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                <title>हाशिमोटोस (Hashimoto’s) थॉइरॉयडाइटिस - योग संदेश</title>
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                <description>हाशिमोटोस (Hashimoto’s) थॉइरॉयडाइटिस RSS Feed</description>
                
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                <title>इम्युनिटी तथा ऑटोइम्यून डिज़ीज</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:right;">डॉ. नागेन्द्र 'नीरज’ <br />निर्देशक व चिकित्सा प्रभारी - योग-ग्राम, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2746/immunity-and-autoimmune-desies"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-12/17.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इम्यूनिटी :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong> </strong>शरीर की सुरक्षा के लिए प्रकृति ने अदभूत व्यवस्था की है। गर्भ में शिशु के सृजन के साथ ही स्वस्थ रहने के लिए इम्यून सिस्टम की नींव पड़ जाती है। शरीर का इम्यून बचपन से ही रोगाणुओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैक्टीरिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायरस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फंगस आदि पैथोजेन्स द्वारा उत्पन्न टॉक्सिन्स जीव विष से सतत लड़ते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें नष्ट करता रहता है। कभी स्वस्थ रहते हुए तो कभी बीमार होकर शरीर की इम्यून सिस्टम एक विशाल नेटवर्क के अंतर्गत कार्य करते हुए सतत् विकासशील रहता है। इसमें सफेद रक्त कोशिकाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एण्टीबॉडीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिम्फैटिक सिस्टम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लीहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थायमस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्थि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मज्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">म्यूकस मेम्ब्रेन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टांसिल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिवर तथा आतें आदि मिलकर एक जटिल नेटवर्क तैयार करते हैं। एक बार कोई किसी जर्म से रोग ग्रस्त हो जाता है तो पुन: उस रोग व रोगाणु से लड़ने के लिए शरीर में एण्टीबॉडीज तैयार हो जाती हैं। जैसे प्लेग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेचक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिजल्स आदि से लड़ने के लिए सामूहिक इम्यूनिटी जिससे हर्ड (</span>Herd<span lang="hi" xml:lang="hi">) इम्यूनिटी विकसित हो जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गलत आहार-विहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विचार तथा जीवनशैली से इम्यूनिटी कमजोर होती है। सम्यक आहार विटामिन-सी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिंक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉपर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैग्नेशियम युक्त आहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताजे फल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरी सब्जियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छाछ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंकुरित अन्न इत्यादि। आहार में खमीर उठी इडली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खम्मन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खाण्डवी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ढ़ोकला आदि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यायाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राणायाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान से इम्यूनिटी का विकास होता है। बार-बार जुकाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खांसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खून संबंधी रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आटो इम्यून डिज़ीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वचा तथा पेट का इन्फेक्शन तथा इन्फ्लामेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंक-फूड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोसेस्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फास्ट-फुड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कन्फेक्शनरी-फूड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेड मीट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तले हुए आहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टीन्ड एवं पैकेट वाला आहार इम्यूनिटी को कमजोर बनाते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी प्रकार के रोगाणु पैथोजेन्स शरीर पर हावी होने पर प्रतिक्रिया प्रत्युतर एवं रेस्पॉन्स में शरीर का इम्यून सिस्टम के जांबांज सैनिक उनसे लड़ते-जुझते हुए उन्हें समाप्त कर देते हैं। यह लड़ाई अनेक स्तर पर होती है। शरीर की प्रतिरक्षा के लिए प्रकृति ने इम्यूनिटी का विशाल जटिल अद्वितीय नेटवर्क तैयार किया हुआ है। संक्षिप्त रूप से समझें एवं जाने। हमारे शरीर में मुख्य दो प्रकार की इम्यूनिटी होती हैं। (</span>1) <span lang="hi" xml:lang="hi">इनेट या नेटिव इम्यूनिटी तथा (</span>2) <span lang="hi" xml:lang="hi">एडोप्टिव इम्यूनिटी होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">1.     इनेट या नेटिव </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इम्यूनिटी</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  जिस जाति जनजाति समाज तथा समूह में किसी रोगाणु से वर्षों पूर्व ग्रस्त रहे उस जाति समूह में उस रोगाणु के प्रति इम्यूनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। इसे नेटिव या इनेट इम्यूनिटी कहते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">2.  <span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>   एडोप्टिव </strong></span></span><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इम्यूनिटी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के अंतर्गत </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                (<span lang="hi" xml:lang="hi">क) मैटरनल पैसिव </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">यूमोरल इम्यूनिटी</span>Ó <span lang="hi" xml:lang="hi">तथा </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">                (<span lang="hi" xml:lang="hi">ख) मैटरनल सेल मेडियेटेड इम्यूनिटी आती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये दोनों प्रकार की इम्यूनिटी की नीव गर्भावस्था के दौरान प्रकृति डालती है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>(<span lang="hi" xml:lang="hi">क) मैटरनल पैसिव </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">यूमोरल इम्यूनिटी</span>’ </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गर्भ के तीसरे माह में प्लासेन्टल सेल के साथ नियोनेटल स्नष्टक्रहृ रेस्पटर्स के सहारे मैटरनल एण्टी बॉडीज </span>FCRN<span lang="hi" xml:lang="hi"> गर्भस्थ शिशु में पहँचता है। दूसरा एण्टीबॉडी </span>IgG<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रसवोपरान्त माँ के प्रथम दूध-पान के साथ शिशु के शरीर में पहुँचता है। गर्भस्थ शिशु के पाँचवें महीने में </span>IgM<span lang="hi" xml:lang="hi"> तथा </span>IgD<span lang="hi" xml:lang="hi"> दोनों साथ अभिव्यक्त होते हैं। एलर्जिक रोगों में </span>IgE<span lang="hi" xml:lang="hi"> तेजी से बनता है। ये नैसर्गिक एण्टीबॉडीज है। जो रक्त में प्राय: न्यून मात्रा में होते है। संक्रमण के प्रत्युतर में उनसे लड़ने-जुझने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरने-मारने के लिए इनकी संख्या में वृद्धि होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जन्म से जीवन प्रर्यन्त रोगाणुओं से लड़ते हुए हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति का सम्वर्द्धन करते हैं तथा हमें स्वस्थ रखते हैं।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आर्टिफिशियल इम्यूनिटी पैदा करने के लिए मोनोक्लोनल एण्टी बाडीज का इन्ट्रावेन्स तथा इन्ट्रामस्कुलर इन्जेक्शन दिया जाता है जैसा कि कोविड-</span>19<span lang="hi" xml:lang="hi"> तथा उसके विभिन्न वेरिएन्ट में दिया गया। आर्टिफिशियल ट्रान्सफर सेन्सिटाइज्ड द्वारा एक्टिवेटेड टी-सेल्स किसी व्यक्ति से लेकर दूसरे में स्थानान्तरित किया जाता है। इसका विरल प्रयोग होता है। इस के लिए मैचिंग यानि हिस्टोकाम्पेटिबल एवं म्युटयूअल टॉलरेन्स होना जरूरी है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>(<span lang="hi" xml:lang="hi">ख) मैटरनल सेल मेडिएटेड इम्यूनिटी</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार की इम्यूनिटी माता-पिता के अंडाणु-शुक्राणु के मिलने से सृजित भ्रूण के विकास के प्रथम सप्ताह में ही भ्रूणीय अण्डपीत कोश (</span>Embryonic Egg Yolk Sac<span lang="hi" xml:lang="hi">) में पहला इम्युनिटी हिमोपोएटिक स्टेम सेल्स विकसित हो जाता है। समयान्तराल पर यह लिवर स्प्लीन (प्लीहा) होते हुए अस्थि मज्जा (बोन-मैरो) में पहुँचता है। अस्थि-मज्जा में ही बी. तथा टी. लिम्फोसाइट की नींव पड़ती है