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                <title>वैदिक संस्कृति - योग संदेश</title>
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                <description>वैदिक संस्कृति RSS Feed</description>
                
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                <title>स्वदेशी शिक्षा क्रान्ति</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">        '<span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यदेवो भव</span>’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की शाश्वत मान्यता को आधुनिक जगत में पुन: प्रमाणित करने वाले व शिक्षा जगत् में नव-क्रान्ति का शंखनाद करने वाले आचार्यकुलम् शिक्षण संस्थान के नव-निर्मित भव्य परिसर का उद्घाटन उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संध के सरकार्यवाहक श्री भैय्या जी जोशी व अन्य गणमान्यों की उपस्थिति में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित भाई शाह के कर-कमलों से सम्पन्न हुआ।  इस अवसर पर नव-निर्मित परिसर में यज्ञ का अनुष्ठान भी किया गया। उद्घाटन के अनन्तर श्री अमित शाह जी ने कहा कि पुरातन भारतीय संस्कृति तथा आधुनिक शिक्षा का समन्वय </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम्</span></strong></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2173/acharyakulam-ke-nutan-parisar-ka-udghatan-karyakram"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/063.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">    '<span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यदेवो भव</span>’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की शाश्वत मान्यता को आधुनिक जगत में पुन: प्रमाणित करने वाले व शिक्षा जगत् में नव-क्रान्ति का शंखनाद करने वाले आचार्यकुलम् शिक्षण संस्थान के नव-निर्मित भव्य परिसर का उद्घाटन उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संध के सरकार्यवाहक श्री भैय्या जी जोशी व अन्य गणमान्यों की उपस्थिति में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित भाई शाह के कर-कमलों से सम्पन्न हुआ।  इस अवसर पर नव-निर्मित परिसर में यज्ञ का अनुष्ठान भी किया गया। उद्घाटन के अनन्तर श्री अमित शाह जी ने कहा कि पुरातन भारतीय संस्कृति तथा आधुनिक शिक्षा का समन्वय </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम्</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">मैकाले की दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति का श्रेष्ठ विकल्प है। यहाँ से तेजस्वी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओजस्वी व वैदिक संस्कार से सिंचित नागरिक तैयार होंगे जो भारत ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु पूरे विश्व में फैले विकारों का शमन करते हुए भारतीय संस्कृति का झण्डा गाड़ेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है। विश्वभर में भारत और भारतीयता का सम्मान व स्वीकृति तीव्र गति से बढ़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पतंजलि का महत्त्वपूर्ण योगदान है।</span></strong></h5>
<ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योग क्रान्ति के पश्चात् अब हम स्वदेशी शिक्षा क्रान्ति को गति दे रहे हैं: स्वामी जी महाराज</span></strong></span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम् स्वदेशी शिक्षा का बेहतर विकल्प: श्रद्धेय आचार्य जी</span></strong></span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि की सभी गतिविधियाँ भारत को विश्वगुरु बनाने की ओर: श्री भैया जी जोशी</span></strong></span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी को आधार देने का कार्य पतंजलि ने किया: आचार्य महामण्डलेश्वर</span></strong></span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  वै</span><span lang="hi" xml:lang="hi">दिक संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आध्यात्मिकता एवं आधुनिकता पर आधारित पतंजलि योगपीठ की बहुप्रतीक्षित योजना </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिक शिक्षा बोर्ड</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के गठन को लेकर मुख्य अतिथि श्री अमित शाह जी ने कहा कि कितनी भी कठिनाईयाँ आयें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी जी व आचार्य जी अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ हैं। मैं आश्वस्त करना चाहता हूँ कि इस दिशा में मेरे विचार प्रबल हैं। स्वदेशी शिक्षा का कार्य पतंजलि के सभी कार्यों में सबसे कठिन कार्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह कार्य भी वे सहजता से करके दिखायेंगे। उन्होंने कहा कि यदि हमारी शिक्षा प्रणाली हमारी संस्कृति के अनुरूप नहीं है तो विकास किसी काम का नहीं है। हमारी संस्कृति और शिक्षा के श्रेष्ठ गुणों को गौरव के साथ अपनाने का समय आ गया है।