सामूहिक समृद्धि सामूहिक सेवा
On
डॉ. रुपेश शर्मा
योग संदेश विभाग
पूज्य स्वामी जी महाराज ने बताया कि 26 वर्ष पहले हमने शून्य से अपने पुरुषार्थ की यात्रा का शुभारम्भ किया था और आज 26 वर्ष बाद पतंजलि विश्व की प्रसिद्ध आयुर्वेदिक कम्पनी में से एक हैं। पूज्य स्वामी जी महाराज का संकल्प है कि भारत को अब आर्थिक व सांस्कृतिक गुलामी से आज़ाद करवाना है उसी का ही परिणाम रुचि सोया जिसका अधिग्रहण व्यापार के लिए नहीं किया गया अपितु भारत को खाद्य तेल उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया गया। यह अधिग्रहण अलग-अलग दो संस्कृति का मिलन है। देश हित के लिए दिवालिया हो चुकी रुचि सोया को पूज्य स्वामी जी महाराज ने लगभग 5000 करोड़ रुपये की लागत से खरीदा। अधिग्रहण की इस प्रक्रिया के उपरान्त देश के बड़े-बड़े घरानों में बहुत बड़ी उत्सुकता थी कि दो भिक्षुक आखिरकार रुचि सोया जैसी दिवालिया कम्पनी को कैसे चलायेंगे। यह जिज्ञासा जायज़ भी थी क्योंकि खाद्य व्यवसाय में अत्याधिक प्रतिस्पर्धा जो है। इस जिज्ञासा का जवाब पूज्य स्वामी जी महाराज व श्रद्धेय आचार्य जी महाराज ने अपने कुशल नेतृत्त्व व पुरुषार्थ से दिया। आज अधिग्रहण के मात्र दो साल बाद रुचि सोया कम्पनी लाभ परिमार्ग हो गई है, जिसके स्टॉक की कीमत आज काफी ऊँची हो चुकी है। रुचि सोया के अधिग्रहण के उपरान्त पूज्य स्वामी जी महाराज ने ढाई लाख हेक्टअर जमीन पर पाम प्लांटेशन का भारतीय किसानों के साथ अनुबंध किया है। यह पाम प्लांटेशन आने वाले दिनों में तीन से पाँच हजार करोड़ रुपये तक के हो जायेंगे, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। पूज्य स्वामी जी इस योजना से देश के किसान की आय को दुगना करना चाहते हैं आज जो खाद्य तेल पर जो हमारी मलेशिया और इंडोनेशिया पर निर्भरता है उसे पूज्य स्वामी जी वह जल्द समाप्त करना चाहते हैं। इस कदम मात्र से देश का 2.5 लाख करोड़ रुपयों की जो विदेशी मुद्रा है, उसे बचाया जा सकेगा। निकट भविष्य में बहुत जल्दी रुचि सोया अपना एफपीओ (F.P.O) बाजार में लेकर आने वाला है। पूज्य स्वामी जी कहते है कि हम अपने निवेशकों को मात्र शेयर होल्डर नहीं मानते हम उन्हे रुचि सोया का मालिक मानते हैं। यह निवेशक रुचि सोया के माध्यम से अच्छी कमाई करें, यही हमारा उद्धेश्य भी है। निकट भविष्य में रुचि सोया के 10 से 15 प्रतिशत तक शेयरों को बेचा जायेगा और इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि इससे हम 4 हजार 3 सौ करोड़ रुपये जुटा लेंगे और प्राप्त पैसे का उपयोग हम कम्पनी को कर्जें से मुक्त करने में करेंगे। पूज्य स्वामी जी कहते है कि कर्ज मुक्त के बाद हम कम्पनी की वर्किंग कैपिटल को भी मिनियम पर लेकर जायेंगे, वैसे भी हम लोग वस्तु बजार (कमोडिटी मार्केट) का भी काम करते है इसलिए रुचि सोया को हमने फूड कम्पनी में कन्वर्ट कर दिया हैं। इस कम्पनी में न्यूट्रिला गोल्ड, न्यूट्रिला हनी, न्यूट्रिला प्रोटीन आटा के उत्पाद बेचें जा रहे हैं। इन उत्पादों के मार्जन की बात करें तो 30% से 60% के बीच में रखा गया है। हम यहाँ पर रिटर्न और इन्वेस्टमेंट को ध्यान में रखकर काम कर रहे है। पूज्य स्वामी जी कहते है कि जब हम कम्पनी को कर्जे से मुक्त कर देंगे तो बैंक में देने वाला जो ब्याज था उसे भी हम मार्जन के तौर पर अपने रिटेल दुकानदारों व प्रिय गाहकों को देंगे।