फिर ये थायमस में क्लोनाइज होते हैं। यही पर बी. लिम्फोसाइट अपनी क्षमता के अनुसार प्लास्मा कोशिका तथा दूसरी स्मृति मेमोरी बी. कोशिका रूप में प्रशिक्षित होते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्लाज़्मा कोशिकायें रोगाणुओं को मारने के लिए रक्त तथा लिम्फ प्रवाह में एण्टीबॉडीज तैयार कर भेजती रहती हैं। ये शत्रु रोगाणुओं को नष्ट करने के लिए प्रति सेकण्ड दो हजार के हिसाब से करोड़ों की संख्या में प्रतिरक्षक प्रोटीन एण्टीबॉडीज का निर्माण करती हैं। टी-लिम्फोसाइट्स को भी उनकी क्षमता के अनुसार किलर साइटोटॉक्सिक टी-सेल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्पर टी-सेल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेग्युलटरी टी-सेल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेमोरी टी-सेल्स के रूप चयनित करके ट्रेनिंग दी जाती है। इनके अलग-अलग प्रशिक्षित सहायक सैनिक एसिनोफिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यूट्रोफिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वेसोफिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैक्रोफेजेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेन्ड्रिटिक सेल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मास्ट सेल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइटोकाइन्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किमोकाइन्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोपरडिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रैडिकाइनिन आदि होते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये सभी जीवन के प्रार्दुभाव से लेकर मृत्युपर्यन्त रोग एवं रोगाणुओं के अनुसार पैदा होकर उनसे लड़ते-जुझते हुए तथा हमारी रोग उन्मूलन एवं स्वास्थ्य सम्वर्द्धन करते हुए सदैव स्वस्थ रखते हैं। मेमोरी बी. तथा मेमोरी टी. लिम्फोसाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन रोगाणुओं को हमेशा याद रखते हैं जिन्होंने कभी रोगग्रस्त किया था। पुन: उनके आक्रमण करने पर उन्हें पहचान कर मार डालते हैं। हेल्पर टी-सेल्स साइटोटॉक्सि टी-सेल्स को रोगाणुओं को मारने में सहायता करते हैं। रेग्युलेटरी टी-सेल्स रोगाणुओं से लड़ाई समाप्त हो जाने के बाद विभिन्न कोर एवं बटालियन के जाबांज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुझारू इम्यूनिटी सैनिकों साइटोकाइन्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कीमोकाइन्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किलर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेमोरी आदि सुरक्षा कमाण्डो को अपनी-अपनी बाड़ों में लौट जाने तथा आक्रमण एवं लड़ाई को समाप्त करने शांति बहाल करने एवं अमन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चैन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरोग्य को पुन: स्थापित करने में पूरी तत्परता एवं समर्पण के साथ संलग्न हो जाते हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य की होती है।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हर्ड (</span>Herb<span lang="hi" xml:lang="hi">) </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इम्यूनिटी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">: </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब किसी सामुहिक समुदाय समाज या जाति के (</span>Community)  <span lang="hi" xml:lang="hi">की एक विशाल संख्या लोगों के आवश्यक प्रतिशत में किसी खास इन्फेक्शन के प्रति उस कम्युनिटी में इम्यूनिटी पैदा हो जाती है तो उसे हर्ड (</span>Herd<span lang="hi" xml:lang="hi">) इम्यूनिटी कहते हैं। इसे सामुहिक जनसंख्या की आबादी (</span>Population<span lang="hi" xml:lang="hi">) इम्यूनिटी भी कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुुसार वैक्सीनेशन के द्वारा भी हर्ड (</span>Herd<span lang="hi" xml:lang="hi">) इम्युनिटी प्राप्त की जा सकती है।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ऑटोइम्यून डिजीज:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व में मान्यता प्राप्त </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रकार से भी अधिक ऑटोइम्यून डिजीज का पता चला है। आटोइम्यून डिजीज भोजन में मिलाये जाने वाले प्रिजरवेटिव कलरेंट एडिटीव्स कृषि में प्रयुक्त पेस्टीसाइडस एवं केमिकल रसायन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिथाइल मरकरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैडमियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्सेनिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिथियम तथा मरकरी युक्त दवाइयाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक स्थिति खराब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्ट्रावायलेट रेडिएशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकन तथा यूरोपियन कॉकेशियन गोरे लोगों में प्राथमिक जीनेटिक रिस्क फैक्टर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदूषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टेटिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बी.