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                <title>राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा वैचारिक या बौद्धिक आतंकवाद - योग संदेश</title>
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                <description>राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा वैचारिक या बौद्धिक आतंकवाद RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा वैचारिक या बौद्धिक आतंकवाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">राकेश कुमार,<span>  </span>मुख्य</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi"> केन्द्रीय प्रभारी</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">पतंजलि योग समिति</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पु</span><span lang="hi" xml:lang="hi">रातन काल से ही भारत एक सहिष्णु व उदार राष्ट्र रहा है। एक तरफ यहाँ पर ईश्वर को मानने वाले अनेकों दर्शन हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर नास्तिक दर्शन चार्वाक को भी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। यही क्षमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहनशीलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परस्पर सद्भाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक दूसरे के विचारों का सम्मान व सर्वसमावेशी होने का भारत का स्वाभाविक स्वभाव रहा है। भारत की वैदिक सनातन संस्कृति की विशेषता रही है कि यहाँ पर अपनी विचारधारा थोपी नहीं जाती बल्कि आत्म चिंतन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनन-मंथन से अनेकों प्रश्नों के बाद जो उत्तर निकले वह यहाँ का स्वभाव है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब हमारी इसी उदार प्रकृति का ही सहारा लेकर विकृति उत्पन्न करने का प्रयास किया जाता है। हमारी सहनशीलता की परीक्षा लेकर बार-बार हमारी अखण्डता को खण्डित करने का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की सभ्यता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मर्यादा व परम्पराओं को तोड़कर देश के ही अलग-अलग वर्ग-मत-पंथ और जातियों में संघर्ष करके तोडऩे का जब षड्यन्त्र चलता है तो राष्ट्रवादी सात्त्विक शक्तियों को आत्म-चिन्तन की आवश्यकता है। श्री राजीव मलहोत्रा जी ने दशकों के शोध से यह निष्कर्ष निकाला कि विघटनकारी शक्तियाँ षड्यन्त्रपूर्वक अन्तर्राष्ट्रीय ताकतों से सम्पर्क करके तथा देश में ही विभाजनकारी शक्तियों से गठजोड़ करके देश तोडऩे के काम में लगी हैं। विगत </span>200<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों में कैसे भारत में मुख्यधारा से अलग द्रविड़ और दलित  की अलग पहचान देने और अलग-अलग जातियों के नाम पर देश को तोडऩे के लिए कैसे विदेशी तन्त्र कार्य कर रहा है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजीव मलहोत्रा जी आगे कहते हैं- </span>'1990<span lang="hi" xml:lang="hi"> के दशक में प्रिन्सटन यूनिवर्सिटी के एक विद्वान् ने बताया की वे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एफ्रो-दलित प्रोजेक्ट’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के सिलसिले में भारत से लौटे हैं। और जानकारी लेने से पता चला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका के पैसे से चलने वाला यह प्रोजेक्ट भारत के दलितों को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के </span>Black <span lang="hi" xml:lang="hi">और गैर दलितों को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के White की तरह दिखाने का प्रयास है। अमेरिका के काले-गोरे के नस्लवाद और दास प्रथा के इतिहास को उठाकर भारत पर थोपने और इस बहाने से यहाँ सामाजिक वैमनस्य पैदा करने का प्रयास है।’</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                <span lang="hi" xml:lang="hi">मैंने खोज की कि भारत में द्रविड़ और आर्य जातियों की अवधारणा कहाँ से आई</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्य और द्रविड़ जातियों की पहचान भारत में अंग्रेजी उपनिवेशवाद की उपज है</span>,19<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं शताब्दी के पहले इसका कोई अस्तित्व नहीं था।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए विदेशों से धर्म परिवर्तन के नाम पर मिशनरियों को धन उपलब्ध करवाया जाता है तथा स्थानीय स्तर पर गैर सरकारी संगठनों को फंडिंग करके सभाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्कशॉप व बैठकों के माध्यम से अपनी षड्यन्त्रकारी विचाराधारा के लिए कैडर तैयार करवाकर देश को कमजोर करने की साजिश चल रही है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                <span lang="hi" xml:lang="hi">देशविरोधी मानसिकता वाले लोगों को विदेशी पुरस्कारों से सम्मानित करना कृत्रिम बुद्धिजीवी तैयार करके देश को अलग-अलग जातियों में विचाराधाओं में तोडऩे के लिए लेख लिखना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुस्तकें प्रकाशित करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया के माध्यम से किसी एक विशेष वर्ग व समाज को शोषित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वंचित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दलित या मानवाधिकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास व शोषण के नाम पर भ्रमित करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुराने समय में जहाँ तलवार व बन्दूक से होता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब युद्ध व आक्रमण के तरीके बदल गये हैं। अब युद्ध में कलम ने बन्दूक की जगह ले ली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाईल की टच-स्क्रीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम्प्यूटर का की-बोर्ड आधुनिक हथियार बन गये हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                <span lang="hi" xml:lang="hi">विषैला विचार देश की सीमाओं पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामान्य नागरिकों के मस्तिष्क पर हथियार काम करता है। गोली का असर एक बार होता है। लेकिन विषैले