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                <title>बाबा की योगशाला - योग संदेश</title>
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                <title>बाबा की योगशाला</title>
                                    <description><![CDATA[<table style="border-collapse:collapse;width:100%;border-width:1px;background-color:#BA372A;border-color:#BA372A;" border="1"><colgroup><col style="width:99.8705%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td style="border-width:1px;border-color:rgb(186,55,42);">
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यूज</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">चैनल आज तक के कार्यक्रम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">साहित्य</span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">के मंच पर पूज्य स्वामी जी महाराज का साक्षात्कार सुप्रसिद्ध एंकर बहन श्वेता सिंह के साथ हुआ। साक्षात्कार में विविध विषयों पर सवाल-जवाब हुए जिसमें ब्रिटिशकाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राचीन भारतीय इतिहास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युगधर्म आदि मुख्य बिन्दु रहे। साक्षात्कार के महत्वपूर्ण अंश हम आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रहे हैं:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:right;"><span style="color:rgb(255,255,255);"><strong>-<span lang="hi" xml:lang="hi">सह-संपादक</span></strong></span></h5>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong>प्रश्न:</strong></span> </span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पता चला कि साहित्य के मंच तक आने से पहले आप योगी जी से मुलाकात कर आए!</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर:</span></strong></span>   <span lang="hi" xml:lang="hi">यह युग योग और राज योग का है। इस समय योग का साम्राज्य उत्तर प्रदेश से लेकर के</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2829/baba-ki-yogshala"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-12/09.jpg" alt=""></a><br /><table style="border-collapse:collapse;width:100%;border-width:1px;background-color:#BA372A;border-color:#BA372A;" border="1"><colgroup><col style="width:99.8705%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td style="border-width:1px;border-color:rgb(186,55,42);">
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यूज</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">चैनल आज तक के कार्यक्रम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">साहित्य</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के मंच पर पूज्य स्वामी जी महाराज का साक्षात्कार सुप्रसिद्ध एंकर बहन श्वेता सिंह के साथ हुआ। साक्षात्कार में विविध विषयों पर सवाल-जवाब हुए जिसमें ब्रिटिशकाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राचीन भारतीय इतिहास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युगधर्म आदि मुख्य बिन्दु रहे। साक्षात्कार के महत्वपूर्ण अंश हम आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रहे हैं:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:right;"><span style="color:rgb(255,255,255);"><strong>-<span lang="hi" xml:lang="hi">सह-संपादक</span></strong></span></h5>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong>प्रश्न:</strong></span> </span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पता चला कि साहित्य के मंच तक आने से पहले आप योगी जी से मुलाकात कर आए!</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर:</span></strong></span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">यह युग योग और राज योग का है। इस समय योग का साम्राज्य उत्तर प्रदेश से लेकर के पूरे देश तक फैला है। सनातन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत और भारतीयता को पहली बार एक बड़ा गौरव मिला है। हमारे देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री भी योगी हैं और देश के प्रधानमंत्री भी योगी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और योगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मयोगी ही सच्चा राजयोगी हो सकता है। जिस तरह से हमारे भाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संत ने अपने युगधर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हठधर्म के साथ-साथ राजधर्म निभाया वह काबिले तारीफ  है। जिस तरह से उत्तर प्रदेश जैसे एक बड़े राज्य में इसको तो उनके विरोधी भी मानते हैं कि अब यूपी में कोई अपराधी सिर उठा के नहीं चल सकता।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े-बड़े अपराधियों के साम्राज्य उन्होंने ध्वस्त किये हैं और अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश बनाने के साथ-साथ लोगों में एक आशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक जोश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक जुनून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक हौंसला है और दुनिया में कोई भी कार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शौर्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीरता और पराक्रम के साथ संपन्न होते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तो शौर्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीरता और पराक्रम की एक मिसाल बने हुए हैं योगी जी। आपने हमें उत्तर प्रदेश में आमंत्रित कर ही लिया था तो हम ऐसे ही जिसको अंग्रेजी में कर्टसी मुलाकात कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही करने गए थे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong>प्रश्न :</strong></span> <span style="color:rgb(186,55,42);"><strong> स्वामी जी लेकिन यह बताइए कि एक अवधारणा रही है कि कोई योगी होगा</strong></span></span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कैसा होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आपने जो अपराध का बड़ा अच्छा जिक्र किया तो इसीलिए पिछले कुछ वर्षों में क्या भारत की भारतीयता की परिभाषा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संपूर्ण समाज की अवधारणा यह सब चीजें बदली हैं और बहुत सारे लोग यह सोचेंगे कि साहित्य आज तक के मंच पर स्वामी रामदेव क्यों</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पर साहित्य केवल वह लिखित शब्द नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल बोला गया वह शब्द नहीं। साहित्य उससे कहीं अधिक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं बड़ा है।