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                <title>ऑटोइम्‍यून रोग - योग संदेश</title>
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                <description>ऑटोइम्‍यून रोग RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सोरायसिस अब लाईलाज नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;">स्वामी समग्रदेव   <br />पतंजलि संन्यासाश्रम, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.patanjaliyogsandesh.com/article/3654/psoriasis-is-no-longer-incurable"><img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/400/2025-05/psoriasis.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सोरायसिस (Psoriasis)</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">सोरायसिस (Psoriasis) एक स्‍थायी और स्‍व-प्रतिरक्षित (ऑटोइम्‍यून) डिजीज है, जिससे लगभग 25 मिलियन भारतीय पीडि़त हैं। यह रोग त्‍वचा को प्रभावित करता है। इसमें इंफ्लेमेशन, त्वचा पर लालिमा, खुजली आदि होती है। <br />यह एक दीर्घकालिक एक पुरानी सूजन, गैर-संक्रामक त्वचा रोग है जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली अति सक्रिय हो जाती है, जिससे त्वचा की कोशिकाएँ बहुत तेजी से बढऩे लगती हैं। त्वचा के कुछ हिस्से पपड़ीदार और सूजे हुए हो जाते हैं, ज्यादातर खोपड़ी, कोहनी या घुटनों पर लेकिन शरीर के अन्य हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। सोरायसिस त्वचा रोग स्थानीयकृत या व्यापक हो सकता है। वैज्ञानिक पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं कि सोरायसिस किस कारण से होता है, लेकिन वे जानते हैं कि इसमें आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारको का मिश्रण शामिल है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>21 अक्टूबर को वर्ल्ड सोरायसिस डे होता है </strong></span><br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सोरायसिस के कारण</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">सोरायसिस एक प्रतिरक्षा-मध्यस्थ रोग है, जिसका अर्थ है कि आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अति सक्रिय हो जाती है और समस्याएँ पैदा करती है। यदि आपको सोरायसिस है, तो प्रतिरक्षा कोशिकाएँ सक्रिय हो जाती है और ऐसे अणु उत्पन्न करती है जो त्वचा कोशिकाओं के तेज उत्पादन को शुरू करते हैं। यही कारण है कि इस बीमारी से पीडि़त लोगों की त्वचा में सूजन और पपड़ी होती है। वैज्ञानिक पूरी तरह से समझ नहीं पाए है कि दोषपूर्ण प्रतिरक्षा कोशिका सक्रियण को क्या ट्रिगर करता है, लेकिन वे जानते हैं कि इसमें आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारकों का संयोजन शामिल है। सोरायसिस से पीडि़त कई लोगों के परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा है, और शोधकर्ताओं ने कुछ ऐसे जीन की पहचान की है, जो इसके विकास में योगदान दे सकते हैं। उनमें से कई प्रतिरक्षा प्रणाली के  कार्य में भूमिका निभाते हैं। <br />कुछ बाहरी कारक जो सोरायसिस विकसित होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं, उनमें शामिल हैं -</h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>संक्रमण, विशेषकर स्टे्रप्टोकोकल और एचआईवी संक्रमण। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कुछ दवाईयां, जैसे हृदय रोग, मलेरिया या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए दवाएं।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>धूम्रपान</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>मोटापा</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सोरायसिस के लक्षण</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">सोरायसिस के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं लेकिन कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं :-</h5>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>मोटी, लाल त्वचा के धब्बे जिन पर चांदी-सफेद रंग की पपडिय़ाँ हैं और जिनमें खुजली या जलन होती है, आमतौर पर कोहनी, घुटनों, खोपड़ी, धड़, हथेलियों और पैरों के तलवों पर होती हैं। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सूखी, फटी हुई त्वचा जिसमें खुजली होती है या खून निकलता है। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>मोटे, उभरे हुए, गड्ढेदार नाखून। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>नींद की खराब गुणवत्ता। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कुछ रोगियों में सोरायसिस गठिया नामक एक सम्बंधित स्थिति होती है, जिसकी विशेषता कठोर, सूजे हुए या दर्दनाक जोड़, गर्दन या पीठ दर्द या एड़ी में दर्द हो सकता है यदि आपको सोरायसिस गठिया के लक्षण हैं, तो जल्द ही आपने डॉक्टर से मिलना जरूरी है क्योंकि अनुपाचित सोरायसिस गठिया अपरिवर्तनीय क्षति का कारण बन सकता है। </h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सोरायसिस के लक्षण आते-जाते रहते हैं। आप पा सकते है कि कई बार आपके लक्षण बदत्तर हो जाते हैं, जिन्हे फ्लेयर्स कहा जाता है और उसके बाद कुछ समय ऐसा आता है जब आप बेहतर महसूस करते हैं।<img src="https://www.patanjaliyogsandesh.com/media/2025-05/pranayam.jpg" alt="pranayam" width="800" height="937"></img></h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>सोरायसिस के प्रकार</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">सोरायसिस के विभिन्न प्रकार हैं, जिनमें शामिल हैं :-<br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>प्लाक सोरायसिस -</strong></span> यह सबसे आम प्रकार है, और यह त्वचा पर उभरे हुए, लाल धब्बों के रूप में दिखाई देता है जो चांदी-सफेद रंग के तराजू से ढके होते हैं। ये धब्बे आमतौर पर शरीर पर एक पैटर्न में विकसित होते हैं और खोपड़ी, धड़ और अंगों, विशेष रूप से कोहनी और घुटनों पर दिखाई देते हैं।<br />गुटेट सोरायसिस - यह प्रकार आमतौर पर बच्चों या युवा वयस्कों में दिखाई देता है, और आमतौर पर धड़ या अंगों पर छोटे, लाल बिंदुओं जैसा दिखता है। प्रकोप अक्सर ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण  जैसे कि स्टे्रप गले से शुरू होता है।