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                <title>सितम्बर - योग संदेश</title>
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                <description>सितम्बर RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>श्रद्धेय योगऋषि परम पूज्य स्वामीजी महाराज की शाश्वत प्रज्ञा से नि:सृत शाश्वत सत्य...</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> विधान</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>1. <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य एवं परम सत्य</span>-</strong></span> <span lang="hi" xml:lang="hi">संसार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में जो भी दृश्य रूप में होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> जीवन का सत्य है तथा जो भी अदृश्य</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">अव्यक्त</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> शक्ति है वह परम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाश्वत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अन्तिम नित्य सत्य है। दृश्य व्यक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वस्तु</span>- <span lang="hi" xml:lang="hi">जड़</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> चेतन</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">जीव</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> जगत के साथ हम विवेक व प्रीति पूर्वक व्यवहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्म</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> या आचरण करें या एक शब्द में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कहें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> तो अपने दायित्व का प्रमाणिकता के साथ निर्वहन करें तथा अदृष्ट आत्मा एवं परमात्मा के विधान में पूर्ण विश्वास रखते हुए आत्मा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परमात्मा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> व प्रकृति की पूर्णता शुद्धता व दिव्यता को हर</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2504/shashwat-pragya-september-2017"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/724.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> विधान</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>1. <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य एवं परम सत्य</span>-</strong></span> <span lang="hi" xml:lang="hi">संसार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में जो भी दृश्य रूप में होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> जीवन का सत्य है तथा जो भी अदृश्य</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">अव्यक्त</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> शक्ति है वह परम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाश्वत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अन्तिम नित्य सत्य है। दृश्य व्यक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वस्तु</span>- <span lang="hi" xml:lang="hi">जड़</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> चेतन</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">जीव</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> जगत के साथ हम विवेक व प्रीति पूर्वक व्यवहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्म</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> या आचरण करें या एक शब्द में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कहें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> तो अपने दायित्व का प्रमाणिकता के साथ निर्वहन करें तथा अदृष्ट आत्मा एवं परमात्मा के विधान में पूर्ण विश्वास रखते हुए आत्मा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परमात्मा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> व प्रकृति की पूर्णता शुद्धता व दिव्यता को हर क्षय अनुभव करते हुए सदैव पूर्ण आनन्द में रहें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>2. <span lang="hi" xml:lang="hi">पथ का विधान</span>-</strong></span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अनादि व अनन्त है। अनुकूलता</span>- <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिकूलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुख</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">दुःख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाभ</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">हानि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">पराजय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मान</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">अपमान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> आदि जीवन के सत्य है। जीवन का समग्रता से समझें एवं समग्रतायें ही उसे जीएं हमारी दृष्टि एवं स्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> जानने व जीने में भेद न रहें। हमारे ज्ञान व आचरण अभेद रहें। जीवन में प्रतिदिन व प्रतिपल घटने वाले अनुभव से हम सीखें तात्कालिक व दीर्घकालिक घ्येय या लक्ष्य को ध्यान में रखकर इस लोक में भी पूर्णता से जीएं तथा परालौकिक या पारमार्थिक दृष्टि से भी हम सुखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहज</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> या आनन्द में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">रहें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> और अंत में अपने जीवन की अन्तिम सफलता पूर्ण निर्दोषता को प्राप्त हो जाएं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>3. <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्म अपराध से बचें</span>-</strong></span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मैंने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये क्यों किया तथा मैंने ये क्यों नहीं किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> भाव समय के साथ अपने जीवन में बढ़ता जाता है अतः अशुभ से सदा बचें रहें तथा शुभ से चूके नहीं। विश्वानिदेव सवित र्दुरितानि परासुव। यद् भदृंतन्न आसुव।। को जीवन का मंत्र या सिद्धांत बनाएं।</span></h5>
<h5 style="text-align:right;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> रामदेव</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-11/sep-2017-1.jpg" alt="sep 2017 1"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-11/sep-2017-2.jpg" alt="sep 2017 2"></img></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शाश्वत प्रज्ञा</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2504/shashwat-pragya-september-2017</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:59:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्थिक आजादी</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:center;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी की शपथ</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">15 अगस्त के अवसर पर हमने पहली बार डिजिटल मीडिया में स्वदेशी की शपथ लेकर देश को आर्थिक आजादी दिलाने व स्वावलम्बी बनाने हेतु तथा विदेशी कम्पनियों की आर्थिक लूट व गुलामी से देश को बचाने हेतु एक जबरदस्त अभियान चलाया और इसका परिणाम ये हुआ कि मात्र 11 दिन में 15 अगस्त की रात्रि तक 300 करोड़ से अधिक इन्प्रेशन 20 करोड़ से अधिक यूनिक यूजर्स व एक करोड़ 34 लाख लोगों ने स्वदेशी की शपथ (प्लैज) ली और स्वदेशी की शपथ लेने का यह क्रम हमने निरन्तर जारी रखा है। हमारे लिए यह एक राष्ट्रसेवा</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2505/arthik-aazadi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/524.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी की शपथ</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">15 अगस्त के अवसर पर हमने पहली बार डिजिटल मीडिया में स्वदेशी की शपथ लेकर देश को आर्थिक आजादी दिलाने व स्वावलम्बी बनाने हेतु तथा विदेशी कम्पनियों की आर्थिक लूट व गुलामी से देश को बचाने हेतु एक जबरदस्त अभियान चलाया और इसका परिणाम ये हुआ कि मात्र 11 दिन में 15 अगस्त की रात्रि तक 300 करोड़ से अधिक इन्प्रेशन 20 करोड़ से अधिक यूनिक यूजर्स व एक करोड़ 34 लाख लोगों ने स्वदेशी की शपथ (प्लैज) ली और स्वदेशी की शपथ लेने का यह क्रम हमने निरन्तर जारी रखा है। हमारे लिए यह एक राष्ट्रसेवा व राष्ट्र समृद्धि का एक पवित्र यज्ञ व अनुष्ठान है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के ज्ञात इतिहास में किसी भी अभियान के लिए एक साथ मात्र 10 दिनों में इतने लोग किसी भी आंदोलन से शपथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओथ लेकर पहली बार जुड़े हैं। इसके तीन बड़े निष्कर्ष निकलकर सामने आते हैं- एक देश में आज भी स्वदेशी व स्वाभिमान के लिए बहुत बड़ी ताकत भरोसा व उत्साह है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी बात कोई भी बड़ा कार्य देशहित के लिए होता है तो लोग एक जुनून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पागलपन या उन्माद के रूप में उससे जुड़ते हैं। तीसरी बात यदि स्वदेशी के इस विचार को हम इसी रफ्तार से बढ़ाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो एक दिन विदेशी शासकों की तरह इन विदेशी कंपनियों को भी उखाड़कर फेंक सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक आजादी क्यों जरूरी है</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(<span lang="hi" xml:lang="hi">क)  रॉ-मैटिरियल हमारा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैक्ट्रियां हमारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब काम करने वाले कर्मचारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी हमारे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारी हमारे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुकानदार हमारे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्राहक हमारे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूंजी हमारी तथा देश हमारा। फिर ये विदेशी कंपनियाँ रॉयल्टी व प्रॉफिट के नाम पर देश का पैसा लूटकर विदेश में क्यों लेकर जायें। विदेशी चीजों के प्रति प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आकर्षण एवं उनका महिमा मंडन तथा देश के प्रति उदासीनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दीनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हीनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मग्लानि व हेय दृष्टि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये किसी भी स्वाभिमानी देश के लिए बहुत ही खतरनाक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मघाती व अत्यन्त विनाशकारी है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(<span lang="hi" xml:lang="hi">ख)  सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैचारिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक व भौगोलिक दृष्टि से भी विदेशी कंपनियों पर निर्भरता देश की एकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अखंडता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वावलम्बन व स्वाधीनता के लिए बहुत बड़ी चुनौती व राष्ट्रीय संकट के रूप में होता है। एक तरह से ये राष्ट्रीय अपराध या अनजाने में अविवेकपूर्ण देशद्रोह जैसा है। इस घातक वृत्ति व प्रवृत्ति से देश को बाहर निकलना तात्कालिक व दीर्घकालिक दृष्टि से बहुत जरूरी है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(<span lang="hi" xml:lang="hi">ग)   पतंजलि स्वदेशी से देश को स्वावलम्बी बनाने की मुहिम का एक आदर्श उदाहरण है तथा देश को आर्थिक आजादी दिलाने का एक राष्ट्रीय यज्ञ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुष्ठान या राष्ट्रीय स्वाभिमान व स्वाधीनता का आंदोलन है। हम सभी देशभक्त भारतीयों से इससे जुड़ने का आह्वान करते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के 71 वर्ष के बाद भी देश की 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अर्थव्यवस्था पर इन विदेशी कम्पनियों का कब्जा होना एक बहुत बड़ी शर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपमान एवं देश की आजादी पर हमला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही शहीदों के सपनों का अपमान है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हम क्या कर सकते हैं</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे पहले आप स्वयं इस स्वदेशी संकल्प के अभियान से जुड़ें तथा अपने स्वजनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिचितों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रगणों तथा सामाजिक दायरे से जुड़े अन्य लोगों को इस सन्दर्भ में जागरूक बनाकर उनसे भी कम से कम शून्य तकनीकी के विदेशी सामान का बहिष्कार करने व जीवन में स्वदेशी उत्पादों के ही प्रयोग करने का संकल्प दिलवायें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस छोटे से दिखने वाले काम से ही हम देश को विश्व की आर्थिक महाशक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इकोनॉमिक सुपर पॉवर बना सकते हैं और देश को विदेशी कंपनियों की लूट व गुलामी से बचाकर आर्थिक आजादी दिला सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी की शपथ लेकर इस आंदोलन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने के लिए आप हमारी वेबसाइट पर विजिट करके एक बार प्लेज अवश्य लीजिए।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2505/arthik-aazadi</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:57:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पतंजलि योगपीठ व उत्तराखण्ड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में किसानों की समृद्धि एवं उत्तराखण्ड के विकास पर होगा कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच विशेष बैठक में बनी सहमति</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">    <span style="color:rgb(35,111,161);">  मु</span></span><span style="color:rgb(35,111,161);"><span lang="hi" xml:lang="hi">ख्यमंत्री आवास पर उत्तराखंड सरकार और पतंजलि के मध्य विस्तृत विचार-विमर्श में उत्तराखण्ड के किसानों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवाओं एवं जन सामान्य के विकास हेतु पांच विशेष क्षेत्रों पर आपस में सहमति बनी। इनमें उत्तराखंड को जैविक कृषि एवं जड़ी-बूटी राज्य बनाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य के मोटे अनाज की व्यवसायिक खपत को बढ़ाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य में आयुष ग्रामों की स्थापना करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक विशाल गौधाम (गौशाला) की स्थापना करना और प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देना शामिल है। बैठक में मुख्यमंत्री</span></span></strong></span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2506/patanjali-yogpeeth-va-uttrakhand-sarkar-ke-sanyukt-tatvadhan-me-kisano-ki-samriddhi-evm-uttrakhand-ke-vikas-par-hoga-karya"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/275.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच विशेष बैठक में बनी सहमति</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">  <span style="color:rgb(35,111,161);"> मु</span></span><span style="color:rgb(35,111,161);"><span lang="hi" xml:lang="hi">ख्यमंत्री आवास पर उत्तराखंड सरकार और पतंजलि के मध्य विस्तृत विचार-विमर्श में उत्तराखण्ड के किसानों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवाओं एवं जन सामान्य के विकास हेतु पांच विशेष क्षेत्रों पर आपस में सहमति बनी। इनमें उत्तराखंड को जैविक कृषि एवं जड़ी-बूटी राज्य बनाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य के मोटे अनाज की व्यवसायिक खपत को बढ़ाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य में आयुष ग्रामों की स्थापना करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक विशाल गौधाम (गौशाला) की स्थापना करना और प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देना शामिल है। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सभी क्षेत्र राज्य की समृद्धि और खुशहाली की दृष्टि से गेम चेंजर साबित होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के विकास एवं समृद्धि हेतु ऐसे साहसिक फैसले लेने से नहीं हिचकेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे एक माह के अंदर इन सभी क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना तैयार करें। बैठक में ठोस कार्ययोजना के आधार पर राज्य सरकार और पतंजलि के बीच आवश्यक समझौते का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर पूज्य स्वामी रामदेव जी ने कहा कि सिक्किम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हाल ही में ऑर्गेनिक स्टेट का दर्जा दिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे कहीं अधिक भू-भाग पर उत्तराखंड में ऑर्गेनिक खेती हो रही है। पतंजलि इस राज्य को भी जैविक स्टेट के रूप में विकसित करने हेतु हर सम्भव प्रयास करेगा।</span></span></strong></span></h5>