पी.</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेस्टरॉल आदि की दवाइयाँ एण्टीबायोटिक्स आदि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरणीय जीन अन्तर प्रतिक्रिया के कारण जीनेटिक उत्परिवर्तन तथा शरीर में विटामिन-ए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बी-</span>12, <span lang="hi" xml:lang="hi">बी-</span>6, <span lang="hi" xml:lang="hi">बी-</span>9, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओमेगा-</span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> फैटी एसिड तत्त्वों की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फास्ट फूड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिंथेटिक फूड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोसेस्ड एवं कन्फेकशनरी फूड्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यायाम की कमी के कारण होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ताजे सर्वेक्षण के अनुसार विश्व में सर्वाधिक एस.एल.ई. तथा जोगरण सिण्ड्रोम के रोगी ब्रिटेन तथा अमेरिका में है। ऑटोइम्यून डिजीज का कारण स्वच्छता एवं खान-पान के प्रति ज्यादा साफ-सफाई का जुनून पागलपन की हद तक पहुँचने के चलते विकसित देशों में शरीर में रोगकारक पैथोजेनिक तथा मित्र बैक्टीरिया प्रोबायोटिक्स यानि बुरे तथा अच्छे बैक्टीरिया के एक्सपोज नहीं होने से हमारे शरीर में रोग से लड़ने वाली इम्युन सिस्टम का भलिभांति विकास नहीं होता जिसके कारण पश्चिमी विकसित देश ऑटोइम्यून रोग के चंगुल में विकासशील देशों की वनिस्पत सर्वाधिक ज्यादा फंसा हुआ है। धीरे-धीरे अब भारत में भी इस रोग ने पैर फैलाना प्रारम्भ कर दिया है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब तक विश्व में मान्यता प्राप्त </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रकार से भी अधिक ऑटोइम्यून डिजीज का पता चला है। उनमें प्रमुख निम्न हैं-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>1. <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (</span>SLE<span lang="hi" xml:lang="hi">) रोग: </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ल्यूपस संयोजी उत्तक (</span>Conective Tissue<span lang="hi" xml:lang="hi">) का प्रदाहात्मक (</span>Inflammatory) <span lang="hi" xml:lang="hi">रोग है जिसमें त्वचा से लेकर शरीर का एक-एक संस्थान जैसे श्वसन संस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फेफड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय एवं रक्त-वाहिनियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुर्दे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यकृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क यानि एक-एक अंग भयंकर रूप से दुष्प्रभावित होते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">SLE<span lang="hi" xml:lang="hi"> के प्रकार : ये प्राय: चार प्रकार के होते हैं- </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क)     ल्यूपस डर्मेटाइटिस (रक्तपित्तिका चर्मरोग)</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ख)     संस्थानिक रक्तपित्त का त्वग रोग (</span>Systemic Lupus Erythamatosus<span lang="hi" xml:lang="hi">) </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ग)     औषधियों के दुष्प्रभावजन्य सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथोमेटोसस (ड्रग इन्ड्यूस्ड </span>SLE<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घ)     जन्मजात ल्यूपस (</span>Neo Natal-Lupus<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वप्रथम त्वचा पर विशेष प्रकार के तितली आकार जैसी पपड़ी वाली दानेदार उबड़-खाबड़ रक्तपित्तिका धारियां पड़ जाती हैं। कभी-कभी छपाकी जैसी दानेवाली पित्तिका (</span>Butterfly Rash<span lang="hi" xml:lang="hi">) नाक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेहरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाल पर दिखाई देती है। अत्यधिक उग्र थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जोड़ों में दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलन एवं लालिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाल-झड़ना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्तहीनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्त के थक्का बनने की प्रवृत्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठण्ड के प्रभाव से अंगुलिया सफेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीली पड़ जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूज जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झुन-झुनी एवं सिहरन महसूस होती है। इसे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">रेनॉउड फेनामेनन</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं। पाचन संस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फेफड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय एवं रक्त-वाहिनियाँ भयंकर रूप से दुष्प्रभावित होते हैं। रक्त का जमना एवं रक्त-स्राव दोनों ही लक्षण दिख सकते हैं। छाती में दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एन्जाइना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल का दौरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र मार्ग का संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यीस्ट एवं सालमोनेला संक्रमण भी होता है। नाक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">होठों के म्यूकस मेम्ब्रेन का अल्सर या घाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बालों का पतला होना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बालों का झड़ना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घुटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंगुलियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कान या किसी छोटे-मोटे जोड़ों में दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लालिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनियमित हृदय एवं नाड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धड़कन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय आवरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुफ्फुस आवरण दाह (</span>Pericarditis Pleuritis<span lang="hi" xml:lang="hi">) नेफ्राइटिस आदि किडनी के अनेक रोग लक्षण दिखते हैं। अस्थि कोशिकाएं एवं उत्तक नष्ट होने लगते हैं। कैल्शियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन-डी की कमी के चलते ओस्टियोपेनिया तथा ऑस्टियोपोरोसिस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्भावस्था के समय जटिलताएं बढ़ जाती हैं। प्रीएक्लेम्पसिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय पूर्व प्रसव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम वजन का शिशु पैदा होना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी-कभी गर्भ स्राव या गर्भपात आदि कई लक्षण अन्य रोगों में भी दिखते हैं। इसका निदान कर पाना टेढ़ी खीर होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>2. इन्फ्ला<span lang="hi" xml:lang="hi">मेटरी बॉवेल डिजीज (</span>IBD<span lang="hi" xml:lang="hi">) </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब इम्यून सिस्टम ऑतों के बाह्य लाइनिंग पर प्रहार करके डायरिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट में मरोड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुदा द्वार से ब्लिडिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वजन की कमी पैदा करता है। आइ.बी.डी. के अंतर्गत मुख्यत: दो रोग हैं- अल्सेरेटिव कोलाइटिस तथा क्रोहन्स रोग।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>3. <span lang="hi" xml:lang="hi">मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एम.एस.)</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब इम्यून सिस्टम के विद्रोही सैनिक तंत्रिकाओं के सुरक्षा काच मायलिन पर धावा बोलकर उन्हें क्षतिग्रस्त कर देते हैं। परिणाम स्वरूप सारे शरीर में दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमजोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मांसपेशियों में ऐंठन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंधापन आदि रोग पैदा करते हैं। इसके लिए एण्टी सप्रेसिव इम्यूनसिस्टम वाली विभिन्न प्रकार की दवाइयां दी जाती हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्टेल स्टेमसेल वोल्यूम </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> इसू </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> पी. पेज </span>473-465<span lang="hi" xml:lang="hi"> ई.