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                <title>करें मार्निंग वाक इन 22 सावधानियों के साथ - योग संदेश</title>
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                <description>करें मार्निंग वाक इन 22 सावधानियों के साथ RSS Feed</description>
                
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                <title>करें मार्निंग वाक इन 22 सावधानियों के साथ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi"><span> </span>डॉ. नागेन्द्र कुमार </span>'</strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">नीरज</span>’, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">निदेशक-पतंजलि योगग्राम</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2344/kare-morning-walk-in-22-savdhaniyon-ke-sath"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-09/626.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिकतम</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">शोध के अनुसार टहलने से मस्तिष्क तथा शरीर के अन्य हिस्सों में कुछ ऐसे जैव रसायन पैदा होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शरीर के दु:ख-दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोग एवं बेचैनी से राहत दिलाते हैं। टहलने से सारे शरीर में रक्त संचार तीव्र होने से समस्त अवयवों को भरपूर पोषण मिलता है। ऑक्सीजन धारण करने तथा कार्बन-डाई-ऑक्साइड निष्कासन तथा चयापचय की अन्य क्रियाएँ उन्नत होती हैं। पाचन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्वसन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्सर्जन तथा स्नायु संस्थान सबल एवं स्वस्थ होते हैं। वास्तव में टहलने से मस्तिष्क से जादुई न्यूरोट्रान्समोटर्स एंडोर्फिन तथा फिनाइल इथाइन एमिन निकलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने शामक एवं मादक प्रभाव से तन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन एवं आत्मा को आह्लाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उल्लास एवं आनन्द के अवर्णनीय एहसास से भर देता है।  पर जिस दिन व्यक्ति नहीं टहलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस दिन उसे अधूरापन महसूस होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खा</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ली पेट ही टहलना ज्यादा फायदेमंद है। पेट भरा होने पर टहलना शरीर क्रिया विज्ञान की दृष्टि से उत्तम नहीं है। भोजन के बाद शरीर की अधिकांश शक्ति खून तथा ऑक्सीजन भोजन को पचाने के लिये पेट की तरफ दौडऩे लगते हैं। उस समय हृदय रोगियों में हृदय की धमनियां बन्द होने से हृदय को भरपूर पोषण तथा ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। साथ ही भोजन के बाद टहलने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी प्रकार का शारीरिक या मानसिक श्रम करने से अतिरिक्तऊर्जा तथा ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में दिल निर्णय नहीं कर पाता कि पचाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टहलने या अन्य श्रम अथवा स्वयं के लिय किसे रक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑक्सीजन और ऊर्जा की आपूर्ति करें। फलत: वह संशयग्रस्त हो जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें दिल का दौरा पड़ चुका है व मधुमेह की बीमारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिये टहलना एक बेहतरीन ईलाज है। टहलने से रक्त में हृदय को पोषण देने वाला मित्र कोलेस्ट्रॉल हाइडेन्सिटी लाइपोप्रोटीन (एच.डी.एल.) तथा एपोलियो प्रोटीन ए-1 बढ़ जाता है तथा हृदय एवं रक्त वाहिनियों को क्षतिग्रस्त करने वाले शत्रु कोलेस्ट्रॉल लोडेंसिटी लाइपाप्रोटीन (एल.डी.एल.) की मात्रा कम हो जाती है। हृदय की क्षमता बढ़ जाती है। रुकी हुई कोरोनरी धमनियों से हृदय को पोषण देने के लिये नई कोंपलों की तरह नई रक्त धमनियाँ तक फूटने लगती हैं तथा बन्द धमनियाँ धीरे-धीरे खुलने लगती हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तव में खुले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शान्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदूषण रहित वायु में सैर करना चुस्ती एवं तंदुरुस्ती दोनों के लिये अत्यन्त लाभदायक है। टहलने से शरीर की जैव रासायनिक प्रक्रियाएँ प्रभावित होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फेफड़े की जैव क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्त का शुद्धीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर की चयापचय क्रिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोग प्रतिरोधक क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहन शक्ति तथा विष-निष्कासन की क्षमता बढ़ती है। टहलने का उत्तम लाभ पाने के लिए टहलने के समय निम्र बिन्दुओं पर अवश्य चिन्तन करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैर का लाभ कई गुना बढ़ जायेगा-</span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">चुस्ती तथा तेजी से सैर करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोगियों जैसी सुस्त चाल से टहलने पर सैर से पूरा लाभ नहीं मिलता।