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                <title>हमारे विविध सेवा प्रकल्प - योग संदेश</title>
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                <description>हमारे विविध सेवा प्रकल्प RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हमारे विविध सेवा प्रकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">डॉ. राजेश मिश्रा</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/1725/hamare-vividh-seva-prakalp"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-06/079.jpg" alt=""></a><br /><table style="border-collapse:collapse;width:100.026%;border-width:1px;background-color:#236FA1;border-color:#236FA1;" border="1"><colgroup><col style="width:99.8555%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td style="border-width:1px;border-color:rgb(35,111,161);">
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(236,240,241);"><strong>परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज व आयुर्वेद मनीषी परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के दिव्य पावन संकल्पों व अखण्ड पुरुषार्थ के फलस्वरूप 5 जनवरी, 1995 को रोपा गया पतंजलि का राष्ट्रसेवा रूपी पौधा आज विशाल शाखा-प्रशाखाओं से युक्त वटवृक्ष का रूप ले चुका है।</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(236,240,241);"><strong>विभिन्न प्रकल्पों के रूप में पतंजलि की लोक कल्याणकारी सेवाएँ आज पूरे देश के लिए आशा की किरण बनकर उभर रही हैं। इन्हीं प्रकल्पों में से एक है, अनुसंधानपरक गतिविधियों की संचालक इकाई ‘पतंजलि अनुसंधान संस्थान’ का ‘पतंजलि औषधीय उद्यान’ विभाग।</strong></span></h5>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ज</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब भी आप हरिद्वार आएँ तो पहले पतंजलि योगपीठ अवश्य आएँ। यहाँ आपको तीर्थ के साथ-साथ प्राचीन विरासत का भी दर्शन होगा। वर्तमान समय में आयुर्वेद के ज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए और सामान्य रूप से उपलब्ध औषधीय पौधों के संरक्षण के लिए पतंजलि औषधीय उद्यान का निर्माण किया गया है। पतंजलि फेस-</span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> व फेस-२ के मध्य स्थित इस उद्यान में सम्पूर्ण भारत वर्ष से लाए गए </span>900<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक औषधीय पौधों का विशाल संग्रह किया गया है। वर्तमान में यहां पर लगभग </span>300<span lang="hi" xml:lang="hi"> शाकीय पौधों</span>, 175<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्षुपों</span>, 50<span lang="hi" xml:lang="hi"> आरोही लताओं</span>, 25<span lang="hi" xml:lang="hi"> जलीय पौधों और </span>350<span lang="hi" xml:lang="hi"> वृक्षों की प्रजातियाँ उपलब्ध हैं। एक बड़ी संख्या में संगृहीत औषधीय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुगन्धित तथा सजावटी पौधों पर अनुसंधान की संभावनाओं को तलाशने के लिए और वैज्ञानिक समुदाय के साथ-साथ साधारण जनसमूह के हित के लिए हाल ही में पतंजलि औषधीय उद्यान को पुनर्निर्मित तथा पुनर्गठित किया गया है। वनस्पति विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद तथा कृषि के क्षेत्र से सम्बन्धित वैज्ञानिकों की एक टीम यहाँ अनुसंधान और विकास कार्य में लगी हुई है। इस उद्यान में </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> कृत्रिम गुफाएँ हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो ब्रायोफाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेरिडोफाइट और ऑर्किड पादपों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। कुछ गुफाएँ सुंदर मूर्तियों के माध्यम से आयुर्वेद के आधारभूत ज्ञान को प्रदर्शित करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे-किस प्रकार से हमारे पूर्वज आयुर्वेदिक औषधियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे-चूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसव एवं भस्म आदि तैयार करते थे और विभिन्न योग आसन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राणायाम और विभिन्न योग मुद्राएँ भी इसी प्रकार की मूर्तियों द्वारा प्रदर्शित की गई हैं। यह उद्यान प्रत्येक आगन्तुक को अनायास ही आकर्षित करता है। इस उद्यान के मुख्य दर्शनीय स्थल निम्र हैं-</span></h5>
<h5 style="text-align:left;"><span style="color:rgb(201,107,11);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">यत्र विश्वं भवत्येकनीडम्</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">''<span lang="hi" xml:lang="hi">यत्र विश्वं भवत्येकनीडम्</span>’’ <span lang="hi" xml:lang="hi">यह समस्त ब्रह्माण्ड की एक संक्षिप्त परिकल्पना है। यह एक विशाल काष्ठ निर्मित कलाकृति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके चारों ओर वनस्पतिशास्त्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगशास्त्र और आयुर्वेदशास्त्र का एक दिव्य संगम उकेरा गया है। इस त्रिविध ज्ञान की जीवन में उपादेयता तथा इससे जीवन को कैसे सुगम और सुन्दर बनाया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका एक अद्भुत निदर्शन है। इस पर सर्वप्रथम आयुर्वेद प्रवर्तक धन्वन्तरि को चित्रित किया गया है। साथ ही वनस्पतिशास्त्र की विभिन्न विशेषताओं को एक साथ गूँथने का प्रयास किया है। पत्र तथा पुष्प-विन्यास की विशेषताओं को विस्तृत रूप से चित्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त योग के अष्टचक्रों के वर्णन के साथ पारिस्थितिकी तंत्र (</span>Ecosystem)<span lang="hi" xml:lang="hi"> की विशेषताओं को जीव-जन्तुओं के विकासक्रम में प्रदर्शित किया गया है। यह पर्यावरण की समस्त जैव रचनाओं के महत्व को दर्शाते हुए हमारे जीवन में इनकी उपादेयता को दर्शाता है। इस प्रकार यह हमें </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अनेकता में एकता</span>Ó <span lang="hi" xml:lang="hi">की सुन्दर जीवनोपयोगी शिक्षा प्रदान करता है।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-06/194.jpg" alt="19"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(201,107,11);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">राशिवाटिका</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राशि वाटिका के अंतर्गत </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> पादपों का चयन इनसे संबंधित राशियों के आधार पर किया गया है। आयुर्वेद-धर्मशास्त्रों और ज्योतिषशास्त्रों तथा वास्तुशास्त्रों में पेड़-पौधों का मानव जीवन पर पडऩे वाले प्रभावों का उल्लेख मिलता है। प्रत्येक ग्रह-नक्षत्र अपनी-अपनी दशा एवं स्थिति के अनुसार अपना-अपना प्रभाव डालते हैं। इसलिए जन्म समय के अनुसार व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति का निर्माण होता है। इसका हमारे प्राचीन ऋषियों को गहन व अद्भुत ज्ञान था।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्ति अपनी-अपनी राशियों के अनुसार पेड़-पौधों को लगाकर शीघ्र आरोग्य लाभ प्राप्त कर सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि दिव्य औषधियाँ अपने प्रभाव से ग्रह-प्रकोप जन्य व्याधियों को शीघ्र शमन कर देती हैं। राशि कोई भी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वनस्पतियों से आप सुखद जीवन व सुख की प्राप्ति कर सकते हैं। अत: हम सब मिलकर इसके संरक्षण का संकल्प लें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(201,107,11);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नक्षत्रवाटिका</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस वाटिका में बहुत ही मनोहर नक्षत्र वाटिका का निर्माण किया गया है। नक्षत्र वाटिका के अंतर्गत </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> पादपों का समावेश इनसे संबंधित नक्षत्रों के आधार पर किया गया है। इस वाटिका में प्रत्येक वर्ग से सम्बन्धित ग्रह का प्रतिनिधित्व करने वाले पौधों का रोपण किया गया है। नक्षत्रविद्या मनुष्य जीवन को सुन्दर व उत्तम बनाने के लिए है। नक्षत्रों का ज्ञान भय का कारण नहीं अपितु इनका सही ज्ञान होने से जीवन का कल्याण सम्भव है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के अनुसार इनका शरीर पर प्रभाव पड़ता है। मनुष्य अपनी प्रकृति के हिसाब से वनस्पतियों का प्रयोग कर उनका संरक्षण व संवर्धन करें। इस वाटिका का उद्देश्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्योतिष में पौधों के महत्व के साथ पर्यावरण की शुद्धि एवं वनस्पतियों से स्वास्थ्य लाभ है। इसका उद्देश्य धार्मिक और औषधीय महत्व के पौधों से अवगत कराना तथा औषधीय और धार्मिक आवश्यकता के लिए लोगों को एक ही स्थान पर सभी प्रकार के पौधों को उपलब्ध कराने का प्रयास है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(201,107,11);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नवग्रह वाटिका</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ पर एक बहुत सुंदर नवग्रह वाटिका भी है</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">जो नौ ग्रहों के लिए संबन्धित पौधों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे-अपामार्ग (एकाइरेन्थस एस्पेरा) बुद्ध ग्रह के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गूलर (फाइकस रैसीमोसा) शुक्र ग्रह के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पलाश (ब्यूटिआ मोनोस्र्पमा) चन्द्रमा के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीपल (फाइकस रेलिजिओसा) गुरु या बृहस्पति ग्रह के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खदिर (ऐकेसिया कटेचू) मंगल ग्रह के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आक (मदार) (कैलोट्रोपिस  जाइगैन्टिया ) सूर्य ग्रह के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुश (डेस्मोस्टैक्यिा बाइपिपेटा) केतू ग्रह के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शमी (प्रोसोपिस सिनेरिया) शनि ग्रह के लिए और दूर्वा (सायनोडॉन डैक्टाइलान) राहु ग्रह के लिए है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(201,107,11);"><strong>'<span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र ऋषि</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञानगुहा</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह राष्ट्र का पहला आयुर्वेदिक संग्रहालय माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को समर्पित है। यहाँ आयुर्वेद और योग का अनोखा संगम है। योगायुर्वेद के ज्ञान की जीवन्त झांकियों से उत्कीर्ण यह गुहा विषय का सहज बोध कराने में समर्थ है। यहाँ आयुर्वेद और योग के सम्पूर्ण विज्ञान को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। चरक से आरम्भ कर धन्वन्तरि पर्यन्त आयुर्वेद-परम्परा को दर्शाया गया है। आयुर्वेद की चिकित्सा-विधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद की औषधि-निर्माण की प्रक्रिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद का इतिहास तथा व्यावहारिक पक्ष को मूर्तियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। साथ ही षट्कर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुद्रा तथा अष्टप्राणायाम को भी भित्तियों पर उत्कीर्ण किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि उनका सही ज्ञान कराने में सक्षम है। इन कलाकृतियों द्वारा दर्शक विषय का ज्ञान सरलता से प्राप्त कर सकते हैं। प्रकृति के प्राकृतिक स्वरूप को प्रदर्शित करने वाली यह गुफा प्रकृति के सही स्वरूप की अनुभूति कराने वाली है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(201,107,11);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अष्टांग आयुर्वेद वृक्ष</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह आयुर्वेद की वैज्ञानिकता एवं अष्टांग आयुर्वेद को प्रदर्शित करता है। यह लगभग </span>1200<span lang="hi" xml:lang="hi"> किग्रा. मिश्रित धातु से निर्मित वृक्ष चिकित्सा की अष्टविध शाखाओं की विविधता का परिचालक है। यह आयुर्वेदशास्त्र की अष्टांग-विद्या की महत्ता और उपयोगिता का निदर्शन है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(201,107,11);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्षनिलयम्</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस वृक्ष से वनस्पति उद्यान के विहंगम दृश्य का अवलोकन व कोटर में विचरण के साथ मानसिक आनन्द के लिए कुछ क्षण विश्राम कर सकते हैं। मानसिक संतुष्टि से ही हम भौतिक पदार्थों का सही आनन्द उठा सकते हैं।