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                <title>देश के जननायकों की दृष्टि में पतंजलि के संन्यास दीक्षा महोत्सव का महत्व - योग संदेश</title>
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                <description>देश के जननायकों की दृष्टि में पतंजलि के संन्यास दीक्षा महोत्सव का महत्व RSS Feed</description>
                
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                <title>देश के जननायकों की दृष्टि में पतंजलि के संन्यास दीक्षा महोत्सव का महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री अमित शाह</span></strong></span></h4>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केन्द्रीय गृह मंत्री</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">        भाइयों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> स्वामी जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि संन्यासियों के लिए मैं आशीर्वचन कहूँ। स्वामी जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि मैं </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन पहले आया होता तो आयु के हिसाब से जरूर आशीर्वाद देता किन्तु आज मैं इनसे आशीर्वाद की कामना करता हूँ कि यह देश आजादी की शताब्दी मनाए तो समग्र विश्व में हर एक क्षेत्र में हमारा देश सर्वप्रथम हो। हमारे यहाँ जो संन्यास लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भगवा धारण करता है उसकी आयु उसकी विद्वता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके उद्देश्य कुछ नहीं देखते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसको प्रणाम करते हैं। मैं आप सभी को प्रणाम कर</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2807/desh-ke-jannayakon-ki-drishti-me-patanjali-ke-sanyas-diksha-mahotsav-ka-mahatva"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-12/243.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री अमित शाह</span></strong></span></h4>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केन्द्रीय गृह मंत्री</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">    भाइयों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> स्वामी जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि संन्यासियों के लिए मैं आशीर्वचन कहूँ। स्वामी जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि मैं </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन पहले आया होता तो आयु के हिसाब से जरूर आशीर्वाद देता किन्तु आज मैं इनसे आशीर्वाद की कामना करता हूँ कि यह देश आजादी की शताब्दी मनाए तो समग्र विश्व में हर एक क्षेत्र में हमारा देश सर्वप्रथम हो। हमारे यहाँ जो संन्यास लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भगवा धारण करता है उसकी आयु उसकी विद्वता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके उद्देश्य कुछ नहीं देखते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसको प्रणाम करते हैं। मैं आप सभी को प्रणाम कर अपनी बात की शुरुआत करना चाहता हूँ।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज मैं चौथी बार पतंजलि के प्रांगण में आया हूँ। हर बार मैं यहाँ से एक नई ऊर्जा नई चेतना और नई आशा लेकर वापस गया हूँ। इस बार भी समय की थोड़ी कठिनाई थी फिर भी स्वामी जी और आचार्य जी से पतंजलि के समग्र गतिविधियों का ब्यौरा लिया। मैं आज मन में शांति और संतोष लेकर जा रहा हूँ कि पतंजलि परिवार आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में देश के पुनरुद्धार का काम करेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश के पुनर्निर्माण का काम करेगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग आयुर्वेद और स्वदेशी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन तीनों क्षेत्रों में स्वामी रामदेव जी ने विगत </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल में अभूतपूर्व योगदान दिया है। कोई इंस्टिट्यूशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई संस्था जो योगदान ना कर पाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अकेले स्वामी जी ने अपने साथियों के साथ करके दिखाया। योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद और स्वदेशी के आंदोलन के साथ-साथ स्वामी जी ने अब शिक्षा पर भी ध्यान दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका मुझे बहुत आनंद है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज यहाँ पर भारतीय शिक्षा बोर्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि गुरुकुलम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम् और पतंजलि विश्वविद्यालय के माध्यम से मूल भारतीय परंपरा से हमारे चिर पुरातन ज्ञान को एक नई ऊर्जा मिलने जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका मुझे बहुत-बहुत आनंद है। स्वामी जी का संकल्प </span>1,00,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> विद्यार्थियों वाला पतंजलि ग्लोबल गुरुकुलम और पतंजलि ग्लोबल यूनिवर्सिटी स्थापित करना है। स्वामी जी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं और साधुवाद। हम आपके साथ हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईश्वर