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">निश्चित समय पर निश्चित गति से टहलें</span>, 10<span lang="hi" xml:lang="hi"> से 15 मिनट प्रति किलोमीटर की आदत डालें। यह गति निरन्तर रखे। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">अशक्तमरीज गति सीमा को धीरे-धीरे बढ़ायें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस गति की निरन्तरता बनायें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">गति बढ़ाने के लिये सैर करते समय मौन रखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बातचीत न करें। साथ ही अपनी शारीरिक एवं मानसिक गतिविधियों व विचारों का निरीक्षण एवं अवलोकन करते हुए टहलें। कौन टहल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आप या आपका शरीर</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रश्न का उत्तर अन्दर से आने दें। तब आप महसूस करेंगे कि शरीर का अंग-प्रत्यंग अन्तरतम चेतना चला रही है। अपूर्व साक्षीभाव का उदय होगा। सैर की यह गति सम्यक् एवं स्वास्थ्यप्रद होगी। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर के समय बोलने से ऊर्जा व्यर्थ में नष्ट होती है। सैर करने वाला स्वास्थ्य साधक जल्दी थक जाता है। जबकि मौन के साथ टहलने से आपका स्वास्थ्य ऊर्जा एवं स्वास्थ्य के स्रोत से जुड़ा रहता है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">गति बढ़ाने के लिये कोहनियों को 90 डिग्री कोण से मोड़कर कदम के साथ आगे-पीछे स्विंग करते हुए टहलें। प्रारम्भ मेें अटपटा महसूस होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभ्यस्त हो जाने पर सुखानुभूति होती है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">बाँहों को मोड़कर टहलने से शरीर की बायेमैक्नेक्स रिद्म में टहलने में गतिशीलता पैदा होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैर तथा हाथों के मध्य एक ऐसा संतुलन बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर चुस्ती से आगे फिसलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रवाहित होता चलता है और थकान महसूस नहीं होती।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलते समय साँस का निरीक्षण करें। आते-जाते साँस की संवेदना को महसूस करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि टहलते समय जल्दी-जल्दी साँस लेने से जल्दी थकान महसूस होती है। साँस को लयबद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गहरी तथा नियंत्रित रखें। जितनी देर में श्वास लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके दुगुने समय में श्वास निकालते हुए टहलें।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलते समय कमर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रीढ़ एवं गर्दन सीधी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छाती आगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेहरा किंचित निम्राभिमुख तथा कदम गरिमा युक्त एवं गति तेज रखें। कदम की लम्बाई न तो ज्यादा हो और न कम। पैरों को जोर से जमीन पर पटकते हुए सैर न करे। चाल एक लय-ताल में एवं आरामदेह होनी चाहिये। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलते समय महसूस करें कि नाभि से पैर गतिशील हो रहे हैं। ऊपर की माँसपेशियाँ कदम चाल के साथ गतिशील हैं। सैर के समय पैर की गति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर तथा मन में किसी प्रकार का तनाव न रखें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">आड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तिरछे कूबड़ निकालकर टहलने से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फेफड़े तथा रीढ़ के स्नायुओं पर व्यर्थ का दबाव पड़ता है और तनाव तथा थकान पैदा होती है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलते समय थकने पर बीच-बीच में कुछ देर के लिये विश्राम करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर टहलना प्रारम्भ करें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर के समय साँस फूलने लगे व अन्य कोई परेशानी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर पूर्णतया थक गया हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस अवस्था में टहलना बन्द