<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/tag/5396/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AA-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>योग संदेश RSS Feed Generator</generator>
                <title>हिप रिप्लेसमेंट से दुनिया भर में समस्याएं. - योग संदेश</title>
                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/tag/5396/rss</link>
                <description>हिप रिप्लेसमेंट से दुनिया भर में समस्याएं. RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>विश्व की जानी मानी कंपनी द्वारा  93 हजार से अधिक मरीजों की जान से खिलवाड़ की दर्दनाक कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>2009<span lang="hi" xml:lang="hi"> में ऑस्ट्रेलिया में हिप इम्प्लांट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> से मरीजोंको दिक्कत हो रही थी और भारत में लाइसेंस लेते समय कंपनी ने हिप </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इम्प्लांट </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को सही बताया</span></strong></span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स</span><span lang="hi" xml:lang="hi">न </span>2016<span lang="hi" xml:lang="hi"> में ज्योति शर्मा नाम की एक </span>52<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षीय बुजुर्ग महिला जिसके कुल्हे खराब हो चुके थे जब उसने डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने उसको अच्छी से अच्छी कंपनी के महंगे हिप रिप्लेसमेंट के लिए सुझाव दिया। ज्योति शर्मा अपने दर्द से परेशान हो चुकी थी। उसने डॉक्टर के मुंह मांगे पैसे खर्च करके सितंबर </span>2006<span lang="hi" xml:lang="hi"> में हिप रिप्लेसमेंट की सर्जरी करवाई। सर्जरी करवाते हुए डॉक्टर ने सुझाव दिया कि किस कंपनी</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2710/vishwa-ki-jani-mani-company-dwara-93-hajar-se-adhik-marijon-ki-jaan-se-khilwad-ki-dardnak-kahani"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-12/jj.jpg" alt=""></a><br /><ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>2009<span lang="hi" xml:lang="hi"> में ऑस्ट्रेलिया में हिप इम्प्लांट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> से मरीजोंको दिक्कत हो रही थी और भारत में लाइसेंस लेते समय कंपनी ने हिप </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इम्प्लांट </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को सही बताया</span></strong></span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स</span><span lang="hi" xml:lang="hi">न </span>2016<span lang="hi" xml:lang="hi"> में ज्योति शर्मा नाम की एक </span>52<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षीय बुजुर्ग महिला जिसके कुल्हे खराब हो चुके थे जब उसने डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने उसको अच्छी से अच्छी कंपनी के महंगे हिप रिप्लेसमेंट के लिए सुझाव दिया। ज्योति शर्मा अपने दर्द से परेशान हो चुकी थी। उसने डॉक्टर के मुंह मांगे पैसे खर्च करके सितंबर </span>2006<span lang="hi" xml:lang="hi"> में हिप रिप्लेसमेंट की सर्जरी करवाई। सर्जरी करवाते हुए डॉक्टर ने सुझाव दिया कि किस कंपनी के आर्टिफिशियल हिप्स बहुत अच्छी मेटल के बने हुए हैं। डॉक्टर ने बताया कि आर्टिकुलेट सरफेस रिप्लेसमेंट (</span>A.S.R.<span lang="hi" xml:lang="hi">) टाइप के जॉनसन एंड जॉनसन की सहयोगी कंपनी </span>Depuy <span lang="hi" xml:lang="hi">के बने हुए नकली कुल्हे को सर्जरी के माध्यम से इम्प्लांट करना सबसे अच्छा है। ज्योति शर्मा को उम्मीद थी कि इतनी बड़ी सर्जरी करवाने के बाद तथा लाखों रुपए खर्च करने के बाद उसे कूल्हे के दर्द से मुक्ति मिल जाएगी और वह अच्छी तरह से अपना जीवन जी पाएगी। लेकिन सितंबर </span>2006<span lang="hi" xml:lang="hi"> के हिप रिप्लेसमेंट करवाने के तुरंत बाद उसको भयंकर दर्द की शिकायत होने लगी। चिकित्सकों से संपर्क किया तो चिकित्सकों ने कहा कि सामान्य तौर पर सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक दर्द होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह दर्द अपने आप ठीक हो जाएगा। अगले </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> सालों में जब उनका दर्द बहुत ज्यादा बढ़ गया और उनके शरीर में तरह-तरह की टोक्सीसिटी से होने वाली दिक्कतें होनी शुरू हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उनके परिवार व परिचितों ने किसी अच्छे हॉस्पिटल में जांच करवाने के लिए कहा। </span>2011<span lang="hi" xml:lang="hi"> में जब उनके शरीर में कोबाल्ट और क्रोमियम के लेवल का चेक करवाया गया तो उनके शरीर में एक बहुत भारी धातु कोबाल्ट और क्रोमियम की बढ़ी हुई मात्रा ट्रेस की गयी।