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span style="color:rgb(35,111,161);"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/275.jpg" alt="27"></img></span></span></strong></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देहरादून - मुख्यमंत्री आवास पर उत्तराखंड सरकार और पतंजलि के मध्य विस्तृत विचार-विमर्श के अवसर पर पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि पतंजलि संस्थान उत्तराखंड के किसानों द्वारा तैयार उत्पादों से प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का उत्पाद खरीदने हेतु प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा सिक्किम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हाल ही में ऑर्गेनिक स्टेट का दर्जा दिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे कहीं अधिक भू-भाग पर उत्तराखंड में ऑर्गेनिक खेती हो रही है। पतंजलि इस राज्य को भी जैविक स्टेट का दर्जा दिलाने हेतु प्रतिबद्ध है। स्वामी जी ने कहा पतंजलि राज्य के जैविक उत्पादों के लिए बाईबैक सिस्टम बना रहा है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक में सरकार की ओर से उत्तराखण्ड प्रांत के 13 जिलों में 13 नये पर्यटन स्थल बनाने के लक्ष्य की सराहना करते हुए योगऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि सभी नए पर्यटन स्थलों पर आयुष ग्राम की स्थापना में सहयोग देने को संकल्पित है। स्वामी जी ने बताया राज्य सरकार के सहयोग से एक विशाल गौशाला की स्थापना करने की योजना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें 40 से 60 लीटर दूध देने वाली गायों की नस्ल तैयार की जाएगी। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ के महामंत्री श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि की रिसर्च लैब और अन्य सुविधाओं को उत्तराखण्ड सहित देश के आयुर्वेद शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए खोला जाएगा। इससे पतंजलि के 300 से अधिक वनस्पति विज्ञानी राज्य की एक-एक जड़ी-बूटी और अन्य आयुर्वेदिक औषधीय पौधे का भी सर्वेक्षण कर उनका डॉक्यूमेंटेशन कर सकते हैं।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/284.jpg" alt="28"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य श्री ने कहा कि राज्य में ऑर्गेनिक स्टेट का दर्जा पाने की सम्भावनायें हैं। इस दौरान राज्य में होने वाले 5 हजार कुंतल ऊन व जड़ी-बूटी खरीदने पर भी सहमति बनी। पतंजलि संस्थान उत्तराखंड के किसानों से एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कृषि उत्पाद भी खरीदेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये घोषणायें भी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ बैठक के दौरान की गयी। इस अवसर पर एक सृजनपत्र का भी विमोचन किया गया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य स्वामी रामदेव जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी सहित आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विधायक खजान दास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिलीप रावत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य सचिव एस. रामास्वामी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सचिव आयुष हरबंस चुग एवं अनेक विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/293.jpg" alt="29"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तराखण्ड सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेट्री एवं आयुष सचिव सहित </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिनिधियों का पतंजलि प्रवास</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">27 <span lang="hi" xml:lang="hi">जुलाई को मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक के अगले चरण में पतंजलि योगपीठ एवं उत्तराखण्ड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेश के किसानों की समृद्ध व उत्तराखण्ड के बहुमुखी विकास को लेकर उत्तराखण्ड सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेट्री श्री रनवीर सिंह एवं सचिव आयुष एवं टूरिज्म श्री मीनाक्षी सुंदरम् सहित अनेक अधिकारी </span>29 <span lang="hi" xml:lang="hi">जुलाई को पतंजलि पधारे। इस अवसर पर उत्तराखण्ड को हर्बल व आर्गेनिक कृषि एवं पर्यटन के क्षेत्र में विश्व पटल पर लाने के लिए पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण जी महाराज की अधयक्षता में विशेष कार्ययोजना तैयार की गयी।  इस क्रम में किसानों को जड़ी-बूटी के बीजों से लेकर औषधीय पौधों की व्यवस्था को उपलब्ध कराने व उसके लिए पतंजलि के साथ सहमति पत्र बनाने के विषय पर चर्चा की गयी। साथ ही बड़ी संख्या में गायों के संरक्षण व गोमूत्र तथा गोदुग्ध के लिए कार्ययोजना बनाने तथा इस संदर्भ में अनुसंधान कार्य को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाने पर विशेष चर्चा की गयी। इस गोष्ठी में उत्तराखण्ड सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री रनवीर सिंह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुष एवं पर्यटन सचित श्री मीनाक्षी सुंदरम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य विकास अधिकारी श्री नितिन जी एवं विभिन्न विभाग जैसे कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बागवानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेयरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिसिनल एरोमेट्रिक बृक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्गेनिक बोर्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आई एफएओ मत्स्य विभाग के अधयक्ष एवं आयुष मंत्रालय उत्तराखण्ड चाय विभाग के अधिकारी आदि उपस्थित थे।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/394.jpg" alt="39"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/404.jpg" alt="40"></img></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्था समाचार</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:56:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वनौषधियों में स्वास्थ्य</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">      </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह पौधा विश्व के उष्णकटिबंधीय तथा समशीतोष्ण क्षेत्रों के साथ समस्त श्रीलंका तथा भारत में </span>750<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>2100<span lang="hi" xml:lang="hi"> मी. की ऊँचाई तक सर्वत्र पाया जाता है। इसमें पूरे वर्ष पर्यन्त फूल और फल देखे जा सकते हैं। आचार्य चरक काकमाची को शीतवीर्य एवं आचार्य सुश्रुत इसे उष्णवीर्य मानते हैं। चरकसंहिता में वातरक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्श</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊरूस्तम्भ में काकमाची का शाक खाने से लाभदायक बताया गया है। किन्तु काकमाची का बासी शाक कभी न खाने का परामर्श भी है।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/makoya.jpg" alt="makoya" /></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह लगभग </span>0.30-1<span lang="hi" xml:lang="hi"> मी. ऊँचा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाखा-प्रशाखायुक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षायु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाकीय पौधा होता है। इसका काण्ड सीधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाखित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंचित् कोणयुक्त</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2507/mukh--hrday--va-udar-rog-nivaarak-aushadheey-ghatak-makoy"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/563.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">   </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह पौधा विश्व के उष्णकटिबंधीय तथा समशीतोष्ण क्षेत्रों के साथ समस्त श्रीलंका तथा भारत में </span>750<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>2100<span lang="hi" xml:lang="hi"> मी. की ऊँचाई तक सर्वत्र पाया जाता है। इसमें पूरे वर्ष पर्यन्त फूल और फल देखे जा सकते हैं। आचार्य चरक काकमाची को शीतवीर्य एवं आचार्य सुश्रुत इसे उष्णवीर्य मानते हैं। चरकसंहिता में वातरक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्श</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊरूस्तम्भ में काकमाची का शाक खाने से लाभदायक बताया गया है। किन्तु काकमाची का बासी शाक कभी न खाने का परामर्श भी है।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/makoya.jpg" alt="makoya"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह लगभग </span>0.30-1<span lang="hi" xml:lang="hi"> मी. ऊँचा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाखा-प्रशाखायुक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षायु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाकीय पौधा होता है। इसका काण्ड सीधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाखित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंचित् कोणयुक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये हरे या बैंगनी रंग की शाखाओं से युक्त होते हैं। इसके पत्र अनेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरल</span>, 2.5-9<span lang="hi" xml:lang="hi"> सेमी लम्बे</span>, 2.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> सेमी व्यास के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाल मिर्च के पत्तों के समान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्र भाग पर नुकीले तथा हरित वर्ण के होते हैं। इसके पुष्प छोटे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्वेत वर्ण के तथा फल वर्तुलाकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छोटे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग </span>5-8<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिमी. व्यास के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपक्वास्था में हरे तथा पकने पर रक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीत अथवा बैंगनी-कृष्ण वर्ण के सरस होते हैं जबकि बीज अनेक छोटे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिकने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीत वर्ण के तथा </span>1.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिमी. व्यास के होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल वर्षपर्यन्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मुुख्यत: फरवरी से जुलाई तक होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रासायनिक </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संघटन</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके पत्र में प्रोटीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खनिज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्बोहाइड्रेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैल्शियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फॉस्फोरस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लौह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राईबोफ्लेबिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निकोटिनिक अम्ल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन-ष्ट तथा </span>β-<span lang="hi" xml:lang="hi">कैरोटीन पाया जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके फलों में चार स्टेरॉयडल ग्लाइको-अलकलायड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोलामार्जिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोलासोडिन तथा ्र और क्च सोलोनाईग्रिन पाया जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके पक्व फलों में ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस एवं बीजों में हरिताभ तैल पाया जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">औषधीय प्रयोग मात्रा एवं विधि</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">शिरो रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केश</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कृष्णीकरणार्थ</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>-</strong> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">काकमाची</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">बीज</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">तैल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">को</span> 1-2<span lang="hi" xml:lang="hi"> बूंद (नस्य) नाक में डालने से  बाल काले होने लगते हैं।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नेत्र रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पिल्ल र</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ोग</span><span lang="hi" xml:lang="hi">- </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">काकमाची</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">फलों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">घृत</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलाकार</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पिल्ल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">रोगी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">को</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">धूपन</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">देने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कृमियों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">का</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">नाश</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हो</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पिल्ल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">का</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">शमन</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">होता</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कर्ण रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कर्णशूल</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>-</strong> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मकोय</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पत्तों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">किंचित्</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">उष्ण</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वरस</span> 2-2<span lang="hi" xml:lang="hi"> बूंद कान में टपकाने से नासिका एवं कर्ण रोग में लाभ मिलता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>मुखपाक-</strong> काकमाची के </span>5-6<span lang="hi" xml:lang="hi"> पत्तों को चबाने से मुख और जीभ के छाले मिटते हैं।