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                <title>चरित्र निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण हेतु सर्वश्रेष्ठ शिक्षा संस्थान पतंजलि गुरुकुलम् - योग संदेश</title>
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                            <item>
                <title>चरित्र निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण हेतु सर्वश्रेष्ठ शिक्षा संस्थान पतंजलि गुरुकुलम्</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज </span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/1882/charitra-nirman-evm-rashtra-nirman-hetu-sarvshreth-sansthan-patanjali-gurukulam"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-07/492.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शि</span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षा शब्द सामने आते ही हमारे मन व मस्तिष्क में कई प्रकार से विचार उठते हैं। एक शिक्षा की गुणवत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्तर या पाठ्यक्रम का स्वरूप और वैश्विक दृष्टि से हम उसका मूल्यांकन करने लगते हैं। दूसरा बिन्दु होता है शिक्षा के बाद विद्यार्थी का भविष्य अर्थात् शिक्षा पूर्ण होने पर विद्यार्थी के  शेष जीवन में उस शिक्षा के आधार पर उसकी वैयक्तिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारिवारिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आध्यात्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक या वैश्विक उपयोगिता क्या होगी</span>?</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तीसरा महत्त्वपूर्ण बिन्दु होता है एक आदर्श एवं सर्वाङ्गीण शिक्षा व्यवस्था का स्वरूप कैसा होना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे विद्यार्थी के व्यक्तित्व का पूर्ण विकास हो सके। पतंजलि गुरुकुलम् में जो शिक्षा-दीक्षा हम दे रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका संक्षेप में हम तीनों बिन्दुओं पर गंभीरता पूर्वक विश्लेषण करेंगे तो पायेंगे कि पतंजलि गुरुकुलम् शिक्षा व्यवस्था सर्वश्रेष्ठ व आदर्श है। गुरुकुलम् का पाठ्यक्रम सर्वश्रेष्ठ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें प्रधान विषय संस्कृत एवं शास्त्र होते हुए भी इंग्लिश व विज्ञान आदि विषयों का भी समावेश है। गुरुकुलम् का हमारा मुख्य लक्ष्य है ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना जो वैदिक ज्ञान पररम्परा में पूर्ण दीक्षित हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही आधुनिक ज्ञान विज्ञान से भी परिचित हों और गुरुकुलीय शिक्षा व्यवस्था में शिक्षित-दीक्षित होकर अपने व्यक्तित्व को शारीरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बौद्धिक आध्यात्मिक व सामाजिक रूप से सर्वाङ्गीण विकसित करके समाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र व विश्व में सफलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्धि एवं विकास का नया इतिहास बना सकें। वैयक्तिक या चारित्रिक रूप से गुरुकुलम् के विद्यार्थी एक महामानव या महापुरुष की तरह विकसित होंगे। उनके जीवन में विविध कुशलताओं के साथ मानवता देवत्व व ऋषित्व का पूर्ण विकास होगा। संस्कृत एवं विविध शास्त्रों की कुशलता के साथ योग एवं आयुर्वेद की कुशलता। वक्तृत्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगीत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवसाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रबन्धन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसंधान एवं विविध प्रकार के नेतृत्व की कुशलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदर्श या सात्विक रूप से विकसित होगी। विविध भाषाओं की पूर्ण कुशलता एवं आर्षज्ञान की पूर्ण शिक्षा-दीक्षा होने से विद्यार्थी पूरे विश्व में नई संभावनाएँ खोजने एवं नये-नये कीर्तिमान बनाने में कामयाब होंगे। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि गुरुकुलम् में विद्याभ्यास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगाभ्यास एवं श्रेष्ठ व्रताभ्यास इन तीनों बातों को हम समान रूप से महत्त्व देते हैं। विद्याभ्यास से विद्यार्थियों का समग्र बौद्धिक  विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगाभ्यास से शारीरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भावनात्मक व आध्यात्मिक विकास तथा श्रेष्ठ दिव्य सात्विक व्रतों के अभ्यास से चारित्रिक विकास के द्वारा स्वभाव या प्रकृति में पूर्ण दिव्यता विकसित करना हमारा ध्येय होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सभी विवेकशील माता-पिता भी अपने बच्चों को ऐसे ही दिव्य रूप में विकसित होता हुआ देखना चाहते हैं। एक आदर्श विवेकशील अभिभावक के संकल्प को हम यहाँ गुरुकुलम् में पूरा करने