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                <title>यूटीआई के 8% मामले दूषित मांस खाने की वजह से - योग संदेश</title>
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                <description>यूटीआई के 8% मामले दूषित मांस खाने की वजह से RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>स्वास्थ्य समाचार</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक और एनेस्थीसिया विभाग की रिसर्च में खुलासा</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल और लैपटॉप से </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत लोग न्यूरॉल्जिया के शिकार</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मो</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाइल और लैपटॉप ने भले ही रोजमर्रा के कार्यों को आसान बना दिया हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके अत्याधिक प्रयोग ने चिंता में डाल दिया है। ज्यादा मोबाइल का प्रयोग करने वाले लगभग </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी लोग न्यूरॉल्जिया (नसों में दर्द) का शिकार हो चुके हैं। यह खुलासा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक और एनेस्थीसिया विभाग की स्टडी में हुआ है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शोध में </span>170<span lang="hi" xml:lang="hi"> मरीजों को लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें </span>13<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>17<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के किशोर और </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2715/swasthya-samachar"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-12/35.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक और एनेस्थीसिया विभाग की रिसर्च में खुलासा</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल और लैपटॉप से </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत लोग न्यूरॉल्जिया के शिकार</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मो</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाइल और लैपटॉप ने भले ही रोजमर्रा के कार्यों को आसान बना दिया हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके अत्याधिक प्रयोग ने चिंता में डाल दिया है। ज्यादा मोबाइल का प्रयोग करने वाले लगभग </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी लोग न्यूरॉल्जिया (नसों में दर्द) का शिकार हो चुके हैं। यह खुलासा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक और एनेस्थीसिया विभाग की स्टडी में हुआ है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शोध में </span>170<span lang="hi" xml:lang="hi"> मरीजों को लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें </span>13<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>17<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के किशोर और </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>49<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के युवा रहे। ऐसे मरीजों के हाथों और कोहनी में असहनीय दर्द की शिकायतें रहीं। विशेषज्ञों ने इसे लेकर काफी हैरत जताई है। उन्होंने इसे लेकर चेतने की सलाह दी है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोरोना काल के दौरान पिछले दो साल से लैपटॉप और मोबाइल का प्रयोग लगभग दस गुना बढ़ गया है। स्कूल बंद होने की वजह से बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के अलावा वर्क फ्रॉम होम का चलन भी काफी बढ़ गया। इस दौरान मोबाइल और लैपटॉप का अत्याधिक प्रयोग किया जाने लगा। धीरे-धीरे इन लोगों की गर्दन से लेकर कोहनी-पंजे तक दर्द शुरू हो गया। कंधे में सुन्नता का अहसास होने लगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी संख्या में ऐसी दिक्कतों को लेकर डॉक्टरों के पास भीड़ पहुँचने लगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद डॉक्टरों ने रिसर्च शुरू की। ऐसे मरीजों को पहले पेन किलर और अन्य दवाएं दी गई। इसके बावजूद एक महीने तक दर्द खत्म नहीं हुआ। सभी का एमआरआई और सीटी स्कैन कराया गया। तो पता चला कि मोबाइल और लैपटॉप में घंटों काम करने से गर्दन की डिस्क बल्ज की वजह से विभिन्न नर्व रूटों का दबाव पाया गया। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे ज्यादा दबाव गर्दन की सी </span>5-6, <span lang="hi" xml:lang="hi">सी </span>6-7<span lang="hi" xml:lang="hi"> की नर्व रूटों पर मिला। अहम बात है कि मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले लोगों के कंधों और कोहनी में पीड़ा का ग्राफ हर दिन बढ़ा मिला। </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी में न्यूरॉलाल्जिया की बीमारी सामने आई। डॉक्टरों के मुताबिक जब पॉश्चर बदलने और मोबाइल-लैपटॉप के इस्तेमाल पर कुछ पाबंदी की गई तो नसों की लोकेशन भी कुछ ठीक पाई गई। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">युवतियां-महिलाएं भी पीड़ित: </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अध्ययन में </span>37<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी में गंभीर सर्वाइकल डिजेनेरेटिव डिस्क और सर्वाइकल डिस्क प्रोलैप्स बीमारी भी मिली। </span>70<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी युवा और </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी किशोरों के अलावा </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी युवतियां-महिलाएं भी इसी बीमारी से पीड़ित मिली। स्टडी में यह भी सामने आया कि कई रोगी गर्दन के दर्द या जकड़न से प्रभावित थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें टेवस्ट नेक सिड्रोम मिला। </span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>170<span lang="hi" xml:lang="hi"> मोबाइल और लैपटॉप प्रेमी कंधे और कोहनी के दर्द संग सुन्नता से परेशान</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी युवतियां और महिलाएं भी पीड़ित एक पॉश्चर में रहने से बढ़ी मुसीबत </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>37<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी में गंभीर सर्वाइकल डिजेनेरेटिव डिस्क और सर्वाइकल डिस्क प्रोलैप्स</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>70<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी युवा संग </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी किशोर भी चपेट में डॉक्टरों ने जताई चिंता</span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> मरीजों की पेन क्लीनिक में हर दिन न्यूरॉल्जिया के दस रोगी आ रहे हैं। अधिकांश की समस्या गर्दन की डिस्क सी </span>5-6, 6-7<span lang="hi" xml:lang="hi"> में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर हर कोई समझ नहीं पा रहा है। लोगों को अलर्ट होना होगा। </span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><strong>-<span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ. चंद्रशेखर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोफेसर </span></strong></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एनेस्थीसिया एंड हेड पेन क्लीनिक जीएसवीएम</span></strong></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल और लैपटॉप का अत्याधिक प्रयोग करने के कारण सीधे या टेढ़े बैठने पर गर्दन के ऊपर पांच किलो का वजन पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वयस्क के सिर के वजन के बराबर है पर जैसे-जैसे गर्दन को आगे की तरफ झुकाया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह वजन कई गुना तक बढ़ जाता है। सिर झुकाकर अधिक देर तक काम करने से गर्दन की हड्डियों पर अप्राकृतिक दबाव पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण आसपास की मांसपेशियाँ थकान महसूस करती हैं।</span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><strong>-<span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ. प्रग्नेश कुमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहायक प्रोफेसर</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हड्डी विभाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीएसवीएम</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को दिए ये सुझाव भी:</span></strong></span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">अगर मोबाइल की पोजिशन आँखों के स्तर पर लाई जाए तो दर्द कम किया जा सकता है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">नियमित व्यायाम करने से गर्दन और कमर के दर्द से खुद को बचाया जा सकता है। </span></h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5><span lang="hi" xml:lang="hi">लैपटॉप के प्रयोग में पोजिशन ऐसे रखें कि गर्दन और कमर एक लाइन में और सीधी रहें। </span></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साभार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> : </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">https://www.livehindustan.com/lifestyle/health/story-80-percent-of-people-suffer-from-neuralgia-due-to-mobile-and-laptop-know-what-is-this-neuralgia-disease-symptoms-and-its-preventive-measures-6970036.html</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(0,0,0);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हर साल </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख लोग यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज कराते हैं</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में दूषित मांस खाने से यूरिनल इन्फेक्शन बढ़ रहा</span>, 25<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> महिलाएं व </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> पुरुष इससे पीड़ित हो रहे हैं</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अ</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मेरिका में </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> में से </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> महिलाएं और </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> पुरुष किसी न किसी रूप में यूरिनरी ट्रैक्ट (मूत्र मार्ग) इन्फेक्शन से पीड़ित हैं। यूरोलॉजी केयर फाउंडेशन की एक रिपोर्ट में सामने आया कि अमेरिका में हर साल होने वाले आधे मिलियन से अधिक यूरिनरी ट्रैक्स इंफेक्शन (यूटीआई) के पीछे दूषित मांस जिम्मेदार है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल यूटीआई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एस्चेरिचिया कोली नामक बैक्टीरिया के कारण भी हो सकता है। यह बैक्टीरिया गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल ट्रैक्स में पाया जाता है। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिशिगन यूनिवर्सिटी और नार्थ एरिजोना यूनिवर्सिटी ने एक साल के भीतर फ्लैग स्टाफ और एरिजोना की नौ प्रमुख दुकानों से </span>1,923<span lang="hi" xml:lang="hi"> कच्चे चिकन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिग मीट और टर्की के सैंपल का एनालिसिस करके यह निष्कर्ष निकाला है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">यूटीआई के </span>8%<span lang="hi" xml:lang="hi"> मामले दूषित मांस खाने की वजह से</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन नमूनों को इक्कठा करने के बाद इन रिसर्चर्स ने फ्लैग स्टाफ मेडिकल सेंटर से </span>1,188<span lang="hi" xml:lang="hi"> यूरिन और ब्लड के सैंपलों की जांच की। जेनिटिक टेस्टिंग के बाद ये पाया गया कि यूटीआई के लगभग </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi">त्न मामले इस तरह से दूषित मांस को खानपान में लाने से आए हैं। अमेरिका में </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख यूटीआई के मामलों का इलाज किया जाता है। ऐसे में खराब या दूषित मांस से प्रभावित मरीजों की संख्या </span>4,80,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>6,40,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> मामलों के बराबर हो सकती है। एस्चेरिचिया कोली बैक्टीरिया जानवरों के साथ-साथ इंसानों के आंत में भी पाया जाता है। यह नॉर्मल माइक्रोबायोम में एक जरूरी भूमिका निभाते हैं लेकिन कई बार गंभीर बीमारी का शिकार भी बना सकते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ठंड लगना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुखार और जलन होना है यूटीआई के लक्षण</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यूटीआई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र मार्ग में हुए इन्फेक्शन को कहते हैं। इसके कई लक्षण हैं। सामान्यत: मूत्र में बदबू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेशाब करने में दबाव और ठंड लगना या लगातार बुखार का आना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मतली उल्टी जैसे लक्षण होते हैं। शुगर के कारण भी ऐसी स्थिति बनती है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साभार : </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">https://www.bhaskar.com/international/news/urinary-tract-infection-on-the-rise-due-to-eating-contaminated-meat-in-america-131081771.html</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span></h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">युवा स्वस्थ आहार से डिप्रेशन को दे सकते हैं मात</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की बात होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जैसा खाएंगे अन्न</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसा रहेगा मन। जैसी लोकोक्ति की चर्चा हो ही जाती है। एक नए अध्ययन ने इस लोकोक्ति को वैज्ञानिक आधार पर प्रदान कर दिया है। अध्ययन में पाया गया कि स्वस्थ आहार युवाओं को न सिर्फ डिप्रेशन या अवसाद जैसी मानसिक बीमारी से बचा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उससे मुक्ति भी दिला सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी (यूटीएस) के शोधकर्ताओं की तरफ से किए गए </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> हफ्तों के सीमित परीक्षण का निष्कर्ष अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित हुआ है। यूटीएस फैकल्टी ऑफ हेल्थ से जुड़ी प्रमुख शोधकर्ता जेसिका बेयस के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह युवाओं (</span>18-25<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष) के डिप्रेशन के लक्षणों पर मेडिटेरेनियन डाइट के प्रभाव का आंकलन करने वाला अपने तरह का पहला परीक्षण है। हम चकित रह गए कि युवा इस खुराक को अपनाने के लिए काफी उत्साहित थे। पोषण विशेषज्ञों की निगरानी में युवाओं ने बहुत कम समय में इस सेहतमंद डाइट को अपना लिया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमें खुश रहने में मदद करने वाले रसायन सेरोटोनिन का </span>90<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत उत्पादन हमारी आंत में सूक्ष्म जीव करते हैं। इसके प्रमाण मिल चुके हैं कि ये सूक्ष्म जीव वेगस तंत्रिकाओं के जरिये मस्तिष्क तक संदेश पहुँचा सकते हैं। इन लाभकारी सूक्ष्म जीवों के लिए मेडिटेरेनियन डाइट भूमध्य सागरीय देशों का आहार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें साबुत अनाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्जियां व बादाम आदि शामिल होते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साभार : </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">https://www.bhaskar.com/local/bihar/buxar/news/youth-can-beat-depression-with-a-healthy-diet-dr-priyanka-130160468.html</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2023</category>
                                            <category>स्वास्थ्य समाचार</category>
                                            <category>जून</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2715/swasthya-samachar</link>
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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 21:47:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
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