</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर</span> :</strong></span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">साहित्य समाज का एक सतत प्रवाह है जो सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैचारिक रूप से जो कुछ घटित हुआ है उसका एक सतत प्रवाह ही साहित्य है। कुछ लिखा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ अनलिखा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ देखा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ अनदेखा है और कुछ ऐसा भी लिखा है जो गलत है।</span> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मैं तो यह कहूँगा कि इस देश में सबसे ज्यादा जिसके साथ इंजस्टिस हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्याय हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह साहित्य ही है। हमारे साहित्य में मुगलों को महान बताया गया है जो अय्याशियां किया करते थे। </span>5-5<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार भारत की मां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेटियों को हरमों में रखा करते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह मुगल महान हो गए और हमारे छत्रपति शिवाजी महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे महाराणा प्रताप जो उनसे लड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह योद्धा गुमनाम हो गए और एक दो नहीं ऐसी तो अनगिनत कहानियां है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस देश में मुगल काल में भी साहित्य के साथ अन्याय हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराध हुआ है। यही अंग्रेजों के काल में भी हुआ है। चंद्रशेखर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजगुरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भगत सिंह जो क्रांतिवीर थे उनको तो अपराधी कहते थे और बहुत लंबे कालखंड तक भारत की एनसीईआरटी की किताबों तक में पढ़ाया जाता था। तो इस देश के जो खलनायक थे उनको नायक करके प्रस्तुत किया गया और जो इस देश के नायक थे उनको खलनायक करके लिखा गया। यह तो साहित्य का बहुत बड़ा अपराध घटित हुआ है ना। तो वह भी आज तक के मंच से जाना चाहिए और इतना ही नहीं मैं नहीं कहता कि इस देश के महान इतिहास को पुनर्लेखन की जरूरत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी पुनर्विवेचना की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुनर्व्याख्या की तो जरूरत है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिस तरह से भारत का गौरवशाली अतीत रहा है</span>, 18<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं शताब्दी तक विश्व की आर्थिक महाशक्ति रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक सामरिक महाशक्ति रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत। ठीक है इसमें हमने कुछ संघर्ष झेले हैं। भारत कभी भी पूर्ण रूप से पराधीन राष्ट्र नहीं रहा लेकिन साहित्य में हमको पढ़ते-पढ़ते आज </span>200<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल हो गए</span>, 1000<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल तक भारत गुलाम रहा। कब गुलाम रहा भाई! संघर्षरत रहा भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी भी हमने मुगलों की पराधीनता को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। अंग्रेजों की भी पराधीनता को समग्र देश ने कभी पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया और इसमें नैरेटिव यह घड़े जाते हैं कि हमारे सनातन में तो बहुत अन्याय था स्त्रियों के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शूद्रों के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहुत छुआछूत था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहुत भेदभाव था। अंग्रेजों ने हमें सभ्य बनाया। भेदभाव की दीवारें ढाने के लिए इस्लाम ने यहां पर काम किया। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंग्रेजो ने लूटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुगलों ने भी लूटा और फिर खुद ही लुट गए। बहादुर शाह ज़फर के वंशज आज चाय की दुकान पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक-एक पैसे के लिए तरस रहे हैं। पाप कहां कैसे खत्म हुआ</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पाप आपके सामने ही खत्म हो जाता है। जिन मुगलों ने देश के ऊपर क्रूरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अत्याचार किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुल्म-ज्यादतियाँ की। इसमें </span>5-5<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार माँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेटियों को रखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस्लाम में दारु पीना निषेध है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके यहां पर दारू की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अफीम की और ना जाने किस-किस की महफिलें सजा करती थी। वह तो अपने कर्मों से नष्ट हो गए।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिटिशर्स भी नष्ट हो गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका डेढ़ सौ से ज्यादा देशों में साम्राज्य हुआ करता था। श्वेता जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके साम्राज्य में सूर्यास्त नहीं हुआ करता था अब उस देश के अब तीन टुकड़े होने के कगार पर है। कहीं स्कॉटलैंड और आयरलैंड और इंग्लैंड कहीं अलग ना हो जाएँ। और अब वहां पर भी एक भारतवंशी राज तो कर रहा है- ऋषि सुनक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह तो हो ही गया है। तो चीजें बदल रही हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे ज्यादा अन्याय साहित्य में ब्राह्मणों के साथ हुआ यद्यपि मैं जन्मना ब्राह्मण नहीं हूं और मैं जाति से किसी को मानता भी नहीं हूँ लेकिन सबसे ज्यादा अन्याय ब्राह्मणों के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे ज्यादा अन्याय भगवे के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे ज्यादा अन्याय साहित्य और सन्यासियों के साथ हुआ है। सन्यासियों को या तो ऐसा बोला जाता था कि भोले बाबा आएगा झोले में डाल के ले जाएगा। हमें चोर उचक्के लिखा जाता था। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जितने भी डॉक्यूमेंट्री देख लो आश्रम के नाम से कोई डॉक्यूमेंट्री बन रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सन्यासियों के नाम से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्राह्मणों के नाम से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की पूरी व्यवस्था को सामंतवादी व्यवस्था कहा जबकि भारत की ऐसी व्यवस्था नहीं है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने जन्म से जाति को माना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमने तो कर्म से माना। हमने तो कहा जो अज्ञान को दूर करे वह ब्राह्मण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अन्याय को दूर करे वह क्षत्रिय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अभाव को दूर करें वह वैष्णव और जो अशुचिता को दूर करके सेवा और शुचिता के प्रतिमान स्थापित करें वह शूद्र।