<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/tag/4922/%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A5%80%E2%80%99-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%98%E0%A5%8B%E0%A4%B7-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>योग संदेश RSS Feed Generator</generator>
                <title>योग की सदी’ का उद्घोष करती पतंजलि की तीन दशकीय योगयात्रा - योग संदेश</title>
                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/tag/4922/rss</link>
                <description>योग की सदी’ का उद्घोष करती पतंजलि की तीन दशकीय योगयात्रा RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>'21वीं सदी, योग की सदी’ का उद्घोष करती पतंजलि की तीन दशकीय योगयात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">योग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति एवं <span lang="hi" xml:lang="hi">सभ्यता</span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">  का मूल तत्व है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व योगी होना हमारे पूर्वजों ने जीवन की सबसे बड़ी <span lang="hi" xml:lang="hi">उपलब्धि</span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">  माना है। योग विद्या ही अध्यात्म विद्या अथवा परा</span> - <span lang="hi" xml:lang="hi">अपरा विद्याओं का मूल स्रोत ह</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ै। योग को केन्द्र में रखकर योगी संसार में वेदानुकूल कर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचरण व व्यवहार करता हुआ जब निष्काम भाव से निष्कलंक जीवन जीता है तो समाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र व विश्व के लिए वह सर्वश्रेष्ठ आदर्श हो जाता है। ऐसे में किसी कारणवश यदि हमें शास्त्रों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> को पढ़ने का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझने का सौभाग्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2461/21-vin-sadi-yog-ki-sadi-ka-udghosh-karti-patanjali-ki-teen-dashkiya-yogyatara"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-10/162.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">योग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति एवं <span lang="hi" xml:lang="hi">सभ्यता</span></span><span lang="hi" xml:lang="hi"> का मूल तत्व है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व योगी होना हमारे पूर्वजों ने जीवन की सबसे बड़ी <span lang="hi" xml:lang="hi">उपलब्धि</span></span><span lang="hi" xml:lang="hi"> माना है। योग विद्या ही अध्यात्म विद्या अथवा परा</span> - <span lang="hi" xml:lang="hi">अपरा विद्याओं का मूल स्रोत ह</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ै। योग को केन्द्र में रखकर योगी संसार में वेदानुकूल कर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचरण व व्यवहार करता हुआ जब निष्काम भाव से निष्कलंक जीवन जीता है तो समाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र व विश्व के लिए वह सर्वश्रेष्ठ आदर्श हो जाता है। ऐसे में किसी कारणवश यदि हमें शास्त्रों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> को पढ़ने का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझने का सौभाग्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय ना मिले तो हमारे हित में पुरुषार्थरत यही दिव्यकर्म योगी ही हमारे पथ प्रदर्शक या आदर्श होते हैं। तैत्तिरीयोपनिषद</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में आचार्य अपने शिष्य से कहते हैं कि </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि संसार में तुझे कर्म या आचरण के विषय में कोई सन्देह उपस्थित हो जायें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वहाँ जो विचारशील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्काम कर्म में नियुक्त सरलमति एवं कल्याणभिलाषी महापुरुष हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे जैसा व्यवहार करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसा ही तू </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> करना। कल्याणाभिलाषी पुरुष का आशय ऐसे पुरुषार्थी से है जिनका प्रतिपल लोक के लिए समर्पित हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र-विश्व उत्थान में अपना सर्वस्व तिल-तिल कर होम कर रहा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके योगनिष्ठ संकल्पों से विराटता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुरुषार्थ में दिव्य सात्विकता व जीवन संबंधों में सरलता हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञान-पुरुषार्थ से जन-जन को जोड़ने में संलग्र हो।