<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/tag/6113/%E0%A4%AF%E0%A4%A6%E0%A4%BF-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%A8-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%89%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%B0" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>योग संदेश RSS Feed Generator</generator>
                <title>यदि साधी न गयी अपनी उम्र - योग संदेश</title>
                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/tag/6113/rss</link>
                <description>यदि साधी न गयी अपनी उम्र RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यदि साधी न गयी अपनी उम्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डॉ. नागेन्द्र कुमार नीरज</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:right;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">योगग्राम</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पतंजलि योगपीठ</span>, </strong><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हरिद्वार</span></strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3156/if-sadhi-does-not-live-her-life"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2024-06/871.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">    बुढापा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अभिशाप नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में अनेक परिवर्तन होने लगते हैं। शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से अनेक बीमारियाँ घर करने लग जाती हैं। कमजोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहनशीलता की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिड़चिड़ापन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवेदनशीलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चलते-चलते गिर जाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चलने में कठिनाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जोड़ों तथा हड्डियों में दर्द आदि अनेक रोग लक्षणों से अक्सर वरिष्ठ नागरिक जूझते रहते हैं। इस आयु के लोगों में सुख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शान्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रसन्नता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सक्रियता एवं उत्साह भी कम होने लगता है। यह स्थिति तब आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि मनुष्य अपनी प्रत्येक आयु के विज्ञान को नजरंदाज करता है और समुचित पोषण से वंचित रहता है। विशेषज्ञों ने आयु के सात प्रकार बताये हैं- 1. वास्तविक उम्र</span>, 2<span lang="hi" xml:lang="hi">. जैविक उम्र</span>, 3<span lang="hi" xml:lang="hi">. मानसिक उम्र</span>, 4<span lang="hi" xml:lang="hi">. नैतिक उम्र</span>, 5<span lang="hi" xml:lang="hi">. आध्यात्मिक उम्र</span>, 6<span lang="hi" xml:lang="hi">. भावनात्मक उम्र</span>, 7<span lang="hi" xml:lang="hi">. सामाजिक उम्र। प्रस्तुत लेख इसके प्रयोग व विश्लेषण पर आधारित है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जैविक उम्र (</span>Biological Age<span lang="hi" xml:lang="hi">) शरीर के अंग प्रत्यंग दिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिमाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फेफड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हडिड्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खून रक्त वाहिनियाँ स्नायु तथा पाचन संस्थान की कार्य क्षमता पर निर्भर करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह शरीर की सक्रियता एवं देह की भाषा परिभाषा से झलकती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साइकोलॉजिकल अर्थात् मानसिक उम्र दिमाग तथा मन के विकास पर निर्भर करती है। बहुत से ऐसे लोग जिनकी उम्र अधिक होती है किन्तु व्यवहार बच्चों की तरह होता है। उनमें धैर्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुद्धिमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निपुणता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहस एवं पराक्रम का अभाव होता है। निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है। ऐसे लोगों की साइकोलॉजिकल उम्र कम होती है। जबकि जिनकी साइकोलॉजिकल उम्र ज्यादा होती है वे ऊर्जा से लबालब होते हैं। पराक्रमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहसी एवं बुद्धिमान होते हैं। निर्णय लेने की क्षमता गजब की होती हैं। ऐसे लोग ही असंभव को संभव बनाने की क्षमता रखतेे हैं। साइकोलॉजिकल एज हमारे कार्य करने की शैली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बातचीत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आचार-विचार एवं सोच के माध्यम से झलकती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भावनात्मक उम्र (</span>Emotional Age<span