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                <title>नवम्बर - योग संदेश</title>
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                <title>परम पूज्य योग-ऋषि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज की शाश्वत प्रज्ञा से नि:सृत शाश्वत सत्य ...</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:center;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>जीवन सूत्र</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(1) <strong>जीवन का निचोड़/निष्कर्ष-</strong> जब भी बड़ों के पास बैठते हैं तो जीवन के सार तत्त्व की बात होती है। कुछ निष्कर्ष साररूप में यहाँ लिख रहे हैं। यू तो जीवन अनादिकाल से चल रही तथा अनन्तकाल तक चलने वाली एक शाश्वत प्रक्रिया प्रवाह या प्रकृति परेश्वर के नियमों का विधान हैं। इसमें कुछ अति महत्त्वपूर्ण मुद्दे मूल्य या आदर्शों को यहां रख रहे हैं। <br /><strong>श्रेष्ठतम जीवन -</strong> प्रथम कोटि का श्रेष्ठतम जीवन है- एक बार भी अशुभ में प्रवृत्त नहीं होना। आहार विचार, वाणी, व्यवहार स्वभाव सम्बंध, आचरण के स्तर पर पूर्ण निर्दोष जीवन जीना। एक बार</h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3645/eternal-truth-emanating-from-the-eternal-wisdom-of-the-most-revered-yoga-rishi-revered-swami-ji-maharaj"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/kanya-pujan--(10).jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:center;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>जीवन सूत्र</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(1) <strong>जीवन का निचोड़/निष्कर्ष-</strong> जब भी बड़ों के पास बैठते हैं तो जीवन के सार तत्त्व की बात होती है। कुछ निष्कर्ष साररूप में यहाँ लिख रहे हैं। यू तो जीवन अनादिकाल से चल रही तथा अनन्तकाल तक चलने वाली एक शाश्वत प्रक्रिया प्रवाह या प्रकृति परेश्वर के नियमों का विधान हैं। इसमें कुछ अति महत्त्वपूर्ण मुद्दे मूल्य या आदर्शों को यहां रख रहे हैं। <br /><strong>श्रेष्ठतम जीवन -</strong> प्रथम कोटि का श्रेष्ठतम जीवन है- एक बार भी अशुभ में प्रवृत्त नहीं होना। आहार विचार, वाणी, व्यवहार स्वभाव सम्बंध, आचरण के स्तर पर पूर्ण निर्दोष जीवन जीना। एक बार भी त्रुटि होने से गलत टेंडैंसी प्रवृत्ति निर्मित हो जाती और ये जन्म जन्मान्तरों तक दुःख देती है। इसलिए एक बार भी झूठ नहीं बोलो, चोरी नहीं करो, दुराचार नहीं करो तो जीवनभर के लिए दूसरों का भरोसा खत्म हो जायेगा तुम्हारा सैल्फ कोंफीडेंस भी हिल जायेगा। एक क्षण भी अशुभ में प्रवृत्त नहीं हो यह प्रवृत्ति आदत स्वभाव बन जायेगा। पूर्ण शुद्ध निर्दोष जीवन प्रथम कोटि का एक बार भी गलती हुई तो द्वितीय श्रेणी का बार-2 गलती करना तृतीय व चतुर्थ थर्ड फोर्थ क्लास लाइफ ये कम है।<br /><strong>पुरुषार्थ -</strong> जीवन का श्रेष्ठतम तत्त्व है पुरुषार्थ पूरा जीवन पुरुषार्थ का सार व विस्तार है जीवन। धर्मार्थ काम मोक्ष ये पुरुषार्थ चतुष्टय हैं। प्रमाद ये तो जीते जी मृत्यु है। सारे पाप अपराध पतन की जड़ है। किसी भी स्तर पर किसी भी तरह का प्रमाद होना ही नहीं चाहिए। योग- स्वस्थ, सुख, समृद्धि, शन्ति, सफलता विजय का मूलाधार है। जीवन का निर्माण व अन्तिम तत्त्व निर्वाण का मूल तत्त्व है योग। <br />सम्पत्ति-वैल्य-प्रोस्पेरिटी- संसार में हर व्यक्ति वैल्थ क्रियेशन में लगा है धन दौलत सम्पत्ति साम्राज्य बढ़ा रहा है। अर्थ पैसा करेंसी बैंक बलैंस के साथ-साथ पारमार्थिक अर्थ दैवी सम्पद, नवधा भक्ति, ज्ञानधन, रामधन, सेवाधन, प्रेमधन, आनन्द धन, योगधन, न योगात् परंधनम्, न योगात् परं बलम् न योगात् परं सुखम्, जीवन के व्यवहारिक पारमार्थिक दोनों तत्त्वों को एक साथ साधने की आवश्यकता है। <br /><strong>बहिष्कार -</strong> सिंथेटिक दवा चिकित्सा की गुलामी दासता, शिक्षा की गुलामी मैकाले की शिक्षा पद्धति, आर्थिक गुलामी, वैचारिक सांस्कृतिक गुलामी रोग भोग नशा वासना की गुलामी पराधीनता दासता से देश को मुक्ति दिलाने हेतु सब देशवासियों को साहस के साथ सामूहिक रूप से इसका बहिष्कार करना होगा जब सर्वश्रेष्ठ शिक्षा चिकित्सा अर्थ व्यवस्था व जीवन पद्धति का सनातन विकल्प हमारे पास है तो फिर घटिया का चुनाव क्यों? इसके लिए बहुत बड़े आंदोलन की आवश्यकता है, सौ करोड़ से अधिक जागरूक सनातन धर्मियों को संगठित व शक्तिशाली रूप से ओजस्विता शौर्य पराक्रम के साथ उण्दण्ब व सनातन विरोधी सभी राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय ताकतें के विरूद्ध लड़ना व जीतना होगा। <br />योग करना कराना- योग करना कराना है तथा योग को जीवन में जीना है। योग ही जीवन का आधार व मंजिल है। योग ही जीवन का सबसे बड़ा प्रयोजन, उपयोगिता, उपलब्धि, गन्तव्य, मन्तव्य, कर्त्तव्य, साधना, सिद्धान्त, साध्य व अराध्य है। </h5>
<h5 style="text-align:right;"><strong>स्वामी रामदेव</strong></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शाश्वत प्रज्ञा</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:59:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
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                <title>संकल्प की शक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;">आचार्य बालकृष्ण</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3646/the-power-of-determination"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/balkrishna1_1473857734.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;">    हाल  ही में पतंजलि विश्वविद्यालय के सभागार में युवा धर्म संसद का आयोजन किया गया। सच में युवा धर्म संसद शब्द के अर्थ में ही बहुत कुछ छिपा है। धर्म, युवा और संसद- इन तीन शब्दों की अलग-अलग बड़ी-बड़ी व्याख्या की जा सकती है। शास्त्रों में एक बात कही है कि जब दम हो, सामथ्र्य हो, जज्बा हो, ऐसी भावना हो कि मैं दुनिया को किधर से किधर पलट सकता हूँ। जब आप अपने आप को ऐसे जज्बात से ओतप्रोत, अंदर से ऊर्जान्वित, शक्ति से परिपूर्ण पाते हैं तो उस समय यदि हमारी दिशा और गति सही ओर हो गई तो हमें लक्ष्य अवश्यमेव प्राप्त होता है। अन्यथा उस समय यदि सही मार्ग पर नहीं गए तो बुढ़ापे में सब व्यर्थ है क्योंकि तब कुछ करने का सामथ्र्य रहता ही नहीं है। </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>समस्त वसुधा को अपना मानने का सामर्थ्य केवल सनातन में </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम् की है। शब्द बहुत छोटा है किन्तु इसका अर्थ बहुत गहरा है कि समस्त वसुधा को अपना मानने का सामर्थ्य केवल सनातन में है, अन्यत्र कहीं भी नहीं है। यदि युवा धर्म संसद के कार्य को संक्षिप्तिकरण के साथ निवेदित करें तो हमारा पहला लक्ष्य वसुधैव कुटुम्बम् की भावना को विश्व में स्थापित करना और दूसरा लक्ष्य उसको स्थापित होने में जो बाधक तत्व हैं उन्हें सही रास्ते पर लेकर आना। आप समझ ही गए होंगे कि बाधक तत्व कौन हैं, जो टुकड़े-टुकड़े में बँटे हुए हैं। <br />हम तो उदार हैं, हमने प्रार्थना करते हुए भी यही कहा है कि- </h5>
<h5 style="text-align:center;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया। </strong></span><br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दु:खभाग् भवेत्।। </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">अर्थात् सुखी व निरोगी रहें। हमने अपने लिए, पड़ोसी के लिए, धर्म के लिए, प्रांत के लिए, मत के लिए, पंथ के लिए, जाति के लिए, मजहब के लिए तो कुछ नहीं मांगा। सर्वे में तो सब आते हैं। सर्वे में धर्मात्मा, पापी, असुर, विधर्मी सब प्रकार के लोग आते हैं। तो हमारी इतनी उदारता, विशालता, व्यापकता है। परन्तु उस उदारता को बनाए रखने के लिए भी विश्व में सर्वे भवन्तु सुखिन:... का उद्घोष करने वाले लोग इकट्ठा हों, इसलिए उन लोगों के समूहों को बढ़ाना भी जरूरी है। किन्तु हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि कहीं यह मात्र नारा ही न शेष रह जाए, उद्घोष करने वाले या नारा लगाने वाले लोग कम न हो जाएँ। यही युवा धर्म संसद है। शास्त्रों में जो उद्घोषणाएँ हमारे ऋषियों ने की, महापुरुषों ने की, उस उद्घोषणा को, उस शब्द को शक्ति के रूप में क्रियान्वयन करना हमारा परम कर्तव्य है। हमारे श्रद्धेय विवेकानन्द जी ने उपनिषद् के वाक्य उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान निबोधत को प्रचारित किया था कि उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। उठो और जागो दो अलग-अलग शब्द हैं। कई बार हमारी आँखें खुली होती हैं और हम सोचते हैं कि हम जगे हैं किन्तु हम सोए हुए होते हैं। जब तक हमारी दृष्टि शास्त्रों वाली न बन जाए, हमारी सुनने की प्रवृत्ति शास्त्रों की ओर न हो जाए, हमारी गति हमारी परम्पराओं की ओर न चले, तब तक हमारा सोना, जगना, देखना सुनना सब व्यर्थ है। हमें ऊर्जा से इतना परिपूर्ण होना होगा कि हम अपने महापुरुषों के बताए मार्ग की ओर गति कर सकें और जो इस मार्ग पर पदच्युत हैं उन्हें इस मार्ग पर आरूढ़ कर सकें।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>अभाव का नाम त्याग नहीं</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">युवा में ऊर्जा होती है, एक जज्बा होता है, परन्तु जब त्याग की बात आती है तो उसकी विभिन्न परिभाषाएँ हैं। जब हमारे पास कुछ कम होता है तो हमें लगता है कि हम बहुत कुछ त्याग कर सकते हैं। अभाव का नाम त्याग नहीं है। जब एक बच्चा प्रतिस्पर्धा की तैयारी करता है तो सोचता है कि मैं प्रशासनिक सेवा में जाऊँगा, मैं ज्यूडिशियरी में जाऊँगा या विभिन्न सेवाओं में जाऊँगा तो मैं देश को बदलूँगा। मैं सादगी के साथ धर्म पूर्वक अपने जीवन को आगे बढ़ाऊँगा। हमने बहुत से युवाओं को देखा है जिनमें ट्रेनिंग काल में देश को बदलने का एक जज्बा होता है किन्तु 10-15 वर्ष बाद देखते हैं कि वो देश को तो नहीं बदल पाते किन्तु देश में व्याप्त विकृति का हिस्सा बन जाते हैं। यह किसी राजनैतिक पार्टी की बात नहीं अपितु व्यक्ति की बात है कि राजनेताओं के भी यही हाल हैं, जब तक पद नहीं है तब तक बहुत अच्छे हैं और जैसे ही पद मिल जाता है उनका व्यक्तित्व ही बदल जाता है। तो देश को कौन बचाएगा, कौन देश को आगे बढ़ाएगा। बहुत पीड़ा होती है यह सोचकर।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>गलत रास्ते से न पाने की चाहत रखना भी बहुत उत्तम है</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">प्राप्त किया हुआ या पाया हुआ तो निश्चित ही बहुत कठिन होता है परन्तु गलत रास्ते से न पाने की चाहत रखना भी बहुत उत्तम बात है। पहले यह तो संकल्प ले लें कि हमको जो भी पाना है, वह हम गलत रास्ते से प्राप्त नहीं करेंगे। बहुत पीड़ा होती है जब हम देखते हैं कि हमारा देश भ्रष्टाचार में आगे बढ़ रहा है। हम धर्म, संस्कृति, मूल्यों व आदर्शों की बात करते हैं, तो हम संकल्प लें कि जब तक धर्म, संस्कृति, मूल्यों व आदर्शों को धरती पर नहीं उतारेंगे, हम विश्राम नहीं करेंगे। हममें ये स्थापित करने की दृढ़ता होनी चाहिए। भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि- </h5>
<h5 style="text-align:center;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। </strong></span><br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">   आप यह क्यों मानते हो कि भगवान श्रीकृष्ण की शक्ति, उनकी ऊर्जा आपकी आत्मा के भीतर उतर चुकी है और आपको इस कर्तव्य का, इस दायित्व का निर्वहन करना है। हम सब महापुरुषों का सम्मान करते हैं, आध्यात्मिकता में आरूढ़ हैं, पूज्य संतों के प्रति भी हमारी श्रद्धा है, निष्ठा है परन्तु यह भी मन में भाव हो कि हममें से न जाने कितने पूर्व जन्म में ऋषि, संत या महापुरुष रहे होंगे। हममें उन्हीं पूर्वजों की आत्मा उतर कर आई है। उनकी परम्परा को आगे बढ़ाने का प्रयास करो। हमें जैसा देश चाहिए हमें भी उसके अनुरूप वैसा ही बनना होगा। हम चाहते हैं कि देश में राम, कृष्ण पैदा हों परन्तु हमारे आस-पड़ोस में। हमें स्वयं राम, कृष्ण बनना होगा, उनके आचरण को जीना होगा, उनकी मर्यादा का पालन करना होगा। यदि हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा?</h5>
<h5 style="text-align:center;"><strong><span style="color:rgb(186,55,42);">आत्मन: प्रतिकूलानि, परेषां न समाचरेत्।। </span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;">अर्थात् धर्म का सर्वस्व जिसमें समाया है, ऐसे धर्म का सार सुनिए और सुनकर हृदय में उतारिए कि अपनी आत्मा को जो दु:खदायी लगे, वैसा आचरण दूसरों के साथ मत करिए।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>संकल्प में अपरिमित शक्ति है</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">शास्त्रों में बहुत सारी बातें सामान्य रूप में कही गई हैं। यह भी कहा गया है कि जैसा तुम अपने लिए नहीं चाहते, वैसा व्यवहार तुम दूसरों के साथ न करो। पर समाज में उल्टा ही दिख रहा है। शास्त्रों में पशु के जो लक्षण बताए गए हैं, वो ही देखने को मिल रहे हैं जैसे- बलवान से डरना और कमजोर को डराना। परम्परा ऊपर से नीचे की ओर चली आ रही है। देश, समाज व परिवार में प्राय: यही देखने को मिल रहा है। हमारी मर्यादा हमें यह नहीं सिखाती है। इसीलिए अंधेरे से मत डरो, तमस जितना भी ज्यादा क्यों न हो, अपनी अंतर्चेतना को जाग्रत करते हुए उस अंधेरे में दीपक बनकर जितना प्रकाश प्रकाशित कर सकें, अवश्य करें। इस संकल्प के साथ अपने जीवन को आगे बढ़ाएँ। संकल्प में अपरिमित शक्ति है। कई बार हम सोचने से भी डरते हैं, अच्छा संकल्प करने से भी डरते हैं। मैंने ऐसा सोचा, मैं कैसे कर पाऊँगा? अरे सोचोगे, तभी तो कुछ कर पाओगे। भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉक्टर अब्दुल कलाम आजाद के शब्द कई बार स्मरण होते हैं, उन्होंने कहा था कि स्वप्न वह नहीं है जो तुम नींद में देखते हो, स्वप्न वह है जो तुम्हें चैन से सोने न दे। स्वप्न देखना है तो ऐसे देखो।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>स्वदेशी के जागरण का संकल्प</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">हम गुरुकुल में पढ़ते थे, स्वदेशी व राष्ट्रवाद का बड़ा आग्रह था। हमें कहा गया कि विदेशी वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना है। तभी से मन में भाव था कि कहीं पर भी जाएँ, अपने स्वेदशी के लिए प्रयास करेंगे। जब हम शिक्षा ग्रहण कर गुरूकुल से बाहर आए उस समय लोगों के मन में यह भाव था कि स्वदेशी वस्तुएँ अच्छी नहीं होती, विदेशी वस्तुओं के प्रति विशेष आकर्षण था। हमको यह देखकर पीड़ा होती थी कि आजादी के इतने वर्षों के पश्चात भी देश में कोई ऐसी कम्पनी खड़ी नहीं हो सकी जो दैनंदिन उपयोग में आने वाली वस्तुओं का उत्पादन कर सके। महात्मा गांधी, विनोभा भावे से लेकर हमारे वीर, शहीद, क्रांतिकारी, महात्माओं ने अपने-अपने सामथ्र्य से स्वदेशी की पुनस्र्थापना के लिए भरसक प्रयास के बाद भी स्वदेशी का भाव क्यों लोगों के मन में जाग्रत नहीं हो सका, ये बातें हमारे मन को कचोटती थी। तब पूज्य स्वामी जी के नेतृत्व में हमने योग आयुर्वेद का आंदोलन प्रारंभ किया। ट्रस्ट की भूमि के लिए 12,500 रुपए की आवश्यकता थी, वह भी हमारे पास नहीं थे। हमारे पास एक व्यक्ति भी ऐसा नहीं था जो इतने पैसे हमें दे सके। हमने दो व्यक्तियों से 5-5 हजार रुपए लिए और 2500 रुपए हमारे पास थे, उनको मिलाकर ट्रस्ट की स्थापना की गई। वह दिन कभी हमारी आँखों से ओझल नहीं हुआ। आज भी जब हम यह बात करते हैं तो सारा दृश्य वर्तमान हो उठता है। एक ही आश्रय था, प्रभु की कृपा और सनातन धर्म तथा संस्कृति को दृढ़ता से आगे बढ़ते देखने की लालसा और उसके लिए संकल्प हमारे सहचर थे। उन सहचरों को साथ लेकर अनवरत परिश्रम और पुरुषार्थ करते रहे।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>दृढ़ता में विकल्प, संकल्प में न्यूनता तथा त्याग में कभी प्रतिशत नहीं होता</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">दुनिया में बहुत प्रतिस्पर्धा है, किन्तु संकल्प से सब कुछ सम्भव है। आज आप और हम जहाँ खड़े हैं उसमें संकल्प का बहुत बड़ा योगदान है, इसलिए संकल्प में कभी विकल्प नहीं मत आने देना। दृढ़ता में कभी विकल्प नहीं रखा जाता, संकल्प में कभी न्यूनता नहीं छोड़ी जाती, त्याग में कभी प्रतिशत नहीं होता। हम सोचते हैं कि त्याग तो करेंगे पर अमुक वस्तु का करेंगे अमुक का नहीं करेंगे, इतना प्रतिशत करेंगे- इतना नहीं करेंगे। त्याग में प्रतिशत नहीं होता है, संकल्प में विकल्प नहीं होता है। कभी विकल्प रहित संकल्प और अखण्ड-प्रचण्ड पुरुषार्थ के साथ त्याग करने की भावना रखोगे तो आपका मार्ग प्रशस्त होता जाएगा। प्रभु आपके संकल्प को अवश्य पूरा करेंगे। यह देश हमारा ही है और इसे हमें ही बनाना है, यह हमारा ही तो दायित्व है। हम चिंता नहीं करेंगे, देश के बारे में नहीं सोचेंगे तो कौन सोचेगा? आइए! देश व धर्म के लिए सोचें क्योंकि कुछ लोगों को लगता है कि देश व धर्म हमसे है किन्तु सत्य यह है कि इस देश से हम हैं, धर्म से हम हैं। राष्ट्र देवो भव:। हमें अपने को बचाने के लिए राष्ट्र व धर्म को बचाना होगा।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>पतंजलि बना स्वदेशी की पुनस्र्थापना का पर्याय</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">आज पतंजलि विविध सेवा कार्यों को विश्वव्यापी बनाकर स्वदेशी की पुनस्र्थापना के पर्याय या उदाहरण के रूप में आपके मध्य है। पतंजलि के भिन्न-भिन्न प्रकार के बहुत सारे सेवा कार्य हैं। पतंजलि के बड़े कार्यो की बात करें तो आयुर्वेद को आज एविडेंस बेस्ड मेडिसिन के रूप में स्थापित करने का जो भगीरथ प्रयास है, वह पतंजलि के माध्यम से ही हो रहा है। सरकार अपना काम कर रही है, संस्थाएँ अपना काम कर रही हैं। हम किसी से तुलना नहीं कर रहे। इसके साथ-साथ पतंजलि शिक्षा, चिकित्सा, खाद्य उत्पाद, कृषि तथा यहाँ तक की सूचना एवं प्रौद्योगिकि में भी देश को स्वदेशी से आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहा है। पतंजलि का स्वदेशी अभियान अब गति पकड़ चुका है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>विधि पर स्थिर रहें और निषेध की ओर प्रवृत्त न हों</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">यदि जीवन में आगे बढऩा है तो हमें अपनी भूमिका स्वयं तय करनी होगी। स्वयं पर कभी शंका मत करना क्योंकि जो स्वयं हार मान लेता है उसे कोई विजय नहीं दिला सकता। इसलिए चाहे परिस्थितियाँ विपरीत ही क्यों न हों, कभी हार मत मानना। प्रतिकूलताएँ तो आएँगी और अपना काम करेंगी, संघर्ष को आना होगा तो आएगा और वह अपना काम करेगा। </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>अपनी सुसुप्त चेतना को स्वदेशी के संकल्प के साथ जाग्रत करके राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करें</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">यह तकनीक का युग है, सर्वप्रथम तकनीक में भी स्वदेशी खोजने का प्रयास करना चाहिए और यदि कोई विकल्प न मिले तो विदेशी उत्पाद प्रयोग कर लेना चाहिए। परन्तु शून्य तकनीक से बने उत्पादों के लिए तो स्वदेशी का संकल्प लेना ही होगा। साबुन, शैम्पू, खाने-पीने की वस्तुएँ, पानी की बोतल इनमें कौन सी तकनीक है, कौन सा रॉकेट साइंस है जो हम इन पर निर्भर हों। इन छोटे-छोटे संकल्पों से देश का पैसा देश में रहेगा और देश उन्नति के पथ पर आरूढ़ होगा। अपनी सुसुप्त चेतना को एक संकल्प के साथ जाग्रत करके राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करें।