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व</span><span lang="hi" xml:lang="hi">र्तमान में योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का जीवन इस दृष्टि से एक आदर्श जीवन कह सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनसे देश-विदेश के करोड़ों व्यक्ति निरन्तर एक उच्च चेतना युक्त दिव्य जीवन जीने की प्रेरणा पाते है, और उनके संकल्प से देशभर में संचालित हो रही नित्य एक लाख से अधिक योग कक्षायें जन-जन को आरोग्य दे रही हैं। वहीं उनका भारतीय ऋषि प्रेरित स्वदेशी संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी संकल्प की दिशा में प्रेरित पुरुषार्थ राष्ट्र निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिस तरह से पतंजलि योगपीठ ने योग आंदोलन को सफल बनाने के लिए अपने हजारों योगाचार्यों को जिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तहसील व गांव-गांव स्थापित किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस दृष्टि से इन योगजन्य पुरुषार्थों का आंकलन करें तो संपूर्ण इक्कीसवीं सदी योग की सदी बनकर उभर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी धमक अगले अनेक शदियों तक देखने को मिले तो आश्चर्य नहीं। भिन्न</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">भिन्न पहलुओं से यदि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज के मार्</span><span lang="hi" xml:lang="hi">गदर्शन में संचालित पतंजलि की की सेवाओं का जिक्र  करें तो योग को केन्द्र में रखते हुए जो विराट निर्माण कार्य उन्होंने कर दिखाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अपने आप में अभूतपूर्व एवं अद्वितीय है। पूज्य स्वामीजी महाराज की राष्ट्र को अर्पित सेवाओं से जहां देश में आरोग्य शक्ति का जागरण हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं योग-आयुर्वेद के माध्यम से राष्ट्र की बुनियाद मजबूत हो रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं विश्व निर्माण में भारत की भूमिका भी स्पष्ट होती चल रही है। जो राष्ट्र के लिए गौरव से कम नहीं है। यहां के गांव-गांव से अब योगनिष्ठ व्यक्तित्व निकल कर वैश्विक जगत को झकझोर रहे हैं।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/372.jpg" alt="37"></img></span></p>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योग व योगकक्षाएं</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य योगऋषि कहते है कि योगाभ्यास हर अभ्यासी का करता है चरित्र निर्माण और चरित्र निर्माण से होता है राष्ट्र निर्माण। जिस प्रकार अन्न-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">जलादि से हमारा यह छोटा सा अस्तित्व कब बड़ा हो गया पता ही नहीं चलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही योग कक्षाओं के माध्यम से योग करते</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">करते करोड़ों स</span><span lang="hi" xml:lang="hi">फल होते व्यक्ति कब अज्ञान-अविद्या से मुक्त व उच्च चेतना से युक्त होकर सात्विक व्यक्तित्व वाले योगी बनते जा रहे हैं पता भी न चला। इससे राष्ट्र की चेतना </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को </span>शक्ति मिलती रहीं है। योगाभ्यास से जुड़कर लाखों लोगों ने मांसाहार को छोड़कर शाकाहार अपनाया<span style="font-size:1.25rem;">, </span><span lang="hi" style="font-size:1.25rem;" xml:lang="hi">लाखों लोग नशामुक्त हुए</span><span style="font-size:1.25rem;">, </span><span lang="hi" style="font-size:1.25rem;" xml:lang="hi">असंख्यों को स्वस्थ परिवार निरोग जीवन का मार्ग प्रशस्त हुए। यही नियमितता बनी रही तो शीघ्र ही इस योग को केन्द्र में रखकर हम सब परा-</span><span lang="hi" style="font-size:1.25rem;" xml:lang="hi">अपरा विद्याओं का ज्ञान भी आत्मसात कर सकेंगे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सन् </span>1995<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अब तक पतंजलि के योग आंदोलन के माध्यम से  देश में वर्गगत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जातिगत व धर्मगत दीवारें ढही हैं। क्षेत्रवाद पददलित हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही करोड़ों व्यक्ति रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नशा व व्यसन मुक्त होकर मांसाहारी से शाकाहारी होकर आज समाज निर्माण में लगे हैं। लाखों लोगों के लिए शक्ति केन्द्र बनी ये योग कक्षाएं। समाज व राष्ट्रनिर्माण हेतु यदि हम विचार करें तो एक-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक गांव में चलने वाली ये हमारी योग कक्षाएं ही वो निर्माण की आधारभूत नींव साबित होंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन पर खड़े होने वाले भवन में सर्वप्रथम व्यक्ति का निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्ति निर्माण से ग्राम निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्राम निर्माण से समाज निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज निर्माण से राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण से विश्वनिर्माण व युग निर्माण का वह विराट् एवं दुरूह कार्य संपन्न</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> हो पायेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो युग के लिए आवश्यक है। इस भागवत् यज्ञ को पूर्णाहुति तक पहुँचाने के लिए हर गांव में विचारशील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुरुषार्थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्काम कर्मयोगी कार्यकर्ताओं की टीम अनवरत लगी है। मानव निर्माण के इस पुण्य अभियान में पूज्य स्वामी जी महाराज व श्रद्धेय आचार्यश्री महाराज इस धरती पर भगवान का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य का व दिव्यता का साम्राज्य स्थापित करने प्रतिबद्ध हैं। करोड़ों</span><span lang="hi" xml:lang="hi">-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ों शाश्वत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृतनिष्ठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरित्रनिष्ठ योगी प्रतिनिधियों का निर्माण करना पतंजलि का लक्ष्य है। विश्लेषक जानते हैं कि किसी भी परिवर्तन के लिए मात्र राजनैतिक व्यवस्था बदलना पर्याप्त नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवर्तन के लिए आवश्यक है व्यक्ति के अंत:करण में बदलाव। व्यक्ति जैसेजैसे श्रेष्ठता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पवित्रता से जुड़ता जायेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज-राष्ट्र व विश्व के स्थाई निर्माण की स्पष्टता बढ़ती जायेगी। सन 1995 में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना से लेकर अब तक विराट विस्तार में योग कक्षायें ही मूल धुरी रही हैं। जैसे गांधी जी ने चरखा को केन्द्र बनाकर देश में स्वतंत्रता आंदोलन की हूक पैदा की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठीक वैसे ही पतंजलि का योगाभ्यास अभियान काम कर रहा है। इसी केन्द्र में गुथते जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी  चिकित्सा व स्वास्थ्य से लेकर राष्ट्रीय समृद्धि के ऋषि प्रणीत सूत्र। </span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अहमदाबाद में राष्ट्र को समर्पित हुए तीन लाख राष्ट्रयोगी</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत गांवों का देश है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांव भारत की रीढ़ हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अत: गांव-गांव योगाभ्यास चलेगा तो देश की रीढ़ मजबूत व स्वस्थ होगी। तृतीय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर पतंजलि की ओर से विश्व को यह बड़ा उपहार अहमदाबाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात के योगमहोत्सव के माध्यम से तीन लाख भाई-बहिनों द्वारा एक साथ योगाभ्यास कर विश्वरिकार्ड बनाने के रूप में मिला। इसके लिए सम्पूर्ण देशभर में पतंजलि की ओर से महीनों से तैयारियां चलीं। एक गांव में 100 जवान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">100 किसान व 100 महिलाएं संगठित होकर योग करने व अन्य द्वारा उन्हें देखकर वैसा ही आचरण करने का महीनों से संकल्प कराया गया। व्यापकता के साथ योग दिवस पर वही संकल्प अभियान बनकर अहमदाबाद में दिखा।