पूज्य स्वामी ने आदणीय प्रधानमंत्री जी को याद करते हुए कहा कि मोदी जी ने आज़ादी की 75वीं वर्षगाठ पर लाल किले से घोषणा की थी कि बहुत जल्द भारत खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर होकर दो लाख करोड़ रुपये बचायेंगा। यह पैसा देश के विकास कार्यों के लिए खर्च किया जायेगा, इसलिए पतंजलि आज प्रधानमंत्री जी के सपनों को साकार करने की दिशा में कार्य कर रही हैं। पतंजलि वचनबद्ध है प्रधानमंत्री जी के दूसरे सपने को साकार करने के प्रति भी जिसमें वह चाहते है कि देश के किसानों की आय दुगनी हो सके, इसलिए पूज्य स्वामी जी ने नार्थ-ईस्ट की कायाकल्प करने के लिए कार्य करना प्रारम्भ कर दिया है। यहाँ पर पतंजलि ने किसानों से अनुबंध किया है। आज पाम प्लांटेशन के लिए पूरे नार्थ-ईस्ट के किसानों को प्रक्षिशण भी दिया जा रहा है ताकि वह सही से प्लांटेशन कर अपनी उपज का सही मूल्य प्राप्त कर सके। पतंजलि किसानों से प्राप्त फसल से तेल का उत्पादन करेगी, आने वाले भविष्य में पाम ऑयल का उत्पादन 4 गुना किया जायेगा जब उत्पादन अधिक होने लगेगा तो किसानों की आय भी दुगनी हो जायेगी, साथ ही अधिक मात्रा में बाजार में तेल की उपलब्धता के कारण तेल का मूल्य कम हो जायेगा और कहीं न कहीं बढ़ती मंहगाई पर भी अंकुश लगाने का काम पतंजलि करने जा रहा है। पतंजलि के 4 गुना तेल उत्पादन से भारत का बहुत बड़ा विदेशी मुद्रा का भण्डार विदेश जाने से बचाया जा पायेगा।
भारत को खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पतंजलि बहुत बड़े पैमाने पर पैसा खर्च करने जा रहा है। मगर राष्ट्र के स्वाभिमान के आगे पतंजलि धन को प्राथमिकता नहीं देता है। पतंजलि आने वाले 5 सालों के अन्दर लक्ष्य निर्धारित करती है कि वह तेल के उत्पादन में यूनीलीवर को पीछे छोड़ देगी, चाहे वह उसका टर्नओवर हो या उसका उत्पादन पतंजलि प्रत्येक क्षेत्र में यूनीलीवर को पछाड़ देगी, वैसे भी यूनीलीवर एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी हैं। यह बात देश की आम जनता को समझ आ गई है। इस बहुराष्ट्रीय कम्पनी के सामने स्वदेशी का कोई विकल्प नहीं होने के कारण यह भारत का पैसा लूट रही थी, मगर भविष्य में पतंजलि से यूनीलीवर को कड़ी टक्कर मिलने वाली है।
पूज्य स्वामी जी महाराज का संकल्प है कि भारत को अब आर्थिक व सांस्कृतिक गुलामी से आज़ाद करवाना है उसी का ही परिणाम रुचि सोया जिसका अधिग्रहण व्यापार के लिए नहीं किया गया अपितु भारत को खाद्य तेल उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए गया।यह अधिग्रहण अलग-अलग दो संस्कृति का मिलन है। देश हित के लिए दिवालिया हो चुकी रुचि सोया को पूज्य स्वामी जी महाराज ने लगभग 5000 करोड़ रुपये की लागत से खरीदा। |
अगले साल दिसम्बर तक रुचि सोया के 25% शेयरों को बाजार में निवेशकों के बीच लाया जायेगा। इन शेयरों से प्राप्त आमदनी को देश की सेवा व विकास कार्यों में लगाया जायेगा। पतंजलि हमेशा से इसी लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ती आई है कि उसके लिए देश सेवा सर्वोपरि हैं।
पूज्य स्वामी जी आगे बताते है कि हम फूड में भी उतने ताकतवर है जितने की हम नॉन फूड में हैं। वस्तु बाजर (कमोडिटी मार्केट) में भी हम आने वाले सालों में उतने ताकतवर हो जायेंगे, जितना की हम न्यूट्रास्यूटिकल में होने जा रहे है। पूज्य स्वामी जी महाराज ने इस ताकत पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हमारी यह ताकत तब आई है जब हमने देश की जनता के साथ जुड़े उत्पादों का उत्पादन किया। यहाँ पर हम लाभ-हानि को सोचकर कोई काम नहीं करते है। हम बस देश के लिए अच्छी नीयत के साथ काम करते है, तब जाकर हमें यह ताकत मिलती है।
