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                <title>शरीर को विषाणु मुक्त बनाता है 'जुकाम’ - योग संदेश</title>
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                <description>शरीर को विषाणु मुक्त बनाता है 'जुकाम’ RSS Feed</description>
                
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                <title>शरीर को विषाणु मुक्त बनाता है 'जुकाम’</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डॉ. नागेन्द्र कुमार नीरज</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2947/makes-the-body-virus-free-from-colds"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2024-05/31.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  जुकाम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> ऐसा रोग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी आज तक दवा तक नहीं खोजी जा सकी। यही नहीं औषधियों के प्रयोग से इस रोग का अधिक जटिल होना अलग रहस्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुकाम को रोग मानना ही भूल है। यह तो शरीर-सफाई तथा विजातीय टॉक्सिक आर्गेनिज्म के प्रभाव को निष्क्रिय करने की अद्वितीय नैसर्गिक यांत्रिकता है। डॉ. नागेन्द्र नीरज इसी अवधारणा से </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जुकाम</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का विश्लेषण करते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जु</span><span lang="hi" xml:lang="hi">काम के समय छींक की सामान्य गति प्राय: 100 मील प्रति घण्टा होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि नाक में उपस्थित विजातीय विषाणु एवं टॉक्सिक पदार्थ तेजी से निकल कर बाहर जा सकें। कुछ लोगों में यह गति 174 मील प्रति घंटा तक देखी गयी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिस्टर रेगिनाल्ड कॉलमैन की छींक अब तक की सबसे अधिक शक्तिशाली 174 मील प्रति घंटा मापी गयी है। चिकित्सक इन्हें एक खास दुर्लभ एवं दुसाध्य प्रकार के साइनस रोग से ग्रस्त मानते हैं। रेगिनाल्ड कॉलमैन के नाक में कई दिनों तक विजातीय मलवा इकट्ठा रहता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके दबाव एवं उत्तेजना से उन्हें शक्तिशाली छींक आती थी। जब वे छींकते थे तो आसपास के लोगों को महसूस होता था कि कोई अंधड़ तूफान या भूचाल-सा आ गया है। इस रहस्यमय तूफानी छींक की गुत्थी वैज्ञानिक अभी तक नहीं सुलझा सके हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जुकाम यह सूचना देता है कि व्यक्तिकी सुरक्षा-व्यवस्था (इम्यून पॉवर) काफी कमजोर हो गई है और शरीर के अन्दर टॉक्सिक ऑर्गेनिज्म अर्थात् दुश्मन अपना अड्डा जमाने में संलग्र हो गए हैं। आपने देखा होगा कि जब भी आप बीमार होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जिह्वा का स्वाद मारा जाता है और आप उसे उत्तेजित करने के लिए मसालेयुक्तचटपटे आहार शुरू कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नमक की मात्रा बढ़ा देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुस्सा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिड़चिड़ापन तथा कामासक्तिबढ़ जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रात्रि का जागरण बढ़ जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्राम नहीं मिल पाता। बेमेल भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वातानुकूलित कमरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यायाम तथा श्रम का अभाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदूषित हवा में साँस लेना- यही तो चाहिए दुश्मनों को आक्रमण करने के लिए।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">62 घंटे का जीवनकाल:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्जीनिया विश्वविद्यालय के डॉ. जैक एम. ग्वाल्टनी जूनियर और ओवन हैडली विभिन्न समुदायों पर किए गए अपने शोध कार्यों से इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि जुकाम का वायरस पीड़ित व्यक्तिके हाथ द्वारा संक्रमित होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि चुम्बन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छींक या खाँसी द्वारा। पीड़ित व्यक्तिकहीं हाथ रखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर उस जगह स्वस्थ व्यक्तिहाथ रखे तो वह जुकाम से पीड़ित हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जुकाम के वायरस निर्जीव वस्तु पर भी 60 घंटे तक जीवित रहते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका के एक सर्वेक्षण के अनुसार जुकाम के कारण प्रतिवर्ष पाँच करोड़ श्रम-घण्टे बेकार जाते हैं। इससे मुक्तिके लिए डिस्पोजेबल रुमाल तैयार किया गया है। यह टिशू-रुमाल-क्लिनेंक्श की तरह तीन तह का होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसकी बीच वाली तह में वायरस अवरोधी सिड्रिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेलिक ऐसिड व सोडियम लोरिल सल्फेट नामक तीन रसायन हैं। ये मिनटों में जुकाम के हजारों वायरस को खत्म कर देते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उम्र बढ़ने के साथ-साथ जुकाम होने की दर कम हो जाती है। मिशिगन विश्वविद्यालय के डॉ. आर्नल्ड मोंटो 11 वर्ष तक 1000 लोगों पर शोध कार्य कर इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि 60 वर्ष की उम्र तक जुकाम होने की संभावना मात्र 0.5 प्रतिशत तक ही रहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि जवान तथा बच्चे जुकाम से बार-बार पीड़ित होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कारण कि बच्चों में रोगों को बाहर करने की तीव्रता ज्यादा है। 20-30 वर्ष के लोग जुकाम-पीड़ित बच्चों के साथ रहने के कारण ज्यादा जुकाम पीड़ित होते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जो कुछ भी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुकाम की स्थिति में दवा लेकर नैसर्गिक विष-निष्कासन की प्रक्रिया में प्रतिरोध डालना मूर्खता के सिवाय कुछ नहीं है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्यों न लें औषधियाँ:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सकजीवन-विरोधी (एण्टीबॉयोटिक्स) औषधियाँ देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ये औषधियाँ दुश्मन-जीवाणुओं के साथ प्रतिरक्षात्मक जीवाणुओं को भी समाप्त करने में लग जाती हैं। शरीर की प्रतिरक्षात्मक व्यवस्था को दवा के पूर्व सिर्फ दुश्मनों से लड़ना पड़ रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दवा लेने पर दूसरा दुश्मन औषधि के रूप में पैदा हो जाता है। शरीर में पहले ही जहर भरा हुआ था। अब औषधियों के जहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुश्मनों एवं मित्र कीटाणुओं के मृतअंश के कारण भयंकर मलबा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कूड़ा-कचरा शरीर में जमा हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर के सारे संस्थान अधिक विषाक्तहो जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर से दुर्गंध आने लगती है। ऐसी स्थिति में यदि रोगी को केवल दवा के सहारे रखा गया और प्राकृतिक चिकित्सा नहीं मिली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह असाध्य दमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एम्फिजिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टी.