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>बालकों के दाँत-</strong> काकमाची पत्र रस में घी या तेल समभाग मिलाकर मसूडों में मलने से बच्चों के दांत बिना कष्ट के निकल आते हैं।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वक्ष रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>कास-श्वास-</strong> मकोय पुष्प एवं फल के क्वाथ (</span>10-30<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली) का सेवन कास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्वसनिका शोथ आदि में लाभप्रद होता है। यह श्वास रोगियों की श्वास नलिका गत विकृत कफ  को निकाल कर श्वास रोग में लाभ प्रदान करता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>राजयक्ष्मा-</strong> पक्व फल का मधु के साथ सेवन करने से राजयक्ष्मा (फेफड़ों की टी.बी.) में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>हृदय रोग तथा जलोदर-</strong> मकोय के पत्ते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फल और डालियों का सत्त् निकालकर</span>, 2<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम तक की मात्रा में दिन में </span>2-3<span lang="hi" xml:lang="hi"> बार देने से जलोदर और सब प्रकार के हृदय रोग मिटते हैं।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/573.jpg" alt="57"></img></span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उदर रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong>वमन- </strong></span>मकोय के </span>10-15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली रस में </span>125-250<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली ग्राम सुहागा मिलाकर पिलाने से उलटी बन्द होती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>मंदाग्नि-</strong> मकोय के </span>20-30<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली क्वाथ में </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम पीपल का चूर्ण डालकर प्रात:-सायं भोजनोपरान्त पिलाने से मंदाग्नि मिटती है तथा आंखों को धोने से नेत्र की ज्योति बढ़ती है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">यकृत्प्लीहा रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>यकृत् वृद्धि-</strong> </span>10-15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली पंचांग स्वरस को नियमित रूप से पिलाने से यकृत-वृद्धि का शमन होता है। इसके लिए एक मिट्टी के बरतन में रस को निकाल कर इतना गर्म करें कि रस का रंग हरे से लाल या गुलाबी हो जाय। इसे रात को उबालकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह ठंडा कर प्रयोग में लाना चाहिये।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्लीहा वृद्धि- </span></strong>20-30<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली मकोय क्वाथ में सेंधानमक तथा जीरा मिलाकर पीने से प्लीहोदर में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>कामला-</strong> </span>20-30<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली मकोय क्वाथ में हल्दी का </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम चूर्ण डाल कर पिलाने से कामला में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्कवस्ति रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्क</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">विकार</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>-</strong> </span>10-15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली मकोय अर्क को नित्य पिलाने से वृक्कशोथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्कशूल आदि वृक्क विकारों का शमन होता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वशरीर रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अनिद्रा- </strong>काकमाची की जडों़ से निर्मित </span>10-20<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली क्वाथ में थोड़ा गुड़ मिलाकर पिलाने से निद्रा आती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>शोथ- </strong>मकोय फलों को पीसकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुखोष्ण करके लेप करने से सर्वांग शोथ में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">त्वचा रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>कुष्ठ-</strong> काकमाची (काली मकोय) की </span>20-30<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम पत्तियों को पीसकर लेप लगाने से कुष्ठ रोग का शमन होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके अर्क की थोडी मात्रा देने से शरीर में बहुत दिनों के लाल चट्टे मिट जाते हैं।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>विसर्प- </strong>काकमाची पत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिरीष पुष्प तथा सम्भालू के पत्र कल्क में किंचित् घृत मिलाकर लेप करने से विसर्प में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>त्वक् विकार- </strong>मकोय पत्र स्वरस को लेप करने से जीर्ण त्वक् विकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विचर्चिका (</span>Psoriasis<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पामा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नासूर तथा जीवाणुजन्य व्रण में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>शीतपित्त-</strong> काकमाची स्वरस तथा शुंठी का कल्क बनाकर लेप करने से पित्ती रोग तथा चकत्तों में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>व्रण-</strong> मकोय पत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पान पत्र तथा हल्दी से निर्मित कल्क का लेप करने से पुराने घाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षतजन्यव्रण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोमकूपशोथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूययुक्त व्रण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पामा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिसर्प (</span>Herpes<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एन्थ्रैक्स आदि में लाभ होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>व्रणशोथ- </strong>काकमाची पंचाग कल्क ले</span><span lang="hi" xml:lang="hi">प</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">करने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">व्रणशोथ</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लाभ</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">होता</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वर रोग</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वर</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>-</strong> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सरस</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">फलों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">का</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोग</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हितकर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">होता</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पंचाग</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">चूर्ण</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">अथवा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">फाण्ट</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवन</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वेद</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">का</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रचुर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मात्रा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्हरण</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">होकर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">शीघ्र</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लाभ</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राप्त</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">होता</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रसायन वाजीकरण</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>रसायन-</strong> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मकोय</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पंचांग</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">क्वाथ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> (</span>10-30<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली) का सेवन गुड़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिप्पली अथवा मरिच के साथ सेवन करने से अथवा मकोय स्वरस से पकाए हुए घृत का विधिवत् सेवन करने से रसायन गुण की प्राप्ति होती है।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विष चिकित्सा</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>मूषक विष- </strong>काकादनी तथा मकोय के स्वरस से पकाए हुए घृत का सेवन करने से तथा दंशस्थान पर लगाने से मूषकदंश जन्य विषाक्त प्रभावों का शमन होता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">जलसंत्रास- मकोय के फलों एवं पुष्पों के क्वाथ का सेवन जलसंत्रास में भी लाभप्रद होता है।</span></h5>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>पोषक उत्पाद</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2507/mukh--hrday--va-udar-rog-nivaarak-aushadheey-ghatak-makoy</link>
                <guid>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2507/mukh--hrday--va-udar-rog-nivaarak-aushadheey-ghatak-makoy</guid>
                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:54:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पतंजलि योगपीठ के महामंत्री श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का जन्मदिन एवं जड़ी-बूटी दिवस कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र व मानवता की महान सेवा में अहर्निश समर्पित रहता है श्रद्धेय आचार्य श्री के जीवन का प्रतिक्षण - स्वामी रामदेव</span></strong></span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार</span>, 04<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त</span>, 2017 -<span lang="hi" xml:lang="hi"> पतंजलि योगपीठ के महामंत्री एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का जन्मदिन सादगी पूर्ण वातावरण में पूर्ण आध्यात्मिकता के साथ मनाया गया। छोटी पोखरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झिलमिल गुफा के निकट पतंजलि आश्रम में यज्ञीय वातावरण के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम में योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य प्रद्युम्न जी महाराज सहित पतंजलि योगपीठ के हजारों कर्मनिष्ठों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यकर्ताओं एवं देश भर से पतंजलि पधारे कार्यकर्ताओं</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2508/patanjali-yog-peeth-ke-rshi-shraddhey-aachaary-baalakrshn-jee-mahaaraaj-ka-janmadin-jadee-bootee-divas-kaaryakram"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/021.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र व मानवता की महान सेवा में अहर्निश समर्पित रहता है श्रद्धेय आचार्य श्री के जीवन का प्रतिक्षण - स्वामी रामदेव</span></strong></span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार</span>, 04<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त</span>, 2017 -<span lang="hi" xml:lang="hi"> पतंजलि योगपीठ के महामंत्री एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का जन्मदिन सादगी पूर्ण वातावरण में पूर्ण आध्यात्मिकता के साथ मनाया गया। छोटी पोखरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झिलमिल गुफा के निकट पतंजलि आश्रम में यज्ञीय वातावरण के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम में योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य प्रद्युम्न जी महाराज सहित पतंजलि योगपीठ के हजारों कर्मनिष्ठों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यकर्ताओं एवं देश भर से पतंजलि पधारे कार्यकर्ताओं के अभिभावकों ने श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के मंगलमय दीर्घजीवन के लिए यज्ञाहुतियां दी तथा आश्रम परिसर में जड़ी-बूटियों का रोपड़ भी किया। पूज्य स्वामी जी व श्रद्धेय आचार्यश्री ने स्वयं पौध रोपण किया। इसी के साथ देश भर में पतंजलि से जुड़े लाखों भाई-बहिनों ने अपनी-अपनी शाखाओं से जुड़े परिसरों में औषधीय जड़ी-बूटी के पौध लगाकर आचार्य श्री को शुभकामनायें दीं।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/671.jpg" alt="67"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवसर पर पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने आचार्यश्री को अपनी शुभकामनायें देते हुए कहा कि श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी का व्यक्तित्व ऋषियों जैसा महान है तथा वे रोगियों के लिए भगवान व ईश्वर के बरदान है। राष्ट्र व मानवता की सेवा में आचार्य जी अहर्निश महान योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा आयुर्वेद के महान मर्मज्ञ आचार्य श्री का पतंजलि की अर्थ से परमार्थ की यात्रा में सम्पूर्ण पुरुषार्थ दिव्यता का आधार बन रहा है। योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसंधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी व स्वाभिमान से राष्ट्र सेवा को मूर्तरूप देने में जिन्होंने अपना सर्वस्व आहूत किया हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे श्रद्धेय आचार्य श्री के जन्म दिन पर उनकी दीर्घआयु की हार्दिक मंगल कामना है।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/713.jpg" alt="71"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अपने उद्बोधन में श्री प्रद्युम्न जी महाराज ने कहा आयुर्वेद के क्षेत्र में आचार्य श्री द्वारा निर्मित विश्व का प्रथम अनुसंधान केन्द्र पतंजलि रिसर्च इन्स्टीट्यूट आयुर्वेद को साइंटिफिक व ऑथेन्टिक रूप देने में महान भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा आचार्य श्री द्वारा विश्व के चार लाख पेड़-पौधों का अनुसंधान कर लगभग </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार से अधिक औषधीय गुणों से युक्त पौधों-वनस्पतियों की खोज व इस निमित्त डेढ़ लाख पृष्ठों का प्रामाणिक दस्तावेज हर्बल इनसाइक्लोपीडिया की रचना करना आयुर्वेद क्षेत्र के लिए भागीरथी पुरुषार्थ कहा जायेगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य श्री ने इस अवसर पर अपने संकल्प के विषय में बताया कि मेरे जीवन में जो कुछ भी ये विशेषतायें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सारी की सारी ऋषियों की देन हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति की देन हैं और जो कमियां हैं वह मेरी अपनी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें दूर करने में मैं सदैव लगा रहता हूं। उन्होंने कहा हमारी आवश्यकतायें न्यूनतम हैं और सदैव कम से कम में मेरे जीवन का कार्य चले यही मेरा संकल्प रहता है। आचार्य श्री ने कहा हमारे पास का यह संकल्प भी समाज की देन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कुछ है वह देश का है। मां भारती व इस देश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवता और संस्कृति के उत्थान में हम लगे रहें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही मेरी कामना है। कार्यक्रम का समापन सायंकाल दिव्ययोग मंदिर परिसर में हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां स्वजनों ने अपने अभिभावकों को काव्य-गीतों के साथ अपनी-अपनी शुभकामनायें समर्पित कीं और आशीर्वाद लिया। </span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/783.jpg" alt="78"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/021.jpg" alt="02"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/031.jpg" alt="03"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/045.jpg" alt="04"></img></span></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्था समाचार</category>