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/381.jpg" alt="38"></img></span></p>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भावी सम्भावनायें</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय योगदिवस के अभियान के साथ ही आशा है कि देश के प्रत्येक गांव में एक-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">दो वर्ष के बाद एक भी व्यक्ति न रोगी होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न नशा करेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा अभियान चलाया जा रहा है। इस संदर्भ में सोच है कि यदि एक जिले में 500 योगाभ्यासी गांव हैं तो डेढ़ लाख और यदि 1000 गांव हैं तो 3 लाख योगी लोगों का संगठन खड़ा हो सकता है और यदि उनके साथ 5-10</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> व्यक्ति भी उनके मित्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिश्तेदार आदि जुड़े तो यह </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संख्या</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', sans-serif;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रत्येक जिले में 10</span><span lang="hi" xml:lang="hi">-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">15 लाख से लेकर 20-30 लाख तक पहुंच सकती है। इसी संकल्पना से पतंजलि पुरुषर्</span><span lang="hi" xml:lang="hi">थरत है।  इससे भी बढ़कर पतंजलि के इस आंदोलन के माध्यम से राष्ट्र को भारी संख्या में नि:शुल्क समर्पित सेवाभावी व्यक्तित्व मिल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो 2 घण्टे नित्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सप्ताह में 2 दिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष में 2 माह व जीवन में 2 वर्ष अथवा पूरा जीवन तक झोंकने हेतु संकल्पित हो रहे हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तृतीय योगदिवस पर पतंजलि की ओर से हर व्यक्ति  को ऋषियों का यह संदेश है कि क्रियाशील बनो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग महिमा का प्रचार करो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐश्वर्य को बढ़ाओ विश्व को श्रेष्ठ बनाओ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वस्थ-निरोग जीवन जीयो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र व विश्व को समृद्ध बनाओ। </span></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुर: कृण्वन्तो</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वमार्यम्। अपघ्नन्तो अराव्ण:।। ऋग् ९/६ २/५</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात् देश पर राष्ट्रभक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सदाचारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रजाहितैषी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायप्रिय लोगों का शासन हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब तरफ रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अज्ञान व व्यसन मुक्त</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">उच्च चेतना युक्तराष्ट्र हितैषी नागरिकों का निर्माण हो। ऐसा पूज्य योगऋषि स्वामी जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का संकल्प है व इसी को पूरा करने के लिए अपना सुख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आराम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रसिद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मान</span><span lang="hi" xml:lang="hi">-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सम्मान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय व शक्ति सब कुछ दांव पर लगाकर संघर्ष कर रहे हैं। नित्य योगाभ्यास से आप भी अपने सपनों का भारत अपने ही हाथों से बनाने का सौभाग्य पा सकते हैं। इस निर्माण में स्वयं लगें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसका निर्माण भी हमसे अतिरिक्त और कौन करेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हम योगनिष्ठ बन इस दिशा में बढ़ेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी साकार होगा विश्व निर्माण का स्वप्र और इक्कीसवीं सदी बनेगी योग सदी।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/392.jpg" alt="39"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व रिकार्ड के नाम रहे सभी अंतर्राष्ट्रीय योगदिवस भिलाई योगशिविर के नौ विश्व रिकार्ड :</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में छत्तीसगढ़ प्रांत के भिलाई नगर में पतंजलि योग विज्ञान शिविर आयोजित हुआ। इसमें लगभग एक लाख लोगों ने एक साथ सामूहिक रूप से एक स्थान पर योग व प्राणायाम से संबधित 9 विश्व रिकार्ड बनाये थे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<ul style="list-style-type:square;">
