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                <title>वर्तमान शिक्षा प्रणाली की अपूर्णताओं को दूर करना - योग संदेश</title>
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                <description>वर्तमान शिक्षा प्रणाली की अपूर्णताओं को दूर करना RSS Feed</description>
                
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                <title>भारतीय शिक्षा बोर्ड- आवश्यकता और उसका ध्येय</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आचार्य बालकृष्ण</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/1656/bhartiya-shiksha-board-avashyak-aur-uske-dheyya"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-06/178.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सी भी देश की शिक्षा प्रणाली उसके समाज का दर्पण होती है। शिक्षा समाज में समानता एवं सामाजिक व आर्थिक न्याय की भी परिचायिका है। समय रहते ही शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार कर दिया जाये तो वह सुखकारक परिणाम दे सकती है। शिक्षा प्रणाली को ज्यादातर उसके शासकों द्वारा बनाया जाता है परन्तु भारत राष्ट्र की विडम्बना रही कि हम आज भी विदेशी शासकों की सोच एवं ब्रिटिश शासकों की विचारधारा के अनुरूप विदेशी मानसिकता का पोषण करते हुए अधिकतम रूप से यान्त्रिक मनुष्य अथवा क्लर्क बनाने वाली एवं सहज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवीन आविष्कारक सोच को दबाने वाली शिक्षा प्रणाली के लगातार अन्धानुकरण करते चले जा रहे हैं। इच्छा-शक्ति के न होने से भारतीय संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाषा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कला एवं परम्पराओं के प्रसार के लिए भारतीय लोग अपने संस्कार एवं मूल्य संवर्धित शिक्षा का भी उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण हमारी संस्कृति जहाँ पिछड़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ शिक्षा से तनावजनित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असन्तुष्ट एवं पाश्चात्य मानसिकता के समाज का निर्माण हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी परिणति ने संयुक्त परिवार की कल्पनाओं को एकाकी परिवार में तथा एक विद्यार्थी को कमोवेश अपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असंतुष्ट व्यक्तित्व में बदल कर रख दिया है। समाज में व्याप्त असमानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असंतोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असंयम एवं असहिष्णुता व अराजकता का समाधान सर्वांगीण शिक्षा से ही सम्भव है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (CABE) एवं राष्ट्रीय शिक्षा आयोग के अनुसार भारतीय संस्कृति और भारतीय मूल्यों की नींव पर आधारित ज्ञान व विज्ञान की शिक्षा ही देश की प्रगति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा तथा कल्याण में योगदान कर सकती है। उसमें यह भी स्पष्ट कहा गया कि सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आध्यात्मिक मूल्य की शिक्षा के प्रावधान का अभाव भारतीय पाठ्यक्रम का एक गम्भीर दोष है। CABE की 55वीं बैठक में संदर्भ आया कि यूनेस्को (</span>UNESCO<span lang="hi" xml:lang="hi">) का भी मानना है कि विश्व शान्ति हेतु शिक्षा में सांस्कृतिक व आध्यात्मिक अभिसरण की आवश्यकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार के मार्गदर्शन में </span>CABE<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तात्कालिक निर्णयों का संदर्भ लें तो शिक्षा सलाहकार बोर्ड स्पष्ट करता है कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">हम मानव मूल्य आधारित शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन कौशल शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रायोगिक शिक्षा को प्रोत्साहन देने का संकल्प लेते हैं ताकि शिक्षा प्राणाली से विद्यार्थी अच्छे नागरिक बनें।’</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपरोक्त चर्चा के आलोक में एक मूल तत्व उभर कर आया कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में अपूर्णताएँ हैं और उसमें सुधार आवश्यक है। इस निमित्त शिक्षा पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षकों के प्रशिक्षण की नवीन योजना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विद्यार्थियों के प्रशिक्षण एवं ज्ञान वृद्धि हेतु प्राचीन एवं आधुनिक शिक्षा के माध्यमों का प्रयोग कर मूल्यांकन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न मानकों का चयन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शारीरिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवसायिक कौशल का भी मूल्यांकन तथा निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की नितान्त आवश्यकता है। इस निमित्त वर्तमान केन्द्रीय शिक्षा बोर्डों </span>CBSE, ICSE<span lang="hi" xml:lang="hi"> के समकक्ष एक शिक्षा बोर्ड की नितान्त आवश्यकता अनुभव की जा रही है जो निम्न अपूर्णताओं पर अंकुश रख पाये और एक व्यापक दृष्टिकोण से सम्पूर्ण विकल्प के रूप में स्थापित हो पाएँ। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान शिक्षा प्रणाली की अपूर्णताओं को दूर करना</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानवीय मूल्यों में आ रही गिरावट को देखते हुए भारत की शिक्षा प्रणाली एवं उसके पाठ्यक्रम में अपूर्णता को अनुभव किया जा रहा है और विभिन्न शिक्षाविदों ने पिछले लगभग 30-40 वर्षों के मंथन एवं शोध से स्वीकार किया है कि प्राचीन वैदिक संस्कारित शिक्षा एवं आधुनिक शिक्षा के सम्मिश्रण से पाठ्यक्रम में दृष्टिगोचर उपरोक्त अपूर्णताओं को दूर किया जा सकता है। इस दूरी को कम करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित एक ऐसे शिक्षा बोर्ड की आवश्यकता अनुभूत की गयी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इनके बीच एक सेतु का कार्य कर सके और प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने हेतु आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय ऋषि ज्ञान परम्परा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन व विज्ञान सम्बन्धी मूल्यों को शिक्षा में समावेशित करके मानव को महामानव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्यमानव एवं एक जिम्मेदार विश्व नागरिक बना सके।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की प्राचीन भाषा-संस्कृत का संरक्षण एवं संवर्धन करना</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 </span>CABE<span lang="hi" xml:lang="hi"> की एक बैठक में यह अनुभव किया गया कि अपने देश की संस्कृत भाषा ने वैश्विक भाषाओं के विकास एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अत: उसके संरक्षण के लिए एक संस्कृत शिक्षा बोर्ड का गठन हो।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व की ऐलोपैथी चिकित्सा पद्धति में शल्य चिकित्सा विभाग के जनक के रूप में महर्षि सुश्रुत को स्थान दिया जाता है। उनके सारे ग्रन्थ संस्कृत भाषा में हैं। सम्पूर्ण विश्व के प्रथम श्रेणी के शिक्षण संस्थान हार्वर्ड स्कूल ऑफ  मेडिसिन ने तो योग को पूरक चिकित्सा विद्या के रूप में स्वीकार किया है। महर्षि पतंजलि रचित योगदर्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महर्षि सुश्रुत की शल्य चिकित्सा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महर्षि चरक के आयुर्वेद-ज्ञान सहित मानवता के हित में निरापद ज्ञान विज्ञान संस्कृत ग्रंथों में प्रचुर उपलब्ध है। आवश्यकता है तत्व ज्ञानियों एवं वैज्ञानिकों के समन्वित शोध की।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु योग को </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पाठ्यक्रम में जोडऩे की आवश्यकता</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग भारतीय वैदिक ज्ञान परम्परा की एक विधा है जिससे जीवन में प्रसन्नता एवं समरसता प्राप्त होती है। योग के वैज्ञानिक लाभ को देखते हुए सम्पूर्ण विश्व में योग को शिक्षा के अभिन्न अंग के रूप में जोडऩे की पहल की जा रही है। इसलिए एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है जो योग के समग्र चिन्तन को जीवन शैली में स्थापित करने का प्रयास कर पाए। योग के क्रियात्मक एवं दार्शनिक पक्ष को पाठ्यक्रम में जोडऩे से शारीरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मिक रूप से स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्ध नागरिक का निर्माण सम्भव हो पाएगा।