Glucose<span lang="hi" xml:lang="hi">):</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे मोटापे के साथ-साथ अन्य बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से एक मधुमेह भी है। हमने मधुमेह पर भी योग के प्रभाव को देखना चाहा और पाया कि ३ माह तक नियमित रुप से योग करने वाले प्रतिभागियों की रक्तशर्करा (</span>Fasting blood Sugar<span lang="hi" xml:lang="hi">) में 64</span>mg/dl <span lang="hi" xml:lang="hi">तक की कमी हुई।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन की गुणवत्ता </span>(Quality of life<span lang="hi" xml:lang="hi">): </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह जीवन स्तर अर्थात् स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रसन्नता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतुष्टि तथा जीवन के सकारात्मक स्तर का मापक है। तीन माह के योगाभ्यास के पश्चात हमने पाया कि लोगों के जीवन के प्रति दृष्टिकोण एवं गुणत्ता में सार्थक बढ़ोत्तरी हुई हैं और वे प्रत्येक पक्ष को सकारात्मक दृष्टि से देखने में सक्षम होने लगे। अंतत: कह सकते हैं कि परम पूज्य स्वामी जी द्वारा निर्देशित </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा नियंत्रण योग-पैकेज</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का अभ्यास नियमित रूप से करने वाले मोटापा ग्रसित साधकों के वजन में तो सार्थक कमी आती ही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरन् मोटापे का परीक्षण करने के लिये बने वैज्ञानिक मानकों ((</span>Scientific Parameters<span lang="hi" xml:lang="hi">)  जैसे </span>waist Circumference, Sagittal abdominal Diameter, bmI, body Fat, Total Cholestrol, low Density lipoproatein, Triglycerides, Fasting blood Glucose <span lang="hi" xml:lang="hi"> आदि में भी सार्थक सकारात्मक बदलाव देखने में आता है। साथ ही योगाभ्यास से  व्यक्ति का जीवन प्रसन्नता से भर उठता है और तनाव मुक्त होने में सहायता मिलती है। स्पष्ट है कि देश की आम जनता द्वारा इस योगाभ्यास को नित्य अपनाने से उसे अपना व्यक्तिगत जीवन स्वस्थ-समुन्नत बनाने में मदद मिलेगी ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही राष्ट्र निर्माण हेतु पुरुषार्थी तैयार करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>पतंजलि रिसर्च</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2348/patanjali-ke-rashtravyapi-motapa-mukti-yog-anusandhan-abhiyan-ke-chamatkari-nishkarsh</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:42:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिमा वैदिक साहित्य की</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi"><span> </span>राकेश कुमार- मुख्य केंद्रीय प्रभारी</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">पतंजलि योग समिति</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2349/mahima-vaidic-sahitya-ki"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/852.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वि</span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">वेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">हैं। वैदिक परम्परा के अनुसार आज से लगभग </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब </span>96<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख </span>53<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार वर्ष पूर्व जब इस पृथ्वी पर मनुष्य की सर्वप्रथम उत्पत्ति हुई तब ईश्वर ने चार ऋषियों- </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अग्नि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदित्य</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अंगिरा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को क्रमश: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऋग्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यजुर्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामवेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">तथा </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अथर्ववेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का ज्ञान प्रदान किया। इन्हीं ऋषियों ने अन्य मनुष्यों को वेदों का ज्ञान दिया और तब से आज तक गुरु परंपरा से इन वेदों का आदान-प्रदान चलता आ रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे बहुत लंबे काल तक वेद श्रुति परम्परा से ही ग्रहण किए जाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस कारण इनका एक नाम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुति</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">भी है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बाद में इन्हें पुस्तक रूप में लिख लिया गया।इन वेदों की प्रमुख विशेषतायें कुछ इस प्रकार हैं-</span></h5>
<ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5> '<span lang="hi" xml:lang="hi">ऋग्वेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का मुख्य विषय ज्ञान व पदार्थज्ञान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात इसमें मुख्य रूप से संसार में विद्यमान पदार्थों का स्वरूप बताया गया है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">यजुर्वेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में कर्मों के अनुष्ठान</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">सामवेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में ईश्वर की भक्ति व उपासना के स्वरूप तथा </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अथर्ववेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में विभिन्न प्रकार के विज्ञान को मुख्य रूप से विश्लेषित किया गया है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5> '<span lang="hi" xml:lang="hi">ऋग्वेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के मंत्रों की संख्या </span>10552, '<span lang="hi" xml:lang="hi">यजुर्वेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की </span>1975, '<span lang="hi" xml:lang="hi">सामवेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की </span>1875<span lang="hi" xml:lang="hi"> तथा </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अथर्ववेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की </span>5977<span lang="hi" xml:lang="hi"> है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार चारों वेदों में कुल </span>20379<span lang="hi" xml:lang="hi"> मंत्र है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>  <span lang="hi" xml:lang="hi">इन वेदों का एक-एक </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">उपवेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">भी है। ऋग्वेद के उपवेद का नाम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें स्वस्थ रहने के उपाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोगों के कारण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औषधि तथा चिकित्सा का मुख्य रूप से वर्णन है। जबकि यजुर्वेद के उपवेद का नाम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">धनुर्वेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें सेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हथियार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध कला के विषय वर्णित हैं। सामवेद के उपवेद का नाम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">गन्धर्ववेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें गायन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वादन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नर्तन आदि विषयों का वर्णन किया गया है और अथर्ववेद के उपवेद का नाम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थवेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थव्यवस्था आदि विषयों का समायोजन है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>   <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषियों ने वेदों के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">भाष्य</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">व्याख्या रूप में जिन ग्रन्थों की रचना की उन ग्रन्थों को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ब्राह्मण ग्रंथ</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं। जैसे ऋग्वेद का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऐतरेय</span>’, <span lang="hi" xml:lang="hi">यजुर्वेद का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">शतपथ</span>’, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामवेद का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ताण्ड्य</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">तथा अथर्ववेद का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">गोपथ</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम से ब्राह्मण ग्रंथ प्रसिद्ध है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>  <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन ग्रन्थों में ऋषियों ने वेदों में वर्णित ब्रह्मविद्या से संबन्धित आध्यात्मिक तत्वों जैसे कि ब्रह्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वाध्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तपस्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाधि और विषयों का आलंकारिक कथाओं के साथ सरल रूप से वर्णन किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन ग्रंथो को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">उपनिषद्</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम से जाना जाता है। इन उपनिषदों में ईशोपनिषद् आदि</span>’ 10<span lang="hi" xml:lang="hi"> उपनिषद् प्रमुख हैं</span>’<span lang="hi" xml:lang="hi">।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5> <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषियों ने जिन ग्रन्थों में वेदों के दार्शनिक तत्वों की विस्तार से शंका समाधान पूर्वक विवेचना की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका नाम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">उपांग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन शास्त्र</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">हैं। ये संख्या में </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके नाम मीमांसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वेदान्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैशेषिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांख्य और योग है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>  '<span lang="hi" xml:lang="hi">जैमिनी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषीकृत </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मीमांसा-दर्शन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्म यज्ञादि का वर्णन है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">व्यास ऋषि</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कृत </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वेदान्त-दर्शन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में ब्रह्म (ईश्वर) का</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">गौतम ऋषि</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कृत </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">न्याय-दर्शन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में तर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमाण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवहार व मुक्ति की विवेचना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कणाद ऋषि</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कृत </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वैशेषिक-दर्शन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में ज्ञान-विज्ञान</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">कपिल ऋषि</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कृत </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">सांख्य-दर्शन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में प्रकृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुरुष (ईश्वर व जीव) तथा </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषि पतंजलि</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">रचित </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">योग-दर्शन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में योग-साधना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाधि आदि विषयों का वर्णन है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"> वेद मंत्रों के गंभीर व सूक्ष्म अर्थों को स्पष्टता से समझने के लिए ऋषियों ने </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> अंगों की रचना की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वेदांग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं। ये हैं शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कल्प</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्याकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निरुक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छन्द तथा ज्योतिष।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>  <span lang="hi" xml:lang="hi">वेदांग के शिक्षा ग्रंथ में संस्कृत भाषा के अक्षरों का वर्णन उनकी संख्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उच्चारण-स्थान-प्रयत्न आदि के उल्लेख सहित किया गया है। जबकि कल्प ग्रन्थ में व्यवहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुनीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्माचार आदि बातों का वर्णन है। व्याकरण ग्रंथ में शब्दों की रचना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धातु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रत्यय तथा कौन-सा-शब्द किन-किन अर्थों में प्रयुक्त होता है आदि बातों का उल्लेख है। वेद मंत्रों के शब्दों का अर्थ किस विधि से किया जावे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका निर्देश निरुक्त ग्रंथ में मिलता है। छन्द ग्रंथ में श्लोकों की रचना तथा गान कला का वर्णन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी प्रकार ज्योतिष ग्रंथ में गणित आदि विद्याओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूगोल-खगोल की स्थिति-गति का वर्णन है।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके अलावा ऋषियों ने स्मृतिग्रंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्राहमण व आरण्यक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूत्रग्रंथ आदि भी बनाए। इन ग्रन्थों की रचना मानव मात्र को कर्तव्य-अकर्तव्य का बोध कराने के लिए की गयी। इनमें पारिवारिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक तथा राजनैतिक नियमों का विधान है। समय-समय पर इन्हीं स्मृति ग्रंथो में स्वार्थी तत्वों द्वारा मिलावट होती रही है। वर्तमान में उपलब्ध </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मनुस्मृति</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख उदाहरण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें अनेक मिलावटें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिक विद्वानों ने ढूंढकर इन्हें पृथक भी किया है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिक धर्म से सम्बंधित आरण्यक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रातिशाख्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूत्रग्रंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुराण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाभारत आदि अनेक अन्य ग्रंथ भी उपलब्ध हैं। आइये हम भी इस परम्परा को जीवन में स्थान दें और धन्य कहलायें। </span></h5>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्कृति एवं संस्कार</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2349/mahima-vaidic-sahitya-ki</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:40:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों के स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक प्रयोग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi"><span> </span>डॉ प्रत्यूष कुमार</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">एसोसिएट प्रोफेसर</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">पतंजलि आयुर्वेद कालेज</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">हरिद्वार</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2350/bachchon-ke-smaran-shakti-badhane-m-e-sahayak-prayog"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/545.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">का याद्दाश्त से गहरा संबंध है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च से अप्रेल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग सम्पूर्ण भारत में परीक्षाओं का माह माना जाता है। हर अभिभावक यही चाहता है कि मेरे लाड़ले ने वर्ष भर पढ़ाई की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा परिणाम भी श्रेष्ठतम आये। विद्यार्थी की परिकल्पना भी कुछ ऐसी ही रहती है। मनचाही सफलता तभी संभव हो सकती है जब स्मरण शक्ति भी साथ दे क्योंकि स्मरण शक्ति का परीक्षा के साथ गहरा संबंध जो है। प्रस्तुत है </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्मरण शक्ति बढ़ाने में आयुर्वेद आधारित कारगर प्रयोग परक सूत्र पुर्नप्रकाशित किये जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें आजमा कर केवल विद्यार्थी ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर कोई भरपूर लाभ उठा सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कि सी भी रोग का उपचार आयुर्वेद में है। आयुर्वेद एक संपूर्ण और कारगर चिकित्सा पद्धति का नाम है। पेड़-पौधों के रस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फल और जड़ी-बूटियों से बनी औषधियां देखने में तो अविश्वसनीय लगती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इनमें बड़े से बड़े रोगों को जड़ से खत्म करने की क्षमता होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय ग्रंथों के महत्वपूर्ण योग:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्राह्मी चूर्ण को </span>240<span lang="hi" xml:lang="hi"> मि-ग्रा- से </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> म-ग्रा- तक प्रतिदिन सुबह दूध के साथ सेवन करने वाला व्यक्ति दीर्घायु होता है।