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                <title>अल्सर और एसिडिटी में प्राकृतिक चिकित्सा - योग संदेश</title>
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                <description>अल्सर और एसिडिटी में प्राकृतिक चिकित्सा RSS Feed</description>
                
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                <title>एक आदर्श व वैज्ञानिक जीवन पद्धति है योगग्राम की प्राकृतिक चिकित्सा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi"><span> </span>डॉ. नागेन्द्र कुमार </span>'</strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">नीरज’</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">निदेशक-पतंजलि</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi">योगग्राम</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2400/ek-adarsh-va-vaigyanik-jivan-padati-hai-yoggram-ki-prakritik-chikitsa"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/201.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">    प्राकृतिक </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा हमारी परम्परा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभ्यता और हमारी संस्कृति की एक अद्भुत चिकित्सा पद्धति है। हमारी मान्यता रही है कि यदि हमारा आहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विचार और व्यवहार सही है तो आप हर प्रकार के रोग ठीक कर सकते हैं। यही प्राकृतिक चिकित्सा का संदेश और मूल दर्शन है। प्राकृतिक चिकित्सा की विशेषता है कि इसमें हर रोग का निदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि ये मानती है कि सारे रोग एक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सारे रोगों का निदान एक है। प्राकृतिक चिकित्सा में हम पंच महाभूत जिससे हमारे शरीर का निर्माण हुआ है उसी को हम चिकित्सा में प्रयोग करते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्राकृतिक चिकित्सा में स्वास्थ्य की परिभाषा कुछ इस प्रकार है कि-प्रकृति के नियमों का अनुसरण और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग कर हम स्वस्थ होते हैं। यदि प्रकृति के नियमों का अनुसरण हम करेंगे तो कोई भी ताकत हमको स्वस्थ होने से रोक नहीं सकती और यदि हम प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करते हैं तो हम बीमार होते हैं। योग-आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा चूंकि प्रकृति पर आधारित चिकित्सा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में प्रकृति ठीक नहीं होगी तो विकृति तो होगी ही। इस लेख में हम कुछ रोगों को लेकर पतंजलि योगग्राम में अपनाई जाने वाली प्राकृतिक चिकित्सा संबंधी प्रयोगों का विश्लेषण करेंगे। प्रस्तुत है गैस-कब्ज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हड्डियों में विटामिन्स की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्सर-एसीडिटी आदि पर प्राकृतिक प्रयोग:-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">गैस व कब्ज की प्राकृतिक चिकित्सा:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गेंहू का पानी पीने से गैस व कब्ज की समस्या दूर होगी ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें सौंफ का भी प्रयोग करें। सौंफ को आधा घण्टा भिगो दीजिए और उसमें मिश्री डालकर शर्बत बनाकर सेवन करने से गैस व पेट की समस्याएं खत्म होती हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कब्ज के लिए रात को सौंफ को पानी में उबालकर पी सकते हैं। रात्रि को त्रिफला का भी सेवन कर सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि कब्ज ज्यादा है तो हरड़ का भी सेवन कर सकते हैं। लेकिन इन सबका लगातार सेवन नहीं करना चाहिए। इसके बदले शाम को खाना खाने के १ घण्टे बाद ४ चम्मच आंवला का रस व ४ चम्मच एलोवेरा के जूस के सेवन से पेट साफ रहता है। ज्यादा कब्ज हो तो १ गिलास गर्म पानी में ४ चम्मच आंवला और ४ चम्मच एलोवेरा मिलाकर सेवन करें। अम्लपित्त हो तो आंवले की मात्रा कम करें। कब्ज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुमेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थराइटिस आदि के लिए ५० ग्राम आंवला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">५० से १०० ग्राम चुकंदर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">२५०-३०० ग्राम गाजर और २० ग्राम कच्ची हल्दी इन सबका जूस मिलाकर प्रयोग करें। इसमें गेंहू के ज्वारे व जौ के ज्वारे का प्रयोग कर सकते हैं। क्योंकि यह शरीर के हर रोगों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुकाम से लेकर कैंसर तक को ठीक कर सकता है ।