</span></h5>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">साम्प्रदायिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> सद्भाव एवं प्रेम</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान परिवेश में बढ़ते वैमनस्य को दूर करने के लिए सभी प्रमुख पंथों के मूलभूत सार्वभौमिक सत्य एवं श्रेष्ठ शिक्षाओं के समावेश के साथ साम्प्रदायिक सद्भाव एवं प्रेम की प्रवृत्ति को संवर्धित किया जा सकता है तथा भारतीय संस्कृति के </span><span style="color:rgb(186,55,42);">''<span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वबन्धुत्व</span>’’ <span lang="hi" xml:lang="hi">एवं </span>''<span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वे भवन्तु सुखिन:</span>’</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के संदेश को पाठ्यक्रम का मूल आधार बनाकर एक सर्व समावेशी समाज के निर्माण की अवधारणा हेतु एक नवीन पाठ्यक्रम युक्त शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता अनुभव की जा रही है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिक शिक्षा एवं राष्ट्रीय चेतना से युक्त शिक्षा</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में नैतिक शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषि ज्ञान परम्परा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृत की शिक्षा वृद्धि एवं वैदिक व आधुनिक शिक्षा के सम्मिश्रण से राष्ट्र की चेतना का विकास हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिक देश के पूर्वजों के योगदान को स्मरण करते हुए उन पर गौरव अनुभव कर सकें। ऐसे पाठ्यक्रम को जोड़ा जाए जो स्वदेशी एवं स्वाभिमान को छात्रों की जीवन शैली का एक अभिन्न अंग बना दे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व नागरिक का निर्माण </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की नितान्त आवश्यकता अनुभव की जा रही थी जहाँ वैदिक शिक्षा व आधुनिक शिक्षा के सार्वभौमिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंथ निरपेक्ष एवं सर्वहितकारी समन्वय के द्वारा ऐसे नागरिकों का निर्माण हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भौतिक विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति-पर्यावरण का विनाश न करें। जो स्वयं में नियन्त्रित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मर्यादित एवं अनुशासित हो तथा सह-अस्तित्व के प्रति पूर्ण कृतज्ञता रखते हुए कत्र्तव्य भाव से पूर्ण पुरुषार्थ करके अपना अभ्युदय व नि:श्रेयस सिद्ध कर सकें। ऐसी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता अनुभव की जा रही जिसमें छात्र को न्यूनतम तीन स्वदेशी भाषाओं और दो विदेशी भाषाओं का भी ज्ञान अवश्य हो ताकि वह सम्पूर्ण विश्व के विभिन्न नागरिकों के साथ समन्वय एवं सद्भाव रखते हुए विश्व की नीतियों एवं विज्ञान को विश्वमंगल के लिए अग्रसरित कर सके।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अपरिमित ज्ञान व शक्ति का जागरण</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ऐसे विज्ञानपरक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शोधपरक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शैक्षणिक प्रणाली की आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे व्यक्ति के भीतर सन्निहित अपरिमित ज्ञान व ऊर्जा शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामथ्र्य को जाग्रत किया जा सके। मानवीय सद्गुणों एवं शक्तियों का विकास किया जा सके। साथ ही अतीन्द्रिय सुख व अतीन्द्रिय ज्ञान अनुभूतियों के क्षेत्र में भी मनुष्य प्रवेश कर सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अति मानस चेतना से युक्त हो सके। समस्त मानवीय दुर्बलताओं से मुक्त होकर एक दिव्य जीवन की ओर अग्रसर हो सकें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात् एक पूर्ण जाग्रत एवं पूर्ण समर्थ नागरिक का निर्माण हो पायें। इस प्रकार की दूरदर्शिता अभी किसी भी वर्तमान शिक्षा प्रणाली में इंगित नहीं हो पा रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए एक नवीन एवं समग्र शिक्षा प्रणाली की नितान्त आवश्यकता अनुभव हो रही थी। क्योंकि समग्र शिक्षा से ही मानव का समग्र विकास सम्भव है। सशक्त व समर्थ  राष्ट्र के लिए चरित्रवान्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यकुशल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वस्थ व समर्थ प्रजा चाहिए। सशक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वस्थ व समर्थ प्रजा के लिए समर्थ व्यक्ति चाहिए। समर्थ व्यक्ति बनने के दो माध्यम हैं। एक है घर और दूसरा है विद्यालय। अर्थात् घर में दी जाने वाली व्यावहारिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूल्यप्रधान