</span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> में प्रकाशित रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम के खास प्रकार के न्यूरोग्लिया सेल्स ऐस्ट्रोसाइट्स सेल्स ओलिगोडेन्ड्रोसाइट्स प्रीकर्सोर सेल की अच्छी तरह काम नहीं करने से रिमाइलिनेशन खत्म होने लगता है। दिमाग तथा मेरूदण्ड के नर्वफाइबर तंत्रिकाओं के चारों तरफ एक खास प्रकार की माइलिन शीथ का लेयर होता है। यह इन्सुलेटर की तरह कार्य करता है। नर्वफाइबर तंत्रिका को सुरक्षा प्रदान करता है जिससे इलेक्ट्रिकल सिग्नल का संचार अच्छी तरह कुशलता के साथ होने से शरीर के विभिन्न अंगों के मध्य जैव विद्युतीय चुम्बकीय आवेग ऊर्जा का संचार अच्छी तरह होने से वे अत्यन्त कुशलता एवं पूर्ण क्षमता से काम करते हैं। ओलिगोडेन्ड्रोसाइट्स प्रीकर्सोर सेल्स की निष्क्रियता एवं नष्ट होने से उनमें इन्फ्लामेशन प्रारम्भ हो जाता है। तंत्रिकाओं में जगह-जगह नन्हें-नन्हें पैचेज प्लेक्स लेशन धब्बे क्षत चीर दिखता है। परिणाम स्वरूप मल्टिप्ल स्क्लेरोसिस (एम.एस.) होता है। इसका निदान एम.आर.आइ. जाँच से होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ए.डी.एफ. के प्रभाव से तंत्रिका मायलिन सम्बन्धित दो जीन द्वञ्जह्रक्र तथा ररूक्क्य विशेष रूप से सुप्रभावित होने से क्षतिग्रस्त मायलिन की मरम्मत तथा उनका विकास सम्वर्द्धन एवं संरक्षण अच्छी तरह होता है। इससे एम.एस. तथा अन्य तंत्रिका संबंधित रोगों में भी अद्भुत लाभ मिलता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यूकेरियोटस में सेलुलर मेटाबॉलिज्म के केन्द्रीय नियामकों में प्रमुख ए.एम.पी.के. है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इन्ट्रासेलुलर ए.टी.पी. कम होने पर सक्रिय होता है। यह आटोफेगी एवं सेल ध्रुवीयता सहित सेलुलर प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है। पूर्ण उपवास एवं क्रमिक उपवास तथा लम्बे समय तक व्यायाम आदि तनाव से ए.एम.पी.के. सक्रिय होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ए.एम.पी.के. आवश्यकता के अनुसार यानि एक्टिवेटेड मोनोफ़ॉस्फेट काइनेस सेलुलुर ऊर्जा संवेदक के रूप में कार्य करता है। यह सेल के विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैटाबोलिक-पाथवेज के स्विच को ऑन-ऑफ करके हामोस्टैसिस को सही रखता है। इतना ही नहीं जिद्दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संग्रहित पेट की व्हाइट चर्बी को बेहतर ढंग से कम करता है। ए.डी.एफ. या अल्टरनेट-डे फास्टिंग से निष्क्रिय जीन द्वञ्जह्रक्र अर्थात् मैमेलियन टार्गेट ऑफ रेपमाइसिन की सक्रियता एवं एक्सप्रेशन बढ़ने से ऑलिगोडेन्ड्रोसाइटस प्रीकर्सोर तथा एपिडीमल नामक न्यूरोग्लिया सेल्स के उत्पादन एवं पुनजर्नन क्रिया बढ़ने से मायलिन का इन्फ्लामेशन स्केरिंग एवं स्क्लेरोसिस दूर होता है। क्षतिग्रस्त मायलिन को पुनर्जीवन मिलता है। इस रिसर्च के अनुसार अल्टरनेट-डे फास्टिंग के प्रभाव से ्ररूक्क्य तथा द्वञ्जह्रक्र जीन के एक्स्प्रेशन के प्रभाव से तंत्रिकाओं के मायलिन का संरक्षण एवं कोशिकाओं के ग्रोथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिप्रोग्रामिंग मेटाबॉलिज्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आटोफेगी तथा सेल पोलेरिटी का सही ठंग से नियमन नियंत्रण एवं नियोजन होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>4. <span lang="hi" xml:lang="hi">रयूमेटायड आर्थराइटिस</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इम्यून सिस्टम कुछ ऐसे खतरनाक एण्टीबॉडीज पैदा करती है जो हड्डियों तथा उनके जोड़ों के लिगामेन्टस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेण्डन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलेजन फाइब्रिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फाइब्रोब्लास्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इ.सी.एम. एक्स्ट्रासेलुलर (</span>Extracellular Matrix) <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉम्पोनेन्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रेन्यलेशनटिशू आदि पर हमला करके जोड़ों को क्षतिग्रस्त कर देते हैं। इसके लिए इन्जेक्शन तथा दवाइयां दी जाती है। इसमें दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक से अधिक जोड़ों में दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूजन तथा स्टीफनेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वजन गिरना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खून की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमजोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिमोग्लाबिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इ.एस.आर.</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर.ए. फैक्टर तथा ए.एन.ए. बढ़ा हुआ होता है।