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/193.jpg" alt="19"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार विद्यार्थियों के लिए आचार्यकुलम् तथा </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय की संकल्पना कोई छोटा कार्य नहीं है। स्वामी जी का लक्ष्य मात्र उन्हीं का लक्ष्य नहीं अपितु हम सबका लक्ष्य व कत्र्तव्य है। विगत </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों से स्वामी रामदेव जी महाराज निरन्तर योग और स्वदेशी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार करोड़ का टर्नऑवर करने वाली कम्पनी का सम्पूर्ण लाभांश देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/676.jpg" alt="67"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवसर पर पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि वैदिक संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म और आधुनिक शिक्षा को लेकर अमित भाई शाह जी के आश्वासन से मैं अभिभूत हूँ। स्वामी जी ने कहा कि वर्ष </span>2013<span lang="hi" xml:lang="hi"> में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री तथा वर्तमान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी जी ने जिस आचार्यकुलम् संस्थान की शुरुआत की थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज वह संस्थान देश के </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रामाणिक सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में से एक है। योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी और वैदिक शिक्षा के कार्य में करोड़ों देशवासी हमारे साथ हैं। योग क्रान्ति के पश्चात् अब हम स्वदेशी शिक्षा क्रान्ति को गति दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आचार्यकुलम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि विश्वविद्यालय और पतंजलि गुरुकुलम् इस क्रान्ति का एक कदम मात्र है। हम आगे देशभर में लाखों विद्यार्थियों की शिक्षण व्यवस्था के लिए संकल्पित हैं। जब स्वामी श्रद्धानन्द जी व महामना मदन मोहन मालवीय जी ने सीमित संसाधनों में बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों का संचालन कर दिया तो हमारे साथ तो करोड़ों हाथ हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम इस कार्य को निश्चित ही लक्ष्य तक पहुँचाकर रहेंगे। ऋषियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहीदों व क्रान्तिकारियों के सपनों का भारत बनाना हमारा परम ध्येय है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवसर पर श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि शिक्षा में स्वदेशी को लेकर आज पूरे देश में नया उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आचार्यकुलम् स्वदेशी शिक्षा का बेहतर विकल्प है।  आचार्यकुलम् में विद्यार्थियों के मानसिक विकास के साथ-साथ शारीरिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहाँ विद्यार्थियों को हिन्दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृत व अंग्रेेजी भाषाओं में पारंगत किया जा रहा है। उन्होंने आचार्यकुलम् के निदेशक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राचार्या व समस्त शिक्षकगणों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि वे भविष्य के भारत का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय स्वदेशी शिक्षा का बोर्ड बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया जा चुका है तथा शीघ्र ही मैकाले की दोषपूर्ण शिक्षा का स्थान भारतीय स्वदेशी शिक्षा ले लेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाहक श्री भैया जी जोशी ने कहा कि पतंजलि के शिक्षा प्रकल्पों में जीवन में परिवर्तन लाने वाली शिक्षा प्रदान की जा रही है। यहाँ के वातावरण को देखकर लगता है कि भारत शीघ्र ही विश्वगुरु के पद पर आसीन होगा। पतंजलि की सभी गतिविधियाँ भारत को विश्वगुरु बनाने वाली हैं। उन्होंने कहा कि साम्राज्यवाद भारत की संस्कृति कभी भी नहीं रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु दुनिया की मार्गदर्शक रही है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री माननीय श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि आचार्यकुलम् का सुनियोजित तरीके से आधुनिक और प्राचीन शिक्षा का तालमेल भावी भारत के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा के इस महान् कार्य में हम पतंजलि के साथ हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि चिंतन की शुद्धता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरित्र की शुचिता तथा आचरण की पारदर्शिता का मंत्र पतंजलि आचार्यकुलम् तथा पतंजलि वैदिक गुरुकुलम् आदि संस्थानों के माध्यम से दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यू.