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कब्ज का नाश करने के लिए नाशपाती के रस का सेवन करें। इससे पूरे पेट की ऐसी धुलाई होगी जैसे ऐनिमा से होती है। यह हृदय के लिए भी बहुत अच्छा है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मधुमेह के रोगी नाशपाती का सेवन न करें। मधुमेह के रोगी कोई भी मीठी चीज का सेवन करना चाहते हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसमें बिना मीठा वाली चीजें डालें जैसे ककड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खीरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टमाटर आदि। चावल खाना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसमें खूब सारी सब्जियां डालकर खायें। इसी प्रकार गेंहू के साथ चना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जौ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुलथी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोयाबीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मसूर आदि अनाजों के मिश्रण से बनी हुई रोटी का सेवन करें । साथ ही प्रतिदिन ५-६ किमी पैदल चलें और कपालभाति व मण्डूक आसन करें। जो भी खाना हो उसे चबा-चबा कर खाना चाहिए।  सेब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमरूद व पपीता ये तीनों पेट साफ करते हैं। जितनी भी हरी सब्जियां हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भिण्डी को छोड़कर सभी पेट के लिए लाभकारी हैं। करेले का रस पीने से भी पेट साफ होता है। कुछ दिनों तक इन चीजों का प्रयोग करने से कब्ज तो समाप्त होगा ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंतें भी ताकतवर हो जायेंगी। क्योंकि आंतें जितनी कमजोर होंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कब्ज उतनी ज्यादा होगी।</span></h5>
<p><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/761.jpg" alt="76"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पत्तेदार सब्जियों का सेवन भी लाभकारी है। पेट का गर्म व ठंडा सेंक कब्ज का रामबाण इलाज है। अंजीर व मुनक्का भी कब्ज में लाभकारी है। मुनक्का और अंजीर को सेवन करने से १-२ घण्टे पहले भिगों लें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गैस में अंकुरित मेथी एवं छाछ का प्रयोग लाभकारी है। छाछ में लवण भास्कर चूर्ण डालकर सेवन करें। गर्म ठंडा सेंक पेट पर देने से भी गैस में लाभदायक सिद्ध होता है। पवनमुक्तासन और मण्डूक आसन भी गैस में बहुत कारगर है। कटि स्नान भी लाभकारी है। अत: टब में गर्म पानी डालकर धीरे-धीरे पेट पर गीला तौलियां फेरें। इससे आंतों की ताकत बढ़ेगी और गैस बनने की प्रक्रिया भी कम होगी। खाने में दालों का प्रयोग कम करें और छिलके वाली दाल का ही सेवन करें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हड्डियों में विटामिन्स की कमी :</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">Osteoporosis <span lang="hi" xml:lang="hi">(हड्डियों की कमजोरी)</span>, Vitamin-D Deficiency<span lang="hi" xml:lang="hi"> जैसे रोगों में रोग ४५ मिनट तक सूर्य स्नान (सुबह उगते सूर्य की किरणों में) से बहुत लाभ मिलता है। चौलाई व काला तिल कैल्शियम का खजाना है। समस्त अनाजों में सबसे ज्यादा ऑयरन कैल्शियम और काले तिल में होता है। इसकी कमी पूरी करने के लिए काले तिल को अंकुरित करके भी सेवन करें। इसके अतिरिक्त मूंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मसूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूंगफली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेथी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गेहूं आदि को भी अंकुरित कर सेवन किया जा सकता है। ऐसी महिलाएं जिनको गर्भधारण करने में कठिनाई होती है या गर्भ धारण करने के बाद गर्भपात (</span>Miscarriage<span lang="hi" xml:lang="hi">) हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए अंकुरित गेहूं व गेहूं का दलिया खिलाने से काफी लाभ मिलता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन्स विशेषकर विटामिन बी-12 की कमी से भी हड्डियों से सम्बंधित समस्यायें पैदा होती हैं। वास्तव में अनुसंधान से स्पष्ट हुआ कि जितने भी अंकुरित अनाज हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो </span>Vitamin b-<span lang="hi" xml:lang="hi">12 का खजाना हैं। अत: विटामिन बी-१२ के लिए अंकुरित अन्न का प्रयोग करें। इसके अतिरिक्त सोयाबीन व दही का प्रयोग कर सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जितने भी </span>milk Products<span lang="hi" xml:lang="hi"> हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनमें विटामिन बी-12 होता है । जबकि विटामिन डी-3 के लिए सबसे अच्छा स्रोत धूप है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पेट सम्बंधी बीमारियों के कारण भी हड्डियां प्रभावित होती हैं। अत: पेट को सर्वप्रथम ठीक करें। इस स्थिति में गेहूं का पानी भी अत्यंत उपयोगी होता है। पेट की अन्य बीमारी के लिए गेहूं का पानी भी बहुत लाभ करता है। जैसे सुबह आधा कप गेहूं लीजिए और २ कप पानी उसमें डाल दीजिए। 