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                <title>अपने रोग प्रतिरोधक क्षमता को स्वस्थ व संतुलित बनाने के सूत्र: योग द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि - योग संदेश</title>
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                <description>अपने रोग प्रतिरोधक क्षमता को स्वस्थ व संतुलित बनाने के सूत्र: योग द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रोग-प्रतिरोधक क्षमता एवं आपका स्वास्थ्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डॉ. शरली टेल्लस एवं आरती यादव</span>, </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पतंजलि अनुसंधान विभाग</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हरिद्वार</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3112/immunity-and-your-health"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2024-06/254.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">     रोग प्रतिरोधी तंत्र हमारे शरीर में किसी संक्रमण के खिलाफ रक्षा तंत्र की तरह कार्य करता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे अपने देश की सीमा की रक्षा के लिए सैनिक दुश्मनों से लोहा लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे उन्हें सीमा में घुसने से रोकते भी हैं और नेस्तनाबूद करने की क्षमता भी रखते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्राकृतिक रूप से यह क्षमता हर जीव को प्राप्त होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसे जीवन जीने में मदद करता है। जब शरीर किसी विषाणु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैक्टीरिया या अन्य संक्रमण युक्त जीन से संक्रमित होता है तो वह संक्रमण से लड़ना प्रारंभ कर देता है और अपने आप ठीक हो जाता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता मूलत: दो प्रकार की होती है- प्राकृतिक रूप से प्राप्त या जन्मजात क्षमता तथा अर्जित की गई क्षमता। इसी प्रकार शरीर व मन के स्तर पर भी यह अलग-अलग होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात् शरीर की रक्षा के लिए शारीरिक रोग-प्रतिरोधी क्षमता तथा मन की रक्षा के लिए मन: प्रतिरोधक क्षमता।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर को रोग मुक्त रखने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता उच्च स्तर की होनी चाहिए और ठीक वैसे ही मन को विचलन मुक्त रखने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असुरक्षा से मुक्त रहने के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक व मानसिक झंझावातों से लोहा लेने के लिए उच्च स्तरीय मन: प्रतिरोधक क्षमता जरुरी है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता या बायोइम्यूनिटी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर का सुरक्षा कवच है। त्वचा व इससे स्रावित होने वाले स्राव तथा रक्त में श्वेत रक्त कणिकाओं (</span>WBC<span lang="hi" xml:lang="hi">) लिंफोसाइट्स आदि शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं तथा रोगों से बचाव करते हैं। इस क्षमता को योग की विभिन्न तकनीक की मदद से जीवन शैली में अपेक्षित सुधार से और सुदृढ़ बनाया जा सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">वे कारक जो रोग-प्रतिरोधी तंत्र को कमज़ोर बनाते हैं:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>खराब पोषण: </strong>आज की भोजन सामग्री की जाँच करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पता चलेगा कि इसमें कई तरह की जरुरी विटामिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खनिज लवण व पोषक तत्वों की कमी है। जबकि प्रतिरोधी तंत्र को शक्तिशाली बनाए रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्व चाहिए।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>प्रदूषित वातावरण:</strong> वातावरण के प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही शरीर पर विभिन्न प्रकार के विष का भार बढ़ जाता है। यह विष हमारे शरीर में जल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वचा आदि के माध्यम से प्रवेश करता है। इसके परिणाम स्वरुप रोग प्रतिरोधी तंत्र को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उसकी ताकत उत्तरोत्तर घटती जाती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>तनाव: </strong>जब जीव तनाव में होता है तो वह उससे लड़ता है या भाग जाता है। यही तनाव जब व्यक्ति के जीवन में अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इससे पाचन व अन्न संस्थान के कार्य प्रभावित होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे इम्यून सिस्टम भी प्रभावित होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>नशीली दवा व शराब सेवन:</strong> इनके अत्यधिक सेवन से श्वेत रक्त कणिकाओं की क्षमता में कमी आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे हमारा शरीर कई रोगों से ग्रसित हो सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>नींद की कमी:</strong> पर्याप्त नींद से इम्यून सिस्टम के पुननिर्माण में मदद मिलती है अन्यथा वह कमज़ोर होती चली जाती है। नींद की यह कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टी-कोशिकाओं की संख्या व श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी से संबंधित है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>व्यायाम की कमी:</strong> व्यायाम हमारे रक्त प्रवाह को बढ़ाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्वास व रक्त परिसंचरण पथ को प्रभावित करता है। रक्त प्रवाह बढ़ने से शरीर को अपशिष्ट पदार्थ बाहर करने में मदद मिलती है। रक्त परिसंचरण में सुधार आने से एण्टीबॉडीज व श्वेत रक्तकण परिसंचरण भी ठीक हो जाता है जो कि शरीर के लिए रोगाणुओं से लड़ने में जरुरी है।