एन. के द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा और कुम्भ को विश्व धरोहर की मान्यता मिलने के साथ यह सिद्ध हो गया है कि भारत दुनिया का मार्गदर्शक अर्थात् विश्वगुरु बन गया है। हमारी संस्कृति लोकमंगल और विश्वकल्याण के लिए रही है। जूनापीठाधीश्वर ने कहा कि पूज्य स्वामी रामदेव जी ने सम्पूर्ण विश्व को भोर में जागरण कराया है। उन्होंने कहा कि </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल तक स्वदेशी के गीत गाये गये लेकिन उसे आधार देने का कार्य पतंजलि ने किया। यहाँ वस्तुओं का निर्माण ही नहीं अपितु भारत का निर्माण हो रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज ने कहा कि भारत ज्ञान की आभा में रहने वाला देश है लेकिन लम्बे समय तक गुलामी में रहने के कारण युवा अंग्रेजी शिक्षा को ही श्रेष्ठ मानने लगे। लेकिन यह साक्षात झूठ है। देश में पुनर्जागरण की आवश्यकता है। भगवान् ने स्वामी रामदेव जी को इसी कार्य के लिए भेजा है। स्वामी जी के कार्यों में कन्धे से कन्धा मिलाकर चलने की आवश्यकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी महाराज व श्रद्धेय आचार्य जी के साथ समस्त संतों ने श्री अमित शाह जी को अभिनन्दन पत्र भेंट किया। कार्यक्रम के पश्चात् अतिथिगणों ने वर्तमान आचार्यकुलम् परिसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि अनुसंधान संस्थान तथा पतंजलि योगपीठ-। का भ्रमण किया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम में हरिद्वार सांसद श्री रमेश पौखरियाल </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">निशंक</span>’, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यसभा सांसद श्री अनिल बलूनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तराखण्ड के शहरी विकास मंत्री श्री मदन कौशिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महन्त रविन्द्रपुरी जी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोठारी प्रेमदास जी महाराज आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आचार्यकुलम् के छात्र-छात्राओं ने योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृत भाषण व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी  अतिथिगणों का मन मोह लिया। </span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/684.jpg" alt="68"></img></span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/214.jpg" alt="21"></img></span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">यज्ञ करके आचार्यकुलम् का उद्घाटन करते भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित भाई शाह, पूज्य स्वामी जी महाराज, श्रद्धेय आचार्य जी तथा श्री सुरेश भैय्या जी जोशी</span></strong></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/224.jpg" alt="22"></img></span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/232.jpg" alt="23"></img></span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दीप प्रज्ज्वलन करते मुख्य अतिथि तथा ऋषिद्वय (बायें) तथा आचार्यकुलम् के नवीन परिसर का भ्रमण करते अतिथिगण (दायें)</span></strong></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/254.jpg" alt="25"></img></span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/263.jpg" alt="26"></img></span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">माल्यार्पण कर मुख्य अतिथि श्री अमित भाई शाह का अभिनंदन करते पूज्य स्वामी जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य जी महाराज</span></strong></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/692.jpg" alt="69"></img></span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/293.jpg" alt="29"></img></span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री अमित शाह को अभिनंदन-पत्र भेंट करते पूज्यवर (बायें) तथा उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को शॉल ओढ़ाकर अभिनन्दन करते श्रद्धेय आचार्य जी </span></strong></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/272.jpg" alt="27"></img></span></strong></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/286.jpg" alt="28"></img></span></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज तथा स्वामी गोविन्द देव गिरि जी महाराज का अभिनंदन करते श्रद्धेय आचार्य जी</span></strong></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/245.jpg" alt="24"></img></span></strong></p>
<p style="text-align:center;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य स्वामी जी महाराज तथा श्रद्धेय आचार्य जी के साथ मंचासीन पूज्य संतगण एवं सम्मानित अतिथिगण</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>भारतीय शिक्षा </category>