क्रियात्मक शिक्षा और विद्यालय में दी जाने वाली संस्कारनिष्ठ और ज्ञाननिष्ठ सर्वांगीण शिक्षा व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास कर समाज के लिये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश के लिये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व के लिये एवं मानव-सृष्टि के लिए संस्कारित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुशिक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुयोग्य विश्व-नागरिक का सृजन करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानव का दिव्यमानव में रूपान्तरण करती है। परन्तु वर्तमान में भौतिक विकास की चकाचौंध में अशान्त व असन्तुष्ट जीवन जीने वाले मानव को ही अपने आस-पास पाते हैं जिसका मूल कारण है शिक्षा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समग्र शिक्षा अर्थात् वह विधा जो मानव का ज्ञानात्मक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भावात्मक और क्रियात्मक विकास कर उसे परस्पर प्रेमपूर्वक व्यवहार करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति एवं पर्यावरण के नियमों के अनुकूल जीवन-यापन की कला का विकास कर एक जिम्मेदार सुशील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञानपरक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवीय गुणों से परिपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वबन्धुत्व के भाव को जीने वाले विश्व-नागरिक का निर्माण करती है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार की समग्र शिक्षा वर्तमान कालखण्ड में भारत के लोगों की एवं समय की सबसे बड़ी माँग है। इस प्रकार की समग्र शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विद्या के भौतिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवीय एवं आध्यात्मिक पक्षों पर पतंजलि योगपीठ निरन्तर पिछले 25 वर्षों से अनुसंधानात्मक प्रयोग कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें गुरु-शिष्य परम्परा को भी जीवन्त किया गया है अर्थात् पतंजलि द्वारा वर्तमान में पाँच गुरुकुलों का संचालन हो रहा है जो पूर्णत: प्राचीन ऋषि ज्ञान परम्परा को समर्पित है। इसी प्रकार आधुनिक शिक्षा मानकों के आधार पर आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं विश्वविद्यालय का संचालन हो रहा है तथा पिछले लगभग 6 वर्षों से एक ऐसे विद्यालय का भी संचालन हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ वैदिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा का सम्मिश्रण करके छात्रों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास किया जा रहा है। यह प्रयोग अत्यन्त सफल रहा और आज इसी कड़ी के 4 अन्य विद्यालय आरम्भ हो चुके हैं। अब समाज में इसकी मांग निरन्तर बढ़ रही है। आचार्यकुलम् नामक इस विद्यालय में वैदिक एवं पाश्चात्य शिक्षा के सम्मिश्रण पाठ्यक्रम से शिक्षा अर्जित करने वाले विद्यार्थियों ने सी.बी.एस.ई. (CBSE) शिक्षा बोर्ड में 90त्न से 99त्न तक अंक प्राप्त करके शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव क्रान्ति की है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपरोक्त तीनों प्रकार की शिक्षा प्रणाली से अर्जित अनुभवों एवं लगातार किये गये विज्ञानपरक शोध से पतंजलि योगपीठ इस निष्कर्ष पर पहुची है कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार से एवं पवित्र वातावरण से मानवीय मन का क्रमिक विकास किया जा सकता है और मानव में सुप्त अवस्था में सन्निहित विभिन्न शक्तियों एवं क्षमताओं का जागरण किया जा सकता है। इस भाव को एवं शिक्षा के क्षेत्र में पतंजलि योगपीठ के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान केन्द्र सरकार द्वारा पतंजलि योगपीठ को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय शिक्षा बोर्ड’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थापित करने एवं संचालित करने का कार्य सौंपा गया है। इस भारतीय शिक्षा बोर्ड का नेतृत्व परम श्रद्धेय योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज अध्यक्ष के रूप में करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और परम संरक्षक एवं परम शुभेच्छुक के रूप में परम पूज्य मोरारी बाबू जी के मार्गदर्शन व मुझ सहित परम पूज्य स्वामी गोविन्द देव गिरी जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदरणीय श्री पूनम सूरी जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदरणीय श्री जस्टिस गिरधर मालवीय जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदरणीय डॉ. महावीर अग्रवाल जी एवं पूज्य स्वामी मुक्तानंद जी महाराज जैसे राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त विचारक एवं शिक्षाविद् व्यक्तित्वों के निर्देशन में यह भारतीय शिक्षा बोर्ड कार्य करेगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार द्वारा सम्मति प्राप्त होने से पूर्व इस विराट दृष्टिकोण को प्रस्ताव रूप में श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने माननीय प्रधानमंत्री महोदय श्री नरेन्द्र मोदी जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्री अमित शाह जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानव संसाधन एवं विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर जी आदि के समक्ष रखा। लगभग 2-3 वर्षों की और लगातार कई चिन्तन एवं मंथन बैठकों के बाद यह कार्य सम्पन्न हो पाया। उसके लिए पतंजलि योगपीठ माननीय प्रधानमंत्री महोदय एवं केन्द्र सरकार के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-06/078.jpg" alt="07"></img></span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय शिक्षा बोर्ड के </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उद्देश्य</span></strong></span></h5>
<ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने हेतु आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय ऋषि-ज्ञान परम्परा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन व विज्ञान सम्बन्धी मूल्यों एवं सिद्धान्तों को शिक्षा में समावेशित करके वैज्ञानिक सोच एवं तार्किक प्रवृत्ति को विकसित करके शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कार व मानवीय-नैतिक मूल्यों के आधार पर मानव को दिव्य मानव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महामानव एवं एक जिम्मेदार विश्व नागरिक बनाना।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिक शिक्षा व आधुनिक शिक्षा के सार्वभौमिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक पंथ-निरपेक्ष एवं सर्वहितकारी समन्वय के द्वारा ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो स्वयं में नियन्त्रित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मर्यादित व अनुशासित हों तथा सह-अस्तित्व (समष्टि) के प्रति पूर्ण कृतज्ञता रखते हुए कत्र्तव्यभाव से पूर्ण पुरुषार्थ करके अपना अभ्युदय व नि:श्रेयस सिद्ध कर सकें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी शिक्षा दीक्षा प्रणाली विकसित करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें साधनहीन-दु:खी-दरिद्र या साधन सम्पन्न दरिद्र नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु साधन सम्पन्न सुखी प्रसन्न व्यक्तियों का निर्माण किया जा सके। इस शिक्षा-दीक्षा पद्धति से न्यायपूर्ण विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपूर्ण उपभोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपूर्ण भागीदारी व न्यायपूर्ण दोहन का दृष्टिकोण रखने वाले श्रेष्ठ मानव तैयार होंगे। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">हम शारीरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बौद्धिक व आध्यात्मिक विकास की एक ऐसी शिक्षा-दीक्षा प्रणाली घडऩा चाहते हैं जिससे व्यक्ति के भीतर सन्निहित अपरिमित ज्ञान व ऊर्जा शक्ति सामथ्र्य को जागृत करके पर्याप्त मानवीय सद्गुणों एवं शक्तियों का विकास किया जा सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही अतीन्द्रिय सुख व अतीन्द्रिय ज्ञान अनुभूतियों के क्षेत्र में भी मनुष्य प्रवेश करके अतिमानस चेतना से युक्त हो सके।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">आध्यात्मिक न्यायवाद में निष्ठा रखते हुए मनुष्य व मनुष्येतर समग्र जड़-चेतन अस्तित्व के प्रति न्यायपूर्ण दृष्टि रखने वाले आदर्श नागरिक तैयार हों। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">समस्त मानवीय दुर्बलताओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसक्तिपूर्ण माँगों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कामनाओं व अहंकार से मुक्त यथार्थ ज्ञानपूर्वक दिव्य जीवन जीने वाले मनुष्यों को तैयार कर सकें। ऐसा होने से अशुभ का अन्त होगा तथा सुख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शान्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सफलता व सब प्रकार की खुशहाली सब ओर होगी</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह। अविद्यया मृत्युं तीत्त्र्वा विद्ययामृतमश्नुते।।