                                            <category>योग एवं आयुर्वेद</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:53:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रवाद अपनाकर बढ़ें वैश्विक अपनत्व की ओर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2509/rashtravad-apnakar-badhe-vaishvik-apnatva-ki-oor"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/363.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">    शरीर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> जीवन का आधार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठीक उसी भांति राष्ट्रीयता जीवंतता का आधार है। राष्ट्रीयता जीवन का स्वाभिमान एवं पहचान होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र से पद दलित व्यक्ति की दयनीयता का अनुमान आज विश्वभर में अपने राष्ट्र से पलायन करने वालों व दूसरे देश में शरणार्थी का जीवन जीने को मजबूर व्यक्ति को देखकर लगा सकते हैं। राष्ट्र व्यक्ति को वैश्विक पहचान का अवसर देता है। वास्तव में राष्ट्रवादी वह जो सदा राष्ट्र को अपने जीवन में सबसे ऊँचे स्थान पर रखे। वैयक्तिक धर्म बाद में सबसे पहले राष्ट्रधर्म। वैयक्तिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारिवारिक व आर्थिक हितों में प्रथम राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेम में सबसे प्रथम राष्ट्रप्रेम अर्थात राष्ट्र से ही प्रेम करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूजा में प्रथम पूजा राष्ट्र की-उसके बाद ईश-भक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मातृ-भक्ति व गुरुभक्ति आदि को मानने की चेतना जहां होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह देश धरती का गौरव होगा। </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रा</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ष्ट्रवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रधर्म या राजनीति से हमारा अभिप्राय राष्ट्र की उन तमाम व्यवस्थाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियम-कानूनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदर्श-मूल्यों व परम्पराओं से है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन पर चलकर देश में सुख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्धि एवं खुशहाली आती है तथा देश निरन्तर विकास की दिशा में आगे बढ़ता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगेश्वर श्री कृष्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चन्द्रगुप्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विक्रमादित्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्राट अशोक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तिलक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गोखले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाँधी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नेताजी सुभाष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छत्रपति शिवाजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लौहपुरुष सरदार पटेल व लाल बहादुर शास्त्री आदि हमारे राष्ट्र व राष्ट्रधर्म के आदर्श हैं। राष्ट्रवादी सोच वाले व्यक्तित्व गढ़ने वाले कुछ सिद्धान्त भी होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन पर चलकर आगे बढ़ना होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे सिद्धान्त है:-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीयता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पराक्रमशीलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवतावाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म व विनयशीलता ये सप्त-सिद्धान्त हमारे वैयक्तिक व राष्ट्रीय जीवन के मूलभूत सिद्धान्त एवं आदर्श हैं अर्थात् इन सिद्धान्तों के अनुरूप जीवन जीने वाला व्यक्ति  ही राष्ट्र को सही नेतृत्व दे सकता है और वैयक्तिक व राष्ट्रीय जीवन में एक नई क्रान्ति ला सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीयता </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वन्दना में प्रथम राष्ट्र वन्दना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान में प्रथम देश का ध्यान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिन्तन व चिन्ता में भी प्रथम राष्ट्र चिन्तन व राष्ट्र की चिन्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभिमान में जो प्रथम स्वदेश का स्वाभिमान करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह राष्ट्रवादी है। रिश्तों में प्रथम रिश्ता देश के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छता व स्वस्थता में भी प्रथम देश की स्वच्छता व स्वस्थता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्धि में प्रथम देश की समृद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास में भी प्रथम राष्ट्र के विकास का प्रयास जो करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह राष्ट्रवादी है। शिक्षा में जो स्वदेशी शिक्षा को सबसे श्रेष्ठ मानता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह राष्ट्रवादी है। भाषाओं में जिसके जीवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचरण व व्यवहार में सर्वप्रथम राष्ट्रभाषा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह राष्ट्रवादी है। जो स्वदेशी शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेश के संस्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेश की संस्कृति-योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन व अध्यात्म से प्यार करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह राष्ट्रवादी है। जो स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्ध व संस्कारवान भारत बनाने के लिए एवं स्वदेशी से स्वावलम्बी राष्ट्र बनाने के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भूख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीबी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी से मुक्त व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह राष्ट्रवादी है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जो स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदि के पूर्ण विकास व इन पर अनुसंधान के लिए संकल्पित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह राष्ट्रवादी है। जो स्वदेशी ज्ञान अर्थात् वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन व उपनिषद् आदि से प्राप्त वैदिक स्वदेशी ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी खान-पान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी वेशभूषा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी ऋषि व स्वदेशी ऋषि-संस्कृति से प्यार करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह राष्ट्रवादी है। जो स्वदेशी खेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी कला-संस्कृति एवं स्वदेश की प्राचीन भाषा संस्कृत एवं समस्त भारतीय भाषाओं एवं राष्ट्रभाषा से प्यार करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह राष्ट्रवादी है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पराक्रमशीलता:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जो राष्ट्रहित में निर्णय लेने व उन निर्णयों के क्रियान्वयन में किसी से भी न डरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो  पुरुषार्थवादी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अन्धविश्वासों में न फसकर कर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्यम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शौर्य व स्वाभिमान के साथ जीता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह पराक्रमी होता है। जो प्रत्येक पवित्र कार्य को संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाधाओं व निन्दाओं से विचलित न होकर तथा प्रलोभनों से बिना प्रभावित हुए सफलता तक पहुँचाकर ही विराम लेता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा व्यक्ति पराक्रमी होता है। जो कार्य को आज करने में विश्वास रखता हो। जो इस ढ़ंग से सोचता हो कि अमुक कार्य आज नहीं हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह कल कैसे हो जायेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अभी नहीं तो कभी नहीं के प्रति प्रतिबद्ध हो। जो कभी थके नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी रुके नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आराम-हराम है तथा कार्यान्तर ही विश्राम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी कार्य संस्कृति में विश्वास रखता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कर्म न करने की प्रवृति को आसुरी संस्कृति मानता हो। जो </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’</span> (<span lang="hi" xml:lang="hi">गीता </span>2.47) <span lang="hi" xml:lang="hi">को अपना आदर्श मानता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह पराक्रमी है। ऐसे ही पराक्रम की देश को आवश्यकता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका जीवन निष्कलंक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पवित्र व बेदाग हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका वैयक्तिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारिवारिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावसायिक व सामाजिक जीवन सप्त मर्यादाओं की कसौटी पर खरा उतरता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दोहरे चरित्र में न जीकर निर्दोष जीवन के प्रति प्रतिपल सजग रहता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह व्यक्ति पारदर्शी है। जिसके बाह्य एवं आन्तरिक जीवन में विरोधाभास न होकर पूर्ण शुचिता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह पारदर्शी है। इस पारदर्शिता पर राष्ट्र की स्पष्टता निर्धारित होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शिता</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जो जाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रान्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षेत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजहब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रदाय एवं भाषा आदि के आग्रह एवं संकीर्णताओं से ऊपर उठकर सब जातियों का सम्मान करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने क्षेत्र व प्रान्त के विकास की बात करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी मजहबों एवं समस्त भारतीय भाषाओं का भी सम्मान करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु यह सब करता हुआ राष्ट्रहित को न भूले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवाद व सम्पर्क के लिए विदेशी भाषाओं का भी सम्मान करे परन्तु राष्ट्रभाषा को सबसे ऊपर रखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह दूरदर्शी है।  इसके विपरीत देश में प्रान्तवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षेत्रवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजहब एवं क्षेत्रीय भाषाओं का उन्माद पैदा करके देशवासियों में परस्पर घृणा व नफरत फैलाने वाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने क्षणिक हितों के लिए देश में आग लगाने वाला व्यक्ति दूरदर्शी नहीं हो सकता। अत: जरूरी है कि अपने तुच्छ राजनैतिक स्वार्थों की परवाह किए बिना राष्ट्रहित को सर्वोपरि मान हम दूरदर्शी बनें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे आने वाली पीढ़ियाँ हमें गर्व से अपने आदर्श एवं राष्ट्र पुरुष के रूप में याद करें। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मानवतावाद</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भगवान् ने हमें इन्सान बनाकर दुनियां में भेजा है। अत: हमारा प्रथम व मूल धर्म मानव धर्म है। हम हिन्दू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुसलमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईसाई आदि होने से पहले एक इन्सान हैं और हम सबका पिता एक परमेश्वर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे हम उसको किसी भी नाम से पुकारें। हम सबके हृदयों में प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करुणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वात्सल्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य व अहिंसा आदि ईश्वर प्रदत्त स्वाभाविक गुण-धर्म विद्यमान हैं। अत: सत्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अहिंसा व प्रेम आदि से ओत-प्रोत मानवता हमारे मूल धर्म-तत्त्व बने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही मानवतावाद है। इन्हीं मानवीय मूल्यों में विश्वास रखने वाला मानवतावादी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महापुरुषों ने सत्य कहा है कि कोई भी राष्ट्र मानवीयता को त्याग कर महान नहीं बन सकता। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जो सार्वभौमिक व वैज्ञानिक मूल्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदर्शों एवं परम्पराओं को धर्म मानता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आस्तिक और धार्मिक तो हो परन्तु धर्मान्ध न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मनुष्य सहित समस्त प्राणियों एवं जड़-चेतन समस्त स्वरूपों  में ईश्वर का मूर्त रूप देखता हो और अपने सम्पूर्ण जीवन को जीव व जगत् की सेवा के लिए समर्पित कर जगत की पीड़ा हरता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अध्यात्मवादी है। जो समस्त संकीर्णताओं से ऊपर उठकर मानव-मात्र से प्यार करे व पूरे विश्व को एक विराट परिवार की तरह देखे। सदैव अपने हृदय में वसुधैव कुटुम्बकम (पंचतन्त्र </span>5.38) <span lang="hi" xml:lang="hi">का भाव रखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अध्यात्मवादी है। अध्यात्मवाद व राष्ट्रवाद परस्पर विरोधाभासी विचारधारा नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु प्रत्येक देश एवं उस देश के नागरिकों की पूर्ण स्वतन्त्रता व आत्मसुरक्षा के साथ जीने के लिए दोनों विचारधाराएँ समान रूप से आवश्यक हैं। सांसारिक व राष्ट्रीय व्यवस्था के अनुसार हम एक स्वतन्त्र देश के नागरिक हैं और अपने देश की आजादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एकता-अखण्डता व सम्प्रभुता की रक्षा के प्रति जागरूक रहना हमारा राष्ट्रीय नैतिक दायित्व है। यही हमारा राष्ट्रधर्म है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे भी यदि हम विश्व-बन्धुत्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक शान्ति व सामाजिक समरसता की दृष्टि से देखें तो हम सब एक हैं एवं एक ईश्वर की संतान हैं। अत:  ईश्वर पुत्र होने की दृष्टि से परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार हम सब भाई-बहन हैं। यही हमारा आध्यात्मिक दर्शन व अध्यात्मवाद है। यदि ऐसा अध्यात्म धारण कर सकें तब विश्व से आंतकवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कट्टरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शोषण आदि को निर्मूल होने में देर नहीं लगेगी।