</span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2024-06/610.jpg" alt="6" width="600" height="488"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अपने रोग प्रतिरोधक क्षमता को स्वस्थ व संतुलित बनाने के सूत्र:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योग द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग से शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों के विस्तृत अध्ययन में पाया गया है कि योग हमारे शरीर को लचीला बनाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है तथा हमारे शरीर का सही तरीके से निर्धारण करता है तथा नींद को बेहतर बनाता है। नियमित योगाभ्यास न केवल हमें बेहतर दिखने में मदद करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि योग हमारे शरीर के आंतरिक अंगों तथा हारमोन को संतुलित करके हमें मजबूत व निरोगी बनाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके अलावा योग स्वाभाविक रूप से हमारे शरीर को विष मुक्त करता है तथा शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाता है। यदि ऋतुओं के बदलते समय कफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुकाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपच्चय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनियमित नींद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलर्जी या त्वचा की समस्याओं से परेशानी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नियमित योगाभ्यास आपको निश्चित रूप से लाभ पहुँचाता है तथा जीवन को मजबूत बनाकर वायरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संक्रमण आदि बीमारियों से भी बचा सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योगाभ्यास थायराइड व रक्तचाप को नियन्त्रित करने में मदद करता है तथा पाचन तन्त्र को मजबूत बनाकर स्वस्थ्य जीवन जीने में सहायता करता है। योगासन में बैठने व शरीर तथा श्वसन पर ध्यान देने से आप अपने प्रति सजगता महसूस करते हैं तथा इसके नियमित अभ्यास से आपकी चिन्ता तथा थकान का स्तर प्राकृतिक रूप से कम होता है। जबकि चिन्ता व थकान निश्चित रूप से आपके रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा प्रभाव डालते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सन्तुलित आहार द्वारा वृद्धि:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कुपोषण (अल्प पोषण) रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है तथा प्रतिरक्षा कार्य को प्रभावित करता है। कुपोषण भोजन में अपर्याप्त ऊर्जा की कमी तथा विटामिन व खनिज पदार्थों की कमी से होता है। विटामिन व खनिज पदार्थ से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु यदि इनका उपयोग अधिक मात्रा में किया जाये तो शरीर के लिये ये हानिकारक भी सिद्ध हो सकते हैं। दी गई तालिका में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले विटामिन तथा खनिज पदार्थ के नाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाभ व स्रोत को दर्शाया गया है। </span></h5>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2024-06/untitled1.jpg" alt="Untitled" width="736" height="521"></img></span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(0,0,0);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तम जीवनशैली व प्रतिरोधक क्षमता:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वस्थ भोजनचर्या :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> हमारे रोग प्रतिरोध क्षमता को अच्छा करने के लिये एक स्वस्थ भोजनचर्या बहुत ही आवश्यक है। यदि हमारे दैनिक भोजनचर्या में शर्करा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतृप्त व ट्रांस वसा की अधिकता तथा पोषक तत्वों की कमी है तो वह शरीर के लिये ठीक नहीं है। हम किसी भी बाहरी खाद्यपूरक का उपयोग करके इसकी पूर्ति भी नहीं कर सकते।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">योगाभ्यास/ व्यायाम :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong> </strong>नियमित रूप से योगाभ्यास हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायता प्रदान करता है तथा कैंसर उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं को मूत्र व पसीने के रूप में हमारे शरीर से बाहर निकाल देता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अधिक नींद :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> निंद्रा हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता पर अनुकूल प्रभाव डालती है। जब हम सोते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब हमारा रोग प्रतिरोधक क्षमता साइटोकिन्स को छोड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि एक प्रकार का प्रोटीन है। साइटोकिन्स (प्रोटीन) हमारे शरीर की सूजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंफेक्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उच्च रक्तचाप को दूर करता है तथा लम्बे समय तक निद्रा में कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डायबिटीज तथा हृदय संबंधी बीमारियों को बढ़ाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">तनाव मुक्त :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> अपने तनाव के स्तर को घटाकर हम स्वस्थ तरीके से जी सकते हैं। गहरा श्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हँसना तथा भ्रमण आदि क्रियायें हमारे तनाव को कम करने में सहायक होती हैं। अपने तनाव के स्तर को कम/ नियन्त्रित करने के लिये यदि हम रोजाना १० मिनट उपयोग करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह हमारे जीवन तथा स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन लाता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर व्यक्ति की दीर्घायु के लिये सहायता करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सन्तुलित जीवन :</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> जैसे-धूम्रपान कम करना या निषेध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वजन को नियन्त्रित करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अच्छे विचारों को सोचना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाथ धोकर भोजन करना आदि। तरीके की सकारात्मक जीवनशैली परिवर्तन भी हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">   <span lang="hi" xml:lang="hi">वस्तुत: स्वास्थ्य सवंर्धन में रोग प्रतिरोधक क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बिना हमारा जीवन खतरे में पड़ सकता है। </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य समाचार</category>
                                            <category>2015</category>
                                            <category>अगस्त</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2015 21:37:42 +0530</pubDate>
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