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                <title>दुनियां को होलिस्टिक व वेलनेस की ओर ले जायेगा पतंजलि - योग संदेश</title>
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                <description>दुनियां को होलिस्टिक व वेलनेस की ओर ले जायेगा पतंजलि RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पतंजलि में राष्ट्रऋषि मोदी जी का ऐतिहासिक व हृदयस्पर्शी उद्बोधन</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(226,12,109);"><span lang="hi" xml:lang="hi">      मुझे पता नहीं था बाबा ने सरप्राइज दे दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी भावुकता के साथ विशेष सम्मान से आभूषित किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलंकृत किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं स्वामी जी का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पतंजलि परिवार का अंत:करण से आभार व्यक्त करता हूँ </span></span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उ</span><span lang="hi" xml:lang="hi">त्तराखंड के राज्यपाल श्रीमान डॉ. के. के. पॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री श्रीमान त्रिवेन्द्र सिंह जी रावत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष श्रीमान स्वामी रामदेव जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ के महासचिव श्रीमान आचार्य बालकृष्ण जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ के आचार्य प्रद्युम्मन जी और विशाल संख्या में पधारे हुए प्यारे भाईयों और बहनों...आज केदारनाथ जाकर के बाबा के दर्शन करने का</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2434/patanjali-me-rashtrarishi-modi-ji-ka-ayetihasik-va-hridayaspashi-udbhodhan"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/252.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(226,12,109);"><span lang="hi" xml:lang="hi">   मुझे पता नहीं था बाबा ने सरप्राइज दे दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी भावुकता के साथ विशेष सम्मान से आभूषित किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलंकृत किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं स्वामी जी का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पतंजलि परिवार का अंत:करण से आभार व्यक्त करता हूँ </span></span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उ</span><span lang="hi" xml:lang="hi">त्तराखंड के राज्यपाल श्रीमान डॉ. के. के. पॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री श्रीमान त्रिवेन्द्र सिंह जी रावत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष श्रीमान स्वामी रामदेव जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ के महासचिव श्रीमान आचार्य बालकृष्ण जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ के आचार्य प्रद्युम्मन जी और विशाल संख्या में पधारे हुए प्यारे भाईयों और बहनों...आज केदारनाथ जाकर के बाबा के दर्शन करने का मुझे सौभाग्य मिला और वहां से आप सब के बीच आने और आप सबके आशीर्वाद पाने का सौभाग्य मिला। मुझे यह पता नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर बाबा ने सरप्राइज दे दिया। बड़ी भावुकता के साथ विशेष सम्मान से अभिभूत किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलंकृत किया। मैं स्वामी जी का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे पतंजलि परिवार का अंत:करण पूर्वक आभार व्यक्त करता हूँ। जिन लोगों के बीच में मेरा लालन पालन हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन लोगों ने मुझे सुसंस्कृत किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुझे शिक्षा-दीक्षा दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे मैं इस बात को भलीभांति समझता हूँ कि जब आपको सम्मान मिलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसका मतलब होता है कि आपसे ये-ये प्रकार की अपेक्षायें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जरा भी आगे-पीछे मत होना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसको पूरा करो। इस प्रकार मेरे सामने मुझे क्या करना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">कैसे जीना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका एक डूज़ एण्ड डोन्ट्स का बड़ा दस्तवेज गुरू जी ने रख दिया। लेकिन सम्मान के साथ-साथ आप सब के आशीर्वाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सवा सौ करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद की ताकत पर मेरा पूरा भरोसा है। मेरा अपने में उतना भरोसा नहीं है जितना की मुझे आप पर और देशवासियों के आशीर्वाद की ताकत पर भरोसा है और इसलिए वो आशीर्वाद मेरे लिए ऊर्जा का स्रोत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे