<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/tag/5250/%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BF" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>योग संदेश RSS Feed Generator</generator>
                <title>सनातन की वर्तमान स्वरूप की स्थिति - योग संदेश</title>
                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/tag/5250/rss</link>
                <description>सनातन की वर्तमान स्वरूप की स्थिति RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सनातन वैभव</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:right;line-height:normal;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:Mangal, serif;color:#FF0000;" xml:lang="hi">डॉ. चंद्र बहादुर थापा</span><span lang="en-in" style="font-size:10pt;font-family:Mangal, serif;color:#FF0000;" xml:lang="en-in">,<span>  </span></span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:right;line-height:normal;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:Mangal, serif;color:#FF0000;" xml:lang="hi">वित्त एवं विधि सलाहकार- भारतीय शिक्षा बोर्ड </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;text-align:right;line-height:normal;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:Mangal, serif;color:#FF0000;" xml:lang="hi">एवं विधि परामर्शदाता पतंजलि समूह</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/87/sanatan-vaibhav"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-01/46-1.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सनातन की वर्तमान स्वरूप की स्थिति</strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="en-in" xml:lang="en-in">(क) आदिवासी देव-दनुज, सुर-असुर, आर्य-अनार्य, देवता-राक्षस, आस्तिक-नास्तिक: ईसाई और इस्लाम के प्रादुर्भाव तक  </span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">वर्तमान पृथ्वी के 197वें महाप्रलय कालखंड के प्रारंभिक, कलि काल के 4,32,000 वर्षों में से आधुनिक विज्ञान के हिसाब से केवल 5,124 साल के अंतराल में वर्तमान कालखंड के 4,200 वर्ष पहले 200 वर्ष के सूखा रूपी प्रलय से विनष्ट सृष्टी में, अपने अपने कर्मों के बीज से उगे हुए और 2,022 वर्ष पूर्व क्रिस्चियन प्रादुर्भाव तक, सनातन के तना से वैदिक पद्धति के विभिन्न विधाओं पर समर्थन और विरोध से निकले मानवों के मुख्य शाखाओं के समूहों के ईश्वर प्रणिधान पद्धतियां, यथा प्राचीन जम्बू द्वीप आर्यावर्त अर्थात् वर्तमान युरेसिआ-भारतवर्ष-पूर्वी एशिया के सनातन हिन्दू, चार्वाक, जैन और बौद्ध  तथा इनसे निकले पूर्वी एशिया के शिंटो, ताओ, कन्फूसियस, इत्यादि; पश्चिम के मूर्ति-देव पूजक मिश्र, अवेस्ता, यहूदी, जरथु्रस्ती (पारसी), यज़ीदी, पेगन, मुशरिक, सवाइन, नॉर्डिक, ग्रीक, रोमन, रशियन (सूर्य पूजक); अफ्रीका के सनातन पद्धति के वूडू सहित ईसाई और मुस्लिमों द्वारा नष्ट किये सैकड़ों प्राचीन आदिम पूजा पद्धति; उत्तर और दक्षिण अमेरिका के सनातन सदृश सभ्यताएं जिसको कोलम्बस के पहुँचने के बाद ईसाई बनाकर  विनष्ट कर दिया, यथा- केरल, ओल्मेक, माया, जापोटेक, नास्का, तिवनकु, वारी, इंका, मिस्सीसिपीयन, एज्टेक, इत्यादि; ऑस्ट्रेलिया के सनातन आदिवासी, सभी अपने-अपने स्थान के आदिवासी के रूप में रह गए और अपने-अपने स्थान के प्रलय पश्चात जीवित