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                <title>संगठन के सशक्ति करण व शुद्धिकरण के लिए निरन्तर दिव्य आरोहण - योग संदेश</title>
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                <description>संगठन के सशक्ति करण व शुद्धिकरण के लिए निरन्तर दिव्य आरोहण RSS Feed</description>
                
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                <title>संगठन के सशक्ति करण व शुद्धिकरण के लिए निरन्तर दिव्य आरोहण</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राकेश कुमार : मुख्य केन्द्रीय प्रभारी</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत स्वाभिमान</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/2951/organization-for-continuous-empowerment-and-purification"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2024-05/85.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  किसी भी बड़े परिवर्तन के लिए सबके सामूहिक पुरुषार्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्य नेतृत्व एवं विचारधारा का होना आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन्हीं तीनों के संयोग से संगठन का निर्माण होता है।1947 की आजादी के बाद भारत वर्ष में भी लगातार अंग्रेजों की व्यवस्थाएं चलती रहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शहीदों ने सपना देखा था वैसा स्वराज्य नहीं आया। भ्रष्ट तंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रष्ट व्यवस्थाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंग्रेजों के कानून तथा अंग्रेजों की व्यवस्थाओं ने सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को मानसिक रूप से गुलाम बना कर रखा। चन्द लोगों ने देश का धन लूट-लूट कर विदेशों में जमा करवाकर भारत के 120 करोड़ लोगों के हक को लूट लिया था। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दे</span><span lang="hi" xml:lang="hi">शवासियों ने भी मान लिया था कि भारत की तो अब यही नीयति है कि अब यहाँ कोई आशा की किरण नहीं दिखाई देगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसी घनघोर अंधकार व निराशा के वातावरण में ईश्वर की प्रेरणा से एक सन्त सिपाही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योद्धा संन्यासी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगी योद्धा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य स्वामी जी महाराज ने संकल्प लिया कि भारत को आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक व राजनैतिक गुलामी से मुक्त करना ही होगा। इसी व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ पूज्य स्वामी जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य श्री ने </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> जनवरी </span>2009<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भारत स्वाभिमान संगठन की स्थापना की। भारत स्वाभिमान वर्तमान में सबसे कम आयु (मात्र </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष) का विश्व का सबसे विशाल संगठन है। जो कार्य संगठन </span>100-100<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों में नहीं कर पाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्था परिवर्तन व सत्ता परिवर्तन का विशाल कार्य भारत स्वाभिमान ने पिछले </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों में दिव्य नेतृत्व के द्वारा </span>125<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ लोगों के सहयोग से कर दिखाया। वर्तमान में भारत स्वाभिमान संगठन एवं उसके पाँचों सहयोगी संगठन यथा पतंजलि योग समिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला पतंजलि योग-समिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवा भारत व किसान पंचायत आदि मिलकर देश के सम्पूर्ण जिलों व प्रत्येक तहसील में कार्य कर रहे हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत स्वाभिमान संगठन देश के </span>600<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक जिलों</span>, 5000<span lang="hi" xml:lang="hi"> से अधिक तहसीलों तथा </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से अधिक गाँवों में सक्रियता के साथ कार्य कर रहा है। संगठन के माध्यम से राष्ट्रहित के मुद्दों पर जैसे काला धन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रष्टाचार पर जन-जागरण के साथ-साथ नि:शुल्क योग शिविर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नि:शुल्क नियमित योग कक्षायें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्षारेापण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नशामुक्ति अभियान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्तदान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छता अभियान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेदिक शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जड़ी-बूटी वितरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपदा राहत सेवा जैसे (बाढ़ राहत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुनामी राहत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केदारनाथ राहत सेवा)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गौसंरक्षण एवं संवर्धन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीब कन्याओं का विवाह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नेत्रदान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देहदान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वस्त्र वितरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी का प्रचार-प्रसार आदि असंख्य सेवा के कार्य चल रहे हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पूज्य स्वामी जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य श्री के नेतृत्व में भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सत्याग्रह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जन-जागरण अभियान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रष्ट सत्ता को उखाड़कर एक राष्ट्रवादी सरकार