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                <title>बाजरा : वैदिक काल से एक महत्वपूर्ण - योग संदेश</title>
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                <description>बाजरा : वैदिक काल से एक महत्वपूर्ण RSS Feed</description>
                
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                <title>बाजरा : वैदिक काल से एक महत्वपूर्ण' त्री धान्य’ मिल्ट्स</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिक काल से ही भारतवर्ष में साबुत अनाजों का मुख्य रूप से विभिन व्यंजनों को बनाने एवं आयुर्वेद चिकित्सा में उपयोग किया जाता था। साबुत अनाज जिन्हें आज मिल्ट्स (Millets) कहा जाता है उनका वर्णन हमें प्राचीन वेदों में भी प्राप्त होता है। आर्कियोबोटैनिकल शोधकर्ताओ के अनुसार इनकी खेती </span>4000<span lang="hi" xml:lang="hi"> ईसा पूर्व की है। हमारे पारंपरिक आयुर्वेद के औषधीय ग्रंथों में इनका उल्लेख </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">त्री धान्य वर्ग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कुधन्यावर्ग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">विषय के तहत मिलता है। प्राचीन आयुवेर्दिक ग्रंथ चरक सहिंता में भी विभिन्न </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">त्री धान्य</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का वर्णन प्राप्त होता है जिसमें इनकी वानस्पतिक विशेषता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुण</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2815/bazara-vaidik-kaal-se-ek-mahatvapurn-tri-dhanya-millets"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-12/123.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिक काल से ही भारतवर्ष में साबुत अनाजों का मुख्य रूप से विभिन व्यंजनों को बनाने एवं आयुर्वेद चिकित्सा में उपयोग किया जाता था। साबुत अनाज जिन्हें आज मिल्ट्स (Millets) कहा जाता है उनका वर्णन हमें प्राचीन वेदों में भी प्राप्त होता है। आर्कियोबोटैनिकल शोधकर्ताओ के अनुसार इनकी खेती </span>4000<span lang="hi" xml:lang="hi"> ईसा पूर्व की है। हमारे पारंपरिक आयुर्वेद के औषधीय ग्रंथों में इनका उल्लेख </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">त्री धान्य वर्ग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कुधन्यावर्ग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">विषय के तहत मिलता है। प्राचीन आयुवेर्दिक ग्रंथ चरक सहिंता में भी विभिन्न </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">त्री धान्य</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का वर्णन प्राप्त होता है जिसमें इनकी वानस्पतिक विशेषता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुण धर्म द्रव्य गुणों एवं इनमें उपस्थित पोषक तत्वों के विवरण के साथ उनकी महत्वता को भी बताया गया है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">त्री धान्य</span>’ (<span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीअन्न) मूलत: मधुर एवं कषाय रस की प्रधानता लेते है एवं किचिंत उष्ण प्रवृति के होते है। यह प्राय: वातकार  होते है (वात दोष बढ़ाते है) एवं पित्त-रक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कफहार होते हैं। पूर्ण रूप से यह वात-पित्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कफ में समन्वय रखने में सहायक होते हैं हालांकि प्रत्येक श्रीअन्न के द्रव्य गुणों में विभिन्नता का भी भली प्रकार से वर्णन किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस कारण उनका उपयोग भारतवर्ष के सभी प्रान्तों में होता आ रहा है। यह मनुष्य के मस्तिष्क में राजसिक व सात्विक प्रभाव डालते है जो कि वस्तुत: उनके गुणानुसार होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि वातकार होने के कारण यह प्राय: वात प्रधान व्याधियों एवं अजर्णिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंदाग्नि इत्यादि के दौरान नही उपयोग किए जाते है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद मतानुसार हमारा भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे स्वास्थ की रक्षा करता है एवं हमें निरोगी रखने में सहायक होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए आयुर्वेद उपचार में  खाद्य पदार्थों का विशेष समावेश होता है जिसको </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आहार विहार</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के परिपेक्ष में समझा जाता है। आहार में