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें कहां अछूत आ गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें कहां जाति आ गई और हम सभी फोर इन वन हैं। हमारा यह सर ब्राह्मण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भुजा क्षत्रिय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उदर वैश्य है और यह पैर सारे शरीर को ढोते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब को ताकत देते हैं यह शूद्र हैं। और अंग्रेजों ने भारतीय सनातन संस्कृति पर चालाकी से जितने प्रहार किये और हमारे शास्त्रों में भी मिलावट कर दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी हम आपको बताना चाहते हैं। हमारे वेदों को छोड़कर बाकी कोई साहित्य उनसे ऐसा नहीं छूटा है जिसमें उन्होंने मिलावट न की हो। रामायण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाभारत से लेकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुराणों से लेकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सारे शास्त्रों में मिलावट कर डाली। रामचरित मानस में तक मिलावट कर डाली।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>प्रश्न :</strong></span>  </span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या मिलावट हुई है रामचरित मानस में</span>?</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर :</span> </strong></span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे सारे शास्त्र एकतत्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहअस्तित्व व विश्व बंधुत्व का उपदेश देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सारे वेद गीत गाते हैं- एकत्व मनुपश्यत:</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यत्र विश्वम् भवति एक नीडम्</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओम सर्वंखल्विदं ब्रह्म। फिर उसमें भेदभाव कैसे पनप सकता है। स्त्रियों के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शूद्रों के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जातियों के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई भेदभाव भारतीय संस्कृति में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहित्य में हमारे सनातन परंपरा में था ही नहीं। यह सारे लानत जो हम पर लगाए गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह कुछ चंद पैसे देकर के।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong>प्रश्न :</strong></span> </span> <span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक तरफ  से बात निकली तारण का मतलब पीटना नहीं ताड़ण का मतलब शिक्षा है क्या</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आप इस तरफ  इशारा कर रहें हैं कि शब्द का अर्थ अलग निकाला गया।</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="color:rgb(255,255,255);" xml:lang="hi"><span style="background-color:rgb(186,55,42);"><strong>उत्तर :</strong></span> </span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं एक चौपाई की बात नहीं कर रहा हूँ। एक सूत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक मन्त्र की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं कहता हूँ महाभारत पाँच हजार श्लोक का ग्रंथ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके हमारे यहां प्रमाण हैं। पाँच हजार महाभारत का जो एक महाकाव्य है वो एक लाख का कैसे हो गया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कुछ तो उसमें मिलावट की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ वाक्य के साथ उसमें जोड़ा गया। व्यास जी नें पाँच हजार का जय नाम का ग्रंथ लिखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके शिष्यों ने पूरा कर दिया दस हजार में। अब दस हजार से एक लाख कैसे हो गया</span>?</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह प्रक्षेप तो है ना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ऐसे जो भी इल्लॉजिकल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो तार्किक नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सार्वभौमिक नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैज्ञानिक नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भारतीय संस्कृति का अंश नहीं हैं और उसके नाम पर भारत और भारतीयता को हमारी सारी सनातन संस्कृति को बदनाम किया गया। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक और शब्द सुन लो। हिंदू शब्द हमारे किसी सनातन साहित्य में नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे यहां सनातन है। हिंदू जिनको कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो भी सनातनी हैं। जैन हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो भी सनातनी हैं। बौद्ध हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो भी सनातनी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिख हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो भी सनातनी हैं जो शाश्वत मूल्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं को मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो एटर्नल ट्रूथ को मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यूनिवर्सल लॉ को मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सब सनातनी हैं। ये आपस में ही झगड़ा दिया हमको। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>प्रश्न :</strong></span>  </span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">तो हिंदू राष्ट्र कैसे बनाएंगे फिर आप लोग</span>?</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>उत्तर :</strong></span>  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए हिन्दू राष्ट्र जो शब्द है यह अव्यवहारिक शब्द है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत एक सनातन परंपरा वाला देश है इसलिए सनातन धर्म की जय भारत में भी होगी और सनातन परंपराओं को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्यात्म को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन मूल्यों का लोग अनुसरण करेंगे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्न सनातन मूल्य क्या हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अहिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्तेय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह उनको पंचशील कहो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनको पंतव्रत कहो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनको यम-नियम कहो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी दुनिया सनातन के रास्ते पर ही चलेगी।