</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <title>पतंजलि विश्वविद्यालय को उच्च अंकों के साथ मिला NAAC का A+ ग्रेड</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;">      नैक द्वारा मूल्यांकन का परिणाम घोषित होने के पश्चात आज विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मयोगियों को सम्बोधित करते हुए, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत को समृद्ध रूप से आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में विकसित करने हेतु सक्षम युवा शक्ति को गढऩा है और यह तभी सम्भव है जब युवाओं का व्यक्तित्व योगमूलक हो और सभी आयामों में सामथ्र्य के साथ-साथ एक सुदृढ़ चरित्र एवं व्यक्तित्व का विकास हो। यह कहते हुए कि आज की शिक्षा अधिकाधिक नौकरी केन्द्रित हो गई है, उन्होंने</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-05/amt_1745.jpg" alt="AMT_1745" width="1000" height="667" /><br />परम</h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3647/patanjali-university-got-a--grade-from-naac-with-high-marks"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/amt_1745.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;">   नैक द्वारा मूल्यांकन का परिणाम घोषित होने के पश्चात आज विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मयोगियों को सम्बोधित करते हुए, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत को समृद्ध रूप से आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में विकसित करने हेतु सक्षम युवा शक्ति को गढऩा है और यह तभी सम्भव है जब युवाओं का व्यक्तित्व योगमूलक हो और सभी आयामों में सामथ्र्य के साथ-साथ एक सुदृढ़ चरित्र एवं व्यक्तित्व का विकास हो। यह कहते हुए कि आज की शिक्षा अधिकाधिक नौकरी केन्द्रित हो गई है, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पतंजलि विश्वविद्यालय का उ‌द्देश्य युवाओं में जीवन और समाज के हर क्षेत्र में नेतृत्व परक गुणों का विकास करना है। उन्होंने आगे कहा कि आज पूरे विश्व को ऐसी युवा शक्ति की आवश्यकता है जिसको अपने अतीत का समग्र बोध हो, जिसमें वर्तमान की चुनौतियों का समाधान करने का सामथ्र्य हो और जो भविष्य की संभावित चुनौतियों का प्रामाणिक आंकलन कर सके। उन्होंने इस बात पर ध्यान दिलाया कि पतंजलि विश्वविद्यालय की समस्त शैक्षणिक गतिविधियों का उद्देश्य ऐसे युवाओं को शिक्षित करना है जो राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करने के साथ ही वैश्विक धरातल पर भी पूरी मानवता का नेतृत्व कर सकें।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-05/amt_1745.jpg" alt="AMT_1745" width="1000" height="667"></img><br />परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने जोर देकर कहा कि समाज की विभिन्न संस्थायें विशिष्ट क्षेत्रों में क्षमता संवर्धन कर सकती हैं लेकिन समग्र रुप से राष्ट्रीय एवं वैश्विक परिस्थिति का नेतृत्व करने का कार्य शिक्षा व्यवस्था के गर्भ से ही हो सकता है, और इसका प्रमाण पतंजलि विश्वविद्यालय है। उन्होंने बताया कि योग, आयुर्वेद एवं स्वदेशी के सफल आन्दोलन के पश्चात युवाओं के मानस को सम्यक रूप से गढऩे का कार्य पतंजलि विश्वविद्यालय और पतंजलि संस्थाओं द्वारा हो रहा है, और गुरुकुल, आचार्यकुलम् एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के माध्यम से भारतीय दृष्टि से वैश्विक नेतृत्व का सामर्थ्य रखने वाले युवा मानस को सिंचित किया जा रहा है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि विगत 20 वर्षों की अपनी यात्रा में पतंजलि विश्वविद्यालय ने योगविद्या के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिमानों को स्थापित किया है।<br />परम पूज्य स्वामी जी ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय का उद्देश्य प्राचीन वैदिक ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान का एकीकरण एवं समन्वय है, और यहाँ युवा शक्ति की जीवन शैली, विज्ञान एवं अध्यात्म के समन्वय से आप्लावित है जिससे भारत की समग्र प्राचीन ज्ञान परम्परा एवं संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन हो सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि युवाओं को खण्ड-खण्ड नहीं बल्कि अखण्ड भारत का बोध हो। उन्हें भारत की समूची सांस्कृतिक यात्रा एवं सामूहिक प्रज्ञा की समझ हो।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-05/amt_1793.jpg" alt="AMT_1793" width="900" height="601"></img><br />इस अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने अपने सम्बोधन में प्रमुखता से कहा कि चूंकि पतंजलि विश्वविद्यालय विशिष्ट उद्देश्य से गठित किया गया है अत: विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कर्मयोगी सदस्यों को, स्वयं को, मानको के अनुरूप स्थापित करना होगा। किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति को अन्तिम नहीं मानना चाहिए बल्कि उसके संवर्धन के लिए निरन्तर प्रयास आवश्यक है।<br />इसी श्रृंखला में, भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एन.पी. सिंह, आई.ए.एस. (सेवानिवृत) ने कहा कि आज के वैश्विक मानकों में उच्च शिक्षा संस्थानों का लक्ष्य है कि ऐसे युवा व्यक्तित्व का विकास किया जाए जो एक उत्तरादायी तथा उत्पादक शक्तियों के नागरिक के रूप से परिपूर्ण हो और राष्ट्र एवं विश्व के लिए उपयोगी हो। पतंजलि विश्वविद्यालय वैश्विक मानकों पर आदर्शतम व्यक्तित्व गढऩे में उच्च शिक्षा संस्थान है।<br />केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. श्रीनिवास वरखेडी जी ने कहा कि यद्यपि पतंजलि विश्वविद्यालय वास्तव में NAAC की A++ की अहर्ता रखता है, चूंकि प्रथम मूल्यांकन में सामान्यत: थोड़ी न्यूनता रखकर ही मूल्यांकन किया जाता है, अत: पतंजलि विश्वविद्यालय को NAAC की A+ श्रेणी मिली है।</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्था समाचार</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आचार्यकुलम् में ‘एजुकेशन फॉर लीडरशिप’ के तहत मानस गढक़र विश्व नेतृत्व को तैयार हो रहे युवा</title>
                                    <description><![CDATA[<ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5>हरिद्वार की इकाइयों से कई गुना बड़ा व विस्तृत स्वरूप होगा हरियाणा में स्थापित होने जा रहे आचार्यकुलम्, पतंजलि ग्लोबल गुरुकुलम्, पतंजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय तथा पतंजलि वेलनेस की इकाइयों का : पूज्य स्वामी जी महाराज</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>हम आचार्यकुलम् के माध्यम से माइंड क्रिएशन कर सशक्त मानस गढ़ रहे हैं : पूज्य स्वामी जी महाराज</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>हरियाणा में जल्द शुरू होगी पतंजलि की बड़ी शिक्षा क्रांति : पूज्य आचार्य जी महाराज</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>पतंजलि की महत्वाकांक्षी सेवाओं में हरियाणा सरकार करेगी पूर्ण सहयोग : हरियाणा मुख्यमंत्री</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;">          हाल ही में आचार्यकुलम् का 12वाँ वार्षिकोत्सव ‘एजुकेशन फॉर लीडरशिप’ की थीम के साथ पतंजलि विश्वविद्यालय के विशाल</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>आचार्यकुलम्</strong></span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3648/in-acharyakulam--under--education-for-leadership---youth-are-shaping-their-mindset-and-getting-ready-for-global-leadership"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/amt_2921.jpg" alt=""></a><br /><ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5>हरिद्वार की इकाइयों से कई गुना बड़ा व विस्तृत स्वरूप होगा हरियाणा में स्थापित होने जा रहे आचार्यकुलम्, पतंजलि ग्लोबल गुरुकुलम्, पतंजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय तथा पतंजलि वेलनेस की इकाइयों का : पूज्य स्वामी जी महाराज</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>हम आचार्यकुलम् के माध्यम से माइंड क्रिएशन कर सशक्त मानस गढ़ रहे हैं : पूज्य स्वामी जी महाराज</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>हरियाणा में जल्द शुरू होगी पतंजलि की बड़ी शिक्षा क्रांति : पूज्य आचार्य जी महाराज</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>पतंजलि की महत्वाकांक्षी सेवाओं में हरियाणा सरकार करेगी पूर्ण सहयोग : हरियाणा मुख्यमंत्री</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;">     हाल ही में आचार्यकुलम् का 12वाँ वार्षिकोत्सव ‘एजुकेशन फॉर लीडरशिप’ की थीम के साथ पतंजलि विश्वविद्यालय के विशाल सभागार में मनाया गया। इस अवसर पर हरियाणा राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में पधारे तथा पतंजलि के शिक्षा अभियान की भरपूर सराहना की।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>आचार्यकुलम् का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्व नेतृत्व के लिए गढऩा</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">स्वामी जी ने कहा कि मैं हमेशा दो बातों के ऊपर बल देता हूँ जिसमें पहला है हमारा वैचारिक अधिष्ठान तथा दूसरा उस विचार, संस्कार व स्वाभिमान को जीना है। उन्होंने बताया कि इस आचार्यकुलम् के वार्षिकोत्सव की थीम ‘एजुकेशन फॉर लीडरशिप’ है। एजुकेशन फॉर लीडरशिप से अभिप्राय बच्चों में वह सामथ्र्य गढऩे से है जिससे वे शिक्षित-दीक्षित होने के उपरान्त विभिन्न क्षेत्रों में विश्व का नेतृत्व कर सकें। हम अपने विद्यार्थियों में वह सामर्थ्य गढऩा चाहते हैं। हम उनके भीतर उत्तम व्यक्तित्व, नेतृत्व व चरित्र विकसित कर उन्हें अपने कुलवंश व भारतवर्ष को गौरव बढ़ाने वाले बनाना चाहते हैं। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों में वह सामथ्र्य गढऩा है जो ऋषि वशिष्ठ ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम में गढ़ा, ऋषि संदीपनी ने योगेश्वर श्री कृष्ण में गढ़ा, चाणक्य ने चंद्रगुप्त में गढ़ा, स्वामी विरजानंद ने महर्षि दयानंद में गढ़ा और गुरु विद्यारण्य स्वामी जी ने राजा कृष्णदेव राय में गढ़ा था।</h5>
<p><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-05/amt_2921.jpg" alt="AMT_2921" width="900" height="600"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>एक विचार संपूर्ण व्यक्तित्व को रूपांतरित कर सकता है</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">स्वामी जी महाराज ने कहा कि जीवन में विचार का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। केवल एक विचार मनुष्य का पूरा व्यक्तित्व परिवर्तित कर देता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, सम्राट चंद्रगुप्त, महर्षि दयानंद सरस्वती, रानी लक्ष्मीबाई, रानी वेलू नचियार आदि सभी का व्यक्तित्व एक विचार से ही बना है। यहाँ तक की स्वामी रामदेव भी एक विचार का ही परिणाम है। गुरुकुल में हमने स्वदेशी का संकल्प लिया और इस विचार ने मुझे रामदेव बना दिया। हम आचार्यकुलम् के माध्यम से माइंड क्रिएशन कर सशक्त मानस गढ़ रहे हैं।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>विद्यार्थी अभिनय के द्वारा पात्र की पात्रता को अपने जीवन में आत्मसात कर लेता है</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">वार्षिकोत्सव कार्यक्रमों में थीम के अनुसार विभिन्न महापुरुषों-  श्री राम, श्री कृष्ण, कृष्णदेव राय, विद्यारण्य स्वामी जी, महाराणा प्रताप, चंद्रगुप्त मौर्य, महर्षि दयानंद, रानी लक्ष्मीबाई सहित परम पूज्य स्वामी जी व परम श्रद्धेय आचार्यश्री के चरित्रों व नेतृत्व से समाहित प्रेरक झाँकी का मंचन किया गया। शिक्षा नीति में बदलाव कर हमारी गौरवपूर्ण संस्कृति को धूमिल करने का षड्यंत्र मैकाले ने किया। पाठ्यक्रम में कई महान व्यक्तित्वों को स्थान ही नहीं दिया गया। यदि उनके विषय में बच्चे जानें तो उनके समान महान बन सकते हैं तथा उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित हो सकती है। स्वामी जी ने बताया कि इन प्रसंगों व नाटकों के माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व की भावना को विकसित करना है। उनकेमन में एक विचार का बीजारोपण करना है जो उनके जीवन को एक दिशा दे सके। एक विचार को मन में धारण करना और उसे आत्मसात करके जीना, यही जीवन का परम सत्य है। इस भाव चेतना के साथ महापुरुषों पर आधारित कहानियों के दृष्टांत को अभिनय के द्वारा जब एक विद्यार्थी निभाता है तो उस पात्र की पात्रता को अपने जीवन में आत्मसात कर लेता है। जिससे उसके भीतर एक अलग प्रकार का वैचारिक अधिष्ठान निर्मित्त हो जाता है और उसके भीतर व रच-बस जाता है। हमने जिन उदाहरणों को, जिन आदर्शों को बहुत बार सुना है, उनको तो रखा ही है, लेकिन कुछ ऐसे आदर्श उदाहरण, ऐसे प्रसंग जिन पर कम ध्यान गया है उनको भी समाहित करने का प्रयास किया है। इसलिए हमने राजा कृष्णदेव राय, विद्यारण्य स्वामी जी, महाराणा प्रताप के साथ वीरों के योगदान को यहां पर रेखांकित किया। बच्चों के द्वारा उनका प्रसंग एक मात्र नाटक नहीं है। ये उनके जीवन की वास्तविकता बनेगा और इस देश की तकदीर व तस्वीर बदलेगा। इन्हीं भावनाओं के साथ इन बच्चों के माध्यम से ये प्रस्तुतियां दी गईं।</h5>
<p><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-05/amt_3143.jpg" alt="AMT_3143" width="1000" height="666"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>महापुरुषों का जीवन दर्शन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम व योगेश्वर श्रीकृष्ण</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पूज्य स्वामी जी महाराज ने कहा कि श्री राम ने अपने आचरण व सम्पूर्ण जीवन से कई मर्यादाएँ स्थापित कीं। आदर्श राजा के साथ-साथ उन्होंने आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति आदि मर्यादाएँ स्थापित कीं। उनका सम्पूर्ण जीवन एक दर्शन है। उनसे प्रेरणा लेकर व्यक्ति जीवन को मर्यादित बना सकता है। इसी प्रकार योगेश्वर श्रीकृष्ण ने महर्षि संदीपनी से ६४ कलाओं की शिक्षा ली और अपने कला-कौशल व शौर्य से पाप का अंत किया। इनकी विचित्र लीलाओं में जीवन का रहस्य छिपा है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>चाणक्य व सम्राट चंद्रगुप्त</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">स्वामी जी महाराज ने बताया कि चंद्रगुप्त मौर्य, मौर्य वंश के संस्थापक थे। चंद्रगुप्त द्वारा मगध क्षेत्र में पाटलिपुत्र में शक्तिशाली नंद वंश को उखाड़ फेंकने में आचार्य चाणक्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आचार्य चाणक्य एक कुशल कूटनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री व कुशल राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने नंदवंश का नाश करने के लिए चन्द्रगुप्त मौर्य जैसे साधारण व्यक्ति को चुना और अपनी कूटनीतियों व राजनैतिक विद्वतता से सम्राट बना दिया। चंद्रगुप्त ने मगध के अत्याचारी शासकों से त्रस्त जनता को मुक्ति दिलाने के लिए आचार्य चाणक्य की सहायता ली और अपना राज्य स्थापित किया।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>महर्षि दयानंद सरस्वती व स्वामी विरजानंद जी</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">महर्षि दयानन्द सरस्वती आधुनिक भारत के विचारक, चिन्तक तथा आर्य समाज के संस्थापक थे। उन्होंने वेदों के प्रचार-प्रसार के लिए आर्यसमाज की स्थापना की। वेदों की पुन:प्रतिष्ठा के लिए उन्होंने ‘वेदों की ओर लौटो’ का नारा दिया और वेदों को अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपने गुरु स्वामी विरजानंद के स्वप्रों को साकार करने के लिए गुरुकुलों की स्थापना की। हम उन्हें एक आदर्श पुरुष के रूप में मानते हैं।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>हरियाणा में जल्द स्थापित होंगे आचार्यकुलम्, पतंजलि ग्लोबल गुरुकुलम्, पतंजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय तथा पतंजलि ग्लोबल वैलनेस</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">कार्यक्रम में पूज्य स्वामी जी महाराज ने घोषणा करते हुए बताया हम पतंजलि के माध्यम से जल्द ही हरियाणा में आचार्यकुलम्, पतंजलि ग्लोबल गुरुकुलम्, पतंजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय तथा पतंजलि ग्लोबल वैलनेस प्रारंभ करने जा रहे हैं जिसका स्वरूप हरिद्वार की इकाइयों से कई गुना बड़ा व विस्तृत होगा। इन प्रकल्पों की स्थापना से लाखों लोग शिक्षा-दीक्षा, संस्कार और सनातन का बोध प्राप्त कर सकेंगे। शिक्षा, चिकित्सा, सांस्कृतिक, वैचारिक, रोगों, भोगों की गुलामी, ग्लानि व कुण्ठाओं के स्थान पर भारतीय शिक्षा, चिकित्सा, धर्म-अर्थ-काम व मोक्ष के पुरुषार्थ चतुष्ट्य का दर्शन पूरा होगा।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पतंजलि जल्द करेगा हरियाणा में शिक्षा की बड़ी क्रांति</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">कार्यक्रम में परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी को पतंजलि में आमंत्रित कर शैक्षणिक गतिविधियों से परिचय कराने का उद्देश्य हरियाणा में पतंजलि द्वारा शिक्षा की बड़ी क्रांति प्रारंभ करने से पहले उनके मन में उसका बीजारोपण करना था। उन्हें दिखलाना था कि पतंजलि के शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को विश्व नेतृत्व के लिए कैसे तैयार किया जा रहा है। हम सनातन के गौरव को पुन: धरातल पर उतारने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उसी के मूत्र्त रूप को हम अपने कर्म, व्यवहार व आचरण के द्वारा दिखाने का प्रयास करते हैं।