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विनयशीलता</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जो सत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्पत्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैभव एवं ज्ञान के शीर्ष पर पहुँचकर भी सदा विनम्र भाव से दूसरों की सेवा करता हो और सदा यह विश्वास रखता हो कि यह जीवन एवं सम्पूर्ण जगत उस परमात्मा की कृति है। इस दृश्य जीवन और जगत का नियन्ता व मालिक एक अदृश्य सत्ता परमेश्वर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मैं निमित्त मात्र हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुझे निमित्त बनाकर सभी कार्य भगवान् स्वयं ही कर रहे हैं। यह तन-मन-धन-जीवन भगवान् का है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस भाव में जीने वाला व्यक्ति  विनयशील होता है। कहते हैं विनयशीलता बिना मूल्य मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तव में आज देश व संपूर्ण विश्व को ऐसा वातावरण निर्मित करने की जरुरत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे नागरिकों में श्रेष्ठता विकसित हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विराट राष्ट्रवादी दृष्टि जगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे वह विश्व के किसी कोने में निवास करने वाले व्यक्ति के प्रति अपनापन पैदा कर सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व आज यही मांग रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन्हीं सिद्धान्तों पर चलकर हम सब भारत को विश्व की महाशक्ति बनाएंगे। तब पूरे विश्व में सुख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शान्ति व समरसता के एक नये युग का सूत्रपात होगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>राष्ट्र निर्माण</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:52:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों के संक्रमणजन्य रोग व बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">डॉ. मनोज मित्तल</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">बाल रोग विशेषज्ञ</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">करनाल (हरियाणा)</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2510/bachchon-ke-sankramanjanya-rog-va-bachaw"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/067.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> <strong> संक्रमण</strong></span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> जन्यरोग ऐसे दुखद पहलू होते हैं जो थोड़ी सी असावधानी में आ धमकते हैं। यद्यपि बच्चों व बड़े दोनों में बीमारियों के जीवाणु (</span>Bacteria<span lang="hi" xml:lang="hi">) या विषाणु (</span>Virus<span lang="hi" xml:lang="hi">) किसी संक्रमित व्यक्ति के सांस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खांसी या छींक जैसे- जुकाम (</span>cold<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खसरा (</span>measles<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कनपेड़ (</span>mumps<span lang="hi" xml:lang="hi">) व काली खांसी (</span>pertussis<span lang="hi" xml:lang="hi">) के द्वारा फैलते हैं। कुछ खास बीमारियाँ त्वचा के संपर्क से फैलती हैं। दूषित पानी या भोजन से भी बीमारियाँ फैलती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे- दस्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेचिश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हैजा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मियादी बुखार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीलिया आदि। कीट पतंगों द्वारा काटने से भी कुछ रोग फैलते हैं जैसे मलेरिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेंगू व कालाचार आदि। ऐसे संक्रमणों से बचने के लिए जागरूकता आवश्यक है। साथ ही व्यावहारिक रूप से पानी व आहार साफ और स्वच्छ होने चाहिए। इस संदर्भ में बच्चों को लेकर हमें अधिक सावधान रहना चाहिए। बच्चों को आहार देने से पहले हाथ अवश्य ही धोने और धुलवाने चाहिए। सर्दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुकाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खांसी से पीड़ित लोगों से बच्चों को स्वयं दूर रखें और स्वयं बीमार होने पर स्कूल एवं भीड़भाड़ में न जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छींकते हुए व खांसी के समय मुंह पर रूमाल लगा लें अन्यथा हमारा शिशु व बालक संक्रमणजन्य अनेक रोगों जैसे-चेहरे पर छोटे दाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीलिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंखों से पानी आना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खोपड़ी में भूरी पपड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वचा पर चकत्ते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट में केचुये आदि से कभी भी ग्रसित हो सकता है।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">चेहरे पर छोटे दाने</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बहुत सारे शिशुओं के चेहरे पर विशेष रूप से नाक के आसपास सफेद या त्वचा के ही रंग के छोटे-छोटे दाने लगभग तीसरे या चौथे हफ्ते की आयु में दिख जाते हैं। यह रोग की अस्थायी अवस्था है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो तैलीय ग्रन्थियों के अवरुद्ध होने के कारण होती है। यह कुछ दिनों में स्वत: ही गायब हो जाती है। अत: इन्हें दबाएं या निचोड़े नहीं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नवजात शिशु में पीलिया </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पीलिया का प्रधान लक्षण है त्वचा का पीलापन। पीलापन भिन्न-भिन्न शिशुओं में भिन्न-भिन्न मात्रा में पाया जाता है। सामान्यत: समय से पूर्व जन्में बच्चों में पीलिया होता है। पर जन्म के ४-५ दिन बाद तक यह पीलापन मिटता दिखाई देता है। यद्यपि कुछ बच्चों में सूर्य की धूप लगने से यह पीलिया कम हो जाता है। स्तनपान जल्दी प्रारम्भ करने से भी पीलिया शमित हो जाता है। पर कुछ बच्चों को पीलिया कम करने के लिए फोटोथरेपी मशीन (</span>Phototherapy Machine<span lang="hi" xml:lang="hi">) में रखना पड़ता है और अक्सर ७ से १० दिन में पीलिया ठीक हो जाता है। यदि फोटोथरेपी से भी पीलिया कम न हो तो इसका विशेष कारण ढूंढना आवश्यक हो जाता है जैसे कि बच्चे का ब्लड ग्रुप माँ के ब्लड ग्रुप से मिसमैच होना या कोई सर्जिकल या अन्य कोई कारण सम्भावित हो सकते हैं।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/141.jpg" alt="14"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रीमैच्यार शिशु जन्म</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि शिशु 36 सप्ताह या उससे पहले ही पैदा हो जाये  अथवा उसका वजन 2 या 2.5 किलोग्राम से कम हो तो ऐसे बच्चों में काफी सारी विवशताएं या परेशानियां पैदा होती हैं जैसे बेहद कमज़ोर ताप नियन्त्रण प्रणाली (</span>thermo-regulatory system<span lang="hi" xml:lang="hi">) से लिवर में शुगर को एकत्रित न रख पाने के कारण शुगर की कमी होना (</span>hypoglycemia<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीलिया (</span>jaundice<span lang="hi" xml:lang="hi">) की सम्भावना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैल्शियम की कमी एवं इन्फैक्शन के प्रति अत्यन्त संवेदनशीलता (</span>poor immume system<span lang="hi" xml:lang="hi">) आदि। अत: इन शिशुओं को प्राय: नर्सरी (</span>neo-natal intensive care unit or nicu<span lang="hi" xml:lang="hi">) में अतिरिक्त देख रेख में रखा जाना आवश्यक हो जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आँखों से पानी आना</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">द्यड्डष्ह्म्द्बद्वड्डद्य स्रह्वष्ह्ल अर्थात नेत्र व नाक (नासिका) के बीच एक  पतली नलिका होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो नेत्र के अतिरिक्त स्राव को नाक के छेद की ओर ले जाती है। किसी समय एक तरफ या दोनों तरफ यह नालिका रंध्र बंद हो जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह स्थिति पैदा होती है। ऐसे में शिशुओं की आँखों में अतिरिक्त पानी से कुछ संक्रमण भी हो सकते हैं। सामान्यत: यह स्थिति आँख के अन्दरी कैंथस (कोया) पर एक बार में तीन-चार बार और दिन में चार-पांच बार मधुरता के साथ दबाव डालने से कुछ हफ्तों में ठीक हो जाती है। परन्तु यदि तीन-चार माह के भीतर सुधार नहीं होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आप किसी नेत्र विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सख्त शिश्नाग्रच्छद</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ज्यादातर लड़के-शिशुओं में जन्म से सख्त </span>''<span lang="hi" xml:lang="hi">शिश्नाग्रच्छद</span>’’ <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात लिंग के ऊपर की त्वचा संकरी (सख्त) होती है। इससे शिशु पेशाब करते समय हर बार रोता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उसे इससे तनाव (जोर लगाना) होता है। पर यह मूत्र द्वार धीरे-धीरे बड़ा होता रहता है और ३ से ५ साल की आयु होने तक यह त्वचा पर्याप्त ढीली पड़ जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पीछे को खिसक भी सकती है। अत: मातायें धीरे-धीरे नहानें के समय शिशु के शिश्न की त्वचा पर तेल आदि लगाकर ४-५ बार आगे पीछे कर सकती हैं। और वह सामान्यत: ठीक हो जाता है। फिर भी यदि यह पाँच साल तक सख्त रहे तो आप डॉक्टर से सम्पर्क करें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योनि स्रवण</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नवजात बालिकाओं में जन्म के बाद 1-2 हफ्ते तक योनि से सफेद द्रव या रक्त आमतौर से आ सकता है। इसके लिए स्वच्छता का ध्यान रखें व संक्रमण से बचाव के लिए चिकित्सक की सलाह से औषधि प्रयोग करें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/183.jpg" alt="18"></img></span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्रेडल कैप</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ बच्चों की खोपड़ी के बिल्कुल ऊपर एक भूरी रंग की पपड़ी सी पैदा होने लगती है। यह बालों द्वारा स्रावित होने वाला प्राकृतिक रूप से बालों की फोलीकल्स और त्वचा के स्रवण का परिणाम है। इसको रोकने का सबसे बढ़िया उपाय है शिशु को रोज नहलाना एवं नहाने के बाद उसके बालों में नर्म ब्रुश से मधुरता के साथ कंघी करना। फिर भी यह न हटे तो आप इसे जबरदस्ती निकालने की कोशिश न करें। इसे बच्चे के चिकित्सक द्वारा बतायें गये साबुन का इस्तेमाल करके ठीक किया जा सकता है। इतना अवश्य ध्यान रखें कि साबुन आदि लगने पर बालों और त्वचा को खूब पानी से अच्छी तरह ख्ंगाल कर अवश्य साफ करें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रूसी या डैन्ड्रफ</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बालों को हल्के साबुन द्वारा प्रतिदिन धोना चाहिए और कंघी तथा ब्रुशों को भी जल्दी-जल्दी धोते रहना चाहिए और किसी दूसरे द्वारा इसे प्रयोग नहीं की जानी चाहिए। यदि रुसी फिर भी रहती है तो मेडिकेटड लोशन या शैम्पू का प्रयोग चिकित्सक की सलाह लेकर करें। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नैपी रैश</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर का कोई भी हिस्सा जो लगातार ढका रहता है और बंधा रहता है एवं थोड़ा सा गीला भी होता है। उस स्थान के वस्त्र यदि तुरन्त न निकाल जाएं तो त्वचा पर जलन सी होने लगती है और ददोरे पड़ जाते हैं। त्वचा के मोड़ों या सिकुड़नों पर ये ज्यादा होते हैं। जहाँ तक सम्भव हो शिशु को सिंथेटिक मैटिरियल के डिस्पोजेबल नैपकिन व जांघिए न पहनाएं। शिशु को दिन में कुछ समय बिना लंगोट के भी रखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि उसे कुछ समय ताजी हवा व सूरज की रोशनी लग सके। ददोरे बने रहने पर चिकित्सक से सम्पर्क करें। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पित्ती या हाइव</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शमनकारी लोशन से इस दशा में थोड़ी राहत मिलती है। इसके उपचार के अन्तर्गत कैलामाइन लोशन का लगाना तथा बच्चे को एक बाल्टी पानी में एक चम्मच खाने का सोडा पाउडर मिलाकर नहलाना चाहिए। खाने की दवा (एंटी एलर्जिक) चिकित्सक की सलाह से दें। आमतौर से ऐसी एलर्जी अक्सर हफ्ते भर में ठीक होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्केबीज (खुजली)</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों के त्वचा में होने वाला यह महत्त्वपूर्ण रोग है। प्राय: इसमें हाथ और पैर की उंगलियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुहनी और कांख में खुजली होती है। यह तलवे और हाथों की हथेलियों में भी होती है। इसका पूरा ईलाज चिकित्सक से करवाएं। इस अवस्था में घर के सामान को बाहर घूप में निकालकर समय-समय पर रखें और इसे नमी से बचाना चाहिए। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">गोल कृमि संक्रमण</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गोल कृमि केंचुए जैसे दिखते हैं। यह ठीक से न घुले कच्ची सब्जियों एवं सलाद के खाने से होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है कि सभी सब्जियों को ठीक तरह से संभव हो तो गुनगुने पानी से धो लें। बच्चे के हाथों को भी अवश्य धोएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह घर से बाहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बगीचे या मैदान से खेलकर आया हो। इसके साथ ही खाने से  पहले भी हाथों को अवश्य धोएँ। शिशु के हाथों के नाखून को काट कर छोटे रखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे कृमि का खतरा टल जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एडिनॉयड्स</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एडिनॉयड्स भी वैसे ही ऊतकों का (संक्रमण निरोधक) कोष या ग्रंथि है जो नाक के पीछे की ओर होते हैं और जब ये बढ़ जाते हैं तो नाक का विवर बंद हो जाता है और बलगम वापिस गले की ओर ही चली जाती है। ऐसी अवस्था में जब बच्चा मुँह से सांस लेता है तो मुँह खुला रहता है और उसका चेहरा भावहीन बना रहता है। उसका जबड़ा भी लटका सा रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके परिणाम स्वरूप कई बार माता-पिता ऐसे बच्चों को ताने मारकर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बुद्धू या मूर्ख</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उचित नहीं। अपितु उपचार करायें और सावधानी बरतें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एलर्जी</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बहुत सारे बच्चे किसी खास वातावरण या खान-पान को सहन करने में औरों की अपेक्षा बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं। ऐसे में वह वातावरण विशेष उन्हें हानि पहुँचा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि औरों को नहीं। इसके अन्तर्गत पराग कण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूसी</span>, फफूँदी, <span lang="hi" xml:lang="hi">पशु के बाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ खास सौन्दर्य प्रसाधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेयर डाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिंथेटिक कपड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ निश्चित दवाएँ और यहाँ तक की खाने-पीने की चीजें जैसे गेहूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गिरी आदि। इनमें से कुछ एलर्जी प्रतिक्रिया (</span>reaction<span lang="hi" xml:lang="hi">) की अभिव्यक्ति के रूप में हो सकती है। जैसा कि बच्चों का सबसे आम कारण उनकी नाक का निरंतर बहना या उन्हें अक्सर साधारण जुकाम पकड़ लेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चे का अचानक छींकना शुरु कर देना और उसकी नाक व आँखों में पानी टपकने लगना आदि श्वासजन्य एलर्जिकल कारण हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">त्वचा की एलर्जी होने पर ददोरे या दाने निकल आतें है या अक्सर चकत्ते उभर जाते हैं। एक्जिमा भी एक तरह से एलर्जी ही है। श्वसन मार्ग की भी कई एलर्जी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके परिणाम स्वरूप एलर्जिक श्वसनी शोथ और दमा हो जाता है। इन एलर्जिक स्थिति से निपटते हुए पर्याप्त धैर्य से काम लें। ज्यादातर बच्चे एलर्जिक प्रवृत्ति के साथ ही बड़े होते हैं। पर बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं उन्हें खांसी व जुकाम की एलर्जी घटने लगती है। इसके लिए ज्यादा बेहतर होगा कि घर पर कालीन और कमरे में सोफेदार व गद्दे युक्त कुर्सियाँ न हों। जितना ज्यादा से ज्यादा संभव हो धूल रहित वातावरण बनाएं। गूदडें भरे हुए खिलौने से भी बचा जाना चाहिए। आहार-चर्या व दिनचर्या पर संयम रखें। उपयुक्त प्रयोग से शिशुओं व बच्चों को एलर्जी सहित अनेक संक्रमणजन्य रोगों से बचा सकते हैं और अनेक स्वस्थ-निरोग जीवन का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सावधानियाँ</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जन्म के बाद शिशु का एक सामान्य परीक्षण शिशु रोग विशेषज्ञ से अवश्य करवाएं। यह बात विशेष रूप से तब महत्त्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब बच्चा समय से पहले जन्मा हो या समय पर जन्मा हो पर भार कम हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जन्म के तुरन्त बाद सांस लेनी शुरू की हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिशु का जन्म शल्यक्रिया से हुआ हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिशु का रंग नीला हो आदि। इससे आपको शिशु के बारे में आहार पूर्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निद्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्वसन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्नान तथा बच्चे के नाभिनाल की देखभाल सम्बन्धी सवालों के जवाब भी मिल जाएंगें। साथ ही साफ-सफाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीने योग्य पानी आदि के बारे में बेहतर जागरूकता से बच्चों पर कृमियों का संक्रमण काफी कम होता है।  