आज पतंजलि के गाय का घी हर घर में पहली पंसद है। जिस कारण हम गाय के घी का 50% मार्केट शेयर को अपना मानते हैं, उसी प्रकार शहद, च्यवनप्राश में भी हम 50%की हिस्सेदारी रखते है। हम किसी भी उत्पाद को व्यापार की दृष्टि से नहीं बेचते अपितु उपकार और उपचार को ध्यान में रखकर बनाते हैं। न्यूट्रीला को हम ने अपना प्रीमियम ब्रांड बनाया है इसके अन्दर हमने सभी न्यूट्रिशियनों के उत्पाद तैयार किये हैं। आज जो युवा शरीर को बनाने के लिए, जो सप्लीमेंट खा रहे हैं वह सप्लीमेंट उनकी बॉडी को न बनाकर कई रोगों को आमंत्रित कर रहे हैं। यह सभी न्यूट्रिशियन सिन्थेटिक हैं, जो शरीर के लिए काफी हानिकारक होते हैं। न्यूट्रीला ने युवाओं को ध्यान में रखकर प्राकृतिक फूलों से बने न्यूट्रिशियन को बाजार में उतारा है, जो युवाओं को प्राकृतिक रूप से भरपूर न्यूट्रिशियन देने का काम करेगा।
आज पूज्य स्वामी जी को देश में बच्चा-बच्चा जानता है, उसी प्रकार विश्व में भी पूज्य स्वामी जी के नाम से हर कोई वाकिफ है। इसलिए जो लोग पूज्य स्वामी जी को जानते है उसी प्रकार वह पतंजलि व रुचि सोया को भी जानते है अर्थात् आज हमारी पहुंच 200 करोड़ लोगों के बीच तक है।
हम किसी भी उत्पाद को व्यापार की दृष्टि से नहीं बेचते अपितु उपकार और उपचार को ध्यान में रखकर बनाते हैं। न्यूट्रीला को हमने अपना प्रीमियम ब्रांड बनाया है इसके अन्दर हमने सभी न्यूट्रिशियनों के उत्पाद तैयार किये हैं। आज जो युवा शरीर को बनाने के लिए, जो सप्लीमेंट खा रहे हैं वह सप्लीमेंट उनकी बॉडी को न बनाकर कई रोगों को आमंत्रित कर रहे हैं। यह सभी न्यूट्रिशियन सिन्थेटिक हैं, जो शरीर के लिए काफी हानिकारक होते हैं। |
कई बार पूज्य स्वामी जी से लोग पूछते है कि आपके उत्पादों का मार्जन इतना कम क्यूँ होता है जबकि अन्य कम्पनियां उसी उत्पाद का कई गुने में बेचकर पैसा कमाती हैं तब पूज्य स्वामी जी उसी बात का उत्तर बड़े धैर्य के साथ देते हुए बताते हैं कि हमारे यहाँ मैनेजमेंट लेबल पर किसी का कोई वेतन नहीं है और न ही कोई बड़ा तामझाम है। जिस कारण हमारे उत्पाद की कोस्ट कम हो जाती है।
पूज्य स्वामी जी एवं श्रद्धेय आचार्य जी एक भगवा/सफेद चादर ओढ़ते हैं। और उसी प्रकार श्रद्धेय आचार्य जी इस कंपनी के सी.ई.ओ. हैं। वह पतली सी सफेद चादर ओढ़ते हैं, साथ ही एक साधारण जीवनशैली जीने का परिचय देते हैं। इसलिए पतंजलि के उच्च स्तर के मैनेजमेंट का कोई खर्चा नहीं होता है और जो यह खर्चा बचता है, उसी से हम अपने उत्पादों के मूल्य को कम करके रखते हैं जबकि अन्य कंपनियों में सी.ई.ओ. और टॉप मैनेजमेंट के लोगों की महीने की तनख्वाह करोड़ों-करोड़ों में होती है। जब कंपनियाँ अपने मैनेजमेंट पर इतना खर्च करेगी तो वह यह खर्च अपने उत्पादों को महंगा करके निकालेगी या अपने उत्पादों के साथ समझौता करके ग्राहकों की जेब से वसूलती है।
पूज्य स्वामी जी बताते हैं कि जब रुचि सोया का अधिग्रहण किया जा रहा था तब रुचि सोया के कर्मचारियों में एक डर सा पैदा हो गया था कि शायद नई कंपनी पतंजलि हम सबको बाहर का रास्ता दिखा देंगी मगर पूज्य स्वामी जी के आदेश अनुसार किसी भी एक कर्मचारी को कंपनी से बाहर नहीं निकाला गया अपितु पूज्य स्वामी जी ने घोषणा की है कि जब भी रुचि सोया का शेयर आएगा, तब रुचि सोया अपने सभी कर्मचारियों का विशेष ध्यान रखेगी। सभी कर्मचारी रुचि सोया के मालिक होंगे। वह इस भावना से काम करें, यह पूज्य स्वामी जी का कथन है। साथ ही वह यहाँ पर कहते हैं कि यदि हम भारत को भविष्य में विश्व की आर्थिक महाशक्ति देखना चाहते हैं तो उसमें बहुत बड़ी भूमिका रुचि सोया और पतंजलि की भी होने जा रही है। बहुत जल्द पतंजलि विदेशी कंपनियों से बहुत बड़ा ब्राण्ड होने जा रही है। पूज्य स्वामी जी ने पतंजलि व रुचि सोया के द्वारा किए जाने वाले इस पुरुषार्थ का नाम सामूहिक समृद्धि, सामूहिक सेवा दिया है।
लेखक
Related Posts
Latest News
01 Mar 2025 17:58:05
With divine inspiration, I want to draw your attention towards 11 important facts. I am sure that you will