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong>प्रश्न :</strong></span>  </span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह हिन्दू राष्ट्र ना सही सनातन राष्ट्र ही सही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या सनातन राष्ट्र की एक परिकल्पना जो है वह समावेशी है</span>? </strong></span> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>उत्तर :</strong></span>  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सनातन का अर्थ ही है समावेशी </span>the meaning of sanatan is eternal universal and integrated approach from all side<span lang="hi" xml:lang="hi"> तो यह तो सनातन का मतलब ही है। सत्य की सब दिशाओं से स्वीकारिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही सनातन है। इसमें कोई जाति का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई पंथ का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई ऊंच-नीच का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई भेदभाव का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई इसमें लेश मात्र भी स्थान शेष नहीं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्न</span> :</strong></span>  <span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या मुगलों का साहित्य में कोई कंट्रीब्यूशन नहीं रहा</span>?</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>उत्तर :</strong></span> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देखिये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं उसको गलत नहीं कह रहा हूँ। मुगलों से इंपोर्टेंस कितनी देनी चाहिए। साहित्य में </span>5-10<span lang="hi" xml:lang="hi"> परसेंट ज्यादा से ज्यादा कोई बहुत बड़ा उनका किसी ने कोई बहुत बड़ा बहादुरी का काम किया तो कहीं अपवाद रूप में </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत। </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत भारत के महान योद्धाओं को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीर-वीरांगनाओं को ही जगह देनी चाहिए और ऐसा ही आगे इतिहास पढ़ाया जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत ऐसा ही होगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्न</span> :</span> <span lang="hi" style="color:rgb(186,55,42);" xml:lang="hi">स्वामी जी इस पाठ्यक्रम के लिए आपने भी बहुत समय से एक तरह से पहले आंदोलन किया था और बाद में आप सलाह देने लगे।</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>उत्तर :</strong></span> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अभी हम भारतीय शिक्षा बोर्ड के माध्यम से पाठ्यक्रम की और जो हमारा पढ़ाया जाने वाला कंटेंट है पाठ्य पुस्तकों की और उसकी पेडोलॉजी की पुन: संरचना कर रहे हैं कि भारत में भारतीय मानस का निर्माण कैसा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका पूरा अनुष्ठान हमारा चल रहा है ऐसा व्यक्तित्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा चरित्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा नेतृत्व हम भारत में गढ़ेंगे जहां पर भेदभाव की सारी दीवारें ढहेंगी और भारत के युवा भारत ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे विश्व का नेतृत्व कर सकें। ऐसा सामर्थ्य युवा नेतृत्व हम भारत से तैयार करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही तो हमारी संकल्पना है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong> </strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>प्रश्न :</strong></span> </span> <span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ये हो पाएगा</span>?</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर</span> :</strong></span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">क्यों नहीं हो पाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसकी आवश्यकता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्न</span> :</strong></span>  <span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जब होता है उस पर एक विवाद छिड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा लगता है कि कुछ समय के लिए फिर शांत हो जाते हैं। </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर</span> :</strong></span> <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देखिए जो शिक्षा पर भगवाकरण का आरोप लगाए उसके क्या कारण थे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हम उसकी जड़ में नहीं जाना चाहते लेकिन इतनी बात मैं जरूर कहना चाहता हूँ। मुझे </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> सालों से सार्वजनिक रूप से पूरा देश जानता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल तो मुझे आप लोगों से ही बात करते हो गए। मैंने कभी भी कोई अव्यवहारिक बात नहीं की। मैं हमेशा लॉजिकल बात करता हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइंटिफिक बात करता हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूनिवर्सल बात करता हूँ और यही हमारा सनातन धर्म है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही हमारा वेद धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषि धर्म है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही हमारा भारत और भारतीयता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत और भारतीयता के नाम पर इस समय जो एक कुछ बौद्धिक आतंकवाद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहित्यिक आतंकवाद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंटेलेक्चुअल टेररिरिस्ट हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह यह सब बखेड़ा करते हैं।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोई उसमें अलग-अलग थॉट्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोसेस से अलग-अलग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आइडियोलॉजी से अलग-अलग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां से कुछ लोग आ जाते हैं और भारत को तोड़ने की बात करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब यह चलने वाला नहीं है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>प्रश्न :</strong></span> </span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आपको लगता है कि पिछले कुछ समय में आपको लेकर के आत्मविश्वास आया है कि अपनी भाषा का प्रयोग/मातृ भाषा का प्रयोग आराम से सार्वजनिक जीवन में लोग कर पा रहे हैं। अब यह नहीं है की लोग अंग्रेजी नहीं कही तो लोग अनपढ़ ना समझ लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या यह बदलाव आ रहा है</span>?