बच्चों के लिए स्वत: ही दवा की दुकान या पड़ोसी की सलाह से दवा न खरीदें। बल्कि इसकी अपेक्षा डाक्टर से सम्पर्क करें। चिकित्सक से सम्पर्क के बिना किन्हीं औषधियों को जारी न रखें। बीमारी के दौरान बच्चे को ब्लाक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खिलौनों व पेंटिंग्स पत्रिका आदि में व्यस्त रखिए। इससे आपका बालक स्वस्थ रहेगा और आप भी परेशानियों से बचेंगे।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रोग विशेष</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:50:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>चीन के लिए स्वामी जी का प्लान</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डो</span><span lang="hi" xml:lang="hi">कलाम सीमा पर भारत और चीन के बीच बढ़ रहे तनाव के बीच योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने देश को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">प्लान-५</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि यदि देशवासी इस प्‍लान को मानेंगे तो सीमा पर अड़ा हुआ चीन भारत के समक्ष नाक रगड़ने के लिए मजबूर हो जाएगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा चीन के सबसे बड़े व्यावसायिक साझेदारों में भारत प्रमुख है। चीन की अर्थव्‍यवस्‍था का वृहद् हिस्‍सा चीनी उत्पादों का भारत को किए गए निर्यात पर निर्भर करता है। उदाहरणार्थ साल </span>2016<span lang="hi" xml:lang="hi"> में चीन ने भारत को </span>58.33<span lang="hi" xml:lang="hi"> बिलियन डॉलर सामान निर्यात किया</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2511/china-ke-liye-swami-ji-ka-plan"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/aaa.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डो</span><span lang="hi" xml:lang="hi">कलाम सीमा पर भारत और चीन के बीच बढ़ रहे तनाव के बीच योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने देश को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">प्लान-५</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि यदि देशवासी इस प्‍लान को मानेंगे तो सीमा पर अड़ा हुआ चीन भारत के समक्ष नाक रगड़ने के लिए मजबूर हो जाएगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा चीन के सबसे बड़े व्यावसायिक साझेदारों में भारत प्रमुख है। चीन की अर्थव्‍यवस्‍था का वृहद् हिस्‍सा चीनी उत्पादों का भारत को किए गए निर्यात पर निर्भर करता है। उदाहरणार्थ साल </span>2016<span lang="hi" xml:lang="hi"> में चीन ने भारत को </span>58.33<span lang="hi" xml:lang="hi"> बिलियन डॉलर सामान निर्यात किया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि भारत की तरफ  से चीन को निर्यात किए जाने वाले सामान की कीमत महज </span>11.76<span lang="hi" xml:lang="hi"> बिलियन डॉलर ही थी। अर्थात् चीन से भारत ने पांच गुनी कीमत का माल आयात किया। यह पांच गुना आयात ही </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">प्लान-5</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी जी ने कहा यदि भारत और चीन एक-दूसरे से आयात-निर्यात बंद कर दें तो भारत की अपेक्षा चीन को लगभग पांच गुने का नुकसान होगा। इस नुकसान से चीन की कमर टूट जाएगी। देश के आम जनमानस से भी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">प्लान-५</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में सहभागी बनने का आह्वान किया।</span></h5>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>राष्ट्र-चिंतन</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:49:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योग ही मात्र एक उपचार</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">है सम्पूर्ण विश्व में हाहाकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अराजकता और अंधकार</span>,</strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भौतिक चकाचौंध की खातिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तनावग्रस्त आदमी बेसुमार</span>,</strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब योग ही मात्र एक उपचार। सम्पूर्ण विश्व में ...</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कराह रही पूरी धरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">है कण-कण में दर्द भरा</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नक्सलवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पृथकतावाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवाद चतुर्दिक भीषण नरसंहार</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब योग ही मात्र एक उपचार है। सम्पूर्ण विश्व में ...</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अफगानिस्तान तालिबान से आक्रांत</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सीरिया में इस्लामिक स्टेट क्रूर दुर्दान्त</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कर रहा निर्दोष नागरिकों का कत्ल जैसे हिंस पशु खूंखार </span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब योग ही मात्र एक उपचार है। सम्पूर्ण विश्व में ...</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह </span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">व विश्व त्यागे परमाणु प्रहार की</span></strong></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2512/yog-hi-ek-matra-upchar"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/643.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">है सम्पूर्ण विश्व में हाहाकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अराजकता और अंधकार</span>,</strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भौतिक चकाचौंध की खातिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तनावग्रस्त आदमी बेसुमार</span>,</strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब योग ही मात्र एक उपचार। सम्पूर्ण विश्व में ...</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कराह रही पूरी धरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">है कण-कण में दर्द भरा</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नक्सलवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पृथकतावाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवाद चतुर्दिक भीषण नरसंहार</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब योग ही मात्र एक उपचार है। सम्पूर्ण विश्व में ...</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अफगानिस्तान तालिबान से आक्रांत</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सीरिया में इस्लामिक स्टेट क्रूर दुर्दान्त</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कर रहा निर्दोष नागरिकों का कत्ल जैसे हिंस पशु खूंखार </span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब योग ही मात्र एक उपचार है। सम्पूर्ण विश्व में ...</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह </span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">व विश्व त्यागे परमाणु प्रहार की चाह</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नित्य भ्रामरी और योगनिद्रा कर</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">छुड़ाता पागलपन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतार देता प्रचंड खुमार</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब योग ही मात्र एक उपचार है। सम्पूर्ण विश्व में ...</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">चीनी सीमा का विस्तार करा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सकता विध्वंशक वार</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">करो अभ्यास कपालभाति का ड्रेगन</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">होता इससे सातों चक्रों का जागरण</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अन्तर्मुखी ही समझेगा जीवन का सार</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब योग ही मात्र एक उपचार है। सम्पर्ण विश्व में ...</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">है पाकिस्तान आतंकियों का जन्मदाता</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जगजाहिर उसकी बर्बरता आओ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे शीर्षासन सिखलायें</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">यह करता मस्तिष्क स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब न होगा युद्ध-तकरार</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब योग ही मात्र एक उपचार है। सम्पूर्ण विश्व में ...</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्ति-व्यक्ति लें योग का व्रत है आज यह वैश्विक जरूरत</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">करेगी निरोगी तन-मन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ आचरण</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महर्षि पतंजलि का सपना साकार</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब योग ही मात्र एक उपचार। </span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मिट जायेगा सम्पूर्ण विश्व से हाहाकार</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रणविजय यादव कवि</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अररिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार</span></strong></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>कविता</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:47:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मृत्यु</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">आचार्य प्रद्युम्न जी महाराज</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2513/mrityu"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/454.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्यत</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">:</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन के दो छोर माने जाते हैं- प्रथम जन्म और दूसरा मृत्यु (जायते... विनश्यति)। जन्म के द्वारा जीवन अभिव्यक्त या प्रकट हो जाता है और मृत्यु के द्वारा अप्रकट। इसलिये व्याख्याकार जीवन को दो अंधेरों के बीच जलता हुआ एक चिराग बताते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रत संहिता के निर्माता कृष्णद्वैपायन (वेदव्यास) ने धृतराष्ट्र के मुख से सनत्सुजात ऋषि के समक्ष एक समस्या रखी कि मृत्यु क्या है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सनत्सुजात ने कहा - </span><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>'<span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमादं वै मृत्युमहं ब्रवीमि तथाऽप्रमादममृतत्वं ब्रवीमि।</span></strong></span> ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात् प्रमाद ही मृत्यु है और अप्रमाद ही अमृत है। प्रमाद के सिवाय इस भूतल पर मृत्यु नाम की अन्य कोई भी चीज नहीं है (नास्ति मृत्यु:)। इसी प्रकार की एक कथा ब्राह्मण ग्रन्थों में भी आती है कि प्रजापति ने सब पदार्थों को उत्पन्न करके उन्हें मरणधर्म से संयुक्त  कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु ब्रह्मचारी को अपने पास रख लिया। मृत्यु ने आग्रह किया कि कृपया इसमें भी मुझे भागीदार बना लीजिए। मृत्यु के आग्रह पर प्रजापति एक शर्त के साथ ब्रह्मचारी में भी उसको हिस्सा देने के लिए राजी हो गये। प्रजापति ने कहा कि ब्रह्मचारी जिस अहोरात्र में अग्रिहोत्र न करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तत्काल आप उसे पकड़ लें। अत: मान्यता है कि ब्रह्मचारी जिस अहोरोत्र में समिधाधान से अमृत अग्रि की परिचर्या नहीं करता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मृत्यु उसे पकड़ लेती है। दूसरे शब्दों में जीवात्मा ही वह वैश्वानर अतिथि है जो नरों में अतिथि रूप में बसा हुआ है। ब्रह्मचारी को मृत्यु से बचने के लिये प्रमादरहित होकर इस वैश्वानर अग्रि (आत्मा अग्रि) की परिचर्या करनी होती है। यजु. ३.१-३ कहता है:-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong><span style="color:rgb(35,111,161);">समिधाऽग्रिं दुवस्यत घृतैर्बोयताऽतिथिम्। आस्मिन् हव्या जुहोतन।। सुसमिद्धाय शोचिषे घृतं तीव्रं जुहोतन।</span></strong> <span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>अग्रये जातवेदसे।। तं त्वा समिद्भिरङ्गिरो घृतेन वर्धयामसि। बृहच्छोचा यविष्ठय।।  </strong></span>अर्थात् अपने सद्विचार और सद्भावरूपी समिधाओं की इस अग्रि में आहुति देनी होती है। ऋषि कहता है आसक्ति पूर्वक प्रकृति (षडिन्द्रियों के विषयों) के साथ सम्बद्ध होने का नाम ही प्रमाद है और यह साधक को निश्चित ही आत्माग्रि से विमुख कर देता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्राचीन ऋषि जब कहते हैं- </span><strong><span style="color:rgb(35,111,161);">'<span lang="hi" xml:lang="hi">मृत्योर्माऽमृतं गमय</span>’ '<span lang="hi" xml:lang="hi">मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्</span>’ (<span lang="hi" xml:lang="hi">यजु. ३.६०) </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">परं मृत्यो अ परेहि पन्थां यस्ते स्व इतरो देवयानात्</span>’ '<span lang="hi" xml:lang="hi">मृत्यो: पदं योपयन्तो यदैत</span>’ '<span lang="hi" xml:lang="hi">अन्तर्मुत्युं दधतां पर्वतेन</span>’ (<span lang="hi" xml:lang="hi">ऋग्. १०.१८.१</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">२</span>, </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong><span style="color:rgb(35,111,161);">४)</span></strong> तो इस प्रकार के सभी प्रसङ्गों में मृत्यु व अमृत को एक-दूसरे के प्रतिद्वन्द्वी के रूप में पढ़ा गया है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मृत्यु</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">समस्त अशुभ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमङ्गल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अशिव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दु:ख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कष्ट आदि का उपलक्षण है। इसी प्रकार </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अमृत</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">शुभ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मङ्गल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आनन्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शान्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्यता आदि का उपलक्षण है। एक जीवन के लिये अभिलषित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इष्ट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वांछित है और उपादेय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरा है अनभिलषित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनिष्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवांछित और हेय। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सृष्टि के आदिकाल से ही मनुष्य की यह आन्तरिक अभीप्सा सहज रूप से बहती हुई चली आ रही है। मनुष्य इस सत्य को कितना ही अनदेखा करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितना ही इस सत्य से पलायन (</span>Escape<span lang="hi" xml:lang="hi">) करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितना ही मुँह मोड़े तो भी अपनी इस अन्तरतम की माँग को हटा नहीं सकता। यह उसकी अन्तिम आवश्यकता है। यह सत्य वह साथ लेकर जन्मा है। मनुष्य के लिये इस तथ्य से बचकर निकल भागना असम्भव है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अन्य दृष्टि से इस विषय पर विचार करें तो स्पष्ट होता है कि भूतकाल के प्रति मर जाने का नाम है </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मृत्यु</span>’<span lang="hi" xml:lang="hi">। मृत्यु पुराने को नया बना देने वाली एक शक्ति विशेष है। आज जो बीज के रूप में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूमि में पहुँचते ही उसमें अंकुर फूट पड़ता है। बीज यदि न मरे तो अग्रिम जीवन की शुरुआत कैसे हो सकती है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अंकुर से पौधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पौधे से वृक्ष के विकास की प्रक्रिया में उत्तररूप के जन्म के लिये पूर्वरूप को मरना ही होता है। अथर्ववेद के ब्रह्मचर्य सूक्त में आचार्य के पाँचरूपों का वर्णन आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनमें से एक रूप मृत्यु भी है जिसको कि प्रथम स्थान पर रखा है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यो मृत्युर्वरुण: सोम ओषधय: पय:</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात् आचार्य मृत्यु है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरुण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औषधि है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गोदुग्ध है। यहाँ मन्त्र में आचार्य को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मृत्यु</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहने का तात्पर्य यही है कि आचार्य मृत्यु बनकर बालक के पशुरूप को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अबोध रूप को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अज्ञानी रूप को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उच्छृङ्खल रूप को मार कर मनुष्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषि व देवरूप में बदल देता है। ज्ञातव्य कि बालक के अशुभ-संस्कारों का नाश करना बहुत ही आवश्यक होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शुभ-संस्कारों का उत्पादन संभव हो सके। यह महान दोहरा दायित्व आचार्य ही निभा सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म विश्लेषक बहुत संवेदनशील रहस्य को प्रकट करते हैं कि उम्र बढ़ते-बढ़ते वृद्धावस्था में व्यक्ति को होना तो हल्का चाहिये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु अज्ञान के कारण वह अपने को अत्यधिक बोझिल बना लेता है। वह शरीर से ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मन से भी अत्यन्त कुरूप शिकायतों का ढेर लगाकर उत्साहहीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेबस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दु:खी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परेशान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पराधीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विषाद और तनाव से ग्रस्त हो जाता है। यही कारण है कि एक बूढ़ा व्यक्ति ऐसी दुरावस्था में पहुँच जाता है कि प्रकृति की ओर से मृत्यु की यह अद्भुत व्यवस्था न होती तो इस नरक से उसे मुक्ति भी कैसे मिल सकती है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मृत्यु एक झटके में सब कुछ को मिटाकर उसे फिर एक सुनहरा अवसर दे देती है। वह वृद्ध से बालक बनकर फिर उसी उत्साह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उमंग व तरंग से जीना आरम्भ कर देता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आप देखेंगे बालक के जीवन में वृद्ध के जीवन से सर्वथा विपरीत लक्षण देखने को मिलते हैं- एकदम निर्भार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीखने की अदम्य चाह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सदा प्रसन्न</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सौन्दर्य व प्रेम से भरा हुआ। जो वृद्ध अपने सम्पूर्ण जीवन के नीरस भूतकाल को मजबूर होकर ढो रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे ही अब बालक बनकर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान में जीना कितना सौभाग्यप्रद व हर्षप्रद होता  है। यह है मृत्यु का चमत्कार।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मनुष्य यदि ध्यान से सृष्टि का अवलोकन करें तो मृत्यु में कष्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दु:ख जैसा कुछ है ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस शर्त यह है कि वह स्वाभाविक हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन का सहज परिणाम हो। जैसे एक वृक्ष के पत्ते हरी-भरी अवस्था से धीरे-धीरे पीले होकर कितने आराम से वृक्ष से अलग हो जाते हैं। इसी प्रकार मयूर आदि पक्षियों के पुराने पंख झड़ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रक्रिया इतनी स्वाभाविक होती है कि उन्हें पता भी नहीं चलता। हम दूर क्यों जाएँ  हमारे शरीरों में लाखों कोशिकाएँ रोज मर जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे हमको तनिक सी भी बाधा महसूस नहीं होती। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि जो कुछ भी हम से अलग होता है यदि उसकी सहज स्वीकार्यता हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह कभी भी हमारे लिये कष्टदायक नहीं होता। मृत्यु एक अर्थ में जो हमारे पास था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका अलग होना ही तो है। यदि हम इस सत्य को समझकर स्वीकार कर लेते हैं तो यहाँ आनन्द के सिवाय कुछ भी हमें दिखाई ही नहीं देगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषि कहता है (आनन्दाद्धि खल्विमानि भूतानि जायन्ते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आनन्देन जातानि जीवन्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आनन्दं प्रयन्त्यभिसंविशन्ति) अर्थात् सब भूतों की उत्पत्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रलय (मृत्यु) के मूल में आनन्द का वास है। आनन्द के सहारे ही यह अनादि-अनन्त सृष्टि चक्र सतत प्रवृत्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मृत्यु भी हमारी आनन्दावस्था ही तो है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महापुरुष कहते हैं कि जो जीवन भूतकाल के प्रति हर क्षण भूलना जानता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही श्रेष्ठतम जीवन है। जैसे कोई गरुड़ आकाश में उड़ता हुआ अपने पीछे कोई संस्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई हल्की सी भी रेखा नहीं छोड़ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि धरती पर चलने वाला प्राणी सदैव अपना चिन्ह छोड़ता हुआ आगे बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही उसका दुखद पक्ष बन जाता है। ज्ञानी का जीवन गरुड़ की तरह होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि धरती पर चलने  वाले प्राणियों की भाँति। वेद में मनुष्य को आदेश दिया गया है कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा:</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका ठीक-ठीक भाव यही हो भी सकता है कि जीवन ऐसा हो कि भूतकाल के संस्कारों से बोझिल न हो। जीवन में कर्म तो हों पर उसके संस्कार न बनें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बिना ज्ञान की भित्ति पर खड़े हुए कैसे सम्भव हो सकता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सम्भव है तो मात्र </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिक्षण भूतकाल के प्रति मरते रहने से</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन के इस विशिष्ट कला से युक्त होकर कर्म करने से नित्य हल्केपन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्साह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवीनता की कल्पना की जा सकती है। ऐसा जीवन हल्का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेममय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शान्तिमय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगीतमय व सर्वथा मुक्त जीवन होगा। फिर कौन मृत्यु से डरेगा। आइये हम सब भी नित नवीनता युक्त मृत्यु का वरण करें और जीवन को धन्य बनायें।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>सनातन वैभव</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:46:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनुभूति आपकी</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पित्ताशय के  कैंसर (सीएजीबी) से निजात</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">15</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जनवरी 2015 को हम अपनी पत्नी जानकी देवी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्र 54 वर्ष की रिपोर्ट लेकर पतंजलि आये और रिपोर्ट के आधार पर उपचार प्रारम्भ हुआ। कुछ ही दिनों के अंदर मरीज में विश्वास वापस लौटा। टाटा ने तीन माह बाद जिस रोगी के लिए डेथ सर्टिफिकेट दे दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी टाटा के डाक्टर ने पतंजलि के उपचार के बाद 100 प्रतिशत ठीक होने का सर्टिफिकेट भी दिया। पतंजलि चिकित्सालय के प्रयास से मेरी पत्नी आज भी जीवित है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हम अपनी पत्नी जानकी देवी उम्र 54 वर्ष को पित्ताशय में गांठ की शिकायत</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2514/anubhuti-apki"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/13.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पित्ताशय के  कैंसर (सीएजीबी) से निजात</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">15</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जनवरी 2015 को हम अपनी पत्नी जानकी देवी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्र 54 वर्ष की रिपोर्ट लेकर पतंजलि आये और रिपोर्ट के आधार पर उपचार प्रारम्भ हुआ। कुछ ही दिनों के अंदर मरीज में विश्वास वापस लौटा। टाटा ने तीन माह बाद जिस रोगी के लिए डेथ सर्टिफिकेट दे दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी टाटा के डाक्टर ने पतंजलि के उपचार के बाद 100 प्रतिशत ठीक होने का सर्टिफिकेट भी दिया। पतंजलि चिकित्सालय के प्रयास से मेरी पत्नी आज भी जीवित है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हम अपनी पत्नी जानकी देवी उम्र 54 वर्ष को पित्ताशय में गांठ की शिकायत पर स्थानीय चिकित्सक के परामर्श से टाटा मेमोरियल अस्पताल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई में ईलाज हेतु ले गये। वहां जाकर जांच शुरू हो गयी एवं रिपोर्ट के आधार पर मुझे कीमोथरैपी शुरू करने की सलाह दी गयी। चिकित्सक के कठिन संकेत से घबराकर कीमोथैरेपी प्रारम्भ कराया व इसी के साथ-साथ मैंने पत्नी को लेकर पतंजलि में डॉ. एस.सी. मिश्रा जी से भी विचार-विमर्श किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने टाटा की कीमोथरैपी के साथ-साथ कुछ आयुर्वेदिक दवाईयां लेने की सलाह दी। इसके उपरान्त मैंने कीमोथैरपी के दौरान पतंजलि द्वारा बतायी गई दवा का भी सेवन कराया एवं अप्रैल माह में जब मैं टाटा मेमोरियल जांच के लिए पुन: गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जांच में काफी लाभ देखने को मिला। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विशेष:</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> बाम्बे टाटा मेमेारियल सेंटर की पूर्व रिपोर्ट में सीरम सीए टेस्ट के अनुसार 40.6 था जबकि 26-04-2016 को यह टेस्ट रिपोर्ट में 2.37 हो गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो नार्मल के निकट है। यह पतंजलि की औषधि से हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने अब मेरी धर्मपत्नी को पतंजलि द्वारा दी गई औषधियों व कीमों से सामान्य जीवन जीने योग्य बना दिया। डॉ. साहब ने पतंजलि की औषधियों में सर्वकल्प क्वाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कायाकल्प क्वाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संजीवनी वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिलासिंदूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताम्रभस्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमृतासत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभ्रक भस्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हीरक भस्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वर्णवसंत मालती रस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोती पिष्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रवाल पंचामृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गिलोयघन वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैशोर गुग्गुल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृद्धिवाधिका वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांचनार गुग्गुल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरोग्यवर्धिनी वटी इत्यादि लेने की निर्धारित अनुपान के साथ सलाह दी। जिनका पूर्ण चिकित्सकीय अनुशासन के साथ पित्ताशय के कैंसर निवारण हेतु उपयोग कर अपनी पत्नी के जीवन को स्वस्थ व सुखमय बनाया। इसके लिए हम पतंजलि के चिकित्सक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्यवर व आचार्यश्री एवं आयुर्वेदिक चिकित्सालय का आभार प्रकट करते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">भवदीय</span>,</h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">धर्मात्मा सिंह</span></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">४०३</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिवांस रेजिडेन्सी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दानापुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;" align="center"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;" align="center"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योग प्राणायाम ने बदली मेरी जीने की दिशा</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रम पूज्य स्वामी जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं उषा सापरा तलवंडी से हूँ। मेरा वर्ष 2002 में एक्सीडेंट हो गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मेरी रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी। मैं छ: माह तक बेड रेस्ट पर थी। सभी नित्यकर्म भी पलंग पर ही होते थे। डॉ. के द्वारा बताये व्यायाम कर रही थी। फिर मुझे बी.पी. भी हो गया तथा सिरदर्द भी बहुत रहता था। मुझे किसी मिलने वाले ने योग-प्राणायाम के बारे में बताया तथा इसे आस्था चैनल पर देखकर नित्य करने को कहा। मैंने करना प्रारम्भ किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मैं बहुत जल्दी ही थक जाती थी। इतना जरूर था कि इस अभ्यास से मैं स्वस्थ होने लगी। तभी वर्ष 2008 में योग शिविर ज्वाइन किया तथा वहाँ पर नियमित कक्षा करने लगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने न सिर्फ मुझे अच्छी तरह से योगाभ्यास सिखाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मुझे अपने साथ सहयोगी शिक्षक के रूप में भी प्रशिक्षित किया। आज मैं पूर्ण रूप से न सिर्फ स्वयं स्वस्थ हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नित्य-प्रात: शांतिपूर्ण हनुमान मंदिर में तथा सायंकाल बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में महिलाओं की योग कक्षा लेती हूँ। स्वामी जी आपको कोटि-कोटि धन्यवाद जो आप पूरे विश्व में योग के माध्यम से आरोग्य लाभ पहुँचा कर हम जैसे लोगों की शक्ति व प्रेरणा बन रहे हो। </span></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">भवदीय</span>,</h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">उषा सापरा</span></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">३.ई१. तलवंडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span></h5>
