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                <title>कैंसर का इलाज  करने की क्षमता - योग संदेश</title>
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                <description>कैंसर का इलाज  करने की क्षमता RSS Feed</description>
                
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                <title>स्वास्थ्य समाचार</title>
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                        <![CDATA[<h4 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">गलत दवाएं खाने से खराब हो रहे हैं </span>20%<span lang="hi" xml:lang="hi">  तक लिवर : एक्सपर्ट</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया में दवा से लिवर को पहुंचने वाली इंजरी के मामले काफी बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे ही न खाएं प्रोटीन सप्लिमेंट्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेन किलर या एंटीबायोटिक्स</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लि</span><span lang="hi" xml:lang="hi">वर को हो रहे नुकसान की एक बड़ी वजह अब दवाएं बनती जा रही हैं। दुनिया भर में दवा के मिसयूज की वजह से </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत तक लिवर खराब हो रहे हैं। भारत में भी इसकी वजह से लिवर खराब होने का आंकड़ा जो पहले </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब वह बढ़कर </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत तक</span></h5>...]]>
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                        <![CDATA[<br /><h4 style="text-align:justify;" align="center"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">गलत दवाएं खाने से खराब हो रहे हैं </span>20%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक लिवर : एक्सपर्ट</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया में दवा से लिवर को पहुंचने वाली इंजरी के मामले काफी बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे ही न खाएं प्रोटीन सप्लिमेंट्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेन किलर या एंटीबायोटिक्स</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लि</span><span lang="hi" xml:lang="hi">वर को हो रहे नुकसान की एक बड़ी वजह अब दवाएं बनती जा रही हैं। दुनिया भर में दवा के मिसयूज की वजह से </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत तक लिवर खराब हो रहे हैं। भारत में भी इसकी वजह से लिवर खराब होने का आंकड़ा जो पहले </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब वह बढ़कर </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत तक पहुंच गया है। कोरोना के समय और कोरोना के बाद इम्यूनिटी बढ़ाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बॉडी स्ट्रेंथ के लिए बिना डॉक्टरी सलाह के मनमाने प्रोटीन सप्लिमेंट्स का इस्तेमाल करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेन किलर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एंटीबायोटिक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टीबी की दवा लेने से लिवर को इंजरी हो रही है। आईएलबीएस हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉक्टर एस.के. सरीन ने अपने दावे में यहां तक कहा कि जो बहुत ज्यादा अल्कोहल लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर वो शराब के सेवन के साथ दिन भर में </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> परासिटामोल भी लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह भी उनके लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोटीन सप्लिमेंट्स का प्रयोग खतरनाक</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डॉक्टर सरीन ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि हम जो भी चीज खाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह लिवर में जाता है। खाना या दवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर चीज लिवर तक पहुंचता है। इन दिनों युवाओं में रैपिड वेट बढ़ाने के लिए प्रोटीन सप्लिमेंट्स का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। इसकी वजह से युवाओं के लिवर में सीवियर इंजरी हो रही है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दवाओं का दुष्प्रभाव भी </span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदार</span></span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">टीबी की दवा भी बहुत खतरनाक होती है। टीबी से पीड़ित लोग पहले से कमजोर होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका वजन कम होता है। कुछ ऐसी दवाएं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके लेने से उनका लिवर खराब हो जाता है। इसी प्रकार एंटीबायोटिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेन किलर खाने की वजह से भी ऐसा होता है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रग्स से लिवर खराब होने के मामले में गंगाराम अस्पताल के गेस्ट्रोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. अनिल अरोड़ा ने कहा कि प्रोटीन से नुकसान नहीं होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब कोई प्रोटीन सप्लिमेंट्स लेता है तो इसमें से कई में स्टेरॉयड होता है। स्टेरॉयड की वजह से लिवर खराब हो जाता है। बॉडी बिल्डिंग में अक्सर युवा अपने मन से रैपिड वेट गेन के लिए प्रोटीन