विचार का असर बार-बार होता है तथा विषैले विचार से केवल एक व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे समाज व राष्ट्र को घायल किया जा सकता है। सोशल मीडिया के माध्यम से देश के युवाओं को भ्रमित करने का कार्य भी यह वैश्विक ताकतें भारत को तोडऩे के लिए कर रही हैं। देश हित में बौद्धिक चिन्तन करके सकारात्मक विचार देने वालों से अलग देश के अंदर ही बौद्धिक आतंकवाद या वैचारिक आतंकवाद फैलाने वाले वर्ग का उदय हो रहा है जो जंगल में पाये जाने वाले हथियार बंद लोगों या आतंकवादियों से भी ज्यादा खतरनाक है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे जंगलों में नक्सलवादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माओवादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलगाववादी विचारधारायें हथियारबंद होकर राज्य पर आक्रमण करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इन्हें नक्सलवादी आतंकवादी कहा जाता है और छद्म लेखक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पत्रकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वकील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाजिक कार्यकत्र्ता एक्टिविस्ट के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलम की-बोर्ड कैमरे से वैचारिक स्तर पर जब पढ़े-लिखे लोग शहर में किसी बन्द स्टूडियो या किसी विश्वविद्यालय के ए.सी. कमरों में बैठकर इन हथियारबंद नक्सलवादियों को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलगाववादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवादियों को अपना बौद्धिक व कानूनी समर्थन उपलब्ध करवाते तो इन्हें अर्बन नक्सलवादी या वैचारिक आतंकवादी ही कहा जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                <span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध रणनीतिज्ञ विलियम एस लिंड ने अपनी पुस्तक </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">फोर्थ जनरेशन वारफेयर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में कहा है कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध की यह रणनीति समाज में सांस्कृतिक संघर्ष के रूप में दरार उत्पन्न करने पर टिकी होती है। इस प्रकार से देश को नष्ट करने के लिए बाहर से आक्रमण करने की कोई आवश्यकता नहीं होती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भीतर ही भीतर स्वयं ही टूट जाता है।</span>’</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शहरी नक्सलवाद भी सांस्कृतिक उदारतावाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में अपने मंसूबों को अंजाम देने में लगा है। इसका खतरा और साजिश इतनी खतरनाक है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर यहाँ तक कहा कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अर्बन नक्सल और उनके समर्थक जंगलों में घुसपैठ किए बैठी उनकी सेना से भी अधिक खतरनाक हैं।</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">ये तथाकथित बुद्धिजीवी मानवाधिकार और असहमति के अधिकार की आड़ लेकर सुरक्षा बलों की कार्रवाही को कमजोर करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेते हैं और झूठे प्रचार के जरिए सेना आदि को बदनाम करते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार यह बौद्धिक आतंकवादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नक्सलवादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उग्रवादी आतंकवादियों को भी कई बार मानवाधिकार व मीडिया प्रशासन पर दबाव बनाकर लोगों को बचा ले जाते हैं और खुद इतने शातिर होते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी स्वतन्त्रता आदि के आड़ में कानून का सरेआम मखोल बनाते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब देश ऐसे अर्बन नक्सलवादियों या बौद्धिक आतंकवादियों के असली चेहरे को पहचान रहे हैं राष्ट्रीय स्तर अब राष्ट्रवादी बुद्धिजीवी व समाज का नेतृत्व करने वाले लोगों द्वारा इनके खिलाफ  आवाज उठ रही है और लोग अलग-अलग जातियों के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्गों के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया का दुरुपयोग करके इनके द्वारा किये जा रहे षड्यन्त्र को जनसाधारण के बीच में जागरूक कर बेनकाब कर रहे हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अभी कुछ दिन पहले विश्वविख्यात योगगुरु पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने भी राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया के सामने इस अदृश्य खतरे के बारे में खुलकर चर्चा की। पूज्य स्वामी जी कहते हैं कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मैं चार बात एक साथ कहता हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस देश में जो वक्त चल रहा है और अब जो आने वाला वक्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें </span>Social media<span lang="hi" xml:lang="hi"> का Impact बहुत बढ़ रहा है। फेसबुक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यू-ट्यूब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गूगल आदि का दुरुपयोग कर कुछ विध्वंसक (</span>Destructive<span lang="hi" xml:lang="hi">) लोग देश के अंदर नफरत व घृणा की राजनीति कर रहे हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी तरफ साथ ही मैं बहुत देखता हूँ ऐसी चीजें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फेसबुक पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्विटर पर बहुत अधिक मात्रा में वैचारिक नकारात्मकता है</span>, Positive <span lang="hi" xml:lang="hi">चीजें तो है ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम तो </span>99<span lang="hi" xml:lang="hi">% </span>Positive <span lang="hi" xml:lang="hi">में जीते हैं </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi">% जो </span>Negative <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग होते हैं। ऐसे लोग जो ऐसी विचारधारा के समर्थक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कहते हैं ईश्वर को मानने वाले मूर्ख होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी पूजा करने वाले महाधूर्त होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईश्वर तो सबसे बड़ा शैतान है और पता नहीं क्या-क्या बकवास करते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी विचाराधारा समाज को तोडऩे वाली विचाराधारा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                <span lang="hi" xml:lang="hi">मुझे कम्युनिस्ट भाइयों से कोई </span>Problem <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो अलग </span>view <span lang="hi" xml:lang="hi">रखें और वो उनका अधिकार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस देश के लिये लेनिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माक्र्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माओ कभी आदर्श नहीं हो सकते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमें आयातित अपसंस्कृतियों की आवश्यकता नहीं है। हमारी सांस्कृतिक विचारधारा बहुत सशक्त व समृद्ध है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमें किसी विदेशी विचारधारा की आवश्यकता नहीं है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ तक </span>Confucius<span lang="hi" xml:lang="hi"> हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो तो एक महात्मा व्यक्ति था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसके  शिष्यों ने भी उनकी विचारधारा को तोड़मरोड़ कर गलत स्वरूप दे दिया। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हम अम्बेडकर साहब का एक देश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक कानून और जाति मुक्त भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्याय जो उनके संकल्प थे उनके पूर्ण समर्थक हैं। हम उनकी इस विचारधारा पोषक हैं। मैं तो दलितों से खूब मुहब्बत करता हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेरे यहाँ पर रसोई से लेकर के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेरे हर काम में दलित होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर जगह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम कोई भेद-भाव नहीं रखते। योग्यतानुसार हमनें उनको आचार्य बनाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संन्यासी बनाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दलितों को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वाल्मीकियों को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वनवासियों को और </span>OBC<span lang="hi" xml:lang="hi"> को अपने </span>institutions <span lang="hi" xml:lang="hi">का </span>Head <span lang="hi" xml:lang="hi">बनाया। लेकिन कुछ लोग अलग-अलग तरीके से समाज को तोडऩे व बांटने की कोशिश करते हैं। यह ठीक नहीं है। किसी भी राष्ट्र में ऐसी नकारात्मक विचाराधारा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए इस गम्भीरता से लेकर देश की सरकार को यह कानून बनाना चाहिये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी आभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश को बर्बाद करने वाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे देश तोडऩे वाले नकारात्मक कन्टेन्ट को हटा देना चाहिए जो देश में </span>Destruction <span lang="hi" xml:lang="hi">की बात करते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                <span lang="hi" xml:lang="hi">मैंने कहा मुझे ओवैसी से कोई घृणा नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें भी एक ही आत्मा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक ही परमात्मा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक ही भगवान् है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जो ओवैसी के जो नाकारात्मक विचार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो बड़े जहरीले हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन विचारों से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुझे घृणा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो कहते हैं </span>OBC <span lang="hi" xml:lang="hi">एक हो जाओ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबको गाली देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुनि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब पूर्वजों को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भगवान् योगेश्वर कृष्ण व सूर्यवंशी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चन्द्रवंशी दलित पिछड़े सवर्ण के नाम पर जो बांटने का काम करते हैं हम सब उसके खिलाफ हैं। हम सब एक ईश्वर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परमपिता परमात्मा की संतान हैं। हम सभी समान व सभी महान्हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य स्वामी जी कहते हैं </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">साजिश पूर्वक अपने मूल विचार से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी मूल संस्कृति से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूल सभ्यता से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने ही पूर्वजों की सात्विक विरासत से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक विरासत से हमें हटा कर के भ्रमित करने की कोशिशें हो रही हैं। देश में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह वैचारिक आतंकवाद बड़ा खतरनाक है।</span>’</h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>राष्ट्र-चिंतन</category>
                                            <category>2019</category>
                                            <category>दिसम्बर</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/1881/rashtriya-suraksha-ke-liye-ganbhir-khatra-vaicharik-ya-baudhik-atankvad</link>
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                <pubDate>Sun, 01 Dec 2019 21:55:03 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
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