                                            <category>राष्ट्र निर्माण</category>
                                            <category>2018</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Nov 2018 21:56:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महर्षि कपिल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">आचार्य प्रीतम</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2183/maharshi-kapil"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/514.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">    ऋषि-मुनियों के रूप में इन महान् आत्माओं ने हमारे समक्ष हमारे कल्याण के लिए अखण्ड तथा शाश्वत विचार व्यक्त किये जो कि अनन्त कालों तक अज्ञानरूपी समुद्र से तरण के लिए एक विशाल नौका का काम करते रहेंगे।</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आ</span><span lang="hi" xml:lang="hi">दिकाल से इस रहस्यमयी विश्व-पहेली ने मानव मस्तिष्क को सदा से व्यथित किया है और न जाने कब तक करती रहेगी। इस व्यथा को सुलझाने के लिए अनेक प्रखर-प्रज्ञावान् तपस्वी महापुरुषों ने अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया है। इस पहेली को अनेक तपस्वी महापुरुषों ने सांसारिक विषय भोगों को तिलाञ्जलि देकर सुलझाया और सामान्य चेतना के स्तर पर जीने वाले लोगों के लिए एक ज्योति जलाने का काम किया</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कि ये सभी लोग उस चेतना के परम शिखर पर पहुँच कर अपने जीवन को कृतार्थ कर सकें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन कारुणिक महापुरुषों की करुणा और नि:स्वार्थ भाव से लोकोपकार कर्मसमुच्चय का ही परिणाम है कि आज हम इस स्थिति में हैं तथा कुछ सोचने</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समझने का प्रयास करते हैं। यह कहना सर्वथा उचित ही है कि हम आज जो भी सत्यासत्य</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">धर्माधर्म</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पुण्यापुण्य कर्मों को नीरक्षीर विवेकी होकर विवेचन करने का सामथ्र्य रखते हैं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह उन्हीं महान्</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जितेन्द्रिय</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तपस्वी महापुरुषों के तप पुञ्ज का ही प्रताप है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने स्वार्थ की भावना को त्यागकर संयमित तथा अपरिग्रही जीवन व्यतीत करके हमारे मार्गदर्शक बने। वैसे तो इस वैदिक आध्यात्मिक परम्परा में असंख्य महापुरुष ऋषिमुनि हुए</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने हमारा पथ प्रदर्शन कराया किन्तु हम कुछेक सीमित महापुरुषों को ही जान पाये हैं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके संदर्भ में हम परम्परा से कुछ जानते और सुनते चले आ रहे हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये ऐसे महापुरुष हुये हैं जिनमें लोकैषणा का बीज भी प्रतीत नहीं होता तथा जो स्वयं के द्वारा रचित ग्रन्थों पर भी अपना हस्ताक्षर करने में पुण्य ह्रास तथा अहं भावना को पुष्ट करने के समान समझते थे। अनेक ऋषि-मुनि ऐसे हुए हैं जिन्होंने देश</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनमें से अनेक नाम आज इतिहास के पन्नों पर नहीं हैं। उन महापुरुषों के जीवन के बारे में हमारे अन्दर आज तक जिज्ञासा बनी रही कि उनके जीवन से प्रेरणा को प्राप्त करके हम भी अपना जीवन कृतार्थ कर सकें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषि-मुनियों के रूप में इन महान् आत्माओं ने हमारे समक्ष हमारे कल्याण के लिए अखण्ड तथा शाश्वत विचार व्यक्त किये जो कि अनन्त कालों तक अज्ञानरूपी समुद्र से तरण के लिए एक विशाल नौका का काम करते रहेंगे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आश्चर्य की बात तो यह है कि विचारों का वैविध्य होने पर भी किसी भी बुद्धिजीवी का विरोध नहीं है। यह सक्रिय</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रखर तथा स्वस्थ मस्तिष्क का चिन्ह है। इसको इसी सीमा में रखकर हमें अपने वैयक्तिक जीवन तथा समाज के उत्कर्ष के लिए इनके विचारों का सम्बल लेना चाहिए।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन्हीं महापुरुषों में एक महापुरुष महर्षि कपिल के नाम से इस धरा धाम पर अवतरित हुए जिन्होंने इस जगत् को एक आध्यात्मिक दिशा देने का काम किया। भारतीय जनश्रुति के आधार पर महर्षि कपिल आदि-दार्शनिक विद्वान् थे जिन्होंने अमृतरूपी वेद के गूढ़ तथा दार्शनिक विमर्शों को सांख्य शास्त्र के रूप में हमारे समक्ष प्रस्तुत किया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महर्षि कपिल के विषय में कहा जाता है कि यह ब्रह्मा के मानसपुत्र थे। महर्षि कपिल के ही सांख्य शास्त्र पर आधारित एक ग्रन्थ सांख्य कारिका जो ईश्वर कृष्ण की रचना है। यह कारिका करते हुए आचार्य गौड-पाद ने लिखा-</span></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(186,55,42);" xml:lang="hi">इह ब्रह्मसुत: कपिलो नाम। तद्यथा-</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(186,55,42);" xml:lang="hi">सनकश्च सनन्दश्च तृतीयश्च सनातन:।