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                <title>कैंसर कारक तत्व का प्रतिरोधक - योग संदेश</title>
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                <description>कैंसर कारक तत्व का प्रतिरोधक RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सिबकथोर्न एक दुर्लभ औषधीय पादप </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आचार्य बालकृष्ण</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3153/sibbuckthorn-a-rare-medicinal-plant"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2024-06/sea-buckthorn.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">   सिबकथोर्न (साइबेरियन पाइन एप्पल) को लेह में लेहबेरी कहते हैं। इसे ब्रह्मफल भी कहा जाता है। हार्टिकल्चर के क्षेत्र में यह पौध स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। लेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लद्दाख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कश्मीर के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में उभरता हुआ यह पौधा भारत में 1992 से महत्व में आया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपरागत चाइनीज दवाओं में इसका ८वीं सदी से औषधीय प्रयोग होता आया है। स्वास्थ्य संवर्धनात्मक पेय के लिए पहचाने जाने वाले इस पौध को चीनी औषधि निर्माता रक्त संचरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय रोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाचन तंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वचा संबंधी विकारों में प्रयोग करते थे। चाइनीज ओलम्पिक खिलाड़ियों को भी इस पेय को दिया जाता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उनकी शारीरिक क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्य संपादन शक्ति व सहनशीलता में वृद्धि हो सके। मंगोलिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तिब्बत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अफगानिस्तान की लोक कथाओं में इसका विशिष्ट वर्णन सिद्ध करता है कि सिबकथोर्न अर्थात् ब्रह्मफल प्राचीनकाल से ही जन-जन के लिए महत्वपूर्ण था। १२वीं सदी में ग्रीक देश में घोड़ों को मजबूत व ऊर्जावान बनाने के प्रयोग में यह फल लाया जाता था। इसीलिए इसे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">हिप्पोफै</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा गया।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चंगेजखान द्वारा संगठित आर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कठोर अनुशासन व लेहबेरी इन तीन आधारों पर अपने साम्राज्य का चीन से योरोप तक विस्तार किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस विस्तार में लेहबेरी का प्रमुख स्थान था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उनके सैनिक मजबूत बने रहते थे। सोवियत अंतरिक्ष यात्री व खगोलशास्त्री सिबकथोर्न (ब्रह्मफल) अर्थात् लेहबेरी को विटामिन का विशेष स्रोत मानते थे तथा विकिरण के दुष्प्रभाव से बचने की बड़ी चिकित्सकीय औषधीय पदार्थ रूप में इसका प्रयोग करते थे। अंतरिक्ष उड़ानों में ऑक्सीजन की पूर्ति में भी वे इसे प्रयुक्त करते थे अर्थात् यह उनका पूर्ण आहार था।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आयुर्वेद के समान तिब्बत की </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आम्ची सिस्टम</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">एक चिकित्सा प्रणाली है। उसमें यह पौधा </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अमल वेद</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम से जाना जाता है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">सिरमान</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका स्थानीय नाम है। यद्यपि भारत में यह १९९२ में प्रयोग में आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर अब भारत में इसके व्यापक प्रयोग पर विचार चल रहा है। इसके गूदे व बीज के तेल पर वैज्ञानिक रिसर्चें हो चुकी हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि सैनिकों को मजबूत बनाने तथा लेहवासियों के पोषण में इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सिबकथोर्न की यह झाड़ी हिमालय की ठंडी मरुभूमि पर आदिकाल से ही उपलब्ध थी। लेह-लद्दाख में 11500 हेक्टेयर में यह पौध फैला मिलता है। २४००० फीट पर तैनात हमारे आर्मी सैनिकों का 6 से 9 माह तक के लिए सामान्य जनता से संपर्क कट जाता है। इस दौरान इस पौध का उपयोग उनके लिए बेहतर पौष्टिक आहार तैयार करने में किया जा सकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">डी.