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>5. <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्यूलेयिन बेर सिण्ड्रोम (</span>Guillain-Barre Syndrome<span lang="hi" xml:lang="hi">) </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जी.बी.एस. में मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिकाओं पर इम्यून सिस्टम के उग्रवादी सैनिक हाथ-पैरों तथा अन्य अंगों पर प्रहार करके कमजोरी थकान आदि लक्षण पैदा करते हैं। इसमें प्लाज्मास्फेरेसिस प्रक्रिया से रक्त को छान कर इसका इलाज किया जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>6.   <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रोनिक इन्फ्ला</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मेटरी डिमाइलिनेटिंग पॉलीन्यूरोपैथी</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपर्युक्त एम.एस.</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जी.बी.एस. की तरह सी.आई.डी.पी. रोग में इम्यूनसिस्टम के धोखेबाज सैनिक तंत्रिकाओं (</span>Nerves<span lang="hi" xml:lang="hi">) पर प्रहार कर के रोगी को अपंग तक बना देते हैं। </span>30-40<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत रोगियों को क्रिवल चेयर पर जीवन बसर करना पड़ता है। इसमें प्रोग्रेसिव इम्यून मेडिएटेड सिमेट्रिकल-प्रीडॉमिनेन्ट पेरिफरल न्यूरोपैथी के कारण हाथ-पैर शरीर के हर अंग दुष्प्रभावित होता है। इससे अंगों में थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर का बेढ़ंगापन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुन्नपन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झुनझुनी आदि लक्षाण दिखते है।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>7. <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रेव्स डिजीज (</span>Graves<span lang="hi" xml:lang="hi">) डिजीज</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें इम्यून सिस्टम के जांबांज दुष्ट सैनिक एण्टीबॉडीज थॉयरॉयड पर प्रहार करके अत्यधिक मात्रा में हार्मोन पैदा करने के लिए विवश कर देते हैं जिससे रोगी के आँखों में सूजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उभाड़</span>, (Ophthalmic<span lang="hi" xml:lang="hi">) वजन की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल की धड़कन तेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाल रूखे-सुखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाल झड़ना आदि लक्षण दिखते हैं। इसमें थायरॉयड के ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। इसे ग्रेव्स आफ्थैलमोपैथी (</span>Graves Ophthalmopathy) <span lang="hi" xml:lang="hi">भी कहते हैं।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>8. <span lang="hi" xml:lang="hi">हाशिमोटोस (</span>Hashimoto’s<span lang="hi" xml:lang="hi">) थॉइरॉयडाइटिस</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इम्यून सिस्टम के उग्रवादी शैतान सैनिक एण्टीबॉडीज थॉइरॉयड पर हमला करके जहाँ ग्रेव्स डिजीज में हाइपर थॉयरॉयडिज्म रोग पैदा करते हैं वहीं इस रोग में थॉयरॉयड पर हमला करके थॉयरायड कोशिकाओं का विध्वंस करके थायॉयड हार्मोन को पैदा करने की शक्ति को तहस-नहस कर कम मात्रा में थायरॉयड हॉर्मोन वाला रोग हाइपोथाइरॉयडिज्म पैदा करते हैं। इसमें भी जोड़ो में दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कब्ज तथा बाल टूटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">याद्दाश्त की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवसाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीली बेजान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूखी-सुखी एवं ठण्ड के प्रति संवेदनशील सैंसिटिव चमड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनियमित एवं अति ऋतुस्राव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्भधारण में कठिनाई तथा अस्त-व्यस्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धीमी हृदय धड़कन के लक्षण दिखते हैं। हाइपोथायरॉयडिज्म तथा हाशिमोटोस थॉइरॉयडाइटिस दोनों मेटाबॉलिज्म स्तर पर मित्रवत हैं। सेक्स हार्मोन तथा ऑयोडिन का ज्यादा प्रयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेडियशन एक्सपोजर मुख्य कारण हैं। इसमें हार्मोन वाली दवा दी जाती है।</span></h5>]]>
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                                                            <category>इंटिग्रेटेड थेरेपी</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2023</category>
                                            <category>जुलाई</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 21:41:16 +0530</pubDate>
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