करके पूर्ण विश्राम करें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर का श्रेष्ठतम समय प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त तथा सायंकाल है। नदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्र के किनारे या पहाडिय़ों पर ओजोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑक्सीजन तथा ऋणायनों की मात्रा अधिक होने से शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य में आशातीत लाभ होता है। ब्रह्ममुहूर्त के वातावरण में नव सृजन के नये विचार पल्लवित एवं प्रस्फुटित होते हैं। शरीर की कोशिकाओं का स्वस्थ नव सृजन होता है</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्य जीवनी शक्ति भी जाग्रत होकर रोगों का संहार करती है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रात:काल सुविधानुसार 3-4 गिलास जल पीकर टहलने से कब्ज दूर होता है। टहलने के मध्य या बाद में प्यास लगने पर थोड़ा सा पानी पीयें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे कमजोरी महसूस नहीं होती। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर के 25 मिनट बाद दूध या फलों का एक गिलास रस लें तथा एक घंटे बाद भोजन करें। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर करने से शिराओं के मध्य रक्त संचार नियंत्रित एवं व्यवस्थित होता है। शिराओं में वाल्व होने से रक्त संचार सिर्फ हृदय की ओर ही होता है। सैर करने या अन्य व्यायाम करते समय पेशियों के सिकडुने से पास की शिराएँ दबती हैं तथा उठते समय दबाव कम हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार टहलने से शिराओं के अन्दर रक्त-प्रवाह तेज होता है और रक्त का शुद्धीकरण बढ़ जाता है।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलने से मधुमेह रोगियों की कोशिकाएँ एवं ऊतक अतिरिक्त शर्करा का उपयोग करने में समर्थ हो जाते हैं और यकृत व अग्नाशय की क्रियाशीलता बढऩे से रक्त शर्करा पर नियंत्रण होने लगता है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">तेजी से टहलने से अतिरिक्त चर्बी (</span>Calorie<span lang="hi" xml:lang="hi">) भस्म होती है। अनियंत्रित अंत:स्रावी ग्रंथियां संतुलित स्राव छोडऩे लगती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा कम होता है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर करने से रक्त संचार एवं हृदयगति तथा निम्न रक्तचाप संतुलित होकर सामान्य होने लगता है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">टहलने के लिये सूती ट्रेक सूट पहनें अथवा मौसम के अनुसार कपड़े पहनें। कपड़े तथा जूते ऐसे हों जो सैर को चुस्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुरुस्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्फूर्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गतिमान तथा आनन्दमयी बनायें। घुटने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमर तथा पैरों में दर्द वाले रोगी चप्पल पहन कर कदापि न टहलें।</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एम्फिसिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संधियों में सूजन तथा दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैरों में सूजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गठिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संधिवात तथा अन्य रोग जिसमें रोगी को टहलने में तकलीफ महसूस  होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें चिकित्सक की राय लेकर ही टहलना चाहिये। </span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतत: कहा जा सकता है कि ब्रह्ममुहूर्त में प्रात:काल सूर्योदय के आधे घंटे पूर्व एवं बाद तक सैर करने से वायुस्नान तथा धूपस्नान का भी लाभ मिलता है। प्रात:कालीन स्वास्थ्यदायिनी पराबैंगनी किरणें हृदय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्थि एवं अन्त:स्रावी संस्थान को सक्रियता प्रदान करती हैं। रक्त कोलेस्ट्रॉल कम होता है। दुर्गुणों को विनाश एवं सद्गुणों का विकास होता है। दिनभर चुस्ती एवं स्फूर्ति रहती है। स्वास्थ्य की खुशबू से जीवन महक उठता है। आइये हम सब ब्रह्ममुहूर्त में उठें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगऋषि के संदेश को सुने और सैर पर जायें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे राष्ट्र स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत हो तथा जीवन खुशहाली से भर उठे।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>योग एवं आयुर्वेद</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मार्च</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 21:50:10 +0530</pubDate>
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