24 घण्टे बाद उस पानी को पी लीजिए। फिर उसी गेहूं को भिगो दीजिए और फिर उसके 24 घंटे बाद पी लीजिए। फिर उसी गेहूं को भिगो दीजिए और 24 घण्टे बाद पी लीजिए। यानी 1 ही गेहूं ३ दिन तक चलेगा। यह प्रयोग सुबह-सुबह खाली पेट करें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अगर पानी बेस्वाद लगे तो उसमें नींबू और शहद मिलाकर प्रयोग करें। यह प्रयोग मुंह के छाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट की गर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कब्ज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायरिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूटरस की गड़बड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्भपात (</span>miscarriage<span lang="hi" xml:lang="hi">) व शरीर में </span>Vitamin-b Complex <span lang="hi" xml:lang="hi">की कमी में लाभ करेगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अल्सर और एसिडिटी में प्राकृतिक चिकित्सा:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एसिडिटी जैसी बीमारी के लिए योग बहुत ही अच्छा होता है। कुंजल क्रिया एसिडिटी में बहुत ही उपयोगी होती है। पेट संबंधी बीमारियों जैसे भूख ना लगना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैस और कफ जैसी बीमारियों में भी कुंजल क्रिया बहुत ही लाभकारी है। अल्सर और एसिडिटी बीमारियों की चिकित्सा के लिए मिट्टी की पट्टी का प्रयोग लाभकारी होता है। </span>Antaacid <span lang="hi" xml:lang="hi">वाले आहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाजर का रस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सौंफ का पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लौकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टिण्डा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परवल अल्सर और एसिडिटी जैसी बीमारियों में बहुत ही उपयोगी होती हैं। पत्तों वाली सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। </span>Antaacid <span lang="hi" xml:lang="hi">वाले आहार के अतिरिक्त मुनक्का भी काफी फायदा करता है। मुनक्के खाने नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चूसने हैं। मुनक्के के साथ ही ऐलोविरा जूस भी एसिडिटी में बहुत लाभ करता है। ऐलोविरा और </span>Wheat Grass <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्सर और एसिडिटी जैसी बीमारियों का नाश करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पंचकर्म और षट्कर्म द्वारा योगग्राम चिकित्सा:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे शरीर में </span>Toxic, oxidant, Negative energy<span lang="hi" xml:lang="hi"> से शरीर के कुछ अंग शिथिल पड़ जाते हैं और जो अंग कमजोर पड़ा उसे ही बीमारी आ जाती है। अत: सर्वप्रथम आवश्यक है कि शरीर के अंगों को शक्ति देने के लिए विजातीय तत्व बाहर निकालें। इसके लिए प्रथम है आहार की शुद्धि और दूसरा मन-मस्तिष्क में बैठे अशुद्ध विचारों का निकलना जरूरी है। इसीलिए योगग्राम में शरीर को शुद्ध करने के लिए मुख्य रूप से धौति करायी जाती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धौति एक तो कपड़े से करायी जाती है और दूसरी वमन धौति। पानी पिलाया और निकाल दिया। धौति कफ और श्वास रोगों में बड़ी उपयोगी है। धैति के अलावा शरीर शुद्धि के लिए नेति का भी प्रावधान षटकर्म में है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नेति में जलनेति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूत्रनेति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलनेति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घृतनेति प्रमुख हैं। एक नाक से पानी भरना और मुंह से सांस लेकर दूसरी तरफ से निकाल देना ये जलनेति हो गई। सूत्रनेति में पहले दिन सरसों का तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बादाम रोगन या गाय का घी नाक में डालें। थोड़ा सा सरसों का तेल गर्म करके डालना बहुत अच्छा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह नाक एकदम खोल देता है। जुकाम एकदम दूर हो जाता है। जिनको बलगम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सायनस है वे थोड़ा सा बादाम रोगन या गाय का घी ड्रापर से डाल लें। दिमाग भी तरोताजा रहता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पंचकर्म में दूसरी तरह की क्रियाएं भी होती हैं उसमें स्नेहन