ब्राह्मी के सेवन से मास्तिष्क की स्मरण-शक्ति भी बढ़ती है। ऐसा ग्रन्थों में वर्णन है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">चरक और सुश्रुत रचित आयुर्वेदिक ग्रंथों में लिखा है कि ब्राह्मी की हरी ताजी पत्तियों का रस तीन ग्राम- की मात्रा में सेवन करने से स्मरण-शक्ति में वृद्धि होती है। ब्राह्मी की पत्तियां इमली की पत्तियों की तरह स्वाद वाली होती हैं।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">भाव प्रकाश नामक अति प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ के अनुसार शंखपुष्पी स्मरण-शक्ति बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। शंखपुष्पी का तीन से छ: ग्राम का चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से स्मरण-शक्ति में वृद्धि होती है। भाव प्रकाश में लिखा है कि शंखपुष्पी कल्प का सेवन करने से स्मरण शक्ति में वृद्धि तो होती ही है साथ ही मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में भी समुचित विकास होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">भेषज्य रत्नावली आयुर्वेद का सुप्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें लिखा है कि ब्राह्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शंखपुष्पी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अश्वगंधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बादाम आदि का नियमित सेवन करने से मस्तिष्क-तंत्रिकाओं को बल मिलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही मस्तिष्क को ठंडक पहुंचती है और इनके सेवन से स्मरण-शक्ति भी बढ़ती है तथा स्नायु के विकार नष्ट होते हैं।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा चंद्रोदय नामक आयुर्वेदिक ग्रंथ में है-ब्राह्मी एक उत्तम कोटि की रसायन है। इसके नियमित सेवन से सोचने-समझने की शक्ति बढ़ती है और स्मरण-शक्ति बढ़ती है। चिकित्सा चंद्रोदय ग्रंथ में स्मरण-शक्ति बढ़ाने का एक सरल योग भी है-बादाम और मिश्री का हलुवा बनाकर नियमित रूप से खाने से मस्तिष्क की तंत्रिकाएं मजबूत होती हैं और साथ ही स्मरण-शक्ति भी बढ़ती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह-सुबह एक ग्राम- काली मिर्च का चूर्ण दस ग्राम शहद के साथ चाटने पर भी स्मरण-शक्ति बढ़ती है। इसके साथ ही असमय बाल सफेद नहीं होते हैं और आंखों की ज्योति में वृद्धि होती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">इजाजुल गुब्रा यूनानी ग्रंथ है। इसमें लिखा है-उचित मात्रा में तरी दिमाग के लिए उत्तम होती है। तरावट के लिए ठंडाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनार के शर्बत या बादाम के शर्बत बनाकर पीने चाहिए। इनमें से जो भी नुस्खा सूट करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका गर्मी के मौसम में अवश्य ही सेवन करना चाहिए। इजाजुल गुब्रा में हिदायत दी गई है-याद्दाश्त बढ़ाने के लिए सिर को ठंडा तथा पांवों को गर्म रखना चाहिए</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेदिक ग्रंथों में सिर की मालिश पर भी जोर दिया गया है-सिर की मालिश और पैरों के तलुओं पर सरसों तेल की मालिश याद्यास्त को बढ़ाती है। रोजाना सिर की मालिश करने से सिर में खून का संचार ठीक रहता है और स्मरण-शक्ति भी बढ़ती है। इससे सिरदर्द भी दूर होता है। आंखों की ज्योति भी ठीक रहती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">स्मरण-शक्ति में वृद्धि के लिए रात को सोते समय अपनी आंखों को बंद करके लेटे-लेटे ही सुबह उठने से लेकर सोने के समय तक दिन भर के सारे क्रिया-कलापों को सिलसिलेवार याद करें। यह प्रयोग प्रतिदिन करते रहने पर स्मरण-शक्ति में वृद्धि होती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">शयनकक्ष में दक्षिण या पूर्व दिशा में सिर करके सोने वालों की स्मरण-शक्ति तेज होती है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क के पोषक आहार:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क के लिए आवश्यक विटामिन्स:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विटामीन बी-</span></strong>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिमाग के लिए जरूरी है और इसके मुख्य स्रोत हैं-अंकुरित अनाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरी-सब्जियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूंगफली।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन बी-</span>2</strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> दिमाग के लिए आवश्यक है और इसके प्रमुख स्रोत हैं- दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पनीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरी-सब्जियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टमाटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खूबानी।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन बी-</span>6</strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong> </strong>दिमाग को स्वस्थ रखता है और इसके मुख्य स्रोत हैं- साबुत अनाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यीस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखी फलियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आलू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरी-सब्जियां।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन बी-</span>1</strong>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> मस्तिष्क के लिए जरूरी है और इसके मुख्य स्रोत हैं- दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पनीर।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>विटामिन-सी</strong> भी दिमाग को स्वस्थ रखता है और इसके प्रमुख स्रोत हैं- टमाटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौसंबी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंवला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नींबू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरे पत्ते वाली सब्जियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शलजम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बंद गोभी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्राबेरी।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>विटामिन-ई</strong> भी दिमाग को ताकत देता है और इसके मुख्य स्रोत हैं- टमाटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखी फलियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दालें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पालक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरी-सब्जियां।