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                <title>समकालीन भारत में सुरक्षा एवं सुव्यवस्था के आधार और स्वरूप - योग संदेश</title>
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                <title>समकालीन भारत में सुरक्षा एवं सुव्यवस्था के आधार और स्वरूप</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:5pt;text-align:right;" align="right"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:rgb(0,0,0);" xml:lang="hi">प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><table border="1" style="border-collapse:collapse;width:100%;border-width:1px;background-color:rgb(194,224,244);border-color:rgb(194,224,244);"><colgroup><col style="width:99.8705%;" /></colgroup><tbody><tr><td style="border-width:1px;border-color:rgb(194,224,244);"><h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय संस्कृति</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म तथा परंपरा का भी पुलिस अधिकारियों</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारियों आदि को कोई भी ज्ञान या प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। इसके विपरीत उन्हें एंग्लो क्रिश्चियन आस्थाओं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यताओं और कानूनों का ही ज्ञान दिया जाता है। संस्कारवश भले ही हिन्दू पुलिसकर्मी हिन्दू संस्कारों से सम्पन्न रहें</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु उनके कार्य व्यवहार और कार्य की संस्कृति पर हिन्दुत्व यानी भारतीयता के अनुशासन की कोई व्यवस्था नहीं है।</span></strong></h5></td></tr></tbody></table><h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और सुव्यवस्था के दो तल है -</span></strong></h5><h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">               1.    </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य की सुरक्षा एवं सुव्यवस्था </span></h5><h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">               2.    </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समाज की सुरक्षा एवं सुव्यवस्था</span></h5><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य समाज की ही प्रतिनिधि संस्था है। यही उसकी वैधता है। भारत का संविधान भी यही कहता है कि </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">‘</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हम भारत के लोगों ने इस लोकतांत्रिक गणराज्य के संचालन के लिये इस संविधान को अंगीकृत</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अधिनियमित और आत्मार्पित किया है।</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">’ </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अत: संविधान की वैधता भारत के लोगों से है। अन्य कोई बाहरी </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">‘</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अथॅारिटी</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">’ </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संविधान की वैधता का आधार नहीं है। </span></h5><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य एवं समाज दोनों की सुरक्षा के लिये राज्य ही अधिकृत संस्था है। समाज की सुरक्षा वह कानून एवं व्यवस्था बनाये रखने के लिये रचित संस्थाओं के द्वारा करती है। इनमें भाग </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">14</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के अंतर्गत अध्याय </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">1</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में वर्णित </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">‘</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सर्विसेस</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">’ </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं। अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">312</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में अखिल भारतीय सेवायें दी गई हैं जो वस्तुत: भारतीय प्रशासनिक सेवायें एवं भारतीय पुलिस सेवायें हैं। इसके साथ ही अखिल भारतीय न्यायिक सेवा भी इसी अनुच्छेद के अंतर्गत आती है। भाग </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">14</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के अध्याय </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">2</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में लोकसेवा आयोग का प्रावधान है। इसके साथ ही भाग </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">14 (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">क) में अभिकरणों का प्रावधान है। भाग </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">16</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिये आरक्षण के प्रावधान हैं जिनमें अब अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण भी जुड़ गया है। लोकसभा और राज्यों की विधानसभा दोनों जगह अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही लोकसभा में और राज्यों की विधानसभाओं में आंग्ल भारतीय (एंग्लो इंडियन) समुदाय के प्रतिनिधित्व की विशेष व्यवस्था है। अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">341</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में अनुसूचित जातियों के विषय में प्रावधान है और अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">342</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में अनुसूचित जनजातियों के विषय में प्रावधान है। दूसरी ओर अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">154</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में राज्यों की कार्यपालिका शक्ति के विषय में प्रावधान है।