शिरोधारा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वेदन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विरेचन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वमन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस्ति आंखों के लिए अक्षय तर्पण करवाते हैं। शरीर में बहुत ज्यादा अशुद्धि बढ़ गई है तो उसे फिर मसाज भी कराते हैं। ड्राई मसाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलों से मसाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पोटली का सेंक कराते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर अलग- अलग जड़ी-बूटियों से भाप (स्टीम) देते हैं। जैसे चमड़ी के रोगों के लिए अलग औषधियां होंगी। जोड़ों के दर्द के लिए अलग और सूजन के लिए अलग औषधियां हैं। उनका भाप (स्टीम) व वाष्प देते हैं और औषधियों से स्नान भी कराते हैं। यह प्रक्रियाएं जिनको बहुत ज्यादा </span>Critical <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रॉब्लम होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए बहुत लाभदायक होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्राकृतिक चिकित्सा में शंख प्रक्षालन बहुत जर्बदस्त प्रक्रिया है। जिनको पुराना कब्ज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शुगर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्किन डिजीज व पेट की बीमारियां हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए शंख प्रक्षालन लाभकारी है। शंख प्रक्षालन के तहत पानी पीते हैं फिर पांच आसन करवाते हैं। जिनको अस्थमा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नींबू से दिक्कत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो खाली गर्म पानी पिला देते हैं। जिसको बी.पी. हो उसको नमक नहीं देते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे गर्म पानी से भी करवाते हैं। गर्म पानी पिलाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसन करवाते हैं तो पेट साफ होना शुरू हो जाता है। शाम को थोड़ा हल्का खाना खिचड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फल आदि देते हैं। जिनको बहुत ज्यादा कब्ज रहता है उसको त्रिफला या अरहर चूर्ण देते हैं जिससे पेट जल्दी साफ हो जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">माइग्रेन के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम से जर्बदस्त फायदा होता है और इसमें जलनेति और सूत्रनेति से भी लाभ होता है। मेधावटी से विशेष लाभ मिलता है। बादाम रोगन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुलोम-विलोम प्राणायाम से १०० प्रतिशत आराम हो जाता है। </span>Heart enlarge <span lang="hi" xml:lang="hi">हो गया है तो प्राणायाम से १०० परसेंट अच्छा हो जायेगा। हृदयामृत और अर्जुन की छाल का प्रयोग भी अति उत्तम है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक-एक जड़ी-बूटी में अपरिमित शक्ति है। अन्नों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औषधियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वनस्पतियों पर यहाँ अनुसंधान किये जाते हैं। चूंकि सारे रस जल से आते हैं। सारे रूप अग्नि से आते हैं। ऋषियों ने अलग-अलग तत्वों की अन्वेषणा की कि सारी चीजें आ कहां से आ रही हैं। सारी शक्तियां कहां से आ रही हैं। हर एक चीज में एक शक्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एनर्जी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पावर है</span>, Strength <span lang="hi" xml:lang="hi">है और ऊर्जा के सिद्धांत से ही ये ब्रह्मांड काम कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सारी शक्तियां वनस्पतियों वाली औषधियों में मिलेंगी ही। इसी अवधारणा पर यहाँ दिमाग की बीमारी में ब्राह्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शंखपुष्पी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अश्वगंधा और आंखों के लिए आँवला और तमाम तरह की औषधियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोग में लाते हैं। इसी प्रकार दांतों के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चमड़ी के लिए एलोवेरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुलसी और नीम आदि औषधियों से लाभ का प्रयास होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वस्तुत: कह सकते हैं कि योगग्राम सम्पूर्ण विश्व के रोगियों के लिए विश्वसनीय प्राकृतिक उपचार केन्द्र है। जहां रोगियों का पहले आएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले उपचार करायें का समुचित पालन होता है। </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>योग एवं आयुर्वेद</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मई</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 May 2017 21:51:47 +0530</pubDate>
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