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                <title>स्वर्णिम भारत की राह - योग संदेश</title>
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                <description>स्वर्णिम भारत की राह RSS Feed</description>
                
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                <title>स्वर्णिम भारत की राह</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">आचार्य बालकृष्ण</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2340/swarnim-bharat-ki-rah"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/127.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">2050 तक एकमात्र भारत ही ऐसा देश दिखता है जो पुन: पूरे विश्व को आध्यात्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक व राजनैतिक दृष्टि से मार्गदर्शन व नेतृत्व दे सकता है।</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत करोड़ों वर्ष पुराना ज्ञान-विज्ञान अपराविद्या-पराविद्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भौतिक व आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से विश्व के सर्वोच्च शिखर पर था। उस राष्ट्र के नागरिकों को अपनी महान् मातृभूमि तथा महान् पूर्वजों की तरह आचरण करना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी हम स्वयं का तथा अपने राष्ट्र सहित समूची मानवता का हित कर पायेंगे।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महादेवी वर्मा का यह कथन कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बिना वर्तमान के अतीत गतिहीन है और बिना अतीत के वर्तमान दिशाहीन है</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">आज भी प्रासङ्गिक है। जिस व्यक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज या राष्ट्र को अपने गरिमामय अतीत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामथ्र्य भरे वर्तमान तथा स्वर्णिम भविष्य का बोध नहीं होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह इस विश्व में अपना अस्तित्व ही खो देता है। अतीत के गौरव-गरिमा के साथ वर्तमान के अखण्ड-प्रचण्ड पुरुषार्थ से आशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्साह व उपलब्धियों भरा भविष्य हमें तभी उपलब्ध होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम अतीत की कुप्रथाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूढिय़ों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्धविश्वासों एवं सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक तथा सांस्कृतिक गलत परम्पराओं से मुक्त होंगे। वर्तमान की चुनौतियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संकटों व समस्याओं को आग्रह युक्त होकर समग्रता पूर्वक समझते हुए उनके समग्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थाई एवं न्यायपूर्ण तात्कालिक व दीर्घकालिक समाधान खोजकर उनको साहस पूर्वक क्रियान्वित करने हेतु घनघोर पुरुषार्थ करेंगे। भविष्य के प्रति आशान्वित हुए बिना हम एक भी कदम आगे नहीं बढ़ा सकते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अत: तथाकथित भविष्य वक्ताओं की अनहोनी का डर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खराब किस्मत तथा झूठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाखण्ड भरे मिथ्या उपायों से बचकर अपने कर्म को अपना धर्म मानकर अपनी प्रखर ऊर्जा से हमें आगे बढऩा होगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अतीत:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनियां के कुछ धूर्त व चालाक लोगों ने कुछ सामथ्र्यवान एवं महान् देशों को आगे बढऩे से रोकने के लिए प्रायोजित तरीके से इतिहास व विकास के नाम पर ऐसे झूठ गढ़ें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कि कोई भी दुनियां का गरीब या विकासशील देश इन तथाकथित विकसित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रगतिशील व महान् सभ्य देशों के मुकाबले आगे न बढ़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु उनकी राजनैतिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक व बौद्धिक गुलामी स्वीकार कर ले और वे जैसे उसे चलावें वैसे चले। भारत जैसे महान् राष्ट्र में भी पिछले लगभग २ हजार वर्षों से कुछ देशी व कुछ विदेशी लोगों के द्वारा हमारे गौरवपूर्ण इतिहास के स्थान पर हमें जंगली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांपों व भूत प्रेतों की झूठी कहानियों में विश्वास रखने वाले असभ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल-बुद्धि व कौशलहीन बताया तथा विनाशकारी एकाङ्गी विकास को महिमामण्डित करके मनुष्य के आध्यात्मिक विकास को भुलाकर केवल भौतिक विकास को ही सर्वस्व बताकर मानवता व भगवान् की सुन्दर सृष्टि के साथ क्रूर अत्याचार किया है।