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                <title>आयुर्वेद व कृषि क्षेत्र में पतंजलि की भूमिका व भागीदारी - योग संदेश</title>
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                <title>योग, आयुर्वेद व कृषि क्षेत्र में पतंजलि की भूमिका व भागीदारी</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आचार्य </span></strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बालकृष्ण</span></strong></p>]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2708/yog--ayurved--v-krishi-kshetra-me-patanjali-ki-bhumika-va-bhagidari"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-12/42.jpg" alt=""></a><br /><table style="border-collapse:collapse;width:100%;border-width:1px;background-color:#BA372A;border-color:#BA372A;" border="1"><colgroup><col style="width:99.8705%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td style="border-width:1px;border-color:rgb(186,55,42);">
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पहली बार वर्ष </span>2003<span lang="hi" xml:lang="hi"> में  योग-आयुर्वेद के परिणामों को लेकर हमने हरिद्वार में बहुत बड़ा योग शिविर प्रारंभ किया। जिस समय योग शिविर चल रहा था उस समय पीजीआई चंडीगढ़ की डॉक्टरों की पूरी टीम से हम संपर्क में थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका नेतृत्व डॉ. गुप्ता जी करते थे। उन्होंने वह सारे पूर्व और पश्चात के परिणामों को मापा और परिणामों को देखकर वह स्वयं विस्मित और अचंभित थे। उन्होंने कहा कि हमने कभी सोचा नहीं था कि योग से इस प्रकार के परिणाम प्राप्त होंगे।</span></strong></span></h5>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  हम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> आज आयुर्वेद को लेकर एडवांस टेक्नोलॉजी की बात करते हैं तो बहुत यह बात कम अटपटी सी लगती है पर एक समय था जब यह सब बातें करना भी एक अजूबा था। लगभग २००२-२००३ में परम श्रद्धेय स्वामी जी के नेतृत्व में पतंजलि ने जब योग की बात कही तो लोगों ने कहा कि योग से क्या होता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि आपने देखा होगा कि आज भी टीवी पर बहुत सारे लोग आते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले से पात्र तय रखते हैं और उनसे तयशुदा प्रतिक्रियाएं ली जाती हैं। वह परिणाम नहीं विज्ञापन होता है। स्वामी जी ने योग और आयुर्वेद की विधा को जिस रूप में प्रारंभ किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब लोगों ने आकर के टेलीविजन पर यह कहना शुरू किया कि मुझे यह बीमारी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह परेशानी थी किन्तु अब मैं ठीक हो गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग करने से मुझे लाभ हुआ तो लोगों ने एकदम इस बात को स्वीकार नहीं किया।</span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योग को लेकर फैली भ्रांतियाँ तथा अविश्वास</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग को लेकर लोगों को विश्वास कम और अविश्वास ज्यादा था कि यह कोई नया हथकंडा है। यह कोई नया बाबा है जिसने अपने चेलों-चपाटों को तैयार करके उनसे कहलवाता है कि हमें लाभ हुआ है। उस समय बड़ा प्रश्न खड़ा किया गया क्योंकि उस समय किसी ने नहीं कहा कि योग-आयुर्वेद अपने आप में संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है या योग से भयानक-भयानक बीमारियां ठीक हो सकती हैं। आज सबको विश्वास हो गया। जो योग नहीं करता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भी मानता है कि योग करने से बीमारियाँ ठीक होती हैं। तब तो ऐसा जमाना था कि योग करने वाला भी नहीं मानता था कि योग करने से बीमारी ठीक होती है। क्योंकि उसने ढ़ंग से योग किया नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस विधा से किसी ने सिखाया ही नहीं। तब पहली बार इस धरा पर पूरे विश्व में किसी ने पूरे डंके की चोट पर यह उद्घोषणा की कि योग-आयुर्वेद से बीमारियां समूल नष्ट होती हैं तो दुनिया के लिए एक नई चीज के साथ-साथ में चुनौति भी थी। योग और आयुर्वेद को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके परिणामों को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी क्षमता को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी शक्ति के साथ में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतनी उदात्ता और ऊर्जा के साथ कभी किसी ने दुनिया के सामने नहीं रखा था। उसका भी दुष्परिणाम तथा चुनौतियाँ हमारे ऊपर आना स्वाभाविक ही था। लोगों ने विभिन्न तरह के प्रश्न उठाए। बहुत तरह की चुनौतियां दी गई। </span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योग को स्थापित करने के लिए परीक्षाएँ व चुनौतियाँ</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हम इस बात को कहते हैं तो प्रसन्नता होती है कि पहली बार वर्ष </span>2003<span lang="hi" xml:lang="hi"> में योग-आयुर्वेद के परिणामों को लेकर हमने हरिद्वार में बहुत बड़ा योग शिविर प्रारंभ किया। जिस समय योग शिविर चल रहा था उस समय पीजीआई चंडीगढ़ की डॉक्टरों की पूरी टीम से हम संपर्क में थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका नेतृत्व डॉ. गुप्ता जी करते थे। उन्होंने वह सारे पूर्व और पश्चात के परिणामों को मापा और परिणामों को देखकर वह स्वयं विस्मित और अचंभित थे। उन्होंने कहा कि हमने कभी सोचा नहीं था कि योग से इस प्रकार के परिणाम प्राप्त होंगे। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके बाद एक और बड़ा शिविर प्रेमनगर आश्रम में हुआ जिसमें डॉक्टरों की टीम ने डॉ. भल्ला को शिविर में प्रतिभागी बनाकर भेजा। वो श्वास रोगी थे तथा सोरबिटेट की गोली आहार के रूप में लेते थे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डॉक्टरों की टीम ने डॉ. भल्ला से कहा कि तुम बाबा के शिविर में जाकर देख लो। वैसे भी तुम चलने-फिरने की स्थिति तो हो नहीं। या तो तुम भगवान को प्यारे हो जाओगे नहीं तो कुछ तो होगा ही। डॉ. भल्ला ने अपने विषय में नहीं बताया और एक शिविरार्थी की तरह शिविर में भाग लिया। शिविर में स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे और उन्हें आराम हो रहा था। चौथे दिन वो अपने आप को रोक नहीं पाए और स्वयं आकर बताया कि स्वामी जी मैं आया नहीं हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुझे भेजा गया है। हमारे पास वह सारी रिकॉर्डिंग हैं। तो न जाने कितनी जासूसियाँ हुई होंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ना जाने कितने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप में परीक्षाएं ली गई होंगी। किन्तु सत्यमेव जयते नानृतम्।</span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इंटरनेशनल योगा-डे निर्विवाद रूप से श्रद्धेय स्वामी जी के तप और पुरुषार्थ का परिणाम</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद को पुनर्स्थापित करने के लिए पतंजलि एक उदाहरण है। उस समय योग की कितनी संस्थाएँ थीं। कितने योग शिक्षक थे। आज हर गली में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर नुक्कड़ पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर गांव में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर कस्बे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी दुनिया के एक-एक कोने में पतंजलि तथा आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों से इंटरनेशनल योगा-डे के रूप में आज योग की स्वीकार्यता मिली है। तो उसके पीछे उसके मूल में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी जड़ में कोई है तो निर्विवाद रूप से कह सकते हैं कि वह श्रद्धेय स्वामी जी का तप और पुरुषार्थ का परिणाम है।</span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">2006 में आयुर्वेद की पुनर्स्थापना का संकल्प</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब बात करें आयुर्वेद की तो वर्ष 2006 में हमने आयुर्वेद को पूरे विश्व में पुन: प्रतिष्ठित करने के लिए पतंजलि योगपीठ की स्थापना की। हमने आँकलन किया कि एविडेंस बेस्ड मेडिसिन सिस्टम का न होना आयुर्वेद की वैश्विक स्तर पर ख्याति न होने में एक बड़ा कारण था। आयुर्वेद का प्रमाण व तथ्य हमारे शास्त्रों में है परंतु दुर्भाग्य से हमारे शास्त्रों का कथन दुनिया में प्रमाण नहीं माना जाता। वह हमारे लिए तो प्रमाण है परंतु दुनिया के लिए वह प्रमाण नहीं है। दुनिया को दुनिया की भाषा में समझाने के लिए हमने वैज्ञानिक मापदण्ड पर आयुर्वेद को कसौटी पर कसा।</span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या थी आयुर्वेद को लेकर लोगों की मन:स्थिति</span>?</strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धेय स्वामी जी के आदेश से हमने पहली बार बहुत एडवांस लेवल की पैथोलॉजी लैब पतंजलि में स्थापित की। यह देश का पहला ऐसा आयुर्वेदिक हॉस्पिटल बना जहाँ डायग्नोसिस पूरा मॉडर्न और उपचार विशुद्ध योग और आयुर्वेद से हो रहा है। उस समय पतंजलि के एडवांस हॉस्पिटल को देखकर बहुत सारे लोग खुशी व्यक्त करते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर बहुत सारे लोगों के प्रश्न होते थे कि आयुर्वेद के लिए भी क्या इतने बड़े हॉस्पिटल की आवश्यकता है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस समय आयुर्वेद को लेकर लोगों की मन:स्थिति क्या रही होगी। अब तो भारत सरकार के पुरुषार्थ से बहुत सारे आयुर्वेदिक अस्पताल खुल गए। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी आयुर्वेद के लिए काम हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्टरनेटिव सिस्टम के लिए आज डब्ल्यू.एच.ओ. की शाखा भारत में स्थापित हो गई है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह उस समय की बात है जब आयुर्वेद रूपी विधा को कोई कंधे पर उठाकर चले तो सही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस अग्रणी भूमिका का नेतृत्व करे तो सही। उस समय पतंजलि ने उन कार्यों को किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन प्रतिष्ठानों अनुसंधानों तथा उदाहरणों को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया और उसका परिणाम है कि सरकार ने भी पूरा साथ दिया। सरकार भी अपने स्तर पर काम कर रही है। अनेक संस्थाएं खुल रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनेकों आयुर्वेदिक कॉलेज खुल रहे हैं। इसमें कुछ लोगों की सोच व्यवसायिक हो सकता है पर व्यावसायिक सोच वालों के लिए भी कहीं ना कहीं उस विधा में दम दिखाई देता है तो लोग प्रवृत्त होते हैं। क्योंकि हमारी सोच व्यवसायिक नहीं थी तो हमने आयुर्वेद की पुन: स्थापना के लिए आर्थिक नुकसान भी सहा। </span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">किसानों को मिला अपने उत्पाद का उचित मूल्य</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष </span>2004-2005<span lang="hi" xml:lang="hi"> की बात है की जब शामली का एक किसान हमारे पास आया तथा स्वामी जी से कहने लगा कि आँवले की लागत भी पूरी नहीं मिल रही है। १५ बिघा जमीन पर लगे आंवले के सारे पेड़ काटने वाले हैं। उस समय आंवले के इतने उत्पाद बाजार में नहीं थे। हम भी आंवले का प्रयोग थोड़ा बहुत मुरब्बा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ा बहुत चूर्ण-चटनी में ही करते थे। थोड़ा-बहुत सुखाकर त्रिफला चूर्ण बनाते थे या थोड़ा च्यवनप्राश में प्रयुक्त होता था। पूज्य स्वामी जी ने एक क्षण भी न गवाएं किसान से कहा कि ऐसा करो सारा आंवला हमें लाकर दे दो। तब हमने बड़े-बड़े मिक्सर और निचोड़ने के लिए मशीन मंगाई। चार-पांच मशीनें लगाकर जूस निकालने का काम शुरू किया गया। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर आंवला स्वरस की मांग बढ़ी तो पता किया कि पंजाब में पंजाब एग्रो लिमिटेड भारत सरकार का फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां से जूस निकल सकता है। हमने ट्रक भर-भर कर सारा आंवला जूस निकालने से लिए भेज दिया। और हमारा सारा आंवला खत्म हो गया। फिर पता चला कि दक्षिण भारत में आंवले का सीजन पहले शुरू हो जाता है। फिर हमने उत्तर भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दक्षिण भारत और देश के अनेक राज्यों से आंवला लिया जिसके परिणाम स्वरूप एक साल में ही आंवले का मूल्य दो गुना हो गया। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुझे इस बात को कहते हुए प्रसन्नता है कि आंवले का ताजा स्वरस भी बाजार में बिक सकता है इस कांसेप्ट को सर्वप्रथम पतंजलि ने ही दिया। आज कम से कम </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा छोटे-बड़े उद्योग हैं जो आंवला स्वरस बेचते हैं। यह एक संन्यासी के पुरुषार्थ और उसके रिस्क उठाने के कारण हुआ।