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                <title>सतत ध्यान में कैसे रहें - योग संदेश</title>
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                <description>सतत ध्यान में कैसे रहें RSS Feed</description>
                
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                <title>सतत ध्यान में कैसे रहें?   </title>
                                    <description><![CDATA[<table style="border-collapse:collapse;width:100.026%;border-width:1px;background-color:#F1C40F;border-color:#F1C40F;" border="1"><colgroup><col style="width:99.8555%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td style="border-width:1px;border-color:rgb(241,196,15);">
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में प्राचीनकाल से ही अध्यात्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भगवान्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्संग इन विषयों पर पर्याप्त चर्चा होती रही है। लोगों में इन पर उत्सुकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिज्ञासा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धा आज फिर से बढऩे लगी है। क्योंकि धन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैभव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुख-सुविधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐश्वर्य की वृद्धि के साथ-साथ चिंता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असंतोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यग्रता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भय भी उतनी ही मात्रा में बढ़ रहे हैं। इनसे बचने के लिए और इन विकारों का प्रभाव अपने पर न आने देने के लिए समझदार और चिंतनशील व्यक्तियों में अध्यात्म के प्रति रुचि जागरित हो रही है।</span></strong></span></h5>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">      जब </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्ति इस पवित्र</span>, </h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2179/satat-dhyan-me-kaise-rahe"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/503.jpg" alt=""></a><br /><table style="border-collapse:collapse;width:100.026%;border-width:1px;background-color:#F1C40F;border-color:#F1C40F;" border="1"><colgroup><col style="width:99.8555%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td style="border-width:1px;border-color:rgb(241,196,15);">
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में प्राचीनकाल से ही अध्यात्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भगवान्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्संग इन विषयों पर पर्याप्त चर्चा होती रही है। लोगों में इन पर उत्सुकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिज्ञासा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धा आज फिर से बढऩे लगी है। क्योंकि धन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैभव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुख-सुविधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐश्वर्य की वृद्धि के साथ-साथ चिंता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असंतोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यग्रता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भय भी उतनी ही मात्रा में बढ़ रहे हैं। इनसे बचने के लिए और इन विकारों का प्रभाव अपने पर न आने देने के लिए समझदार और चिंतनशील व्यक्तियों में अध्यात्म के प्रति रुचि जागरित हो रही है।</span></strong></span></h5>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">   जब </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्ति इस पवित्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशान्त मार्ग पर चलने का संकल्प</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इच्छा करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उसका ध्यान सर्वप्रथम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पर जाता है। हमें लगता है कि हमें ध्यान करना चाहिए। किंतु उसकी मार्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुचारु प्रक्रिया के पता न होने से हम इधर-उधर भटकते हैं। कई बार अनिष्ट और गलत मार्ग पर भी बढ़ जाते हैं और पाखंडी लागों द्वारा बताई गई ध्यान की गलत और अप्रामाणिक विधियों को करते हुए अपना मानसिक सन्तुलन और शारीरिक सन्तुलन स्वास्थ्य खो बैठते हैं। तो हम इस विषय पर प्रकाश डालते हुए कुछ चर्चा करते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हम अपने दैनिक व्यवहार में इस ध्यान शब्द का प्रयोग अनेक बार करते हैं। जैसे कि कोई विशेष कार्य भूल जाने पर हम कहते हैं मुझे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माता अपने पुत्र को कहकर बाहर भेजती है कि बेटा अपना </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">रखना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक विद्यार्थी को कहता है कि यहाँ बोर्ड पर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">रखो इत्यादि बहुत सारे उदाहरण हो सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ विचारणीय है कि इस </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द का अर्थ क्या है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले उदाहरण में ध्यान का अर्थ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्मरण’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरे में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">खयाल रखना’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">और तीसरे में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मन को टिकाना’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">है। अब जब हम भगवान् का ध्यान करना चाहते हैं तो उसमें भी तो हम ध्यान में इन्हीं अर्थों का प्रयोग करेंगे। हम भगवान् का स्मरण करेंगे। अर्थात् हम अपने विचारों के माध्यम से उसे याद करेंगे कि हे प्रभु! तेरी इतनी कृपा है मुझ पर कि मुझे मनुष्य का जन्म दिया क्योंकि इसी देह में मैं तुझे जान सकता हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुझे पा सकता हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेरी महिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करुणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वात्सल्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहाय को समझ सकता हूँ तथा हे मेरे पिता! तुझसे ही मेरा अस्तित्व है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तूने ही यह धरती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आकाश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्रि बनाये हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हे ईश्वर! तेरे दिये हुए ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पराक्रम और उत्साह से मैं अपना कार्य कर पाता