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-06/046.jpg" alt="04"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(201,107,11);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पंछी- विहार</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वाटिका में विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के लिए एक बड़ा पक्षीघर तथा छोटे-छोटे तालाब तथा झरने के चारों ओर दुर्लभ प्रजातियों के पौधे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पक्षियों के लिए प्राकृतिक वातावरण प्रदान करते हैं। यह वनस्पतियों और पक्षियों के जीवनसम्बन्ध को प्रदर्शित करता है। इनके परस्पर तालमेल से क्या-क्या परिवर्तन होते हैं इसके अध्ययन हेतु इस पक्षीविहार का निर्माण किया गया है। यहाँ पक्षियों के जीवन को बिना प्रभावित किए उनके संरक्षण का प्रयास किया गया है। इसमें निर्मित झूला पुल (दोला पुल) से आप इसके अवलोकन के साथ प्राकृतिक आनन्द का भी अनुभव करेंगे। आगंतुक इस पक्षीघर के मध्य से एक लटकते हुए पुल को पार करते हुए जा सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उन्हें आसपास के प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद प्राप्त होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(201,107,11);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">फव्वारे तथा एक सुंदर जलाशय</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ पर सात कृत्रिम फव्वारे तथा एक सुंदर जलाशय भी स्थित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जलीय पौधों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे-ट्रापा नेटेन्स (सिंघाडा)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निम्फिया (कमल)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीलम्बो न्यूसिफेरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निम्फोइडीज इण्डिका (तगर)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिरैटोफिलम डेमेरसम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिस्टिया स्ट्रैटिआइटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टाइफा अंगुस्टिफोलिया आदि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करते हैं।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-06/067.jpg" alt="06"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(201,107,11);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षित मार्गदर्शक</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस उद्यान के अंतर्गत होने वाले मार्गदर्शित भ्रमण में प्रशिक्षित मार्गदर्शकों (गाईडों) द्वारा आंगतुकों को प्रबुद्धता-सहित आयुर्वेदिक औषधीय पादपों की महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कराई जाती हैं। यह अनुभवी गाइड पादपों से संबंधित औषधीय गुणों-सहित इनके वैज्ञानिक तथा सामान्य नामों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुल और विभिन्न रोगों में उपयोगी औषधीय प्रयोगों के बारे में भी जानकारियाँ उपलब्ध कराते हैं।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-06/0510.jpg" alt="05"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ में वैद्यों द्वारा ताजी तथा हरित औषधीय पौधों के प्रयोग के बारे में रोगियों को औषध निर्देशित किए जाते हैं जिसमें की औषधीय पादपों के ताजे स्वरस और क्वाथ की मात्रा-सहित जानकारियाँ भी प्रदान की जाती हैं। पतंजलि औषधीय उद्यान इन औषधीय पादपों के हरे पौधे जो यहाँ वर्षभर नर्सरी में हमारे विशेषज्ञों की देख-रेख में उगाये जाते हैं तथा उचित मूल्य पर जनसाधारण के लिए उपलब्ध कराता है।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>पतंजलि रिसर्च</category>
                                            <category>2019</category>
                                            <category>जून</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jun 2019 21:21:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पतंजलि अनुसंधान संस्थान </title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">डॉ. अनुपम श्रीवास्तव</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/1619/patanjali-anusdhan-sansthan"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-06/world-h-e.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प</span><span lang="hi" xml:lang="hi">तंजलि अनुसंधान संस्थान के अन्तर्गत पतंजलि जड़ी-बूटी अनुसंधान विभाग में औषधीय पादपों के पहचान का कार्य एवं इनकी परिस्थितिकी के अनुसंधान का कार्य बड़े स्तर पर किया जा रहा है। इस अन्वेषण कार्य को सार्थक बनाने हेतु विभाग के अंतर्गत पादप वर्गिकी प्रयोगशाला और पादप परिस्थितिकी प्रयोगशाला की स्थापना की गई है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पादप वर्गिकी प्रयोगशाला</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रयोगशाला में आधुनिक जातिवृत्तीय वर्गीकरण के अनुसार औषधीय पादपों के संग्रह विधि एवं पहचान के साथ-साथ अध्ययन हेतु वनस्पतियों का संग्रह (हरबेरियम) किया जाता है। इसके अंतर्गत क्षेत्रीय गतिविधियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाठ्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न परियोजनाएँ एवं प्राथमिक गतिविधियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रलेखन पादप नमूनों का संरक्षण सम्मिलित है। इस प्रयोगशाला के अंतर्गत एक विशाल संग्रहालय का भी निर्माण किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें औषधीय पौधों की चित्रकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेखा-चित्रण एवं लगभग सभी औषधीय पादपों के संग्रह (हरबेरियम) को शामिल किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें अष्टवर्ग के </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> दुर्लभ पादपों जैसे जीवक (मैलेक्सिस ऐक्यूमिनेटा)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषभक (मैलेक्सिस म्युसिफेरा)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेदा (पॉलीगोनेटम वर्टिसीलेटम)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महामेदा (पॉलीगोनेटम सीर्हीफोलियम)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋद्धि (हैबेनेरिया इंटरमीडिया)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृद्धि (हैबेनेरिया ऐक्यूमिनेटा)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काकोली (रोस्कोइआ  परपुरिया)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षीरकाकोली (लीलीयम पॉलीफिलम) भी सम्मिलित हैं। यह प्रयोगशाला अत्याधुनिक उपकरणों जैसे कि विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मदर्शी यन्त्रों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैमरा ल्यूसिडा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लांट प्रेस एवं हरबेरियम ड्रायर द्वारा सुसज्जित है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पादप परिस्थितिकी प्रयोगशाला</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रयोगशाला में औषधीय पादपों के परिस्थितिकी विज्ञान सहित विभिन्न प्रजातियों का सूक्ष्मजलवायु विश्लेषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मृदा विश्लेषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पादपों का सामाजिक-परिस्थितिकी विज्ञान-अध्ययन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैविक भार एवं जैविक उत्पादकता पर अनुसंधान कार्य किया जाता है। यह प्रयोगशाला आधुनिक उपकरणों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे एनीमोमीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्लाइनोमीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रानिक बैलेंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइक्लोमिक्सर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्लोबल पोजिशन यंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आद्र्रतामापी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वाटर बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसुत जल इकाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लक्समीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माइक्रोटोम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएच मीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीओडी इनक्यूबेटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑटोक्लेव आदि द्वारा सुसज्जित है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि जड़ी-बूटी अनुसंधान विभाग के अंतर्गत फिलहाल तीन विख्यात पुस्तकों-</span>1. '<span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व भेषज संहिता</span>’ 2. '<span lang="hi" xml:lang="hi">वानस्पतिक शब्द महाकोष</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>3. '<span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व वानस्पतिक कुल</span>Ó <span lang="hi" xml:lang="hi">पर कार्य चल रहा है। इसी विभाग में हस्तलिखित प्राचीन आयुर्वेदीय ग्रन्थ प्रकाशन योजना के अन्तर्गत भारत के विभिन्न भागों से संगृहित प्राचीन आयुर्वेदीय ग्रन्थों के प्रकाशन का कार्य भी चल रहा है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व भेषज संहिता</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संहिता विश्व स्तर पर विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में उपयोगी अनेक औषधीय पादपों का एक विशालकाय सर्वांगीण संग्रह है। आयुर्वेद के साथ-साथ अन्य चिकित्सा पद्धतियों के लिए भी यह संहिता फलदायक है। प्रधान रूप से चली आ रही लगभग साठ विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों में औषधीय पादपों का व्यापक उपयोग किया जाता है। विश्व स्तर पर विभिन्न पादपों की संख्या लगभग </span>4-5<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख तक है। इनमें से लगभग </span>68,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> पादपों का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है तथा इनमें से केवल भारत में ही </span>15,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>20,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक औषधीय पादप उपलब्ध हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस विश्व-भेषज-संहिता की रचना द्वारा एक अद्वितीय प्रयास किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विभिन्न औषधीय पादपों से सम्बन्धित ज्ञान और इनके विस्तार का एक ही स्थान पर वर्णन उपलब्ध कराया गया है। इस संरचना को वर्तमान में उपलब्ध विस्तृत अन्वेषणों तथा विभिन्न इलेक्ट्रोनिक श्रोतों से संगृहित किए गए डेटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटाबेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकाशित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रकाशित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हस्तलिखित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुर्लभ पाण्डुलिपियों और पुस्तकों से ली गई जानकारियों की सहायता से परिपूर्ण किया गया है। इस संहिता में उन ज्ञात-अज्ञात औषधीय पादपों का भी वर्णन एक ही स्थान पर बड़े ही सुचारू रूप से प्रकाशित किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका पहले एक स्थान पर वर्णन उपलब्ध नहीं था। इस प्रकार यह संहिता भविष्य में होने वाले विभिन्न रोगों की चिकित्सा हेतु वैज्ञानिक स्तर पर भी कई अन्वेषणों हेतु सहायक हो सकती है। इस संहिता में विभिन्न औषधीय पादपों का वर्णन पारम्परिक चिकित्सा की दृष्टि से विस्तृत रूप से किया गया है और इनके शास्त्रीय उदाहरणों को आधुनिक वैज्ञानिक परीक्षणों के मापदण्ड के अनुसार प्रदर्शित किया गया है। यह अप्रतिम संरचना प्राचीनकाल से वर्तमान तक ज्ञात विभिन्न सरल से जटिल रोगों के लिए प्रयोग आने वाली विभिन्न चिकित्सा विधियों के लिए अत्यधिक फलदायी और उपयुक्त प्रमाणित होगी। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व भेषज संहिता</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने आप में एक अपूर्व संरचना है। इस संहिता में विश्वस्तर पर पाए जाने वाले लगभग </span>68000<span lang="hi" xml:lang="hi"> औषधीय पादपों के </span>10-15<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख स्थानीय नामों को </span>1000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक स्थानीय विभिन्न भाषाओं में तथा अनेक पर्यायवाची नामों (लगभग </span>2,50,000) <span lang="hi" xml:lang="hi">को भी संकलित किया गया है। इसके अतिरिक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके अन्तर्गत विश्व के विभिन्न क्षेत्रों से संग्रह किए गए पादपों के सामान्य नाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राचीन आयुर्वेद के प्रकाशित ग्रन्थों एवं अप्रकाशित पाण्डुलिपियों में उपलब्ध </span>900<span lang="hi" xml:lang="hi"> औषधीय पादपों के </span>15,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> संस्कृत नामों का भी संकलन किया गया है। इससे सम्बन्धित सबसे रोचक विषय यह है कि यह पहली ऐसी संहिता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें लगभग </span>68,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> विश्वस्तरीय औषधीय पादपों के नए संस्कृत नामकरण (द्विनाम पद्धति) इन पादपों से सम्बन्धित कुल से लेकर वंश एवं प्रजातीय स्तर तक एक ही स्थान पर उल्लेखित किए गए हैं। इस संहिता में विभिन्न पादपीय कुलों और वंशों की व्युत्पत्ति के अतिरिक्त पादपों के बाह्यस्वरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भेषज गुण प्रभाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रासायनिक संगठन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औषधीय प्रयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विषाक्तता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित विभिन्न औषधीय प्रयोग पारम्परिक एवं शास्त्रीय चिकित्सा प्रयोगों सहित अनेक आधुनिक अन्वेषणों को भी विवेचना में शामिल किया गया है। इस संहिता के अन्तर्गत सम्पूर्ण पादप जगत</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे-जलीय पादप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री पादप (शैवाल)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कवक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाइकेन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रायोफाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेरिडोफाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनावृतबीजी एवं आवृतबीज पादपों को शामिल कर एक अप्रतिम कार्य का आयाम दिया गया है। इसमें औषधीय पादपों के </span>25,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> जीवन्त चित्रों (कैनवास चित्रण) एवं </span>35,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> रेखाचित्रों को भी प्रकाशित किया गया है। इस संहिता के अन्तर्गत विश्वस्तरीय पारम्परिक चिकित्सा पद्धति के इतिहास के साथ-साथ वर्तमान काल में पारम्परिक चिकित्सा पद्धति की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संहिता पूर्वोक्त सभी विषयवस्तुओं के कारण वनस्पतिशास्त्रियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्गीकरण वैज्ञानिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शास्त्रीय चिकित्सकों तथा औषध विज्ञानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जड़ी-बूटी सम्बन्धित उद्योगपतियों और समाज में उन सभी लोगों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इस विषय में अभिरुचि रखते हैं। इसी प्रकार से यह भेषज उद्योग क्षेत्र के लिए भी वरदान साबित होगी जैसा कि वर्तमान समय में हरित (ग्रीन) फार्मेसियों का भी प्रचलन है। यह संहिता उन औषधीय पादपों से सम्बन्धित आधुनिक अन्वेषण हेतु आधार स्तम्भ के समान होगी जिन पर कि वर्तमान समय में भी किसी प्रकार का अन्वेषण नहीं किया गया है। अत: इसके समान ऐसी कोई भी दूसरी संहिता नहीं हो सकती जिसमें कि पृथ्वी पर उपलब्ध लगभग सभी औषधीय पादपों की कई महत्वपूर्ण जानकारियों को एक ही स्थान पर विस्तार से वर्णित किया गया हो।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वानस्पतिक शब्द महाकोष</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पुस्तक में पादपों के आकारिकीय लक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्गीकरण एवं नामकरण के क्षेत्र में प्रयोग में लाई जाने वाली तथा वानस्पतिक शब्दकोश विभिन्न वानस्पतिक शब्दावलियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। जो कि वानस्पतिक वर्गीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आकारिकीय लक्षणों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुल वंश एवं प्रजातियों के नामकरण संबंधी विषयों में काफी सहायक हैं। इसके अलावा इस पुस्तक में कुल तथा वंश नामों का वर्णन और व्युत्पत्ति की भी विवेचना की गई है। इसमें वर्णित वानस्पतिक शब्दकोश के अंतर्गत वे सभी शब्दावलियाँ उपलब्ध हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका प्रयोग पादपों के चार समूहों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे-ब्रायोफाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेरिडोफाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनावृतबीजी एवं आवृतबीजियों के कायिक तथा प्रजनन लक्षणों के निरूपण हेतु किया जाता है। इस पुस्तक की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके अंतर्गत विभिन्न पादपों के वानस्पतिक नामकरण हेतु प्रयुक्त संबंधित शब्दों की व्युत्पत्ति का भी संपूर्ण प्रामाणिकता एवं यथोचित संदर्भो सहित विवरण दिया गया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पुस्तक के जरिए पहली बार सभी पादपीय वंशों और प्रजातियों के नाम एक ही स्थान पर सामूहिक रूप से प्रस्तुत किए गए हैं। वर्तमान प्रस्तुतीकरण में इसके अंतर्गत </span>654<span lang="hi" xml:lang="hi"> पादपीय कुल सहित </span>33,868<span lang="hi" xml:lang="hi"> वंश-नामों तथा </span>1,85,646<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रजाति नामों का वर्णन किया गया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व वानस्पतिक कुल</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">खण्ड-</span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> आवृतबीजी</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुस्तक के प्रथम भाग में आवृतबीजी पादपों के समस्त </span>416<span lang="hi" xml:lang="hi"> कुलों का वर्णन आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली के आधार पर किया गया है। इस पुस्तक की प्रमुख विशेषताओं में से एक यह भी है कि इसमें कुल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वंश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रजातियों के संस्कृत नामकरण और बाह्यस्वरूप का वर्णन विश्व में एक ही स्थान पर प्रथम बार हुआ है। इस पुस्तक में सभी जानकारियों जैसे कि कुल के संस्कृत नाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इनके नामों की संस्कृत व्युत्पत्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भौगोलिक विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वानस्पतिक-लक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक वर्गीकरण तथा महत्वपूर्ण व्यवसायिक उपयोगों को विस्तार से वर्णित किया गया है। वानस्पतिक लक्षणों को दो भागों-कायिक एवं पुष्पित लक्षणों में विभाजित कर विस्तार से वर्णित किया गया है। इस पुस्तक में वर्णित व्यवसायिक महत्व के अंतर्गत खाद्य पादपों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शृंगारिक पादपों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औषधीय प्रयोगों और अन्य अहम विषय-वस्तुओं का भी संग्रह किया गया है। इसमें कैनवास चित्रों एवं रेखा-चित्रों के समन्वय द्वारा विभिन्न पादपीय कुलों की महत्ता का क्रमानुसार वर्णन भी प्रस्तुत किया गया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">खण्ड-</span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> ब्रायोफाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेरिडोफाइट एवं अनावृतबीजी पादप</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पुस्तक के द्वितीय खण्ड में ब्रायोफाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेरिडोफाइट एवं अनावृतबीजी (जिम्नोस्पर्म) पादपों का विस्तृत वर्णन किया गया है। ब्रायोफाइट के </span>178<span lang="hi" xml:lang="hi"> कुलों का इनके युग्मोद्भिद् एवं बीजाणु-उद्भिद् लक्षणों के आधार पर विस्तृत वर्णन किया गया है। टेरिडोफाइट के भी </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> कुलों का विस्तृत वर्णन इनके बाह्यस्वरूपों और बीजाणुधानी की संरचना के आधार पर किया गया है। इसी प्रकार से अनावृतबीजी पादपों के </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> कुलों का उल्लेख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इनके कायिक तथा प्रजननीय लक्षणों के आधार पर किया गया है। इस खण्ड में भी कैनवास और रेखा चित्रों द्वारा वर्णित कुलों के कुछ महत्वपूर्ण पादपों का विवेचनात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हस्तलिखित प्राचीन आयुर्वेदीय </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रन्थ प्रकाशन योजना</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद की पुन: प्रतिष्ठा हेतु विलुप्त ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने के पावन अभियान के अन्तर्गत प्राचीन हस्तलिखित पाण्डुलिपियों के प्रकाशन का महान् प्रयास इस विभाग द्वारा किया जा रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेदीय चिकित्सा प्रणाली प्राचीन होने के साथ-साथ सर्वथा वैज्ञानिक भी है। आयुर्वेद के बहुत से प्राचीन तथा दुर्लभ ग्रन्थों की हस्तलिखित प्रतिलिपियाँ न केवल भारत में अपितु दुनिया के विभिन्न ग्रन्थालयों और संस्थाओं में उपलब्ध हैं। ये मानव जाति के लिए अत्यन्त उपयोगी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तथापि इनमें से बहुत-सी आज तक प्रकाशित नहीं हो पाई हैं। इन्हें प्रकाश में लाने तथा आयुर्वेदिक ज्ञानसम्पदा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज द्वारा विशेष प्रयास किया जा रहा है। इन जटिल संस्कृत पाण्डुलिपियों का उत्तम सम्पादन एवं सरल हिन्दी अनुवाद </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि विश्वविद्यालय की प्राचीन हस्तलिखित ग्रन्थ प्रकाशन योजना</span>Ó <span lang="hi" xml:lang="hi">के अन्तर्गत किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत अब तक प्रकाशित दुर्लभ ग्रन्थों का विवरण निम्न प्रकार से है-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">सिद्धसार-संहिता (रविगुप्त-विरचित) द्य</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">योगशतम् (अमितप्रभीयम्)</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">योगशत-वैद्यवल्लभा (रूपनयन-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद-महोदधि </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">सुषेण-निघण्टु (सुषेणवैद्य-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">भोजनकुतूहलम् (रघुनाथसूरि-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">अजीर्णामृतमञ्जरी (काशीनाथ-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">रुचिवधू-गल-रत्नमाला (परप्रणव-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">हरमेखला (माधुक-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">योगरत्न समुच्चय: (चन्द्रट-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">वैद्यशतश्लोकी (अवधानसरस्वती-विरचित)  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">चन्द्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi">-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">निघण्टु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मदनादि-निघण्टु (चन्द्रनन्दन-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदयदीपक-निघण्टु (बोपदेव-विरचित)</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनिघण्टु सोढलनिघण्टु (सोढल-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">मदनपालनिघण्टु (नृपमदनपाल-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">धन्वन्तरिनिघण्टु (महेंद्रभोगी-विरचित) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">·         <span lang="hi" xml:lang="hi">वैद्यप्रसारकम् (वैद्य गदाधर-विरचित)।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>पतंजलि रिसर्च</category>
