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                <title>पतंजलि परिसर में ऐसे हुआ देश भर से 40 दिव्य भजन गायकों का चयन - योग संदेश</title>
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                <description>पतंजलि परिसर में ऐसे हुआ देश भर से 40 दिव्य भजन गायकों का चयन RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>'भजन गायक एक तलाश’ का लक्ष्य है दुनियां में स्वरसाधना द्वारा भारतीय संस्कृति व ऋषिवाणी को विस्तार देना</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:right;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भव्य श्रीवास्तव</span></h5>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2404/bhajan-gayak-ek-talash-ka-lakshya-hai-duniya-me-swarsadhana-dwara-bharatiya-sanskriti-va-rishivani-ko-vistar-dena"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/601.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि परिसर में ऐसे हुआ देश भर से </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिव्य भजन गायकों का चयन</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जब-जब </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पृथ्वी पर कोलाहल मचा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वसुधैव कुटुम्बकम की सोच वाले इस भूखंड भारत ने अपनी साधना और तपस्या से विश्व को समाधान दिया। पूरी दुनियां के सभी धर्मों में जो एक बात समान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो यह कि मनुष्य की पीड़ा को कैसे दूर किया जाए। इस पीड़ा के निवारण के लिए सभी विधाओं व धर्मों ने अपने-अपने ढंग से समाधान दिया। वहीं संगीत कला विशेषज्ञों ने खोज द्वारा जब ब्रह्माण्ड के नाद और स्वर को ध्यान से सुना तो आ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">म का आलाप उभर के आया। संतों ने एक सुर में उस ऊँ का आह्वान किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो प्रकृति प्रसन्न हो उठी। दिव्य नाद फूट पड़ा। मान्यता है कि संगीत के प्रचलित सातों स्वर मोर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बकरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रौंच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोयल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घोड़े और हाथी के स्वर से लिए गये हैं। गायन प्रकृति का गुंजन और स्पंदन ही तो है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें स्वरों से बांध दिया गया और जब स्वर को सुर और तान मिले तो रूप लिया गायन ने। यही गायन जब भक्ति के लिए गाया गया तो बना भजन। सातवीं शताब्दी से भजन भारत में सामाजिक व राजनीतिक परिवर्तन का आधार बना रहा। पतंजलि ने इसे पुन: राष्ट्र निर्माण की अवधारणा से जोडऩे का बीड़ा उठाया है। पूज्य योगऋषि व श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन में विगत दिनों पतंजलि परिसर में इसी निमित्त से भारतीय भजन प्रतिभाओं का चयन किया गया।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सू</span><span lang="hi" xml:lang="hi">रदास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुलसीदास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कबीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीराबाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी हरिदास से लेकर आज के महान गायकों ने भजन की यह फलती-फूलती धारा अपनी-अपनी संवेदनाओं में लोकार्पित किया और आज देश की अनंत श्वर तानों के प्रति संपूर्ण विश्व मुग्घ है। आस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धा और विश्वास की इस चमक के पीछे परम्परा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति और पहचान की संगीतमय ठोस बुनियाद समाहित है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पर घरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आश्रमों में बजने और गूंजने वाली हर मधुर रचना की समय सीमा आज घट रही है। इसीलिए पतंजलि ने ठाना कि इस देश की लहलहाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुस्काती और बलखाती सुरीली आवाजों को चुन-चुन कर भक्ति के नए आयाम रचें जायें। इसी संकल्प से पतंजलि संतों की भूमि और कला प्रेमियों के इस जगत में ढूढऩे निकली है एक ऐसे स्वर को जो गाए तो देवता हिल जांए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईश्वर पिघल जाए और मन की सारी बंदिशें नन्हें शिशुओं की तरह चंचल हो उठे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी का आगाज़ है पतंजलि का यह भजन रत्न।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/611.jpg" alt="61"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व भजन के इन्हीं संवेगों के बीच अपनी थकान मिटाता है। गौरवमय रहा पतंजलि परिसर का वह दिन जिसमें सैकड़ों प्रतिभागियों के भीतर की हर आराधना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रार्थना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तपस्या और विश्वास को आवाज देने के लिए भजन समागम आयोजित हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दो दिन की सुर गंगा में हर कोई भक्तिमय था। कठिन परीक्षा और प्रतीक्षा के बाद इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि जो रिजल्ट आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे एक-एक प्रतिभागी संतुष्ट थे। 327 प्रतिभागियों में से 40 का चयन आसान न था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर भजन के लिए जो आवाजें चुनी जानी थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे खुद ब खुद आगे आने लगी। जजों ने अपने ज्ञान और अनुभव से 21 में एक-एक प्रतिभागी को उचित अंक दिये। चयन की प्रक्रिया के कठिन होने और कई मेधावी आवाजों के प्रतियोगिता में मंच पर मौजूद होने से स्थिति कई बार रोचक बन पड़ी। इसलिए चयन को निष्पक्ष और संतुलित रखने के लिए चतुर्थ दृष्टि का उपयोग किया गया। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चतुर्थ दृष्टि का अर्थ है कि जो हर ओर देख रहा हो और जिसकी नजर से न प्रतिभा छुपे और न ही कोई त्रुटि। जिस पर आज देश का बच्चा-बच्चा विश्वास और गर्व करता है। अनूप जलोटा और साधना सरगम जैसे प्रकाण्ड संगीत गुरुओं के दिये गये निर्णय को लेकर जब चतुर्थ दृष्टि अर्थात् पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज व श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने मंथन किया तो जो नतीजा निकला वो सबको स्वीकार्य था। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रज्ञा चक्षु से हृदय की आवाज बनने वाले रांची के धीरज गुप्ता को मिले सबसे ज्यादा अंक। भले ही ईश्वर ने इस बालक को नेत्र ज्योति नहीं दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आवाज की लौ ने इसे चालीस लोगों में सबसे ऊँचा स्थान दिलाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर स्वर और भक्ति के इस अनोखे मेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भजन रत्न को चालीस के अलावा भी मिले कई और रत्न। इनमें से पांच ने तो जजेस और चतुर्थ दृष्टि का ऐसा दिल जीता कि वो खास हो गये। अब आने वाले समय में उन्हें चुने जाने का सहज पुरस्कार भी मिलेगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत रत्न के महाआडिशन की गंगा पतंजलि योगपीठ के फेस-2 में तकरबीन एक हफ्ते तक बहती रही। 11 जनवरी से ही देश के हर कोने से प्रतिभागी चयनित होने के लिए आने लगे थे। वे परिसर में जहाँ भी रहते या जाते भजन जीवंत होने लगता। रात के अंधकार में भी कई रियाज करती आवाजें पतंजलि प्रागंण को गुंजायमान कर रही थीं। चार दिन तक ऐसे ही न जाने कितने दृश्य वहाँ गढ़े गये और इन्हीं दृश्यों के बीच से आखिरकार शीर्ष 40 सुरीले भजन गायक चयनित किये गये। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जो चुने गये उन्हें मुंबई का टिकट तय ही था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें स्वामी रामदेव जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी ने अपने हाथों से प्रशस्ति पत्र प्रदान किये। जिन्हें चुने जाने का मौका नहीं मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए स्वामी जी और आचार्य श्री ने दूसरे दरवाजे खोल दिये। योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">तनाव न लीजिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुस्कराइये ।’</span> ''<span lang="hi" xml:lang="hi">शीर्ष 40  में नंबर नहीं आया तो न आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आप सवा सौ करोड़ भारतीयों के बीच 321 में तो आये हैं। भजन रत्न तो एक तलाश है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमें तो पूरी दुनियां में भारतीय संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कला और ऋषियों की वाणी का प्रचार-प्रसार करना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मिशन में आप लोग हमारे सहभागी भी बन सकते हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम पूरी दुनियां में वैदिक संस्कृति का प्रचार करना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे कार्यों के लिए आप सबका मैं पतंजलि पीठ में स्वागत करता हूँ। जिनका स्वर अच्छा होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन सभी को गाने का अवसर हम देंगे।’’</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भजन रत्न शो के निर्माता पंकज नारायण और  अपूर्वा बजाज ने कहा कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">यह शो टीवी के इतिहास का सबसे सफल शो साबित होने जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसमें भारतीय संस्कृति को उसके उसी वास्तविक स्वरूप में प्रस्तुत किये जाने की तैयारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हर घर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर परिवार में गाई-गुनगुनाई जाती है। टीवी के प्रसिद्ध निर्देशक संतोष बादल इस शो का निर्देशन कर रहे हैं और शो के स्क्रिप्टिंग की जिम्मेदारी निभा रहे हैं धर्म पत्रकार भव्य श्रीवास्तव। शो को भजन के संग-संग चलाने के लिए एंकरिंग चर्चित टीवी कलाकार सौरभ राज जैन और गायिका दीपिका साठे कर रही हैं।’’</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण जी ने कहा कि पतंजलि ने किसी का अनुकरण नहीं किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ऐसा रचाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे दूसरे अनुकरण करें। अभी तक हमें स्वामी जी के कार्यक्रमों में भजन गायकों का टोटा रहता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आज तो पूरा अभाव खत्म हो गया। आज देश के युवा गायक बनने का विचार कर रहे हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जल्द आएगा वैदिक चैनल: योगऋषि पूज्य स्वामी जी महाराज</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि जो लोग अच्छा गाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए हमारे छह सात चैनल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आस्था भजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अरिहंत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्संग और जल्द ही वैदिक चैनल को भी बड़े स्तर पर हम ला रहे हैं। देश को जरूरत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक ऐसे चैनल की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पूरी तरह से भारतीय संस्कृति को समर्पित हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे वैदिक चैनल में आधुनिकता के साथ वैदिक संस्कृति की वैज्ञानिकता का प्रचार-प्रसार किया जायेगा। इसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां चल रही हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा भजन हमारी पहचान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भजन हमारी जान है। देश में इस संगीत की एक समृद्ध परम्परा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर संस्कृति के मूल्यों के कमजोर होने से देसी संगीत और लोक परम्परा पर काफी आघात हुआ है। ऐसे में पतंजलि योगपीठ ने भजन को फिर से भारत की आवाज बनाने का प्रण लिया है। इस सोच को अब एक सच में बदलने का वक्त आ गया है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">भजन रत्न’</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">देश में एक नई लहर की तरह स्वीकारा जा रहा है। आने  वाले समय में जब भजन की ये नई आवाजें हर कोने-कोने में गुनगुनाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हम फिर से महसूस करेंगे कि अपनी भारतीयता की आवाज को आगाज़ देकर पतंजलि ने एक खास कदम उठाया है। इस कदम को कारवां बनते देर नहीं लगेगी और लोक धुनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोक भजनों में राष्ट्र की संस्कृति जीवंत हो उठेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा विश्वास ही इसके आगाज़ का आधार है। आइये हम भी अपने स्वर गौरव को संवारें। </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्कृति एवं संस्कार</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>मई</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 May 2017 21:45:55 +0530</pubDate>
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