</span></h5><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">309, 310</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">311</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में राज्यों की भी सिविल सेवाओं का सामान्य स्वरूप निर्धारित है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु वस्तुत: इन सेवाओं की संरचना के विषय में संविधान कुछ नहीं कहता। अत: ये सभी संरचनायें शासक दल और प्रशासकों के विवेक के अधीन हैं। समाज की सुरक्षा का समस्त दायित्व इन्हीं सेवाओं को सौंप दिया गया है। औपचारिक रूप से सभी सेवायें और संपूर्ण भारत शासन भारत के लोगों के लिए ही है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु इस कथन का सामान्य अर्थ और महत्व एक काव्यात्मक या अलंकारिक कथन के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। किसी भी प्रादेशिक सेवा की संरचना और कार्यशैली पर भारतीय समाज का कोई भी नियंत्रण नहीं है। </span></h5><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी प्रकार संविधान के भाग </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">5</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के अध्याय </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">4</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में संघ की न्यायपालिका का स्वरूप निर्धारित किया गया है जो अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">124</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> से अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">147</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> तक है। साथ ही भाग </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">6</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के अध्याय </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">5</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">214</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> से अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">231</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> तक राज्यों के उच्च न्यायालयों और अध्याय </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">6</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">233</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> से अनुच्छेद </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">237</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> तक अधीनस्थ न्यायालयों के संबंध में प्रावधान हैं। न्यायालयों का उद्देश्य भी भारतीय समाज को सुरक्षा और सुव्यवस्था प्रदान करना तथा इन्हें भंग करने वालों को दंडित करना और पीडि़तों के साथ न्याय करना है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु इस समस्त न्यायिक प्रक्रिया में भारत के बहुसंख्यक समाज की अब तक की न्यायिक परंपराओं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विधि संबंधी मान्यताओं और विधिक परम्पराओं का कोई स्थान नहीं है। </span></h5><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपरा से भारतीय समाज की सुरक्षा का मुख्य आधार तो राज्य था ही</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु स्थानीय स्तर पर स्वायत्त संस्थायें तथा स्थानीय जाति पंचायतें</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गांव और मेड़ी की पंचायतें</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खाप पंचायतें आदि ही सुरक्षा एवं सुव्यवस्था का आधार रही हैं। परंतु वे सभी वर्तमान समय में अवैध घोषित हैं। इसी प्रकार गांव में अनेक हिस्से में ग्राम रक्षक दल भी परंपरा में होते रहे हैं। अब उनका भी कोई विधिक अस्तित्व नहीं है। नागरिकों के समूह शासन के समक्ष समितियां पंजीकृत करके अंग्रेजी काल में बनाये गये सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">1860</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के अंतर्गत काम कर सकते हैं और अपने ढंग से स्थानीय पुलिस के संज्ञान में लाकर स्थानीय सुरक्षा की व्यवस्था भी कर सकते हैं। परंपरा से गांव की सुरक्षा और सुव्यवस्था के जो भी आधार थे</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वे सब अवैध घोषित हो चुके हैं। अत: उनका अस्तित्व अब लुप्त प्राय: ही है। </span></h5><h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य की सुरक्षा एवं सुव्यवस्था</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in"> -</span></strong></span></h4><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य की सुरक्षा एवं सुव्यवस्था का वर्तमान संरचना में बहुत ही अच्छा स्थान है। सीमाओं की तथा राज्य की सभी महत्वपूर्ण संस्थाओं की सुरक्षा के लिये भारतीय सेनायें हैं और अर्धसैनिक बल हैं। इसके साथ ही पुलिस भी है। घोषित तौर पर पुलिस का काम नागरिकों की सुरक्षा करना है। इसके नितांत विपरीत</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य के अधिकारी जिनमें सिविल सर्विस के अधिकारी और पुलिस अधिकारी दोनों ही शामिल हैं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राजकीय नेताओं अर्थात पार्षदों</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विधायकों</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सांसदों</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य के मंत्रियों और मुख्यमंत्री तथा केन्द्र के मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों तथा केबिनेट सचिव</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य सचिवों और सभी महत्वपूर्ण सचिवों की ओर से पुलिस के जरिये नागरिकों के जीवन को नियंत्रित और प्रभावित करते हैं। इस प्रकार सुरक्षा से अधिक नियंत्रण ही पुलिस के द्वारा किया जाता है। भारतीय संस्कृति</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म