बी.</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर से ग्रस्त हो सकता है। इसलिए जुकाम रूपी खतरे का सायरन बजते ही सचेत हो जाएँ। पर यह अवश्य ध्यान रखें कि जुकाम के रूप में शरीर-शुद्धि के लिए मेहमान आया है। उसे पूर्ण सहयोग कर अपनी प्रतिरक्षात्मक पंक्तिसबल करने में लगें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">औषधि वैज्ञानियों ने जुकाम से लड़ने  के लिए कितनी ही जीवन-विरोधी औषधियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन्जेक्शन तथा टीके आदि ईजाद किए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अभी तक जुकाम पर विजय प्राप्त नहीं हो सकी है। कारण एक को मारने को शस्त्र तैयार होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दुश्मन दूसरी फौज खड़ी कर लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर पहले वाला शस्त्र प्रभावी नहीं हो पाता। बताते हैं वर्तमान में जुकाम पैदा करने वाले पृथक्-पृथक् गुण-धर्म वाले विषाणुओं की फौजों की संख्या 200 तक पहुँच चुकी है। इसमें सबसे सशक्तएवं प्रबल </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">रानो वायरस</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">फौज की टुकड़ी है। इसकी 113 प्रजातियाँ हैं। 60-70 प्रतिशत जुकाम का कारण </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">रानो-वायरस</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">दुश्मन टुकड़ी ही है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उपचार विधि:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपचार की दृष्टि से जुकाम के लिए कोई भी अंग्रेजी दवा न लें। पूर्ण विश्राम करें। शरीर के साथ पाचन-संस्थान को भी विश्राम दें। इस दृष्टि से 2-3 दिन नींबू-पानी-शहद प्रत्येक ढ़ाई घंटे के अंतराल पर लेते रहें। पानी का खूब प्रयोग करें। पानी का तापमान शरीर के तापमान के बराबर हो। यदि नींबू+पानी+शहद पर रहना मुश्किल हो तो वैसी स्थिति में नीबू के फल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौसम्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चकोतरे से फलाहार करें। नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. लाइनसपालिंग ने जुकाम की सर्वोत्तम औषधि विटामिन-सी माना है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फलाहार मात्र से ही जुकाम चला जाता है। इसके अतिरिक्त चोकरदार मोटे आटे की रोटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उबली सब्जी तथा सलाद सुबह के भोजन में तथा सायंकालीन भोजन में सिर्फ फलाहार लें। सूप भी 3-4 बार ले सकते हैं। फलों में सेव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नाशपत्ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पपीता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खीरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ककड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तरबूज आदि मौसमानुसार जो भी सब्जी तथा फल मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लें। उपचार में पेट की पट्टी आधा घंटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">20 मिनट गरम-ठण्डा सेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एनिमा के बाद 20 मिनट गरम पाद स्नान लेने से तीव्र जुकाम में शीघ्र लाभ मिलता है। यह क्रम ५ दिन तक लगातार करें।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपवास में शरीर को विश्राम मिलता है तथा पाचन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवशोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सात्मीकरण की सारी शक्तिशरीर से जहर निकालने में लग जाती है। फिर 4-5 दिन में ही जुकाम चला जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अन्य उपाय:</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">15 दिन तक प्रात:काल कुंजर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलनेति तथा सूत्रनेति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घृतनेति भी करें। रात्रि को सोते समय (50 ग्राम सरसों का तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1 ग्राम कपूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधा नींबू का रस मिलाकर दोनों नाकों में 10-10 बूँद डालकर तेलनेति करें। रात्रि को सोते समय हथेलियों एवं पादतली पर 15-20 मिनट तक सरसों का तेल मसल कर सोयें।) तेलनेति के पहले व बाद में चेहरे का वाष्प स्नान लें। भगोने में नीम तथा नीलगिरी के पत्ते डालकर उबालें। भगोने को स्टूल पर रखकर ऊपर से कम्बल तथा तौलिए से ढँक कर चेहरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर को वाष्प दें। कान में सरसों का तेल डालें तथा नाभि पर भी लगाएँ। तीव्र जुकाम की स्थिति में भी 2-3 बार मुँह में ठण्डा पानी भर कर ठण्डे पानी से 10-15 बार चेहरे पर छींटे मारें। यह उपचार शीघ्र प्रभावी होता है। पतंजलि योगपीठ द्वारा निर्मित औषधियों का प्रयोग शरीर का परिष्करण करके रोग दूर भगाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तीन दिन तक जुकाम नहीं जाए और बुखार भी रहने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह स्थिति इनफ्लुऐंजा या फ्लू बुखार की हो सकती है। 4-5 दिन तक बुखार न उतरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या जुकाम या बुखार ठीक हो जाने के बाद फिर हो जाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह स्थिति न्यूमोनिया और सायनस की है। इस स्थिति में भी रोगी को उपर्युक्त उपचार देने के साथ-साथ चिकित्सक से परामर्श करें।। </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रोग विशेष</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2015</category>
                                            <category>जनवरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2015 21:53:40 +0530</pubDate>
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