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                <title>आयुर्वेद में एलोपैथी से बेहतर परिणाम - योग संदेश</title>
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                <description>आयुर्वेद में एलोपैथी से बेहतर परिणाम RSS Feed</description>
                
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                <title>हृदय रोगों में प्रामाणिक औषधी 'हृदयामृत वटी’ व योगेन्द्र रस</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;">डॉ. अनुराग वार्ष्णेय<br />उपाध्यक्ष- पतंजलि अनुसंधान संस्थान</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2834/hridaya-rogon-me-pramanik-aushadhi--hridyamrit-vati--va-yogendra-ras"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2023-12/hridayamrit-vati.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय की मुख्य परेशानियों में से एक है कार्डियक हाइपरट्रॉफी (</span>Cardiac Hypertrophy)<span lang="hi" xml:lang="hi">। हाइपरट्राफी का अर्थ है कार्डियक सैल्स या कार्डियोमायोसाइट्स (</span>Cardiomyocytes<span lang="hi" xml:lang="hi">) का आकार बढ़ जाना। ये कार्डियोमायोसाइट्स गिल्ली डण्डे की गिल्ली के आकार की संरचना में होते हैं। अगर इनका आकार बड़ा हो जाता है तो हृदय में सूजन हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय भारी हो जाता है। इससे हृदय की बाहरी दीवार मोटी हो जाती है जिसके फलस्वरूप खून का प्रवाह कम हो जाता है। इससे शारीरिक रूप से कई परेशानियाँ पैदा हो जाती हैं। भारत में लगभग २० लाख लोग कार्डियक हाइपरट्रॉफी से पीड़ित हैं और इसके जितने भी उपचार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे सब लाक्षणिक या सिम्प्टोमैटिक ही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैद्धान्तिक या सिस्टम पर काम करने वाला कोई भी उपचार एलोपैथ में नहीं है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह हाइपरट्रॉफी दो प्रकार से हो सकती है-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">1.     फिजियोलॉजिकल</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">2.     ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">फिजियोलॉजिकल हाइपरट्रॉफी</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे हम लम्बी एक्सरसाइज़ करें या बहुत देर तक योग करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रेडमेल पर दौड़ लगाएँ तो भी हाइपरट्रॉफी होती है जो की अच्छी वाली हाइपरट्राफी मानी जाती है। इसमें समझने वाली बात है कि यदि कार्डियो मायोसाइट्स गिल्ली-डण्डे में गिल्ली के आकार में लम्बाई में बढ़ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चौड़ाई में नहीं बढ़ रही तो यह अच्छे वाली हाइपरट्राफी है। ये रिवर्सेबल होती है तथा हृदय को शक्ति प्रदान कर वापस आ जाती हैं। पर यदि वह गिल्ली मोटाई में बढ़े और गिल्ली बेलन बन जाए तब दिक्कत होती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी वजह से एक पैथोफिजियोलॉजिकल हाइपरट्राफी हो जाती है और वह हाइपरट्राफी बहुत सी बीमारियों को जन्म देती है। इनमें एक </span>Dyspenea <span lang="hi" xml:lang="hi">है जिसमें साँस लेने में दिक्कत होती है। </span>Angina Pectoris <span lang="hi" xml:lang="hi">यानि सीने का दर्द शुरू हो जाता है। एक्सरसाइज़ नहीं कर पाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साँस फूलती है। </span>Pulpitation <span lang="hi" xml:lang="hi">होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चक्कर आ जाते हैं। इन सबका कारण पैथोफिजियोलॉजिकल हाइपरट्राफी है। इसमें हमने पतंजलि अनुसंधान संस्थान के माध्यम से अनुसंधान किया और प्रयास किया कि आयुर्वेद की कौन सी औषधि है जो इस बीमारी का उपचार कर सकती है। हमने ऐसी कुछ कोशिकाओं  (</span>Cells<span lang="hi" xml:lang="hi">) पर कार्य प्रारंभ किया जो हमने हार्ट से आइसोलेट की थी। हमने चूहों की हृदय कोशिकाएँ (</span>Heart Cells<span lang="hi" xml:lang="hi">) लीं जिनको </span>Rat Cardiac Myocytes<span lang="hi" xml:lang="hi"> कहते हैं। इसमें हमने एलोपैथिक दवा </span> Isoproterenol <span lang="hi" xml:lang="hi">का प्रयोग किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह बहुत समय पहले फेफड़ों में संक्रमण तथा अन्य बीमारियों में प्रयोग जाता था। उस दवा के ज्यादा प्रयोग से ये