का कार्य कर रहे हैं। आइये! भौतिकवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोगवाद एवं भीड़वाद के इस युग में अपनी सन्तानों के प्रति न्याय कीजिए। उनको बाह्य व आन्तरिक रूप से पूर्ण विकसित होने का अवसर दीजिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल यान्त्रिक रूप से मनुष्य को मात्र तकनीकी तौर पर ही विकसित करना नहीं है अपितु शारीरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बौद्धिक व आध्यात्मिक रूप से मानवीय चेतना के समग्र संतुलित दिव्य विकास की प्रक्रिया साधन व साधना है। ऐसी ही विकसित आत्माओं ने संसार में महान् कार्य किए हैं। आपके कुलवंश से भी ऐसी दिव्य सन्तति तैयार हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए अपनी प्रतिभावान् सन्तानों को पतंजलि गुरुकुलम् में पढ़ाइये। मैं आपको आश्वासन देता हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेरी यह दृढ़ सत्य संन्यासी प्रतिज्ञा है कि आपकी सन्तानें गुरुकुलम् में पढ़कर सर्वश्रेष्ठ रूप से तैयार होंगी। आपको तथा इस राष्ट्र को ऐसी सन्तानों पर गौरव होगा। जीवन का सबसे बड़ा ऐश्वर्य वेदों में निष्ठा या श्रद्धा को कहा गया है- श्रद्धां भगस्य मूर्धनी वचसा वेदयामसि। अखण्ड ज्ञाननिष्ठा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अखण्ड भावनिष्ठा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अखण्ड पुरुषार्थ या कर्मनिष्ठा एवं अखण्ड ध्येयनिष्ठा। इन चारों निष्ठाओं को पुष्ट करती है योग निष्ठा एवं गुरुनिष्ठा। योगनिष्ठ व्यक्ति गुरुपरम्परा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिपरम्परा एवं वेदपरम्परा के प्रति पूर्ण निष्ठावान् होता ही है। इन दिव्य निष्ठाओं से युक्त व्यक्ति के जीवन में कभी भी अज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंधेरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असफलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निराशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुंठा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मग्लानि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुर्विचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुर्भावना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुष्कर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुर्गुण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुर्बलताओं या किसी भी तरह का अशुभ आ ही नहीं सकता। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि गुरुकुलम् में हम इसी निष्ठा तत्व को सर्वोपरि प्राथमिकता देते हैं। चौबीसें  घंटे ऐसा वातावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण दिया जाता है तथा ऐसे ही अभ्यासों से उसे ढाला जाता है जिससे विद्यार्थी के जीवन में संम्पूर्ण दिव्यता घटित या प्रतिष्ठित हो जाये। यद्यपि पुरुषार्थ व प्रारब्ध भेद से उच्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यम व सामान्य कोटि तीन प्रकार की आत्माएँ संसार मे होती हैं। हमारा पूर्ण प्रयत्न प्रथम कोटि की आत्माएँ तैयार करना है। फिर भी मध्यम व सामान्य श्रेणी के भी पतंजलि गुरुकुलम् के विद्यार्थी संसार के अन्य शिक्षण संस्थाओं की दृष्टि से तो हजारों या लाखों गुना श्रेष्ठ होंगे ही। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी सन्तानों को आप कितनी समृद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धन-दौलत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐश्वर्य देकर जाते हैं यह महत्त्वपूर्ण नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनको कैसी शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कार एवं निष्ठा की दिव्य दौलत या विरासत देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही उनके जीवन की कभी भी कम व नष्ट न होने वाली सच्ची सम्पत्ति है। संसार के अब तक के इतिहास में ऐसी ही सन्तानों ने या ऐसे ही विद्याॢथयों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवक-युवतियों ने नये कीर्तिमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास या सफलताओं के आदर्श स्थापित किये हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इन दिव्यताओं से युक्त थे। अत: एक विवेकशील माता-पिता की भूमिका निभाते हुए अपनी सन्तानों को पतंजलि गुरुकुलम् में पढ़ाकर सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए भीड़ तंत्र से अलग होकर दिव्य मार्ग का चयन कीजिए।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्कृति एवं संस्कार</category>
                                            <category>2019</category>
                                            <category>दिसम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Dec 2019 21:53:21 +0530</pubDate>
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