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                <title>बुढ़ापे का रोग प्रोस्टेटाइटिस एवं प्रोस्टेट कैंसर - योग संदेश</title>
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                <title>बुढ़ापे का रोग प्रोस्टेटाइटिस एवं प्रोस्टेट कैंसर</title>
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                        <![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डॉ. नागेन्द्र </span>'</strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नीरज</span>’<span>  </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">निर्देशक व चिकित्सा प्रभारी - योग-ग्राम</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हरिद्वार</span></strong></p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2813/budhape-ka-rog-prostetaitis-evm-prostate-cancer"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-12/361.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प</span><span lang="hi" xml:lang="hi">चास वर्ष की आयु के बाद पैंतीस प्रतिशत लोगों में प्राय: रात्रि को बार-बार पेशाब जाने की शिकायत हो जाती है। बूँद-बूँद करके पेशाब आता है। मूत्राशय में संचित मूत्र एक साथ नहीं निकल पाता है। ज्यादा जोर लगाकर मूत्र त्याग हेतु प्रयास करना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी पूर्ण सफलता नहीं मिलती है।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौढ़ावस्था के लोग इस प्रकार की शिकायत करते हुए मिले तो समझ जाइये कि वे पौरुष ग्रंथि की वृद्धि इनलार्जमेंट ऑफ प्रोस्टेट ग्लैंड या पौरुष ग्रंथि की सूजन अर्थात् प्रोस्टेटाइटिस से ग्रस्त हैं। कुछ लोगों में प्रोस्टेटाइटिस से उत्पन्न संवेदना रतिसुख की तरह लहरें उत्पन्न करती हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र एक साथ बाहर नहीं निकल पाने के कारण मूत्राशय में संचित मूत्र सड़ने लगता है। मूत्राशय में संक्रमण पैदा हो जाता है। कभी-कभी मूत्राशय के साथ समस्त मूत्र यंत्र ही संक्रमित होकर सूज जाता है। सामान्य अवस्था में मूत्र हमेशा स्वच्छ एवं पारदर्शी होता है। संक्रमण के कारण पेशाब धुंधला एवं गंदा हो जाता है तथा समय पर समुचित उपचार नहीं करने से संक्रामक रोग एवं अन्य जटिलतायें पैदा हो जाती हैं। दोनों गुर्दे खराब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्क्रिय एवं अक्षम हो जाते हैं। यूरेमिया की स्थिति पैदा होकर रोगी की मृत्यु तक हो सकती है। प्रत्येक गुर्दे </span>150<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>200<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम के होते हैं। दोनों गुर्दे एक घंटे में रक्त को छानकर </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> सी.सी. मूत्र कुल वजन का प्रति किलो ग्राम प्रति घंटा पैदा करते हैं। मूत्राशय की कुल क्षमता </span>400-500<span lang="hi" xml:lang="hi"> सी.सी. मूत्र की होती है। दिन भर में </span>180-200<span lang="hi" xml:lang="hi"> लीटर खून किडनी द्वारा छनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें </span>2.<span lang="hi" xml:lang="hi">५ लीटर मूत्र के रूप में बाहर निकलता है। माँसपेशियों की तंतुओं से बनी नौ से दस इंच लम्बी मूत्र नली यूरेटर द्वारा पेशाब गुर्दे से मूत्राशय में आकर जमा होता है। गुर्दे में करीब </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख फिल्टर यूनिट होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे में दो सौ लीटर खून छानकर रक्त शुद्ध करते हैं। इनमें केवल दो-ढ़ाई लीटर पेशाब जिसमें यूरिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रिटनिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नमक आदि वेस्ट टॉक्सिक मैटर मूत्राशय में जमा होकर मूत्र नली द्वारा बाहर निकल जाता है। रक्तदाब को नियमित बनाये रखने तथा लाल रक्त कणों के सृजन में भी गुर्दे अपनी भूमिका अदा करते हैं। मूत्राशय में कुल </span>400<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली. तक मूत्र जमा हो सकता है। इसकी दीवारें मजबूत इलास्टिक की तरह लचीली माँसपेशियों से बनी होने के कारण मूत्र को मूत्र नली से पूर्णतया बाहर निकालने में सक्ष्म होती हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुरुषों में मूत्राशय की ग्रीवा के नीचे मूत्र नली जहाँ से शुरू होती है। उसी के दोनों तरफ इर्द-गिर्द </span>9-9<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम की लम्बी अखरोट के आकार की प्रोस्टेट ग्रंथि जुड़ी होती है। यह बाहरी नली के प्रथम भाग को घेरे रहती है। प्रोस्टेट ग्रंथि एक दूधिया तरल पदार्थ बनाता है। यह वीर्य का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। यह शुक्राणुओं को पोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोजन एवं शक्ति प्रदान कर उन्हें सक्रिय बनाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौरुष ग्रंथि या प्रोस्टेट ग्लैण्ड के कारण ही पुरुषों में मूत्र नली आठ इंच लम्बी तथा महिलाओं में मात्र दो इंच लम्बी होती है। प्रोस्टेट ग्लैण्ड लैंगिक अवयव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो रति क्रिया में सहभागी है। यह मूत्राशय में खुलता है। रति क्रिया के दौरान यह एक दूधिया क्षारीय द्रव पैदा करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वीर्य