lang="hi" xml:lang="hi">):</span></strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong> </strong></span>भावनाओं को हम कितनी जल्दी नियंत्रित कर पाते हैं। अनियंत्रित भावनाएं तथा शीघ्रता से भावनाओं के वशीभूत हो जाने से वास्तविक तथा जैविक उम्र भी प्रभावित होती है। हमारा जीवन नैतिक मूल्य प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करूणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समन्वय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सौजन्यता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहृदयता आदि के प्रति जिस अवस्था में समर्पित होता है। उन्हीं स्तर के दिव्य नैतिक गुणों से हमारा जीवन समृद्ध होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही नैतिक उम्र कहलाती है। 25 साल का नवयुवक भी नैतिक उम्र में समृद्ध हो सकता है। जबकि 75 साल का व्यक्ति भी नैतिक उम्र की दृष्टि से दीन-हीन हो सकता है। आध्यात्मिक उम्र (</span>Spritual Age<span lang="hi" xml:lang="hi">) भी शरीर के उम्र का मोहताज नहीं होती है। स्वामी रामतीर्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेकानन्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महर्षि अरविन्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शंकराचार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुद्ध आदि कम उम्र में ही आध्यात्म के क्षितिज पर पहुँचे हुए लोग थे। वास्तविक उम्र इन सम्बद्ध पुरुषों की बहुत ही कम थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु आध्यात्मिक दृष्टि से इन्होंने खूब जिया। इसी प्रकार सामाजिक उम्र होती है। सामाजिक एवं पर्यावरणीय परिवेश के साथ आप किस प्रकार सामंजस्य किस उम्र में बैठा पाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी पर सामाजिक उम्र निर्भर करती है। बहुत से ऐसे लोग हुए है जो बहुत ही कम उम्र में समाज के साथ समरसता पैदा कर उसका नेतृत्व किया है। नई दिशा प्रदान की है। वीर भगत सिंह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुभाष चन्द्र बोस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केनेडी आदि इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्लेषक मानते हैं कि दो व्यक्तियों की क्रोनोलॉजिकल (वास्तविक) उम्र एक समान हो सकती है किन्तु बायोलॉजिकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इमोशनल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्प्रिचुअल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एथिकल तथा सोशल उम्र एक समान नहीं होती। क्रोनोलॉजिकल को छोड़कर अन्य उम्र निर्भर करती है आपके आहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिन्तन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पालन-पोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्राणायाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तथा ध्यान पर। जबकि सभी प्रकार की उम्र का सारा दारोमदार दिमाग की सक्रियता पर निर्भर करता है। दिमाग से हम जितना काम लेेंगे वह उतना ही सक्रिय रहेगा और हम हर प्रकार की उम्र की दृष्टि से दीर्घायु होंगे। 75 साल के बूढ़े 25 साल के जवान की तरह जोश व जवानी से भरपूर काम करने के जनून तथा मंजिल को प्राप्त करने के जज्बे से भरे हो सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं 25 साल के नवजवान की बायोलॉजिकल उम्र 75 साल के बूढ़े की तरह हताश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उदास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निराश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनेक काल्पनिक रोगों से ग्रस्त एवं संत्रस्त हो सकती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मनुष्य की आयु जीवन शैली पर निर्भर करती है। खान-पान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रहन-सहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिन्तन-मनन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आहार-विहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विचार एवं व्यवहार एवं बीमारी की स्थितियों पर क्रोनोलॉजिकल एवं बायोलॉजिकल आयु निर्भर करती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन दिनों विकसित देशों के औसत उम्र में 5 से 16 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है तथा 2025 तक 25 प्रतिशत तक होने की सम्भावना है। भविष्य में किशोरों की अपेक्षा बूढ़ों की संख्या ज्यादा होगी। विकसित देशों में पुरुषों की औसत उम्र 80 साल तथा औरतों की औसत उम्र 86 है। 