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पतंजलि की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की पूर्ति में हरियाणा सरकार करेगी पूर्ण सहयोग : हरियाणा मुख्यमंत्री</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे हरियाणा प्रान्त के मुख्य मंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘मैं गद्गद हूँ कि परम पूज्य स्वामी जी महाराज अपनी जन्मभूमि हरियाणा की धरती पर वर्तमान से सौ गुना अधिक क्षमता के पतंजलि ग्लोबल आचार्यकुलम्, पतंजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय तथा पतंजलि वेलनेस निर्माण की योजना पर कार्य कर रहे हैं। हरियाणा सरकार इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की पूर्ति में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>वार्षिकोत्सव में गरिमामयी उपस्थिति</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी रवीन्द्र पुरी जी महाराज तथा स्वामी हरिचेतनानंद जी महाराज आदि संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने पतंजलि योगपीठ परिवार द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों व सेवा प्रकल्पों की भरपूर सराहना की।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>शैक्षणिक व क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में विजेता विद्यार्थी पुरस्कृत</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">इस भव्य कार्यक्रम में परम पूज्य स्वामीजी द्वारा सत्र 2023-24 के कक्षा 5-12 में प्रथम-द्वितीय-तृतीय स्थान प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को 1.5 लाख रुपए के नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही विविध योग, क्रीड़ा व कला प्रतियोगिताओं में विजयी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। आदर्श विद्यार्थी सम्मान अनमोल व प्रतिभा को तथा सर्वश्रेष्ठ सदन का पुरस्कार आपस सदन को मिला।<br />इस पावन अवसर पर यूरोपियन अंतर्राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के अध्यक्ष प्रो. रोबर्टो जी, भारत में अंतर्राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष मोहंती जी, आचार्यकुलम् की उपाध्यक्षा आदरणीया डॉ. ऋतंभरा शास्त्री ‘बहन जी’, प्राचार्या श्रीमती स्वाति मुंशी जी, उप-प्राचार्य श्रीतापस कुमार बेराजी, स्वामी अर्जुनदेव जी, समन्वयिका श्रीमती दीपाजी, मुख्य छात्रावास अधीक्षक व क्रीड़ाध्यक्ष श्री अमित जी, सभी संन्यासीगण, आचार्यवृंद, कर्मचारीगण, विद्यार्थी व अभिभावकगण सहित सम्पूर्ण पतंजलि परिवार उपस्थित रहा।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>आवासीय शिक्षण संस्थान ‘आचार्यकुलम्’</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">आचार्यकुलम, कक्षा 5 से 12 तक के लिए अपनी तरह का एक आवासीय, सह-शिक्षा सीबीएसई संबद्ध विद्यालय है, जिसकी स्थापना 2013 में परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज और आयुर्वेद शिरोमणि श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी के दिव्य आशीर्वाद और मार्गदर्शन से की गई थी। आचार्यकुलम में, छात्र-छात्राओं को सर्वांगीण शिक्षा प्रदान की जाती है जो वैदिक और आधुनिक शिक्षा (सीबीएसई) का एक सुंदर मिश्रण है। हमारा मानना ​​है कि बुद्धिमत्ता और चरित्र ही सच्ची शिक्षा का मार्ग है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);">आचार्यकुलम् में प्रवेश संबंधी जानकारी</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">सत्र 20२५-202६ के लिए कक्षा ५ से ९ तथा कक्षा ११ (बालक एवं बालिकाओं) हेतु प्रवेश प्रारंभ हैं।<br />प्रवेश परीक्षा संवाद के लिए www.acharyakulam.org पर ऑनलाइन पंजीकरण सोमवार, दिनांक १८ नवंबर २०२४ से शुरू हो रहा है। ‘संवाद’ के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि शुक्रवार, दिनांक २० दिसम्बर २०२४ है। पंजीकरण शुल्क १३०0 रुपये है। ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा की तिथि रविवार, दिनांक ०५ जनवरी 202५ है। पंजीकरण फॉर्म भरते समय ऑनलाइन परीक्षा केंद्र का चयन किया जा सकता है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>प्रवेश हेतु  आयु सीमा</strong></span><br />1 अप्रैल, 202५ तक कक्षा ५ के लिए आयु सीमा<br />कक्षा ५ के लिए     : 9 से 11 वर्ष<br />कक्षा ६ के लिए : 10 से 12 वर्ष<br />कक्षा ७ के लिए : 11 से 13 वर्ष<br />कक्षा ८ के लिए : 12 से 14 वर्ष<br />कक्षा ९ के लिए : 13 से 15 वर्ष </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>परीक्षा केंद्र</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">1. जम्मू, 2. चंडीगढ़, 3. दिल्ली, 4. हिसार, 5. करनाल, 6. जालंधर, 7. हरिद्वार, 8. बरेली, 7. लखनऊ, १0. नोएडा, 11. प्रतापगढ़, १२. वाराणसी, १३. जयपुर, १४. जोधपुर, 15. भोपाल, 16. इंदौर, 17. जबलपुर, 18. अहमदाबाद, 19. सूरत, 20.पटना, 21.मुजफ्फरपुर, 22.भागलपुर, 24. धनबाद, 25. रायपुर, 26.कोलकाता, 27. जलपाईगुड़ी, 28. गुवाहाटी, 29. भुवनेश्वर, 30. मुंबई, 31. नागपुर, ३2. पुणे, 33. हैदराबाद, 34. बेंगलुरु तथा 35. चेन्नई।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>मुख्य विशेषताएँ</strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>अंग्रेजी माध्यम में सी.बी.एस.ई. पाठ्यक्रम के साथ संस्कृत माध्यम में वैदिक शिक्षा का समावेश।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>बालकों व बालिकाओं हेतु अलग-अलग शिक्षण कक्ष व छात्रावास।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>स्मार्टक्लास बोर्ड से सुसज्जित कक्षाएँ।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>प्रतिदिन योग- हवन (यज्ञ)</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>वातानुकूलित छात्रावास सुविधा।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>संतुलित व पोषक, शुद्ध शाकाहारी भोजन।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सुयोग्य व अनुभवी आचार्यवृन्द।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>स्तरीय कला-विज्ञान व कम्यूटर प्रयोगशालाएँ।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सुव्यवस्थित हरित व स्वच्छ परिसर।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>विविध खेलों के कुशल प्रशिक्षकगण।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>विश्वस्तरीय बास्केटबाल, कबड्‌डी व हैन्डबाल के सिंथेटिक कोर्ट।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>वातानुकूलित बहु-उद्देशीय हॉल - इंडोर स्पोर्टस सुविधा।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>विद्यार्थियों हेतु नियमित कार्यशालाएँ।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>24x7 विद्युत आपूर्ति व आर.ओ. शोधित पेय जल।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>24x7 चिकित्सा वाहन व चिकित्सक की उपलब्धता।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>24x7 सुरक्षाकर्मियों व सी.सी.टी.वी. द्वारा निगरानी।</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>नोट : </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">प्रवेश परीक्षा ‘संवाद’ का परिणाम हमारे स्कूल की वेबसाइट- www.acharyakulam.org पर घोषित किया जाएगा। </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>अधिक जानकारी के लिए संपर्क सूत्र</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पता : आचार्यकुलम, पोस्ट-पतंजलि योगपीठ, पतंजलि योगपीठ चरण-1 के पास, एनएच-58, हरिद्वार-249405, उत्तराखंड। <br />दूरभाष : +91-1334-273400, 8954890551, 8954890253 <br />ई-मेल : info@charyakalam.org<br />वेबसाइट : www.acharyakulam.org</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्था समाचार</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3648/in-acharyakulam--under--education-for-leadership---youth-are-shaping-their-mindset-and-getting-ready-for-global-leadership</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:56:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘एजुकेशन फॉर लीडरशिप’ की थीम के साथ पतंजलि गुरुकुम् का वार्षिकोत्सव संपन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;">        परम पूज्य स्वामी जी महाराज तथा परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने लगभग ३ दशक पूर्व स्वदेशी का संकल्प लिया था तब उन्होंने स्वदेशी शिक्षा, स्वदेशी चिकित्सा, स्वदेशी उत्पाद तथा स्वदेशी भाषा के आंदोलन को प्रारंभ किया था। वह छोटी सी चिंगारी आज विराट् जनांदोलन का रूप ले चुकी है। इस लम्बे कालखण्ड में पतंजलि के बैनर तले कई आंदोलन चलाए गए जिनमें स्वदेशी चिकित्सा, स्वदेशी भाषा, दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले स्वदेशी उत्पाद के क्षेत्र में बड़ी क्रांति के पश्चात पूज्य स्वामी जी महाराज ने धूर्त मैकाले के शिक्षा के षड्यंत्र को समाप्त करने हेतु स्वदेशी</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>विषयगत</strong></span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3649/patanjali-gurukum-s-annual-festival-concluded-with-the-theme-of--education-for-leadership"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/patanjali-gurukulam.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;">    परम पूज्य स्वामी जी महाराज तथा परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने लगभग ३ दशक पूर्व स्वदेशी का संकल्प लिया था तब उन्होंने स्वदेशी शिक्षा, स्वदेशी चिकित्सा, स्वदेशी उत्पाद तथा स्वदेशी भाषा के आंदोलन को प्रारंभ किया था। वह छोटी सी चिंगारी आज विराट् जनांदोलन का रूप ले चुकी है। इस लम्बे कालखण्ड में पतंजलि के बैनर तले कई आंदोलन चलाए गए जिनमें स्वदेशी चिकित्सा, स्वदेशी भाषा, दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले स्वदेशी उत्पाद के क्षेत्र में बड़ी क्रांति के पश्चात पूज्य स्वामी जी महाराज ने धूर्त मैकाले के शिक्षा के षड्यंत्र को समाप्त करने हेतु स्वदेशी शिक्षा का शंखनाद किया, जिसके लिए साधन के रूप में उन्होंने पतंजलि के शैक्षणिक संस्थान यथा- पतंजलि गुरुकुलम्, आचार्यकुलम्, पतंजलि विश्वविद्यालय तथा पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान आदि स्थापित किए। इसके साथ ही भारतीय शिक्षा बोर्ड के गठन के साथ एक बहुत बड़ा भगीरथ प्रयास सफल हुआ। शुरूआत में कई परेशानियाँ आईं, कई झंझावातों से गुजरना पड़ा किंतु पूज्य स्वामी जी महाराज के विकल्प रहित संकल्प तथा अखण्ड-प्रचण्ड पुरुषार्थ से वह ऐतिहासिक क्षण आया जब भारतीय शिक्षा बोर्ड को मंजूरी मिली और वह अस्तित्व में आया।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>विषयगत शिक्षा के साथ-साथ वैदिक शिक्षा का अनुपम संगम</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">हाल ही में पतंजलि विश्वविद्यालय के विशाल सभागार में पतंजलि गुरुकुलम् का ७वाँ वार्षिकोत्सव मनाया गया जिसमें भारतीय संस्कृति तथा राष्ट्रपे्रम की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ी। पतंजलि गुरुकुलम् में विषयगत शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परम्पराओं व राष्ट्रपे्रम का पाठ भी पढ़ाया जाता है। साथ ही वैदिक शिक्षा के अंतर्गत अष्टाध्यायी, महाभाष्य, वेद, पुराण, गीता, उपनिषद्, व्याकरण आदि में भी विद्यार्थियों को निष्णात किया जाता है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>वार्षिकोत्सव की थीम ‘एजुकेशन फॉर लीडरशिप’</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">इस अवसर पर स्वामी जी महाराज ने कहा कि इस वर्ष पतंजलि गुरुकुलम के वार्षिकोत्सव पर उसका वैचारिक अधिष्ठान हमने ‘एजुकेशन फॉर लीडरशिप’ रखा है। इस कार्यक्रम को सार्थकता प्रदान करने और भारतीय महापुरुषों के चरित्र को चरितार्थ करने के लिए पतंजलि गुरुकुलम् के हमारे छोटे-छोटे बाल गोपाल काफी समय से तैयारी कर रहे थे। हम अपने विद्यार्थियों में वह सामथ्र्य गढऩा चाहते हैं जिससे वे विभिन्न क्षेत्रों में पूरे विश्व का नेतृत्व कर सकें। हम उनके भीतर उत्तम व्यक्तित्व, नेतृत्व व चरित्र विकसित कर उन्हें अपने कुलवंश व भारतवर्ष को गौरव बढ़ाने वाले बनाना चाहते हैं। वार्षिकोत्सव कार्यक्रमों में थीम के अनुसार विभिन्न महापुरुषों-  श्री राम, श्री कृष्ण, राजा कृष्णदेव राय व गुरु विद्यारण्य स्वामी जी, बिरसामुण्डा, रानी वेलू नचियार आदि के चरित्रों को नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से दिखाया गया।<br />महापुरुषों का दर्शन राजा कृष्णदेव राय व गुरु विद्यारण्य स्वामी जी<br />राजा कृष्णदेव राय जिन्होंने पूर्व दक्षिण भारत में प्रारम्भ करके और पूर्व में पश्चिम में जहां तक वो पहुँच सकते थे, बहुत बड़ा साम्राज्य स्थापित किया। उनके पीछे उनके गुरु विद्यारण्य स्वामी जी की बड़ी भूमिका रही। हम देश के एक-एक बालक में वही विचार गढऩा चाहते हैं जो कृष्णदेव राय के मन में गुरु विद्यारण्य स्वामी जी ने गढ़ा। हम चाहते हैं कि देश के बालक कृष्णदेव राय की तरह नये साम्राज्य खड़े कर उनका नेतृत्व करें।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>बिरसामुण्डा</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">ऐसे ही बिरसामुण्डा जी का बदिलानी इतिहास रहा है। मैं जब भी उनके शौर्यपूर्ण बलिदानी जीवन को याद करता हूँ तो मेरा रोम-रोम रोमांचित हो जाता है। हम जब उन प्रसंगों को सुनाते एवं देखते हैं तो उसमें इतने समाहित हो जाते हैं कि हम अपने आप को उनसे भिन्न नहीं देेख पाते। बिरसामुण्डा जी का बलिदानी इतिहास केवल एक आदिवासी और एक नेतृत्व की बात नहीं है। बिरसामुण्डा जी जिनको आदिवासी भगवान कहते हैं, वे पूरे देश का स्वाभिमान हैं। ये सब प्रसंग एक-एक शास्त्र के समान हैं, जैसे किसी ने व्याकरणशास्त्र, दर्शनशास्त्र, आयुर्वेद शास्त्र इत्यादि का अध्ययन किया हो ऐसे ही एक-एक महापुरुष का जीवन भी हमारे लिए एक-एक शास्त्र है और हमारे लिए बहुत बड़ी पात्रता रखता है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>रानी वेलू नचियार</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">स्वामी जी महाराज ने बताया कि रानी वेलु नचियार के नाम से शायद कई लोग परिचित नहीं होंगे। रानी वेलु नचियार तमिलनाडु के रामनाथपुरम के रामनाद साम्राज्य की राजकुमारी थीं। उन्हें भारत में ब्रिटिशर्स के खिलाफ लडऩे वाली पहली रानी के रूप में गौरव दिया जाता है। जिस समय महिलाओं को बराबरी का दर्जा भी नहीं था और कमजोर समझा जाता था, उस समय उन्होंने शौर्य व वीरता का परिचय देते हुए अंग्रेजों से लोहा लिया। उनकी वीरता व बलिदान को सदैव याद रखा जाएगा।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पतंजलि गुरुकुलम् में प्रवेश को लेकर अभिभावकों की लगी होड़</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">स्वामी जी ने कहा कि पतंजलि गुरुकुलम् में अपने बच्चों के प्रवेश को लेकर अभिभावकों में होड़ लगी है। ऐसे कई अभिभावक हैं जो चाहकर भी अपने पाल्यों को पतंजलि में प्रवेश दिलाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। देश के लाखों-करोड़ों भाई-बहन जो पतंजलि गुरुकुलम् में, पतंजलि आचार्यकुलम्, पतंजलि विश्वविद्यालय में और भारतीय शिक्षा बोर्ड में अपने बच्चों को नहीं पढ़ा पा रहे हैं हमसे जानना चाहते हैं कि वे अपने बच्चों को कैसे विकसित करें? उनके भीतर व्यक्तित्व, नेतृत्व व चरित्र को कैसे गढ़ें? उनके बच्चे उनका, उनके कुलवंश का और भारतवर्ष को गौरव बढ़ाने वाले कैसे बनें? स्वामी जी महाराज ने उन सभी राष्ट्रवासियों का अभिनन्दन किया जो अपने बच्चों को उसी प्रकार गढऩा चाहते हैं, जैसे हम पतंजलि गुरुकुलम् में अध्ययनरत विद्यार्थियों को गढ़ रहे हैं। </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-05/amt_2336.jpg" alt="AMT_2336" width="900" height="600"></img></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पतंजलि गुरुकुलम्</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पतंजलि गुरुकुलम् की स्थापना वर्ष २०१७ में की गई। पतंजलि गुरुकुलम् वैदिक एवम् आधुनिक शिक्षा का अद्भुत समन्वय है। यहाँ नर्सरी से कक्षा-१२ तक की शिक्षा प्रदान की जाती है जिसमें आधुनिक विषयों के साथ-साथ सनातन वैदिक परम्परा के परिचायक वेद, दर्शन, उपनिषद्, श्रीमद्भगवद्गीता, पञ्चोपदेश आदि की सुन्दर व्यवस्था है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पतंजलि गुरुकुलम् में प्रवेश संबंधी जानकारी</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पतंजलि गुरुकुलम् में सत्र 2025-26 के लिए नर्सरी से कक्षा-6 तक केवल बालिकाओं का ही प्रवेश होना है। प्रवेश सम्बंधी अन्य जानकारियाँ निम्रवत हैं-</h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>प्रवेश परीक्षा हेतु ऑनलाइन पंजीकरण दिनांक ०१ दिसम्बर २०२४ से ३१ जनवरी २०२५ तक किया जा सकेगा। पंजीकरण शुल्क १२०० रुपए है।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कक्षा-५ एवं कक्षा-६ की ऑफलाइन परीक्षा दिनांक ०१.०३.२०२५, कक्षा-३ एवं कक्षा-४ की ऑफलाइन परीक्षा दिनांक ०२.०३.२०२५, कक्षा-१ एवं कक्षा-२ की ऑफलाइन परीक्षा दिनांक ०३.०३.२०२५ तथा नर्सरी, एल.के.जी. एवं </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>यू.के.जी. ऑफलाइन परीक्षा दिनांक ०४.०३.२०२५ को पतंजलि योगभवन के वृहद ऑडिटोरियम, निकट पतंजलि वेलनेस फेस-२, हरिद्वार, उत्तराखण्ड में सम्पन्न होगी। ऑफलाइन परीक्षा का समय प्रात: ८:३० से सायं ४:०० बजे रहेगा।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>७ मार्च २०२५ को रात्रि ९ बजे पतंजलि गुरुकुलम् की वेबसाइट ww.patanjaligurukulam.org  पर परिणाम घोषित किए जाएँगे।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>दिनांक ०८.०३.२०२५ से १५.०३.२०२५ तक चयनित अभ्यर्थी शुल्क जमा कराकर प्रवेश सुनिश्चित कर सकेंगे।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>दिनांक १६.०३.२०२५ से ३०.०३.२०२५ तक केवल चयनित प्रतीक्षारत अभ्यर्थिगण शुल्क जमा कराकर प्रवेश सुनिश्चित कर सकेंगे।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>नर्सरी, एल.के.जी., यू.के.जी., कक्षा-५ व कक्षा-६ के जिन चयनीत अभ्यर्थियों द्वारा शुल्क जमा करा दिया गया है, वे दिनांक ०१ अप्रैल २०२५ को प्रात: ९ बजे योगभवन में रिपोर्ट करेंगे।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कक्षा-१, २, ३ व ४ के जिन चयनीत अभ्यर्थियों द्वारा शुल्क जमा करा दिया गया है, वे दिनांक ०४ अप्रैल २०२५ को प्रात: ९ बजे योगभवन में रिपोर्ट करेंगे।</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-05/amt_2418.jpg" alt="AMT_2418" width="900" height="600"></img></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>प्रवेश परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम</strong></span></h5>
<ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5>कक्षा नर्सरी में प्रवेश के लिए स्वयं का नाम, माता-पिता के नाम का बोध, खेलते समय, अन्यों के साथ साझा करने व देखभाल का भाव, निर्देशों का पालन करना, साथियों के साथ व्यवहार का भाव आदि का अवलोकन किया जाएगा।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>एल.के.जी.में प्रवेश के लिए A-Z मुषित अक्षर ज्ञान, पशु, फल, रंगों के हिन्दी व अंगे्रजी में नागम। स्वर व व्यंजन की जानकारी। संख्या १ से २० तक हिन्दी व अंग्रेजी। संख्या १ से १० तक Number Name.</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>यू.के.जी. में प्रवेश के लिए ३ अक्षर स्वर (a,e,i,o,u) शब्द और उनकी फोनिक ध्वनि। पक्षियों की आवाज, घरेलु और जंगली जानवरों के नाम हिन्दी व अंग्रेजी। समान ध्वनि वाले दो या तीन अक्षर वाले शब्द। संख्या- १ से ५० तक तथा तालिका १ से ५ तक।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कक्षा १ में प्रवेश के लिए This और That प्रयोग, A व An का प्रयोग, ४ अक्षर तुकांत शब्द, पेशा (सामुदायिक सहायक)। जलीय जानवरों के नाम हिंदी और अंगे्रजी में। नंबर १ से १०० तक, संख्या नाम १ से ५० व तालिका १ से १० तक। २ अंकों का जोड़ और घटाव। समान ध्वनि वाले दो एवं तीन अक्षर वाले शब्द।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कक्षा २ में प्रवेश के लिए कक्षा-१ की NCERT पाठ्य पुस्तकें। हिन्दी व अंग्रेजी में पठन कौशल।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कक्षा ३ में प्रवेश के लिए कक्षा-२ की NCERT पाठ्य पुस्तकें। हिन्दी व अंग्रेजी में पठन कौशल।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कक्षा ४ में प्रवेश के लिए कक्षा-३ की NCERT पाठ्य पुस्तकें। हिन्दी व अंग्रेजी में पठन कौशल।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कक्षा ५ में प्रवेश के लिए कक्षा-४ की NCERT पाठ्य पुस्तकें। हिन्दी व अंग्रेजी में पठन कौशल।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कक्षा ६ में प्रवेश के लिए कक्षा-५ की NCERT पाठ्य पुस्तकें। हिन्दी व अंग्रेजी में पठन कौशल।</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-05/amt_2313.jpg" alt="AMT_2313" width="900" height="600"></img></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>नोट : </strong></span></h5>
<ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5>श्रीमद्भगवद्गीता का सम्पूर्ण १६वाँ अध्याय सभी कक्षाओं के लिए अनिवार्य है। इसके साथ ही योग कौशल का मूल्यांकन भी किया जाएगा।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कृपया सभी नवीनतम सूचनाओं के लिए वेबसाइट www. patanjaligurukulam.org.in पर जाएँ या ई-मेल द्वारा suchna@patanjaligurukulam.org.in पर अथवा मोबाइल संख्या- +91 8954555999 पर सम्पर्क करें।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कृपया अपने बच्चों को छात्रावास परिवेश के लिए प्रशिक्षित करें, इससे बच्चे को अनुकूलता रहेगी।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>न्यूनतम आयु के लिए मानदण्ड ३१ मार्च, २०२५ तक कक्षा नर्सरी के लिए ३ वर्ष, एल.के.जी. के लिए न्यूनतम ४ वर्ष (इसी तरह सभी कक्षाओं के लिए बढ़ते क्रम में)।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>नर्सरी, एल.के.जी. और यू.के.जी. के छात्र-छात्राओं की माँ या महिला परिजन को छात्रा के साथ रहना होगा।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कृपया ध्यान दें कि शुल्क (पंजीकरण, प्रवेश आदि) वापिस योग्य नहीं (Non-refundable) हैं।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कक्षा-६ की चयनित छात्राओं को पतंजलि गुरुकुलम् की किसी भी शाखा- हरिद्वार या देवप्रयाग में भेजा जा सकता है।</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पतंजलि गुरुकुलम् की मुख्य  विशेषताएँ : </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>प्रात: जागरण            प्रतिदिन हवन</strong><br /><strong>योग-प्राणायाम            शास्त्र</strong><br /><strong>सात्विक भोजन            खेल</strong><br /><strong>आधुनिक विषयों का अध्ययन    </strong></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>भारतीय शिक्षा </category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:55:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योगा एलायंस के सर्वे के अनुसार अमेरिका में 10% लोग करते हैं नियमित योग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;">भाई राकेश कुमार ‘भारत’ <br />सह- संपादक -योग संदेश</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3650/according-to-a-survey-by-yoga-alliance--10--of-people-in-america-do-yoga-regularly"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/hiclipart_3-1024x934-copy.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;">     परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज तथा पतंजलि योगपीठ के प्रयासों से योग आज कन्दराओं से निकलकर आमजन की दिनचर्या का अभिन्न अंग बन गया है। देश-विदेश के प्रमुख समाचार पत्रों व न्यूज एजेंसियों की मानें तो आज योग न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है अपितु इसके बढ़ते प्रचलन से रोजगार सृजन भी हुआ है।<br />दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार के अनुसार अमेरिका में योग का क्रेज बढ़ रहा है। 33 करोड़ की आबादी वाले अमेरिका में हर दससां व्यक्ति योग करता है। योग एलायंस द्वारा 2022 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 38.4 मिलियन (3 करोड़ 84 लाख) लोग नियमित रूप से योग का अभ्यास करते हैं, जो कुल जनसंख्या का लगभग 10% हैं। <br />2002 में केवल 4% अमेरिकी योग का अभ्यास करते थे। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के सर्वे के अनुसार, 75% अमेरिकी मानते हैं कि योग उनके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। अमेरिका में योग की लोकप्रियता के कारण इसका बाजार 1.32 लाख करोड़ रुपए का हो गया है। इसमें योग क्लासेज का बाजार 48 हजार करोड़ रु. और योग मैट व योग ड्रेस का बाजार 38 हजार करोड़ रु. था। 2015 के मुकाबले यह दोगुना है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>90% अमेरिकी जानते हैं  योग के बारे में</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">सीडीसी के सर्वे के अनुसार, 90% अमेरिकी अब योग के बारे में जानते हैं। तीन साल पहले यह संख्या 75% थी। सर्वे के मुताबिक 70% अमेरिकी सेहत बेहतर करने के लिए योग करते हैं, जबकि 30% लोग इसे दर्द से राहत पाने के लिए करते हैं। गर्दन और पीठ के दर्द से परेशान लोग विशेष रूप से योग का सहारा ले रहे हैं। योग करने वाले अमेरिकी न सिर्फ इसके फायदों को जानने को लेकर उत्सुक, बल्कि इसके इतिहास और फिलॉसफी को भी समझने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए कई विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के विद्वान इसके गहन पहलुओं पर अध्ययन के साथ-साथ प्रशिक्षाण रहे हैं। आज लाखों विदेशी प्रतिवर्ष भारत आकर तथा ऑनलाइन भारतीय मूल के योगगुरुओं से योग के बौद्धिक और आध्यात्मिक प्रशिक्षण ले रहे हैं। ये पाठ्यक्रम नए योग प्रशिक्षकों को योग के गहरे इतिहास और फिलॉसफी से परिचित कराते हैं।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>अमेरिका में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं में भी योग का क्रेज </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">अमेरिका में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के बीच योग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। 23% महिलाएं नियमित रूप से योग करती हैं, अमेरिका में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं में भी योग लोकप्रिय हो रहा है। महिलाओं का कहना है कि वे इसे शारीरिक संतुलन बनाए रखने के लिए चुन रही हैं। इसके अलावा, महिलाएं इसे एक सुरक्षित व्यायाम मानती हैं। महिलाओं में योग अब योग ध्यान और मेडिटेशन का हिस्सा भी बन गया है। रोजाना योग करने वालों में से अधिकांश का कहना है कि इससे मानसिक संतुलन में मदद मिली है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>योग कपड़ों का बाजार</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट्स के अनुसार वैश्विक अर्थात् पूरी दुनियां में योग कपड़ों का बाजार 2023 में 27.63 बिलियन अमेरिकी डॉलर (2,26,566 करोड़ रुपए) का मूल्यांकन किया गया था और 2024 में 29.69 बिलियन अमेरिकी डॉलर (2,43,458 करोड़ रुपए) से बढक़र 2032 तक 55.65 बिलियन अमेरिकी डॉलर (4,56,330 करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि पूर्वानुमान अवधि के दौरान 8.17% की वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) दर्शाता है। योग कपड़ों का बाजार आकार महत्वपूर्ण रूप से बढऩे की उम्मीद है।<br />https://www.fortunebusinessinsights.com/yogaclothing-market-106312 इसका मुख्य कारण निर्माताओं द्वारा उन्नत उत्पादों के उत्पादन पर बढ़ता ध्यान है, जो बाजार के आकार में वृद्धि को बढ़ावा दे रहा है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>योग मैट का बाजार</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार पूरी दुनियां में योग मैट बाजार का मूल्य 2023 में 13.67 बिलियन अमेरिकी डॉलर (1.12 लाख करोड़ रुपए) था और इसे 2024 से 2030 तक 3.6% की वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) से बढऩे का अनुमान है।<br />https://www.grandviewresearch.com/industry<br />analysis/yoga-mat-market </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पूरी दुनियां में बढ़ते योग इंस्टिट्यूट </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">परम पूज्य स्वामी जी व पूज्य आचार्य जी के दिशानिर्देशन में पतंजलि संस्थान योग को विश्वव्यापी बनाने तथा घर-घर व जन-जन तक योग को पहुँचाने के लिए संकल्पबद्ध है। पतंजलि ने योग को कभी व्यवसाय नहीं माना अपितु जन-मानस में आरोग्य प्रदान करने का साधन बनाकर समाज की सेवा की है। आज पूरे विश्व में योग का सबसे बड़ा व प्रामाणिक संस्थान पतंजलि योगपीठ है। पतंजलि के साथ-साथ कुछ अन्य संस्थान भी योग के लिए समर्पित हैं। व्यवसायिक दृष्टिकोण से कार्य करने वाले कई प्रमुख योग संस्थान भी बाजार में अपना एक प्रमुख स्थान बना चुके हैं। ये सभी योग संस्थान पारंपरिक योग अभ्यासों को लेकर उसमें आधुनिकता का समावेश कर योग के प्रति आकर्षण पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। योग संस्थान विभिन्न प्रकार की योग शैलियों के माध्यम से अभ्यास कराते हैं। इसके अलावा, कुछ संस्थाएँ विशेष कार्यक्रमों की पेशकश करते हैं, जैसे योग चिकित्सा, गर्भावस्था के दौरान योग, अलग-अलग बीमारियों के लिए योग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष योग कक्षाएँ इत्यादि।<br />कुछ योग संस्थान यह भी सुनिश्चित करते हैं कि विभिन्न आयु समूहों और शारीरिक फिटनेस के स्तरों पर लोग अपनी आवश्यकताओं के अनुसार योग का अभ्यास कर सकें। इस प्रकार, ये प्रमुख योग संस्थान न केवल योग के लाभों को फैलाते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते हैं। कुछ विशेष योग संस्थाएं जो योग के माध्यम से करोड़ों रुपयों का व्यवसाय कर रही हैं। अभी हजारों नयी कम्पनियों/ योग केन्द्रों की वैश्विक स्तर पर आवश्यकता है जिसमें लाखों लोगों को रोजगार मिल सकता है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>Core Power Yoga </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">कोरपॉवर योग एक प्रसिद्ध अमेरिकी योग स्टूडियो शृंखला है, जिसकी 21 राज्यों में 220 से अधिक योग स्टूडियो हैं। यह कंपनी वर्चुअल लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो-ऑन-डिमांड कक्षाओं के साथ-साथ विभिन्न शैलियों और स्तरों की योग कक्षाएँ प्रदान करती है। 2023 में कोरपॉवर योगा की आय $350 मिलियन (2870 करोड़ रुपए) थी, कोरपावर योगा में 1,873 कर्मचारी हैं, और प्रति कर्मचारी कमाई अनुपात 1,86,866 डॉलर (1.53 करोड़ रुपए) है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>Pure Yoga</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">प्योर योगा एक प्रमुख योग स्टूडियो है, जिसका मुख्यालय हांगकांग में है। इसकी शाखाएँ बीजिंग, शंघाई, सिंगापुर और न्यूयॉर्क में स्थित हैं। यह कंपनी हर सप्ताह 350 से अधिक योग कक्षाएँ आयोजित करती है, जिसमें यह 20 विभिन्न योग शैलियों का समावेश करती है। इनमें हॉट योगा, ध्यान, अष्टांग योग और प्राणायाम आदि शामिल हैं। 2023 में प्योर योगा का वार्षिक आय $69.0 मिलियन (565.8 करोड़ रुपए) है। इसमें कुल 248 कर्मचारी हैं और प्रति कर्मचारी राजस्व अनुपात 2,78,226 डॉलर (2.28 करोड़ रुपए) है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>Power Yoga Canada (PYC) </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पॉवर योगा कनाडा एक कनाडाई योग कंपनी है, जो पूरे कनाडा में कई योग स्टूडियोज संचालित करती है। PYC ऑनलाइन योग कक्षाएँ भी प्रदान करती है, जिनमें 200-घंटे, 300-घंटे और निरंतर शिक्षा मॉड्यूल शामिल हैं।<br />PYC प्रति सप्ताह 275 योग कक्षाएँ आयोजित करता है और उनका 200-घंटे का सर्टिफिकेट कोर्स कनाडा में एक लोकप्रिय योग शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। इन सब संस्थाओं के अलावा और भी बहुत से संस्थान है जैसे- Honor Yoga, Glo Digital, Inc., YogaOne, YogaSix, Yoga Pod, MoreYoga, Flyogi LLC इत्यादि।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>१०० से ज्यादा स्टार्टअप, मगर योग के क्षेत्र में अभी अपार संभावनाएं</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">२०२१-२०२२ के सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल २०२३ तक भारत में हेल्थटेक बाजार ५ बिलियन अमेरिकी डॉलर का होने की संभावना व्यक्त की थी। स्टार्टअप की दुनिया में भारत का तीसरा स्थान है। भारत के १०० से ज्यादा स्टार्टअप यूनिकॉर्न का दर्जा पा चुके हैं लेकिन स्वास्थ्य के क्षेत्र में सिर्फ ४ ही यूनिकॉर्न काम कर रहे हैं। इन यूनिकॉर्न कंपनियों के नाम हैं- इनोवोकेर (Innovaccer), फार्मइजी (Phyrmeasy), क्योर फिट (Cure.fit) और प्रिस्टन केयर (Pristyn Care)। इन सभी यूनिकॉर्न में सिर्फ Cure.fit ही योग के क्षेत्र में थोड़ा बहुत कार्य कर रहा है। <br />योग के इस वैश्विक बाजार व आवश्यकता में भारत एक बड़ी भूमिका निभाकर पूरी दुनियां को योग के साथ-साथ स्वास्थ्य, नैतिकता, प्रेम, शांति देकर करोड़ों-अरबों डॉलर क व्यवसाय भी खड़ा कर सकता है क्योंकि सबसे प्रामाणिक योग का ज्ञान केवल भारत में सदियों से है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पतंजलि विश्वविद्यालय में संचालित योग से सबंधित कोर्स</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पतंजलि विश्वविद्यालय में योग से सम्बंधित अनेक डिग्री व डिप्लोमा कोर्स संचालित किए जा रहे हैं जिनमें योग से बी.ए., एम.ए., बी.एस.सी, एम.एस.सी. के साथ-साथ पी.जी. डिप्लोमा योगा साइंस, पी.जी. डिप्लोमा योगा-आयुर्वेदा तथा एम.ए. टूरिज्म योगा हेल्थ एण्ड कल्चर आदि शामिल हैं।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग बना उच्चतम वेतन वाला व्यवसाय</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">योग एवं ट्रेनिंग-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्चतम वेतन पाने वाले व्यवसायों में से एक बन गया है। योग के माध्यम से बिना किसी निवेश या लागत के भी पैसे कमाना शुरू कर सकते हैं। <br />योग प्रशिक्षक के रूप में रूची रखने वाला व्यक्ति विभिन्न पदों पर कार्य कर सकता है, जैसे-<br />1.    योग कोच (Yoga Coach)<br />2.    योग इंस्ट्रक्टर (Yoga Instructor)<br />3.    ट्रेनर : योग और वेलनेस (Trainer – Yoga and Wellness)<br />4.    योग चिकित्सक (Yoga Therapist)<br />5.    योग शिक्षक (Yoga Teacher)</h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>योग के प्रति बढ़ती लोकप्रियता</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">योग एलायंस द्वारा 2022 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 38.4 मिलियन (3 करोड़ 84 लाख) लोग नियमित रूप से योग का अभ्यास करते हैं, जो कुल जनसंख्या का लगभग 10% हैं। यह आंकड़ा योग की बढ़ती लोकप्रियता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रमाण है, जो कि शरीर और मन को स्वस्थ रखने के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा जा रहा है।<br />योगाभ्यास से स्वास्थ्य लाभ को लेकर बढ़ते वैज्ञानिक शोध ने इसे और अधिक लोकप्रिय बना दिया है। जिस कारण हेल्थ प्रोफेशनल ने भी योग को समर्थन देना शुरू कर दिया है। इससे योग को लेकर संभावित विकास के अवसर बने हैं। योग स्टूडियो, रिट्रीट, सामुदायिक आयोजनों और सामूहिक अभ्यासों द्वारा सामाजिक मेलजोल की भावना को बढ़ावा मिला है। इसके अलावा, मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों की बढ़ती घटनाओं ने भी लोगों को योगमय जीवनशैली की ओर आकर्षित किया है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार, अमेरिका में 70% मौतों के लिए पुरानी बीमारियां प्रमुख कारण हैं, जो मृत्यु और विकलांगता की मुख्य वजह बनती हैं।<br />Mylo नाम की एक संस्था द्वारा जून २०२२ में विश्व योग दिवस के लिए किए गए एक Prenatal Yoga Survey के अनुसार 91% गर्भवतती महिलाएं सहमत हैं कि गर्भावस्था के दौरान व्यायाम उनके लिए फायदेमंद है और ८५% का मानना है कि योग उनके लिए प्रसव के दौरान और उसके बाद फायदेमंद है। </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>ऑनलाइन व ऑफलाइन योग कोर्स</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">परम पूज्य स्वामी जी व पूज्य आचार्य जी के फेसबुक, ट्वीटर, यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम से दुनियां के लगभग सभी देशों के लोग जुड़े हैं तथा ऑनलाइन योग का अभ्यास करते हैं। भारत में पतंजलि के योग शिक्षक १ लाख से अधिक नि:शुल्क योग कक्षाऐं संचालित करते हैं। ३५ से अधिक देशों में परम पूज्य स्वामी जी व पूज्य आचार्य जी स्वयं योग-आयुर्वेद व भारतीय संस्कृति का प्रचार करने हेतु भ्रमण कर चुके हैं।<br />योग से सम्बंधित विविध प्रकार के कोर्स डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से पेश किए जाते हैं जिससे लोग घर से ही अपने समय के अनुसार योग का अभ्यास कर सकते हैं। ऑनलाइन कोर्स वर्तमान में सबसे तेजी से बढऩे वाला सेगमेंट है, जो विभिन्न उपकरणों और सुविधाओं के माध्यम से अधिक लोगों तक पहुंच बना रहा है। COVID-19 महामारी की शुरुआत के बाद से, ऑनलाइन योग कक्षाओं की मांग में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। लोगों की व्यस्त जीवनशैली ने सुविधाजनक और सुलभ फिटनेस विकल्पों की आवश्यकता को बढ़ावा दिया है, और ऑनलाइन योग ऐप्स और कक्षाएं इस मांग को पूरा कर रही हैं। तकनीकी उन्नति के साथ, योग और ध्यान डिजिटल रूप में बदल गए हैं। <br />योग को लेकर कई ऑनलाइन प्लेटफार्म उपलब्ध हैं जिनके माध्यम से कोई भी अपने घर में सुविधा अनुसार योग का अभ्यास कर सकता है। मोबाइल ऐप्स, आधुनिक उपकरण, सोशल मीडिया प्लेटफार्म और ऑनलाइन कक्षाएं योग को घर-घर तक पहुँचा रही हैं।