तथा परंपरा का भी पुलिस अधिकारियों</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारियों आदि को कोई भी ज्ञान या प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। इसके विपरीत उन्हें एंग्लो क्रिश्चियन आस्थाओं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यताओं और कानूनों का ही ज्ञान दिया जाता है। संस्कारवश भले ही हिन्दू पुलिसकर्मी हिन्दू संस्कारों से सम्पन्न रहें</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु उनके कार्य व्यवहार और कार्य की संस्कृति पर हिन्दुत्व यानी भारतीयता के अनुशासन की कोई व्यवस्था नहीं है। अपितु क्रिश्चियन अनुशासन की ही व्यवस्था है। इस कारण व्यवहार के स्तर पर पुलिस बल भारतीय संस्कृति और समाज का पालन पोषण कर रही संस्थाओं के लिये अजनबी (एलियन) और अपरिचित ही होते हैं। उन्हें वस्तुत: यूरो-इंडियन आस्थाओं वाले राजकीय अधिकारियों के ही निर्देश का पालन करना सिखाया जाता है और यही उनका आदर्श माना जाता है। अत: सेवा और सुरक्षा की बात एक सुहाना नारा ही है। पुलिस के द्वारा राजकीय लोग (नेता और अफसर दोनों) जनगण के जीवन को नियंत्रित करते हैं। निश्चय ही</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिस सीमा तक वे अपराधियों को नियंत्रित करते हैं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उस सीमा तक वह नागरिकों के जीवन को राहत देने वाला काम है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु शेष समय वे सामान्य नागरिक जीवन को बाधित ही करते हैं। उदाहरण के लिये</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि कोई व्यक्ति किसी से दुव्र्यवहार करता है अथवा माताओं-बहनों बेटियों के साथ अनुचित व्यवहार करता है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे दंडित करने की अनुमति संबंधित पीडि़त के परिजनों को नहीं है और स्थानीय पंचायतों को भी नहीं है। पीडि़त से अपेक्षा की जाती है कि वह थाने जाये और शिकायत दर्ज करा दे जो दर्ज कराना भी स्वयं में एक थकाऊ और विरक्ति उत्पन्न करने वाली प्रक्रिया है। इसके बाद नागरिकों की समस्याओं के संदर्भ में अत्यल्प संख्या वाले थाने के सिपाहियों से अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे हर दुव्र्यवहार की जांच कर फिर अभियुक्त पर अभियोग दर्ज करें और न्यायालय में उसे प्रस्तुत करें</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां वर्षों बाद अनेक अवरोधों और व्यवधानों के उपरांत न्याय मिलने की आशा है। इस प्रकार आत्मगौरव और आत्मसम्मान की रक्षा का नागरिक अधिकार इस पुलिस व्यवस्था के द्वारा निरंतर बाधित है। </span></h5><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी प्रकार यदि कोई चोर चोरी करते हुये पकड़ लिया जाये तो उसकी भी रिपोर्ट थाने में करनी आवश्यक है। आप सीधे उससे माल नहीं ले सकते और उसे दंडित भी नहीं कर सकते। कोई घर में आगजनी कर रहा हो तो धर्मशास्त्रों के अनुसार उसके वध की व्यवस्था है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु वर्तमान कानूनों के रहते आप यह नहीं कर सकते अपितु पहले तो शोरगुल मचा कर किसी प्रकार उसे रोकना होगा और फिर पुलिस को बुलाना होगा। जब वह आ जाये तब मुकदमा दर्ज कराना होगा। जिसकी जांच पुलिस कर्मचारी अपनी भीषण व्यस्तताओं के बीच आराम से करेगा। उसमें अभियुक्त की और अभियुक्त के पक्ष के साक्षी का भी महत्व है और उससे प्रकरण उलझने की पूरी संभावना रहती है। यानी जिन आतताइयों का वध धर्मशास्त्र के अनुसार धर्मादेश है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उसके पाप की रिपोर्ट आप पुलिस को कीजिये और फिर इंतजार कीजिये कि सामने प्रत्यक्ष पाप कर चुका व्यक्ति अदंडित रह जाये अथवा उलटा आप पर ही अभियोग लग जाये। </span></h5><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी प्रकार आपके इष्ट देव को</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आपके धर्म को और स्वयं भारत माता को अपशब्द कहने वाले व्यक्ति का आप वध नहीं कर सकते</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ऐसे आततायी का वध धर्मशास्त्र का आदेश है। पर आप जाइये</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस में उसकी रिपोर्ट कीजिये। आततायी को झूठा मामला बनाने का आपके समकक्ष अवसर सुलभ है और आप निरीह भाव से सबकुछ देखने को विवश हैं। इसी अर्थ में</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस का उपयोग सेवा और सुरक्षा के नाम पर नागरिक जीवन को नियंत्रित करने के लिये होता है।  </span></h5><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस राजकीय एजेंसी ही है और इसीलिये उसका वास्तविक काम राज्य की और राज्यकर्ताओं की सुरक्षा करना ही रह गया है। समाज राज्य के और राज्यकर्ताओं के नियंत्रण में रहे</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोई भी नागरिक या व्यक्ति राज्य और राज्यकर्ताओं के नियंत्रण से बाहर कोई भी काम ना कर सके</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखना ही सिद्धांत के स्तर पर और संरचना के स्तर पर पुलिस का काम रह गया है। यद्यपि औपचारिक घोषणा के स्तर पर पुलिस का काम जन सुरक्षा है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु जन के जीवन के विषय में सभी निर्णय राज्यकर्ता ही ले रहे हैं और उन लिये गये निर्णयों को लागू कराना ही पुलिस की जिम्मेदारी है। इस प्रकार पुलिस वस्तुत: राज्य और राज्यकर्ताओं की ओर से नागरिकों और व्यक्तियों के नियंत्रण के लिये ही है। यही सुरक्षा एवं सुव्यवस्था के संबंध में वास्तविक स्थिति है।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2023</category>
                                            <category>जनवरी</category>
                                            <category>राष्ट्र निर्माण</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Jan 2023 21:50:52 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
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