आपकी इच्छा को पूर्ण करेगा। आचार्य बालकृष्ण जी को देखकर मैं तो आश्चर्यचकित हूँ। आचार्य बालकृष्ण जी ने आयुर्वेद के परंपरागत ज्ञान को आधुनिक तंत्र परीक्षा की कसौटी पर भी खरा उतारकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वभर में जो औषधियों की संपदा को सूचीबद्ध करने का एक भगीरथ कार्य किया है। मैंने ढ़ेर सारे चरित्रों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ढ़ेर सारे काम करने वाले व्यक्तियों को ध्यान से सुना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्ण तन्मयता के साथ सुना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर जिस तरह से कंप्यूटर बोलता हो आचार्य जी वैसे ही आज मुझे आयुर्वेद के रहस्य समझा रहे थे। मैं आश्चर्यचकित हो गया जब मैंने सुना कि आचार्य जी ने आयुर्वेद में ५०० से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रकाशित कराए हैं। दुनिया में किसी भी क्षेत्र में सिद्धि पाने वाले </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत लोगों में से एक आचार्य बालकृष्ण जी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह आयुर्वेद के लिए गौरव रखने वाले सभी लोगों के लिए बड़ा आनंद और संतोष का विषय है। जब-जब मैं स्वामी जी को देखता हूँ तो आयुर्वेद और योग चिकित्सा करने वाला एक योगी ही दिखाई पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी विदेशी मल्टी नेशनल कम्पनियों के खिलाफ लड़ने वाला स्वदेशी का पुरोधा दिखाई पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी विदेशों में योग का ब्रांड एंबेसडर दिखाई पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी कालेधन के खिलाफ संघर्ष करने वाला एक संन्यासी दिखाई पड़ता है तो कभी शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा का संपूर्ण भारतीयकरण करने की दिशा में एक संकल्पवान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक शिक्षाविद् भी दिखाई पड़ता है और वैदिक शिक्षा को फिर से एक बार पुनर्जीवित कर मनुष्य के अंदर बढ़ी हुई एक शक्ति को आकार देना उसको मंच देने का हमारा जो परंपरागत वैदिक शिक्षा का जो ज्ञान है उस को आगे बढ़ाने वाला एक शिक्षाविद भी मैंने देखा। पतंजलि ने योग धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी धर्म के साथ शिक्षा धर्म को प्रामाणिकता के साथ जोड़ा है। मैं यहाँ से संतोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आनंद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा व आशा लेकर जा रहा हूँ।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी जी आज रामनवमी के पवित्र दिन आपने मुझे यहाँ बुलाया</span>, 300<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ की लागत से बने विश्वविद्यालय के भवन का आज मैंने लोकार्पण किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसकी मुझे प्रसन्नता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मैंने बालकृष्ण जी को कहा कि आप इतना सारा कार्य करते हैं जैविक कृषि के लिए भी कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा मेरे पास मिट्टी की जाँच के लिए मशीन तैयार है। सिर्फ </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख की लागत से सारे टेस्ट हो जाते हैं। आते-आते मैं मशीन देखकर भी आया। मैंने अभी इसके परीक्षण नहीं देखे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर मुझे विश्वास है कि जिस प्रकार का पतंजलि का रिकॉर्ड है उन सभी मानकों पर आप खरे उतरेंगे। </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> तरह के मापदंड इतने कम खर्चे में पूरा करना बहुत बड़ी बात है। पतंजलि योगपीठ ने करीब एक लाख किसानों को ऑर्गेनिक खेती के साथ जोड़कर पृथ्वी और पर्यावरण की रक्षा तो की ही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही निरामय जीवन जीने के लिए सात्विक आहार उपलब्ध कराने का कार्य भी किया है। जैविक आहार से लाखों लोगों को निरामय जीवन जीने का रास्ता भी प्रशस्त किया है। आज यहाँ पर चतुर्वेद पारायण यज्ञ भी समाप्त हुआ। ढाई सौ से ज्यादा संन्यासियों को मैं अपनी आँखों के सामने देख रहा हूँ और मैं आप सभी के चरणों में निवेदन करना चाहता हूँ कि संन्यासी किसी एक भूमि से बंधा नहीं होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी एक देश से बंधा नहीं होता। समग्र ब्रह्मांड के कल्याण की कामना करने वाले को हमारे यहाँ संन्यास्त धर्म में प्रवेश मिलता है। परंतु मैं आप सब से इसलिए एक प्रार्थना करना चाहता हूँ कि ब्रह्मांड का कल्याण तभी होगा जब भारत का कल्याण होगा। भारत के पुरातन वैदिक संस्कृति का कल्याण होगा। तो आप सबने जो अपने जीवन का एक मिशन बनाया है उसको मैं प्रणाम कर आप सबका मन से सम्मान करता हूँ। स्वामी रामदेव जी और आचार्य बालकृष्ण जी के योग धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वेद धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा धर्म और सेवा धर्म के साथ आप जीवन पर्यंत जुड़े रहें और संन्यस्त जीवन के सभी आदेशों को पूरा कर पाएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही प्रभु के श्री चरणों में प्रार्थना है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रों आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी विगत </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों से देश के प्रधान सेवक के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीयता और भारत के ज्ञान को उनके ब्रांड एंबेसडर बनकर समग्र विश्व में सम्मान दिलाने का काम किया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नरेंद्र भाई के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहले ही यूएन की मीटिंग में नरेंद्र भाई ने यूएन के सामने प्रस्ताव रखा कि हमारे पुरखों ने एक ज्ञान अर्जित किया है जो कोई दवाई के बगैर मनुष्य के शरीर को निरामय रख सकता है। और मुझे आनंद है कि </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> सितंबर </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> को जो प्रस्ताव रखा उसको पूरी दुनिया ने स्वीकार किया और पूरी दुनिया आज योग दिवस मना रही है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे ऋषि-मुनियों ने जो ज्ञान अर्जित किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह केवल हमारे लिए नहीं है। इस समग्र संसार के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समग्र ब्रह्मांड के कल्याण के लिए है। यहाँ पर संन्यासियों ने योगियों ने जिस योग के विज्ञान पर सालों तक हजारों सालों से काम किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसको आगे बढ़ाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंपरा को आगे बढ़ाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह परंपराओं को एक वैश्विक मंच देने का काम नरेंद्र मोदी जी ने किया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे देश को हर क्षेत्र में आगे लाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर क्षेत्र के अंदर मतलब उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थतंत्र और शिक्षा के क्षेत्र में भी आगे लाने के लिए ढेर सारे काम नरेंद्र मोदी जी ने किए हैं। मित्रों विश्वभर में बिखरी पड़ी गुलामी के कालखंड में भारत से चोरी की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उठाकर ले जाई गई और कई सारी मूर्तियों को मोदी जी ने अपने पुन: प्रतिष्ठित करके पुराने स्थान पर इसकी प्रतिष्ठा करने का काम किया है। इसके साथ-साथ सालों से मुगलों के समय से हमारी संस्कृति के हमारे धर्म के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे राष्ट्र के सन्मान चिन्ह ऐसे ही पड़े थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सारे हमारे राष्ट्र के उर्जा केंद्र को नरेंद्र मोदी जी ने फिर से एक बार उजागर करने का काम किया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राम जन्मभूमि का मसला द्वापर के समय से अटका हुआ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लटका हुआ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भटका हुआ था। एक सुबह सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर आते ही मोदी जी ने इसका भूमि पूजन किया और भव्य रामलला का मंदिर बनवाया। मुझे पूरा विश्वास है कि अगले रामनवमी में रामलला अस्थाई मंदिर में नहीं होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे और पूरे विश्व को आशीर्वाद देंगे। इसके साथ-साथ मोदी जी ने औरंगजेब द्वारा तोड़ा हुआ काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एक बार फिर से बनाया। इतने सालों के बाद बाबा विश्वनाथ के दरबार को पुनर्जीवित किया। केदारधाम पर नव निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात में सोमनाथ का मंदिर फिर से सोने का बन रहा है। पावागढ़ के मंदिर पर शक्तिपीठ को पुन: प्रतिष्ठित किया गया है। ढेर सारे हिंदू धर्म के मानचिन्हों को मोदी जी ने फिर से प्रतिष्ठापित करने का काम किया है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके साथ-साथ हमारी आजादी की लड़ाई जो एक परिवार के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई थी उसे व्यापकता प्रदान करते हुए उन्होंने सरदार पटेल का सबसे बड़ा लोहे का पुतला </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्टैच्यू ऑफ यूनिटी</span>Ó <span lang="hi" xml:lang="hi">बनाकर सरदार पटेल को अमर करने का काम किया है। डॉक्टर अंबेडकर के सभी स्थानों को एक म्यूजियम में बदला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनको गौरवान्वित किया है। पार्टीशन  की विभीषिका को एक सीख के रूप में याद करें इसीलिए उन्होंने इसको मनाना शुरू किया। जलियाँवाला म्यूजियम और अंडमान निकोबार के सभी द्वीपों को परमवीर चक्र विजेता सहित उनको नाम देकर उन शहीदों को श्रद्धांजलि देने का काम श्रद्धेय नरेंद्र मोदी जी ने किया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजपथ को कर्तव्य पथ में बदलकर मोदी जी ने हमें आने वाली आजादी की शताब्दी तक हमारे कर्तव्य के प्रति इंगित करने का काम किया है और उन्होंने लक्ष्य रखा है कि भारत </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बने। </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वें नंबर से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पांचवे नंबर पर भारत का अर्थ तंत्र आया है और पांचवें नंबर से तीसरे नंबर पर ले जाने का लक्ष्य मोदी जी ने रखा है। मुझे पूरा विश्वास है कि संतों व संन्यासियों के आशीर्वाद से यह लक्ष्य भी जल्द पूरा होगा। समय की मेरे साथ कठिनाई है परंतु आज मैं यहाँ से संतोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आनंद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा और आशा इन चारों को लेकर जा रहा हूँ कि आने वाले दिनों में हमारा देश निश्चित रूप से यश की दिशा में प्रसस्थ होगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मैं स्वामी रामदेव जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य बालकृष्ण जी और उनके विशाल पतंजलि परिवार को आपके आंदोलन के लिए ढ़ेर सारी शुभकामनाएं और साधुवाद देकर अपनी बात को समाप्त करता हूँ। भारत माता की जय! वंदे मातरम!</span></h5>