<br />योग स्टूडियो शारीरिक फिटनेस के विभिन्न स्तरों को बनाए रखने के लिए कई प्रकार की शैलियाँ अपना रहे हैं, जिनमें हठ योग, पॉवर योग, अष्टांग योग, ध्यान और अन्य शामिल हैं। इसके अलावा, योग स्टूडियो दुनिया भर में अधिक फैल रहे हैं, जिससे व्यक्तियों के लिए सुविधाजनक और सस्ती कक्षाएँ ढूंढना आसान हो गया हैर्। Zippia (अमेरिका की जॉब प्रोवाइड करने वाली संस्था) के अनुसार, अमेरिका में योग स्टूडियो की संख्या 2017 में 32,354 से बढक़र 2023 में 48,547 हो गई है। यह वृद्धि योग की लोकप्रियता को दर्शाती है और लोगों के लिए स्वास्थ्य और कल्याण के विकल्प उपलब्ध कराती है।<br />2019 से 2023 तक, ऑफ़लाइन योग पाठ्यक्रमों की वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) 11.5% रही है। 2024 से 2034 तक के अंत तक, यह वृद्धि दर 9.0% रहने की उम्मीद है। यह वृद्धि दर यह दर्शाती है कि ऑफ़लाइन योग पाठ्यक्रमों की लोकप्रियता में वृद्धि हो रही है।<br />कुछ लोकप्रिय ऐप्स जैसे- Wysa, Asana Rebel, Glo, Calm और Prayoga आदि Android और iOS दोनों पर उपलब्ध हैं। ये ऐप्स उपयोगकर्ताओं के लिए ध्यान और योग सहित समग्र व्यायाम की जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।<br />योग का वैश्वीकरण इसे विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों में लोकप्रिय बना रहा है। पहले, योग को मुख्यत: भारतीय संस्कृति से जोड़ा जाता था, लेकिन अब यह विभिन्न देशों में अपने विशेष रूप और शैलियों के साथ अपनाया जा रहा है। इस वैश्वीकरण के कारण नए बाजारों का विकास हो रहा है, जो विभिन्न प्रकार के योग उत्पादों और सेवाओं की मांग को बढ़ा रहा है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;">आज भी योग में कैरियर बनाने के लिए पतंजलि विश्वविद्यालय से जुड़ सकते हैं-<br />Website : www.universityofpatanjali.com<br /> e-mail : contact@uop.edu.in <br />Mobile No. : +91 8954555111<br />घर बैठे अपने आसपास योग सीखने के लिए पतंजलि एप डाउनलोड करके १०० घण्टे का प्रशिक्षण लेकर आप सहयोगी शिक्षक बन सकते हैं। इच्छुक व्यक्ति नीचे दिए लिंक पर जाएँ  <br />https://play.google.com/store/apps/details?id=com. Bharatswabhiman<br />या नीचे दिए गए को स्कैन करें-</h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><br />संक्षेप में कहें तो पतंजलि योगपीठ के प्रयासों से विगत 31 वर्षों में योग ने वैश्विक स्तर पर अपनी एक नई पहचान बनाई है। पूरी दुनिया में साध्य से लेकर असाध्य बीमारियों के उपचार में योग की भूमिका पर रिसर्च का महत्वपूर्ण कार्य पतंजलि योगपीठ द्वारा किया गया है। लाखों लोगों की गंभीर बीमारियों को दूर करके  पतंजलि ने स्वास्थ्य प्रदान किया है। मॉडर्न मेडिकल साइंस से जिन रोगियों को निराशा हो गयी थी, योग से उनको भी स्वास्थ्य लाभ मिला है।  30 वर्ष पहले तक जहां लोग योग को केवल शरीर को लचीला बनाए रखने के लिए करते थे, वहीं आज लोगों ने योग को लाइफ स्टाइल डिजीज, विभिन्न प्रकार के जोड़ों के दर्द, तनाव से मुक्ति तथा चिकित्सा थेरेपी के रूप में प्रामाणिक उपचार मान लिया है। भारत की बौद्धिक संपदा का एक भाग हमारे इस योग में निहित है। यह मानव जीवन के हर अंग को सकारात्मक रूप से रूपांतरित करने में सक्षम जीवन पद्धति है। यदि भारत योग की बौद्धिक संपदा का उचित मूल्यांकन करके वैश्विक स्तर पर योग का प्रचार-प्रसार करें, तो पूरी दुनिया में सनातन धर्म की प्रतिष्ठा के साथ-साथ अरबों डॉलर्स की कमाई भी की जा सकती है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>योग एवं आयुर्वेद</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:53:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वेलनेस उद्घाटन </title>
                                    <description><![CDATA[<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>पतंजलि वेलनेस सेंटर की स्थापना से न केवल स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलेगा बल्कि  स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर भी पैदा होंगे : पू.स्वामी जी</h5>
<h5>  </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>केन्द्र का लक्ष्य स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक व्यापक, एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करना है</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;">        पतंजलि वेलनेस सेंटर-उत्तर/पूर्व में भारत की पहली एकीकृत समग्र स्वास्थ्य सेवा की पहल की गई। समाज सुधारक और पूरे भारत में सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा, प्राइड ईस्ट एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की सीएमडी, श्रीमती रिनिकी भुयान सरमा जी ने सेंटर का उद्घाटन किया। 2 अक्टूबर, 2024 को परम पूज्य योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज की पावन<br />पूर्वोत्तर</h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3651/wellness-openings"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/guwahati,-assam.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>पतंजलि वेलनेस सेंटर की स्थापना से न केवल स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलेगा बल्कि  स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर भी पैदा होंगे : पू.स्वामी जी</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>केन्द्र का लक्ष्य स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक व्यापक, एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करना है</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;">    पतंजलि वेलनेस सेंटर-उत्तर/पूर्व में भारत की पहली एकीकृत समग्र स्वास्थ्य सेवा की पहल की गई। समाज सुधारक और पूरे भारत में सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा, प्राइड ईस्ट एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की सीएमडी, श्रीमती रिनिकी भुयान सरमा जी ने सेंटर का उद्घाटन किया। 2 अक्टूबर, 2024 को परम पूज्य योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज की पावन उपस्थिति में कार्यक्रम हुआ।<br />पूर्वोत्तर भारत के मध्य में, माँ कामाख्या की पवित्र भूमि ओर ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित, गुवाहाटी का केन्द्र, इस क्षेत्र में समग्र स्वास्थ्य देखभाल लाने में एक महत्त्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है। परम पूज्य महापुरुष श्रीमंत शंकरदेवजी और श्रीश्री माधवदेव जी की शिक्षाओं से प्रेरित यह पहल, प्राचीन परम्पराओं को आधुनिक कल्याण प्रथाओं के साथ जोड़ती है। परम पूज्य योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज और परम पूज्य आयुर्वेद शिरोमणि परम पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के मार्गदर्शन में, पतंजलि वेलनेस गुवाहाटी योग, आयुर्वेद, पंचकर्म, षट्कर्म, जोंक थेरेपी, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर सहित स्वास्थ्य सेवाओं की एक विस्तृत शृंखला प्रदान करेगा। केन्द्र का लक्ष्य स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक व्यापक, एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करना है। इस अवसर पर नव स्थापित सुविधा में बोलते हुए, परम पूज्य स्वामी जी महाराज ने केन्द्र की पेशकशों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की और साध्वी देवस्वरूप जी, स्वामी जगतदेव जी एवं स्वामी समग्रदेव जी का परिचय दिया, जिनके मार्गदर्शन में यह केन्द्र कार्य करेगा। पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र में शिक्षा, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न पहलों में भी शामिल है। बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीआर) में, भारतीय शिक्षा बोर्ड के तहत दो स्कूल- आचार्यकुलम् चिरांग में 500 से अधिक बच्चों और कुमारिकाटा में 700 से अधिक छात्र/छात्राओं को मुफ्त शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। ऐसा ही एक स्कूल अरुणाचल प्रदेश के सिजोसा में चल रहा है। भारत सरकार शिक्षा बोर्ड प्राचीन और आधुनिक शैक्षिक प्रथाओं को एकीकृत करता है। इसके अतिरिक्त, कुमारीकाटा और चिरांग में जैविक खेती, गौ पालन और औषधीय पौधों की खेती परियोजनाएं चल रही हैं। कुमारिकाटा में 1,500 छात्रों के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का स्कूल भी निर्माणाधीन है। परम पूज्य स्वामी जी महाराज ने कहा कि पतंजलि वेलनेस सेंटर की स्थापना से न केवल स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर भी पैदा होंगे। </h5>
<h5 style="text-align:justify;">पतंजलि वैलनेस, गुवाहाटी में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने हेतु बुकिंग नंबर - +91 8954888000</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>योग एवं आयुर्वेद</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:52:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>कार्डियोग्रिट  गोल्ड  हृदय को रखे स्वस्थ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;">डॉ. अनुराग वार्ष्णेय   <br />उपाध्यक्ष- पतंजलि अनुसंधान संस्थान</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3652/cardiogrit-gold-keeps-the-heart-healthy"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/istockphoto-1173492798-612x.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;">   हमारे हृदय में एक तरह का विशेष इलेक्ट्रिकल सिस्टम है जिसे कार्डिएक कंडक्शन सिस्टम कहा जाता है, यह सिस्टम ही है जो हमारे हृदय की मॉनटरिंग (ईसीजी) के समय ऊँची नीची लाइन्स देता है इसके अलावा हमारे दिल की धडक़न की आने वाली आवाज, हमारे हृदय में मौजूद वाल्व्स के खुलने और बंद करने की आवाज है। हमारे शरीर के प्रत्येक भाग तक रक्त को पहुंचने वाली रक्त वाहिकाओं को अगर लम्बा कर फैला दिया जाए तो यह लगभग 1 लाख किलोमीटर होगी। यह लगभग उतनी ही लम्बाई है कि हम अपनी पूरी धरती को 2 से अधिक बार लपेट सकें। हमारे शरीर की लगभग सभी कोशिकाएं विभाजित होती रहती हैं, परन्तु हृदय की सेल्स का विभाजन नहीं होता, इसलिए हृदय का कैंसर होने की संभावनाएं नगण्य होती है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>एलोपैथिक दवाइयों का हृदय पर दुष्प्रभाव</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">एलोपैथिक दवाइयों से हमारे पूरे शरीर को ही नुकसान पहुँचता है और इनके बहुत अधिक दुष्प्रभाव होते हैं। हृदय पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को कॉर्डियो टॉक्सिसिटी कहा जाता है। इन दवाइयों के दुष्प्रभाव के कारण हृदय के कार्डिएक फंक्शन्स में कमी आती है। हृदय का एक महत्वपूर्ण कार्डिएक फंक्शन लेफ्ट वेंट्रिकल इजेक्शन फंक्शन (एलवीइएफ) है। वैसे तो सभी प्रकार की एलोपैथिक दवाइयों के दुष्प्रभाव है परन्तु तनाव, अवसाद, चिंता और कैंसर की दवाइयों के द्वारा होने वाली कार्डिएक टॉक्सिसिटी सामान्य और प्रत्यक्ष है क्योंकि एक लम्बे समय तक इन दवाइयों का सेवन रोगियों को करना पड़ता है। इन दवाइयों से होने वाली कार्डिएक टॉक्सिसिटी में लेफ्ट वेंट्रिकल फेलियर, मायोकार्डियल इस्किमिया, क्यू.टी. (QT) प्रोलोंगेशन, पेरिकार्डिटिस और मायोकार्डिटिस प्रमुख हैं। कैंसर के रोगियों में प्राय: देखा जाने वाला असिम्पटोमैटिक डायस्टोलिक डिसफंक्शन, कार्डिएक टॉक्सिसिटी का एक प्रमुख लक्षण है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>कार्डिएक टॉक्सिसिटी के कारण एलोपैथिक दवाओं को बाजार से हटाना पड़ा</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पिछले 4 दशकों में एलोपैथिक की 10% से अधिक दवाइयों को कार्डिएक टॉक्सिसिटी की वजह से बाजार से हटाना पड़ा है, वहीं कार्डिएक टॉक्सिसिटी की लगभग 48 प्रतिशत से अधिक स्थितियों में इसकी वजह कैंसर रोधी दवाइयों के सेवन को पाया गया।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>कार्डियोग्रिट के मुख्य  घटक</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">कैंसर की एलोपैथिक दवाई डॉक्सोरुबिसिन (डॉक्स) कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को एक कर, कैंसर कोशिकाओं को आगे बढऩे से रोकने में मददगार है। परन्तु इस दवाई का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव हृदय कोशिकाओं के ऊपर होता है। इन्हीं दुष्प्रभावों के कारण कई बार आपात परिस्थितियों में कार्डिएक टॉक्सिसिटी की वजह से कैंसर की इस दवाई को ही रोगियों को देना बंद कर दिया जाता है।<br />इसी समस्या से निराकरण के लिए आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को आधार बना कर पतंजलि द्वारा कार्डियोग्रिट गोल्ड टेबलेट का निर्माण किया गया। यह औषधि योगेंद्र रस, अर्जुन, मोती पिष्टी, जहरमोहरा पिष्टी, अकीक पिष्टी, संगेसव पिष्टी आदि प्रमुख जड़ी-बूटियों से बनी है। इस औषधि के द्वारा एलोपैथी दवाई के दुष्प्रभावों को समाप्त कर स्वस्थ हृदय की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>कार्डियोग्रिट पर पतंजलि का अनुसंधान</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">हर बार की तरह इस बार भी सर्वप्रथम विभिन्न तकनीकों के द्वारा इस औषधि का रासायनिक विश्लेषण किया गया जिससे इसकी सही संरचना के बारे में पता किया जा सके। <br />तत्पश्चात यह अध्ययन किया गया कि इस औषधि का ही कोई दुष्प्रभाव तो नहीं है, इसके लिए चूहों के हृदय के कुछ विशेष कोशिकाओं को प्रयोगशाला में तैयार किया गया जिससे पता चला कि कार्डियोग्रिट गोल्ड का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं है वहीं डॉक्सोरुबिसिन देने पर यही कोशिकाएं मरना शुरू हो जाती हैं। अनुमानित रूप से डॉक्सोरुबिसिन की 1 माइक्रो मोलर डोज की वजह से लगभग 40त्न तक कोशिकाएं मर जाती हैं। <br />इसके बाद यह देखने की कोशिश की गई कि डॉक्सोरुबिसिन और कार्डियोग्रिट गोल्ड का सेवन अगर साथ में किया जाए तो क्या एलोपैथिक दवाई डॉक्सोरुबिसिन के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है, इस पर अध्ययन में भी सफलता प्राप्त हुई। इस अध्ययन से इस बात की भी पुष्टि हुई कि कार्डियोग्रिट गोल्ड कार्डिएक टॉनिक के रूप में कार्य करता है। उसके बाद यह देखने का प्रयास किया गया कि इन कोशिकाओं में परिवर्तन के मूल कारक क्या है। इसके लिए जीन एक्सप्रेशन को आधार बनाया गया। इस शोध में यह पाया गया कि कार्डियोग्रिट गोल्ड डोज डिपेंडेंट तरीके से डॉक्सोरुबिसिन के कारण होने वाली कोशिकाओं की मृत्यु को भी कम करता है।<br />आयुर्वेदिक औषधि कार्डियो ग्रिट ने डॉक्सोरुबिसिन के कारण होने वाली सूजन को भी कम किया। इस तथ्य की पुष्टि इन्फ्लेमेशन के मार्कर्स आईएल-6, एल-1, एनएफ-कापा बी को मापा गया जिससे ज्ञात हुआ कि कार्डियोग्रिट गोल्ड के डोज अनुसार प्रयोग से इनके स्तर में कमी आई। तत्पश्चात यह भी देखा गया कि क्या कार्डियोग्रिट गोल्ड का कोई दुष्प्रभाव कैंसर के हानिकारक सेल्स पर तो नहीं हो रहा, अर्थात क्या कार्डियोग्रिट गोल्ड कैंसर की कोशिकाओं को बिना प्रभावित किये हृदय को स्वस्थ रख पाने में समर्थ है। इसके लिए कैंसर की टी 24  कोशिकाओं, फेफड़ो के कैंसर की ए-549 कोशिकाएं और स्तन कैंसर की एमडीए - एमबी 231 कोशिकाओं पर शोध कर यह पाया गया कि कार्डियोग्रिट गोल्ड के सेवन से डॉक्सोरुबिसिन की अपनी प्रभावशीलता समाप्त नहीं होती, इसका मात्र दुष्प्रभाव समाप्त होता है।<br />इसके पश्चात सी. ऐलेगन्स पर कार्डियोग्रिट के प्रभावों की जांच की गई। सी. एलेगंस में हृदय जैसा ही एक अंग होता है जिसे फेरिंग्स कहा जाता है, यह हृदय के समान ही धडक़ता है, और इसकी इलेक्ट्रिकल एक्टिविटीज को भी नापा जा सकता है। सी. ऐलेगंस की इस प्रक्रिया को फैरेंजिअल एक्शन पोटेंशियल कहा जाता है। इन जीवों पर शोध में यह पाया गया कि डॉक्सोरुबिसिन के सेवन से इनकी मृत्यु दर में बढ़ोतरी हुई वहीं प्रजनन क्षमता में कमी आई।<br />इस अध्ययन के लिए इन पारदर्शी जीवों में सर्वप्रथम डॉक्सोरुबिसिन दवाई को रोपित किया गया, जोकि लाल रंग की होती है, जिससे इन जीवों में लाल रंग के धब्बे उभर आए, तत्पश्चात कार्डियोग्रिट गोल्ड देने पर इन धब्बों में कमी आई जिससे इस आयुर्वेदिक औषधि की प्रभावशीलता की पुष्टि हुई। इसके बाद रासायनिक शोध के द्वारा भी इस शोध को सत्यापित किया गया। <br />तदोपरांत एक बार पुन: यह सत्यापित करने के लिए कि कार्डियोग्रिट गोल्ड इन जीवों पर प्रभावकारी है, इन जीवों में कैल्शियम का स्तर नापा गया, क्योंकि यह औषधि विभिन्न भस्मों से तैयार की गई थी, इसलिए इसमें कैल्शियम का स्तर ज्यादा होना स्वाभाविक ही था। जिससे इस बात की पुष्टि हुई कि इन जीवों में डोज डिपेंडेंट तरीके से कैल्शियम का स्तर बढ़ रहा है। इसके बाद हीट शॉक प्रोटीन को आधार बना कर डॉक्सोरुबिसिन के कारण हृदय में बनने वाली ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को भी मापा गया और कार्डियोग्रिट गोल्ड ने इस स्ट्रेस को भी खुराक की मात्रा के आधार पर कम कर, अपनी प्रभावशीलता को एक बार फिर से सिद्ध किया। साथ ही साथ कार्डियोग्रिट गोल्ड ने इन जीवों के खराब फैरिंग्स को भी डोज डिपेंडेंट तरीके से ठीक किया। <br />इन सभी शोध से इस बात की पुष्टि होती है कि कार्डियोग्रिट गोल्ड हृदय के लिए एक उत्तम औषधि है, और इसके सेवन से एलोपैथिक दवाइयों से हुई हानि को भी ठीक किया जा सकता है।</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रोग विशेष</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:50:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>समकालीन समाज में लोकव्यवहार को गढ़ती हैं राजनीति और सरकारें</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;">प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3653/politics-and-governments-shape-public-behavior-in-contemporary-society"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/sanatan-politics.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;">   हिन्दू समाज में सामाजिक संस्थायें अत्यंत सशक्त रही हैं। क्योंकि राजा का कर्तव्य था  समाज की परंपराओं और मान्यताओं को संरक्षण देना तथा सबको उनकी मर्यादा में गतिशील रखना। इसे ही कहा जाता रहा है - ‘वर्णाश्रम धर्म प्रतिपालन।’ परंतु 15 अगस्त 1947 के बाद से भारत मे हिन्दुओं के द्वारा पहली बार स्वयं ही धर्म से उदासीन ऐसा शासनतंत्र रचा गया, जिसने राज्य को समाज की समस्त गतिविधियों, क्रियाशीलताओं और पुरुषार्थ परंपराओं का नियंत्रक और शास्ता बना दिया। इस राज्य में सनातन धर्म के धर्म शास्त्रों की कोई विधिक न्यायिक शक्ति मान्य नहीं की गई। अत: धर्मशास्त्रों के विद्वानों की भी विधिक निर्णय और न्याय के संदर्भ में कोई अधिकृत सत्ता नहीं होती। इसके स्थान पर एंग्लोक्रिश्चियन कानूनों और विधिक मान्यताओं तथा व्यवस्थाओं को ही अधिकृत और विधि विहित घोषित किया गया। समाज की किसी भी गतिविधि के सही-गलत, उचित-अनुचित और विधि सम्मत या विधि विरूद्ध होने की कसौटी ये कानून ही बने। लोक शांति प्रक्षुब्ध न हो और हिन्दुओं का विक्षोभ व्यापक नहीं हो, इसलिये एंग्लोक्रिश्चियन कानून और विधि व्यवस्था के पदाधिकारियों द्वारा अपनी बुद्धि और सुविधा के अनुसार यदाकदा धर्मशास्त्रों का भी संज्ञान या दृष्टांत लिया जाता रहा अथवा धार्मिक मान्यताओं को समायोजित किया जाता रहा, परंतु विधिक शक्ति केवल एंग्लोक्रिश्चियन विश्वासों और मान्यताओं वाली संस्थाओं के पास ही रही। प्रारंभ में कुछ वर्षों तक प्रबुद्ध हिन्दुओं का भी किन्हीं कारणों से इस वास्तविकता की ओर ध्यान नहीं गया, परंतु जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है, ये वास्तविकतायें उभरकर सामने आ रही हैं। इनको कुछ उदाहरणों से सरलता से समझा जा सकता है। </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>साहित्य, संगीत और कलायें</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">साहित्य, संगीत और कलाओं के क्षेत्र में इसे सरलता से समझा जा सकता है। पहले शास्त्रीय संगीत, गायन और नृत्य की सामाजिक गतिविधियाँ और कलात्मक अभ्यास भी संबंधित गुणी कलाकारों द्वारा अपने स्तर पर तो होता ही था, समाज में उनका आयोजन और उनकी परख भी महाजन या व्यापक समाज ही करते थे। निश्चय ही इसमें स्वयं राजा और राजन्य वर्ग भी शामिल होते थे, परंतु राजा के स्तर पर कभी भी ऐसी कोई संस्थायें नहीं बनाई जाती थी और न ही कोई नीति बनाई जाती थी कि अमुक प्रकार के संगीत या संगीतज्ञ, नृत्य या नर्तक और गायन या गायक को ही विशेष संरक्षण दिया जायेगा, परंतु 15 अगस्त 1947 के बाद इन विषयों में भी नीतियाँ बनाई जाने लगी और उनके क्रियान्वयन का मुख्य अधिकार उन प्रशासकों के पास रहा और है, जिनको वस्तुत: विधि व्यवस्था एवं शासनतंत्र का ही प्रशिक्षण दिया जाता है। $फलस्वरूप ये प्रशासक या तो अपनी रूचियों के अनुसार अथवा विभागीय प्रमुख यानी मंत्रियों के अनुसार संरक्षण में स्पष्ट भेदभाव करते है। इस विषय में समाज का उन्हें कोई संकोच नहीं होता। कुछ वर्ष बीतते-बीतते संबंधित विभागीय अ$फसरों में अपने मन का निर्णय लेने के प्रति इन विषयों में उत्साह बढ़ता गया है। <br />परिणाम यह हुआ है कि समाज में प्रतिष्ठा और प्रचार ऐसे ही गुणीजनों का होता है जिनको शासकीय संस्थाओं और शासन के स्तर पर सम्मानित किया गया हो। अ$फसर चूंकि इन विषयों के जानकार नहीं होते। अत: उनके निर्णयों का आधार गुणवत्ता नहीं, निजी झुकाव होते हैं। <br />यह बात साहित्य के क्षेत्र में और अधिक उभर कर आई। जब शासन पर कम्युनिस्ट झुकाव वाले नेताओं और अ$फसरों का लगभग एकाधिकार हो गया। कम्युनिस्ट और समाजवादी लेखकों, कवियों आदि को उनकी योग्यता के अनुपात में कई गुना महत्व और प्रचार दिया जाने लगा और साथ ही मानदेय, सम्मान, पुरस्कार आदि भी उन्हें ही दिये जाने लगे। लोकतंत्र की लाज रखने के लिये थोड़ा बहुत अन्य धारा के अनुकूल लोगों को भी पूछा जाता रहा।<br />यह स्थिति इतनी व्यापक हो गई कि अब शासन में आने वाला हर दल इसे ही स्वाभाविक मानता है। वह अपनी रूचि और अपने संगठन या पार्टी से जुड़े लेखकों, कवियों आदि को ही महत्व देता है और उनका ही संचार माध्यमों से प्रचार किया जाता है तथा उन्हें ही पद-प्रतिष्ठा, सम्मान-पुरस्कार आदि दिये जाते हैं। सामान्यत: अधिक प्रतिभाशाली हिन्दू लोग कभी भी यूरोपीय मतवादों में आस्था वाले किसी दल के सदस्य होने की रूचि नहीं रखते। ऐसी स्थिति में वे उपेक्षित और अनाम रह जाते हैं या उन्हें अल्प ख्याति ही मिल पाती है। <br />यह स्थिति हिन्दू समाज की परंपरा के नितांत प्रतिकूल है, परंतु अब इसके पक्ष में हर पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं में उत्साह रहता है। प्राय: वे इसे स्वभाविक मान लेते हैं। उन्हें लगता है कि अभी तक कांग्रेस ने, कम्युनिस्टों और वामपंथियों को बढ़ावा दिया तो अब हम अपने संगठन और अपनी पार्टी से जुड़े लोगों को बढ़ावा दें। ऐसा परिवेश बन गया है कि यह बात अब संबंधित लोगों को स्वाभाविक लगती है, परंतु ध्यान देने की बात यह है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक प्रतिभाशाली कवि, लेखक आदि तो सामान्यत: उपेक्षित ही रह जाते हैं या उन पर मानसिक दबाव बनता है कि वे शासक दल से जुड़ें। इस जुडऩे में वैसे तो कोई समस्या नहीं है परंतु राजनैतिक संगठनों और दलों से जुडऩा बहुत अधिक समय और शक्ति मांगता है और विद्या या कला या शास्त्र ज्ञान में ही विशेष प्रवृत्ति रखने वाली प्रतिभाएं कभी भी इन गतिविधियों के लिये अधिक समय और शक्ति नहीं लगा पाती, क्योंकि उनमें इस ओर कोई रूझान ही नहीं होता। तभी तो वे अपने क्षेत्र में विशेष दक्षता प्राप्त कर पाती हैं। <br />यह स्थिति इतनी व्यापक हो गई है कि अब खुलकर दिखाई पडऩे लगी है, परंतु महत्व की बात यह है कि इस ओर किसी भी महत्वपूर्ण या प्रभावशाली व्यक्ति ने चर्चा करना तक उचित नहीं माना है। मान लिया गया है कि यही स्वाभाविक है, परंतु यह तो हिन्दू समाज का ईसाई या मुस्लिम मानस अथवा कम्युनिस्ट मानस में ढल जाना है। <br />सभी जानते हैं कि ये तीनों ही धारायें बौद्धिक दृष्टि से अत्यंत संकीर्ण हैं और अन्यों के प्रति अत्यधिक असहिष्णु हैं। इसीलिये इन तीनों ही धाराओं में ‘सहृदय’, ‘गुणीजन’, ‘रसिक’, ‘सामाजिक’ जैसे पद हैं ही नहीं। इनके समानार्थी या पर्याय कोई भी पद इन धाराओं में नहीं है। उनके स्थान पर ‘ईमान लाने वाला’, ‘$फेथ$फुल’ या ‘कमिटेड’ जैसे पद ही वहाँ प्रचलित हैं। जो स्पष्ट रूप से एकांगिता और संकीर्णता के द्योतक हैं तथा सार्वजनिक रूप से ऐसी एकांगिता और संकीर्णता को न केवल वैधता देते हैं अपितु गौरव भी देते हैं। स्पष्ट है कि इसके कारण हिन्दू समाज की उदात्त और व्यापक परंपरा का क्रमश: विलोप होता चला जायेगा। दलगत खेमों और खाचों में विद्या, कला और साधना के अनुशासन भी कसे जाने लगेंगे। जो उनके विघटन और विकार का ही कारण बनेंगे। इस दिशा में राजनैतिक क्षेत्र में कोई विचार करने वाले लोग तो नहीं ही बचे हैं, चिंता और आश्चर्य की बात यह है कि शास्त्र, विद्या और कला के क्षेत्र में भी इन विषयों पर या इन प्रवृत्तियों पर विचार होता नहीं दिख रहा है। इस प्रकार बिना सार्वजनिक घोषणा और निर्णय के हिन्दू समाज क्रमश: यूरोक्रिश्चियन या मुहम्मदन या कम्युनिस्ट मतवादी समूहों जैसा बनता जायेगा और रूपान्तरित होता जायेगा।<br />यह सनातन धर्म और सार्वभौम मानव मूल्यों तथा सत्य और ऋत के प्रति निरपेक्ष होते चले जाना है। जो भारतवर्ष के मूल स्वभाव के ही विलोप का कारण बन सकता है। अत: इस विषय में शास्त्र सम्मत व्यवहार की तथा सनातन धर्म की प्रतिष्ठापक न्याय पद्धति की पुन: प्रतिष्ठा आवश्यक है। इसकी पहल करना श्रेष्ठ शासक का राजधर्म है।</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>राष्ट्र निर्माण</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:49:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोरायसिस अब लाईलाज नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;">स्वामी समग्रदेव   <br />पतंजलि संन्यासाश्रम, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3654/psoriasis-is-no-longer-incurable"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/pranayam.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सोरायसिस (Psoriasis)</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">सोरायसिस (Psoriasis) एक स्‍थायी और स्‍व-प्रतिरक्षित (ऑटोइम्‍यून) डिजीज है, जिससे लगभग 25 मिलियन भारतीय पीडि़त हैं। यह रोग त्‍वचा को प्रभावित करता है। इसमें इंफ्लेमेशन, त्वचा पर लालिमा, खुजली आदि होती है। <br />यह एक दीर्घकालिक एक पुरानी सूजन, गैर-संक्रामक त्वचा रोग है जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली अति सक्रिय हो जाती है, जिससे त्वचा की कोशिकाएँ बहुत तेजी से बढऩे लगती हैं। त्वचा के कुछ हिस्से पपड़ीदार और सूजे हुए हो जाते हैं, ज्यादातर खोपड़ी, कोहनी या घुटनों पर लेकिन शरीर के अन्य हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। सोरायसिस त्वचा रोग स्थानीयकृत या व्यापक हो सकता है। वैज्ञानिक पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं कि सोरायसिस किस कारण से होता है, लेकिन वे जानते हैं कि इसमें आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारको का मिश्रण शामिल है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>21 अक्टूबर को वर्ल्ड सोरायसिस डे होता है </strong></span><br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सोरायसिस के कारण</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">सोरायसिस एक प्रतिरक्षा-मध्यस्थ रोग है, जिसका अर्थ है कि आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अति सक्रिय हो जाती है और समस्याएँ पैदा करती है। यदि आपको सोरायसिस है, तो प्रतिरक्षा कोशिकाएँ सक्रिय हो जाती है और ऐसे अणु उत्पन्न करती है जो त्वचा कोशिकाओं के तेज उत्पादन को शुरू करते हैं। यही कारण है कि इस बीमारी से पीडि़त लोगों की त्वचा में सूजन और पपड़ी होती है। वैज्ञानिक पूरी तरह से समझ नहीं पाए है कि दोषपूर्ण प्रतिरक्षा कोशिका सक्रियण को क्या ट्रिगर करता है, लेकिन वे जानते हैं कि इसमें आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारकों का संयोजन शामिल है। सोरायसिस से पीडि़त कई लोगों के परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा है, और शोधकर्ताओं ने कुछ ऐसे जीन की पहचान की है, जो इसके विकास में योगदान दे सकते हैं। उनमें से कई प्रतिरक्षा प्रणाली के  कार्य में भूमिका निभाते हैं। <br />कुछ बाहरी कारक जो सोरायसिस विकसित होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं, उनमें शामिल हैं -</h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>संक्रमण, विशेषकर स्टे्रप्टोकोकल और एचआईवी संक्रमण। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कुछ दवाईयां, जैसे हृदय रोग, मलेरिया या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए दवाएं।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>धूम्रपान</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>मोटापा</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सोरायसिस के लक्षण</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">सोरायसिस के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं लेकिन कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं :-</h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>मोटी, लाल त्वचा के धब्बे जिन पर चांदी-सफेद रंग की पपडिय़ाँ हैं और जिनमें खुजली या जलन होती है, आमतौर पर कोहनी, घुटनों, खोपड़ी, धड़, हथेलियों और पैरों के तलवों पर होती हैं। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सूखी, फटी हुई त्वचा जिसमें खुजली होती है या खून निकलता है। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>मोटे, उभरे हुए, गड्ढेदार नाखून। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>नींद की खराब गुणवत्ता। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कुछ रोगियों में सोरायसिस गठिया नामक एक सम्बंधित स्थिति होती है, जिसकी विशेषता कठोर, सूजे हुए या दर्दनाक जोड़, गर्दन या पीठ दर्द या एड़ी में दर्द हो सकता है यदि आपको सोरायसिस गठिया के लक्षण हैं, तो जल्द ही आपने डॉक्टर से मिलना जरूरी है क्योंकि अनुपाचित सोरायसिस गठिया अपरिवर्तनीय क्षति का कारण बन सकता है। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सोरायसिस के लक्षण आते-जाते रहते हैं। आप पा सकते है कि कई बार आपके लक्षण बदत्तर हो जाते हैं, जिन्हे फ्लेयर्स कहा जाता है और उसके बाद कुछ समय ऐसा आता है जब आप बेहतर महसूस करते हैं।<img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-05/pranayam.jpg" alt="pranayam" width="800" height="937"></img></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सोरायसिस के प्रकार</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">सोरायसिस के विभिन्न प्रकार हैं, जिनमें शामिल हैं :-<br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>प्लाक सोरायसिस -</strong></span> यह सबसे आम प्रकार है, और यह त्वचा पर उभरे हुए, लाल धब्बों के रूप में दिखाई देता है जो चांदी-सफेद रंग के तराजू से ढके होते हैं। ये धब्बे आमतौर पर शरीर पर एक पैटर्न में विकसित होते हैं और खोपड़ी, धड़ और अंगों, विशेष रूप से कोहनी और घुटनों पर दिखाई देते हैं।<br />गुटेट सोरायसिस - यह प्रकार आमतौर पर बच्चों या युवा वयस्कों में दिखाई देता है, और आमतौर पर धड़ या अंगों पर छोटे, लाल बिंदुओं जैसा दिखता है। प्रकोप अक्सर ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण  जैसे कि स्टे्रप गले से शुरू होता है।<br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पुस्टुलर सोरायसिस -</strong></span> इस प्रकार में,लाल त्वचा से घिरे हुए पुस्टयूल नामक मवाद से भरे उभार दिखाई देते हैं। यह आमतौर पर हाथों और पैरों को प्रभावित करता है लेकिन एक ऐसा रूप भी है जो शरीर के अधिकांश हिस्से को कवर करता है। लक्षण दवाओं, संक्रमण तनाव, या कुछ रसायनों से शुरू हो सकते हैं। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>उल्टा सोरायसिस -</strong></span> यह रूप त्वचा क तहों में चिकने, लाल धब्बों के रूप में दिखाई देता है कि स्तनों के नीचे या कमर या बगल में। रगडऩे और पसीना आने से यह और भी बदत्तर हो सकता है। <br />एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस - यह सोरायसिस का एक दुर्लभ लेकिन गंभीर रूप है, जिसमें शरीर के अधिकांश भाग पर लाल, पपड़ीदार त्वचा होती है। यह बुरी तरह से धूप से झुलसनेया कॉर्टिकोस्टेरॉइड जैसी कुछ दवाएँ लेने से शुरू हो सकता है। एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस अक्सर उन लोगों में विकसित होता है, जिन्हें एक अलग प्रकार का सोरायसिस होता है, जिसे अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं किया जाता है और यह बहुत गंभीर हो सकता है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span style="color:rgb(35,111,161);">पतंजलि वेलनेस में सोरायसिस की चिकित्सा</span> </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पतंजलि वेलनेस में समग्र चिकित्सा के द्वारा सोरायसिस का निदान किया जाता है। <br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>आहार चिकित्सा -</strong> </span>पथ्य आहार<br />प्रात:कालीन औषधि जल- सर्वकल्प क्वाथ + कायाकल्प क्वाथ<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>नाश्ता- </strong></span>व्हीट ग्रास एलोविरा जूस, भीगे हुए ५ बादाम, ५ अखरोट, अंकुरित मूंग, मसूर मोठ, फल- पपीता, सेव, अवाकार्डो<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>दोपहर का भोजन-</strong></span> खाना खाने से पहले मिक्स सलाद का सेवन करें। उबली हरी सब्जी जैसे- लौकी, टिंडा, तुरई, पेठा, कद्दू, जौ की रोटी और दलिया।<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>दोपहर भोजन उपरांत-</strong></span> स्किन जूस (गाजर, एलोवेरा, लौकी, गोधन अर्क और गिलोय)<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>रात्रि भोजन -</strong></span> जौ का दलिया, मूंग दाल खिचड़ी, उबली सब्जी, सूप।<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>रात्रि भोजन के उपरांत - </strong></span>सर्वकल्प क्वाथ + कायाकल्प क्वाथ<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>अपथ्य आहार - </strong></span>किसी प्रकार के चर्म रोग में मीठा दूध व डेयरी के प्रोडक्ट तथा जंक फूड का सेवन नहीं करना चाहिए।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>सोरायसिस की चिकित्सा</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">निम्रलिखित प्राकृतिक चिकित्सा का उपयोग सोरायसिस चिकित्सा के रूप में लिया जाता है।</h5>
<ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5>न्यूट्रल एमरसन बाथ - नीम के साथ।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>गंजी हल्दी लेप</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कायाकल्प लेप</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>मसाज</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>एनिमा जलनेती कुंजर</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>हाइड्रो कोलन थेरेपी</h5>
<h5> </h5>
<h5><strong>निम्रलिखित आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग चिकित्सा के रूप में लिया जाता है-</strong></h5>
<h5> </h5>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>नाश्ते से पहले</strong></span></h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सर्वकल्प क्वाथ</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कायाकल्प क्वाथ</h5>
<h5> </h5>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>खाने से पहले</strong></span></h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>दिव्य कैप्सूल</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सोरोग्रिट</h5>
<h5> </h5>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>खाने के पहले</strong></span></h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>गिलोय घनवटी</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>नीम घनवटी</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>इम्यूनोग्रिट</h5>
</li>
</ul>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कायाकल्प तेल - प्रभावित जगह पर लगाने के लिए।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>दिव्य तेल - प्रभावित जगह पर लगाने के लिए।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>दिव्य डर्माग्रिट - प्रभावित जगह पर लगाने के लिए।</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>सोरायसिस के लिए योग</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>आसन- </strong></span>मंडूकासन, शशकासन, योगमुद्रासन, वक्रासन, गोमुखासन, पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन,</h5>
<h5 style="text-align:justify;">नौकासन, कन्धरासन, पादांगुष्ठानासास्पर्शासन।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>प्राणायाम-</strong></span> भस्त्रिका प्राणायाम, कपालभाति प्राणायाम, बाह्य प्राणायाम (अग्रिसार-सहायक क्रिया), उज्जायी</h5>