</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर : </span></strong></span> <span lang="hi" xml:lang="hi">यह आया है देखो! इसमें बहुत बड़ा योगदान राजनैतिक तौर पर मोदी जी का भी है। इस बात पर वह अभिनन्दन के पात्र हैं। उन्होंने राष्ट्रीय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय मंचों से हिंदी का प्रयोग किया है। जापान का प्रधानमन्त्री हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस का प्रधानमन्त्री हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाइना का प्रधानमंत्री</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अपनी भाषा में बात करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाइनीज में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुस्सियन में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापानीज में। पूरा यूरोप अपनी भाषा में बात करता है। तो भारत के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसको गौरव दिया और चारों तरफ  से जो इस मातृभाषा से जिनका उद्धभव हुआ है ऐसी कॉर्पोंरेट वर्ल्ड में हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एजुकेशन वर्ल्ड में हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्थ में हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया में हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन लोगों ने अपनी मातृभाषा को जैसे गौरव देना शुरू किया। अरे! हम गुरुकुलों के पढ़े हुए हमको आज तक के बड़े चाहे वह एजेंडा हो या साहित्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आस्था कहो या उसमें आपने भी कंट्रीब्यूशन दिया एक एजेंडा रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे वो आपकी सीधी बात हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र में कम से कम एक हजार से ज्यादा इंटरव्यू दिए मैंने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसके कारण से</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुकुल में जो हमें शिक्षा और संस्कार मिले उसके कारण से। हमने अपनी संस्कृति और राष्ट्र भाषा को गौरव दिया उसके कारण से और वह कर्म करके दिखाया आज हमने </span>40-50<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार करोड़ का कैपिटल मार्किट खड़ा कर दिया है। आने वाले </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> सालों में जब लोगों को लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अरे! यह गुरुकुल का पढ़ा हुआ हिंदी में बात करने वाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह संस्कृत का पढ़ने वाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी आर्थिक क्षेत्र में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामजिक क्षेत्र में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक क्षेत्र में झण्डे गाड़ सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इससे गौरव पैदा होता है देश के अंदर। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्न</span> :</strong></span>  <strong><span style="color:rgb(186,55,42);"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक बार फिर मैं यहाँ पर तुलना करुँगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कि योगी जी जब </span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य</span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्री बने तो सबको यह संशय था कि एक भगवाधारी यह क</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ैसा काम करेगा।</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इतने बड़े प्रदेश को यह कैसे संभालेगा</span>?</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर</span> : </strong></span> <span lang="hi" xml:lang="hi">माने प्रशासनिक तौर पर भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक तौर पर भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक तौर पर भी और जो सामाजिक ताना-बाना है देश का</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">वह बहुत विविधतापूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें सामंजस्य बना करके रखा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>प्रश्न :</strong></span> </span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आपको लेकर भी लोगों को यह संशय होता था। एक भगवाधारी बिजनेस कैसे संभालेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोग सवाल भी पूछते रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी भी पूछते हैं आपसे कि आपका एक संत बिजनेस में होना चाहिए की नहीं होना चाहिए</span>?</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>उत्तर:</strong></span> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक संन्यासी पुरुषार्थ करके अर्थ को परमार्थ में समायोजित करता हुआ बहुत बड़ा आर्थिक साम्राज्य देश के लिए खड़ा कर सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका हमने कीर्तिमान बनाया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मैंने कहा स्वामी रामदेव का टाइम एक दिन टाटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिरला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अड़ानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलन मस्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुकरबर्ग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिल गेट्स उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है वो अपने लिए जीते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सन्यासी सबसे लिए जीता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए सन्यासी का समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञान वो सबके कल्याण के लिए होता है एलन मस्क ने बताओं क्या किया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने कहा कि मैं ऐसी कार बना दूंगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसमान में तुम्हारे लिए जगह बना दूंगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरक्षित कर दूंगा। वो टेक्नोलॉजी की बात करता है। स्वामी रामदेव ने लोगों का लीवर फेल होने से बचा लिया। जो ज्ञान मुझे अपने वेदों से प्राप्त हुआ- ऋग्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामवेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यजुर्वेद व अथर्ववेद से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माण्डूक्य आदि उपनिषदों से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रामायण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाभारत से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भगवद्गीता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुराणों से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुश्रुत व धन्वंतरि से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मुझे अपने पूर्वजों से ज्ञान प्राप्त हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें जो हमने अनुसंधान किया और उसको जमीन पर जो उतारा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज मैं कहता हूँ सबसे बड़ी जो इंटेलेक्चुअल जो प्रोपर्टी है और यदि मैं उसको पेटेंट कराता तो एलम मस्क से ज्यादा अमीर स्वामी रामदेव होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हमने विश्व कल्याण के लिए वो ज्ञान दिया है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे वर्ल्ड में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा एक तरफ  जिसको मैं मेडिकल माफिया कहता हूँ वो एक तरफ  सारे के सारे चारों तरफ  माफिया गिरि तो चल ही रही है ना लेकिन हम सत्य के लिए लड़ते हैं। पूरा मेडिकल सिस्टम ङ्ख॥