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-12/43.jpg" alt="43"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी बीच </span>2010<span lang="hi" xml:lang="hi"> में पूरी दुनिया में जॉनसन एंड जॉनसन ग्रुप के खिलाफ घटिया हिप्स रिप्लेसमेंट सिस्टम के द्वारा होने वाले दर्द व नुकसान की आवाजें पूरी दुनिया में उठनी शुरू हुई। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार </span>2012<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक जब ज्योति शर्मा को पूरी दुनिया में जॉनसन एंड जॉनसन के घटिया हिप रिप्लेसमेंट सिस्टम के कारण दुनिया भर से आर्टिफिशियल हिप वापस मंगवाने की जानकारी हुई तो जून </span>2012<span lang="hi" xml:lang="hi"> में उन्होंने दोबारा अपना हिप रिप्लेसमेंट करवाया लेकिन फिर भी उनके शरीर में दर्द की शिकायत दूर नहीं हुई तो उन्होंने फार्मा कंपनी पर मुकदमा दायर किया।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-12/44.jpg" alt="44"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;">2016<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>52<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष की ज्योति शर्मा ने भारत की राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत में अपनी शिकायत करते हुए हजारों मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वह लापरवाही के लिए जॉनसन एंड जॉनसन समूह के खिलाफ अपना मुकदमा दर्ज करवाया। इस बीच </span>2010<span lang="hi" xml:lang="hi"> से लेकर </span>2012<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक पूरी दुनिया में जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ हजारों मुकदमा दर्ज हो रहे थे तथा हजारों जगह जो अलग मुकदमों में जांच हुई तो उसमें जॉनसन एंड जॉनसन की लापरवाही स्पष्ट तौर पर सामने आ रही थी तथा विदेशों में जॉनसन एंड जॉनसन के ऊपर अदालतों में बड़ा जुर्माना भी किया जा रहा था।</span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">फार्मा कंपनी की सीनाजोरी</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कंपनी की सीनाजोरी देखिए कि कंपनी ने जुलाई </span>2016<span lang="hi" xml:lang="hi"> में राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत में हलफनामा देते हुए कहा कि श्रीमती ज्योति शर्मा की मांग अनुचित है। उन्होंने दलील दी कि ज्योति शर्मा को मुकदमा </span>2006<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>2012<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बीच करना चाहिए था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उन्हें इन प्लांट और ऑपरेशन से दर्द हो रहा था लेकिन तब उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनको जब पूरी दुनिया में अमेरिका में केस के बारे में पता चला तो हम पर मुकदमा दर्ज किया है। अगर उनको हमारे हिप रिप्लेसमेंट से दिक्कत थी तो </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल उन्होंने मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया। अब क्योंकि वह दोबारा सर्जरी करवाकर अपने इंप्लांट्स निकलवा चुकी हैं तो मुआवजा और हर्जाना देने का कोई सवाल नहीं उठता।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा कहकर वह कंपनी साफ-साफ अपनी लापरवाही और अपने A.S.R. हिप रिप्लेसमेंट सिस्टम से जो कोबाल्ट और क्रोमियम का जहर रोगियों के शरीर में फैला तथा रोगियों को असहनीय दर्द हुआ उससे अपने आपको बरी कर लिया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की ही रहने वाली एक और मरीज पूर्णी देवी गोयनका ने भी अपने आप को ठीक करवाने के लिए महंगा उपचार करवाते हुए उच्च स्तर की गुणवत्ता का दावा करने वाली जॉनसन समूह की कंपनी का हिप रिप्लेसमेंट करवाया। जब उनको भी दिक्कत हुई और उन्होंने मुकदमा दायर किया तो कंपनी ने उनको भी ऐसा ही जवाब दिया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे ही भारत के एक मरीज विजय आनंद वझाला ने बताया कि सर्जरी के बाद मैंने छ: महीने तक काम नहीं किया। इसके बाद जब नौकरी शुरू की तो चलने फिरने में परेशानी हो रही थी जिस कारण मुझे नौकरी छोड़नी पड़ी। सर्जरी का दर्द सहना पड़ा और सर्जरी के बाद भी मेरा उपचार ठीक से नहीं हुआ तथा अब कंपनी किसी भी प्रकार से मुआवजा देने से भी इंकार कर रही है।