75 से 80 साल अधिक औसत आयु क्रमश: हांगकांग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑस्ट्रेलिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कनाड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंग्लैण्ड तथा सर्वाधिक जापान की है। बांग्लादेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नाइजेरिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इजिप्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इण्डिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लंका एवं चीन के लोगों की भी औसत आयु बढ़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन्तु विकसित देशों से काफी कम है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जब उम्र बढ़ने लगे:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे विरले एवं भाग्यशाली ही होते है जिनका बुढ़ापा बिना बीमारी के आनन्द एवं आरोग्यप्रद होता है। उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक एवं भावनात्मक परिवर्तन प्रारम्भ हो जाता है। जिसके चलते बुजुर्ग लोग अपने आपको असमर्थ एवं असहाय समझने लगते हैं। उम्र बढ़ने के साथ शरीर क्रिया विज्ञान की दृष्टि से अनेक फिजियोलॉजिकल परिवर्तन होते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क एवं स्नायु सम्बन्धी परिवर्तन:</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">45 साल के बाद प्रतिदिन एक हजार स्नायु कोशिकाएं निष्क्रिय होकर नष्ट होने लगती हैं। कई क्रेनियल नर्व्स डिजेनरेट होने लगते हैं। न्यूरोलन लॉस के कारण आर्गेनिक कन्फ्यूजन बढ़ जाता है। ज्ञानेन्द्रिय सम्बन्धी संवेदनाओं में कमी आने (</span>Degenration of Cranial Nerves<span lang="hi" xml:lang="hi">) से देखने सुनने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वाद सुगन्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पर्श सम्बन्धी संवेदनाओं में कमी आने लगती है। जैसे कॉकलियर डिजनरेशन से प्रेसबायोक्युसिस (बुढ़ापे का हाइटोन बहरापन) होता है। आँखों की लेन्स में लचीलापन कम हो जाता है। वे कठोर हो जाती है। फलत: बुढ़ापे के  समीप दृष्टि दोष (</span>Presbyopia<span lang="hi" xml:lang="hi">) लेन्स का ओपेसीफिकेशन होने से मोतियाबिन्द हो जाता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रीढ़ की ग्रेमैटर से निर्मित हार्नसेल्स (</span>Dorsal Ventral Anterior Horn Cell<span lang="hi" xml:lang="hi">) नष्ट होने लगते हैं मांसपेशियां कमजोर होने लगती है। उन पर नियंत्रण नहीं रहता। मांसपेशियों का हास एवं क्षय प्रारम्भ हो जाता है। डार्सल कॉलम के नष्ट होने से शरीर का अंगविन्यास एवं अवस्था (पोस्चर एवं पोजिशन) लड़खड़ाने लगती है। अनुकम्पी संवेदना कम होने लगती है। शरीर पर नियंत्रण खत्म होने लगता है। चलने-फिरने से गिरने की संभावना बढ़ जाती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उम्र बढ़ने के साथ दिमाग में खून की आपूर्ति कम होने लगती है। रक्त वाहिनियों के एन्डोथेलियल फंक्शन तथा रक्त रसायनों में परिवर्तन होने से दिमागी रक्त अस्त-व्यस्त हो जाता है। तब ब्रेनहेमरेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थ्राम्बोसिस तथा स्ट्रोक होने की संभावना बढ़ जाती है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य व्यक्ति के दिमाग में खास प्रकार के पांच लाख रंगीन नाइग्रा कोशिकाएं होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो डोपामिन का स्राव करती हैं। उम्र बढ़ने के साथ कुछ खास लोगों या कोल गैस पॉदजनिंग के कारण ये कोशिकाएं तेजी से नष्ट होती हैं। जिससे पार्किन्सन रोग होता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लोगों के दिमाग में एमीलॉइड बीटा एमीलॉइड पॉलीपेप्टाइड के चकत्ते ज्यादा बनने से एलजीमर्स तथा डिमेन्शिया (बुढ़ापे का पागलपन) रोग पनपने लगता है। बुढ़ापे में वंशानुगत दिमागी बीमारी हनटिंग्टन्स कोरिया भी जोड़ पकड़ता है।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बुढ़ापे में उच्च रक्तचाप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुमेह तथा मोटापा इत्यादि अनेक बीमारियाँ मुसीबतों के जन्मदाता बन जाते हैं। बौद्धिक प्रदर्शन लड़खड़ाने लगता है। उठने बैठने तथा चलने की क्षमता एवं सक्रियता कम होने लगती है। शरीर का अंग विन्यास तथा गाईट बेढंगा होने लगता है। अचानक ब्लैक आउट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुस्ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर में गर्मी की कमी हाइपोथर्मिया आदि के लक्षण दिखते हैं।</span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बुढ़ापे में रोगों का आक्रमण तो होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परन्तु उसे संयमित दिनचर्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आहारचर्या तथा योग-प्राणायाम व आयुर्वेदिक अनुपान के द्वारा रोका भी जा सकता है। तो क्यों न हम ऋषि प्रणीत प्रयोग करें और सदैव निरोग बने रहें।</span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य समाचार</category>
                                            <category>2015</category>
                                            <category>अक्टूबर</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3156/if-sadhi-does-not-live-her-life</link>
                <guid>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3156/if-sadhi-does-not-live-her-life</guid>
                <pubDate>Thu, 01 Oct 2015 21:51:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2024-06/871.jpg"                         length="167144"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        