ह्र से लेकर के पूरी दुनिया के डॉक्टर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाखों साइंटिस्ट जो मिलकर के नहीं कर पाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमने पूरे डंके की चोट पर करके दिखाया है</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सब के सब मोर्चों पर हमने यह करके दिखाया। मॉडर्न मेडिकल साइंस कहता है डायबिटीज के पेशेंट नॉन-डायबिटीज नहीं हो सकते। हमारे सुप्रीयो भाई साहब आए है। आप भी गए हंै खुद। मैं तो कहता हूँ हमारे यहां तो ओपन सीक्रेट है सब कोई भी आकर के देखो। हमने डायबिटीज के पेशेंट को नॉन-डायबिटीज किया। वर्ल्ड में पहला एक सनातन धर्म का सन्यासी है जो कहता है कि मैं सौ से दो सौ यूनिट इन्सुलिन ले रहे व्यक्ति की इंसुलीन छुड़वा सकता हूँ। सामने यह प्रदीप भाई बैठे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं। अभी हजारों करोड़ों का साम्राज्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इनको भी हमने नॉन-डायबिटीज किया। एक नहीं मैं आपको हजार प्रमाण दे सकता हूँ। डायबिटीज के पेशेंट को नॉन-डायबिटीज किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीपी को क्योर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थायराइड हमने क्योर किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थराइटिस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्थमा क्योर किया। लोगों को लंग्स ट्रांसप्लांट से बचाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिवर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किडनी ट्रांसप्लांट से बचाया और कैंसर को भी </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने में ठीक करके दिखाया। अब यह उद्घोषणा नहीं है यह हकीकत है और पूरी दुनिया योग-आयुर्वेद और सनातन को फॉलो करेगी। जीवन जीने का कोई दूसरा तरीका ही नहीं है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>प्रश्न :</strong></span> </span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आज मुझे लगता है साहित्य आज तक के मंच पर आज हम सब स्वामी रामदेव से भजन सुनें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भगवान भी साथ दे रहे हैं यह बादल भी आ गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठंडी हवा लग गई है चिलचिल्लाती धूप के बाद।</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>उत्तर :</strong></span>  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो भजन तो यहीं के हिसाब से सुना देते हैं-</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अमृत है हरि नाम जगत में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसे छोड़ विषय विष पीना क्या</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हरि नाम नहीं तो जीना क्या</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हरि नाम नहीं तो जीना क्या</span>?Ó <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भगवान का नाम उसको छोड़कर के कोई कोल्डड्रिंक पिए जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई सॉफ्ट ड्रिंक के नाम पर पूरा का पूरा ड्रिंक ही पिए जा रहा है और आदमी खोखला हुए जा रहा है। इसलिए सब साहित्य में तो हर तरह की बात है साहित्य में अश्लीलता भी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और साहित्य में शालीनता की पराकाष्ठा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञान की भी पराकाष्ठा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सौंदर्य की भी पराकाष्ठा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उस सौंदर्य में सात्विकता भी है। लेकिन जो समाज अश्लीलता की ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कामुकता की ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विलासिता की ओर बढ़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये इतिहास गवाह है इस बात का कि वह नष्ट हो गया। इसलिए एक बात मैं बस कहूँगा श्वेता जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस संदर्भ में कोई व्यक्ति आता है कोई साहित्य के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई क्रिएशन के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी फिल्म के नाम पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आजकल बहुत सारी मूवीस बनती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहुत सारी अलग-अलग प्रकार के क्या-क्या बनाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमें पता भी नहीं क्या-क्या होता है। हमने देखी भी नहीं कभी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुना है लोगों से और वह हमारी उत्तेजना को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वासनाओं को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जगा जाते हैं और वह कोई भी </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल की बेटी दुराचारियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारियों की हवस का शिकार हो जाती है और यह जो आग लगाने वाले लोग कई भोगों की आग लगा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वासना की। कोई अलग-अलग प्रकार की देश को आग लगा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदू और मुसलमान के नाम पर लड़ा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई बेईमानी की आग लगा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरे लोग आग लगा कर के चले जाते हैं और जलता है समाज तो यह जलन और तपन को हम बचाना चाहते हैं और उसके लिए योग की अलख जगाएंगे।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्न </span>:</strong></span>   <span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को थोड़ा सा कन्</span><span lang="hi" xml:lang="hi"></span><span lang="hi" xml:lang="hi">यूजन हो जाएगा स्वामी जी की आप कह रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कि जो हिंदू मुसलमान को बढ़ाता है। ऐसा मुझे लगा कि जब हिंदू राष्ट्र और सनातन राष्ट्र की बात करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर रहे थे तो उसमें से एक समुदाय का नाम आपने नहीं लिया था।</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर</span> :</strong></span> <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें मैंने यह कहा भारत का जो सनातन धर्म है वह भारत की मिट्टी से उपजे हुए मत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रदाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरु परंपराओं के बारे में डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर जिनके नाम से यह बहुत बड़ा पार्क है उन्होंने भी कहा कि हमें आयातित पंथ संप्रदायों की जरूरत नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो इस्लाम को भी तो कबूल कर सकते हैं। उन्होंने बुद्ध को क्यों स्वीकार किया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मुझे इस्लाम से आपत्ति नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुझे ईसाइयों से आपत्ति नहीं है। उसमें भी शाश्वत मूल्य हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनमें भी सनातन मूल्य हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आंशिक तौर पर हैं। लेकिन भारत और भारतीयता के परिपेक्ष्य ताकि हम जब बात करते हैं और मैं तो कहता हूं जैसे मैं कह रहा हूं हिंदू भी सनातनी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बौद्धिक सब सनातनी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे हमारे मुसलमान भाई भी आ करके बोले हम भी सनातनी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईसाई बोले हम भी सनातनी हैं। हमें तो खुशी होगी लेकिन वहाँ पर भी वो श्रेष्ठ मूल्य हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सनातन मूल्य ही हैं क्योंकि यह जो बात है आदर्श और परंपराओं की है। यह बात सार्वभौमिक और वैज्ञानिक यूनिवर्सल जो ट्रूथ्स की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इटरनल है वही तो शाश्वत है।  </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong>प्रश्न :</strong></span>  </span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन स्वामी जी आज जो टकराव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज जो टकराव चल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी दो समुदाय में नहीं एक ही समुदाय के अंदर से दो तरह को आवाजे उठ जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक तरफ बागेश्वर धाम के सबसे पॉप्युलर बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जो आपको बहुत मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो हिन्दु राष्ट्र को लेकर एकदम कट्टर विचार सामने रखते हैं और दूसरा यहीं उत्तर प्रदेश से ही रामचरित मानस के खिलाफ जो बात उठी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह एक हिन्दु की तरफ से ही उठाई गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चर्चा प्रतिबंधित कर दो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पन्ने फाड़ दो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस तरह की चीजें।</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर</span> : </strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi">मैंने स्वीकार किया हमारे यहाँ मिलावट हुई हैं। पर क्या कुरान और इस्लाम में जो आयते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो सभी सही हैं। मैंने तो यह स्वीकार किया है आज तक के इस सबसे बड़े मंच से कि हमारे यहां प्रक्षेप हुआ है उस के सबसे बड़े सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनैतिक कारण रहे हैं कुछ को प्रलोभन देकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ के गर्दन पर तलवार रख कर और एक पूरे षड्यंत्र के तहत कुछ हमारे यहाँ प्रक्षेप हुए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम तो मानते हैं उनको स्वीकार करते हैं। क्या इस्लाम के अंदर जितने भी उनकी कुरान में आयते हैं क्या वो </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत सही हैं। मूल कुरान को छोड़ दीजिये आप उनमें जो हदीसों के नाम पर खलीफाओं ने जो उसके अंदर मिलावट कर रखी हैं कोई आकर के किसी जैसे मैंने स्वीकार किया हमारे यहाँ मिलावट हुई हैं मैं मानता हूँ ऐसे ही ईसाईयों में जो बाईबिल के अंदर जो मिलावट हुई हैं क्या कोई आकर के मंच से ऐसे स्वीकार कर सकता हैं। महार्षि दयानन्द ने यह साहस किया था। मैं चाहता हूँ कोई सत्यार्थ प्रकाश पढ़कर के देखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले उन्होंने अपने यहाँ पर जो कुरुतियाँ थी ढोंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आडंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंधविश्वास था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी जड़ें उखाड़ी और फिर उन्होंने सबको भी कहा अपने-अपने मत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्प्रदाय को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने-अपने धर्म ग्रंथ को देखो और वहाँ पर जो कुरुतियाँ हैं उनको दूर करने के लिए साहस करो। तो यह तो मैं आह्वान कर रहा हूँ। मुझे लगता है कभी ना कभी तो कोई आवाज उठेगी और यह धर्म का शुद्धिकरण होगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्न :</span></strong></span> <strong><span style="color:rgb(186,55,42);"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का जो आधुनिक साहित्य है उसे हम अलग-अलग रूप में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कविता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शेर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नज़्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिल्मी गीत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्टिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायलॉग हर चीज में बांध सकते हैं लेकिन हमारा जो प्राचीन साहित्य रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमारे वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुराण रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपको लगता है कि आज की पीढ़ियों को उनकी जानकारी है।</span></span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर</span> : </strong></span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इतना सौंदर्य है हमारे अलग-अलग प्रकार के छंदो में तो अलग-अलग प्रकार के हमारे यहाँ छंद हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मतलब गायन से लेकर</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">नृत्य से लेकर जो हमारा भरतनाट्यम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल हम थोड़े फकीरी अंदाज में ज्यादा पढ़े हैं। हमारे यहाँ पर संगीत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहित्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नृत्य की जितनी विधाएं हैं वो तक विश्व में कही नहीं हैं। उनको सही रूप में हमें सिखाया नहीं गया। हम भारतीय शिक्षा बोर्ड के माध्यम से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि विश्वविद्यालय के माध्यम से आपको लगभग आने वाले </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों में विश्व का श्रेष्ठत्म संगीत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नृत्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गायन सभी आपको हम प्रस्तुत करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज तक के मंच से ही दिखाएंगे। हिंदी के साथ-साथ तमिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलुगु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उड़ीया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मलयालम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बंगाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मराठी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नेपाली आदि जितनी भी भारतीय भाषाएं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका अपना एक सौन्दर्य है। और साहित्य में जो फुहड़ता लेकर के आये हैं ना वो भी साहित्य के अपराधी हैं। तो उनको भी मुझे लगता हैं आज तक के मंच पर आप बहुत सारी प्रतिभाओं को आमंत्रित कर रहे हैं तो उनको जो फुहड़ता फैलाने वाले लोग हैं उनको भी यहाँ से कुछ सिख जरूर मिलेगी। और एक नई दिशा में जो भारत बोध है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उधर हम आगे बढ़े। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">  <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे स्वामी प्रसाद मौर्य हैं उसमें स्वामी कहाँ से आया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें मौर्य कहाँ से आया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यह जताता है कि वो हमारे सनातनी हैं। लेकिन उनको भी समाज को बाटना है कि मेरे साथ कुछ पिछड़े और दलित ज्यादा जुड़ जाए तो यह तो सभी चलता है। अब जैसे आपने बागेश्वर जी का कहा तो हमारी अध्यात्म की परम्पराओ में अदृश्य शक्तियाँ हैं भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ महात्मा उसको प्रकट कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ नहीं भी करते। लेकिन यह कहना कि अदृष्ट होता ही नहीं हैं वो भी गलत है। और अदृष्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमूर्त के नाम पर ढोंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आडंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंधविश्वास फैलाना वह भी गलत है। इसलिए इन सभी मामलों में मैं सम्यक दृष्टि को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक दृष्टि को ही अंतिम प्रमाण मानता हूँ।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="background-color:rgb(186,55,42);color:rgb(255,255,255);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रश्न :  </span></strong></span><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी जी जो नए पाठ्यक्रम और नई शिक्षा की बात हम कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नए बोर्ड की बात करते हैं उससे किस तरह के छात्रों के उत्तीर्ण होने का अनुमान है</span>?</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(255,255,255);background-color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर</span> : </strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब भी मैं मीडिया से मिलता हूँ तो वो बोलते हैं </span>15-20<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों के बाद भारत का नेतृत्व कहाँ से गढ़ेंगे। वो राजनैतिक नेतृत्व के बारे में भी पूछते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो पूछते हैं कि </span>15-20<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के बाद का मिडिया कैसा होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">विधायिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यपालिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्याय पालिका कैसी होगी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">और खासकर भारत का नेतृत्व कैसा होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मैं आज आपको एक आश्वासन देता हूँ यहाँ से </span>15-20<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष के बाद का मिडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विधायिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यपालिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्याय पालिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोरपोरेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल लीडरशिप उसके बाद का साहित्य शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा कैसी होंगी। वो नेतृत्व हम भारतीय शिक्षा बोर्ड से गढ़ेंगे। वो नेतृत्व हम पतंजलि विश्वविद्यालय से गढ़ेंगे। आने वाले १०-१५ सालों में हम इस पर हम करीब १ लाख करोड़ रुपए खर्च करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा नेतृत्व हम गढ़ेंगे। उसका ऐसा व्यक्तित्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नेतृत्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरित्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका मानस भारत और भारतीयता से ओतप्रोत होगा। आदमी जो कुछ करता है उसको उसका संस्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नोलेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास ड्राइव करता है। हम ऐसे ब्रेन की प्रोग्रामिंग कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा मानस गढ़ रहे हैं जिसका रोम-रोम भारत और भारतीयता से ओतप्रोत हो। और वह पूर्ण सात्विकता के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी छल-छद्म के बिना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी स्वार्थ के बिना ऐसे आगे बढ़े कि उसके पीछे जमाना खड़ा होने में गौरव अनुभव करे। वो जहाँ खड़ा हो जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग कहें कि हमारा रोल मॉडल ये है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा आइकॉन ये है। तो ऐसा सर्वविविध नेतृत्व आपको भारत में देखने को मिलेगा। पहले हम १ लाख विद्यालयों को भारतीय शिक्षा बोर्ड में जोड़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगे लगभग ५ लाख विद्यालयों को जोड़ने की हमारी योजना है। १ लाख विद्यार्थियों का रेजिडेंशियल और 5 लाख विद्यार्थियों का यह विश्वविद्यालय होगा। १० हजार का गुरुकुल होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर देश से 50-100 बच्चे होंगे। अफगानिस्तान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बंगलादेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीलंका से लेकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे यूरोप से लेकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूके्रन और रशिया से लेकर जापान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाइना और साउथ कोरिया से तो हम ले ही आएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किम जोन के यहाँ से भी कुछ बालक हम ले आएँगे। पूरी दुनिया से बच्चे सनातन के सांस्कृतिक राजदूत बनकर पूरी दुनिया में सनातन का झण्डा गाड़ेंगे। और चारों तरफ होगा- भारत माता की जय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वन्दे मातरम्। सब लोग इस धरती माता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत माता के प्रति कृतज्ञता अनुभव करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किम जोन का भी मोक्ष हो जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूके्र न और रशिया के बीच की रस्साकशी भी समाप्त हो जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शी-जिनपिंग का भी पराभव हो जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक नई दुनिया गढ़ेंगे लेकिन आप और हम रहेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि आप योगी हैं। और जो योगी हैं वे बूढ़े नहीं होंगे।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
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                <pubDate>Sat, 01 Apr 2023 21:55:10 +0530</pubDate>
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