के निर्माण तथा सहवास में सहायता करता है। प्राय: उम्र बढ़ने के साथ यह ग्रंथि बड़ी हो जाती है। पौरुष ग्रंथि के बढ़ जाने से मूत्राशय की ग्रीवा पर दबाव बढ़ जाता है। कई बरसों के दौरान धीरे-धीरे इसके आकार में वृद्धि प्रारम्भ हो जाती है। मूत्राशय पर नियंत्रण की खराबी से अनेक समस्यायें पैदा होती है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र निष्काषक नली यूरेथ्रा पर दबाव के कारण मूत्राशय ज्यादा देर तक फैला रहता है। परिणाम स्वरूप मूत्राशय की माँसपेशियों के लचीलेपन में कमी आने लगती है। पेशाब के अतिरिक्त दबाव के दुष्प्रभाव से गुर्दे में स्थित छानने वाली यूनिट नेफ्रान नष्ट होने लगती है। गुर्दे की क्षमता दुष्प्रभावित होती है। पॉलीसिस्टिक किडनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पथरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अतिसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेचिश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिक उल्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुर्दे के संक्रमण से फ्ल्यूड की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निम्न रक्तचाप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुर्दे पर आघात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चोट आदि कारणों से गुर्दे को पूर्ण पोषण तथा रक्त नहीं मिल पाता है। अनेक घातक रसायनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलावटी मसाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदूषण तथा औषधियों से गुर्दे के लाखों नेफ्रान यूनिट क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। दोनों गुर्दे में कुल </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख फिल्टर यूनिट होती है। इनमें दस लाख से ज्यादा नेफ्रान क्षतिग्रस्त या नष्ट होने पर गुर्दे का कार्य लड़खड़ाने लगता है। किडनी फेल्योर की स्थिति उत्पन्न होती है। गुर्दे के संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुमेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पॉलिसीस्टिक किडनी में गुर्दे हमेशा के लिए खराब हो जाते हैं। पेशाब में लम्बे समय तक रूकावट के कारण गुर्दे में स्थायी गड़बड़ी पैदा होती है। अनेक जटिलताएँ उत्पन्न हो जाती हैं। हाथ तथा पैरों में सूजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूख नहीं लगना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमजोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खुजली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्तचाप की वृद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उल्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साँस लेने में कठिनाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र कम हो जाना आदि लक्षण रोग की भयावहता का संकेत करते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र नली की बनावट में विषमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र नली का सँकरा होना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र नली में वाल्व (कपाट) की खराबी होना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चोट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आघात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूजाक आदि गुप्त रोगों से भी मूत्र में रुकावट आ सकती है। प्राय: देखा गया है कि </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के बाद शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है। पुरुषों में इस असंतुलन से प्रोस्टेट ग्लैण्ड में वृद्धि या सूजन हो जाती है। इस सूजन से मूत्र नली पर दबाव पड़ता है। पेशाब में रूकावट आ जाती है। प्रोस्टेट ग्लैण्ड के कैन्सर में भी मूत्र त्याग में रूकावट आती है। इन तकलीफों के चलते मूत्र त्याग के समय मूत्राशय पर अधिक दबाव डालने पर भी खाली नहीं होता है। बार-बार लघुशंका की इच्छा बनी रहती है। इस दबाव के कारण सूक्ष्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नाजुक एवं बारीक रक्तवाहिनियों की टूट-फूट से पेशाब में खून आने लगता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेट ग्लैंड की सामान्य एवं आम समस्यायें :</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(1)    <span lang="hi" xml:lang="hi">बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया:- सामान्यत: </span>45<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>55<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष के आयु के लोगों में प्रोस्टेट के आकार क्षमता में क्रमश: वृद्धि होने लगती है। अपने स्वाभाविक गोल्फ बॉल के आकार से तीन गुना बढ़ जाता है। आम प्रोस्टेट का आकार क्षमता लगभग </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> सी.सी. होता है। यदि आकार बढ़कर </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा होने लगे तो पोस्टवोइड रेसिड्यूअल यूरिन वाल्यूम का पता लगाते है। अधिकतम </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> सी.सी. तक बढ़ने पर चिकित्सक ऑपरेशन की सलाह देते है। यह स्थिति अत्यन्त कष्टप्रद यातनादायी होती है। यूरोफ्लो मीटरी प्रक्रिया से पेशाब की प्रवाह गति तथा बल का पता लगाते है। किडनी फंक्शन टेस्ट भी आवश्यक होता है। ब्लड टेस्ट के द्वारा जी.एफ.आर. जाँच भी करा लेना चाहिए। पी.एस.