आर.डी.ओ.</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत का रक्षा अनुसंधान संगठन जो ठंडे रेगिस्तान की ऊँचाईयों पर अनुसंधान कार्य करता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाद में फील्ड रिसर्च </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डिफेन्स इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एल्टीट्यूट रिसर्च (</span>DIHAR<span lang="hi" xml:lang="hi">) रूप में इसे कार्य करने की मान्यता मिली। यहीं अपने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के मार्गदर्शन में स्थानीय कृषि को विकसित करने की प्रौद्योगिकी का विकास हुआ। साथ ही स्थानीय किसानों के बेहतर उत्पाद एवं पोषण की दिशा में इस संगठन ने अनेक प्रोद्योगिकियों का प्रयोग किया। हिमालयी झाड़ियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके कांटों एवं फलों आदि के परिष्करण की दिशा में प्रयोग करके उन किसानों में जागरूकता पैदा की। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">सिबकथार्न</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की विशिष्टता भी उन्हीं प्रयोगों के दौरान सामने आई। आज सिद्ध हो चुका है कि लेह-लद्दाख की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां के लोगों को भारी मात्रा में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में इस अनुवांशिक संसाधन सिबकथार्न की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके पत्तियों की संरचना भी महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें अनेक पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं। एफ.आर.एल. (डी.आर.डी.ओ.)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दा सिबकथोर्न 2006 शोध के अनुसार इसमें </span>Moisture<span lang="hi" xml:lang="hi"> (नमी) 52 - 69</span>, Total Ash<span lang="hi" xml:lang="hi"> (टोटल एश) 1.76</span>, Crude Protein<span lang="hi" xml:lang="hi"> (क्रूड प्रोटीन) 2.2 - 2.4</span>, Crude Fibre <span lang="hi" xml:lang="hi">(क्रूड फाइबर) 4.6 - 4.85</span>, Ether Extract<span lang="hi" xml:lang="hi"> (इथर एक्सट्रैक्ट) 6.6-6.94</span>, Total Carbohydrate <span lang="hi" xml:lang="hi">(टोटल कार्बोहाइड्रेट) 32-37</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एवं </span>Calcuium <span lang="hi" xml:lang="hi">(कैल्शियम) 69 </span>mg<span lang="hi" xml:lang="hi">/ 100 </span>gm<span lang="hi" xml:lang="hi"> मात्रा में पाया जाता है</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी क्रम में फलों को लेकर एफ.आर.एल. (डी.आर.डी.ओ.)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दा सिबकथोर्न 2006 की रिसर्च से प्राप्त तथ्यों के अनुसार स्वास्थ्य संतुलन संबंधी उपयोगिता के तहत इसमें </span>Total soluble solids (oB) <span lang="hi" xml:lang="hi">14.3</span>, Acidity % (as Malic acid) <span lang="hi" xml:lang="hi">2.54</span>, pH of Juice <span lang="hi" xml:lang="hi">2.15</span>, Total Sugar % <span lang="hi" xml:lang="hi">1.03</span>, Reducing Sugar % <span lang="hi" xml:lang="hi">0.96</span>, Non Reducing Sugar % <span lang="hi" xml:lang="hi">0.07</span>, Moisture % <span lang="hi" xml:lang="hi">74.58</span>, Ash % <span lang="hi" xml:lang="hi">1.8</span>,  Crude Protein % <span lang="hi" xml:lang="hi">2.64</span>, Crude Fiber % <span lang="hi" xml:lang="hi">3.54</span>, Total Carbohydrates % <span lang="hi" xml:lang="hi">20.56</span>, β-Caro<span lang="hi" xml:lang="hi"> पाये जाते हैं। जो स्वास्थ्य के लिए भरपूर आहार है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अन्य उपयोगी संसाधन:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह पौध पहाड़ी बंजर भूमि के वनीकरण के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। इसकी लकड़ी वाणिज्य के लिए अति उपयोगी मानी गयी है। अब इसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक संरचनात्मक संयंत्र की दिशा में कदम बढ़ेंगे। यद्यपि पौध लगने के 8 साल बाद सिबकथार्न से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो जाता है। इसकी उपज प्रति हेक्टेयर 10-15 टन है। जबकि 8 साल बाद इससे प्रतिवर्ष 