को स्थापित करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सब करोड़ों कार्यकर्ताओं के पूर्ण समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्ठा व पुरुषार्थ से भारत स्वाभिमान संगठन द्वारा किया गया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विगत </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> दशक पहले पूज्य स्वामी जी ने श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी के साथ योग-आयुर्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी एवं ऋषि ज्ञान परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए देवभूमि हरिद्वार से यह अनुष्ठान शुरू किया था। परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने देश व दुनिया के लगभग </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रूप से योग सिखाकर तथा मीडिया के माध्यम से योग को कन्दराओं व महलों से बाहर निकालकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घर-घर तक योग पहुँचाकर वर्तमान युग में योग को पुन: प्रतिष्ठा दिलवाई है। पतंजलि योगपीठ एवं माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के पुरुषार्थ से आज </span>177<span lang="hi" xml:lang="hi"> देशों के समर्थन के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व योग दिवस</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">घोषित करके योग की वैज्ञानिकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वभौमिकता एवं भारतीय ऋषि संस्कृति का लोहा माना है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रसेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवता सेवा के लिए संगठन के नेतृत्वकर्त्ता पूज्य स्वामी जी महाराज ने भारत की ऋषि परम्परा की तरह योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी व व्यवस्था परिवर्तन की महाक्रान्ति के बाद अब आचार्यकुलम् के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में महाक्रान्ति अर्थात् ज्ञान-क्रान्ति का लक्ष्य रखा हैं। पूज्य स्वामी जी महाराज कहते है भविष्य में समृद्धि का आधार ज्ञान अर्थात् बौद्धिक सम्पदा के आधार पर तय होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञानवान ही धनवान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञान ही धन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके पास बौद्धिक सम्पदा होगी वही विश्व का नेतृत्व करेगा।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे वर्तमान में पतंजलि योगपीठ द्वारा योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद को विश्व पटल पर स्थापित किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही हमारी प्राचीन वैदिक संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैदिक ज्ञान विज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ सम्पूर्ण विश्व पटल पर स्थापित किया जायेगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञान क्रान्ति के साथ-साथ संगठन को देश के </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख </span>36<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार </span>365<span lang="hi" xml:lang="hi"> गाँवों तक विस्तार करना तथा योग के साथ-साथ आयुर्वेद व स्वदेशी के वर्तमान स्थापित तंत्र में कोई न्यूनता या अपूर्णता है उसे पूर्ण करना।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रत्येक जिले में प्रथम चरण में </span>5-5<span lang="hi" xml:lang="hi"> आदर्श ग्राम स्थापित करना तथा धीरे-धीरे भारत के सभी गाँवों को आदर्श बनाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रत्येक जिले में आचार्यकुलम् खोलना तथा प्रत्येक ग्राम स्तर तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश के अन्तिम व्यक्ति को स्वस्थ बनाने के लिये योग  कक्षा स्थापित करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवा पीढ़ी को नशे से बचाकर राष्ट्रनिर्माण में उपयोगी बनाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुदरती खेती का अन्तिम किसान तक प्रचार करके रासायनिक खादों के जहर से किसान के खेतों को बचाने तथा  भारतवासियों को बीमारियों से बचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वस्थ भारत भय-भूख-बीमारी मुक्तराष्ट्र का निर्माण करना ये वह विराट लक्ष्य हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल सत्ता या सरकारें नहीं कर सकती है। सरकारें सहयोग कर सकती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवर्तन का वातावरण निर्मित कर सकती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन चरित्र-निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तित्व निर्माण का कार्य कोई दिव्यतायुक्त समर्थ योग्यगुरु ही कर सकता है। दिव्य गुरुदेव पूज्य स्वामी जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य श्री के मार्गदर्शन में भारत स्वाभिमान संगठन का आगामी लक्ष्य इन बड़े राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके लिए निरन्तर हमें संगठन व स्वदेशी के स्थापित तंत्र के सशक्तिकरण एवं शुद्धिकरण की आवश्यकता है। संगठन के शुद्धिकरण व सशक्तिकरण से ही संगठन व राष्ट्र का दिव्य आरोहण होगा। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संगठन के सशक्तिकरण के लिए </span>100-100<span lang="hi" xml:lang="hi"> जिलों के सभी प्रान्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मण्डल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिला व तहसील स्तरीय दायित्वधारियों की संगठन कार्यशाला नवम्बर व दिसम्बर माह में संगठन मुख्यालय पतंजलि योगपीठ में आयोजित की गई। संगठन कार्यशाला में लक्ष्य रखा गया कि अब संगठन का सशक्तिकरण व शुद्धिकरण करके संगठन व स्वदेशी के तंत्र को विस्तार दिया जायेगा। विगत चार वर्षों तक संगठन लगातार आन्दोलनों में संलग्न रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निरन्तर संघर्ष चलते रहे। एक के बाद एक अभियान चलते रहे। अब संगठन ने परिवर्तन का एक लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। अब अनुशासन के साथ शुद्ध ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शुद्ध उपासना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शुद्ध