बचे पूर्वजों के श्रुति-स्मृति द्वारा संचित और हस्तांतरित संस्कृति, पूजा पद्धति को स्थान, काल परिस्थिति अनुरूप परन्तु मूलत: वेदों के मूल्य मान्यता आधारित (चाहे दैवी अर्थात् समर्थक चाहे आसुरी अर्थात् विरोधी हो) सनातन पद्धति को मानते आये। अंतत: दैवी सनातन ने ही अपने सर्व कल्याण, सर्वजन हिताय भाव के कारण, विजय के साथ निरंतरता पाया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">इसीलिए 2022 वर्ष पूर्व तक सनातन पद्धति के दो भाग थे, वैदिक मानने वाले देव और न मानने वाले असुर, परन्तु सभी सनातनी थे और मुख्यत: मूर्ति या प्रतिक या प्रकृति पूजक थे। आपसी संघर्ष चलता रहता था। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>(ख) ईसाई और इस्लाम के प्रादुर्भाव</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">विश्वभर के आदिवासियों के सनातन पद्धति- मूर्ति या प्रतिक या प्रकृति पूजन के साथ पंच भौतिक तत्व के प्रति आभार प्रकट करने की वैदिक व्यवस्था- में आये हुए मानवी व्यवहार विकृति पर आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, भू-जैविक, इत्यादि परिवर्तन के साथ रहन-सहन में व्यक्तिगत संपत्ति प्राप्त करने, तथा दूसरों पर शासन की, दोहन की, दमन की, विद्वेष इत्यादि के अनेकों तौर तरीके से विभिन्न पीडि़त वर्गों में विद्रोह की भावना पनपने लगी। आपसी संघर्ष इतने विकट हुए कि मानव ने मानव को मारने तथा प्रताडि़त करने की घटनाएँ तो सामान्य सी लगने लगे। घृणा, विद्वेष, आत्मश्लाघा इतना तक की एक समूह दूसरे समूह के मानव को न केवल मारने अपितु उनके मांस को खाने, दास बनाने, लूट-खसोट, कू्ररता के जघन्य घटनाओं से मानव सभ्यता के केंद्र माने जाने वाले स्थान, मिश्र, रोम, इजराइल, फारस, इत्यादि भी अत्यंत दारुण स्थिति में पहुंचे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">इससे उनके उद्धार के लिए परमात्मा अर्थात् ईश्वरीय सत्ता के दूत के रूप में अपने को प्रतिपादित बताकर, बेतलेहेम (Bethlehem), यहूदिया (Judea), इजराइल में जन्मे जीसस येसु ख्रीस्त (ईसा मसीह) द्वारा आज से 2022 वर्ष पहले प्रतिपादित एक किताबी (बाइबिल) ईसाई,  तथा लगभग 570 ई (आम-अल-फ़ील (हाथी का वर्ष) में अरब के शहर मक्का में पैदा हुए मुहम्मद द्वारा आज से 1444 वर्ष पहले प्रतिपादित एक किताबी (कुरान ) इस्लाम, एकेश्वरवादी विचारधारा का जन्म हुआ। ईसाई और इस्लाम के नेतृत्व ने भूमध्य सागर के आसपास के साथ अरब क्षेत्र के समाज में सुधार के नाम पर अपनी विचारधारा के विस्तार के लिए प्रारंभ में गिरोह बनाकर और बाद में सेना खड़ी कर, योजनाबद्ध तरीके से अपने-अपने नेतृत्व के विरोधियों को विनष्ट करने के बाद अन्य कबीलों,  बस्तियों, समूहों, राज्यों, आदि को वीभत्स तरीके से लूट-खसोट, बलात्कार जैसे जघन्य अकल्पनीय विनाशकारी तरीकों से दमन करते हुए फैलते गए। विजित प्रदेश उपनिवेश बनाये गए। ये दोनों विचारधारा के नेतृत्व ने विश्वभर के सारे सनातनी आदिवासी पद्धति को आक्रमण, विध्वंस और अत्याचार से अफ्रीका, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा यूरोप में तो लगभग समाप्त ही कर दिया, भारतीय उपमहाद्वीप में भी सनातन को मिटाने के पूरे प्रयत्न किए गए। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>(ग) साम्यवादी घोषणा-पत्र आधारित सर्वहारा क्रांति (Proletarian revolution)</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">उन्नीसवीं सदी के मध्य में आते-आते, कार्ल माक्र्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने तैयार किया गया, 21 फऱवरी सन् 1848 को पहली बार जर्मन भाषा में प्रकाशित, साम्यवादी घोषणा-पत्र आधारित सर्वहारा क्रांति (proletarian revolution) तथा समाजवाद द्वारा विश्व में राज्यविहीन सर्वहारा समाज की परिकल्पना की मूर्त रूप, फ्रांस और प्रशा (जर्मनी की गठबंधन) के बीच युद्ध (1871) में फ्रांस के पराजय के कारण, पेरिस में प्रथम साम्यवादी शासन (पेरिस कम्यून) स्थापित हुआ। 1917 की रूसी क्रान्ति के साथ शुरू हो कर दिसम्बर 1922 में बोल्शेविकों की पूर्ण जीत के बाद संवैधानिक रूप से, 15 स्वशासित गणतंत्रों का संघ, "सोवियत संघ" (USSR), दुनियां का सबसे बड़ा देश बना, जो 2,24,02,200 वर्ग किलोमीटर (86,49,500 वर्ग मील) में फैला था और ग्यारह समय क्षेत्रों में, पश्चिम में पूर्वी यूरोप के भाग से लेकर एशिया के पश्चिमी सिमाना से पूर्व में प्रशांत महासागर तक छू लेता था, अर्थात् ठन्डे के मौसम में पूर्वी छोर से अमेरिका के अलास्का होते हुए, जमे हुए बर्फ के ऊपर से पैदल मार्ग से उत्तरी कनाडा और अमेरिका जा सकते थे, शायद सनातनी मानव पूर्वजों ने आदिमानव काल में ऐसा ही किया था। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">बीसवीं सदी के मध्य में आते आते, माओ के दो प्रसिद्द सूत्र -(1) राजनैतिक सत्ता बन्दूक की नली से निकलती है, (2) राजनीति रक्तपात रहित युद्ध है और युद्ध रक्तपात युक्त राजनीति, आधारित विचारधारा की, चीनी साम्यवादी दल की, स्थापना 1921 में हुई थी। 1946 से 1949 तक गृहयुद्ध के बाद, चीन में 1 अक्टुबर, 1949 से माओ के नेतृत्व में साम्यवादी शासन की स्थापना के साथ चीन का रूपांतरण तो हुआ ही साथ ही पूरा विश्व भी साम्यवाद से प्रभावित हुआ। सोवियत रूस और चीन के शासन सत्ता ने विश्वभर में सर्वहारा वर्ग के नाम पर इस्लाम और ईसाई से मिलकर सनातन को अंधविश्वासी सिद्ध करने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिसको 1947 में गुलामी से उभरे भारत के स्वनाम धन्य नेहरू और उनके पार्टी ने 2014 तक खूब मल-जल देकर पोषित करते रहे।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">इस प्रकार ईसाई, इस्लाम तथा कम्युनिस्ट विचारधारा ने शासन सत्ता के अथवा धन-बल से अथवा डर-त्रास, प्रलोभन आदि अनेकों कथ्य-अकथ्य तरीकों से विश्वभर में बीसवीं सदी के अंत तक, सनातन हिन्दू के लिए नेपाल और बौद्ध के लिए भूटान को छोडक़र, सनातन के रिती-थिति, प्रतीक, वेशभूषा, साहित्य, शास्त्र यहाँ तक की इतिहास तक मिटाने का पूर्ण जोर लगाए और लगाए जा रहे हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सनातन के पुनर्जागरण</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">भारत का नाम हिन्दुस्तान होकर भी सनातन के लिए विभिन्न कारणों से कुछ नहीं कर पा रहा था। 2014 में शासन में पार्टी परिवर्तन के साथ यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश-विदेश यत्र-तत्र-सर्वत्र विश्वभर सनातन की आदर दिखाई दे रहा है। सनातन के मूलभूत यथार्थता के कारण इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक पर पहुँचते-पहुँचतेे फिर से रूस, ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, इंडोनेशिया, केन्या, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, सहित विश्व के अधिकांश देशों में सनातन के प्रति वापसी दिखाई दे रही है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-01/48-1.jpg" alt="48-1"></img></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">भारत