</span>Ó - <span lang="hi" xml:lang="hi">यजु. 40/14</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन्द्रं  वर्धन्तो अप्तुर: कृण्वन्तो विश्वमार्यम्। अपघ्नन्तो अराव्ण:।। - (ऋग्. 9/63/5) हमारे गौरवशाली इतिहास का निर्माण करने वाले ऋषियों की विद्या या शिक्षा का उद्देश्य पूर्ण होगा और पूर्ण जागृत व पूर्ण समर्थ नागरिकों का निर्माण होगा।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक तकनीक को उपयोग में लाने के लिए प्रोत्साहित करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कौशल को बढ़ाने (</span>Skill Development), <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी प्रमुख मत-पंथों के मौलिक तत्वों की जानकारी देकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांप्रदायिक सद्भाव एवं सहिष्णुता की प्रवृत्ति को संवर्धित करने तथा श्रम की महत्ता (</span>Importance of Hard Work)<span lang="hi" xml:lang="hi"> को छात्रों के मन में प्रतिष्ठापित करने के लिए इस बोर्ड का गठन किया गया है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">विद्यार्थियों के भीतर बाल्यकाल से प्रारम्भ करके यौवनकाल तक ऐसे विचारों व संस्कारों का समावेश हो जिससे वे कला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रबन्धन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गणना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नॉन-मेडिकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंजीनियरिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम्प्यूटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अत्याधुनिक तकनीकि विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गणित आदि अपनी रुचि के आधुनिक विषयों में तो विद्यार्थी अपनी रुचि पूर्ण निष्णात होंगे ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी प्राचीनतम भाषा संस्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिक मूल्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उच्च आदर्श के साथ-साथ वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपनिषद्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गीता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन आदि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रभाषा हिन्दी तथा अन्य प्रान्तीय भारतीय भाषाओं का ठीक-ठीक बोध रखते होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही अंग्रेजी सहित विश्व की अन्य भाषाओं का भी प्रामाणिक ज्ञान हो पायेगा।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पाठ्यक्रम</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषताएं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> निम्म</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> होंगी</span></strong></span></h5>
<ul style="list-style-type:circle;">
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बोर्ड के पाठ्यक्रम में महर्षि दयानंद की आर्ष शिक्षा प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महात्मा गांधी की रोजगारोन्मुखी एवं स्वदेशी पर आधारित बुनियादी शिक्षा तथा श्री अरविन्द की दिव्य मानव के निर्माण की शिक्षा एवं स्वामी विवेकानन्द जी की उत्साह पराक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुरुषार्थ व वेदान्त पर आधारित शिक्षाओं तथा आधुनिक शिक्षा का एक समन्वित रूप देखने को मिलेगा।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्रों में क्षेत्रीय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाषागत एवं सांप्रदायिक संकीर्णताओं से ऊपर उठकर अपने राष्ट्र के प्रति गौरव का भाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी धर्मों के प्रति आदर व सम्मान की अनुभूति एवं मानवीय मूल्यों के प्रति निष्ठा का भाव जागृत करने का प्रयास किया जाएगा।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय संविधान में वर्णित कत्र्तव्यों व मूल्यों के प्रति छात्रों में विशेष जागरूकता पैदा की जाएगी।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बोर्ड में भारतीय संस्कृति (वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपनिषद्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गीता आदि) के अध्ययन-अध्यापन की विशेष व्यवस्था रहेगी।