<h5 style="text-align:justify;">प्राणायाम, अनुलोम-विलोम प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, उद्गीथ प्राणायाम, प्रणव ध्यान प्राणायाम।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>दिव्य अनुभूति</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3654/psoriasis-is-no-longer-incurable</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:47:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>तीर्थों की यात्रा का माहात्म्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;">प्रो. कुसुमलता केडिया</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3655/the-significance-of-pilgrimage"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/ram.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;">     वनवास के समय जब शेष पाण्डव काम्यक वन में तपस्वी जीवन जी रहे थे, उस समय अर्जुन तीर्थ यात्राओं पर गये हुये थे। एक दिन जब महाराज युधिष्ठिर अर्जुन की प्रतीक्षा कर रहे थे और उनकी चिंता बहुत अधिक बढ़ गई, तो आकाश मार्ग से चलकर देवर्षि नारद मानो उनके मन की बात जानकर उनकी सभा में उपस्थित हुये। धर्मराज ने उठकर उनका यथायोग्य सत्कार किया। महाराज युधिष्ठिर का चिंतित मुख देखकर देवर्षि नारद ने उनसे चिंता का कारण जानना चाहा। युधिष्ठिर ने कहा कि अनुज अर्जुन ऋषि वेदव्यास के निर्देश पर तीर्थयात्रा पर गये हैं। कृपया हमें तीर्थयात्रा के फल के विषय में बताइये। इस पर देवर्षि ने पितामह भीष्म से ऋषि पुलस्त्य द्वारा बताई गई जानकारी का स्मरण दिलाया और उसका सार बताया। <br />       देवर्षि ने बताया कि ऋषि पुलस्त्य ने जानकारी दी थी कि तीर्थ का फल ऐसे व्यक्ति को ही मिलता है, जो अहंकार से रहित होकर तीर्थयात्रा करें और जितेन्द्रिय तथा अल्पाहारी और अपरिग्रही होकर तीर्थ में जाये। तीर्थ में कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिये और क्रोध नहीं करना चाहिये। अन्यथा तीर्थ के फल नहीं मिलते। तीर्थ का सर्वाधिक महत्वपूर्ण फल यह है कि जिन व्यक्तियों के पास धन न हो और इसलिये जो द्रव्यों के द्वारा किये जाने वाले यज्ञ न कर पायें, उन्हें भी यज्ञों के समान ही फल बल्कि यज्ञ के फल से भी बढक़र सुफल तीर्थयात्रा से मिलते हैं। बड़े-बड़े अग्निष्टोम आदि यज्ञों द्वारा यजन करने से मिलने वाले फल से भी अधिक फल तीर्थयात्रा से प्राप्त होता है। कतिपय महत्वपूर्ण तीर्थों के फल निम्नांकित हैं :-<br />     </h5>
<h5 style="text-align:justify;">      <span style="color:rgb(35,111,161);"><strong> पुष्कर तीर्थ - </strong></span>ब्रह्मा जी के तीर्थ पुष्कर में सदा ही आदित्य, वसु, रूद्र और साध्य देव रहते हैं। वहाँ जाकर तप करने पर महान पुण्य प्राप्त होता है। पुष्कर में स्नान करने से और देवताओं की पूजा करने से तथा पितरों का तर्पण करने से अश्वमेधा यज्ञ से दस गुना फल मिलता है। वहाँ जाकर कम से कम एक विद्वान ब्राह्मण को भोजन अवश्य कराइये। विशेषत: कार्तिक मास की पूर्णिमा में पुष्कर तीर्थ में स्नान करने से महापुण्य प्राप्त होता है। पुष्कर में पवित्रतापूर्वक संयम, नियम के साथ बारह वर्षों तक निवास करने पर मनुष्य को सम्पूर्ण यज्ञों का फल मिलता है और व्यक्ति मृत्यु के बाद ब्रह्मलोक को जाता है। <br />जम्बू मार्ग - जम्बू मार्ग देवताओं से सेवित तीर्थ है और वहाँ जाने से मनुष्य की मनोकामनायें पूरी हो जाती हैं। </h5>
<h5 style="text-align:justify;">    <span style="color:rgb(35,111,161);"><strong> अगस्त्य सरोवर -</strong></span> अगस्त्य सरोवर में तीन दिन स्नान और पूजन करने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल प्राप्त होता है। वहाँ रहकर फलाहार करते हुये पूजा करने पर महान पुण्य उदित होता है। <br />कण्व आश्रम - ऋषि कण्व के आश्रम में जाते ही मनुष्य समस्त पापों के प्रभाव से मुक्ति पा जाता है। उसे धर्मारण्य कहा जाता है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>महाकाल तीर्थ -</strong></span> महाकाल तीर्थ में कुछ समय तक नियमित रहकर साधना करने से अश्वमेधा यज्ञ का फल प्राप्त होता है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>नर्मदा तट - </strong></span>पवित्र नर्मदा नदी तीनों लोकों में विख्यात हैं। उनके तट पर जाकर स्नान, तर्पण और देव पूजन करने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल प्राप्त होता है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>दक्षिण समुद्र की यात्रा -</strong></span> नर्मदा से दक्षिण जाकर इन्दु महासागर की यात्रा करने से पुन: महान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>आबू तीर्थ<span style="color:rgb(35,111,161);"> -</span></strong></span> पवित्र अर्बुद (आबू) पर्वत स्वयं में एक महान तीर्थ है। पूर्व में यहाँ एक गहरा विवर (विशाल गड्ढा) था। यहाँ एक रात रहने से हजारों गोदान का फल प्राप्त होता है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>प्रभास तीर्थ - </strong></span>प्रभास तीर्थ में स्नान एवं देव पूजन से अनेक यज्ञों का फल प्राप्त होता है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>सरस्वती-समुद्र संगम - </strong></span>सरस्वती और समुद्र के संगम में जाकर स्नान करने से हजार गोदान का $फल तो मिलता ही है, दीर्घकाल तक स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।<br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>वरूण तीर्थ ‘समुद्र’-</strong></span> वरूण तीर्थ यानी समुद्र में तीन दिन स्नान करने से मनुष्य को कांति और  तेज प्राप्त होता है तथा उसे अश्वमेघ यज्ञ का $फल मिलता है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>द्वारका तीर्थ -</strong></span> द्वारका में जाकर नियमित पूजा अर्चना करते हुये कुछ दिन निवास करने से और पिण्डारक तीर्थ में पूजन करने से व्यक्ति को प्रचुर स्वर्ण की प्राप्ति होती है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>तीर्थराज प्रयाग - </strong></span>इसी प्रकार महर्षि नारद ने महाराज युधिष्ठिर को ऋषि पुलस्त्य द्वारा बताये गये तीर्थों के पुण्य फल विस्तार से बताते हुये गंगा यमुना के संगम स्थल तीर्थराज प्रयाग की महिमा बताई। जहाँ सर्वप्रथम ब्रह्मा जी ने यज्ञ किया था। उस प्रकृष्ट याग के किये जाने के कारण ही इस स्थान का नाम प्रयाग हुआ। यह सम्पूर्ण जगत में विख्यात परम पवित्र और परम पुण्यमय स्थल है। इसके पास ही ऋषि अगस्त्य का आश्रम है। यह भी एक पवित्र तीर्थ है। प्रयाग का विस्तार प्रतिष्ठान ‘झूंसी’से वासुकि नाग के जलाशय तक है और कंबल नाग एवं अश्वतर नाग तथा बहुमूलक नाग तक है। यह प्रजापति के पवित्र स्थल के रूप में तीनों लोक में विख्यात है। प्रयाग, प्रतिष्ठानपुर एवं अलर्कपुर में तीन पवित्र कूप हैं। गंगा एवं यमुना के बीच की समस्त भूमि पृथ्वी की सबसे समृद्धिशाली भूमि है और प्रयाग उसका मर्म भाग है। जहाँ तीनों नदियाँ गंगा, यमुना एवं सरस्वती मिलती हैं वह पवित्र त्रिवेणी है। उसमें स्नान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रयाग के अन्तर्गत 20 से अधिक उपतीर्थों की महिमा भी बताई गई है। साथ ही माघ मास में संगम स्नान की महत्ता भी कही गई है। नारदजी ने बताया कि संगम में स्नान करने वाले व्यक्ति को दस अश्वमेधा यज्ञों का $फल मिलता है और उसके कुल का उद्धार हो जाता है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>काशी - </strong></span>काशी या वाराणसी पवित्रतम तीर्थों में से एक है और वहाँ सैकड़ों उपतीर्थ हैं। भगवान विश्वनाथ वाराणसी के रक्षक देव हैं। ‘वनपर्व के साथ ही अनुशासन पर्व में भी काशी की महिमा बताई गई है।’ वाराणसी, काशी, अविमुक्त, आनंदकानन और महाश्मशान - ये काशी के ही नाम हैं। भगवान शिव की प्रिय नगरी होने से यह आनंदकानन या आनंदवन है और इसीलिये यह महाश्मशान भी है। नारद जी ने बताया कि यहाँ आने वाला और रहने वाला व्यक्ति भगवान विश्वनाथ के दर्शन करते ही समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और यदि उसकी काशी में मृत्यु हो जाती है तो उसे मोक्ष प्राप्त होता है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>अयोध्या - </strong></span>ऋषि पुलस्त्य ने पितामह भीष्म को बताया था कि अयोध्या परम पवित्र तीर्थ है। वहाँ जाकर स्नानपूर्वक तीन दिन उपवास करने वाला मनुष्य वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त करता है और उसके कुल का उद्धार हो जाता है तथा वह एक हजार गौओं के दान का फल प्राप्त करता है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>चित्रकूट - </strong></span>मंदाकिनी के तट पर स्थित चित्रकूट का दर्शन समस्त पापों का नाश कर देता है और परम गति प्रदान करता है। चित्रकूट क्षेत्र में स्थित भरत कूप में समस्त पवित्र नदियाँ और चारों समुद्र निवास करते हैं। उसके जल में स्नान करने से पुरुष परम पवित्र होकर परम गति को प्राप्त करते हैं। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>गया तीर्थ -</strong></span> राजर्षि गय एक विख्यात सम्राट थे। उन्होंने बहुत बड़ा यज्ञ किया और असंख्य दक्षिणायें बाटीं। वहाँ वर्ष भर याचकों को प्रतिदिन भोजन और दान दिया जाता था। चारों और वेदमंत्रों की ध्वनि गूंजती रहती थी जो स्वर्ग तक पहुँचती थी। वह यज्ञ अभूतपूर्व था और उनके कारण गया तीर्थ परम पवित्र तीर्थ है। ब्रह्म हत्या जैसे घोर पाप को करने वाला व्यक्ति भी प्रेतशिला एवं क्रौंचपदी तथा निरविन्द की पहाड़ी पर पिण्डदान करने से विशुद्ध हो जाता है। गया क्षेत्र में अनेक तीर्थ हैं, जिनका वर्णन वनपर्व के साथ ही अनुशासन पर्व में भी हुआ है। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>कुरूक्षेत्र - </strong></span>महर्षि नारद ने कुरूक्षेत्र का महत्व बताते हुये उसे भी परम पवित्र बताया और वहाँ जाकर उपासना करने से अनेक सिद्धियों की प्राप्ति बताई। ऋषि पुलस्त्य के अनुसार कुरूक्षेत्र ब्रह्मवेदी है। जहाँ ब्रह्मर्षिगण सदा निवास करते हैं, वहाँ रहकर पूजा उपासना करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। कुरूक्षेत्र तीनों लोकों के निवासियों के लिये विशिष्ट हैं। इस विषय में देवर्षि नारद द्वारा कहे गये श्लोक निम्नांकित हैं - </h5>
<h5 style="text-align:center;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>त्रयाणामपि लोकानां कुरुक्षेत्रं विशिष्यते।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पांसवोऽपि कुरुक्षेत्रद् वायुना समुदीरिता:।।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>अपि दुष्कृतकर्माणं नयन्ति परमां गतिम्।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>दक्षिणेन सरस्वत्या उत्तरेण दृषद्वतीम्।।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>ये वसन्ति कुरुक्षेत्रे ते वसन्ति त्रिविष्टपे।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>कुरुक्षेत्रे गमिष्यामि कुरुक्षेत्रे वसाम्यहम्।।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>अप्येकां वाचमुत्सृज्य सर्वपापै: प्रमुच्यते।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>ब्रह्मवेदी कुरुक्षेत्रं पुण्यं ब्रह्मर्षिसेवितम्।।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>तस्मिन् वसन्ति ये मत्र्या न ते शोच्या: कथंचन।।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>तरन्तुकारन्तुकयोर्यदन्तरं, रामहृदानां च मचक्रुकस्य च।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>एतत् कुरुक्षेत्रसमन्तपन्चकं, पितामहस्योत्तरवेदिरुच्यते।।</strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>(वनपर्व, अध्याय 83, श्लोक 203-208)</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">अर्थात् भूमंडल में नैमिष, पुष्कर और कुरूक्षेत्र अतिविशिष्ट तीर्थ हैं। इनमें भी कुरूक्षेत्र सर्वाधिक विशिष्ट है। वहाँ जो धूल उड़ती है, वह जिस व्यक्ति पर पड़ती है वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है। सरस्वती नदी के दक्षिण और दृषद्वती के उत्तर में कुरूक्षेत्र है। यह परम पवित्र है। इसमें निवास करने की कामना करने वाला भी सब पापों से मुक्त हो जाता है। यह ब्रह्मा जी की वेदी है। कुरूक्षेत्र ही समन्तपंचक है। जिसे ब्रह्मा जी की उत्तर वेदी कहते हैं। <br />वस्तुत: वनपर्व के अन्तर्गत अधयाय 80 से 145 तक हजारों तीर्थों का माहात्म्य का वर्णन देवर्षि नारद ने महाराज युधिष्ठिर से किया। जो धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त महत्व का है। तीर्थों का यह महत्व सुनकर तीर्थयात्रा पर गये हुये अर्जुन के विषय में युधिष्ठिर की चिंता समाप्त हुई और उन्होंने वनवास की समाप्ति के बाद कौरवों से भीषणतम युद्ध की योजना बनानी शुरू की। इस दृष्टि से तीर्थयात्रा पर्व का बहुत महत्व है। इस तीर्थयात्रा में जाने से अर्जुन को जो अनेक पुण्य$फल और सिद्धियाँ प्राप्त हुईं तथा भीमसेन द्वारा सौगन्धिक कमल लाने के लिये जो यात्रा की गई, जिसमें उनकी त्रेतायुग से निरंतर तपस्या कर रहे चिरंजीवी, सर्वज्ञ महायोगी श्री हनुमानजी से भेंट हुई, उनका वर्णन करते हुये श्री वेदव्यास जी ने अर्जुन के गंधमादन पर्वत पर लौट कर आने तक की कथा कही है।</h5>
<h5 style="text-align:right;">-क्रमश:</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>सनातन वैभव</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:46:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
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                <title>जल चिकित्सा के चमत्कारिक सरल प्रयोग जो रोग मुक्त करते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;">डॉ.  नागेन्द्र कुमार नीरज,  <br />निर्देशक व चिकित्सा प्रभारी<br />योग-प्राकृतिक-पंचकर्म चिकित्सा एवं अनुसंधान केन्द्र (योग-ग्राम)<br />पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3656/miraculous-simple-experiments-of-water-therapy-which-cure-diseases"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/158094252_1616841565174299_.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;">   प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में सर्वाधिक जल चिकित्सा का प्रयोग किया जाता है। जल चिकित्सा के कुछ सरलतम प्रयोग प्रस्तृत लेख में समाहित किया गया है।<br />उपर्युक्त बताये गये प्रयोग डॉक्टर के निर्देशन व सलाह से ही करें। यहाँ जल चिकित्सा के चिकित्सकीय महत्ता की जानकारी दी गयी है। अर्थव वेद, ऋग्वेद तथा यजुर्वेद में जल को अमृत तथा विश्वभेषज कहा गया है। ‘‘अप्सुन्तरमृतं अप्सुभेषजम्’’ तथा आप इद्धाउ भेषजीरापो अभीव चातनी:। आपो विश्वस्य भेषजीस्तास्ते कृण्वन्तु भेषजम्। ऋग्वेद 10/136/3 तथा अर्थवेद 3/7/5 में सम सदृशमंत्र है ‘‘आपो विश्वस्थ भेषजीस्तास्त्वा मुमचन्तु श्रेत्रियात्’’ अर्थात् जल वैश्विक औषध है, जो निसन्देह निश्चय ही शरीर के सभी संस्थानों के रोगों को दूर करता है। ‘‘सुमित्रिया न आप औषधय: सन्तु।’’ युजुर्वेद 20/19 अर्थात् परम औषध जल हमारा सुहृद मित्र है। आयुर्वेद के शास्त्रों में भी जल चिकित्सा के महिमा का गान गाया गया है।<br />प्राकृतिक चिकित्सा में जल का विशेष महत्त्व है। योगग्राम में प्राकृतिक चिकित्सा के सैकड़ों तरीके अपनाये जाते है। योगग्राम हाइटेक नेचुरोपैथी, (पंचकर्म) आयुर्वेद एवं योग का विशालतम संस्थान है। योग के महान गुरु पतंजलि गौतम, कणाद आदि परम्परा के स्वामी रामदेव जी महाराज के संरक्षकत्त्व एवं चरक, सुश्रुत, वाग्भट्ट परम्परा के महान आयुर्वेद आचार्य श्री बालकृष्ण जी के निर्देशन में संचालित है जहाँ चिकित्सा के अनेक अद्भूत प्रयोग हो रहे है, जिससे योग ग्राम असाध्य-दु:साध्य एवं साध्य रोगियों के लिए तीर्थ स्थान बन गया है। योग आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा तीनों के संगम से परिपूर्ण हजारों साल तक शिवालिक पहाडिय़ों एवं हरे-भरे वन-प्राणियों एवं वनस्पतियों से आच्छादित अरण्यवासी ऋषियों की तपोस्थली के सूक्ष्म तरंगों से आविष्ट ‘‘योगग्राम’’ में संचालित योगग्राम संस्थान आरोग्य के पावन भूमि पर दूर-दराजों, विभिन्न राज्यों एवं सरहदों से पार देश-विदेश से अतृप्त एवं अशान्त आत्माएं तथा विविध रोग ग्रस्त रोगी आकर अपने रोगों से मुक्ततो हो ही रहे है तथा अपने अस्त होते जीवन में आशा की नयी प्रकाश प्राप्त कर रहे है। ‘‘आतुरस्य विकार प्रशमनं स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्’’ के संकल्प के साथ स्वस्थ होकर लौट रहे है। योगग्राम तथा इसके साथ हमारे अन्य संस्थान निरामयम, पतंजलि योगपीठ वेलनेस सेन्टर, आसाम, पूना, गुजरात तथा अन्य कई राज्यों से संचालित वेलनेस सेन्टर से लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा संम्वर्धन स्वास्थ्य संरक्षण एवं विविध रोग निवारण चेतना जागरण का सतत महा प्रकल्प सतत प्रवाहमान है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>जल चिकित्सा के सर्वसाध्य प्रयोग</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आँख तथा चेहरे पर छींटे मारना :</strong> प्रात: दो गिलास जल पीने के पश्चात मुँह में पानी भरें। मुँह बंद कर गाल फुलाएँ तथा लोटे या नल के जल से एक बार में 20-25 बार आँखों में छींटे मारें। पुन: मुँह का पानी फेंककर 3-4 बार इसी क्रिया को दोहरायें।<br /><strong>सिर एवं ऑखों का जल धारा प्रपात स्नान :</strong> सिर से 6 इंच की दूरी से जल की धारा ललाट पर इस प्रकार गिरायें कि पानी भौंहों पर गिरे। इससे आँखों की तरफ रक्त संचार तीव्र होता है। आँखों के रोग दूर होते हैं, चेहरे का सौन्दर्य निखरता है। <br /><strong>आँखों पर छीटें मारना :</strong> नेत्र प्रदाह में आँखें बन्द करके सौम्य पानी से आँखों पर छीटे मारें।<br />चूस-चूस कर जल पीना या आचमन करना : चाय के चम्मच का पाँचवा हिस्सा या दस बूंद जल को चूस-चूसकर घुमाते हुए कुल्ला करने की तरह मुँह में चलाते हुए आचमन करने से सभी प्रकार के ज्वर में लाभ पहुँचता है। कुछ ज्वर तो 5-7 बार के आचमन से ही दूर हो जाते हैं। 25 बार चूसने के बाद 5 मिनट रुकें। बीच-बीच में रुककर 5 से 10 बार आचमन करें।<br /><strong>गरम-ठण्डा सेक : </strong>यह प्राकृतिक चिकित्सा का चमत्कारिक प्रयोग है। इसका प्रयोग सभी प्रकार के सूजन या दर्द में कमाल का प्रभाव डालता है। एक बर्तन में खूब ठण्डा तथा दूसरे बर्तन में खूब गरम जल लें। तीन फलालेन या रोयेंदार टर्किश तौलिये लें। गर्म पानी वाले तौलिये को निचोडक़र अक्रान्त अंग पर रखें। ऊपर से सूखें तौलिये से ढक दें ताकि क्रिया-प्रतिक्रिया सही ढंग से हो। 3 मिनट के बाद ठण्डे कपड़े को निचोडकर 2 मिनट ढक कर रखें। 3-5 बार क्रम से 25 मिनट तक सेंक करें। सेंक हमेशा गर्म से प्रारम्भ करें तथा ठण्डे से समाप्त करें। ठण्डे से समाप्ति के बाद सूखे तौलये से भलीभॉति शुष्क घर्षण कर स्थानीय लपेट देकर विश्राम करें।