                                            <category>2019</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Mar 2019 21:32:54 +0530</pubDate>
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                <title>योग ग्राम</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">स्वामी नारायणदेव<span>  </span></span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/1489/yog-gram"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-06/145.jpg" alt=""></a><br /><table style="border-collapse:collapse;width:100%;border-width:1px;background-color:#E03E2D;border-color:#E03E2D;" border="1"><colgroup><col style="width:99.8705%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td style="border-width:1px;border-color:rgb(224,62,45);">
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज व आयुर्वेद मनीषी परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के दिव्य पावन संकल्पों व अखण्ड पुरुषार्थ के फलस्वरूप 5 जनवरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1995 को रोपा गया पतंजलि का राष्ट्रसेवा रूपी पौधा आज विशाल शाखा-प्रशाखाओं से युक्त वटवृक्ष का रूप ले चुका है।</span></strong></span></h5>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="border-collapse:collapse;width:100%;border-width:1px;background-color:#236FA1;border-color:#236FA1;" border="1"><colgroup><col style="width:99.8705%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td style="border-width:1px;border-color:rgb(35,111,161);">
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न प्रकल्पों के रूप में पतंजलि की लोक कल्याणकारी सेवाएँ आज पूरे देश के लिए आशा की किरण बनकर उभर रही हैं। इन्हीं प्रकल्पों में से एक है प्रकृति की गोद में बसा स्वास्थ्य का धाम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योग ग्राम</span>’<span lang="hi" xml:lang="hi">।</span></strong></span></h5>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नै</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सर्गिक उपचार केन्द्र </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">योग ग्राम</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का उद्घाटन ०८ जून २००८ को उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री भुवनचंद्र खण्डूरी केद्वारा किया गया। आयुर्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के समन्वय द्वारा समस्त पीडि़त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्रस्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असाध्य-रोगग्रस्त मानव जाति को शारीरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक एवं आत्मिक स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शान्ति एवं समृद्धि प्रदान करना पतंजलि योगग्राम का परम उद्देश्य है। योग ग्राम पुरानी परम्परागत चिकित्सा पद्धति एवं नवीन निदान विज्ञान का अनूठा समन्वय है। विज्ञान तथा अध्यात्म जब एक-साथ मिलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब जीवन विकसित होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खिलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरभित होता है। योग ग्राम में विज्ञान तथा अध्यात्म के समन्वय से अद्वितीय आरोग्य विज्ञान का विकास हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ पर रोगग्रस्त मानव जाति का तन-मन एवं चेतना के स्तर पर कायाकल्प किया जा रहा है। योग ग्राम एक ऐसा पूर्ण नशामुक्त व प्रदूषणमुक्त गाँव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ सौ प्रतिशत विषमुक्त जैविक कृषि की जाती है और सैकड़ों गायों का सेवा कार्य किया जा रहा है। विश्वप्रसिद्ध प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">निरामयम्</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">भी इसी गाँव में स्थित है। रंगीन फव्वारों से सुसज्जित यह परिसर प्रसिद्ध </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">राजा जी नेशनल पार्क</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">से घिरा हुआ है। विदेश से भी प्रतिवर्ष हजारों लोग यहाँ योग-प्राणायाम-पंचकर्म व प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ लेने आते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा संकल्प</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग एवं आयुर्वेद द्वारा आरोग्य एवं चेतना-जागरण का प्रकाश श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज एवं आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने जिस प्रकार घर-घर पहुँचाया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रकाश सतत स्वास्थ्य का पथ प्रशस्त करता रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी स्वस्थ एवं सुखी हों तथा रोग निवारण के साथ स्वास्थ्य संरक्षण एवं स्वास्थ्य संवद्र्धन के इस विज्ञान एवं कला द्वारा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य चेतना को एक नया संस्कार एवं नया आधार प्रदान करना इस केन्द्र का दिव्य संकल्प है। आरोग्य के साथ-साथ राष्ट्र व विश्व के लोगों का चरित्र निर्माण एवं नैतिक उत्थान करना हमारा ध्येय है।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-06/244.jpg" alt="24"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य के मुख्य</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> आधारों का पोषण</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिक कालीन अरण्यवासी ऋषियों की सरल स्वाभाविक आश्रम आधारित जीवन पद्धति के आधार पर इस गाँव में आगन्तुक रोगियों तथा स्वास्थ्य साधकों की दिनचर्या का कार्यक्रम प्रात: साढ़े चार बजे से प्रारम्भ होकर रात्रि </span>9:30<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे स्वास्थ्य संवद्र्धक एवं स्वास्थ्य संरक्षक सृजनात्मक चिन्तन के साथ समाप्त होता है। स्वास्थ्य सम्बन्धी नित्य नवीन शोधों से परिपूर्ण व्याख्यान एवं नैसर्गिक जीवन शैली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलित आहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्यक् विहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवहार तथा सम्यक् विश्राम की भूमि है योग ग्राम। यहाँ प्रकृति के पंच महाभूतों- अग्नि (सूर्य)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आकाश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल एवं पृथ्वी के सम्यक् उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राणायाम एवं ध्यानादि अष्टांग योग के व्यावहारिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैद्धान्तिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दार्शनिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान से रोगियों को सुसंस्कारित कर स्वस्थ जीवन में प्रतिष्ठित किया जाता है। रोगी यहाँ से रोग मुक्त तो होता ही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही वह स्वयं अपना एवं अपने परिवार के लिए एक योग्य निसर्गोपचारक बन कर जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही सच्चाई है। वह समझ जाता है कि रोग क्या है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">रोग का कारण क्या है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">तथा उसका सही निदान एवं उपचार क्या है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">रोगों से मुक्त रहकर वह स्वयं तथा अपने परिवार के साथ-साथ समाज व राष्ट्र को स्वस्थ रखने में सक्षम हो जाता है। जो लोग कई वर्षों से रोग तथा दवाइयों के चंगुल में फंसकर अभिशप्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोग-संतप्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्रस्त जीवन जी रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे आज योग ग्राम के सहयोग से सम्यक्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सशक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्फूर्त एवं स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। इस प्रकार योग ग्राम में वैश्विक स्वास्थ्य निर्माण का अभूतपूर्व प्रयोग चल रहा है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योग ग्राम में उपलब्ध है </span><span lang="hi" xml:lang="hi">असाध्य रोगों का उपचार</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग ग्राम में मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्लड प्रेशर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल के रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गठिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जोड़ों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रीढ़ तथा कमर का दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थराइटिस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बवासीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिप्रेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेन्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैस्ट्रिक समस्याएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलाइटिस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लीवर तथा किडनी के रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्सर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रारम्भिक कैन्सर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माइग्रेन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनिद्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्दी-जुकाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलर्जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं के रोग आदि अनेक साध्य एवं असाध्य बीमारियों का उपचार बिना दवा के योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा किया जाता है। यदि आप दवाइयाँ खा-खा कर तंग आ चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझ बैठे हैं कि रोग जाएगा ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो निराश न हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शीघ्र योग ग्राम में सम्पर्क करें। परमात्मा ने मानवमात्र को आरोग्य का मौलिक व जन्मसिद्ध अधिकार दिया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य साधकों की आवासीय व्यवस्था</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस विशालतम हाइटेक योग निसर्गोपचार आश्रम योग ग्राम में पाँच सौ से अधिक स्वास्थ्य साधकों तथा रोगियों के रहने की अनुपम व्यवस्था है। ग्रामीण परिवेश में आधुनिकतम सुविधा एवं साधनों से सुसज्जित राजर्षि कुटिया (सुपर