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(186,55,42);" xml:lang="hi">आसुरि: कपिलश्चैव वोढ़: पञ्चशिखस् तथा।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(186,55,42);" xml:lang="hi">इत्येते ब्रह्मण: पुत्रा: सप्त प्रोक्ता महर्षय:।।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी पद्य से ठीक मिलता-जुलता तैलंग महोदय का एक पद्य मिलता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(186,55,42);" xml:lang="hi">सनकश्च सनन्दश्च तृतीयश्च सनातन:।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(186,55,42);" xml:lang="hi">कपिलश्चासुरिश्चैव वोढु: पञ्चशिखस्तथा।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(186,55,42);" xml:lang="hi">सप्तैते मानसा: पुत्रा ब्रह्मण: परमेष्ठिन:।।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पद्य में सात मानसपुत्र- सनक</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सनन्दन</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन आदि के साथ महर्षि कपिल को भी कहा गया है। उपरोक्त पद्यों से एक बात स्पष्ट है कि महर्षि कपिल के वास्तविक माता-पिता कोई दूसरे थे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महर्षि कपिल को ब्रह्मा का मानसपुत्र इसलिए कहा गया है कि इनमें ब्रह्म के सदृश अपूर्व वैदुष्य के अद्भुत गुण थे। ऐसा नहीं कि केवल मन से अथवा मनुष्य के संकल्प से किसी व्यक्ति का जन्म हो जाये। यह सर्वथा युक्ति विरुद्ध तथा सृष्टिक्रम के विरुद्ध है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इनको ब्रह्मा का मानसपुत्र कदाचित् इसलिए बताया गया हो कि इनके जन्म के समय ब्रह्मा ने स्वयं उपस्थित होकर अनेक सूचनाएँ दी थी। अथवा ये ब्रह्मा के समान स्वत: सिद्ध ज्ञानी थे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महर्षि कपिल का जन्म</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इनके जन्म के संदर्भ में बताया जाता है कि प्रजापति के पुत्र सम्राट् मनु की कन्या देवहूति का विवाह कर्दम ऋषि के साथ हुआ था। विवाह के अनन्तर देवहूति ने कई कन्याओं को जन्म दिया। इसके पश्चात् कर्दम ऋषि सांसारिक धर्मों से विरक्त हो चुके थे। कर्दम ऋषि की ऐसी भावना देखकर देवहूति बहुत खिन्न हुई। देवहूति को पुत्र की इच्छा हो रही थी</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह कर्दम को विरक्त होने देना नहीं चाहती थी क्योंकि वह अभी सांसारिक कर्मों में अनुरक्त थी।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देवहूति के इन्हीं संशयों के उच्छेद के लिए इन्हीं के गर्भ से महर्षि कपिल का अवतरण हुआ। तब सरस्वती नदी के किनारे कर्दम ऋषि के आश्रम में मरीचि आदि ऋषियों के साथ ब्रह्मा उपस्थित हुए और बड़ी प्रसन्नतापूर्वक कर्दम से कहने लगे कि </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मैं जानता हूँ कि आपके यहाँ एक ऐसी महान् विभूति का जन्म हुआ है जिसके जन्म धारण का मुख्य उद्देश्य इस धरा-धाम से अविद्याजन्य संशयों को दूर करके विद्या तथा धर्म का प्रचार-प्रसार करना है और यह सिद्ध समुदायों में सबसे श्रेष्ठ सांख्याचार्यों में सुप्रतिष्ठित कपिल नाम से प्रसिद्ध होगा।’</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आदि-विद्वान् परमकारुणिक भगवान् कपिल के करुणावशात् मनुष्य मात्र के उद्धार के लिए सांख्यशास्त्र (जिसे मोक्षशास्त्र भी कहा जाता है) जैसा कालजयी ग्रन्थ रचकर अद्वितीय एवं अविस्मरणीय कार्य किये। इस ग्रन्थ के सिद्धांतों से संस्कृत वाङ्मय भरा पड़ा है। यह अत्यन्त प्राचीन दर्शन है। बौद्ध पण्डित अश्वघोष ने अपने बुद्धचरित नाम के काव्य में भगवान् बुद्ध के गुरु आचार्य अराड को सांख्यशास्त्र का वेत्ता कहा है। इन्हीं से भगवान् बुद्ध भी सांख्य पढ़े थे। इस प्रकार से महर्षि कपिल भारतीय ज्ञान परम्परा में एक गरिमामयी स्थान रखते हैं। जो प्रत्येक मुमुक्षुओं (दु:ख से दूर हटने की इच्छा करने वाले) को भवसागर से पार कराने के लिए इनके मन मस्तिष्क में बैठकर कुशल नाविक की भाँति तरण करवाते रहेंगे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in"> </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>सनातन वैभव</category>
                                            <category>2018</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Nov 2018 21:33:47 +0530</pubDate>
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