कर्म से अपनी </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi">त्न शक्तियों को जाग्रत करके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्ण योगी बनकर सम्पूर्ण दुनिया का नेतृत्व करना है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संगठन कार्यशाला में उपस्थित कार्यकर्ताओं के लिए पूज्य स्वामी जी महाराज ने सात सर्वोच्च प्राथमिकतायें तय की- (</span>1) <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तिगत जीवन में निरन्तर साधना व निष्काम सेवा को सर्वोच्च  प्राथमिकता देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम से कम </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> घण्टा ध्यान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वाध्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौन व </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटा योग करना। (</span>2) 10<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रकार के योग शिविरों का आयोजन करना (</span>3) <span lang="hi" xml:lang="hi">योग कक्षाओं का विस्तार करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी प्रभारियों के लिए योग कक्षा लगाना अनिवार्य है। (</span>4) <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थापित ग्राम समितियों को सक्रिय रखना व पाँचों संगठनों को जिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्राम स्तर तक विस्तार करना। (</span>5) <span lang="hi" xml:lang="hi">संगठन व संस्थान को आदर्श स्थिति में लाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थापित तंत्र की अपूर्णताओं को दूर करके उसका शुद्धिकरण व सशक्तिकरण करना। (</span>6) <span lang="hi" xml:lang="hi">आदर्श जीवन जीना- यथार्थ ज्ञानपूर्वक </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रकार का व्यवहार करना-वाणी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभ्यास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वभाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रवृत्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुरुषार्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा। (</span>7) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रत्येक जिले में आचार्यकुलम् स्थापित करना। इसके साथ ही पूज्य स्वामी जी ने  साधनाकाल </span>''<span lang="hi" xml:lang="hi">योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वाध्याय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान</span>’’ <span lang="hi" xml:lang="hi">व व्यवहारकाल के योग </span>''<span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा</span>’’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का विशेष प्रशिक्षण दिया और कहा कि योग को आधार बनाकर ही हम यहाँ तक पहुँचे हैं तथा योग के साथ ही इस अभियान को हम आगे बढायेंगे। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संगठन कार्यशाला में मुख्य केंद्रीय प्रभारी भाई डॉ- जयदीप आर्य जी द्वारा स्वच्छता अभियान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदर्श ग्राम निर्माण योजना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग आदि विषयों को प्रस्तुत किया गया। मुख्य केंद्रीय प्रभारी राकेश जी ने ग्राम समितियों का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय प्रबन्धन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नशामुक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया तथा बहन आचार्या सुमन जी द्वारा स्वभाव में परिवर्तन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग कक्षाओं व योग शिविरों का आयोजन </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रकार के योग शिविरों के आयोजन से सम्बन्धित प्रशिक्षण दिया गया। संगठन कार्यशाला में संगठन विस्तार के साथ-साथ वैयक्तिक जीवन में अनुशासन के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिव्य कर्म करने अर्थात् भागवत कर्म व निष्काम सेवा पर विशेष बल दिया गया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संगठन कार्यशाला में सम्पूर्ण भारत से कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ भाग लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक तथा राजस्थान से लेकर नोर्थ ईस्ट के प्रत्येक प्रान्त से बड़ी संख्या में भागीदारी रही। अण्डमान निकोबार से </span>10-10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन की यात्र करके कार्यकर्ता संगठन कार्यशाला में भाग लेने पहुँचे। केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आन्ध्र प्रदेश व मणिपुर के साथ-साथ नागालैण्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्रिपुरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अरुणाचल प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेघालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्किम आदि से भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सभी कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि अब हम चरैवेति चरैवेति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पापो निषद्वरो जन: इन्द्र इच्चरत: सखा। (एतरेय ब्राह्मण) निरन्तर पूर्ण-पुरुषार्थ से भगवान को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरु को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म व न्याय को केन्द्र में रखकर राष्ट्रसेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवता सेवा जैसे कार्य बिना किसी अहंकार के</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्काम सेवा के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग को केन्द्र में रखकर इस अभियान को आगे बढ़ायेंगे। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>संस्था समाचार</category>
                                            <category>2015</category>
                                            <category>जनवरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2015 21:47:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
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