डीलक्स)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुनिराज कुटिया (डीलक्स)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महर्षि कुटिया (स्पेशल डीलक्स)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तपस्वी कुटिया (सेमी डीलक्स) व विरासती आश्रम कुटिया की व्यवस्था की गई है। योग के लिए विशाल मल्टीप्लेक्स कम्युनिटी हॉल तथा डाइनिंग हॉल आदि की व्यवस्था है। प्रत्येक स्वास्थ्य साधक का कक्ष रंगीन टीवी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रेसिंग टेबल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गलीचा आदि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। प्रत्येक वातानुकूलित कक्ष आधुनिक स्नान घर से सुसज्जित है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(0,0,0);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिकतम साधनों से सुसज्जित है </span><span lang="hi" xml:lang="hi">योगग्राम</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन पंचमहाभूतों से मानव शरीर का सृजन हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हीं के अनूठे सम्यक् प्रयोग से योग ग्राम में रोग निवारण एवं स्वास्थ्य प्रदान किया जाता है। इनमें प्रमुख हैं-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जल चिकित्सा (हाइड्रोथैरेपी) अनुभाग</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिस प्रकार पृथ्वी पर तथा शरीर में दो-तिहाई हिस्सा जल का है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार प्राकृतिक चिकित्सा में दो-तिहाई जल चिकित्सा का उपयोग किया जाता है। इस अनुभाग के अन्तर्गत कटि स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रीढ़ स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्प्रे-स्पाइनल बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटराइज्ड जेट स्पाइनल बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टीम बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सौना बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाइटेक कोलोन हाइड्रोथैरेपी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओजोन सौना तथा स्टीम बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल तरंग अभ्यंग स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भंवरकूप स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्प्रिंकलर बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओजोन बुलबुला स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्कुलर जेट हाइड्रो मसाज बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इमर्शन स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरम-ठण्डा अल्टरनेटिव जेट स्प्रे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाइड्रो जेट-स्प्रे मसाज या डूश बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटबाथ एण्ड आर्म-बाथ (पाद हस्तस्नान)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिटिंग (बैठक) बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुल शीट पैक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न प्रकार के लपेट इत्यादि के द्वारा रोगी के शरीर में रक्त संचरण व पाचन तन्त्र को स्वस्थ किया जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-06/134.jpg" alt="13"></img></span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मिट्टी चिकित्सा (मडथैरेपी) अनुभाग</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अनुभाग में कॉस्मेटिक मड बाथ पूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मड-स्प्रे रोलर मसाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मड पैक कम्प्रेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलग-अलग मिट्टी की पट्टियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉस्मेटिक फेशल मडप्लास्टर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैण्ड वाकिंग ट्रैक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैण्ड बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वेपर सैण्ड बाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुल्तानी मिट्टी की मालिश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशाल लॉन में नंगे पैर घूमने वाली चिकित्सा इत्यादि दर्जनों चिकित्सा पद्धतियों की व्यवस्था की गई है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सूर्य (अग्रि तत्त्व) चिकित्सा अनुभाग</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सूर्य स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रंगीन रश्मि चिकित्सा के अन्तर्गत सूर्य किरण से रंगीन बोतल आविष्ट जल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रोमेटिक हाइड्रो एण्ड ऑयल थैरेपी आदि का प्रयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलर थर्मोलियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रीन हाउस थर्मोलियम इत्यादि प्रयोग सूर्य चिकित्सा के अन्तर्गत किए जाते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मैग्नेट चिकित्सा अनुभाग</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मैग्नेटिक एनर्जी बॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चश्मे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घुटने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर की चुम्बकीय बेल्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टू-साइडेड मैट मैग्नेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मल्टी मैग्नेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैग्नेवाटर ग्लास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैग्नेटिक ईयर क्लिप्स तथा मैग्नेट चेयर इत्यादि अनेक उपकरणों की व्यवस्था भी उपलब्ध है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रोग निवारक स्वास्थ्यप्रद आहार चिकित्सा अनुभाग</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्राकृतिक चिकित्सा में सबसे अधिक बल आहार पर दिया जाता है। यहाँ आने वाले सभी स्वास्थ्य साधक योगग्राम की आहार चिकित्सा की मुक्तकण्ठ से प्रशंसा करते हैं। यहाँ प्राकृतिक एवं आयुर्वेदिक सिद्धान्तों पर आधारित आधुनिक अनुसंधानों के अनुसार लगभग नौ सौ प्रकार के बायोएक्टिव फाइटोकेमिकल कम्पाउण्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माइक्रोन्यूट्रिएन्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एण्टी-ऑक्सीडेन्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एन्जाइम से संयुक्त विविध प्रकार के ताजे फल एवं ताजी हरी सब्जियों के रस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गेहूँ तथा जौ के पत्ते (जवारे) का रस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एण्टी डायबेटिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एण्टी एनीमिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एण्टी कार्डियक आदि अनेक प्रकार की रोटियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर्बल भुजिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छाछ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंकुरित अनाजों का दलिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खिचड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सलाद चाट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राकृतिक मिष्ठान्न आदि विविध प्रकार के मनोहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्यवर्धक व स्वादिष्ट व्यंजनों से सुसज्जित आहार चिकित्सा अनुभाग है। योग ग्राम में सभी प्रकार के आहार जैविक खेती से प्राप्त फल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शाक-सब्जियों एवं अनाजों से निर्मित होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शीघ्र स्वास्थ्य लाभ होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन अनुभागों के अतिरिक्त पतंजलि योग ग्राम में प्राकृतिक चिकित्सा आधारित अनेक चिकित्सा अनुभाग हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ रोगियों का उपचार किया जाता है। इनमें वायु चिकित्सा अनुभाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आकाश चिकित्सा अनुभाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग चिकित्सा अनुभाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्यूपंक्चर एण्ड एक्यूप्रेशर अनुभाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिरामिड चिकित्सा अनुभाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रैकी चिकित्सा अनुभाग आदि प्रमुख हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योग ग्राम की असाधारण </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा विशेषताएँ</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कोलन इरीगेटर हाइड्रोथैरेपी</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कब्ज समस्त रोगों का कारण है तथा कब्ज को मिटाकर पेट की पूरी धुलाई तथा सिंचाई करने वाले कोलन इरीगेटर का अनुभव अनुपम है। ड्यूअल ऑपरेशन ग्रेविटी एण्ड प्रेशर मोड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन्टीग्रेटिड डिसइन्फेक्शन सिस्टम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रिपल वाटर प्यूरीफिकेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑटोमेटिक टेम्परेचर एण्ड प्रेशर कन्ट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुल स्पेक्ट्रम व्यू ट्यूबलाइट तथा फ्लो-कंट्रोल एण्ड फ्लो-मीटर से संयुक्त विश्व की सर्वाधिक हाइटेक कोलोन थैरेपी की व्यवस्था की गई है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मड स्वीमिंग पूल</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मड मसाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कीचड़ स्नान देश का अद्वितीय दिलचस्प अनुभव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें त्वचा विषमुक्त होकर कंचन की तरह निखर जाती है। इससे रोग प्रतिरोधक तथा सहन करने की क्षमता बढ़ जाती है तथा समस्त रोगों से बचाव होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ओजोन स्टीम सौना बाथ</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह शरीर को विषमुक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोगाणुरहित करने का अनोखा प्रयोग है। ऑक्सीजन का ही सक्रिय एवं तीन परमाणु वाला (ट्राइवैलेंट) रूप है- ओजोन। ओजोन जर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैक्टीरिया एवं वायरस तथा फंगस को नष्ट करके शरीर की रोग प्रतिरोधक जीवनी शक्ति को बढ़ा देता है। अब तक प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि ओजोन स्टीम सौना बाथ सौ प्रकार के रोगों को ठीक करने में सहायक है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक्यूप्रेशर अनुभाग हाइड्रोएक्यूप्रेशरियम</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पैरों के तलुओं में समस्त अंगों का प्रतिनिधित्व करने वाले मेरिडियन पॉइन्ट होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें सक्रिय कर शरीर के अंग-प्रत्यंग को रोगमुक्त एवं स्वस्थ रखा जाता है। एक्यूप्रेशरियम के अन्तर्गत नाना प्रकार के नुकीले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चपटे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अण्डाकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिरामिड आदि ज्यामितीय आकार के पत्थरों को पानी के अन्दर स्थिर करके रोगी को इन पर </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिनट तक चलाया जाता है जिससे सारे शरीर में चुम्बकीय ऊर्जा प्रवाह तीव्र गति से नियमित एवं नियोजित होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सतत शोध एवं विकास अनुभाग</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग ग्राम में योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राकृतिक चिकित्सा एवं जड़ी-बूटियों के समन्वित प्रयोग से कैंसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुमेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थराइटिस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाइपरटेन्शन तथा हृदय रोगों पर शोध कार्य चल रहा है। इन रोगों का सर्वसाध्य सहज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरल एवं सस्ता उपचार खोज कर उसे सर्वमान्य एवं सार्वभौम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस दृष्टि से आधुनिक साधनों से सुसज्जित विश्वस्तरीय कम्प्यूटराइज्ड प्रयोगशाला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ हर प्रकार की जाँच करने की सुविधाएँ हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">समूह सलाह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य स्वावलंबन </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण एवं कार्यशाला</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रोगियों के मन में योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राकृतिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से सम्बन्धित अनेक भ्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिज्ञासा एवं प्रश्न होते हैं। उनका समाधान वरिष्ठ चिकित्सकों के निर्देशन में सुबह-शाम एक घंटे के रोग निवारण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन कार्यशाला में किया जाता है। </span>''<span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तिगत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारिवारिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य संवद्र्धन हो</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">यही इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य है। रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक स्वास्थ्य से सम्बन्धित खोज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनोविज्ञान आदि अनेक विषयों पर कार्यशाला एवं चर्चा होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ए.टी.एम. व हर्बल उत्पाद विक्रय पटल</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योगग्राम में ए.टी.एम. की सुविधा भी उपलब्ध है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही योगग्राम की आधुनिकतम प्रयोगशाला में निर्मित ऑर्गेनिक तरीके से प्राप्त निरापद वनौषधियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पेशल हर्बल टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंकुरित अनाज का दलिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्राउन राइस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्लैक्स सीड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्यूप्रेशर का सामान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संबन्धी पुस्तकें</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वीमिंग सूट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टै्रक सूट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग क्रियाओं के लिए विशेष ड्रेस आदि अनेक उपचार एवं दैनिक उपयोगी साधनों को खरीदने की व्यवस्था है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सक तथा चिकित्सा व्यवस्था</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योगग्राम में अनुभवी चिकित्सकों एवं उपचारकों की सेवा-समर्पित मिशनरी टीम द्वारा अहर्निश रोगियों की सेवा की जा रही है। रोगी हमारे लिए आराध्य भगवान् हैं। उनकी तन-मन से सेवा हमारा प्राथमिक कत्र्तव्य है- यही विचार योग ग्राम का मुख्य आधार स्तम्भ है। पुरुष तथा महिला रोगियों के निदान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा एवं देख-रेख के लिए महिला तथा पुरुष डॉक्टर तथा उपचारक और उपचारिकाओं की अलग-अलग व्यवस्था है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महिला तथा पुरुषों का हाईटेक चिकित्सा कक्ष भी अलग-अलग है। योगग्राम में चिकित्सा पाने वाले ९० प्रतिशत रोगी पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर जाते हैं। कैंसर की प्रथम स्टेज में रोगी को योगग्राम में १०० प्रतिशत लाभ मिलता है। यहाँ के चिकित्सकों व कर्मचारियों की विनम्रता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुस्कुराहट व व्यवहार की प्रशंसा यहाँ आने वाला प्रत्येक रोगी करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंटिग्रेटेड थेरेपी</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2019</category>
                                            <category>जनवरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jan 2019 21:35:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमारे विविध सेवा प्रकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;" align="center"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज व आयुर्वेद मनीषी परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के दिव्य पावन संकल्पों व अखण्ड पुरुषार्थ के फलस्वरूप 5 जनवरी 1995  को रोपा गया पतंजलि योगपीठ रूपी पौधा आज विशाल शाखा-प्रशाखाओं से युक्त वटवृक्ष का रूप ले चुका है।</span> </strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;" align="center"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न प्रकल्पों के रूप में पतंजलि की लोककल्याणकारी सेवाएं आज पूरे देश के लिए आशा की किरण बनकर उभर रही हैं। इन्हीं प्रकल्पों में दिन दूना-रात चौगुना बढ़ता पतंजलि का </span><span lang="hi" xml:lang="hi">योग प्रचारक प्रकल्प अद्भुत कार्य कर रहा है।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी विदेहदेव  एवं  स्वामी पुण्यदेव</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ग</span><span lang="hi" xml:lang="hi">तांक में हमने शिक्षा के प्रकल्प आचार्यकुलम् शिक्षण संस्थान को</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2182/hamare-vividh-seva-prakalp"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/664.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;" align="center"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज व आयुर्वेद मनीषी परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के दिव्य पावन संकल्पों व अखण्ड पुरुषार्थ के फलस्वरूप 5 जनवरी 1995  को रोपा गया पतंजलि योगपीठ रूपी पौधा आज विशाल शाखा-प्रशाखाओं से युक्त वटवृक्ष का रूप ले चुका है।</span> </strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;" align="center"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न प्रकल्पों के रूप में पतंजलि की लोककल्याणकारी सेवाएं आज पूरे देश के लिए आशा की किरण बनकर उभर रही हैं। इन्हीं प्रकल्पों में दिन दूना-रात चौगुना बढ़ता पतंजलि का </span><span lang="hi" xml:lang="hi">योग प्रचारक प्रकल्प अद्भुत कार्य कर रहा है।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी विदेहदेव  एवं  स्वामी पुण्यदेव</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ग</span><span lang="hi" xml:lang="hi">तांक में हमने शिक्षा के प्रकल्प आचार्यकुलम् शिक्षण संस्थान को प्रस्तुत किया था</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अंक में पतंजलि योग प्रचारक प्रकल्प को प्रस्तुत किया जा रहा है। पूर्ण अनुशासन व अखण्ड प्रचण्ड पुरुषार्थ को चरितार्थ करता योग प्रचारक प्रकल्प देश के सभी ६०० से अधिक जिलों में सुचारू रूप से कार्य कर रहा है। परम पूज्य स्वामी जी महाराज कहते हैं कि मैंने आज जिस मुकाम को पाया है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उसके मूल में योग की शक्ति है। योग की इस महान् सेवा को सर्वाधिक प्राथमिकता प्रदान करते हुए परम पूज्य स्वामी जी महाराज ने योग प्रचारक प्रकल्प की शुरुआत की है। प्रकल्प के विभिन्न क्रियाकलाप इस प्रकार हैं-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पाँच दिवसीय योग शिविर</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिमाह योग प्रचारक प्रकल्प पूरी प्रामाणिकता के साथ १६०० से अधिक गाँव/शहरों में ५ दिवसीय योग शिविरों के माध्यम से परम पूज्य स्वामी जी महाराज एवं परम श्रद्धेय आचार्य श्री की स्वस्थ एवं समृद्ध भारत की संकल्पना को साकार कर रहा है। प्रत्येक योग शिविर में योग</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यज्ञ</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ भारत अभियान एवं वृक्षारोपण के विषय में जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य यह प्रकल्प कर रहा है। योग</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी एवं वैदिक दिनचर्या ग्रामवासियों की जीवनशैली में क्रियान्वित हो जाए</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए प्रकल्प योग प्रचारकों के माध्यम से प्रयासरसत है। ज्ञात इतिहास में वर्ष २०१७ में पतंजलि द्वारा आयोजित २५</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi">१२० नि:शुल्क ५ दिवसीय योग शिविरों का संचालन स्वत: सिद्ध विश्व रिकॉर्ड है जो परम पूज्य स्वामी जी महाराज एवं परम श्रद्धेय आचार्य श्री के परम पुरुषार्थ एवं आशीर्वाद से प्रकल्प द्वारा सम्भव हो पाया है। १०० प्रतिशत चैरिटी के महा-उद्घोष को साकार कर रहा है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">योग प्रचारक प्रकल्प का यह दिव्य सेवाकार्य।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक दिवसीय विद्यालय-योग शिविर</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकल्प योग प्रचारकों के माध्यम से विद्यालय-योग शिविरों का भी आयोजन कर रहा है जहाँ विद्यार्थियों को योगमय जीवनशैली जीने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ अच्छे संस्कारों को अपनाने का भी आह्वान किया जा रहा है। विद्यार्थी आने वाले समय में देश के नव-निर्माण में सहायक हों इसके लिए उन्हें मूल संस्कृति से जोडऩे का कार्य भी प्रकल्प कर रहा है। विद्यालयों में एक-दिवसीय योग शिविर लगाने के क्रम में वर्ष-२०१७ में ५४</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi">९६६ से अधिक शिविर लगाये गये हैं।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/71.jpg" alt="71"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आरोग्य सभा</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रात:काल योग सेवा करने</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दिन में विद्यालय शिविर की सेवा के उपरान्त सायंकाल गाँव में आरोग्य सभाओं का आयोजन प्रकल्प कर रहा है। कैसे ग्रामवासी/शहरवासी योग के साथ-साथ आयुर्वेद के विषय में जागरूक बनें</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए आरोग्य सभा के माध्यम से प्रकल्प उनमें जागरुकता फैलाने का कार्य कर रहा है। ग्रामीण जड़ी-बूटियों को प्रत्यक्ष दिखाकर रोगानुसार उनका प्रयोग भी ग्रामवासियों को बताया जा रहा है। गाँव-गाँव में वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार तथा जन-मानस श्रद्धान्वित हों</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए आरोग्य सभा के माध्यम से वैदिक ग्रन्थों का स्वाध्याय आम-जनमानस को कराया जा रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ भारत अभियान</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ भारत अभियान के अन्तर्गत वर्ष 2017 में योग प्रचारक प्रकल्प 22,000</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक स्वच्छ भारत के कार्यक्रम गाँव-गाँव</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शहर-शहर में आयोजित कर चुका है। हमारे योग प्रचारक प्रत्येक गाँव में 5 दिन प्रवास करते हैं। इस दौरान संगठन के कार्यकत्र्ताओं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय सरपंच</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्राम प्रधान एवं अन्य प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकत्र्ताओं के साथ मिलकर 5 दिन के लिए स्वच्छता का बृहद् अभियान चलाया जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी स्टोर स्थापना</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी से स्वावलम्बी भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए प्रकल्प ग्राम स्तर पर स्वदेशी स्टोर खोलने के अभियान को गति दे रहा है। सभी योग प्रचारक अभ्युदय विभाग से सम्पर्क कर स्वदेशी स्टोर की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध हैं। भविष्य में इस सेवा कार्य के लिए प्रकल्प और अधिक ऊर्जा लगायेगा। यह प्रकल्प जहाँ एक ओर स्वदेशी अभियान को आगे बढ़ाने में लगा है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर बेरोजगार युवाओं को रोजगारोन्मुख भी कर रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्राम समिति निर्माण</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकल्प ग्राम स्तर पर संगठन विस्तार पर भी कार्य कर रहा है। जिस गाँव में ५ दिवसीय योग शिविर संचालित होता है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उस गाँव में ग्राम समिति का निर्माण कर उसे संगठन से जोड़ा जाता है। स्वामी जी महाराज की दूरदृष्टि है कि राज्य</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मण्डल</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिला एवं तहसील से लेकर गाँव तक अपना संगठन सशक्त हो। ग्राम समिति के लिए ग्राम प्रभारी</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महिला ग्राम प्रभारी</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">युवा ग्राम प्रभारी</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नियमित योग शिक्षक एवं किसान प्रभारी आदि नियुक्त किये जाते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हवन-यज्ञ द्वारा पर्यावरण रक्षा</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हवन-यज्ञ वैदिक संस्कृति की आत्मा है। प्रकल्प योग प्रचारकों के माध्यम से योग के साथ-साथ यज्ञ के द्वारा पर्यावरण रक्षा के अभियान को आगे बढ़ा रहा है। प्रत्येक योग शिविर की समाप्ति पर हवन-यज्ञ का आयोजन कर आम-जनमानस को भी यज्ञ की भावना से जोड़ा जा रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थाई कक्षाओं का निरीक्षण </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">५ दिवसीय योग शिविरों को नियमित योगकक्षा में परिणत करना योग प्रचारक का मुख्य लक्ष्य है। प्रत्येक शिविर के मध्य एवं शिविर पश्चात् नियुक्त नियमित योग शिक्षक से निरन्तर संवाद व निरीक्षण करके नियमित योग कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित किया जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्नत तकनीक का समुचित उपयोग</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकल्प द्वारा तकनीक का समुचित उपयोग करते हुए एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन तैयार कराया गया है जिसके माध्यम से प्रत्येक योग प्रचारक को अपने प्रतिदिन के क्रियाकलाप की जानकारी मुख्यालय को देनी होती है जिससे कि आलस्य व अकर्मण्यता का कोई स्थान न रहे। इस एप्लीकेशन के माध्यम से संस्थान द्वारा समय-समय पर योग प्रचारकों का निरीक्षण व उन्हें निर्देशित भी किया जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया द्वारा अभियान</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का युग विचारों का युग है। सोशल मीडिया अपने विचारों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। हमारे सभी योग प्रचारक योग</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृत आदि के प्रचार-प्रसार हेतु फेसबुक</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यू-ट्यूब</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इंस्टाग्राम</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ट्वीटर आदि पर भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रेष्ठ योग प्रचारकों का सम्मान</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकल्प देशभर में श्रेष्ठ कार्य करने वाले शीर्ष दस योग प्रचारकों को चयनित कर उनका सम्मान करता है जिससे उनमें निरन्तर उत्साहपूर्वक राष्ट्रसेवा के इस पुनीत कार्य को करने का उत्साह बना रहे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योग के माध्यम से रोजगारोत्पत्ति</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बढ़ती बेरोजगारी के समय में पतंजलि द्वारा रोजगार के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया जा रहा है। प्रकल्प द्वारा प्रतिवर्ष सैकड़ों योग प्रचारकों का चयन किया जाता है जिनको कार्य की गुणवत्ता व प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकित कर समुचित मानदेय प्रदान किया जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नये योग प्रचारक बनने हेतु पाठ्यक्रम</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकल्प द्वारा श्रेष्ठ योग प्रचारकों के चयन हेतु विशेष पाठ्यक्रम का निर्धारण किया गया है जिसमें घरेलू उपचार</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद के अनुसार आहार-विहार</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आकस्मिक चिकित्सा</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य रोगों के लिए श्रेष्ठ औषधियों तथा पतंजलि सम्मत विशेष योगाभ्यास क्रम का समुचित ज्ञान शामिल है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग सार्वभौमिक</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वकालिक एवं सार्वजनिक महत्त्व की ऋषि-मुनियों की एक अनमोल विरासत है। कर्म करने में सबसे बड़ी कुशलता (चातुर्य) ही योग है। इस योग को जीवन में अपनाने से बन्धन स्वभाव वाले कर्म भी योगी को बन्धन में नहीं डाल पाते हैं। शुद्ध ज्ञान</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शुद्ध कर्म एवं शुद्ध उपासना अर्थात् ज्ञानयोग</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मयोग एवं भक्तियोग- यह योग की त्रिवेणी है। यह मात्र एक ऐसा दर्शन है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके सबल सैद्धान्तिक पक्ष का ही नहीं अपितु उन्हें बोध कराने वाले क्रियात्मक साधनों का भी ऋषियों ने प्रतिपादन किया है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें आचरण में लाकर प्रत्येक मनुष्य अपना कल्याण अपने हाथों करने की योग्यता व क्षमता प्राप्त कर लेता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग विज्ञान-संमत जीवशैली का नाम है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे व्यक्ति का संपूर्ण व्यक्तित्व सकारात्मक रूप में प्रभावित होता है। इससे व्यक्ति न केवल आधि</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्याधि व उपाधि से मुक्त होता है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु समाधि की प्राप्ति भी कर लेता है। प्रतिदिन योग करने से व्यक्ति के जीवन से रोग</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शोक</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षुद्रता</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तनाव</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अवसाद</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मग्लानि</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मोह व दरिद्रता आदि व्यक्ति की कमजोरियाँ समाप्त हो जाती हैं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे लोगों से युक्त समाज समातपूर्ण</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रगतिशील होता है तथा राष्ट्र समृद्ध व समर्थ बन जाता है। अत: पूरा विश्व प्रात: उठकर प्रतिदिन योग करे</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा मेरा स्वप्र है।</span></h5>
<h5 style="text-align:right;"><strong><span lang="en-in" xml:lang="en-in">-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज</span></strong></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>राष्ट्र निर्माण</category>
                                            <category>2018</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Nov 2018 21:35:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमारे विविध सेवा प्रकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="color:rgb(186,55,42);" xml:lang="hi">परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज व आयुर्वेद मनीषी परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के दिव्य पावन संकल्पों व अखण्ड पुरुषार्थ के फलस्वरूप 5 जनवरी 1995 को रोपा गया पतंजलि योगपीठ रूपी पौधा आज विशाल शाखा-प्रशाखाओं से युक्त वटवृक्ष का रूप ले चुका है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि के विविध सेवा प्रकल्पों के रूप में यह वृक्ष हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से आश्रय प्रदान कर रहा है। उत्तराखण्ड के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी सर्वाधिक रोजगार उत्पन्न करने वाला </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी से स्वावलम्बी भारत</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे के साथ यह तीव्र गति से</span></strong></span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2148/hamare-vividh-seva-prakalp"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/133.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="color:rgb(186,55,42);" xml:lang="hi">परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज व आयुर्वेद मनीषी परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के दिव्य पावन संकल्पों व अखण्ड पुरुषार्थ के फलस्वरूप 5 जनवरी 1995 को रोपा गया पतंजलि योगपीठ रूपी पौधा आज विशाल शाखा-प्रशाखाओं से युक्त वटवृक्ष का रूप ले चुका है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि के विविध सेवा प्रकल्पों के रूप में यह वृक्ष हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से आश्रय प्रदान कर रहा है। उत्तराखण्ड के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी सर्वाधिक रोजगार उत्पन्न करने वाला </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी से स्वावलम्बी भारत</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे के साथ यह तीव्र गति से वृद्धि को प्राप्त कर रहा है। वह चाहे महाराष्ट्र के मिहान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागपुर की </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विशाल सन्तरा प्रसंस्करण इकाई हो या तेजपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असम की सबसे बड़ी खाद्य प्रसंस्करण इकाई अथवा अलवर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान की सरसों तेल उत्पादन इकाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी प्रकल्प आज प्रतिदिन किसानों के द्वारा उत्पादित लाखों टन कृषि उत्पादों की सीधी खरीद करके </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रसंस्करण कर देश को शुद्ध व उच्च गुणवत्तायुक्त प्रामाणिक उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं। किसानों की अधिकांश उपज जहाँ पहले नष्ट हो जाती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं आज उन्हें हर समय यह प्रेरणा दी जाती है कि वे गुणवत्तायुक्त कृषि ज्यादा से ज्यादा करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें रसायनों का प्रयोग नहीं किया जाता हो या कम से कम किया जाता हो। इस प्रकार देशभर में ये प्रकल्प अपनी नई पहचान व स्वदेशी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के प्रति नया विश्वास कायम कर रहे हैं। इसी प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में आचार्यकुलम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि गुरुकुलम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिक गुरुकुलम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि विश्वविद्यालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि आयुर्विज्ञान महाविद्यालय आदि बड़े प्रकल्प महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।  </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इनके साथ-साथ योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विषमुक्त कृषि आदि पर विस्तृत अनुसंधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामोद्योग आदि सैकड़ों प्रकल्पों के माध्यम से </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि द्वारा राष्ट्र सेवा का महान् कार्य हो रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">प</span><span lang="hi" xml:lang="hi">तंजलि के इन बहुआयामी प्रकल्पों की  शृंखला में सर्वप्रथम हम शिक्षा के क्षेत्र में आदर्श प्रस्तुत करने वाले प्रकल्प </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम्</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को प्रस्तुत कर रहे हैं-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम् परम पूज्य योगऋषि श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज व परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के दिव्य आशीर्वाद एवं दिशानिर्देशन में मूल्य आधारित शिक्षा का अभिनव प्रयोग है। भारत वर्ष के प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा स्थापित वैदिक गुरुकुलों की सनातन आर्ष ज्ञान परम्परा एवं वर्तमान युग के आधुनिक विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी एवं व्यावसायिक शैक्षणिक पद्धति का दिव्य संगम है </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम्’।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सी.बी.एस.ई. पाठ्यक्रम व वैदिक शिक्षा के साथ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम्’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में उज्ज्वल कीर्ति के साथ शुमार है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उद्घाटन</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम्’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">का उद्घाटन विक्रम संवत् 2070 में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैशाख मास में कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनांक 26 अप्रैल 2013 को देश केप्रतिष्ठित सन्तजनों व गुजरात के तत्कालीन माननीय मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में देश के माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर-कमलों से किया गया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">परिसर</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम् का वर्तमान परिसर अत्यंत विशाल व विश्वस्तरीय है तथापि इसे अत्यंत भव्यता के साथ नवीन परिसर में स्थानांतरित किया जा रहा है। यह परिसर पतंजलि योगपीठ फेस-१ के पाश्र्व में स्थित है। जिसे नालंदा विश्वविद्यालय से प्रेरित होकर मौर्यकालीन स्थापत्य कला के आधार पर स्वरूप प्रदान किया गया है। इस परिसर का उद्घाटन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह के कर-कमलों से २७ सितम्बर २०१८ को हो रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रवेश प्रक्रिया</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थान में 9-11 वर्ष आयुवर्ग के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा-4 उत्तीर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बालक-बालिकाओं को कक्षा-5 में प्रवेश प्रदान किया जाता है। इस हेतु प्रतिवर्ष दिसम्बर माह में चारों महानगरों सहित 25 केन्द्रों पर राष्ट्रीय स्तर पर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">संवाद’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">तथा उसमें चयनित विद्यार्थियों के लिए विद्यार्थी संस्कार शिविर आयोजित किए जाते हैं। तत्पश्चात् सुयोग्य प्रवेशार्थियों को आचार्यकुलम् में प्रवेश प्रदान किया जाता है। इस वर्ष से आगामी प्रत्येक सत्र हेतु 80 बालकों व 80 बालिकाओं का चयन किया जाएगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उपनयन व अन्य पर्व</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम् में नव-प्रवेश प्राप्त विद्यार्थियों को श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को प्रतिवर्ष तीन दिन उपवास कराकर वैदिक रीति से यज्ञोपवीत व वेदारम्भ संस्कार सम्पन्न कराया जाता है। आचार्यकुलम् में स्थापना समारोह तथा श्रावणी उपाकर्म के अतिरिक्त रामनवमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुपूर्णिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जड़ी-बूटी दिवस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग दिवस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वाधीनता दिवस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गणतंत्र दिवस तथा शारदीय व फाल्गुनी नवसस्येष्टि पर्वों (दिवाली-होली) का भव्य आयोजन किया जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिनचर्या</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम् में ऋतु अनुकूल ऋषिवत् दिनचर्या का नियमपूर्वक पालन किया जाता है। यहाँ ब्रह्ममुहूर्त से ही प्रात:जागरण मंत्र व शंखध्वनि सुनाई देने लगती है और यह निर्विघ्न धारा दैनिक हवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रातराश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्याह्न भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गायत्री संध्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रात्रि भोजन व रात्रि के प्रथम प्रहर की समाप्ति पर शयन मंत्र से सम्पन्न होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योगाभ्यास</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योगर्षि की इस विशिष्ट शिक्षण संस्था का वैभव योग है। जिसका वर्ष भर विद्यार्थियों द्वारा सुप्रशिक्षित योगाचार्यों के मार्गदर्शन में नियमपूर्वक अभ्यास किया जाता है। परम पूज्य स्वामी जी महाराज समय-समय पर योग कक्षाओं का स्वयं अवलोकन करते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दैनिक यज्ञ व प्रार्थना सभा</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रात:काल धवल कटिवस्त्रों में आचमन पात्र लिए आचार्यकुलम् के अन्तेवासी ऋषिकुमार व ऋषिकाएं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण विधि-विधान से यज्ञ सम्पन्न करते हैं। तत्पश्चात् दैनिक विचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐतिहासिक तथ्य व प्रेरक प्रसंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य ज्ञान के प्रश्न</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्र-प्रतिज्ञा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य-उद्बोधन सहित राष्ट्रगीत आदि नियमित रूप से सम्पन्न होते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अध्ययन-अध्यापन</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम् में सुप्रशिक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विद्वान व अनुभवी आचार्यों द्वारा विविध विषयों का अध्यापन किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान को अपने आचरण से चरितार्थ करते हैं तथा विद्यार्थियों को सीधे लक्ष्यार्थ का बोध कराते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा-8 तक यहाँ त्रिभाषा सूत्र का पूर्णत: अनुपालन होता है। तदुपरान्त संस्कृत व अंग्रेजी भाषा का गहन अध्ययन-अध्यापन होता है। देववाणी संस्कृत यहाँ अपने विराट् रूप में प्रतिष्ठित है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भाषा सौष्ठव</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थान में गीर्वाणभारती (संस्कृत) के अभ्युत्थान हेतु इसे सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य बनाया गया है। वैदिक क्रियाकलापों व संस्कृत कक्षाओं में यहाँ आचार्य और शिष्य के मध्य वार्तालाप संस्कृत में होता है। अपनी भाषिक योग्यता से विद्यार्थियों ने जनपदीय व प्रांतीय प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर ख्याति अर्जित की है तथा विश्वविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के मध्य भी अपना लोहा मनवाया है। यहाँ ऋषिकुमारों व ऋषिकाओं का मन्त्रोच्चारण इतना पाण्डित्यपूर्ण व विशुद्ध है कि प्रत्येक श्रोता मुक्तकण्ठ से प्रशंसा हेतु बाध्य हो जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पाठ्य सहगामी क्रियाएं</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम् में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लक्ष्य करके वर्ष भर अन्तर्सदनीय प्रतियोगिताओं की योजना बनाई जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पृथ्वी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेजस व वायु चारों सदन तीव्र प्रतिस्पर्धा द्वारा अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ गायन-वादन और नर्तन की सभी विधाओं के साथ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम् का बैण्ड</span>Ó <span lang="hi" xml:lang="hi">भी गठित है तथा वर्षभर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्पीक मैके</span>Ó <span lang="hi" xml:lang="hi">सरीखी अनेक राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं की प्रस्तुतियाँ होती रहती हैं। विद्यार्थियों को विशेषज्ञों का सान्निध्य मिलता ही रहता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">खेलकूद</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थान में सभी अन्त: बाह्य खेलों के लिए क्षेत्र व प्रशिक्षक उपलब्ध हैं। यहाँ के विद्यार्थी ह्यद्दद्घद्ब और ष्ड्ढह्यद्ग की राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में चयनित हुए हैं और प्रांतीय व राष्ट्रीय स्तर पर इनकी अलग पहचान है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रथम बोर्ड परीक्षाफल </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थान के विद्यार्थियों का प्रथम बैच इस बार बोर्ड परीक्षा की कसौटी पर था और सी.बी.एस.ई. ने यहाँ की शिक्षण व्यवस्था को उच्चकोटि की सिद्ध करते हुए ८४.८त्न का कक्षा औसत प्रदान किया है। संस्थान के विद्यार्थी आयुष शर्मा ने ९९.२त्न अंक प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की है। यहाँ का उत्तीर्ण प्रतिशत १०० है तथा ८६ में से ३४ विद्यार्थियों के अंक ९०त्न प्रतिशत से अधिक हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विशेष उपलब्धियाँ</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थान की पृष्ठभूमि आध्यात्मिक है अत: यहाँ सभी संत-महात्माओं का शुभाशीर्वाद समय-समय पर मिलता रहता है। राजनीति व उद्योग तथा फिल्म जगत् की राष्ट्रीय-अन्तर्राष्टीय हस्तियाँ भी यहाँ पधार चुकी हैं। प्रशासनिक सेवा की विलक्षण मेधा </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इरा सिंघल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">ने भी विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया है। योगपीठ के प्रत्येक विशिष्ट अतिथि की पहली पसन्द आचार्यकुलम् का भ्रमण होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आयोजन व भ्रमण</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थान द्वारा राष्ट्रीय खेल दिवस सहित </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक भारत श्रेष्ठ भारत</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के अन्तर्गत हैण्डबॉल तथा सी.बी.एस.ई. द्वारा योग की नेशनल चैम्पियनशिप का आयोजन किा गया है साथ ही स्थापना काल से ही शिक्षकों के लिए ख्याति प्राप्त विशेषज्ञों की उपस्थिति में कार्यशालाएँ व प्रशिक्षण शिविर सी.बी.एस.ई. व अन्य आयोजित हुए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही प्रतिवर्ष ऐतिहासिक व सुरम्य प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया गया है ताकि विद्यार्थियों को अपनी प्राकृतिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों से निकट से परिचित कराया जा सके।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>भारतीय शिक्षा </category>
                                            <category>2018</category>
                                            <category>अक्टूबर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Oct 2018 21:44:51 +0530</pubDate>
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