<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/tag/6656/%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%8B%E0%A4%B7%E0%A4%BF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%83%E0%A4%B8%E0%A5%83%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>योग संदेश RSS Feed Generator</generator>
                <title>परम पूज्य योग.ऋषि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज की शाश्वत प्रज्ञा से निःसृत शाश्वत सत्य - योग संदेश</title>
                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/tag/6656/rss</link>
                <description>परम पूज्य योग.ऋषि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज की शाश्वत प्रज्ञा से निःसृत शाश्वत सत्य RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शाश्वत प्रज्ञा</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य अज्ञान</strong></span><br />1.   मुझे संसार की बड़ी-बड़ी रचनाएं, घटनाएं व वंडर्सादि आश्चर्यचकित नहीं करते लेकिन जब मैं देखता हूँ कि 99% विश्व के मानव जीवन के सन्दर्भ में अपने ज्ञान, संवेदना, सामर्थ्य के बारे में बेखबर होकर अज्ञान या अविद्या जनित वृत्तियों व प्रवृत्तियों में जी रहे हैं। जीवन जो अनादिकाल से चला आ रहा व अनन्त काल तक चलने वाला शाश्वत प्रवाह है तथा जीवन के प्रयोजन, उपयोगिता, उपलब्धि व अन्तिम गन्तव्य या ध्येय के सन्दर्भ में अतिशय भ्रान्ति है। अज्ञान, प्रमाद व क्षणिक सुख व तुच्छ आकर्षणों में फंसकर प्रकृति व परमेश्वर प्रदत्त अनन्त</h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3572/shashwat-pragya"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-03/amt_0119.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य अज्ञान</strong></span><br />1.   मुझे संसार की बड़ी-बड़ी रचनाएं, घटनाएं व वंडर्सादि आश्चर्यचकित नहीं करते लेकिन जब मैं देखता हूँ कि 99% विश्व के मानव जीवन के सन्दर्भ में अपने ज्ञान, संवेदना, सामर्थ्य के बारे में बेखबर होकर अज्ञान या अविद्या जनित वृत्तियों व प्रवृत्तियों में जी रहे हैं। जीवन जो अनादिकाल से चला आ रहा व अनन्त काल तक चलने वाला शाश्वत प्रवाह है तथा जीवन के प्रयोजन, उपयोगिता, उपलब्धि व अन्तिम गन्तव्य या ध्येय के सन्दर्भ में अतिशय भ्रान्ति है। अज्ञान, प्रमाद व क्षणिक सुख व तुच्छ आकर्षणों में फंसकर प्रकृति व परमेश्वर प्रदत्त अनन्त शक्ति सम्पन्न जीवन को क्षुद्र उद्देश्यों के लिए ही अधिकांश लोग बर्बाद कर देते हैं। शरीर, इन्द्रियों, मन, बुद्धि सहित अनन्त शक्ति सम्पन्न आत्मा क्या है, क्यों है, जन्म और जीवन हमें क्यों मिला है, ये सब किसका परिणाम है और अन्ततः जीवरन का परिणाम परिणति व नीयति क्या है? इन सब अत्यन्त गंभीर सन्दर्भों के सन्दर्भ में हम अनजान रहकर जीवन के अमूल्य एक-एक क्षण में व्यर्थ गंवा देते है। जब किसी गंभीर संकट, रोग-दुःख, दरिद्रता, अन्याय, शोषण, चुनौति, संघर्ष या समस्या से घिर जाते हैं तो सोचते है कि कोई दैवी शक्ति, शक्तिशाली व्यक्ति शासक राजा, फकीर-वजीर या अमीर व्यक्ति आयेगा और हमें बचायेंगा जबकि यथार्थ यह है कि हम अपनी समस्त समस्याओं या 99% दुःख का स्वयं ही प्रत्यक्ष या परोक्ष कारण हैं। अमीर अपनी अमीरी बढ़ाना चाहते हैं, शासक अपनी सत्ता बचाना चाहते हैं आपके वोट से कंपनियां आपको अपना ग्राहक बनाकर अपना साम्राज्य बढ़ाना चाहते है। धर्मसत्ता आपको अपनी भीड़ का हिस्सा बनाकर अपना साम्राज्य या दंभ दिखाना चाहते हैं भगवान् ने जीवन के रूप में सब कुछ दे दिया, इसके बाद तो प्रभु कर्म फल व न्याय व्यवस्था के अनुरूप न्याय करते हैं निष्कर्ष यह है कि आपको स्वयं को जानना, जगाना होगा तथा अपने सामर्थ्य को सही दिशा में लगाना होगा तब आप स्वयं-स्वयं पूर्ण सुखी हो सकेंगे और करोड़ों लोगों को भी स्वास्थ्य सुख, समृद्धि, शान्ति देकर सबकी सेवा कर सकेंगे। जीवन अनन्त हैं जीवन में ज्ञान, शक्ति सामर्थ्य भी अनन्त है। जीवन का ध्येय भी अनन्त है। संसार में जिन आत्माओं को जवीन का सम्यक् यथादि बोध हो चुका है जो जीवन को अनन्तता को जी रहे हैं उनका धर्म, कर्त्तव्य या उत्तरदायित्व है कि वे संसार को समस्त आत्माओं को भी सही मार्गदर्शन दें। <br />2.  जीवन भी अनन्त है जगत भी अनन्त है जगदीश्वर भी अनन्त है। अतः हम सब मनुष्यों का भी यह परम धर्म है कि हम सब अनन्त ज्ञान, अनन्त प्रेम-करुणा, वात्सल्य व अत्यन्त व अनन्त पुरुषार्थ, शौर्य-वीरता व पराक्रम के साथ इस पूरे अस्तित्व को दिव्यता से भर दें। सारे संसार में सब दिशाओं सभी प्रकार की खुशहाली हो तो कितना सुन्दर होगा, ऐसा होता ही है और आप और हम सब मिलकर ऐसा ही करेंगे।<br />3. जब हमारे भीतर कभी-कभी काम, क्रोध, लोभ, मोह या अहंकारादि अनन्त अत्यन्त या तीव्र आवेग होता है तो हम आंशिक रूप से अनन्तता के सिद्धान्त को नकारात्मक रूप से अनुभव करते हैं आइये इसे ज्ञान, भक्ति, सेवा सुमिरन, सुख-शान्ति, प्रसन्नता व आनंद के रूप में अनुभव कीजिए।</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शाश्वत प्रज्ञा</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>अगस्त</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3572/shashwat-pragya</link>