<br />गरम ठण्डे सेंक से रक्तवाहिनियाँ फैलती तथा सिकुड़ती हैं। खून का दौरा नियमित तथा नियंत्रित होता है। न्यूरोवस्कुलर तथा न्यूरोमस्कुलर संचार सही होता है। अवरोध, तनाव तथा दबाव दूर होता है। विजातीय पदार्थ घुलकर बाहर आते हैं। ज्यादा देर तक गरम उपचार करने से उस अंग में कमजोरी तथा ठण्डे से उस अंग को शक्ति मिलती है। गर्म ठण्डे सेंक के प्रतिवर्त प्रभाव से मस्तिष्क से दर्द व सूजननाशक औषधि एंडोर्फिन तेजी से निकलकर दर्द व सूजन को दूर करती है। जीर्ण, खॉसी, दमा, न्यूमोनिया तथा टी.बी. में छाती तथा ऊपरी पीठ का, आँतों, पैंक्रियास, अपेण्डिक्स, गुदाद्वार का दर्द, गर्भाशय के दर्द में, पल्विक फ्लोर पेरिनियम का हाइड्रोथैरैपी के अन्र्तगत मेरे ‘‘गरम-ठण्डा कम्प्रेश’’ व्याख्यान का लाभ एक गायनिक आबेस्टेट्रिसियन डॉक्टर ने अपने प्रेक्टिस के दौरान इस प्रकार उठाया। प्रसव कराते समय सामान्य डेलिवरी नहीं हो पा रही थी। सीजेरियन की भी व्यवस्था कर ली गयी थी। अचानक उनके दिमाग में गरम-ठण्डा कम्प्रेश का विचार कौंधा, प्रयोग किया एवं सामान्य प्रसव कराने में सफल रही, इस प्रकार गरम-ठण्डा कम्प्रेश का चिकित्सा की दृष्टि से बहुआयामी महत्त्व है। यकृत, गुर्दे तथा आमाशय के रोग में उस अंग विशेष का 3 मिनट गरम, 2 मिनट ठण्डा क्रम से 3-5 बार सेंक करें। जादुई लाभ होता है।<br /><strong>अदरक, लहसुन व प्याज का गरम ठण्डा कम्प्रेस :</strong> प्रकृति के सहयोग से ध्यान के क्षणों में अन्वेषित यह चमत्कारिक प्रयोग लाइलाज दमा तथा अन्य असाध्य रोगियों के लिए दिव्य वरदान है। 50 ग्राम अदरक, 50 ग्राम प्याज तथा 20 ग्राम लहसुन को कूटकर रस निकालें। आधे रस से जिस अंग का सेंक करना है उसकी मालिश करें। बचे हुए आधे रस को गरम पानी में डाल दें। कूटे हुए खुज्झे को पोटली बनाकर गरम पानी में डाल दें। एक भगोने में रस मिश्रित गरम तथा दूसरे में बर्फ जैसा ठण्डा पानी लें। दमा, टी.बी., ब्रोंकाइटिस या खॉसी की स्थिति में गरम पानी में तौलिये के दोनों किनारों को पकडक़र भिगोयें, निचोडक़र छाती पर 3 मिनट रखें, ऊपर से सूखे तौलिये से ढकें। पुन: इस उल्टा लिटाकर पीठ का करें। 3 मिनट गरम, 2 मिनट ठण्डा क्रम से 5 बार 25 मिनट सेंक करने के बाद लपेट बाँधे। अनेक रोगियों पर गरम ठण्डा कम्प्रेस का सफल प्रयोग किया गया है। इन रागियों में असाध्य दमा के रोगी भी थे, जिन्हें बराबर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती थी, स्टीरायड का निरन्तर प्रयोग करते थे। स्वस्थ हुए है।<br /><strong>किडनी का गरम कम्प्रेश : </strong>सी.के.डी. तथा अन्य गुर्दे के रोग में सिर्फ और सिर्फ 75-100 ग्राम अदरक लेकर कूटकर पूर्व-वत रस से मालिश तथा पोटली को गरम पानी में रखकर 20 मिनट सेंक करें।<br />यकृत की सूजन, पीलिया, गुर्दे की सूजन, किडनी फेल्योर, कमर दर्द, घुटने या संधियों के दर्द, आँतों तथा आमाशय की सूजन, अल्सर, एक्यूट गैस्ट्राइटिस, उदरशूल, सिरदर्द अर्थात् सभी प्रकार के दर्द तथा शूूल में गरम ठण्डा कम्प्रेस या सेंक कमाल का असर करता है। हजारों घरों तथा लाखों दिलों में यातनादायी पीड़ा से कराहते लोगों को राहत देकर गरम ठण्डा कम्प्रेस ने जगह बनायी है। किसी भी दर्द का मुख्य कारण खून मांसपेशीय व तंत्रिका (Neuro Vascular &amp; Neuromuscular flow ) के प्रवाह का अस्त-व्यस्त होने से हाता है। गरम-ठण्डा कम्प्रेश फ्लो (प्रवाह) को नियमित कर देता है। दर्द से राहत मिल जाता है। ठीक ही कहा गया है जहाँ फ्लो है वहाँ ग्लो है। ग्लो यानि आभा, प्रभा, चमक स्वास्थ्य, सुख शांति।<br />गरम ठण्डा कम्प्रेश या सेंक के बाद लपेट दें। जितना देर संभव हो बंधे रहने दें। यदि सिरदर्द, मूर्छा, चक्कर आना आदि लक्षण परिलक्षित होने पर लपेट खोल दें।<br /><strong>रीढ़ की गली पट्टी :</strong> तख्त या जमीन पर दरी या चटाई बिछा दें। आधा इंच मोटी, आठ इंच चौड़ी, पच्चीस इंच लम्बी सूती गीली पट्टी रीढ़ पर रखें। गर्दन से लेकर नितम्ब के नीचे वाली पूँछ कशेरुका टेलबोन पट्टी के सम्पर्क में रहे। जहां पर पट्टी रीढ़ को छू नहीं रही हो वहाँ पर कपड़े की गददी लगा दें ताकि रीढ़ को स्पर्श कर सकें। रीढ़ की पट्टी के दौरान एक पतले सूती कपड़े को भिगो निचोडक़र पेट तथा छाती पर रखें। पैर से ग्रीवा तक ऋतु अनुसार चादर या कम्बल से ढकें। शवासन एवं शिथिलीकरण में लेटे रहें।<br /><strong>अनिद्रा, स्नायु दौर्बल्य, नाड़ी की कमजोरी, नर्वस ब्रेकडाउन, अवसाद, मन:</strong> स्नायविक रोग, क्रोध, दुश्चिन्ता, रजोनिवृत्ति काल में गर्मी के झोंके, गर्मी, उत्ताप, लू, जलन, मंदाग्नि, कब्ज तथा गर्दन तोड़ बुखार में सर्वप्रथम समताप जल में भिगोई रीढ़ की पट्टी बाद में ठण्डे जल में भिगोई रीढ़ की पट्टी दिन में तीन-चार बार दें। रीढ़ से निकलने वाले स्नायु शरीर के  समस्त अंगों से जुड़े हुए हैं। ये स्नायु इन अंगों को नियंत्रित, नियमित एवं संचालित करते हैं। सामान्यावस्था में भी रीढ़ की ठण्डी पट्टी शरीर के समस्त अंगों को पोषण देकर स्वस्थ एवं शक्तिशाली बनाती है। यह जनरल टॉनिक का काम करती है।<br /><strong>स्थानीय वाष्प स्नान या नाड़ी स्वेदन :</strong> प्रेशर कुकर की सीटी हटाकर उसमें आवश्यकता के अनुसार 6 से 8 फीट लम्बे रबर की पाइप लगायें। प्रेशर कुकर में आवश्यकता अनुसार पानी भरकर स्टोव पर रखकर भाप बनायें। पाइप के दूसरे सिरे को तौलिये से पकडक़र आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग अंगों पर स्थानीय वाष्प दें। चेहरा, सिर व गले, बाल, नेत्र कान आदि उध्र्व अंगों के रोगों में पाइप से भाप दें अथवा एक छोटे से पात्र में पानी गर्म करें। भाप बनने पर उस पात्र को तख्त या चारपाई पर रखकर सिर को कम्बल अथवा मोटे कपड़े या तौलिये से ढककर बर्तन के ढक्कन को धीरे-धीरे खोलें। सहन करने योग्य ही भाप लें। 10-15 मिनट तक अत्यन्त सावधानी से स्थानीय वाष्प लें। गर्दन से ऊपर के अंगों को भाप के लिए विद्युत चालित फेशियल सावना यंत्र भी मिलता है। किसी भी अंग का स्थानीय वाष्प देने के बाद ठण्डे पानी में भिगो निचोडक़र तेजी से घर्षण स्नान के बाद लपेट देने के योग्य अंगो को सूती ऊनी लपेट दें। जिन अंगों की लपेट नहीं दे सकते हैं उन अंगों का ठण्डा स्पंज बाथ देने के बाद गरम कपड़े से ढके।<br />इसके अतिरिक्त जहरीले कीटों के काटने, अंगों में मरोड़ या मोच आने चोट लगने, सभी प्रकार के दर्द व सूजन, घुटना, जंघा, कोहनी, कन्धे तथा कमर की सभी सन्धियों के अकडऩे, जकडऩे, पैरों की सूजन, यकृत, गुर्दे तथा पाचन तन्त्र के अन्य अंगों की सूजन, खाज, खुजली, बवासीर, गुदा द्वार का घाव, भगन्दर, दाँत का दर्द, दाँत का सेप्टिक, ग्लूकोमा, आँखों की स्टाई, इन्फेक्शन (आँखों को बन्द करके) तथा सभी प्रकार के स्थानीय रोग में स्थानीय भाप अत्यन्त उपयोगी तथा प्रभावी होती है। ब्रोंकाइटिस, दमा, न्यूमोनिया आदि फेफड़े सम्बन्धी रोगों में चेहरा छाती पीठ का स्थानीय भाप दें, ठण्ड़े के ज्यादा प्रयोग से कभी-कभी साँस की नलियों में ऐंठन आ जाती है। ठण्ड से बचें सावधानी रखें।<br /><strong>गरम पाद (पैर) स्नान :</strong> डेढ़-दो गिलास गरम पानी पिए। सिर, चेहरा तथा गले को धोयें। सिर पर गीला तौलिया बाँधे। स्टूल पर बैठ जायें। दोनों पैरों को सहने योग्य गरम पानी से आधे भरे ड्रम, टब अथवा बाल्टी में रखें। ग्रीवा से लेकर टब तक का हिस्सा गरम कम्बल से इस प्रकार ढकें कि भाप बाहर नहीं निकले। रोगी को पसीना आने तक गरम पाद स्नान लें। पसीना नहीं आने पर रोगी को गरम पानी पिलायें। टब में किनारे से गरम पानी डालकर तापमान बढ़ायें। गरम पानी घुटने तक डालें। गरमी के दिनों में 10-15 मिनट तथा जाडे के दिनों में 20-25 मिनट में पसीना आने लगता है। पसीना आने पर रोगी की स्थिति के अनुसार ठण्डा शावर स्नान, ठण्डा घर्षण मालिश अथवा स्पंज बाथ दें।<br />निम्न रक्तचाप दुर्बल तथा उच्च रक्तचाप के रोगियों को वाष्प स्नान तथा गरम पाद स्नान देते समय सावधानी रखनी चाहिए। नीबू, पानी तथा शहद स्नान के पहले तथा बाद में दें।<br />गरम पाद स्नान मृदु वाष्प स्नान का कार्य करता है। वाष्प स्नान एवं गरम पाद स्नान से पसीने के द्वारा गन्दगी तेजी से बाहर निकलती है। समस्त विष निष्कासक एवं वायटल अंग यकृत, गुर्दे, त्वचा हृदय, मस्तिष्क एवं फेफड़े सक्रिय और शान्त सौम्य हो जाते हैं। ये शक्तिशाली एवं स्वस्थ बनते है। सिर तथा ऊपर के अंगों की तरफ रक्त का दबाव कम होता है। उत्तेजना शान्त हो जाती है। फलत: सिरदर्द, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा पैरों का दर्द, पैरों का ठण्डा होना, रक्तार्श, कंपकंपी देकर आने वाला ज्वर आदि रोग दूर होते हैं। गरम पाद स्नान से नींद अच्छी आती है। अनिद्रा दूर होती है।<br /><strong>ठण्डा स्पंज घर्षण स्नान :</strong> अशक्तएवं कमजोर मरीज जिन्हें वाष्प स्नान, गरम पाद स्नान या अन्य गरम उपचार के बाद, तीव्र ज्वर अथवा अत्यन्त अशक्ता एवं दूर्बलता की स्थिति में शावर बाथ या सर्वांग ठण्डा स्नान नहीं दे सकते हैं उनके लिए ठण्डा स्पंज घर्षण स्नान या ठण्डी मालिश संजीवनी का काम करती है। सर्वप्रथम रोगी का बायाँ हाथ, दाहिना हाथ, दाहिना पैर, बायाँ पैर, पेडू, छाती, जंघा, पीठ नितम्ब, गुदाद्वार, जननेन्द्रिय यानि अंग प्रत्यंग को ठण्डे गीले रोयेंदार टर्किश तौलिये से रगड़ते हुए घर्षण मालिश करें। घर्षण मालिश के लिए छोटे-छोटे तीन टर्किश तौलिये लें। इन्हें ठण्डे पानी में भिगो निचोडक़र बार-बार घर्षण मालिश करें। पानी गन्दा हो जाने पर बदल दें। अन्त में सूखे तौलिये से सारे शरीर का सूखा घर्षण करके शरीर को गरम कर लें। विश्राम करें। ठण्डी घर्षण मालिश की तरह रोयेंदार छोटे टर्किश तौलिया को गरम पानी में भिगो निचोडक़र गरम घर्षण मालिश तथा एक बार गरम, एक बार ठण्डा क्रम से गरम ठण्डा मालिश करें। रोगी को लाभ मिलता है। यह गरम-ठण्डा घर्षण रोगी की जीवनी शक्ति एवं स्थिति के अनुसार निर्धारित किया जाता है। घर्षण के लिए बर्फ का सादा ठण्डा पानी, नल का ठण्डा पानी, नीम के पत्ते उबले गरम पानी, ठण्डा पानी, 10 बूँदे डेटॉल ठण्डे या गरम पानी में डालकर घर्षण स्नान रोग की स्थिति के अनुसार दिया जाता है।<br /><strong>गीला चादर लपेट :</strong> हे जीव! तू जो अपने लिए करता है, वही लडक़े के लिए भी करे, तो परमेश्वर को संतोष होगा। तुझे पानी के उपचार पर श्रद्धा है, दवा पर नहीं। डॉक्टर रोगी को प्राणदान नहीं देता। वह भी तो प्रयोग ही करता है। जीवन की डोर तो ईश्वर का नाम लेकर, उस पर श्रद्धा रखकर तू अपना मार्ग मत छोड़- बापू की आत्मकथा ‘‘सत्य के प्रयोग’’ अंग्रेजी में The truth of my life अपने पुत्र मणिलाल गांधी को 104 डिग्री ज्वर में गीली चादर लपेट देने के पूर्व का चिन्तन। लपेट के प्रयोग के बाद ज्वर उतर गया। बापू ने अपने पुत्र को प्राकृतिक चिकित्सा एवं प्रभु की देन माना है। गीली चादर लपेट के लिए दो कम्बल, एक सूती सफेद साफ चादर एक पतले कपड़े का टुकड़ा, एक प्लास्टिक की चादर तथा दो तौलिये लें। बेंच, तख्त, पलंग, तनी चारपायी अथवा जमीन पर दोनों कम्बल बिछा दें। गरमी के दिनों में एक ही कम्बल पर्याप्त है। ऊपर से सूती सफेद चादर को नीम के पत्ते उबले पानी या सादे जल में भिगो निचोडक़र ग्रीवा के नीचे के अंग को लपेटने के लिए बिछायें।<br />रोगी के सिर, चेहरा तथा गर्दन को ठण्डे पानी से धो पोंछकर एक गिलास गरम पानी पिलायें। सिर पर गीला तौलिया बाँधें। सिर्फ कौपीन (अण्डरवीयर) पहनाकर रोगी को निर्वस्त्र लिटा दें। पहले वस्त्र से हाथों को बाहर निकालकर धड़ (सीना तथा पेट) को लपेटें। पैरों की तरफ चादर के एक किनारे से एक पैर को दूसरे किनारे से दोनों पैरों से लेकर गर्दन तक दूसरा भाग इस प्रकार लपेटें कि शरीर का हिस्सा गीले वस्त्र के सम्पर्क में रहे। ऊपर से प्लास्टिक चादर तत्पश्चात कम्बल से भलीभाँति लपेट दें। लपेट देने के बाद शरीर मिश्र की पिरामिड की ममी की तरह दिखता है। ठण्ड या बरसात के दिनों में जब शरीर से पसीना निकलना कठिन होता है। ऐसी स्थिति में चादर लपेटने के बाद उसमें दो गरम पानी थैली जंघा एवं छाती के पास रखें अथवा शरीर को प्लास्टिक की चादर में लपेट धूप में दें। बीच में गरम पानी पिलाते रहें। सभी प्रकार के गरम उपचार में सिर पर गीला तौलिया रखना तथा बीच-बीच में उस पर पानी डालते रहना नहीं भूलें।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>सामन्यत: गीली चादर लपेट का </strong></span><br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>प्रभाव चार चरणों में होता है </strong></span><br />प्रारम्भ में 5 से 15 मिनट बलदायक संकोचक ठण्डक (Cold) प्रभाव होता है। रक्त संचार तीव्र होता है। 5-10 मिनट में शरीर का तापमान बढक़र चादर के ठण्डक प्रभाव को कम करता हुआ शरीर एवं चादर के अन्दर का तापमान सम बराबर (न्यूट्रॉल) हो जाता है। शिथिल-सुखद एवं नींद की स्थिति पैदा होती है। मूत्राशय उद्दीप्त होता है। 10 मिनट की इस स्थिति के बाद शरीर का तापमान बढऩे लगता है। शरीर से गर्मी निकलनी प्रारम्भ होती है। तापोत्पादक (Thermal) प्रभाव से खून का दौरा तेज हो जाता है। त्वचा सक्रिय हो जाती है। पसीने की ग्रंथियाँ उत्तेजित हो जाती हैं। त्वचा, स्नायु नाड़ी मंडल संस्थान, निकोटिनिक व मसकेरिनिक रिसेप्टर्स हृदय, गुर्दे, यकृत, फेफड़े आदि अंग उत्तेजित एवं सक्रिय हो जाते है। कुल 25 से 30 मिनट में विष निष्कासक प्रभाव (Detoxifying Effect) तेज हो जाता है।<br />गीली चादर लपेट यकृत, गुर्दे, प्लीहा, फेफड़े, अग्नाशय की सूजन तथा इनसे सम्बन्धित रोग, पीलिया, चमड़ी के रोग, खुजली, शीत पित्त, सोरायसिस, ज्वर, जुकाम, न्यूमोनिया, सूजन, वात रोग, मोटापा, गठिया, संधिवात, इनफ्लूएंजा, ब्रोंकाइटिस, जीर्ण विषाक्ता, मलेरिया, मृगी, सिरदर्द, शराब, अफीम एवं अन्य नशीले पदार्थों के दुष्प्रभाव को दूर करने में उपयोगी है। गीली चादर लपेट रोगी की क्षमता के अनुसार 30 से 50 मिनट तक दी जाती है।<br />गीली चादर लपेट में पसीना आने पर शावर स्नान करायें। अशक्त दुर्बल रोगी को सौम्य गीले तौलिये से घर्षण स्पंज स्नान करायें।<br />लपेट के दौरान सिरदर्द, मू्र्छा, चक्कर आना इत्यादि लक्षण परिलक्षित होते हैं। ऐसी स्थिति में देर तक गीली चादर लपेट नहीं दें।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>निषेध </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">रक्तहीनता, अशक्ता, हृदय रोग, फेफड़े के रोग, वातजन्य गठिया आदि स्थिति में गीली चादर लपेट नहीं दें।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>सावधानी</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">स्टीम बाथ, गरम पैर स्नान, गीली चादर लपेट, कलर थर्मोलियम, ग्रीन हाउस थर्मोलियम आदि गरम चिकित्सा में पसीने से यूरिया, यूरिक एसिड, लैक्टिक एसिड, अमोनिया आदि बॉयोकेमिकल टॉक्सिक विजातीय मेटाबोलाइट्स निकल जाते है। इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो इसका ख्याल रखें। कमजोरी को दूर करने के लिए नीबू पानी शहद पिलायें।<br />चमत्कारिक ठण्डी पट्टियाँ : रोयेंदार टर्किश या उपलब्ध स्वच्छ सूती कपड़े को 3-4 तहकर ठण्डे पानी में भिगोकर निचोडक़र आक्रान्त अंग पर 5 से 15 मिनट तक रखें। ऊपर से सूखे तौलिये या ऊनी कपड़े से ढक दें। पानी का यह अनोखा किन्तु छोटा सा प्रयोग अपने जादुई प्रभाव से सभी रोग तुरन्त दूर कर देता है।<br />5 वर्षीय टिंकू को 48 घंटे से पेशाब रूका हुआ था। असह्य पीड़ा से ग्रस्त एवं बेचैन होकर मेरे पास लाया गया। ठण्डी पट्टी पेडू तथा मूत्रेन्द्रिय पर रखी गई। 15 मिनट बाद चमत्कार हुआ। खुलकर पेशाब आया। पीड़ा से मुक्ति मिली। चैन मिला। चेहरे पर मुस्कान खिल गई। दो माह की अपूर्वा रोये जा रही थी। उसकी माँ बेचैन थी। तभी मेरे पास लायी गई। पेट पर सूती रूमाल भिगोकर पट्टी रखी। अपूर्वा सो गई। दर्द की पीड़ा से मुक्त थी।<br />6 माह की प्रिया पेट की पीड़ा से तड़प रही थी। इस पीड़ा को अभिव्यक्तकरने के लिए वह लगातार रोये जा रही थी। उसकी माँ समझ नहीं पा रही थी कि क्या करें? कई दिनों से सो नहीं पायी थी। मेरे पास लायी गई। पेडू पर ठण्डी पट्टी रखते ही चमत्कार हो गया। खूब सोयी। सोकर उठने पर पीड़ा से मुक्त होकर मुस्कुरा रही थी।<br />9 वर्ष की माधवी योनिद्वार मूत्र नली के संक्रमण से तड़प रही थी। उसे पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाया गया तथा योनि द्वार पर बर्फ की ठण्डी पट्टी 15 मिनट के अन्तराल से रखी गई। यातना से मुक्ति मिली। ज्वर में ठण्डी पट्टी चमत्कार करती है।<br />योनि, गुदा, पेट, पैर, एड़ी, पिण्डलियों, हाथ, आँख, घुटने, सिर आदि में जलन, सूजन, दर्द, पीड़ा एवं ज्वर होने पर ठण्डी पट्टी रखने से शीघ्र राहत, रोग लक्षणों से मुक्ति एवं शक्तिमहसूस होती है। कटने, जलने, चोट, रक्तश्राव तथा किसी भी आकस्मिक चोट में ठण्डी पट्टी लाभ पहुँचाती है।<br />चमत्कारिक बलदायक लपेट : आक्रान्त अंग को सूखे तौलिये से रगडक़र-रगडक़र गरम सेंक अथवा स्थानीय भाप द्वारा गरम करने के तुरन्त बाद चारों तरफ से सूती कपड़े को भिगो निचोडक़र तीन बार ठण्डी सूती पट्टी से लपेटें। ऊपर से सूखा ऊनी कपड़ा इस प्रकार लपेटें कि नीचे का सूती कपड़ा दिखे नहीं। वायु अवरुद्ध रहे। इस ठण्डी गरम लपेट से सूजन, अन्दरूनी घाव, चोट, जलन, दर्द तथा पीड़ा दूर होती है।<br />फेफड़े तथा हृदय रोग में छाती की लपेट (12 फीट 10 इंच), पेट सम्बन्धी समस्त रोगों में पेट की लपेट (6 फीट, 12 इंच), गले सम्बन्धी रोगों में गले की लपेट (3 फीट, 4 इंच), सिर सम्बन्धी रोग में सिर की लपेट (5 फीट, 10 इंच), पैरों सम्बन्धी रोग में पैर की लपेट (10 फीट, 4 इंच), घुटने के दर्द में घुटने की लपेट (4 फीट, 4 इंच), बेचैनी, मेनिनजाइटिस, न्यूमोनिया, यकृत की सूजन, मूत्र ग्रंथियो में सूजन, अनिद्रा, स्नायविक, शूल तथा मूर्छा में पिण्डलियों की लपेट (6 फीट, 4 इंच), पैरों की एड़ी से लेकर घुटने तक दें। पिंडलियों के ठण्डा रहने पर जंघा की संधि से लेकर टखने की संधि तक लपेट दें। हाथ के रोगों में हाथ की लपेट (4 फीट, 4 इंच), वक्ष स्थल एवं उदर सम्बन्धित रोग में धड़ की लपेट (8 फीट, 2 इंच), गुर्दे, मूत्र, प्रोस्टेट तथा गर्भाशय सम्बन्धित रोग में सूती ऊनी कौपीन या लंगोट यानि टी पैक दें ।<br />लपेट में सर्वप्रथम उपर्युक्तमाप की सूती लपेट रोगग्रस्त अंग पर बाँधे। ऊपर उसी नाप की ऊनी लपेट इस प्रकार बाँधे कि नीचे की सूती लपेट दिखे नहीं। लपेट के अन्दर वायु का प्रवेश नहीं हों। संभव हो तो ऊनी लपेट के बाद उस अंग को सूती या ऊनी कपड़े से ढक दें। लपेट को न तो इतना ढीला छोड़े कि वायु अन्दर प्रवेश करके समुचित क्रिया-प्रतिक्रिया में अवरोध उत्पत्न करें और न इतनी कसकर बांधे कि रक्त संचार अवरुद्ध हो तथा रोगी बेचैनी महसूस करें। अशक्तएवं दुर्बल मरीज को विश्राम करायें। नींद आ जाये तो अच्छी बात है।<br />जल चिकित्सा के संदर्भ में विस्तृत अनुसंधान से परिपूर्ण जानकारी के लिए प्रस्तुत लेखक की पुस्तक जल चिकित्सा चमत्कार एवं व्यवहार तथा दूसरी पुस्तक जल चिकित्सा आयुवैज्ञानिक प्रयोग अवश्य पढें। इन पुस्तकों में जल के साथ सूर्य चिकित्सा, वायु चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा एवं आकाश अपवास चिकित्सा के संदर्भ में विस्तृत शोधपूर्ण जानकारी दी गयी है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:43:04 +0530</pubDate>
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