विशेषकर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पथ्य-अपथ्य</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का भी महत्व होता है जो प्रत्येक खाद्य पदार्थ के विशेष द्रव्य गुणों पर आधारित होता है एवं उनका चयन मनुष्य की प्रकृति के अनुसार किया जाता है। आयुर्वेदानुसार मनुष्य जो भी भोजन ग्रहण करता है वो पाचन के बाद </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">रस</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">बनता है जो कि विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा रक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मज्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेदा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धातु इत्यादि में बदलता है एवं मनुष्य के शारीरिक एवं मानसिक बल में वृद्धि करता है। पथ्य व्यवस्था के द्वारा विभिन्न भोज्य पदार्थों की विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। आचार्य चरक एवं आचार्य सुश्रुत ने अपनी-अपनी सहिंताओं में विभिन्न प्रकार के आहार का वर्गीकरण किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">शौक्याधान्य</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रथम वर्णित है। इसमें आज के साबुत अनाज (</span>Monocotyledons<span lang="hi" xml:lang="hi">) मुख्यत: आते है। हालांकि आचार्य सुश्रुत ने </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">शौक्याधान्य</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का नाम से वर्णन नहीं किया है अपितु इनको इनके द्रव्य गुणों के आधार पर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मुदगाडी</span>’ (mudgadi<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">शाली</span>’ (shali<span lang="hi" xml:lang="hi">) एवं </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कुधान्या</span>’ (kudhanya<span lang="hi" xml:lang="hi">) वर्ग में रखा है। यजुर्वेद में कुछ प्रमुख </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">त्री धान्य</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का उल्लेख किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें फॉक्सटेल मिल्ट्स (प्रियांगावा)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बरनार्ड मिल्ट्स (आनवा:) और मिल्ट्स (श्यामका) की पहचान की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार यह संकेत मिलता है कि इन धान्यों का उपयोग विस्तृत रूप से किया जाता रहा है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेदानुसार प्रत्येक श्रीअन्न अपने विशेष द्रव्य गुण के अनुसार खाद्य पदार्थ के रूप में एवं चिकित्सा के लिए उपयोग किया जाता है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वार</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">लघु गुण शीत वीर्य की प्रकृति का अन्न है जोकि पाचन क्रिया के लिए हल्का है एवं शरीर में शीतलता प्रदान करता  है अत: इसका प्रयोग ग्रीष्म ऋतु में हितकारी है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मधुलिका</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में लघु गुण की प्रचुरता होती है अतैव एवं इन्हें </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अनुशानु</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">भी कहा जाता है यानि कि शरीर के लिए न तो यह उष्ण है न ही शीतलता प्रदान करने वाली। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">श्यामका</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में भी लघु गुण की प्रधानता है यह भी पाचन में हल्की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुपाच्य होती है और वात दोष को शरीर में बढ़ाती है। हालांकि पित्त और कफ दोष में सांमज्य बनाती हैं इसका उपयोग </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अति भी महाअन्न</span>’ (over nutrition<span lang="hi" xml:lang="hi">) के लिए भी किया जाता है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बाजरे</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कुटसित धान्य</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के रूप में वर्णित किया गया है जिसका अर्थ है स्वाद में अच्छा नहीं है लेकिन इसके विभिन्न गुणों और अन्य पोषक तत्वों के कारण इसका उपयोग बहुत किया जाता है। आयुर्वेद में बाजरे को स्वाद में मीठा (मधुर रस) बताया है जो पाचन के बाद तीखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शुष्क और प्रकृति में गर्म हो जाता है। पारंपरिक वैध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पित्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कफ दोषों को संतुलित करने के लिए दैनिक आहार में बाजरे को शामिल करने की सलाह देते हैं। इस अनाज  की गर्म शक्ति या वीर्य प्रकृति को कई स्वास्थ्य लाभों के लिए सराहा जाता है। इसको प्रमुख अन्न के रूप में खाना कफ दोष को संतुलित करता है परन्तु उसके शुष्क व लघु गुण के कारण वात प्रकृति के व्यक्तियों के लिए हानिकारक है। वर्तमान समय में भी इन विभिन्न अन्नों का उपयोग जैसे हृदय सम्बन्धित रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुमेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इत्यादि के लिए किया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर नवीन अनुसंधानो के द्वारा इनके पोषक तत्वों की खोज की जा रही है। साथ ही कई अन्य बीमारियों के बचाव हेतु भी प्रयास किये जा रहे है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतवर्ष में उपस्थित विभिन्न भौगोलिक क्षेत्र एवं जलवायु के कारण पूरे देश में आदिकाल से ही विभिन्न अनाजों का अस्तित्व रहा है। साबुत अनाज (</span>millets<span lang="hi" xml:lang="hi">) जैसे सोरगम (यावानाला) [</span>Sorghum bicolor (L.) Moench<span lang="hi" xml:lang="hi">] पर्ल मिलट् [</span>Pennisetum glaucum (L.) R.Br.<span lang="hi" xml:lang="hi">]</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिंगर मिलट् (नारतकी) [</span>Eleusine coracana (L.) Gaertn.]<span lang="hi" xml:lang="hi">]</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बर्नयार्ड मिलट् (श्यामका) (</span>Echinochloa frumentacea Link<span lang="hi" xml:lang="hi">)  प्रोसो मिलट् (चीनाका) (</span>Panicum miliaceum L.<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोडो मिलट् (कोद्रावका) (</span>Paspalum scrobiculatum L.<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिटिल मिलट् (कुटकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामा) (</span>Panicum sumatrense Roth<span lang="hi" xml:lang="hi">) और फॉक्सटेल मिलट् (कगंनू) (</span>Setaria italica (L.) P.Beauv.) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राय: किसी न किसी रूप में भारतीय व्यंजनों में एवं आयुर्वेद की चिकित्सा प्रणाली में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। प्राय: इनको उपयोग में लाने से पहले संमस्कार (</span>processing<span lang="hi" xml:lang="hi">) करना आवश्यक है जिससे यह वात दोष को नियंत्रित करने में सहायक हो जाए। इन अनाजों को पानी में भिगोकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घी एवं दीपन पाचन अव्ययों एवं </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वात श्यामका प्रकाशपाक</span>’ (<span lang="hi" xml:lang="hi">वात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शांत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करने वाले मसाले) के समन्वय से पकाया जाता है एवं इनके साथ उपयोग में आने वाली अन्य सामग्रियों की मात्रा का भी पूर्ण रूप से ध्यान रखा जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी से पूर्व इनकी धान्यों की बहुत उपज होती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह प्रमुख रूप से दैनिक खानपान में शामिल थे। एक रिर्पोटानुसार </span>1950-51<span lang="hi" xml:lang="hi"> एवं </span>2018-19<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बीच में इनके उत्पादन में </span>41.65<span lang="hi" xml:lang="hi">त्न की कमी पाई गई जिसके विभिन्न कारणों पर गहन अध्ययन भी किया गया। वर्तमान सरकार के अथ्क प्रयासों के कारण ही यह वर्ष मिल्ट्स महोत्सव (</span>International millet year, <span lang="hi" xml:lang="hi">2023) के रूप में मनाया जा रहा है एवं गहन रिसर्च एवं प्रौद्योगिक तकनीकी की सहायता से इन अनाजों की उत्पादक क्षमता एवं इनसे बनने वाले विभिन्न व्यंजनो पर ध्यान दिया जा रहा है। वैदिक काल से ही हमारे ऋषि-मुनियों को इन अन्नों के पोषकीय तत्व एवं इनके द्रव्य गुणों के अनुसार उनका चिकित्सीय उपयोग ज्ञात था एवं इनका विवरण मुख्य रूप से पाक शास्त्र के अंर्तगत किया गया है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">क्षेम कुतूहलम्</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">एवं </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">भोजनकुतूहलम्</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में विस्तार से विभिन्न प्रकार के भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न खाद्यानों इत्यादि का वर्णन है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजरे [</span>Pennisetum glaucum (L.) R.Br.