हाइपरट्राफी होती है जो स्थाई है। इस दवा का प्रयोग करके हमने चूहों की सैल्स में हाइपरट्राफी पैदा की और गिल्ली नूमा मायोसाइट्स को बेलन के आहार में बदल दिया। हमनें देखा कि कौन-कौन से ऐसे पैरामीटर्स हैं जो इन सैल्स को अलग तरीके से अलग (</span>Differentiate<span lang="hi" xml:lang="hi">) करते हैं। इनमें सबसे बड़ा पैरामीटर है- ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (</span>Oxidative Stress<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनसे इनकी लम्बाई कम हो जाती है और मोटाई बढ़ जाती है। हमने जब इसको नापा और देखा कि इसमें हमारी कौन-कौन सी दवाएँ हैं जो अच्छा काम करती हैं तो हमारे पास सबसे अच्छा डॉटा हृदयामृत वटी का आया। ये औषधि हम पिछले ३० सालों से बना रहे हैं। ये एक यूनिक फॉर्मूलेशन है। इसमें हमने सभी पैरामीटर्स देखे। हमने देखा कि सैल्स कितनी मोटी हो रही हैं और उन सैल्स को हृदयामृत वटी ने डोज़ डिपेंटेंट ((</span>Dose Dependant<span lang="hi" xml:lang="hi">)</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">तरीके से वापस नार्मल कर दिया। हमने पाया कि डोज़ जितनी ज्यादा थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतना ज्यादा प्रभाव पड़ा। इसे फार्मालॉजिकल इफैक्ट (</span>Pharmalogical Effect<span lang="hi" xml:lang="hi">) कहते हैं। उस फार्मालॉजिकल इफैक्ट के साथ हृदयामृत वटी ने दिखाया कि इन सेल्स की हाइपरट्राफी कम हो गई। जो सेल्स बीच में से सूज गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सब ठीक हो गई। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके साथ हम बात करते हैं ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की तो इसके अंदर बहुत सारे ऑक्सीडेटिव सुपर ऑक्साइड्स पैदा हो जाते हैं। उन सूपर ऑक्साइड्स का भी हमारी टीम ने बॉयो कैमिस्ट्री के अनुसार मापदण्ड किया और बताया कि ये जो सूपर ऑक्साइड्स जनरेशन है उसका काम भी हृदयामृत वटी ने डोज़ डिपेंटेंड तरीके से कम किया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय ही हमारा ऐसा ऑर्गन है जो हर समय काम करता रहता है। सोते-जागते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेलते-कूदते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग-प्राणायाम करते समय हर समय हृदय गति चलती रहती है। क्योंकि ये मसल्स हर वक्त काम करते रहते हैं इसलिए हमें हमेशा ऊर्जा की आवश्यकता रहती है। सेल्स के पॉवर हाऊस को माइट्रोकाण्ड्रिया कहते हैं। कार्डियोमायोसाइट्स के अंदर ३०</span>% mass <span lang="hi" xml:lang="hi">माइट्रोकाण्ड्रिया का होता है। माइट्रोकाण्ड्रिया ज्यादा होने के कारण इन सेल्स में माइट्रोकाण्ड्रिया का कन्संट्रेशन ज्यादा होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने </span>Isoproterenol <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोग से जो हाइपरट्राफी पैदा की तो माइट्रोकाण्ड्रिया के फंक्शन पर प्रभाव पड़ा और हमने लम्बे शोध से पाया कि माइट्रोकाण्ड्रिया भी इसकी वजह से खराब हो रहे थे और हृदयामृत वटी ने उन खराब हो रही माइट्रोकाण्ड्रिया फंक्शन को वापस सामान्य कर दिया था। उसी तरीके से जो हमने अलग पैरामीटर्स में देखा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे हमने देखा कि इस दवा का जो मॉड ऑफ एक्शन है वह माइट्रोकाण्ड्रिया तथा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के माध्यम से हो रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अनुसंधान को हमने </span>Phytomedicine Plus <span lang="hi" xml:lang="hi">में प्रकाशित किया। शोधार्थी वहाँ से इस शोध को पढ़कर लाभान्वित हो सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने अर्जुन क्वाथ का भी प्रयोग करके देखा था। हम रोगियों को अर्जुन क्वाथ तथा दालचीनी का पानी पिलाते हैं। अर्जुन की छाल या पानी पीने से हार्ट पूरा क्लीन हो जाता है और इससे कार्डियक हेल्थ के अलग-अलग पहलू (</span>aspects<span lang="hi" xml:lang="hi">) हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन सबमें अर्जुन की छाल और अर्जुनारिष्ट बहुत प्रभावशाली औषधि हैं। हमने पाया कि हृदयामृत वटी का प्रयोग अर्जुन क्वाथ से बेहतर था क्योंकि इसमें और भी बहुत सारी औषधियों का सार (</span>abstract<span lang="hi" xml:lang="hi">) है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसंधान का एनिमल मॉडल </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम सेल्स पर सफल प्रयोग कर लेते हैं तो कुछ प्रयोग हमें जानवरों पर भी करके दिखाने होते हैं कि जानवरों में इनका कैसा प्रभाव आ रहा है। क्या हम इसका एनिमल मॉडल बना सकते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए हमने जैबराफिश (</span>Zebrafish<span lang="hi" xml:lang="hi">) का प्रयोग किया और जैबराफिश में कार्डियक हाइपरट्रॉफी पैदा की। इसमें एक अन्य एलोपैथिक दवा </span>Erythromycin <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोग की। यह बहुत सामान्य एंटीबायोटिक है। इसके लम्बे समय तक प्रयोग से कार्डियक हाइपरट्रॉफी होती है। जानवरों में एक अच्छी बात यह है कि हम उनके कार्डियक फंक्शन नाप सकते हैं। हमने इन जैबराफिश की ई.सी.जी. की। इसके भी अच्छे परिणाम हमें प्राप्त हुए जैसे हम इंसानों को ट्रेडमेल पर दौड़ते हुए देखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही चूहों का भी ट्रेडमेल होता है। इस बार हमने ट्रेडमेल एक्सपैरिमेंट मछलियों के साथ किया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए हमने एक ट्यूब में मछलियों को रखा और उसमें पानी की स्पीड बढ़ा दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मछली को उस गति मेंटेन करने के लिए तेजी से तैरना पड़ा। इस तरह उनकी ट्रेडमेल वाली </span>Phenotype <span lang="hi" xml:lang="hi">पैदा हो गई तथा उनकी हृदय गति बढ़ने लगी। तब हमने एक अलग सैट-अप से उनका ई.सी.जी. किया। जब हमने </span>Erythromycin <span lang="hi" xml:lang="hi">दिया तो इनके कार्डियक फंक्शन्स परिवर्तित हो गए और </span>EGG Phenotype <span lang="hi" xml:lang="hi">भी परिवर्तित हो गई। फिर हमने इन्हें योगेन्द्र रस दिया जो स्वर्ण भस्म से बना हुआ है। यह हम हृदय रोगियों को देते रहे हैं। जब हमने इस भस्म को मछलियों को दिया तो पाया कि इनका कार्डियक फंक्शन सामान्य हो गया। भस्मों को लेकर कुछ भ्रान्तियाँ हैं कि इनके दुष्परिणाम (</span>Side Effects<span lang="hi" xml:lang="hi">) बहुत ज्यादा हैं तथा प्रभाव (</span>Efficacy) <span lang="hi" xml:lang="hi">कम हैं। इस भ्रान्ति को दूर करने के लिए हम अनुसंधान कर रहे हैं। इसका पहला शोध योगेन्द्र रस पर किया गया। इसके प्रयोग ने स्पष्ट दिखाया कि जो भी कार्डियक फंक्शन हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य हो गए थे। हृदय की सूजन भी कम हो गई। मछली के हृदय का जो आकार बढ़ गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भी सामान्य हो गया था।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ई.सी.जी. को कार्डियोलॉजिकली तथा फिजियोलॉजिकली महत्वपूर्ण पैरामीटर माना जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भी योगेन्द्र रस से डोज़ डिपेंडेंट तरीके से सामान्य किया। इस प्रयोग में हमने नॉर्मल कंट्रोल ग्रुप रखा था जिसमें सामान्य स्वस्थ मछलियाँ भी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीमार मछलियाँ भी थी। उनमें से कुछ पर हमने कार्डियक हाइपरट्राफी में प्रयोग की जाने वाली एलोपैथी की दवा </span>verapamil <span lang="hi" xml:lang="hi">तथा कुछ पर योगेन्द्र रस का प्रयोग किया। हमने पाया कि योगेन्द्र रस का प्रभाव </span>verapamil <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्यादा अच्छा था।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चूहों पर रक्तचाप में किए गए एक अन्य प्रयोग में हमने पाया कि ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी हृदयामृत वटी लाभकारी औषधि है। हार्ट फंक्शन या किडनी फंक्शन के अनियमित होने से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पित्त बढ़ने से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा बढ़ने से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेस बढ़ने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नींद न आने आदि से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। हम कारणकारी सिद्धांत पर काम करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम पर काम करते हैं जबकि एलोपैथ लाक्षणिक चिकित्सा पद्धति है जो सिम्टम्स पर कार्य करती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें मुख्य बिन्दु </span>Chemical Characterisation <span lang="hi" xml:lang="hi">कि इन औषधियों में कौन-कौन से फाइटोकैमिकल्स हैं और क्या वे प्रत्येक बैच में कांस्टेंट आ रहे हैं या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैरिएंट्स हैं