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">खनिज लवण दिमाग को ताकत देते हैं : </span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">कैल्शियम दिमाग को तंदुरुस्त रखता है और यह फलियां</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">अनाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दालें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काष्ठ-फल में पाया जाता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सोडियम मस्तिष्क के लिए जरूरी है और यह दालें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पनीर में पाया जाता है। वैसे यह सभी खाद्य पदार्थों में मिलाया जाता है। सोडियम नमक ही है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">आयरन भी दिमाग को चाहिए और यह हरी-सब्जियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दालें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फलियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूंगफली आदि में पाया जाता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">पोटैशियम भी दिमाग को ताकत देता है और यह दालें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरे पत्ते वाली सब्जियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फलियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फलों में विशेष रूप से केला और संतरा।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">जिंक मस्तिष्क को सही रखता है और यह फलियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दालें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काष्ठ-फल में पाया जाता है। इन चीजों का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">मैग्नीशियम भी दिमाग को शक्तिशाली बनाता है और यह सोयाबीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरी-सब्जियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुएं का पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काष्ठ-फल आदि में होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">फ्लोराइड दिमाग को सोचने-समझने लायक बनाता है और यह चाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉफी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोयाबीन और पीने के पानी में मिलता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">कॉपर दिमाग के लिए बहुत जरूरी है और यह अनाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मशरूम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फलियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदि में पाया जाता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सेलेनियम भी दिमाग को तरोताजा और शक्तिशाली बनाए रखने के लिए जरूरी है और यह साबुत अनाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पनीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्जियां आदि में पाया जाता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि पाक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रसायन व तेल : </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि निर्मित कई प्रकार के तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाक एवं अन्य पोषकीय रसायन हैं जिनसे मस्तिष्क के रोगों से मुक्ति मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही स्नायुतंत्र को भी पोषण मिलता है। जैसे पतंजलि केशकांति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि नारियल तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरसों का तेल आदि। इसके अतिरिक्त पतंजलि बादाम पाक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि च्यवनप्रास</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि पावरवीटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्य मेधावटी आदि। इनसे स्मरण शक्ति बढ़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि बादाम रोगन भी निम्र प्रकार से सहायक बनते हैं:-</span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क संबंधी सभी रोगों में यह काम करता है। इससे सिर की मालिश करने से दिमाग की शक्ति बढ़ती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके प्रयोग से आंख की जलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्नायुविक-कमजोरी हाथ पावो की जलन आदि दूर होती है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क अर्थात मन के तीन भाग हैं। चेतन मन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अद्र्धचेतन मन और अचेतन मन। ये तीनों ही भाग स्मृति से जुड़े हुए हैं। चेतन मन समकालीन स्मृति का भाग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बातें बहुत कोशिश के बाद याद आती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका भाग व्यक्ति का अद्र्धचेतन मन है। जो बातें व्यक्ति भूल चुका है और कोशिश करने के बाद भी याद नहीं आ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे सब अचेतन मन में समाविष्ट हो गई होती हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अचेतन मन में संचित बातें भी यदि सकारात्मक दिशा न पा सकीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो स्मरण शक्ति के लोप या मंदता का कारण बनती हैं। इससे उबरने के लिए योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राणायाम के साथ प्रस्तुत आयुर्वेद के औषधीय अनुपान इसमें पतंजलि आयुर्वेद के स्मरण शक्ति वर्धक अनुपान आदि तथा सकारात्मक चिंतन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेरक प्रसंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवाकार्य को दिनचर्या में सामिल किया जा सके तो स्मरण शक्ति विकसित होगी ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तित्व भी मेधावान बनेगा। तब कैसी भी परीक्षा हो परिणाम अनुकूल ही आयेगा। </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>भारतीय शिक्षा </category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2350/bachchon-ke-smaran-shakti-badhane-m-e-sahayak-prayog</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:38:50 +0530</pubDate>
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