संस्कार मुझे मर्यादाओं में बांध कर रखते हैं और मुझे राष्ट्र के लिए समर्पित जीवन जीने के लिए नित्य नई प्रेरणा मिलती रहती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(226,12,109);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संकटों को पार करने की मिलती है शक्ति</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मैं आज आपके बीच में आया हूँ तो आप भी भलीभांति अनुभव करते होगें कि आप ही के परिवार का कोई सदस्य आपके बीच में आया है और मैं यहां पहली बार नहीं आया हूँ। आप लोगों के बीच बार-बार आने का मुझे सौभाग्य मिला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक परिवार के सदस्य के नाते आने का सौभाग्य मिला है। ये भी मेरा सौभाग्य रहा है कि मैनें स्वामी रामदेव जी को देखा कि किस प्रकार से वो दुनिया के सामने उभर करके आते गये। बहुत निकट से मुझे यह देखने का सौभाग्य मिला। उनका संकल्प और संकल्प के प्रति समर्पण यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी जड़ी-बूटी है और ये जड़ी बूटी बालकृष्ण आचार्य जी और स्वामी जी की खोजी हुई जड़ी बूटी है। बालकृष्ण जी की जड़ी-बूटी शरीर को स्वस्थ रखने के लिए काम आती है लेकिन स्वामी रामदेव जी वाली जड़ी-बूटी हर संकटों को पार कर के नईया को आगे बढ़ाने की ताकत देने वाली होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(226,12,109);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/282.jpg" alt="28"></img></span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(226,12,109);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के गौरव को दुनियां से परिचय कराने का ठीक समय</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज मुझे रिसर्च सेंटर के उद्घाटन का सौभाग्य मिला। हम देश को भूतकाल की तरफ अगर थोड़ी नजर करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो एक बात साफ ध्यान में आती है कि हम विश्व में इतने छाये हुए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतने पहुचे हुए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतनी ऊचाईयों को प्राप्त किये हुए थे कि जब दुनिया ने इसे देखा तो उनके लिए तो वहां तक पहुंचना शायद संभव नहीं लगता था और इसलिए उन्होंने मार्ग अपनाया जो हमारा श्रेष्ठ है उसे ध्वस्त करने का। इसको नेस्तनाबूत करने का और गुलामी का पूरा कालखण्ड हमारी पूरी शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे ऋषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुनि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक हर किसी को जो श्रेष्ठ था उसको बचाये रखने के लिए </span>1000, 1200<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के गुलामी कालखण्ड में उनकी शक्ति खपती रही। आजादी के बाद जो बचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जरूरी था कि उसे पनपाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे पुरस्कृत करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समयानुकूल उसमें परिवर्तन करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नये रंग रूप के साथ साज सज्जा करते और आज़ाद भारत की सांसों के बीच उसे विश्व के सामने हम प्रस्तुत करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वो नहीं हुआ। गुलामी के कालखण्ड में नष्ट करने का प्रयास हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज़ादी का एक लम्बा कालखण्ड ऐसा गया जिसमें इन श्रेष्ठताओं को भुलाने का प्रयास हुआ। दुश्मनों ने नष्ट करने की कोशिश की उससे तो हम लड़ कर निकल पाये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अपनों ने जब भुलाने का प्रयास किया तो हमारी </span>3-3<span lang="hi" xml:lang="hi"> पीढ़ियाँ दुविधा के कालखण्ड में जिंदगी गुजारती रहीं। मैं आज बड़े गर्व के साथ कहता हूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े संतोष के साथ कहता हूँ कि अब भुलाने का वक्त नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो श्रेष्ठ है उसको गौरवांवित करने का वक्त है। यही वक्त है जो कि विश्व में भारत की आन-बान-शान का परिचय करवायें। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(226,12,109);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी जी के प्रयास से योग बना आंदोलन</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनियां के लोग शांति की तलाश में हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो बाहर की दुनिया से तंग आकर भीतर की दुनिया को जानने-परखने के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय हम लोगों का कर्तव्य बन जाता है कि आधुनिक स्वरूप में रिसर्च एंड एनालिसिस के साथ योग प्रस्तुत हो। यह ऐसा विज्ञान है जो तन और मन की तंदुरुस्ती के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मा की चेतना के लिए उपलब्ध हो सकता है। मैं बाबा रामदेव जी का अभिनंदन