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आयुर्वेद इस रूप में धीरे-धीरे लोगों के दिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिमाग और जेहन में घुसने लगा है कि प्रतिदिन उपभोग के लिए लोग आयुर्वेद को अपनाने लगे हैं। एलोवेरा जूस की बात करें तो हमको याद है एक समय एमवे का एलोवेरा जूस 1300 रुपए लीटर आया करता था और उस समय भारत की कम्पनियाँ एलोवेरा जूस बेचा ही नहीं करती थी। फिर हमने पतंजलि के माध्यम से १५० रुपए लीटर एलोवेरा जूस उपलब्ध कराया। कुछ </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के अंदर ही वो 1300</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए लीटर वाला ऐलोवेरा जूस </span>300<span lang="hi" xml:lang="hi"> का हो गया और लागत मूल्य बढ़ने के कारण हमारा डेढ़ सौ वाला हमने </span>200<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए लीटर किया। यानी कि पतंजलि आयुर्वेद की मात्र पुन: स्थापना ही नहीं कि अपितु आयुर्वेद के नाम पर जो मार्केट में लूट मचा रखी थी या जो लोगों ने एक भ्रम फैला रखा था उसको भी समाप्त करने का काम पतंजलि के द्वारा किया गया। पतंजलि के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज जड़ी-बूटी के रूप में हर घर में कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में आयुर्वेद के पौधे एलोवेरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेमन ग्रास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुलसी आदि के रूप में लगे मिलेंगे। इसका श्रेय भी इस पतंजलि योगपीठ हो जाता है। </span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेदिक चिकित्सा को मिला वैज्ञानिक आधार</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेदिक चिकित्सा की बात आई तो डेंटल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑप्थेल्मोलॉजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंचकर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">षट्कर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ई.एन.टी. आदि सारे साधन हमने उपलब्ध कराए। आयुर्वेद के सिद्धांत में वात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पित्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कफ सबसे महत्वपूर्ण हैं। ये सिद्धांत हमारी ताकत हैं। दुनिया में कोई विधा नहीं है जिसमें इतना वृहद् वर्णन हो। किन्तु देश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिस्थिति के अनुसार उन विधाओं को अनुसंधानपरक स्थापित करने का पहला प्रयास भी पतंजलि के द्वारा ही किया गया।</span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ई.एम.आर. सिस्टम पतंजलि की बड़ी ताकत</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि एक ऐसी संस्थान है जहां आयुर्वेद चिकित्सा में </span>5000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा सेंटर हैं जो ई.एम.आर. सिस्टम से जुड़े हैं। हमारे पास अनुसंधान के लिए रोगियों का विस्तृत डॉटा है जिसे हम अनुभव के आधार पर समय-समय पर करेक्ट करते रहते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि का जो ई.एम.आर. सिस्टम है वह सिस्टम पूरे देश के हमारे हर चिकित्सालय के साथ जुड़ा हुआ है। हमने आयुष मंत्रालय में इस बात के लिए भी निवेदन किया था कि हम लागत मूल्य पर यह सेवा देने को तैयार है क्योंकि हम आई.टी. के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं। यह ई.एम.आर. सिस्टम इतना एडवांस है कि पूरे हिंदुस्तान से रोगी कब आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें क्या औषधियां दी गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या परीक्षण कराए गए। इस डॉटा से हमको रिसर्च में मदद मिलेगी। एक साल में एक करोड़ से ज्यादा पेशेंट का रिसर्च डाटा हमारे पास अवेलेबल है। आज यह सामर्थ पतंजलि के पास है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद में अभी जो टॉप लेवल की इंटरनेशनल एविडेंस बेस्ड रिसर्च पेपर की बात करें तो लगभग </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दर्जन से ज्यादा टॉप लेवल के रिसर्च पेपर इंटरनेशनल जरनल्स में छप चुके हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी तरह से पूरे डिजिटाइजेशन का काम हो या डॉटा रखने की काम हो पतंजलि सबसे अग्रणी संस्था है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया</strong></span> इस कथन को सार्थक करने के लिए और लोगों को निरामय बनाने के लिए पतंजलि की भावनाएं हैं। आइए हम सब योग-आयुर्वेद से जुड़ें और अपने जीवन को ठीक करें।</span></h5>]]>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2023</category>
                                            <category>जून</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 21:57:21 +0530</pubDate>
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