<p> </p>
<h4><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य मोहन भागवत</span></strong></span></h4>
<h4><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सर संघ चालक </span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेरा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">आप सभी नव-संन्यासियों को आशीर्वाद देने का या प्रबोधन देने का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ बोलने का अधिकार नहीं है। जैसा कि बाबा जी ने बताया है तो कभी-कभी ऐसा सूत्र आता है जिसके भाष्यकार होते हैं और भाष्यकारों के बाद फिर भी समझ में नहीं आता है तो कथा भाग में पुराणों के रूप में आता है। और उन कथाओं को बोलने वाले लोग होते हैं जिनको ग्रंथों का अध्ययन होता है। ऐसे ही आज आप मुझे सुनेंगे और समझेंगे। आज आप मुझे एक कथा वाचक के रूप में मानकर चलिए।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन आ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा भजन में था तो यह सनातन कहाँ से आ रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">और वह कब गया था</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">वह कहाँ गया था</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे कई प्रश्न हैं जिन पर लोग सवाल उठा सकते हैं। लोगों का स्वभाव रहता है कि सीधा किसी बात को विश्वास कर स्वीकार नहीं करते हैं। लेकिन बहुत थोड़े लोग हैं जो प्रश्न पूछते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मुझे लगता है कि सनातन आ रहा है। इसका अर्थ यह है सनातन कहीं गया नहीं था। वह है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह पहले भी था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज भी है और कल भी रहेगा। इसलिए ही वह सनातन है। उस सनातन की तरफ अब हमारा ध्यान जा रहा है और उसके अनेक लक्षण हैं जो प्रकट हो रहे हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे आजकल दुनिया में ये पश्चिम का जो विकास का मॉडल है इस पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। पश्चिम के बुद्धिजीवी जो बता रहे हैं वह अधूरी दृष्टी पर आधारित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जड़वाद पर आधारित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपभोग पर आधारित है। लेकिन उसके प्रयोग हुए </span>2000<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल बीत गए किन्तु  सुख नहीं मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शांति नहीं मिली। सारी दुनिया सोच रही है कि कहीं तो गड़बड़ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहाँ जाना है। अरे भाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के पास कोई तरीका है तो भारत को वो तरीका हमको देना चाहिए। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब भारत में भी देखिए कोरोना के बाद क्या हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पता नहीं वातावरण अपने आप बदला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को काढ़े का महत्व समझ में आ गया। लोगों को पर्यावरण समझ में आ गया। नियती ने भी एक ऐसा मोड़ लिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति ने भी एक ऐसी करवट बदली है कि हर किसी को सनातन के प्रति सजग होना पड़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन की तरफ उन्मुख होना पड़ेगा। और उसी का एक महत्वपूर्ण क्षण है कि जो मैं यहाँ देख रहा हूँ। सर्वस्व परित्याग करते हुए देश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज व मानवता की सेवा के लिए मेरा जीवन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी कल्पना करने वाले एक जगह  इतनी बड़ी संख्या में लोग बैठे हैं। वह भगवा पहनने के लिए तैयार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भगवा क्यों पहनना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भगवा केवल एक रंग नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे यहाँ भगवे का एक अर्थ है। भगवा पहन कर कोई चलता है तो बड़े से बड़ा राजकर्ता भी। जो अगर घुटने में दर्द है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीठ की बीमारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झुक नहीं सकता तो कम से कम गर्दन नीचे झुका कर नमस्कार तो करेगा ही। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वह भगवा पहनने वाला कौन है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">कैसा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मालूम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भगवा पहना है ना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका कारण हम जानते हैं। प्रकाश के आगमन का रंग भगवा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह-सुबह आकाश में वही दिखता है। सूर्योदय होते ही नींद छोड़कर के लोग काम में लग जाते हैं। आप कितने भी आलसी हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोने वाले हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भी दिन के प्रकाश में आप सो नहीं सकते। आपको कुछ अंधेरा करना ही पड़ता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य को जानने का एक ही मार्ग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माया को एक-एक करके छोड़ते जाओ। फिर जो रहता है वह तत्व रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका अनुभव होता है। यही एक कल्याण का मार्ग है। हमारे सामने जो भगवा रंग की प्रतिष्ठा है उसको ही धारण करते हुए उस प्रतिष्ठा को और बढ़ाने का व्रत आप लोग आज ले रहे हैं। यह ध्यान में रखना कि जो सनातन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसको किसी सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है। कसौटी पर वही एक सत्य सिद्ध हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाकी सब बदलता है। वह तब से चला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज भी है और कल भी रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आज के युग में उसके चलते भगवा वस्त्र की जो प्रतिष्ठा है उसको और उस व्रत को धारण करें। उसकी कीर्ति को हम और बढ़ाएंगे तो इस सनातन को अपने आचरण से लोगों को समझाना पड़ेगा। क्योंकि लोग ऐसे ही समझते हैं। लोगों का जीवन व्यर्थ जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग भटक रहे हैं। माया में फँस गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाहर नहीं निकल रहे। हृदय में करुणा आती है। यह करुणा संन्यासी की विशेषता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आप अब संन्यासी कहे जाएंगे क्योंकि शरीर पर भगवा होगा। लेकिन संन्यासी बनने के लिए संन्यास लेना पड़ता है। संन्यासी होने के बाद जमाने में आ गई विरक्ति छोड़नी होगी। भारत विश्व गुरु बनेगा और सारी दुनिया को सुख-शांति का संदेश देगा। आप लोगों को संबोधित करने का आपने मुझे इतना बड़ा सम्मान दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए आचार्य बालकृष्ण जी और परम पूज्य स्वामी रामदेव जी दोनों को धन्यवाद।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2022</category>
                                            <category>2023</category>
                                            <category>सनातन वैभव</category>
                                            <category>मई</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 May 2023 21:57:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>देश के जननायकों की दृष्टि में पतंजलि के संन्यास दीक्षा महोत्सव का महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">श्री अमित शाह</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केन्द्रीय गृह मंत्री</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2828/desh-ke-jananayakon-ki-drishti-me-patanjali-ke-sanyas-diksha-mahotsav-ka-matva"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-12/181.jpg" alt=""></a><br /><h4><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>श्री अमित शाह </strong></span></h4>
<h4><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>केंद्रीय गृह मंत्री</strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुझे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सदैव पतंजलि आकर नई ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई चेतना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई आशा मिलती है। यहाँ से आज मैं मन में शांति व संतोष लेकर जा रहा हूँ कि पतंजलि परिवार आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में देश का पुनरोद्धार करेगा। योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद और स्वदेशी के क्षेत्र में स्वामी जी ने विगत </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल में अभूतपूर्व योगदान दिया है। कोई इंस्टिट्यूशन कोई संस्था जो योगदान न कर पाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अकेले बाबा जी ने अपने साथियों के साथ किया है। योग आयुर्वेद और स्वदेशी के आंदोलन के साथ-साथ स्वामी जी ने अब शिक्षा पर भी ध्यान दिया है जिसका मुझे बहुत आनंद है। भारतीय शिक्षा बोर्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि गुरुकुलम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि विश्वविद्यालय तथा पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज के माध्यम से मूल भारतीय परम्परा से हमारे चीर पुरातन ज्ञान को नई ऊर्जा मिलने जा रही है। जल्द ही स्वामी जी का </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख विद्यार्थियों वाली पतंजलि ग्लोबल यूनिवर्सिटी तथा पतंजलि ग्लोबल गुरुकुलम् का सपना पूरा होगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी रामदेव जी को देखता हूँ तो इनमें आयुर्वेद और योग को पुनर्स्थापना करने वाला एक योगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मल्टी नेशनल कम्पनी के खिलाफ लड़ने वाला स्वदेशी का पुरोधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों में योग का एम्बेस्डर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कालेधन के खिलाफ संघर्ष करने वाला एक संन्यासी तथा शिक्षा का सम्पूर्ण स्वदेशीकरण करने वाला एक संकल्पवान शिक्षाविद दिखता है। इनमें वैदिक शिक्षा को पुन: जीवित करने का भगीरथ कार्य किया है। आचार्य जी को देखकर आश्चर्यचकित हूँ कि वो कैसे कम्प्यूटर की तरह आयुर्वेद के रहस्य समझा रहे थे। आयुर्वेद में </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक रिसर्च पेपर्स पब्लिश करना बहुत बड़ी बात है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए उनका अभिनन्दन। आचार्य जी के नेतृत्व में पतंजलि संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा निर्मित मृदा परीक्षण मशीन </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">धरती का डॉक्टर</span>Ó <span lang="hi" xml:lang="hi">का अवलोकन किया जिसके द्वारा सभी </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> तरह के मापदण्ड (पैरामीटर) बहुत कम खर्च में किए जा सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह एक अद्भुत मशीन है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य मोहन भागवत</span></strong></span></h4>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सर संघ चालक</span></strong></span> </h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोग</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन आ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सनातन कहाँ से आ रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">और गया कब था। सनातन पहले भी था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज भी है और कल भी रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसीलिए वह सनातन है। उस सनातन की तरफ अब हमारा ध्यान जा रहा है और उसके अनेक लक्षण हैं जो प्रकट हो रहे हैं। कोरोना के बाद वातावरण अपने आप बदला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को काढ़े का महत्व समझ में आ गया। नियती ने भी एक ऐसा मोड़ दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति ने भी एक ऐसी करवट बदली है कि हर किसी को सनातन के प्रति सजग होना पड़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन के तरफ उन्मुख होना पड़ेगा। और उसी का एक महत्वपूर्ण क्षण यह है कि जो मैं यहाँ देख रहा हूँ। सर्वसंग परित्याग करते हुए देश</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज मानवता की सेवा के लिए मेरा जीवन है ऐसी कल्पना करने वाले एक जगह इतनी बड़ी संख्या में लोग भगवा पहने बैठे हैं। भगवा केवल एक रंग नहीं है। हम जानते हैं प्रकाश के आगमन का रंग भगवा है सुबह-सुबह आकाश में वही दिखता है। सूर्योदय होते ही नींद छोड़कर लोग काम में लग जाते हैं आप कितने भी आलसी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोने वाले हो तो भी देन के प्रकाश में आप सो नहीं सकते। आपको कुछ अंधेरा करना ही पड़ता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ा त्याग इन नवसंयासियों के माता-पिता का है जिन्होंने अपने बच्चे को पाल-पोसकर देश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति और मानवता के लिए समर्पित कर दिया है। मैं पहले भी यहाँ आया हूँ लेकिन तब परिस्थितियाँ ऐसी नहीं थी। आज से कुछ वर्ष पहले का वातावरण ऐसा नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन में चिंता होती थी। किन्तु अब स्थितियाँ बदल चुकी हैं। यहाँ युवा संन्यासियों को देखकर सारी चिंताओं को विराम मिल गया है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में संन्यासियों को देश सेवा में समर्पित करना रामराज्य की स्थापना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषि परम्परा तथा भावी आध्यात्मिक भारत के स्वप्न को साकार करने जैसा है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी अवधेशानंद जी महाराज</span></strong></span></h4>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जूना पीठाधीश्वर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्य महामण्डलेश्वर</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प</span><span lang="hi" xml:lang="hi">तंजलि योगपीठ की यह ज्ञानधर्म धरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिग्राम के इस सारस्वत परिसर में जहाँ वेद भगवान प्रतिष्ठित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जागृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवंत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रखर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुखर और सर्वत्र आह्लद के रूप में अनुभव किए जा सकते हैं ऐसे इस दिव्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुपम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्दात भगवदीय परिवेश में जागृत पुरुष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जागरण के देवता के रूप में योगऋषि स्वामी रामदेव जी तथा अलौकिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुपम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अद्भुत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्दात विभूति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुश्रुत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाणिणि और पतंजलि जिनमें नित्य चैतन्य हैं ऐसे इस विश्व के अत्यंत अलौकिक महापुरुष आचार्य बालकृष्ण जी महाराज की प्रेरणा से पतंजलि में दिव्य कार्य हो रहा है। वैदिक काल को अब हम साकार होते देख रहे हैं। यह हमारी भारत की पूर्व की अपूर्वता यहाँ चैतन्य है। सम्यक कामनाओं का न्यास ही संन्यास है। हमारी भारत की पूर्व की अपूर्णता यहाँ चैतन्य है। यद्यपि परमात्मा सर्वत्र सभी में हैं तथापि भगवान् की रचना में मनुष्य की कोटि उत्तम है। एक ही रूप सभी मनुष्यों में समान रूप से मनुष्यों के समूह में भी ब्रह्मचर्य को श्रेष्ठ स्थान व उनसे भी महनीय वानप्रस्थ को लेकिन अत्यंत आदरणीय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सदैव वंदनीय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तम कोटि यदि है तो वह संन्यास है। उन्होंने भावी संन्यासियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अब आपकी परमहंस दीक्षा होनी है जिसमें आपको अपनी सभी एषणाओं से मुक्त होना है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज</span></strong></span></h4>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कोषाध्यक्ष- श्री राम मंदिर न्यास</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिक परम्परा में सर्वोच्चतम पुष्प संन्यास है। संन्यास अपने भीतर से खिलना चाहिए और संन्यासी को ऐसा अनुभव करना चाहिए कि मैं भगवत स्वरूप सृष्टि की सेवा के लिए समर्पित हो रहा हूँ। साधु निर्भार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्द्वन्द्व रहकर श्रीमद्भगवद्गीता के दैवीय सम्पद को अपने आचरण में जीते हैं। ऐसा ही श्रेष्ठ जीवन पूज्य स्वामी रामदेव जी जी रहे हैं। उनकी संन्यास परम्परा में सैकड़ों दिव्य संन्यासी भाई व साध्वी बहनें राष्ट्र को समर्पित हो रहे हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ से शताधिक विद्वान व विदुषियाँ संन्यास की दीक्षा लेंगे तथा </span>15000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा युवाओं ने संन्यस्त होने की रुचि दिखाई जिनमें </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रबुद्ध भाई-बहन आचार्य जी से ब्रह्मचर्य की दीक्षा लेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह रोमांचित करने वाला स्वर्णक्षण है। ये चमत्कार तो पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ही कर सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जल्द ही आप अपनी आँखों के सामने राम मंदिर का सपना पूरा होते देखेंगे। लगता है रामराज की स्वर्णिम शुरूआत हो चुकी है।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">साध्वी ऋतम्भरा जी</span></strong></span></h4>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थापिका- वात्सल्य ग्राम</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि के द्वारा पूरे विश्व में सनातन की प्रतिष्ठा के लिए बड़ा कार्य हो रहा है। पूज्य स्वामी जी के नेतृत्व में संन्यासियों की जो शृंखला तैयार की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पूरे विश्व में सनातन धर्म व भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करेंगे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संन्यासी होने का अर्थ पूर्ण विवेकी तथा पूर्ण श्रद्धा से आप्लावित होना है। श्रद्धा की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भक्ति की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समर्पण की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृतज्ञता की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्यता की पराकाष्ठा ही संन्यास है। यहाँ १०० से अधिक विद्वान भाई व विदूषी बहनें अपना सर्वस्व राष्ट्रसेवा में समर्पित कर संन्यास मार्ग पर चलने के लिए तत्पर हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ इतनी कम उम्र में संन्यासी बनने की प्रबल इच्छा के साथ संकल्पित युवाओं को देखकर मन प्रसन्न है। लगता है कि सनातन के ध्वजवाहक सनातन धर्म की प्रतिष्ठा के लिए पूरे विश्व में निकल चुके हैं। जल्द ही भारतीय परम्परा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन व संन्यास परम्परा का गौरव पुन: पूरे विश्व में प्रतिष्ठित होगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">साहेब शांति दा जी</span></strong></span></h4>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुपम मिशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संन्यास परम्परा में गुणातीत संन्यासी शीर्ष संन्यासी माना जाता है। स्वामी जी गुणातीत संन्यासी के अनुरूप सांसारिकता व भौतिकता से परे हैं। उन्होंने भावी संन्यासियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप ऐसे गुरु के सान्निध्य में दीक्षित हो रहे हैं जिनकी आज्ञा मात्र में रहने से ही हठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इर्ष्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अहंकार आदि दोष दूर हो जाते हैं और आप भीतर से संन्यासी हो जाते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी रामदेव जी तथा आचार्य बालकृष्ण जी के कुशल नेतृत्व में पतंजलि के माध्यम से स्वास्थ्य व शिक्षा का बहुत बड़ा आंदोलन चलाया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय शिक्षा बोर्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि गुरुकुलम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार्यकुलम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि विश्वविद्यालय तथा पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज के माध्यम से शिक्षा के स्वदेशीकरण का बड़ा कार्य किया जा रहा है। जनमानस को आरोग्यता प्रदान करने का कार्य भी पतंजलि के द्वारा किया जा रहा है। इनके साथ ही जैविक कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूचना तकनीकी तथा उद्योग में भी बड़ा कार्य किया जा रहा है। आने वाले समय में पतंजलि के संन्यासियों की भूमिका अहम रहेगी।