करता हूँ कि इन्होंने योग को एक आंदोलन बना दिया। सामान्य मानवीयजनों  में विश्वास पैदा कर दिया कि योग के लिए हिमालय की गुफाओं में जाने की जरूरत नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु अपने घर में किचन के बगल में बैठ कर भी योग कर सकते हो। फुटपाथ पर भी कर सकते हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैदान में भी कर सकते हो बगीचे में भी कर सकते हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिर के परिसर में भी कर सकते हो ये एक बहुत बड़ा बदलाव आया। आज इसका परिणाम है कि </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को जब विश्व अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के हर देश में योग का उत्सव मनाया जाता है। अधिकतम लोग उससे जुड़ें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा प्रयास हो। मुझे विश्व के जितने लोगों से मिलना होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेरा अनुभव है कि वे देश की बात करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास की बात करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन्वेस्टमेंट की चर्चा करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक परिदृश्य की चर्चा करेंगे। लेकिन साथ ही एक बात अवश्य करते हैं वह योग के संबंध में </span>1-2<span lang="hi" xml:lang="hi"> सवाल जरूर पूछते हैं। पतंजलि के प्रयास से यह जिज्ञासा पैदा हुई है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(226,12,109);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/262.jpg" alt="26"></img></span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(226,12,109);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि के प्रयास से दुनियाँ में प्रतिष्ठित होगा आयुर्वेद</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे आयुर्वेद की ताकत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर थोड़ा बहुत तो हमने ही उसको नुकसान पहुंचा दिया। क्योंकि आधुनिक विज्ञान को जो मेडिकल साइंस है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे लगा कि आपकी बात कोई शास्त्र आधारित नहीं है। वहीं आयुर्वेद वालों को स्वयं लगा कि दवाईंयों में दम नहीं है। तुम बड़े कि हम बड़े इसी लड़ाई में सारा समय बीतता गया। अच्छा होता कि आधुनिक से आधुनिक ज्ञान को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी इन परंपराओं के साथ जोड़ करके हमने आगे बढ़ाया होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शायद मानवता की बहुत बड़ी सेवा हुई होती। मुझे खुशी है कि पतंजलि योगपीठ के माध्यम से बाबा रामदेव जी ने जो अभियान चलाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आन्दोलन चलाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें आयुर्वेद के महिमामंडन में अपने आपको सीमित नहीं रखा अपितु दुनिया जिस भाषा में समझती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च के जिन आधारों को समझती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल साइंस में जिन प्रतिस्थापित व्यवस्थाओं के तहत समझती है बाबा रामदेव ने बीड़ा उठाया कि उसी भाषा में भारतीय आयुर्वेद को वो लेकर के आयेगें और दुनिया को प्रेरित करेगें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह एक अलग प्रकार से हिन्दुस्तान की सेवा कर रहे हैं। स्वामी जी हजारों साल से हमारे ऋषि-मुनियों ने तपस्या कर जो प्राप्त किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो दुनिया को बांटने के लिए निकले हैं। आज मैनें जो रिसर्च सेंटर देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह कोई भी आधुनिक रिसर्च सेंटर के  बिलकुल बराबरी में खड़ा हुआ है। मां गंगा के किनारे पर ये बहुत श्रेष्ठ काम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए मैं बाबा को बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। भारत में जब अटल जी की सरकार थी तब हमारे देश में एक हेल्थ पॉलिसी आई थी। इतने सालों बाद जब हमारी सरकार बनी तो फिर से हम देश के लिए एक हेल्थ पॉलिसी लेकर के आए हैं। हॉलिस्टिक हेल्थ केयर का व्यू लेकर के आये हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और एक बात कि अब दुनिया सिर्फ हेल्थी रहना चाहती है। बीमारी ना हो वहीं तक अटकना नहीं चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब लोगों को वेलनेस भी चाहिए और इसलिए उसके सॉल्यूशन भी होलिस्टिक देने पड़ेंगें। हमें प्रिवेटिंग हेल्थ केयर पर बल देना पड़ेगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(226,12,109);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">देश को लेना होगा गंदगी से मुक्ति का संकल्प</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रिवेटिंग हेल्थ केयर का उत्तम से उत्तम और सस्ते से सस्ता रास्ता है स्वच्छता। स्वच्छता में कौन क्या करता है वो बाद में जोड़े। सिर्फ सवा सौ करोड़ देशवासी तय करें कि मैं गंदगी नहीं करूगां। इसके अतिरिक्त कोई बड़ा संकल्प लेने की जरूरत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें जेल जाने की जरूरत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फांसी पर लटकने की जरूरत नहीं है। देश के लिए सीमा पर जाकर जवानों की तरह मरने गिरने की जरूरत नहीं है। बस छोटा सा काम कि मैं गंदगी नहीं करूगां। आप को कल्पना है कि एक डॉ. जितनी जिंदगी बचा लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे ज्यादा बच्चों की जिंदगी आप गंदगी न करके बचा सकते हैं। आप गरीब को दान-पुण्य देकर के जितना पुण्य कमाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे अधिक पुण्य गंदगी न करके प्राप्त कर लेते हैं। एक गरीब जब स्वस्थ रहता है तो आप जो दान रुपये में देते हैं उससे भी ज्यादा मूल्यवान वह हो जाता है। मुझे खुशी है कि देश की नई पीढ़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आने वाली पीढ़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छोटे-छोटे बालक हर घर में झगड़ा करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर परिवार के बुजुर्ग ने कोई एक छोटी सी चीज फेंक दी या कार में जा रहे हैं और पानी की बोटल फेंक दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो छोटा पोता </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल का कार रुकवाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कि ठहरो! मोदी दादा ने मना किया है ये बोटल वापिस ले आओ। ये माहौल बन रहा है देश में। छोटे छोटे बालक भी मेरे स्वच्छता आंदोलन के सिपाही बन गये हैं और इसलिए हम इस प्रिवेटिंग हेल्थ केयर को जितना बल देगें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम अपने देश के गरीबों की सबसे ज्यादा सेवा करेंगे। गंदगी कोई नहीं करता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गंदगी हम करते हैं और हम ही फिर गंदगी पर भाषण देते हैं। अगर एक बार हम देशवासी गंदगी न करने का फैसला करलें तो इस देश से बीमारी को निकालने में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तंदरुस्ती को लाने के लिए हमें कोई रूकावटें नहीं आयेंगी। हिमालय की जड़ी-बूटी व भगवान रामचन्द्र जी की घटनाओं से परिचित हनुमान जी जड़ी-बूटी के लिए क्या-क्या नहीं करते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो सारी बाते पढ़ीं और हम इसमें सहज हो गये थे। दुनिया के देश जिनको जड़ी-बूटी क्या होती है ये मालूम नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब उनको पता चला कि इसकी बड़ी कॉमर्शियल वेल्यू है तो दुनिया के अनेक देशों ने इसका पेटेंट करवा दिया। हल्दी का पेटेेंट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इमली का पेटेंट कोई और देश करवाता है। हमारी ये उदासीनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी शक्ति को भुला देने की आदतें इसने हमारा बहुत नुकसान किया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(226,12,109);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनियां को होलिस्टिक व वेलनेस की ओर ले जायेगा पतंजलि</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज विश्व में हर्बल मेडिसिन का एक बहुत बड़ा मार्केट खड़ा हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जितनी मात्रा में दुनिया में इस हर्बल मेडिसिन को पहुंचाने में भारत को जो ताकत दिखानी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह नहीं हुआ। अभी बहुत कुछ करना बाकी है। इस पतंजलि संस्थान के द्वारा जो रिसर्च और इनोवेशन हो रहें हैं और दुनिया के लोग होलिस्टिक और वेलनेस के लिए जो इंटरेस्टेड हैं उनको ये दवाईयां आने वाले दिनों में काम आयेंगी। हमारे देश में बहुत वर्षों पहले भारत सरकार ने आयुर्वेद का प्रचार कैसे हो उसके लिए हाथी कमीशन बिठाया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयशुकलाल हाथी रिपोर्ट के प्रारंभ में लिखा है कि हमारा आयुर्वेद इसलिये लोगों तक नहीं पहुंचता कि उसकी पद्धति आज के युग के अनुकूल नहीं है। वैद्य इतनी सारी ठेला भर जड़ी-बूटी देगें और फिर कहेंगे इसको उबालना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतने पानी में उबालना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर इतना रस रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक चम्मच में लेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर इसमें फलाना जोड़ना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ढिकना जोड़ना और फिर लेना। ऐसे में एक सामान्य व्यक्ति सोचेगा कि कौन इतना कूड़ा कचरा करेगा। चल यार मेडिसन लेले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दवाईं की गोली खाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी गाड़ी चल जायेगी। इसलिए हाथी कमीशन ने कहा था कि सबसे पहली आवश्यकता है आयुर्वेदिक दवाओं की पैकेजिंग। अगर उसका पैकेजिंग