</span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी का आर्टिफिशियल हिप </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इम्प्लांट</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जॉनसन एंड जॉनसन जो दुनिया की </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> बड़ी कंपनियों में से 36वें नम्बर की बड़ी कंपनियों में से एक है उसकी एक सहयोगी कंपनी </span>Depuy <span lang="hi" xml:lang="hi">ने पूरी दुनिया में लाखों की संख्या में कुल्हे के दर्द के रोगियों को देखकर अपनी कंपनी की ओर से आर्टिकुलर सरफेस रिप्लेसमेंट </span>A.S.R. <span lang="hi" xml:lang="hi">टेक्नोलॉजी से हिप इम्प्लांट में उपयोग की जाने वाली मेटल ऑन मेटल टेक्नोलॉजी पहली बार बाजार में पेश की तथा पेश करते हुए यह दावा किया कि </span>2005<span lang="hi" xml:lang="hi"> में फार्मा कंपनी को अमेरिका के खाद्य एवं औषधि विभाग से इसकी मंजूरी मिल गई। यह हिप्स इम्प्लांट के बाद रोगियों को राहत देगी लेकिन उनका यह उत्पाद प्रारंभ से ही समस्याओं से ग्रसित था तथा बहुत से ट्रांसप्लांट के समय ही फैलियर हुए। कंपनी के ऊपर मुकदमे चलाए गए तथा आरोप लगाए गए इन्होंने जो हिप इन प्लांट सिस्टम रोगियों को लगाए उन्होंने रोगियों में गंभीर समस्याएं पैदा की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे हजारों रोगियों को दोबारा सर्जरी करवानी पड़ी। दुनिया भर में </span>93,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक लोगों के अंदर आर्टिफिशियल हिप्स ट्रांसप्लांट किया गया </span>Depuy <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑर्थोपेडिक्स के खिलाफ संयुक्त राज्य अमेरिका में पहला मुकदमा </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2010<span lang="hi" xml:lang="hi"> को दायर किया गया।</span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हिप रिप्लेसमेंट से दुनिया भर में समस्याएं</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब दुनिया भर से जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ मुकदमा दायर होने शुरू हो गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनको भी यह हिप रिप्लेसमेंट किए गए थे उनके अंदर प्रोस्थेटिक बॉल एंड सॉकेट जॉइंट जब आपस में रगड़ते थे तो यह खराब होने लगते थे और इन हिप इन प्लांट जो मेटल नॉनमेटल टाइप के हैं उनमें से क्रोमियम व कोबाल्ट जैसी धातुओं निकलकर खून में मिल जाती थी जिससे मरीजों को कई प्रकार की शारीरिक परेशानियां होती थी। बहुत से मरीजों को दोबारा सर्जरी करके इन हिप रिप्लेसमेंट को निकलवाना पड़ा। पूरी दुनिया में अपने खिलाफ मरीजों की शिकायतों से प्रभावित होकर अगस्त </span>2010<span lang="hi" xml:lang="hi"> में जॉनसन एंड जॉनसन ने पूरी दुनिया के बाजारों से अपने ही इम्प्लांट्स को वापस मंगवा लिया।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-12/46.jpg" alt="46"></img></span></p>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया भर में कंपनी के खिलाफ जुर्माना</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जॉनसन एंड जॉनसन पर अमेरिका में पहला मुकदमा जून </span>2010<span lang="hi" xml:lang="hi"> को दायर किया गया। मुकदमे में हिप रिप्लेसमेंट को दोषपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया गया कि कंपनी को इसकी कमियों की जानकारी थी लेकिन कंपनी ने जानबूझकर रोगियों तथा सर्जन को भविष्य में आने वाली समस्याओं के बारे में नहीं बताया। जब मुकदमों की संख्या हजारों हो गई तो देश भर के दायर सभी मामलों को वहीं आकर उत्तरी जिले में स्थानांतरित कर दिया गया तथा अदालत ने कार्रवाई करनी शुरू की। </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में जॉनसन एंड जॉनसन ने स्वेच्छा से यह घोषणा की कि वह </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार से अधिक अलग-अलग हिप इम्प्लांट्स सिस्टम संबंधित मुकदमों का निपटारा करने के लिए </span>$2.