<h5 style="text-align:right;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रोग- वृक्क निष्क्रियता (रीनल फेल्योर)</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आ</span><span lang="hi" xml:lang="hi">धुनिक समय में वृक्क निष्क्रियता के रोगी अत्यधिक देखने को मिलते है। यह बीमारी हर आयु वर्ग के स्त्री-पुरुष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों में भी देखने को मिलती है। इसकी चिकित्सा बहुत कठिन एवं खर्चीली है अर्थात जीवन्त पर्यन्त के लिए डायलाइसिस अथवा गुर्दा प्रत्यारोपण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद भी जीवन पर्यन्त आधुनिक औषधियों का सहारा लेना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु आयुर्वेद चिकित्सा से उपरोक्त दोनों से छुटकारा मिलने की संभावना सुनिश्चित रहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा पतंजलि आयुर्वेद में हुए अनेक प्रयोग बताते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्क निष्क्रियता के मुख्य कारण हैं- उच्चरक्तचाप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुमेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्क संबंधी बीमारियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी की कमी (दस्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उल्टी)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एण्टी बायोटिक का अधिक मात्रा में सेवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विषाक्त रसायन आदि। इसी प्रकार एक रोगिणी का उदाहरण हम प्रस्तुत कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका नाम श्रीमति अनिता देवी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयु ४० वर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवसाय-ग्रहणी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पता- अलीगढ़ (उ.प्र.) है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आतुरालय में उत्क्लेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमजोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उच्च रक्तचाप सहित अनेक रोगों वाली अपनी रिपोर्ट लेकर पतंजलि योगपीठ आई थी। सभी प्रकार की रिपोर्ट देखने के बाद दिनांक ८.७.२०१७ को उनको एडमिट कर लिया गया। लगभग १० दिन तक निम्न चिकित्सकीय आयुर्वेदिक औषधियों से रोगिणी का उपचार चला जिसमें- </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">01.       गिलोयघन वटी- (2-2 गोली दिन में ३ बार) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">02.       वृक्क दोषहर क्वाथ एवं तृणपंच मूल क्वाथ  (30-30 मिली दिन में दो बार) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">03.       स्व रक्तचिकित्सा </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">04.       मुक्तावटी 2-2 गोली एक दिन छोड़कर दिन में दो बार आदि औषधियां देने के उपरान्त 10 दिन बाद पुन: रक्त परीक्षण किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें महत्वपूर्ण तथ्य सामने आयें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो निम्न प्रकार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे- </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा पूर्व             10 दिन बाद</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>BP<span lang="hi" xml:lang="hi"> 150/100              130-90</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>utra<span lang="hi" xml:lang="hi">  106</span>% mg<span lang="hi" xml:lang="hi">            88</span>% mg</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>crt<span lang="hi" xml:lang="hi"> 3.9 </span>% mg<span lang="hi" xml:lang="hi">                2.3</span>%mg</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार रोगिणी का स्वास्थ्य ठीक होने के उपरांत पतंजलि से छुटटी दी गयी तथा उन्हें परामर्श दिया गया कि वह पुन: एक माह बाद औषधि अनुशासन का पालन करके आने पर अपना चैकअप कराये। श्रद्धेय स्वामी जी व श्रद्धेय आचार्यश्री के आशीर्वाद व संरक्षण में संचालित इस आयुर्वेदिक स्वास्थ्य अभियान में देश-विदेश के प्रत्येक नागरिक के उत्तम स्वास्थ्य के प्रति पतंजलि का यह अथक प्रयास सराहनीय है। मैं भी ऐसी आरोग्यवर्धक रिपोर्ट को लेकर सुखद अनुभव करता रहता हूँ। </span></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">भवदीय</span>,</h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. सी.एम. कन्सल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एम.डी. (आयुर्वेद)</span></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि आयुर्वेद चिकित्सालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार</span></h5>
<h4 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कन्धे के कैंसर (साइटो लिम्फोमा) से मिली मुक्ति</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मै</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> देवेश कुमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाँव व पोस्ट-अलहदादपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिला-अलीगढ़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उ.प्र. का मूल निवासी हूँ। मुझे 14 जनवरी 2017 को कन्धे में कैंसर का पता चला और मैंने तुरन्त निकटवर्ती प्रसिद्ध चिकित्सालय में उपचार प्रारम्भ कराया। चिकित्सक ने हमें औषधियों का सेवन करते रहने के साथ-साथ कीमोथेरेपी कराने का निर्देश दिया। इसी के साथ अपने किसी निकटस्थ के परामर्श पर मैं हरिद्वार के पतंजलि चिकित्सालय पहुँचा। पतंजलि योगपीठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार के चिकित्सालय में डॉ. एस.सी. मिश्रा जी से मिला और मैंने उनके मार्गदर्शन में ३ महीने की दवा लेना शुरू किया तथा साथ ही ्ढ्ढढ्ढरूस् में कीमोथैरेपी भी करायी। पतंजलि में उपचार के दौरान मुझे सर्वकल्प क्वाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कायाकल्प क्वाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संजीवनी वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिला सिंदूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताम्र भस्म सहित अनेक औषधियां दी गईं। भोजन में मुझे अंकुरित अन्न तथा सहिजन की सब्जी आदि लेने की सलाह दी गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका मैंने पूरी तरह से पालन किया। लम्बे समय बाद दुबारा चेक कराने पर मुझे १०० प्रतिशत स्वास्थ्य लाभ मिल चुका था। मैं और मेरा पूरा परिवार आपका व पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी का आभारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके नेतृत्व में संचालित चिकित्सकीय सेवाओं से आज पूरा विश्व स्वास्थ्य लाभ ले रहा है। </span></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">भवदीय</span>,</h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">देवेश कुमार</span>,</h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">अलीगढ़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>दिव्य अनुभूति</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2514/anubhuti-apki</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:45:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
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                <title>पतंजलि परिसर में 71 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता दिवस देश में आयी प्राकृतिक आपदाओं में कालकवलित हुए लोगों के प्रति संवेदनायें भी प्रकट की गयीं</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार </span>-<span lang="hi" xml:lang="hi"> स्वतंत्रता दिवस पर पतंजलि योगपीठ परिसर में 100 फीट ऊंचा तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस समारोह हर्षपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर देश के शहीदों के सम्मान में पतंजलि योगपीठ के परमाध्यक्ष पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज एवं योगपीठ के महामंत्री श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने ध्वजारोहण कर राष्ट्र के 7 लाख से अधिक बलिदानियों को नमन किया। साथ ही देश वासियों से स्वदेशी अपनाने और देश से विदेशी कम्पनियों के सामानों का बहिष्कार कर गुलामी से</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2515/patanjali-parisar-me-71-va-swatantrata-divas-samaroh"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/313.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता दिवस देश में आयी प्राकृतिक आपदाओं में कालकवलित हुए लोगों के प्रति संवेदनायें भी प्रकट की गयीं</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरिद्वार </span>-<span lang="hi" xml:lang="hi"> स्वतंत्रता दिवस पर पतंजलि योगपीठ परिसर में 100 फीट ऊंचा तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस समारोह हर्षपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर देश के शहीदों के सम्मान में पतंजलि योगपीठ के परमाध्यक्ष पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज एवं योगपीठ के महामंत्री श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने ध्वजारोहण कर राष्ट्र के 7 लाख से अधिक बलिदानियों को नमन किया। साथ ही देश वासियों से स्वदेशी अपनाने और देश से विदेशी कम्पनियों के सामानों का बहिष्कार कर गुलामी से मां भारती को बचाने तथा भारत को 2040 तक विश्व का सुपर पावर देश बनाने का संकल्प दिलाया गया। समारोह में स्वामी रामदेव जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा आर्थिक शक्ति सम्पन्न देश ही विश्व का सुपर पावर देश बनने की सामर्थ्य रखता है। उन्होंने देशवासियों से आवाह्न किया कि हम देशवासी महात्मा गांधी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चंदशेखर आजाद व भगत सिंह जैसे लाखों शहीदों की तरह 100 प्रतिशत स्वदेशी व स्वदेश सेवा का व्रत लें। उन्होंने बताया कि भारत को 2040 तक विश्व का सुपर पावर देश बनाने कि लिए पतंजलि परिवार के नेतृत्व में सम्पूर्ण देश में अभियान स्तर पर कार्य किया जायेगा। स्वामी जी ने कहा पतंजलि के पुरुषार्थ से शीघ्र ही सम्पूर्ण विश्व आयुर्वेद को भी शीर्ष स्तर से स्वीकार करेगा। उन्होंने कहा इसके लिए श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी के नेतृत्व में अथक-अहर्निश पुरुषार्थ चल रहा है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी जी ने कहा 200 वर्ष के आजादी अभियान की संकल्पना का मूर्तरूप है पतंजलि का संपूर्ण स्वदेशी अभियान। देशवासियों को जाति एवं मजहब से बाहर निकल कर भारतीय होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत माता की यशस्वी वीर संतान होने पर गर्व करना चाहिए।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/322.jpg" alt="32"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ के महामंत्री श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने इन दिनों देश के विविध प्रांतों में आयी प्राकृतिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> आपदाओं आदि में कालकवलित हुए लोगों के प्रति पतंजलि परिवार की ओर से संवेदनायें प्रकट करते हुए कहा कि भारत प्राकृतिक विविधताओं वाला देश है। हमें इन आपदाओं से प्राकृतिक ढंग से ही निपटना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी प्रयासों से यदि इन पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पुन: ये आपदायें आना असम्भव है। आचार्य श्री ने कहा आजादी तो हमें मिल गयी पर अभी देश को असमानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अशिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीबी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी आदि से मुक्त कराना है। आचार्यश्री ने हेल्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एजूकेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एग्रीकल्चर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्योरिटी एवं इंडस्ट्री आदि हर क्षेत्र में भारत को सक्षम बनाने हेतु सभी देश वासियों को 12 से 16 घंटे कठोरतम मेहनत करने का आवाहन किया। अंत में श्रद्धेय आचार्य एवं पूज्य स्वामी जी ने उपस्थित अन्य गणमान्यों व हजारों लोगों के माध्यम से देश के करोड़ों लोगों को अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुरूप देश के लिए योगदान देने का संकल्प दिलवाया। साथ ही देशवासियों का आवाहन किया कि सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आध्यात्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शैक्षणिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक व औद्योगिक क्षेत्र की जो भी व्यक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगठन व संस्थायें राष्ट्रहित में श्रेष्ठ कार्य कर रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका पूरे तन-मन से सहयोग करें। श्रद्धेय प्रद्युम्न जी महाराज ने भी अपने विचार रखे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञातव्य कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पतंजलि ने सम्पूर्ण भारत भर में सोशल मीडिया पर स्वदेशी अभियान चला रखा है। १५ अगस्त तक मात्र 10 दिन के अल्प अवधि में ही पतंजलि के इस अभियान को 300 करोड़ बार रोटेशन में देखे जाने का दुनिया भर में एक इतिहास कायम हुआ। जिसमें 20 हजार करोड़ यूनिक यूजर शामिल हुए।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समारोह में आचार्यकुलम के विद्यार्थियों ने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत सम्भाषण एवं कवितायें प्रस्तुत कर उत्साह वर्धन किया तथा पराक्रम के स्वयं सेवियों ने राष्ट्र गीत समर्पित किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर पतंजलि योगपीठ के कर्मयोगियों के साथ-साथ पतंजलि हर्बल फूडपार्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि ग्रामोद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि आयुर्वेद रिसर्च सेंटर आचार्यकुलम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्य फार्मेसी के कार्यकर्ता भाई बहिनों के साथ आचार्यकुलम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि विश्वविद्यालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि आयुर्वेद कालेज के छात्र-छात्रओं एवं शिक्षक आदि ने सहभागिता की। इसके अतिरिक्त अनेक विशेष अतिथि एवं मुश्लिम संगठनों के पदाधिकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यकर्ता इस समारोह में उपस्थित थे।</span></h5>
<p><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/383.jpg" alt="38"></img></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/341.jpg" alt="34"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/375.jpg" alt="37"></img></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>राष्ट्र निर्माण</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>सितम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 21:43:12 +0530</pubDate>
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