<span lang="hi" xml:lang="hi">] को अंग्रेजी में पर्ल मिल्ट् (</span>Pennisetum glaucum (L.) R.Br.<span lang="hi" xml:lang="hi">) भी कहा जाता है। भारतवर्ष में यह प्रमुखत: राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में पाया जाता है हालांकि कई अन्य राज्य भी इसका उत्पादन करते हैं। </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> में इसका वार्षिक उत्पाद </span>1.25<span lang="hi" xml:lang="hi"> ह्ल/द्धड्ड था। यह एक वार्षिक </span>6-14<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट तक उगने वाली लंबी सीधी घास है। इसका पुष्प क्रम एक संयुक्त शीर्षस्थ स्पाइक होता है जिसे पैनिकल कहते है। जिसकी लंबाई </span>25-30<span lang="hi" xml:lang="hi"> ष्द्व व व्यास </span>7-9<span lang="hi" xml:lang="hi"> ष्द्व का होता है। पुष्पक्रम में एक केन्द्रिय रैकिस होता है जो रोमों द्वारा ढ़का रहता है। बाजरे की प्रत्येक स्पाइक में अनेक फैसिकल्स अपने अपने वृन्त के द्वारा रैकिस के द्वारा जुड़ी हुई रहती है। बाजरे की उपज पैनिकल की लंबाई संहतता (</span>length, compactness<span lang="hi" xml:lang="hi">) पर  निर्भर रहती है जिसमें लगभग </span>1000<span lang="hi" xml:lang="hi"> दानों की संख्या हो सकती है। नवीन तकनीकों (प्रजनन विधियों) द्वारा बाजरे की विभिन्न प्रजातियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संकर किस्म (</span>hybrid varieties<span lang="hi" xml:lang="hi">) का भी निर्माण किया गया है जो कि मुख्यत: पाला-रोधी एवं कवक-रोधी (</span>Downey mildew)  <span lang="hi" xml:lang="hi">फसलें है। बाजरे की कुल </span>167<span lang="hi" xml:lang="hi"> संकर किस्म एवं </span>61 varieties <span lang="hi" xml:lang="hi">का विकास </span>ICAR (Indian Council for Agricultural Research)<span lang="hi" xml:lang="hi"> द्वारा किया जा चुका है जो कि उत्पादक फसल के रूप में संपूर्ण देश में उगाई जा रही है। बाजरे को हिदीं व राजस्थानी में बाजरा कहते है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलुगु में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">सज्जालुए</span>’, <span lang="hi" xml:lang="hi">तमिल और मलयालम में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कंबूए</span>’, <span lang="hi" xml:lang="hi">कन्नड़ में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">सज्जाए</span>’, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजराती में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बजरी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते है। आदिकाल से ही हम बाजरे का उपयोग अपने भोजन के रूप में कर रहे है एवं आज के युग में नवीन अनुसंधान के द्वारा भी इसके पोषक तत्वों को प्रमाणित कर रहे है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पोषक तत्वों की मात्रा</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोटीन </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम (</span>gm<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी </span>17.3<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कुल कैलोरी </span>756<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलो कैलोरी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कुल कार्बोहाइड्रेट </span>146; <span lang="hi" xml:lang="hi">फाइबर </span>17<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कुल वसा </span>8.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम</span>;  <span lang="hi" xml:lang="hi">संतृप्त वसा </span>1.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मोनोअनसैचुरेटेड वसा </span>1.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">पॉलीअनसेचुरेटेड वसा </span>1.3<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">ओमेगा -</span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> फैटी एसिड </span>236<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम (</span>mg<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन विटामिन ई </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> एमसीजी (</span>mcg<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन-द्म </span>1.8; <span lang="hi" xml:lang="hi">थियामिन </span>842<span lang="hi" xml:lang="hi"> एमसीजी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">राइबोफ्लेविन </span>580<span lang="hi" xml:lang="hi"> एमसीजी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">नियासिन </span>9.