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> बिलियन अर्थात् लगभग </span>20,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपए का जुर्माना देने को तैयार है। मई </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कंपनी लगभग </span>6,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> दूसरे हिप रिप्लेसमेंट मामलों को हल करने के लिए </span>$1<span lang="hi" xml:lang="hi"> बिलियन अर्थात् लगभग </span>8,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपए का जुर्माना देने के लिए सहमत हुई। जुलाई </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक जॉनसन एंड जॉनसन की सहयोगी <strong>Dupuy</strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi">  हिप रिप्लेसमेंट पर </span>11,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक मुकदमे लंबित थे तथा हजारों पीड़ित ऐसे मरीज थे जिनकी ओर से मुकदमा दायर करने की संभावना शेष हैं।</span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में मरीजों की दर्दनाक स्थिति</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में जॉनसन एंड जॉनसन की सहयोगी कंपनी ने लगभग </span>36<span lang="hi" xml:lang="hi">०</span>0<span lang="hi" xml:lang="hi"> घटिया हिप रिप्लेसमेंट सिस्टम बेचे थे। मरीजों को जब इस आर्टिफिशियल हिप रिप्लेसमेंट सिस्टम से दिक्कतें होनी शुरू हुई और कंपनी ने किसी भी प्रकार से जिम्मेदारी लेने से बचने की कोशिश की तो भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> फरवरी </span>2017<span lang="hi" xml:lang="hi"> को एक समिति का गठन किया। समिति ने अपनी रिपोर्ट देते हुए कहा कंपनी ने कुछ मामलों में मरीजों को होने वाले नुकसान की बात को मानी है। जांच रिपोर्ट में समिति ने कंपनी की जमकर खिंचाई की समिति ने कहा कि ये हिप रिप्लेसमेंट बेहद घटिया सामग्री के इस्तेमाल से बने हैं। जिन </span>36<span lang="hi" xml:lang="hi"> मरीजों को यह रिप्लेसमेंट सिस्टम लगा है उनका कोई अता पता नहीं है तथा कंपनी भी उनके बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं करवा रही। लगभग </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों की मौत हो गई है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समिति ने सिफारिश की कि कंपनी हर एक प्रभावित मरीज को </span>20,00,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए मुआवजा दें तथा अगस्त </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक सभी मरीजों के खराब सिस्टम को बदले। समिति ने आगे सिफारिश की कि सरकार कंपनी से मुआवजा दिलवाने के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन करें जिससे उन मरीजों को जिनकी जान को खतरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका हर साल चेकअप हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय उनके लिए एक्सपर्ट टीम बनाएं जो मरीजों के मुकदमों का तेजी से निस्तारण करवाएं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दु:खद बात यह है कि कंपनी को पूरी दुनिया में इन सिस्टम से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी थी लेकिन फिर भी उसने भारत में ऐसे ही प्लांट सिस्टम बेचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पूरी दुनिया में नुकसान हो रहा था। दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने भारत के मरीजों के दर्द व सुरक्षा की कोई चिंता नहीं की। केवल अपना मुनाफा कमाने के लिए पूरी दुनिया में रिजेक्ट किए गए इम्प्लांट भारत में बेचती रही।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">4<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनी को मंत्रालय के निर्देशानुसार </span>25,00,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रत्येक पीड़ित रोगी को देने का निर्देश किया तथा कहा कि इस मुआवजे के बाद भी मरीजों का अधिकार रहेगा कि वह कंपनी के खिलाफ दावा कर सकते हैं।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-12/aaaa.jpg" alt="aaaa"></img></span></p>
<h4 style="text-align:center;"> </h4>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फार्मा षड़यंत्र</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2023</category>
                                            <category>जून</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2710/vishwa-ki-jani-mani-company-dwara-93-hajar-se-adhik-marijon-ki-jaan-se-khilwad-ki-dardnak-kahani</link>
                <guid>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2710/vishwa-ki-jani-mani-company-dwara-93-hajar-se-adhik-marijon-ki-jaan-se-khilwad-ki-dardnak-kahani</guid>
                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 21:55:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2023-12/jj.jpg"                         length="93775"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        