ए. जाँच भी करा लेना चाहिए। पी.एस.ए. यानि प्रोस्टेट स्पेसिफिक एण्टीजेन ग्लाइको प्रोटीन एन्जाइम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रोस्टेट ग्लैड के एपिथलियल सेल्स द्वारा स्रावित होता है। प्रोस्टेट वृद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया (बी.पी.एच.) प्रोस्टेट के इन्फेक्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन्फ्लामेशन इन्जुरी तथा प्रोस्टेटिक कैंसर में बढ़ जाता है। इसका सामान्य लेवल </span>0<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>5-0<span lang="hi" xml:lang="hi"> ठ्ठद्द प्रति द्वद्य होता है। कई लोगों में </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> नेनोग्राम प्रति मिलीलीटर होने के बावजूद भी कैंसर नहीं होता है। लाल टमाटर उबालकर खाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छाछ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंकुरित मसूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रीन-टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रर्याप्त मात्रा में साग-सब्जियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताजे फल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोज व्यायाम करने तथा तनाव मुक्तरहने से पी.एस.ए. कम होने लगता है। मूँगफली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बादाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अखरोट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काजू आदि भीगोकर छिलका हटाकर खायें। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्यत: प्रोस्टेट की वृद्धि उम्र के साथ जुड़ा हुआ है। दूसरा कारण टेस्टिकल्स यानि अण्डकोष से जुड़ा हुआ है। अण्डकोष टेस्टोस्टोरॉन तथा थोड़ी मात्र में स्त्री-हार्मोन एस्ट्रोजन बनाता है। उम्र बढ़ने के साथ या किसी कारण वश टेस्टोस्टेरॉन का लेवन रक्त में कम हो जाता है तथा एस्ट्रोजेन का लेवल बढ़ जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बी.पी.एच. का खतरा बढ़ जाता है। एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ना भी बी.पी.एच यानि प्रोस्टेट वृद्धि का कारण होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक अन्य रिसर्च के अनुसार पुरुष हार्मोन डिहाइड्रोटेस्टोस्टरोन (डी.एच.टी.) का प्रोस्टेट ग्रंथि के विकास एवं वृद्धि में मुख्य भूमिका होती है। डी.एच.टी. टेस्टोस्टेरॉन का मेटाबोलाइट्स है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु डी.एच.टी. टेस्टोस्टेरॉन के मुकाबले </span>5-6<span lang="hi" xml:lang="hi"> गुना सर्वाधिक शक्तिशाली होता है। उम्रदराज लोगों में टेस्टोस्टेरॉन का लेवल कम होता चला जाता है तथा डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरॉन का लेवल बढ़ता चला जाता है। डी.एच.टी. का लेवल बढ़ने से प्रोस्टेट की कोशिकाए भी बढ़कर प्रोस्टेट वृद्धि रोग पैदा करती है। </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल की उम्र तक प्रोस्टेट ग्लैंड की वृद्धि कम ही पायी जाती है। </span>51<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष वालों में </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष से ज्यादा उम्र वालों में </span>90<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत प्रोस्टेट वृद्धि के लक्षण पाये जाते है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">१</span>980<span lang="hi" xml:lang="hi"> ई में विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि के एक अन्य प्रकार क्लीयर सेल क्रिब्रिफॅार्म हाइपरप्लेसिया (ष्टष्टष्ट॥) जिसमें गांठदार वृद्धि होती है। यह एक प्रकार का आटोइम्यून डिजीज़ है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेट गंथि वृद्धि पारिवारिकका इतिहास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्त संचार संबंधित बीमारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टाइप-</span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> डाइबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नपुंसकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यायाम की कमी आदि मुख्य कारण हैं। प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि होने पर दिनभर में </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> बार रूक-रूक कर के पेशाब होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र त्याग एवं रतिक्रिया के बाद तीव्र दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र का असामान्य रंग एवं गंध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र नली एवं पेशाब में रूकावट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेशाब के साथ खून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र नली संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुर्दे की क्षति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पथरी आदि लक्षण दिखते है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(2)     <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेटाइटिस:-</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> यह भी चार प्रकार का होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(<span lang="hi" xml:lang="hi">क)</span>    <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्यूट बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस में अचानक तीव्र लक्षण होते है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(<span lang="hi" xml:lang="hi">ख)</span>   <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रोनिक बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस- इसमें से लक्षण तीव्र न होकर कम हो जाते है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लम्बे अवधि तक चलते है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(<span lang="hi" xml:lang="hi">ग)</span>    <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रोनिक प्रोस्टेटाइटिस या क्रोनिक पल्विक पेन सिण्ड्रोम के अन्य कई कारण होते है। नर्वससिस्टम की गड़बड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इम्यूनसिस्टम का अस्त-व्यस्त होना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्व का संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूजन तथा अनियमित हॉर्मोन का स्राव।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">(<span lang="hi" xml:lang="hi">घ)</span>    <span lang="hi" xml:lang="hi">एसिम्प्टोमेटिक इन्फ्लामेटरी प्रोस्टेटाइटिस में कोई कारण नहीं होता है और न कोई लक्षण दिखते है फिर भी प्रोस्टेट का इन्फ्लामेशन सूजन पाया जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र त्याग के समय जलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तड़पन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूकावट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रात्रि को बार-बार मूत्र त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धूंधला मूत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र में खून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमर तथा जंघा मूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नितम्ब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्रंश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अण्डकोष तथा गुदा द्वार के मध्य दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्दनाक वीर्य स्खलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठण्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मांस पेशीय दर्द आदि लक्षण दिखते है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">युवा एवं मध्यवय</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> का प्रोस्टेट वृद्धि मूत्र तथा प्रजनन संस्था के संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एच.आई.वी.</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एस.टी.डी. आदि यूरिनरी कैथेटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेट उत्तको वायोप्सी हेतु सेम्पल लेते समय इन्फेक्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन्जुरी एवं इन्फ्लामेशन के कारण हो सकता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेटाइटिस के कारण खून का संक्रमण बैक्टेरेमिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नितम्ब एवं रीढ की हड्डी का संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेट का घाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अण्डकोष नली सूजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपिडिडीमाइटिस आदि अन्य उपद्रव हो सकते है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके कारण दुश्चिन्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नपुंसकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐरेक्टाइलडिस फंक्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीर्य तथा शुक्राणु के दुष्परिवर्तन होने से बच्चे पैदा करने में अक्षम एवं असमर्थता पैदा होती है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पेट के निचले हिस्से में मूत्राशय के नीचे मूत्र मार्ग के दोनों तरफ मलाशय के आगे </span>9-9<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम की प्रोस्टेट ग्रन्थि कुल </span>18<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम की होती है। टेस्टोस्टोरोन हार्मोन द्वारा यह सक्रिय होकर तरल दूधिया पदार्थ प्रोस्टेटिक फ्ल्युड पैदा करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सेमिनल वेसिकल्स ग्लैंड से स्रावित द्रव वीर्य के साथ मिलकर शुक्राणु को ताकत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गति एवं शक्ति प्रदान करता है। प्रोस्टेटिक फ्ल्युड में जिंक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइट्रिक एसिड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैल्शियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फास्फेटस तीन प्रकार के प्रोटीन एसिड फास्फेट प्रोस्टेट सेल द्वारा पी.एस.ए. का नियमन करता है। पी.एस.