कि नहीं। क्योंकि </span>Quarterly Manufacturing<span lang="hi" xml:lang="hi"> भी उतना ही जरूरी है जितना एक दवा की </span>EfficacyÐ <span lang="hi" xml:lang="hi">। हमने सभी दवाओं के २०-२५ बैच लिए और उनका क्लिनिकल वैलिडेशन किया और पाया कि किसी भी बैच में कोई वैरियंट्स नहीं हैं। दूसरे बैच के मुकाबले कम्पैरेटिव स्टडी की। हमने हृदयामृत वटी में आठ नए कम्पाउण्ड रिपोर्ट किए। उनका फुल क्लिनिकल वैलिडेशन किया और पाया कि इनका बैच-टू-बैच वैरिएंट्स बिल्कुल भी नहीं था। हमने इस पर सेफ्टी ट्रॉयल भी किया। यह प्रयोग भी हमने </span>Zebrafish <span lang="hi" xml:lang="hi">पर ही किया और मनुष्य की डोज़ के २८ गुणा डोज़ हम लेकर गए और वह भी एक महीने तक। इसका कोई भी दुष्परिणाम नहीं पाया गया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद में एलोपैथी से बेहतर परिणाम</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य स्वामी जी ने वर्षों पहले बताया था कि एलोपैथी दवाओं के साइड इफैक्ट्स हैं तथा आयुर्वेद में एलोपैथी से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। पूज्य स्वामी जी व पूज्य आचार्य जी का संकल्प है कि हम आयुर्वेद को एविडेंस बेस्ड मेडिसिन के तौर पर स्थापित कराएँगे। कुछ बीमारियों जैसे लीवर की बीमारियों में तो ऐलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में कोई औषधि है ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलोपैथी के चिकित्सक भी आयुर्वेद की दवाएँ देते हैं। उनके पास कोई विकल्प ही नहीं है। लेकिन अभी भी कानून ये बना हुआ है कि एलोपैथी के चिकित्सक आयुर्वेकि दवा प्रेसक्राइब नहीं कर सकते। स्वामी जी का संकल्प है कि इस कानून को भी हम चैलेंज करेंगे और हिन्दुस्तान में बदलवायेंगे। एलोपैथ के जहर को मेडिसिन का दर्जा तथा आयुर्वेद के अमृत को मान्यता नहीं। हम या तो संसद में सरकार से इसका कानून पास करवाएँगे या सुप्रिम कोर्ट से आर्डर लेकर आएँगे। हम आयुर्वेद को राष्ट्र नहीं पूरे विश्व में एविडेंस बेस्ड मेडिसिन के रूप में प्रतिष्ठा दिलाएँगे। जो पैरामीटर्स एलोपैथ वाले फॉलो कर रहे हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद में रिसर्च एण्ड एविडेंस बेस्ड मेडिसिन शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम पतंजलि ने किया। पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी तथा पतंजलि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम के अथक परिश्रम का ही यह परिणाम है। हम योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यज्ञ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा को रिसर्च एण्ड एविडेंस के साथ आपको उपलब्ध कराते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योगेन्द्र रस का रिसर्च एण्ड एविडेंस विश्व के प्रसिद्ध जरनल्स में से एक </span>Biomolecules Research General<span lang="hi" xml:lang="hi"> में प्रकाशित हुआ है। इस अत्यंत प्राचीन शास्त्रीय भस्म का इतना गहन अनुसंधान पत्र (</span>Research Paper<span lang="hi" xml:lang="hi">) आज तक प्रकाशित नहीं हुआ था। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद पर यह अनुसंधान कार्य ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन पतंजलि एलोपैथ को आयुर्वेद से रिप्लेस कर एक नया विकल्प दे देगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पतंजलि की कार्डियोग्रिट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदयामृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगेन्द्र रस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगेयाश्व पिष्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अकीक पिष्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्जुन छाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्जुनारिष्ट आदि हृदय के लिए अत्यंत गुणकारी औषधियाँ हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2023</category>
                                            <category>योग एवं आयुर्वेद</category>
                                            <category>अप्रैल</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2834/hridaya-rogon-me-pramanik-aushadhi--hridyamrit-vati--va-yogendra-ras</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Apr 2023 21:48:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
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