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम विटामिन-बी </span>6 768<span lang="hi" xml:lang="hi"> एमसीजी</span>;  <span lang="hi" xml:lang="hi">फोलिएट </span>170<span lang="hi" xml:lang="hi"> एमसीजी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">पैंटोथेनिक एसिड </span>1.7<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">खनिज कैल्शियम </span>16<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">आयरन </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मैग्नीशियम </span>228<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">फास्फोरस </span>570<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम</span>;  <span lang="hi" xml:lang="hi">पोटेशियम </span>390<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">सोडियम </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जिंक </span>3.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉपर </span>1.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मैंगनीज </span>3.3<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलीग्राम</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">सेलेनियम </span>5.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> एमसीजी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजरे में प्रति </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम वजन में लगभग </span>378<span lang="hi" xml:lang="hi"> कैलोरी होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजरे में प्रचुर मात्रा में लौह तत्व व जिंक होता है जो कि एनीमिया (खून की कमी) में लाभदायक है। इसमें रेशे की मात्रा अधिक होती है जिसके कारण कब्ज में भी उपयोगी होता है। इसके अलावा इसमें विभिन्न रसायनिक घटक जैसे फ्लेवोनॉयड्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिनोलिक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओमेगा-३</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैटी एसिड (</span>flavonoids, phenolics, omega-<span lang="hi" xml:lang="hi">3</span>, fatty acids<span lang="hi" xml:lang="hi">) इत्यादि होते है जोकि प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते है व विभिन्न कैंसर कारको के प्रभाव को कम करने में भी सक्षम होते है। इन सभी विभिन्न घटको द्वारा शरीर में अत्यंत जटिल प्रक्रियाएं जैसे लाइपोसोम आक्सीडेशन</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोलीफेरेशन इत्यादि (</span>Liposome oxidation, DNA scission, proliferation of cells<span lang="hi" xml:lang="hi">) इत्यादि को काफी हद तक नियंत्रित किया जाता है। अत: कैंसर का इलाज करने में सहायक पाये गए है। बाजरे में गेंहूँ के जैसे चिपचिपा प्रोटीन (</span>glutein<span lang="hi" xml:lang="hi">) नही  होता है अत: वो </span>celiac disease<span lang="hi" xml:lang="hi"> (गेंहू का न पचना) बीमारी वाले व्यक्तियों के लिए प्राथमिक भोजन बन जाता है। इसके अलावा इसका </span>low glycemic index<span lang="hi" xml:lang="hi"> होता है जो कि पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता और रक्त शर्करा के स्तर को एक स्थिर अनुपात में रखता है। बाजरा मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाता है और गैर मधुमेह रोगियों विशेष रूप से टाइप-</span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> मधुमेह के लिए शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें अत्यधिक मात्रा में रेशें (</span>dietary fibre<span lang="hi" xml:lang="hi">) उपस्थित होते है जिससे यह आंत की वसा को कम करता है एवं पेट के आसपास की वसा को कम करने में भी सहायक होता है। इसके खनिज लवण जैसे मैग्नीशियम और पोटैशियम रक्त वाहिकाओं को पतला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है एवं बेहतर रक्त परिसंचरण की सुविधा प्रदान करते है। नियामित रूप से बाजरे का सेवन करने से इसमें मौजूद ओमेंगा- </span>3, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैटी एसिड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खराब या एल.डी.