ए. प्रोटिएसेस एन्जाइम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका एण्टीक्लॉटिग प्रभाव थक्का बनाने वाले सिमेनोजेलिन्स को ब्रेकडाउन करके उसे द्रव रूप में शुक्राणु स्खलन को सहज बनाकर गर्भ स्थापना में सहायता करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कैल्सिटोनिन एन्जाइम स्पर्म सेल्स के ग्रीवा से जुड़कर उसके चाल को तेज करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि अण्डाणु से शीघ्रता एवं सहजता से मिल सके। प्रोस्टेटिक फ्ल्युड में साइटोकाइन्स तथा असंख्य सूक्ष्म तत्व होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सीमेन वॉल्युम बढ़ जाने से गर्भ स्थापना में सहायता मिलती हैं। प्रोस्टेट ग्रंथि में अनेक नलिकाए होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनसे उपरोक्त प्रोस्टेटिक फ्ल्युड का स्राव होता रहता है और इनका सम्बन्ध वीर्य स्खलन नलिका से जुड़ा होता है। नलिका के अंतिम सिरे फाइब्रोमस्कुलर की मांसपेशीय संकोचक एकिनी कपाट होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वीर्य स्खलन के समय खुलता है। बाकी समय मूत्र निष्कासन शुक्रवाहिका नली के लिए बन्द रहता है। पुरुषों के दोनों अण्डकोश के वासडिफरेन्स सेमिनल वेसिकलडक्ट से तथा सेमिनलवेसिकल डक्ट एजाकुलेटरी डक्ट यानि वीर्य स्खलन नलिका से प्रोस्टेट फ्ल्युड के साथ सीमेन में मिल जाता है तथा अन्य एन्जाइम एवं पोषक तत्व होते है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वीर्य एवं शुक्राणु को शक्तिमान बनाते है। वास्तव में वीर्य शुक्राणु संयुक्त तरल पदार्थ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो रति क्रिया या स्वप्न दोष के दौरान होने वाले वीर्य स्खलन के साथ मूत्र मार्ग से निकलता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेटग्लैंड का कैंसर </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेट कैंसर की असामान्य घातक मारक वृद्धि से ट्यूमर या गांठ बन जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसे प्रोस्टेट कैंसर कहते है। कोशिकाओं के फैलने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास एवं वृद्धि के आधार पर से दो भाग में विभाजित किया जा सकता है। यह बहुत तेजी से फैलने वाला आक्रामक या एग्रेसिव तथा धीरे-धीरे फैलने एवं विकसित होने वाला नॉन एग्रेसिव प्रोस्टेट कैंसर कहलाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बुढ़ापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारिवारिक इतिहास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काले लोगों में अफ्रीकन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नार्थ अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नर्दन यूरोप में लाल मांस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धूम्रपान तथा हायर एजीइ कूकिंग प्रोसेस से तैयार आहार का प्रयोग करने वालों में प्रोस्टेट कैंसर होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेट कैंसर का उपचार एवं सही निदान नही होने पर कैंसर रक्त प्रवाह के द्वारा मूत्राशय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्थियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रीढ की हड्डियों तक पहुच जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका दुष्प्रभाव पैरों तथा मूत्राशय तक पहुँचता है। इसे मेटास्टेटिक कैंसर कहते है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए प्रारम्भिक जाँच पी.एस.ए. द्वारा की जाती है। पी.एस.ए. वॉल्यूम तथा पी.एस.ए. घनत्व की जाँच होती है। ज्यादा घनत्व कैंसर होने के खतरे का सूचक है। डिजिटल रेक्टल एक्जाम के अपेक्षा डिजीटल रेक्टल एक्जाम के अर्न्तगत विशेषज्ञ डॉक्टर लुब्रिकेटेड ग्लोव्ड अंगूली गुदाद्वार के अन्दर घुसाकर प्रोस्टेट की जाँच करता है। प्रोस्टेट के असामान्यता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेक्सचर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शेप-साइज का पता लगाने के बाद किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर अन्य जाँच हेतु परामर्श देता है। महिलाओं मे डी.आर.इ. गर्भाशय एवं अण्डाशय के कैंसर के जाँच हेतु किया जाता है। पी.एस.ए. जाँच ज्यादा सटीक है। कभी-कभी कैंसर की स्थिति में पी.एस.ए. का लेबल सामान्य होता है। पेशाब तथा वीर्य के साथ खून आना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र त्याग अत्यन्त यातनादायी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बार-बार मूत्र त्याग खास करके रात्रि काल में रूक-रूक कर के पेशाब आना अचानक एरेक्टाइल डिसफंक्शन नपुंसकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नामर्दी की स्थिति होने पर प्रोस्टेट कैंसर की संभावना हो सकती है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धीरे-धीरे फैलने वाला नन प्रोग्रेसिव कैंसर का उपचार नेचुरोपैथी योग एवं आयुर्वेद के समन्वित प्रयोग से चमत्कारिक लाभ मिलता है। प्रोग्रेसिव उग्र एवं मेटास्टेसिस अस्थि मेटास्टेसिस का उपचार के लिए सर्जरी रेडिएशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केमोक्रेयो थैरेपी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हार्मोन थैरेपी तथा इम्यूनोथैरेपी दिया जाता है। प्रोस्टेटेट का पूर्णतया आपरेशन के बाद पेशाब पर नियंत्रित का अभाव तथा नपुंसकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नामर्दी एवं इरेक्टाइल डिस फंक्शन हो जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रोग के लक्षण</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पेशाब में जलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र रोक पाने में असमर्थता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शीघ्र लघुशंका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विलम्ब से मूत्र त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बार-बार मूत्र त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र