200-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पत्ते प्राप्त किये जा सकते हैं। इसके बीज ब्राउन कलर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कठोर कवक से युक्त 4.5 द्वद्व के होते हैं। जबकि फल ओरेंज एलोकलर का होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें बीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गूदा व कवर होता है। जबकि फल में विटामिन सी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैटी एसिड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओमेगा-3</span>, 5, 6, 7, <span lang="hi" xml:lang="hi">एवं ओमेगा-9 पाये जाते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्यवर्धक प्रयोग:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह एंटी कैंसर (एक्टी कारसियोजनिक) है। एमिनो माडोलेटा है। एंटी एन्फ्लामेशन है। रेडियोडर्मीटाइटिस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नान रेडियोडर्मिटाइटिस एवं शारीरिक अल्सर (गैस्टिक व ड्यूडेनल अल्सर)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अम्ल-पित्त आदि रोगों में यह काम करता है। यह बुढ़ापा (</span>Anti Ageing<span lang="hi" xml:lang="hi">) कम करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह बुढ़ापा लाने वाले तत्व फ्री रेडिकल निर्माण को कम करता है। इसके अन्य प्रभाव भी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे-</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">रक्त परिसंचरण तंत्र पर प्रभाव:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्नरी हर्ट डिजीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदय क्षमता को बढ़ाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्लड के फैट लेवल को कम करने के साथ ब्लड वैशल (नलिकाओं) को पोषण प्रदान करने में सहायक है। इसमें असंतृप्त फैटी एसिड पाया जाता है जो कालेस्ट्रॉल को कम करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्लड प्रेशर को नियमित करता है तथा अरिद्मीय (</span>ARRYTHEMIA<span lang="hi" xml:lang="hi">) को रोकता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(22,145,121);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर कारक तत्व का प्रतिरोधक:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसररोध में प्रभावी स्रोत सिद्ध होता है। यह कैंसर सेल्स को रोकता है एवं कैंसर कारक तत्व का प्रतिरोधक है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। एण्टीबॉडी को बढ़ाकर शरीर के कैंसर प्रतिरोधी क्षमता में वृद्धि करता है। साथ में ऑपरेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कीमो थैरेपी एवं रेडियेशन के प्रभावों को कम कर जीवन स्तर में वृद्धि करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह एंटी एजिंग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुढ़ापा को रोकने में सहायक है। आयुवृद्धि संबंधी कोशिकाओं को नियंत्रित करता है जिससे व्यक्ति में बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। यह लीवर सिरोसिस प्रतिरोधी है अर्थात् यह शरीर एन्जाइम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पित्त अम्ल को सामान्य करता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतत: कह सकते हैं कि लेह-लद्दाख के लिए ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु संपूर्ण मानव एवं प्राणिजगत के लिए यह पौध </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">सिबकथार्न</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रह्मफल अर्थात् लेह बेरी ऐसी संजीवनी बनकर उभर रही है जो स्वास्थ्य संवर्धक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपचारात्मक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोकथाम (डिजिज प्रिवेंशन)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दीर्घायुष्य (एंटी एजिंग) में काम करता ही है। देश के युवा वर्ग के लिए रोजगार कारक भी है। पतंजलि आयुर्वेद एवं डीआरडीओ के बीच इसकी हस्तांतरित टेक्रोलॉजी से न केवल सैन्य शक्ति को मजबूती मिलेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही देश का  आर्थिक तंत्र भी मजबूत होगा। लेहवासियों के आर्थिक निर्माण एवं समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2015</category>
                                            <category>अक्टूबर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Oct 2015 21:58:29 +0530</pubDate>
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