हूँ। लोगों की सेवा कर पाता हूँ। मुझमें आपके प्रति श्रद्धा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समर्पण ऐसे ही बना रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी मेरी इच्छा पूर्ण करो। इस प्रकार हम अपने शब्दों के माध्यम से उस परम शक्ति जो कि कण-कण में व्याप्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अभी भी इस सूरज-चांद-तारों को जलाये हुए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">को स्मरण करें। अब ध्यान शब्द के दूसरे अर्थ पर विचार करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह है खयाल करना अर्थात् अपने को शारीरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक कष्टों से बचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि हम व्यवहार में प्रयोग करते हैं। जब हम अध्यात्म के पथ पर चलते हैं तो हम अपना खयाल रखना वास्तविक रूप से प्रारंभ कर देते हैं। वह इस प्रकार कि हम वह कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे कि हमको दु:ख हो। उदाहरण के रूप में क्रोध को ले सकते हैं। जब हम क्रोध करते हैं तो हमको सुख तो नहीं होता। हमारे मस्तिष्क के तन्तु गरम होने लगते हैं। उसमें अत्यधिक कम्पन होने लगता है। ब्लड प्रेशर बढऩे लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांसे फूलने लगती हैं इस प्रकार यह हमारा अनुभूत सत्य है कि हमें आनन्द तो नहीं आता। फिर हम क्रोध करते क्यों हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए कि हम अपना खयाल नहीं रखना चाहते। कैसी भी परिस्थिति हो पहले हम शांत रहकर अपना खयाल रखें फिर दूसरों का। ऐसे और भी बिन्दु हैं जैसे ईष्र्या करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">द्वेष करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लड़ाई-झगड़ा करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आलस्य करना। इन सब विकारों से हमको ग्लानि होती है तो हम अपना ख्याल नहीं रख रहे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शारीरिक रूप से भी हम अपने शरीर को योग प्राणायाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यायाम आदि के द्वारा स्वस्थ रखें और शारीरिक दु:खों से बचकर अपना खयाल रखें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तीसरे अर्थ में ध्यान है मन को किसी एक विषय पर टिकाना या लगाना। अब प्रश्न होगा कि ध्यान कहाँ पर लगायें। हम जिस समय जो कार्य कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस समय हमारा मन वहीं टिका रहे। अर्थात् हम जहाँ पर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कार्य कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा मन वहीं लगा रहे। जैसे हम जब पढ़ाई करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब मन सिर्फ पढ़ाई में रहना चाहिए न कि भोजन के स्वाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय या मात्रा पर। प्रभु को स्मरण कर रहे हैं तब हमारा मन प्रभु में ही टिका रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमें सांसारिक वस्तु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिस्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कामकाज याद न आयें। जब हम अपने परिजनों से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रों से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुहृतों से बात कर रहे हैं या उनके साथ हैं तो पूर्ण रूप से वहीं रहें। हमारे मन में इधर-उधर के विचार न आये। हमारा मन वहीं लगा रहे। इसके लिए हमें अपने अभ्यासों को ठीक करना होगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जापान के प्रसिद्ध फकीर बोकोजू से किसी ने पूछा कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बोध को प्राप्त करने के बाद आप क्या करते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">कब ध्यान करते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इस बारे में कुछ बताइए।’</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बोकोजू ने कहा- </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जब नींद आती है तो सो जाता हूँ। जब भूख लगती है तो खा लेता हूँ। जब प्यास लगती है तो पानी पी लेता हूँ। बोध के बाद से अब यही करता हूँ।’</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्नकर्ता ने कहा- </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">फिर ध्यान कब करते हो</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आपने जो कहा यह तो कोई बड़ी बात नहीं। सभी भूख लगने पर खाते हैं। सभी नींद आने पर सोते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी प्यास लगने पर पानी पीते हैं। तो आपकी विशेषता क्या हुई</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान कब करते हो</span>?<span lang="hi" xml:lang="hi">’</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बोकोजू ने कहा- </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इस दुनिया में कितने लोग हैं जो खाते समय सिर्फ  खाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विचारशून्य हो कर खाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब  भूख लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब खाते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जब सोते हैं तो सिर्फ  सोते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जब प्यास लगती है तब सिर्फ  पीते हैं</span>?<span lang="hi" xml:lang="hi">’</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फकीर का कहने का तात्पर्य यही है कि हम वर्तमान में रहें। जो व्यक्ति अक्सर अपने कार्यों को टालने का अभ्यास बना लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके सामने करणीय कार्यों की बाढ़ सी आ जाती है। किसी भी कार्य को करते समय शेष सभी कार्य बीच-बीच में याद आते रहते हैं और वह भूत और भविष्य में ही उलझा रहता है। इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि बैठकर आँखें बन्द कर मन को एकाग्र करना ही केवल ध्यान नहीं है। हम किसी भी कार्य को करते समय ध्यान ही कर रहे होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हम सावधानी पूर्वक एकाग्रता से करते हैं। कार्य के समय यदि हमारा मन चञ्चल है तो बैठकर ध्यान करना भी मुश्किल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके विपरीत यदि कार्य में हम पूरी तरह से समाहित हो जाते हैं और एकाग्र होकर कार्य करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वही एकाग्रता हमें ध्यान की गहराईयों तक जाने में भी सहायता करती है। इस प्रकार ध्यान का समग्र रूप से अभ्यास करते रहने पर हमारे मन में प्रसन्नता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्यता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शांति अपने आप आने लगती है और यही हम सबको चाहिए।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>योग एवं आयुर्वेद</category>
                                            <category>2018</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Nov 2018 21:42:47 +0530</pubDate>
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