सप्लिमेंट्स ले लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी वजह से कई युवाओं में डीप जॉन्डिस हो रहा है। उन्होंने कहा कि एंटी टीबी की दवा बहुत खतरनाक होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई बार तो यह लिवर फेल की भी वजह बनती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(186,55,42);"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेग्नेंट महिलाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्ग तथा डायबिटीज के मरीज कोई भी दवा सोच समझकर लें</span></span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डॉक्टर सरीन ने कहा कि गला खराब होने में लोग पेन किलर और एंटीबायोटिक खा रहे हैं। प्रेग्नेंट महिलाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्ग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायबिटीज के मरीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम वजन वाले लोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें कोई भी दवा सोच समझकर लेनी चाहिए। अपने मन से कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे प्रोटीन सप्लिमेंट्स हो या एंटीबायोटिक या पेन किलर यह खतरनाक है और उनके लिए उनकी दवा ही जहर बन जाती है। लिवर की बीमारी </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi">वें स्टेज में होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज इलाज के लिए स्टेज </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> में पहुंचते हैं। स्टेज </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> तो बहुत कॉमन हो रहा है। इसलिए जागरूकता जरूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना जाने-समझे दवा का इस्तेमाल न करें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साभार : </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/delhi/other-news/10-to-20-percent-liver-damage-caused-due-to-wrong-use-of-medicines/articleshow/96367768.cms</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रोज 50 ग्राम मोटा अनाज खाने से हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा 30 प्रतिशत तक कम होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह कोलेस्ट्रॉल घटाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंसुलिन सुधारता है</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साल 2023 को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सं</span><span lang="hi" xml:lang="hi">युक्त राष्ट्र ने 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया है। मोटे अनाज को साबुत अनाज या होल ग्रेन भी कहा जाता है। आखिर यह साबुत अनाज क्या है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी अचानक से मांग बढ़ी है। लोगों में सेहत के लिए ये पहली पसंद बन रहा है। मायो क्लिनिक के अनुसार साबुत अनाज न केवल बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है बल्कि गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। इंसुलिन के स्तर को संतुलित करता है। ब्लड प्रेशर घटाता है। इससे हृदय रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रोक और डायबिटीज का खतरा घटता है। आंतों के कैंसर का खतरा भी कम होता है। होल ग्रेन काउंसिल के अनुसार यदि व्यक्ति रोजाना ५० ग्राम या उससे अधिक मोटा अनाज या उससे बने पदार्थों का सेवन करता है तो कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है। हार्ट फाउंडेशन के अनुसार इसका सुबह नाश्ते में सेवन सबसे अच्छा होता है। दिन में खाना ज्यादा फायदेमंद है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मोटा अनाज है क्या</span>?</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फसलों से पैदा हुए खाए जा सकने वाले बीज को अनाज कहा जाता है जैसे गेहूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चावल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजरा आदि। किसी भी अनाज के तीन हिस्से होते हैं। जिस अनाज में ये तीनों हिस्से हों उसे साबुत अनाज कहते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रान या चोकर</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह अनाज की सबसे ऊपरी कठोर परत होती है। इसमें अनाज का सर्वाधिक फाइबर होता है। साथ ही विटामिन्स और मिनरल्स भी होते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जर्म</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह बीज का वो हिस्सा है जो नए पौधे के रूप में अंकुरित होता है। इसमें कई विटामिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्दी फेट और पौधों में पाए जाने वाले अन्य पोषक तत्व होते हैं। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एंडोस्पर्म</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह हिस्सा बीज की ऊर्जा आपूर्ति करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें ज्यादातर स्टार्च होता है। इसमें बहुत कम मात्रा में प्रोटीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विटामिन और फाइबर होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हार्वर्ड ने बताया मोटा अनाज है कितना फायदेमंद</span>?