<li>
<h5 style="text-align:justify;">शिविर में 1 लाख से अधिक लोगों ने एक साथ 1 मिनट में 10 पुशअप लगाकर सामूहिक 10 लाख पुशअप का अनूठा पांचवा विश्व रिकार्ड बनाया ।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>इसी क्रम में पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज के शिष्य (सीकर, राजस्थान) के भाई जयपाल ने 141 मिनट तक शीर्षासन कर नया विश्व कीर्तिमान बनाया था। क्योंकि पूर्व में पतंजलि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी श्री व्योम झा द्वारा 90 मिनट तक शीर्षासन का रिकार्ड तोड़ा जा चुका था। </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5> पूज्य स्वामी जी के ही एक अन्य शिष्य भाई रोहतास ने फास्टेस्ट (सबसे तेज) पुशअप का सातवां विश्व रिकार्ड बनाया। उन्होंने 1000 पुशअप मात्र 19 मिनट 20 सेकेण्ड में लगाकर कनाडा के विलियम का 27 मिनट 40 सेकेण्ड में 1000 पुशअप का रिकार्ड तोड़ दिया था।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>इस शिविर में आठवां व नवां विश्व रिकार्ड 50,000 से अधिक लोगों द्वारा सर्वांगासन एवं हलासन का एक साथ सामूहिक अभ्यास कर स्थापित किया गया।</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>योगशिविर में ही दिव्यांग गौकरण (जो हाथों से अपंग होने के साथ-साथ मूक एवं बधिर है) ने पैरों से अनुलोम-विलोम किया और फाईन आर्टिस्ट की प्रतिभा का परिचय देकर पैरों से स्वामी जी की पेटिंग बनाकर लोकार्पित की।</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>पतंजलि के गोल्डेन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड</strong></span></h5>
<ul style="list-style-type:square;text-align:justify;">
<li>
<h5>पतंजलि विश्वविद्यालय के रवि व्योम शंकर झा द्वारा 89.08 मिनट तक शीर्षासन का विश्व रिकार्ड बनाया।</h5>
</li>
<li>
<h5>7 घंटे में लगातार 3100 बार सूर्य नमस्कार करके सर्वाधिक संख्या में लगातार सूर्य नमस्कार करने का वल्र्ड रिकार्ड पतंजलि योग समिति के ब्रह्मचारी गोविन्द जी द्वारा बना।</h5>
</li>
<li>
<h5>47 किग्रा. के साथ एक मिनट में 41 बार पुशअप लगाकर नया गोल्डन बुक आफ वल्र्ड रिकॉर्ड स्थापित किया जाना।</h5>
</li>
<li>
<h5>प्रथम बार 25 किग्रा. वजन के साथ एक दिन में 5125 पुशअप का नया विश्व रिकार्ड, पतंजलि के रोहताश चौधरी द्वारा बनाया गया।</h5>
</li>
<li>
<h5>सर्वाधिक लोगों द्वारा एक साथ योग का विश्व रिकार्ड, लगभग 1,00,000 (1 लाख) लोगों द्वारा एक साथ योगाभ्यास।</h5>
</li>
<li>
<h5>लगातार सामूहिक रूप से 1250 लोगों द्वारा शीर्षासन करने का गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड।</h5>
</li>
</ul>
<h5> </h5>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>पतंजलि के गिनीज बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड</strong></span></h5>
<ul>
<li>
<h5 style="text-align:justify;">408 लोगों ने पूज्य स्वामी रामदेव जी के साथ मिलकर एक साथ एक स्थान पर शीर्षासन किया तथा विश्व कीर्तिमान स्थापित किया, जो गिनिज वल्र्ड रिकार्ड बना।</h5>
</li>
<li>
<h5 style="text-align:justify;">रोहताश चौधरी के द्वारा एक मिनट में 36.60 किग्रा. वजन के साथ 51 पुशअप का गिनिज वल्र्ड रिकार्ड स्थापित किया गया।</h5>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्था समाचार</category>
                                            <category>योग एवं आयुर्वेद</category>
                                            <category>2017</category>
                                            <category>जुलाई</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2461/21-vin-sadi-yog-ki-sadi-ka-udghosh-karti-patanjali-ki-teen-dashkiya-yogyatara</link>
                <guid>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2461/21-vin-sadi-yog-ki-sadi-ka-udghosh-karti-patanjali-ki-teen-dashkiya-yogyatara</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Jul 2017 21:44:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-10/162.jpg"                         length="55989"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        