एल (</span>Low density lipoprotein<span lang="hi" xml:lang="hi">) को कम करने में सहायता करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार धमनियों में ब्लॉक को रोकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सूजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पष्ट श्लेष्म को कम कर देता  है और उचित सांस लेने में सहायता करता है। इसमें मौजूद विभिन्न रासायनिक घटक जैसे- </span>alkaloid, flavanoids, saponins, terpenoids, tannins, <span lang="hi" xml:lang="hi">इत्यादि बाजरे को एक आदर्श भोजन बनाता है। आयुर्वेदानुसार यह क्षारीय खाद्य पदार्थों की श्रेणी में आता है जिसका अर्थ है कि यह अम्लता से लड़ने के लिए भोजन का एक आदर्श विकल्प है। अध-पका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बासी भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनियमित दिनचर्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इत्यादि के कारण प्राय: पेट में अम्लता (</span>gastric problem, acidity) <span lang="hi" xml:lang="hi">की समस्या उत्पन्न हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अम्लता बढ़ने के कारण छाती में गंभीर असुविधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट में जलन और अन्न प्रणाली में अनियमिता जैसी कई अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। इससे बचाव हेतु बाजरे का सेवन लाभदायक है क्योंकि बाजरे को सब्जियों में मिलाकर पीने से भी एसिडिटी काफी कम हो जाती है एवं समय पर खाने जैसे सख्त आहार नियमों का पालन करके भी एसिडिटी से निजात पाई जा सकती है। बाजरे में उपस्थित विटामिन-बी</span>9 (vitamin B9-<span lang="hi" xml:lang="hi"> फोलिक एसिड) को अनुवांशिक तत्व भी कहा जाता है जो कि डीएनए और आरएनए (</span>DNA and RNA<span lang="hi" xml:lang="hi">)  बनाने के लिए एवं लाल रक्त कोशिकाओं (</span>Red blood cells<span lang="hi" xml:lang="hi">) के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है एवं एक प्रमुख कारक की तरह गर्भावस्था में भ्रूण की वृद्धि दर को परिभाषित कर सकने में सहायक सिद्ध होता है। इसमें कैल्शियम के साथ फॉस्फोरस भी मौजूद है जो कि हड्डियों को मजबूत करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जोड़ों के दर्द को रोकता है और ऑस्टियोपोरोसिस (</span>oesteoporesis<span lang="hi" xml:lang="hi">) जैसी अनेक बीमारियों के बचाव में भी सहायक है। बाजरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन-ए और जस्ते (</span>zinc<span lang="hi" xml:lang="hi">) से भरा हुआ है अत: रतौंधी को रोकता है बेहतर दृष्टि प्रदान करता है और प्रेस्बिओपिया (</span>presbyopia<span lang="hi" xml:lang="hi">) जैसी अन्य दृष्टि संबंधी समस्याओं को कम करता है। </span>vitamin B1<span lang="hi" xml:lang="hi"> में समृद्ध होने के कारण यह एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट (</span>Adenosine triphosphate<span lang="hi" xml:lang="hi">) में परिवर्तित होकर शरीर में पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में मदद करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संम्पूर्ण भारतवर्ष में बाजरे का मुख्य उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को बनाने में किया जाता है उपयोग करने से पहले इसे कुछ समय के लिए स्वच्छ जल में भिगोया जाता है जिससे इसके कुछ </span>anti-nutritional <span lang="hi" xml:lang="hi">तत्वों में कमी आ सके। प्रमुख रूप से इसके साथ कुछ अन्य अन्न जैसे मूँग दाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गेहूँ का दलिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मसूर दाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ सब्जियाँ जैसे आलू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरी मिर्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लौकी इत्यादि का भी प्रयोग किया जाता है जो मुख्यत: स्वादानुसार एवं व्यंजन के प्रकार पर निर्भर होता है। बाजरे के मुख्य व्यंजनों में लड्डू एवं खीर का भी स्थान है जो कि मीठे होते है पर शीत ऋतु में अत्यंत लाभकारी होते हैं। पाश्चात भोजन में रुचि रखने वालों के लिए बाजरे के बिस्कुट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मफिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नूडल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केक इत्यादि बनाने का भी प्रचलन हो गया है जोकि </span>Ready to eat <span lang="hi" xml:lang="hi">एवं </span>Ready to cook<span lang="hi" xml:lang="hi"> की श्रेणी में आते है। पारंम्परिक दलिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खिचड़ी के अलावा इसका उपयोग डोसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इडली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपमा (दक्षिण भारतीय व्यंजन) बनाने में भी होता है। साधारणत: बाजरा-आलू टिक्की बनाने के लिए </span>2-3<span lang="hi" xml:lang="hi"> उबले आलूओं में आधी कटोरी बाजरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कटा हुआ हरा धनिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरी मिर्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चुटकीभर अमचूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वादानुसार नमक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भुना जीरा अच्छी प्रकार मिला लें। इस मिश्रण को इच्छानुसार चपटी टिक्की बना लें व एक नानस्टिक तवे पर देसी घी डालकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुनहरी व कुरकुरी होने तक तल लें। बाजरे का उपमा बनाने के लिए एक कटोरी बाजरे को रात भर पानी में भिगा दे। एक कढ़ाई में </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> चम्मच घी डाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब इसमें आधा चम्मच मोटी राई</span>, 5-6<span lang="hi" xml:lang="hi"> कढ़ी पत्ता</span>, 2<span lang="hi" xml:lang="hi"> साबुत लाल मिर्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ी कटी प्याज</span>, 2-3<span lang="hi" xml:lang="hi"> कली लहसुन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डालकर हल्का भून लें। अब इसमें एक कटी शिमला मिर्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक टमाटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक कटोरी कसा पनीर एवं बाजरा मिला दें। स्वादानुसार नमक डालें व </span>1-2<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिनट पकाएँ। परोसते समय नीबू का रस व हरा धनिया डाले। यह अत्यंत सुविधाजनक स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता बन जाता है। इसके अलावा अपनी इच्छानुसार हम प्रतिदिन बाजरे को अपने दैनिक आहार में प्रयोग में ला सकते है। इससे सूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोटी इत्यादि भी बनाई जाती है जो कि अत्यन्त पोषक तत्वों से भरपूर होती है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज के इस भौतिक युग में हमारा खानपान बहुत ही अव्यवस्थित हो चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम जिसे </span>junk food <span lang="hi" xml:lang="hi">भी कह सकते है एवं प्राय: यह सभी घरों में ग्रहण किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण कई स्वास्थ चुनौतियों का सामना करना पड़ जाता है। हमको अपने जीवन में एक निश्चित दिनचर्या का पालन करते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने आहार में भारतवर्ष के एक प्राचीन शालिकधान </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बाजरे</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को नियमित रूप से प्रयोग में लाना चाहिए ताकि स्वाद के साथ हम अपनी सेहत का भी ख्याल रख सकें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नोट:</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> पाठ में प्रयुक्त पौधों के वैज्ञानिक नाम विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध साहित्य से लिए गए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे मौजूदा/प्रचलित वर्गीकरण को नहीं बताते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">References</span></h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h6><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">Sukumaran Sreekala, A. D., Anbukkani, P., Singh, A., Dayakar Rao, B., &amp; Jha, G. K. (2023). Millet Production and Consumption in India: Where Do We Stand and Where Do We Go?. National Academy Science Letters, 46(1), 65-70.</span></h6>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h6><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">Isaiah, O. O. (2020). The synergistic interaction of phenolic compounds in pearl millets with respect to antioxidant and antimicrobial properties. Am. J. Food Sci. Health, 6, 80-88.</span></h6>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h6>Unnikrishnan, P. M., &amp; Patil, S. (2021). An eyeshot on Kshudra Dhanya in Ayurveda. Journal of Ayurveda and Integrated Medical Sciences, 6(4), 118-124.</h6>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2023</category>
                                            <category>पोषक उत्पाद</category>
                                            <category>मई</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2815/bazara-vaidik-kaal-se-ek-mahatvapurn-tri-dhanya-millets</link>
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                <pubDate>Mon, 01 May 2023 21:43:16 +0530</pubDate>
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