</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय रोग : खतरा 30% तक कम</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हार्वर्ड ने महिलाओं पर 10 साल तक किए गए अध्ययन में पाया कि जो महिलाएं भोजन में रोजाना 35 से 50 ग्राम तक साबुत अनाज या उनसे बने प्रोडक्ट का सेवन करती थीं उनमें हार्ट अटैक या हृदय रोगों से मृत्यु का खतरा 30% तक कम पाया गया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">टाइप-2 डायबिटीज : इसका खतरा भी 30 प्रतिशत तक कम होता है</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हार्वर्ड इंस्टीट्यूट ने 1.60 लाख महिलाओं पर 18 साल तक किए गए अध्ययन में पाया कि रोजाना औसतन 50 ग्राम साबुत अनाज का सेवन करने वाली महिलाओं में टाइप-२ डायबिटीज होने का खतरा 30 प्रतिशत तक कम होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर : आंतों में होने वाले कैंसर की आशंका 21 प्रतिशत तक कम</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">5 लाख महिलाओं और पुरुषों पर ५ वर्ष तक किए गए अध्ययन में पाया गया कि साबुत अनाज का सेवन करने से आंतों में होने वाले कैंसर का खतरा २१ प्रतिशत तक कम होता है। दरअसल इसमें पाया जाने वाला फाइबर आंतों का सेहतमंद रखता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भोजन में ऐसे करें शामिल</span>?</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्वार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जौ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजगिरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्राउन राइस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मक्का और रागी हमारे यहां पाए जाने वाले प्रमुख मोटे अनाज हैं। इन्हें निम्र तरीके से भोजन में शामिल किया जा सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चना :</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> चने को अंकुरित करके खाना सबसे आसान और सर्वाधिक फायदेमंद होता है। इसे गेहूँ के आटे के साथ भी मिलाकर खा सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाजरा :</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> यह कैल्शियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोटीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयरन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैग्ग्रीशियम का प्रमुख स्रोत है। इसकी खिचड़ी या दलिया बनाकर खाएं। इसे भोजन में चावल की जगह शामिल किया जा सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जौ :</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> इसका दलिया और रोटी आसानी से बनती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजगिरा :</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> इसमें विटामिन बी-२</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बी-६</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिंक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैग्रीशियम आदि होते हैं। मुरमुरे की तरह लड्डू बनाकर खा सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रागी :</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> आयरन और कैल्शियम का प्रमुख स्रोत है। इसे आटे के साथ मिलाकर रोटी के रूप में खा सकते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सब्जियों में मिले यौगिक से बन सकती हैं कैंसर की नई दवाएं</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सर के उपचार के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक नए-नए शोध करते रहते हैं। अब पोलैंड के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में बताया कि आने वाले समय में सब्जियों से कैंसर की दवाएं बनाई जा सकती हैं। शोधकर्ताओं नेसालनम जीन वाले पौधों में ऐसे बायोएक्टिव यौगिकों की पहचान की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी मदद से कैंसर की नई दवाएं बनाई जा सकती हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गौरतलब है कि आलू (सोलनम ट्यूबरोसम)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टमाटर (सोलनम लाइकोपर्सिकम) और बैंगन (सोलानम मेलोन्गेना) जैसे पौधे जीन सोलनम का हिस्सा हैं। यह शोध हाल ही में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जर्नल फ्रंटियर्स इन फार्माकोलॉजी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में प्रकाशित हुआ है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर का इलाज  करने की क्षमता</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह अध्ययन प्रोफेसर मैग्डालेना विकील के नेतृत्व में पालैंड के पोजनैन स्थित </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एडम मिकीविक्ज यूनिवर्सिटी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के शोधकर्ताओं ने किया। उन्होंने ग्लाइको अल्कलॉइड नामक बायोएक्टिव यौगिकों की समीक्षा की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आमतौर पर आलू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टमाटर जैसी सब्जियों में पाया जाता है। पता चला है कि इस यौगिकों में कैंसर का इलाज करने की क्षमता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">गुणों को तलाशने की जरूरत</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोफेसर विकील का कहना है कि कैंसर के इलाज के लिए उन औषधीय पौधों की भी मदद ली जा सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका विभिन्न बीमारियों के उपचार में वर्षों से सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में पांच ग्लाइको अल्कलॉइड यौगिकों- सोलनिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाकोनीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोलासोनाइन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोलामार्गिन