श्रद्धेय योगऋषि परम पूज्य स्वामीजी महाराज के शाश्वत प्रज्ञा से नि:सृत शाश्वत सत्य
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By योग संदेश विभाग
उपनिषद् सन्देश सदा ब्रह्मभाव में जीना इसे ही दूसरे शब्दों में उच्च चेतना, दिव्य चेतना, आत्म चेतना, ऋषि चेतना या ब्रह्म चेतना में जीना भी कहते हैं। इस ब्रह्मभाव या उच्च चेतना में जीने वाला व्यक्ति कभी... श्रद्धेय योगऋषि परम पूज्य स्वामीजी महाराज के शाश्वत प्रज्ञा से नि:सृत शाश्वत सत्य...
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By योग संदेश विभाग
सम्पूर्ण स्वाधीनता 1. स्वतन्त्रता, स्वाधीनता, स्वराज या आज़ादी पर ईश्वरीय प्रेरणा, अन्त:प्रज्ञा या स्व प्रज्ञा एवं उपलब्ध समग्र ज्ञान के आधार पर हम गंभीर रूप से विचार व मंथन करेंगे और अन्तत: जो निर्णय... श्रद्धेय योगऋषि परम पूज्य स्वामीजी महाराज के शाश्वत प्रज्ञा से नि:सृत शाश्वत सत्य...
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By योग संदेश विभाग
देश में फैल रही असहिष्णुता या वैचारिक संघर्ष की जड़ें जैसा विचार हम करते हैं, वहीं हमारे संस्कार और व्यवहार का मूल आधार बनता जाता है। बाह्य संसार के दबावों-प्रभावों से हम प्रभावित भी होते हैं, और तदनुसार... श्रद्धेय योगऋषि परम पूज्य स्वामीजी महाराज के शाश्वत प्रज्ञा से नि:सृत शाश्वत सत्य...
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By योग संदेश विभाग
मनुष्य का मूल स्वभाव 1. मूल प्रकृति- मूल स्वभाव यह शब्द बार-बार सुनते रहते हैं। जैसे अग्नि की मूल प्रकृति दाहकत्व व ऊर्ध्वगमन की है, जल की मूल प्रकृति द्रवत्व अर्थात् बहना व शीतलता है। जल के संयोग, ... 