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी प्राचीन भाषा संस्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र भाषा हिन्दी तथा अन्य प्रान्तीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी सहित विश्व की अन्य भाषाओं के भी अध्ययन की व्यवस्था रहेगी।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम से छात्र में धृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिभा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुरुषार्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पराक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृतज्ञता व सत्यनिष्ठा- इन दैवीय संपदाओं का विकास होगा और वे दिव्य व्यक्तित्व युक्त नेतृत्व साथ ही वे अपने समाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र व विश्व को प्रदान कर सकें।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">छात्र में तार्किक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आविष्कारपरक सोच को उत्पन्न करेगा। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">छात्र को विषय में दक्ष कर तीन से चार भाषाओं का ज्ञाता बनाकर उसमें नवीन रोजगार उत्पन्न करने की क्षमता का विकास  करेगा एवं तदनुरूप रोजगारोन्मुखी कुशलता को उत्पन्न करेगा। </span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा नहीं है कि पूर्व में इस शिक्षा प्रणाली को बदलने के प्रयास नहीं हुए। कई समितियों का गठन हुआ। इसमें राधाकृष्णन आयोग (1948-49)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोठारी आयोग (1964-66)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एवं राममूर्ति समिति 1990 ने मूल्य आधारित सर्वांगीण शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। थोड़े-बहुत परिवर्तन भी हुए परन्तु अपनी भारतीय संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी देवभाषा संस्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रभाषा हिन्दी तथा अन्य प्रांतीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी सहित विश्व की एक अथवा अन्य भाषाओं की व्यवस्था के साथ मूल्य आधारित स्वास्थ्यपरक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदार विश्व-नागरिक बनाने की आवश्यकता एवं तत्सम्बन्धी बौद्धिक शिक्षा एवं व्यवसायिक शिक्षा को अमली जामा पहनाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा बोर्ड एवं संस्कृत शिक्षण संस्थाओं की मान्यता प्राप्त एक स्वदेशी शिक्षा बोर्ड की अत्यन्त आवश्यकता अनुभव हुई जो विद्यार्थियों में भारतीय मूल्यों के साथ-साथ ऋषि संस्कृति के गौरवशाली भारतीय संस्कारों को जीने में और व्यवहार में लाने में गौरव का अनुभव करे तथा विश्व-बन्धुत्व एवं सह-अस्तित्व के मूल उद्देश्यों को स्थापित करे। वर्तमान में जब विश्व एक वैश्विक गाँव बन गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। इसलिए वर्तमान भारतीय शिक्षा बोर्ड को समय की माँग को पूरा करने वाले एक सम्पूर्ण शिक्षा-प्रणाली के रूप में देखा जा सकता है। इस शिक्षा प्रणाली में आधुनिक शिक्षा-विज्ञान की व्यवस्था के साथ-साथ वेदों की मूल शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग आदि स्वास्थ्यपरक विज्ञान एवं भारतीय मूल्यों एवं परम्परा आधारित नैतिक चरित्र-प्रधान शिक्षा प्रदान की जायेगी। इस उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा-प्रणाली से देश में सांस्कृतिक मूल्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चारित्रिक एवं नैतिक जीवनचर्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग आधारित स्वस्थ दिनचर्या आदि का इस प्रकार विकास होगा कि आने वाले कुछ ही वर्षों में  भारतीय परम्परा एवं भारतीयता हमारी जीवन-शैली का अभिन्न अंग बन जायेगी।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अंक में सामान्य रूप से विविध विषयों पर लेखों का प्रकाशन नहीं किया जा रहा है। यह अंक शिक्षा विषय को समर्पित है।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>भारतीय शिक्षा </category>
                                            <category>2019</category>
                                            <category>अप्रैल-मई</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Apr 2019 21:56:12 +0530</pubDate>
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