<br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>पुस्टुलर सोरायसिस -</strong></span> इस प्रकार में,लाल त्वचा से घिरे हुए पुस्टयूल नामक मवाद से भरे उभार दिखाई देते हैं। यह आमतौर पर हाथों और पैरों को प्रभावित करता है लेकिन एक ऐसा रूप भी है जो शरीर के अधिकांश हिस्से को कवर करता है। लक्षण दवाओं, संक्रमण तनाव, या कुछ रसायनों से शुरू हो सकते हैं। <br /><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>उल्टा सोरायसिस -</strong></span> यह रूप त्वचा क तहों में चिकने, लाल धब्बों के रूप में दिखाई देता है कि स्तनों के नीचे या कमर या बगल में। रगडऩे और पसीना आने से यह और भी बदत्तर हो सकता है। <br />एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस - यह सोरायसिस का एक दुर्लभ लेकिन गंभीर रूप है, जिसमें शरीर के अधिकांश भाग पर लाल, पपड़ीदार त्वचा होती है। यह बुरी तरह से धूप से झुलसनेया कॉर्टिकोस्टेरॉइड जैसी कुछ दवाएँ लेने से शुरू हो सकता है। एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस अक्सर उन लोगों में विकसित होता है, जिन्हें एक अलग प्रकार का सोरायसिस होता है, जिसे अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं किया जाता है और यह बहुत गंभीर हो सकता है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span style="color:rgb(35,111,161);">पतंजलि वेलनेस में सोरायसिस की चिकित्सा</span> </strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पतंजलि वेलनेस में समग्र चिकित्सा के द्वारा सोरायसिस का निदान किया जाता है। <br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>आहार चिकित्सा -</strong> </span>पथ्य आहार<br />प्रात:कालीन औषधि जल- सर्वकल्प क्वाथ + कायाकल्प क्वाथ<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>नाश्ता- </strong></span>व्हीट ग्रास एलोविरा जूस, भीगे हुए ५ बादाम, ५ अखरोट, अंकुरित मूंग, मसूर मोठ, फल- पपीता, सेव, अवाकार्डो<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>दोपहर का भोजन-</strong></span> खाना खाने से पहले मिक्स सलाद का सेवन करें। उबली हरी सब्जी जैसे- लौकी, टिंडा, तुरई, पेठा, कद्दू, जौ की रोटी और दलिया।<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>दोपहर भोजन उपरांत-</strong></span> स्किन जूस (गाजर, एलोवेरा, लौकी, गोधन अर्क और गिलोय)<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>रात्रि भोजन -</strong></span> जौ का दलिया, मूंग दाल खिचड़ी, उबली सब्जी, सूप।<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>रात्रि भोजन के उपरांत - </strong></span>सर्वकल्प क्वाथ + कायाकल्प क्वाथ<br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>अपथ्य आहार - </strong></span>किसी प्रकार के चर्म रोग में मीठा दूध व डेयरी के प्रोडक्ट तथा जंक फूड का सेवन नहीं करना चाहिए।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>सोरायसिस की चिकित्सा</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;">निम्रलिखित प्राकृतिक चिकित्सा का उपयोग सोरायसिस चिकित्सा के रूप में लिया जाता है।</h5>
<ul style="list-style-type:square;">
<li style="text-align:justify;">
<h5>न्यूट्रल एमरसन बाथ - नीम के साथ।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>गंजी हल्दी लेप</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कायाकल्प लेप</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>मसाज</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>एनिमा जलनेती कुंजर</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>हाइड्रो कोलन थेरेपी</h5>
<h5> </h5>
<h5><strong>निम्रलिखित आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग चिकित्सा के रूप में लिया जाता है-</strong></h5>
<h5> </h5>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>नाश्ते से पहले</strong></span></h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सर्वकल्प क्वाथ</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कायाकल्प क्वाथ</h5>
<h5> </h5>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>खाने से पहले</strong></span></h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>दिव्य कैप्सूल</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सोरोग्रिट</h5>
<h5> </h5>
<h5><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>खाने के पहले</strong></span></h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>गिलोय घनवटी</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>नीम घनवटी</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>इम्यूनोग्रिट</h5>
</li>
</ul>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>कायाकल्प तेल - प्रभावित जगह पर लगाने के लिए।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>दिव्य तेल - प्रभावित जगह पर लगाने के लिए।</h5>
<h5> </h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>दिव्य डर्माग्रिट - प्रभावित जगह पर लगाने के लिए।</h5>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(35,111,161);"><strong>सोरायसिस के लिए योग</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>आसन- </strong></span>मंडूकासन, शशकासन, योगमुद्रासन, वक्रासन, गोमुखासन, पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन,</h5>
<h5 style="text-align:justify;">नौकासन, कन्धरासन, पादांगुष्ठानासास्पर्शासन।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>प्राणायाम-</strong></span> भस्त्रिका प्राणायाम, कपालभाति प्राणायाम, बाह्य प्राणायाम (अग्रिसार-सहायक क्रिया), उज्जायी</h5>
<h5 style="text-align:justify;">प्राणायाम, अनुलोम-विलोम प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, उद्गीथ प्राणायाम, प्रणव ध्यान प्राणायाम।</h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>योग संदेश</category>
                                            <category>दिव्य अनुभूति</category>
                                            <category>2024</category>
                                            <category>नवम्बर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 17:47:04 +0530</pubDate>
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