और टोमैटिन का अध्ययन किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पौधों के सोलानेसी परिवार से प्राप्त होने वाल कच्चे अर्क में पाए जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें अक्सर नाइटशेड भी कहा जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि कई पौधे ऐसे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जहरीले होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सही खुराक जहर को भी दवा में बदल सकती है। ऐसे में यदि वैज्ञानिकों को अल्कलॉइड की एक सुरक्षित खुराक मिल जाए तो इनकी मदद से कई रोगों के लिए दवाएं बनाई जा सकती हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संभावनाएं मौजूद</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नए शोध में पता चला है कि ग्लाइको अल्कलॉइड विशेष रूप से कैंसर कोशिका की वृद्धि को रोक सकता है और कैंसर कोशिका को खत्म करने में मददगार हो सकता है। शोध में इस बात के प्रमाण भी मिले हैं कि ग्लाइको अल्कलॉइड विषाक्त नहीं होते और न ही डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:right;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साभार : हिन्दुस्तान समाचार पत्र </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायबिटीज़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापे का कारण हैं ये ४ व्हाइट फूड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूँ पहुँचाते हैं नुकसान</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">शक्कर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नमक और मैदा जैसे उत्पादों का कितना इस्तेमाल उचित है</span>?</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ शरीर के लिए सबसे जरूरी है कम खाना और ज्यादा शारीरिक मेहनत करना। लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है भोजन में अच्छे न्यूट्रिशन का होना। बदली हुई जीवनशैली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोजन में फास्ट फूड और पैकेज्ड फूड की बढ़ी हुई मात्रा को कम कर दिया है। इनमें चीनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नमक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैदा और अजीनोमोटो जैसे पदार्थ शामिल हैं। खास बात यह है कि प्रोसेस्ड फूड में इनकी मात्रा खतरनाक स्तर तक होती है। हार्वर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार ये न केवल कैंसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टाइप-२ डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्लड प्रेशर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहे हैं। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह उम्र को कम से कम दस साल तक कम कर सकते हैं। जानिए उन चार खाद्य पदार्थों के बारे में जिनका ओवरयूज़ बहुत खतरनाक है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">शक्कर : कैंसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायबिटीज जैसी बीमारियों का कारण</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नुकसान :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> रिफाइंड शुगर यानी चीनी को एम्पिटी कैलोरी भी कहते हैं। इसमें कोई भी पोषक तत्व नहीं होते। जैसे ही यह हमारी पाचन नली में पहुँचती है ग्लूकोज और फ्रक्टोज में टूटती है। जो लोग शारीरिक श्रम नहीं करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिवर में यह फैट के रूप में जमा हो जाती है। इसका इंसुलिन पर भी बुरा असर पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे डायबिटीज होने का खतरा बढ़ता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सही मात्रा :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong> </strong>भारतीय परिवेशमें केवल ५ चम्मच चीनी ही प्रतिदिन काफी है। ४० की उम्र के बाद इसे और घटाएँ।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अजीनोमोटो :</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> दिल के लिए बेहद नुकसानदायक</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नुकसान :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> अजीनोमोटो मोनोसोडियम ग्लूटामेट है। जो चाइनीज फूड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूप आदि में मिलाया जाता है। यह प्राकृतिक रूप से टमाटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंगूर में पाया जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सही मात्रा :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong> </strong>कृत्रिम रूप से लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सफेद नमक :</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> हाई ब्लड प्रेशर के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नुकसान :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong> </strong>नमक शरीर में पानी की मात्रा पर असर डालता है। यदि हम ज्यादा नमक खाते हैं तो शरीर में जमा हुआ अतिरिक्त पानी ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है। इसके अलावा जब नमक को रिफाइन किया जाता है तो इसमें पाया जाने वाला आयोडीन हट जाता है। वहीं रिफाइन किए जाने के दौरान इसमें फ्लोराइड्स मिलाए जाते हैं जो ज्यादा खाने पर नुकसान पहुँचाते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सही मात्रा :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> रोज के खाने में अधिकतम १ छोटा चम्मच नमक लेना चाहिए। बीपी है तो डायटिशियन से परामर्श जरूरी।