त्याग की प्रवृत्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र की धार एवं दाब में कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ बूँदे कपड़े पर पड़ने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रात्रि को बार-बार पेशाब जाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र के हर समय टपकने तथा कपड़ा खराब होने का भय आदि लक्षण परिलक्षित होते हैं। प्रोस्टैट कैंसर में हल्का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गहरा एवं अकड़न-जकड़न स्टीफनेस वाला दर्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अण्डकोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नितम्ब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पसली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुदा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेडू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊपरी जाँघ तथा पेडू में महसूस होता है। भूख एवं वजन की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मितली तथा उल्टी के लक्षण दिखते है। तीव्र प्रोस्टेटाइटिस में कुछ रोगियों के मूत्र मार्ग से एक पतला चिपचिपा द्रव निकलने लगता है। इस लक्षण को प्रोस्टेटोरिया कहते हैं। रोग ठीक होने पर स्राव रूक जाता है। रोग में संक्रमण होने से दर्द होता है। रोग बढ़ने पर नपुंसकता आ सकती है। कभी-कभी कामुक उत्तेजना बढ़ती है। उपचार नहीं होने पर पेशाब कम होते-होते अचानक रूक सकता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्राकृतिक उपचार</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्राकृतिक उपचार में अन्य रोगों की तरह सारे शरीर में संचित विकार ही पौरुष ग्रंथि की सूजन तथा वृद्धि का मुख्य कारण है। जिसके शरीर में विषाक्त पदार्थ एवं विषमयता अधिक होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसें यह रोग कठिन एवं जटिल हो जाता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक चिकित्सा के अनुसार तीव्र तथा जीर्ण प्रोस्टेटाइटिस कीटाणुओं के संक्रमण से होता है। तीव्र प्रोस्टेटाइटिस में पेशाब के संक्रमण के सभी लक्षण दिखते हैं। पेरिनियल (गुदा द्वार तथा अण्डकोष के मध्य) क्षेत्र में तीव्र दर्द तथा कम्पन हो सकता है। आरम्भ में माना जाता था कि वृद्धावस्था के कारण अण्डकोष से निकलने वाले पुरुष हार्मोन एण्ड्रोजेन्स तथा स्त्री हार्मोन एस्ट्रोजेन्स की अधिकता के कारण पौरुष ग्रंथि में विकार उत्पन्न होता है। नियोप्लास्टिक टाइप मल्टीपल तन्तुमय कोषों की वृद्धि के कारण पौरुष ग्रंथि का आकार बढ़ता जाता है। इसके बढ़ने से मूत्र प्रेरक यौन क्रिया में वृद्धि तथा ह्नास के लक्षण दिखते हैं। प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि या सूजन में फाइब्रोएडीनोसिस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्र मार्ग की वक्रता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्राशय ग्रीवा का तंग होना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूत्राशय में निरन्तर मूत्र भरे रहने के कारण संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदाह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थूलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पथरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाइड्रोनेफ्रोटिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुदा मार्ग में दबाव के कारण कब्ज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुदभ्रंश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्तार्श आदि रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पौरुष ग्रंथि तथा इनसे उत्पन्न सभी रोगों में सर्वप्रथम रोगी के पेडू तथा गुदाद्वार पर मिट्टी की पट्टी दें। पेट तथा रीढ़ की मालिश देकर नीम के पत्ते उबले गुनगुने पानी का एनीमा दें। गरम-ठण्डा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कटि स्नान पौरुष ग्रंथि की अत्यन्त कारगर चिकित्सा है। पेशाब में कष्ट होने पर गरम पानी के टब में </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिनट बैंठें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैर बाहर रखें। गरम कटिस्नान से मूत्र नली शिथिल हो जाती है। रूकावट दूर होने से मूत्र त्याग में सहजता होती है। पौरुष ग्रंथि की सूजन कम होती है। टब के अभाव में गुदाद्वार तथा जननेन्द्रिय के मध्य के स्थान पेरिनियम पर तीन मिनट गरम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीन मिनट ठण्डा क्रम से </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> बार सेक बस्ति प्रदेश पर देकर टी-पैक दें। भीगे-निचोड़कर सूती कॉपिन के ऊपर ऊनी कॉपिन पहनें। यही बस्ति प्रदेश का टी-पैक हैं। दर्द एवं पेशाब में तकलीफ होते ही पैरों की लपेट देकर थैली से पैरों को गरम रखें। दर्द में राहत मिलने पर पैरों को गरम पानी में रखकर गरम-ठण्डा कटि स्नान लें। दर्द की स्थिति में ठण्डा कटि स्थान लेने से तकलीफ बढ़ जाती है। तकलीफ कम होने पर रोगी की स्थिति के अनुसार वाष्प-स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरमपाद-स्नान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गीली चादर लपेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थर्मोलियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूर्य-स्नान आदि उपचार बदल-बदलकर देने से प्रोस्टेट ग्लैण्ड धीरे-धीरे स्वाभाविक स्थिति में आ जाती है। मूत्र त्याग की कठिनाई दूर होती है। मूत्रावरोध को दूर करने में कैथेटर का प्रयोग अत्यन्त सावधानी से करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्यथा संक्रमण हो सकता है। अश्विनी मुद्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूलबंध तथा दीर्घ श्वसन प्राणायाम करें। योग चिकित्सा में गणेश क्रिया करें। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मल त्याग करते समय बायें हाथ की नाखून कटी हुई मध्यमा या अनामिका अंगुली को गुदा के अंदर प्रवेश कर चारों तरफ तथा आगे की ओर फिराते एवं दबाते हुए मालिश करें इसे गणेश क्रिया या डिजिटल रेक्टल इक्सरसाइज या मसाज कहते हैं। </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> सेकण्ड तक गिनते हुए सांस निकालें। रात्रि को सोते समय </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> बार यह क्रिया करें। साँस निकालकर गुदा द्वारा तथा मूत्रेन्द्रिय को आन्तरिक बल से ऊपर की ओर खींचते हुए संकोचकर मूलबन्ध करें। मल त्याग के समय तथा दिन में कभी भी घोड़े की तरह गुदा को </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> बार संकोच करें तथा छोड़ें। प्रोस्टेट ग्लैण्ड की मृदुता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कठिनता तथा प्रमाण का पता लग जाता है। रेक्टल म्यूकोसा तथा सैमिनल वैसिकल्स मृदु तथा चौड़ी प्रतीत होती है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आसनों में उदर शक्ति विकासक क्रिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वज्रासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पद्मासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगमुद्र्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गोमुखासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तानपादासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पवनमुक्तासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शलभासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भुजंगासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपरीत करणी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वांगासन तथा शवासन करें। योग की क्रियायें किसी योग्य योग विशेषज्ञ के निर्देशन में करें। आहार-चिकित्सा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षार प्रधान शोधक आहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताजे फल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्जी तथा अंकुरित अनाज आदि के प्रयोग से तन तथा मन की सफाई करें। एक सप्ताह तक फल तथा सब्जियों के रस पर रहें। आवश्यकता एवं रोग की स्थिति के अनुसार तीन दिन नीबू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी तथा तीन दिन सिर्फ पानी पर उपवास करें। सामान्य आहार में मेथी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पत्तागोभी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पालक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लौकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टिण्डा आदि की सब्जी खायें। फलों में अंगूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पपीता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौसमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीबू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नाशपाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्राबेरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आडू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आलु बुखारा तथा सेब खायें। मेथी तथा तिल का अंकुरण खायें। सौ ग्राम तिल</span>, 50<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम गुड़</span>, 15<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम अजवाइन इन तीनों को मिलाकर पन्द्रह लडडू बनायें। एक-एक लडडू सुबह-शाम खायें। पेट ठीक रहने पर भुने चने खा सकते हैं। भोजन में पालक के रस की चार घंटे पूर्व गूँथी चोकर समेत मोटे आटे की रोटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सलाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्जी पर्याप्त मात्रा में लें। प्रोस्टेट ग्लैण्ड से निकलने वाले स्राव में जस्ता होता है। जस्ता की कमी से प्रोस्टेट ग्लैण्ड सम्बन्धी विकार होते हैं। इसकी आपूर्ति के लिए कद्दू के बीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेवर्स यीस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काजू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बादाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अखरोट भीगोकर छिलका हटाकर नारियल आदि मेवे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गेहँू का अंकुरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूर्यमुखी तिल आदि के बीज का प्रयोग अधिक करें। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी पोषण विशेषज्ञ हैरी हॉवेल के शोधों के अनुसार कद्दू के बीज मे एण्ड्रोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जस्ता तथा कुछ ऐसे हार्मोन पाये जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रोस्टेट ग्लैण्ड को स्वस्थ रखते हैं। ये हार्मोन यौन क्षमता को बनाये रखते हैं। महिलाओं में यौन हार्मोन को सक्रिय रखते हैं। गर्भधारण की क्षमता को बढ़ाते हैं। स्तन को मजबूत तथा सुडौल बनाते हैं। गुर्दे तथा हृदय रोग से बचाते है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में शर्वड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ द्वारा सैंतालीस हजार पुरुषों पर छब्बीस साल तक एक अपूर्व शोध कार्य किया गया। इनमें </span>46<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>188<span lang="hi" xml:lang="hi"> पुरुष प्रोस्टेट ग्लैण्ड के कैंसर से ग्रस्त थे। वाशिंगटन के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान से प्रकाशित जर्नल में इस शोध कार्य की सविस्तृत चर्चा की गई है। इस शोध निष्कर्ष के अनुसार जो व्यक्ति टमाटर से बने व्यंजनों का सेवन बार-बार प्रति सप्ताह करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे प्रोस्टेट ग्लैण्ड की कैंसर होने की संभावना </span>45<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी कम हो जाती है। अध्ययन के अनुसार टमाटर के रस तथा सॉस की अपेक्षा मंद आँच पर </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिनट तक उबालकर पकाया गया टमाटर ज्यादा फायदेमंद है। टमाटर में लाल केरोटिनाइड पिगमेंट लाइकोपिन पाया जाता है। लाइकोपिन प्रबल एण्टी ऑक्सीडेन्ट है। टमाटर को पकाने से गर्मी के कारण टमाटर की कोशिकाए फटकर लाइकोपिन का स्राव बढ़ा देती है। एण्टी ऑक्सीडेन्ट लाइकोपिन प्रोस्टेट कैंसर से लोहा लेने में सक्षम है। इस संस्थान के डॉ. एडवर्क के अनुसार प्रकृति ने टमाटर के अतिरिक्त स्ट्राबेरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाल अमरूद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तर्बूजा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाल गाजर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पपीता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीठी लाल मिर्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैशन फ्लावर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फु्रट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रेप फु्रट में प्रोस्टेट कैंसर से बचने के गुण भरे हैं। प्रोस्टेट कैंसर से लोहा लेने में टमाटर का स्थान मेरिट लिस्ट में प्रथम रहा। इंग्लैण्ड के कील विश्वविद्यालय के रसायन विभागाध्यक्ष प्रो. जार्ज ट्रस्कॉट की खोजों एवं शोध के अनुसार बीटा कैरोटिन की अपेक्षा टमाटर का लाइकोपिन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में चौगुना प्रभावी है। इस अध्ययन के अनुसार टमाटर का लाइकोपिन धूम्रपान तथा अन्य धात्त्विक प्रदूषणों से भी सुरक्षा प्रदान करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कम वसा वाला आहार लें। अधिक वसा वाले आहार टेस्टोस्टेरॉन तथा अन्य हार्मोन का उत्पादन बढ़ा देता है। जो प्रोस्टेट कैंसर का कारण है। अत्यधिक आंच ट्रान्स एवं सेचुरेटेड फैट वाले आहार जैसे- मांसाहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कचौरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पकौड़ी आदि नही लें।   </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह आसन तथा सैर आदि व्यायाम के बाद पिसी छोटी इलायची खाकर दूध पिएँ। जौ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गेहूँ तथा कुल्थी को चौबीस घंटा पूर्व चौगुने पानी में भिगोकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस पानी को लगातार तीन दिन तक पीयें। नारियल का पानी तथा भोजनोपरांत </span>300<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम छाछ में दस ग्राम धनिये का रस मिलकार पीयें। मूली तथा मूली के पत्ते का रस सौ ग्राम रोज लें। पेशाब खुलकर आता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद एवं जड़ी-बूटी चिकित्सा</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्य गोखरू क्वाथ </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम तथा दिव्य दशमूल क्वाथ </span>200<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम दोनों को मिलकार संग्रहित करें। उनमें से </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम लेकर </span>400<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली पानी में पकायें। </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिली- शेष रहने पर खाली पेट या भोजन के एक घण्टा पूर्व सेवन करें। दिव्य प्रोस्टेट ग्रीट वटी भोजन के पहले तथा दिव्य चन्द्रप्रभा वटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शीलाजीत रसायन वटी </span>2-2<span lang="hi" xml:lang="hi"> वटी भोजन के बाद गुन-गुने जल से सेवन करें। पतंजलि न्यूट्रीला डेली एक्टिव दिन में </span>2-2<span lang="hi" xml:lang="hi"> कैप्सुल प्रात: सायं भोजन के पूर्व लें। नीम तथा पीपल के पत्ते का स्वरस प्रात: खाली पेट लें।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धैर्य तथा विश्वास के साथ प्रोस्टेट ग्लैण्ड विकार का प्राकृतिक उपचार करें। सफलता अवश्य मिलेगी।</span></h5>]]>
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                                                            <category>इंटिग्रेटेड थेरेपी</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2023</category>
                                            <category>मई</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 May 2023 21:48:51 +0530</pubDate>
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