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-09/105.jpg" alt="10"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अत: भारत सहित दुनियां के गरीब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकासशील तथा कमजोर समझे जाने वाले सभी राष्ट्रों को पूरे स्वाभिमान के साथ अपने-अपने राष्ट्रों के सच्चे इतिहास व सर्वांगीण विकास के दर्शन के साथ आगे बढऩे की आवश्यकता है। भारत करोड़ों वर्ष पुराना ज्ञान-विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराविद्या-पराविद्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भौतिक व आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से विश्व के सर्वोच्च शिखर पर था। उस राष्ट्र के नागरिकों को अपनी महान् मातृभूमि तथा महान् पूर्वजों की तरह आचरण करना होगा तभी हम स्वयं का तथा अपने राष्ट्र सहित समूची मानवता का हित कर पायेंगे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अपने देश में अपार भू-संपदा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बौद्धिक सम्पदा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपार मानव संसाधन एवं असीम कुशलताओं व संभावनाओं से भरा एक दिव्य वातावरण है। वहीं आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैर-बराबरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असमानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वार्थपरता तथा अभावों व अशिक्षा के साथ-साथ अनियन्त्रित आबादी का बोझ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कालाधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रष्टाचार तथा अधिकांश क्षेत्रों में एक अन्यायपूर्ण भ्रष्ट व्यवस्था हमारे देश के लिए बहुत बड़ा संकट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समस्या एवं चुनौति भी है तथा इन सभी विकट संकटों से बाहर निकलने का आज भी हममें पूरा सामथ्र्य है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान में पूरे विश्व का जब हम निष्पक्ष मूल्याङ्कन करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो २०५० तक एकमात्र भारत ही ऐसा देश दिखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पुन: पूरे विश्व को आध्यात्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक व राजनैतिक दृष्टि से मार्गदर्शन व नेतृत्व दे सकता है। सवा सौ करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले इस महान् राष्ट्र के महान् नागरिकों को जहाँ भी वे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेत-खलियान से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसंधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा आदि अपने-अपने क्षेत्रों में पूरे स्वाभिमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शौर्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पराक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहस व प्रखर पुरुषार्थ के साथ सारी कुण्ठाओं एवं निराशाओं से बाहर निकलकर निरन्तर चरैवेति-चरैवेति के संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहना है। जैसे एक बीज में वृक्ष होने का सामथ्र्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही हम सब मनुष्यों में भगवान् ने बीज रूप में समस्त शक्तियां व दिव्यताएं दी हुई हैं। हमें प्रथम अपनी सामथ्र्य को जगाना व बढ़ाना है तथा फिर बिना किसी स्वार्थपरता व संकीर्णता के नि:स्वार्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्काम भाव से अनासक्त कर्मयोग के मार्ग पर चलते हुए निरन्तर विकास का इतिहास घडऩा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी भूमिका:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे मैंने तथा श्रद्धेय स्वामी जी ने सभी प्रकार की कुण्ठाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुप्रथाओं व रूढि़वादी परम्पराओं से ऊपर उठकर या बाहर निकलकर योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संन्यास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी एवं वैदिक सत्य सनातन संस्कृति को वैज्ञानिकता व समग्रता पूर्वक समझकर अपने पूर्ण पुरुषार्थ से आध्यात्मिकता व आधुनिकता को साथ लेकर सेवा व साधना करते हुए अपनी एक नि:स्वार्थ भूमिका का निश्चय करके उसमें अपने आपको पूरा  समाहित किया हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही जिस दिन भारत सहित सभी देशों के नागरिक अपने-अपने महान् देशों के लिए अपनी-अपनी एक छोटी या बड़ी भूमिका अपने-अपने सामथ्र्य के अनुसार तय कर लेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस दिन हमारा जीवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र एवं यह संसार बहुत सुन्दर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुखमय एवं दिव्य बन जायेगा। यही वेद का भी संदेश है।</span></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(230,126,35);" xml:lang="hi">इन्द्रंवर्धन्तोऽप्तुर:कृण्वन्तोविश्वमार्यम्।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><strong><span lang="hi" style="color:rgb(230,126,35);" xml:lang="hi">अपघ्नन्तोऽराव्य: ।। वेद।।</span></strong></h5>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:57:05 +0530</pubDate>
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