                <guid>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3572/shashwat-pragya</guid>
                <pubDate>Thu, 01 Aug 2024 17:59:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-03/amt_0119.jpg"                         length="466006"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शाश्वत प्रज्ञा</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ओ</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">3</span><span lang="hi" xml:lang="hi">म</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">धर्मान्धता -</span></strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi">  धर्म के नाम पर अन्ध श्रद्धा व अंधविष्वास के नए</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">नए कीर्तिमान इस वैज्ञानिक युग में देखने को मिल रहे हैं। यह घनघोर अधर्म</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> पाप</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अनैतिक असंवैधानिक</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अमानवीय व दण्डनीय कृत्य है। भूत भगाना</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> नल के जल से कैंसर जैसे रोग मिटाना</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> पैरों व नाड़ी के टायर के बीच की धूल से जीवन के दुःख दर्द मिटाना यह सब धर्म की आड़ में भगवान के नाम पर ठीक नहीं है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सत्य ही नहीं परम सत्य है कि धर्म का सम्बन्ध अदृष्ट अस्तित्व या परम सत्ता से भी है।</span></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3527/eternal-truth"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-03/amt_0119.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:center;" align="center"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ओ</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">3</span><span lang="hi" xml:lang="hi">म</span></strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">धर्मान्धता -</span></strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi"> धर्म के नाम पर अन्ध श्रद्धा व अंधविष्वास के नए</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">नए कीर्तिमान इस वैज्ञानिक युग में देखने को मिल रहे हैं। यह घनघोर अधर्म</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> पाप</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अनैतिक असंवैधानिक</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अमानवीय व दण्डनीय कृत्य है। भूत भगाना</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> नल के जल से कैंसर जैसे रोग मिटाना</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> पैरों व नाड़ी के टायर के बीच की धूल से जीवन के दुःख दर्द मिटाना यह सब धर्म की आड़ में भगवान के नाम पर ठीक नहीं है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सत्य ही नहीं परम सत्य है कि धर्म का सम्बन्ध अदृष्ट अस्तित्व या परम सत्ता से भी है। धर्म विज्ञान से भी परे पराविद्या भी है। धर्म के पारमार्थिक अतीन्द्रिय अदृष्ट सत्य के नाम पर गरीब</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> कम पढ़े लिखे श्रद्धालुओं की श्रद्धा का दोहन यह धर्म व न्याय संगत नहीं है। पराविद्या संपन्न व्यक्ति का जीवन बहुत ऊँचा होता है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> वहां ढ़ोंग</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> पाखंड</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अंधविश्वास लेश मात्र भी नहीं होता। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य धर्म</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">-</span></strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi"> जीवन या आचरण की पूर्ण पवित्रता ही सच्चा धर्म है। धारण किया जाये वही धर्म है। धारणात् धर्मः धार्यते इति धर्मः। आहार</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> विचार</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> वाणी व्यवहार</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> स्वभाव</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> सम्बन्ध व जीवन के सभी क्षेत्रों में पवित्रतापूर्वक आचरण या व्यवहार धर्म का सार है। पूर्ण सात्विकता</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> दिव्यता और अन्ततः पूर्ण विवेक</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> पूर्ण श्रद्धा तथा पूर्ण पुरुषार्थ के साथ पूर्ण निष्कामता व पूर्ण निर्लोभता ही धर्म का श्रेष्ठतम स्वरुप है। मति भक्ति कृति व प्रकृति की पूर्ण दिव्यता ही धर्म है। धर्म के इसी शाश्वत स्वरुप को सनातन धर्म कहते हैं। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक योग तत्व की महिमा </span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">-</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> यदि आप आम का पेड़ लगाते है तो इससे सब फल नहीं प्राप्तकर सकते। एक प्रकार की खेती गेंहू</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> चावल आदि से सब प्रकार के धान्य नहीं पा सकते। एक प्रकार के व्यापार से संसार के सारे व्यवहार सिद्ध नहीं कर सकते लेकिन योग एवं योगमूलक कर्मयोग से वैयक्तिक व सार्वजनिक जीवन के सब प्रकार के सब कार्यों की सिद्धि कर सकते है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">योग से स्वास्थ्य की प्राप्ति तो प्रथम लाभ व प्रथम सीढ़ी है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> योग से सुख</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> समृद्धि</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> शान्ति</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> सफलता</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> विजय</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रसन्नता सब दिव्य गुणों दैवी सम्पद के साथ</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">साथ सम्पूर्ण लौकिक व पारमार्थिक सत्यों की सिद्धि योग का बड़ा ध्येय है। ये सब प्राप्त या अनुभव करके हम आपसे कह रहे हैं। अतः आईये योग करें एवं योग को जीयें। योग करना</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> करना तथा योगमय योगमय जीवन जीना तथा सबको इस योग पथ चलाना हमारा सामूहिक कर्त्तव्य या उत्तरदायत्वि है। योग अष्ट सिद्धि नवनिधि दशविद्या या पराविद्या या अध्यात्म विद्या का मूल साधन है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> सिद्धि है। </span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दान की महिमा</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in"> -</span></strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi"> यह सम्पूर्ण ब्रहााण्ड हमार पिण्ड जीवन जगत सब ब्रहमा के दान का परिणाम है। दान ब्रहााण्ड का मूल केन्द्र है परिधि में सम्पूर्ण अस्तित्व है। अतः हम सब मनुष्यों में दान की सहज प्रवृत्ति है। दान की परिधि छोटी या बड़ी होने स्वार्थ या परमार्थ कह जाता है। विचारधारा के आधार पर चीन</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> रसिया</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> यू</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">.</span><span lang="hi" xml:lang="hi">एस</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">.</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> मीडलिस्ट व ईसाई मतावलम्बी यूरोपीय देश एक विशेष विचारधारा को प्रक्षय देने हेतु दान देते हैं। बस सनातन धर्मियों के सामूहिक स्पोंसर्ड डोनेशन की कोई रूपरेखा नहीं है। आइये सनातन के शाश्वत मूल्यों को अपने सम्पूर्ण सामर्थ्य से आगे बढ़ाइये। </span></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शाश्वत प्रज्ञा</category>
                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>जुलाई</category>
                                    

                <link>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3527/eternal-truth</link>
                <guid>https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3527/eternal-truth</guid>
                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 15:58:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-03/amt_0119.jpg"                         length="466006"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[योग संदेश विभाग]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        