मॉर्डन दवाईयों की तरह कर देगें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लोग होलिस्टिक हेल्थ केयर की ओर मुड़ जायेंगे और आज हम देख लें कि वो उबालने वाली जड़ी-बूटियां हमें कही लेने जानी नहीं पड़ती है। हर चीज रेडीमेड मिलती है। मैं समझता हूँ कि आचार्य जी ने अपने आपको इसमें खपाया है और आज जिस किताब का लोकार्पण करने का मुझे अवसर मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुझे विश्वास है कि दुनिया का इस किताब पर ध्यान जायेगा। मेडिकल साइंस से जुड़े लोगों का उसपर ध्यान जायेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृतिप्रदत्त व्यवस्था कितनी सामर्थ्यवान है उस सामर्थ्य को यदि हम समझने का प्रयास करें तो जीवन कितना उज्जवल हो सकता है। अगर व्यक्ति को एक खिड़की खोल कर दे दें तो आगे बढ़ने के लिए बहुत बड़ा अवसर देेते हैं। मुझे विश्वास है कि बालकृष्ण जी की ये साधना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाबा रामदेव का मिशन मोड पर ये समर्पित काम और भारत की महान उज्ज्वल परंपरा को आधुनिक रूपरंग के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिकता के साथ आगे बढ़ाने का जो प्रयास है वो भारत के लिए विश्व में अपनी एक जगह बनाने का आधार बन सकता है। दुनिया का एक बहुत बड़ा वर्ग है जो योग से जुड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह आयुर्वेद से भी जुड़ना चाहता है। हम उस दिशा में प्रयास करेगें। मैं फिर एक बार कहूँगा कि आप सबके बीच आने का मुझे सौभाग्य मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेष रूप से मुझे सम्मानित किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं सर झुका करके बाबा को प्रणाम करता हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आप सबका अभिनंदन करता हूँ। आप सभी को मेरी तरफ  से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। </span></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">धन्यवाद</span></strong></h5>
<table style="border-collapse:collapse;width:100%;border-width:1px;background-color:#c2e0f4;border-color:#C2E0F4;" border="1"><colgroup><col style="width:99.8705%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td style="border-width:1px;border-color:rgb(194,224,244);">
<table style="border-collapse:collapse;width:100.134%;border-width:1px;background-color:#e03e2d;border-color:#E03E2D;" border="1"><colgroup><col style="width:99.866%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td style="border-width:1px;border-color:rgb(224,62,45);">
<h4 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(0,0,0);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च इनोवेशन से मिलेगी भारत को नई शक्ति: मोदी</span></strong></span></h4>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ह</span><span lang="hi" xml:lang="hi">म इस बात को भी न भूलें कि भारत दुनिया में इस ऊँचाई पर इसलिए था कि हजारों वर्षों पूर्व हमारे पूर्वजों ने लगातार इनोवेशन में अपनी जिंदगी खपाई थी। नई-नई खोज करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई चीजों को प्राप्त करना और मानव जाति के कल्याण के लिए उसे प्रस्तुत करना तथा समयानुकूल उसे ढालते रहना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके संकल्प में था। जबसे इनोवेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च की उपासीनता हमारे भीतर घर कर गई हम दुनिया के सामने प्रभाव पैदा करने में असमर्थ होने लगे। कई वर्षों के बाद जब आई टी रेगुलेशन आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हमारे देश के </span>18, 20, 22 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल के बच्चे माउस के साथ खेलते-खेलते दुनिया के समक्ष अचरज करने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब फिर से दुनिया का ध्यान हमारी तरफ  गया। आई.टी. में हमारे देश के </span>18, 20 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल के उम्र के नौजवानों ने विश्व को प्रभावित कर दिया। रिसर्च इनोवेशन की क्या ताकत होती है हमनें अपनी आंखों के सामने देखा है। आज पूरा विश्व होलिस्टिक हेल्थ केयर के विषय में बड़ा संवेदनशील है लेकिन रास्ता नहीं मिल रहा है पर भारत के ऋषि-मुनियों की महान परम्परा योग पर विश्व का आकर्षण पैदा हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह इनोवेशन का ही परिणाम है।</span></strong></h5>
</td>
</tr>
</tbody>
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                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>पतंजलि रिसर्च</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>जून</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2017 21:44:23 +0530</pubDate>
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