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज</span></strong></span></h4>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थापक अध्यक्ष- पतंजलि योगपीठ</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषि</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिकाओं का वंश बढ़ाने के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने ऋषियों के उत्तराधिकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिनिधि बनने के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगधर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वेद धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संन्यास धर्म को राष्ट्रधर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युगधर्म और विश्वधर्म के रूप में प्रतिष्ठापित करने के लिए लोग स्वयं को गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं। स्वामी जी ने कहा कि पूरे विश्व में चारों ओर फैले ईष्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">द्वेष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घृणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक उन्माद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोगों के घात-प्रत्याघातों से बचने के लिए जब कोई मार्ग शेष नहीं बचेगा तो अंतत: योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म व पतंजलि की शरण में आना ही होगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संन्यास मर्यादा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरु व शास्त्र की मर्यादा में रहते हुए शताधिक नवसंन्यासी एक बहुत बड़े संकल्प के लिए प्रतिबद्ध हो रहे हैं। ब्रह्मचर्य से सीधे संन्यास में प्रवेश करना सबसे बड़ा वीरता का कार्य है। इन संन्यासियों के रूप में हम अपने ऋषियों के उत्तराधिकारियों को भारतीय संस्कृति तथा परम्परा के प्रचार-प्रसार हेतु समर्पित कर रहे हैं। संन्यासी होना जीवन का सबसे बड़ा गौरव है। अब ये युवा संन्यासी ऋषि परम्परा का निर्वहन करते हुए मातृभूमि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईश्वरीय सत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिसत्ता तथा अध्यात्मसत्ता में जीवन व्यतीत करेंगे। आज हमने नवसंयासियों की नारायणी सेना तैयार की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पूरे विश्व में संन्यास धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन धर्म व युगधर्म की ध्वजवाहक होगी। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज</span></strong></span></h4>
<h4 style="text-align:justify;" align="right"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महामंत्री- पतंजलि योगपीठ</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा संन्यास या संस्कृति पलायनवादी नहीं है। संन्यासी अध्यात्म से जुड़कर ध्यान में आप्लावित हो शून्य जैसी चैतन्यपूर्ण स्थिति में प्रवेश पाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शून्य में उतरकर ही सृजन एवं समाधान होता है। विवेक की पराकाष्ठा ही वैराग्य है। संन्यासी व्यक्ति इस संसार में रहते हुए सभी कामनाओं से विरक्त होकर निर्लिप्त बने रहते हैं तथा ईश्वर भक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरु भक्ति में लीन रहते हुए भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रति उदासीन रहते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी रामदेव जी महाराज ने योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद को प्रतिष्ठापित करने के साथ-साथ एक आदर्श संन्यासी के स्वरूप को जन-जन तक पहुँचाया है। इससे लोगों की आस्था सनातन व संन्यास धर्म के प्रति बढ़ी है। उनका मानस वैराग्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी ऋषि परम्परा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राचीन भारतीय मूल्यों व आदर्शों से जुड़ा है। संन्यास धर्म में कुछ पाने की इच्छा नहीं होती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ तो सर्वस्व त्यागकर आत्म बलिदान से राष्ट्र आराधना की भावना है। यदि आज भारत का युवा संन्यास मार्ग पर चलने को तैयार है तो देश के भावी भविष्य के लिए इससे शुभ कुछ नहीं हो सकता।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2023</category>
                                            <category>राष्ट्र निर्माण</category>
                                            <category>अप्रैल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Apr 2023 21:56:16 +0530</pubDate>
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