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मैदा :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का कारण</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नुकसान :</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> मैदा बनाने के लिए गेहूं को प्रोसेस करने के दौरान इसमें पाए जाने वाले टिशू जिन्हें इंडोस्पर्म कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खत्म हो जाते हैं। ऐसे ही पाचन के लिए आवश्यक इसकी चोकर भी हट जाती है। कुल मिलाकर गेहूँ से मैदा बनाते समय इसके लगभग पूरे पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। ऐसे में यह पाचन सबंधी गंभीर समस्या पैदा करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>सही मात्रा </strong>:</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> मैदा से बने खाद्य पदार्थ सप्ताह में एक बार खा सकते हैं। वो भी सिर्फ टेस्ट करने लायक।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लिवर कैंसर से बचना है तो वजन काबू में रखें</span></strong></span></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने साढ़े तीन लाख लोगों पर किया अध्ययन</span></strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर आप मोटे हैं और आपका वजन आपके कद के अनुरूप बहुत ज्यादा है तो आप एक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई गंभीर बीमारियों के जोखिम में हैं। एक नए अध्ययन मेें चेतावनी दी गई है कि वजन बढ़ने से पाचन तंंत्र की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मध्यम आयु वर्ग में लिवर कैंसर हो सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अध्ययन के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के लिए पेट या यकृत में ट्यूमर के विकास का खतरा 13 प्रतिशत बढ़ जाता है। वहीं भोजन नली का कैंसर और अग्याशय के कैंसर की आशंका भी क्रमश: 10 और 6 प्रतिशत बढ़ जाती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">यूकेबायोबैंक से प्राप्त किया गया डाटा: </span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिटिश और स्वीडिश शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में उन्होंने यूके बायोबैंक डाटाबेस से प्राप्त किए गए 3,50,000</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक लोगों के डाटा का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि वजन का बढ़ना कैंसर के जोखिम से जुड़ा हुआ था। वहीं एक अन्य अध्ययन के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपके बॉडी इंडेक्स मॉस में हुई प्रत्येक पांच किलोग्राम प्रति वर्गमीटर की बढ़ोतरी से पुरुषों में लिवर कैंसर होने खतरा 38 फीसदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि महिलाओं में 25 फीसदी बढ़ जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया की दो-तिहाई आबादी मोटापे से परेशान:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें कोई शक नहीं कि मोटापा लाइफस्टाइल से जुड़ी एक तरह की बीमारी है जिसकी वजह से शरीर में कई तरह की बीमारियां और हो जाती हैं जिसमें कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी शामिल है। यह स्टडी और रिसर्च एक ऐसे समय पर आयी जब दुनिया की करीब-करीब दो तिहाई आबादी मोटापे की समस्या से जूझ रही है जिसमें व्यस्कों के साथ-साथ बच्चों में भी मोटापे का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या वजन कम करने से नहीं होगा कैंसर:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर का खतरा कई दूसरी चीजों पर भी निर्भर करता है जिसमें वातावरण से जुड़े फैक्टर अहम होते हैं। साथ ही तंबाकू और केमिकली प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट के सेवन से भी कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन मोटापा लाइफस्टाइल से जुड़ी एक अहम समस्या है जिससे कैंसर होनेकी संभावना बढ़ती है। लिहाजा वजन कम करना महज इसलिए जरूरी नहीं कि ताकि आप अच्छे दिखें और अच्छे कपड़े पहन सकें बल्कि इसका बहुत हद से संबंध आपकी सेहत से भी है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नए उपचार ने उम्मीद</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> जगाई:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिकों द्वारा वजन घटाने वाला एक नया उपचार खोजा गया है। इस उपचार ने चूहों का पसीना निकाला और वसा को कम कर दिया। वैज्ञानिकों का कहना है कि मोटापे से निपटने के लिए इसका इस्तेमाल मनुष्यों पर भी किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रतिरक्षा प्रणाली को लक्षित करके पेट की चर्बी को कम करना संभव है। उन्होंने साइटोकाइन थाइमिक स्ट्रोमल लिम्फोपोइटिन (टीएसएलपी) के साथ चूहों का इलाज करने के बाद खोज की। यह एक प्रकार का प्रतिरक्षा प्रणाली प्रोटीन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण वसा और वजन कम हुआ।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]>
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                                            <category>2023</category>
                                            <category>फरवरी</category>
                                            <category>स्वास्थ्य समाचार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Feb 2023 21:47:02 +0530</pubDate>
                
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