में सिख पंथ, आर्य समाज, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और इसके विश्व हिन्दू परिषद् सहित अन्य अनुसांगिक संगठन, रामकृष्ण मिशन, हरे राम हरे कृष्ण (ढ्ढस््यष्टह्रहृ) आंदोलन, आदि के साथ गुरुकुल प्रशिक्षित युवाद्वय परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज और आयुर्वेद शिरोमणि परम पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के योग और आयुर्वेद के द्वारा जनजागरण अभियान, और विभिन्न पारम्परिक संप्रदाय के अखाड़े, मठ, मंदिर, बौद्ध गुंबायें, जैन मंदिरों आदि के अथक प्रयास और संघर्ष तथा भारत के बाहर, भारत के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अंतर्राष्ट्रीय अनुसांगिक संगठन हिन्दू, स्वयंसेवक संघ के 156 देशों में 3289 से अधिक शाखायें, हरे राम हरे कृष्ण (ढ्ढस््यष्टह्रहृ) के 77 देशों में 445 केंद्र और मंदिर, रामकृष्ण मिशन के 23 देशों में 56 केंद्र, स्वामी नारायण के 19 देशों में 55 केंद्र और मंदिर, नेपाल के विभिन्न संस्थाएं तथा गुठी, मंदिर आदि के साथ पतंजलि योगपीठ के विभिन्न देशों में संचालित योग तथा आरोग्य केंद्रों के माध्यम से सनातन ने फिर से करवट लिया है - नए स्वरूप और नए स्फूर्ति के साथ। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">यथा, ‘भवा नो अग्ने सुमना उपेतौ सखेव सख्ये पितरेव साधु:। पुरुद्रुहो हि क्षितयो जनानां प्रति प्रतीचीर्दहतादराती:।। (ऋग्वेवेद-3-18-1)  अर्थात, हे (अग्ने) कृपारूप विद्वान् पुरुष! आप (उपेतौ) प्राप्ति में (पितरेव) जनकों के सदृश (सख्ये) मित्र कर्म के लिये (सखेव) मित्र के तुल्य (न:) हम लोगों के लिये (सुमना:) उत्तम मनयुक्त (भव) होइये और (साधु:) उत्तम उपदेश से कल्याणकारी होकर (जनानाम्) मनुष्यों के बीच में जो (क्षितय:) मनुष्य, (पुरुद्रुह:) बहुत लोगों से द्वेषकर्ता होवें उन (प्रतीची:) प्रतिकूल वर्तमान (अराती:) शत्रुओं  को (प्रति) (दहतात्) भस्म करिये ।।1।। अर्थात्, हे मनुष्यों आप लोगों को चाहिये कि जो विद्वान् लोग, मनुष्य आदि प्राणियों में पिता और मित्र के तुल्य वत्र्तावकारी हैं उनका सत्कार और जो द्वेषकारी हैं उनका निरादर (उपेक्षा अथवा विनष्ट) करके धर्म वृद्धि करें और इस कालखंड में ईसाई, ईस्लाम, कॉम्युनिस्ट सहित जो भी वैदिक सनातन विरोधी हैं, उनसे सामथ्र्यवान होकर मुकाबला करते हुए, परमात्मा के कृपा प्राप्ति हेतु उनको भी प्रेरित करते हुए ‘सत्यम शिवम सुंदरम</span>’ <span lang="en-in" xml:lang="en-in">को मूर्त रूप से वापस लायें, पूर्वजों की थाती की सुगंध ‘साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय, सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय</span>’ <span lang="en-in" xml:lang="en-in">विश्व शांति और समृद्धि के लिए, विश्व में सनातन फैलाएं।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>दिसम्बर</category>
                                            <category>सनातन वैभव</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/87/sanatan-vaibhav</link>
                <guid>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/87/sanatan-vaibhav</guid>
                <pubDate>Thu, 01 Dec 2022 14:42:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-01/46-1.jpg"                         length="172090"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        