शाश्वत प्रज्ञा

परम पूज्य योग- ऋषि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज की शाश्वत प्रज्ञा से नि:सृत शाश्वत सत्य ...

शाश्वत प्रज्ञा

स्वामी रामदेव

ब्रिटेन से देश की 5611 लाख करोड़ रुपए की

लूट को वापस लेने तथा आगे की लूट से देश को बचाने का

राष्ट्रव्यापी अभियान

     आज भारत राजनैतिक दृष्टि से तो आजाद है, 78 वर्ष हमारे स्वाधीनता के हो गए, 76वें गणतंत्र दिवस में हम प्रवेश कर गए। आर्थिक, शिक्षा, चिकित्सा, सांस्कृतिक सब प्रकार की कुंठाओं, ग्लानि से आजादी अभी शेष है। उपनिवेशवाद की यह प्राचीन लूट जो पहले तलवार के बल पर होती थी वह  व्यापार के बल पर आज भी मल्टीनेशनल कम्पनियों के माध्यम से उपभोक्तावाद के रूप में जारी है। हमें स्वदेशी का अभियान चलाकर कंज्यूमर नहीं क्रिएटर बनना है। आज पूरी दुनिया के 10 प्रतिशत लोगों के हाथों में पूरी दुनिया की 90 प्रतिशत दौलत है।
भारत का समृद्धशाली वैभव
दाओस में आयोजित वर्ल्ड इकानॉमिक फोरम में यू.के. की एक विश्व प्रसिद्ध संस्था ऑक्सफैम इंटरनेशनल द्वारा अंग्रेजों की भारत पर लूट के बारे मेंटेकर्स नॉट मेकर्सअर्थात निर्माता नहीं लुटेरे  शीर्षक से जारी एक 98 पृष्ठों की रिपोर्ट में कई अध्ययनों शोध पत्रों का हवाला देते हुए कहा गया कि अंग्रेजों ने 1765 से लेकर 1900 के बीच मात्र 135 सालों में 64.82 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर्स भारत से लूटे थे, जो भारतीय रूपयों में 5611 लाख करोड़ रुपए अर्थात विश्व के 5 बड़े देशों की अर्थव्यवस्था से भी अधिक है। भारत जो कभी सोने की चिडिय़ा कहलाता था उसको अंग्रेजों ने इतनी बेदर्दी से लूटा कि भारत जिसका औद्योगिक उत्पादन हजारों वर्षों की विदेशी आक्रमणकारियों की लूट के बाद भी औरंगजेब के शासनकाल के समय 17वीं शताब्दी में वैश्विक उत्पादन में 25% था वह 19वीं शताब्दी में मात्र 2% रह गया। इससे पहले भी प्रसिद्ध भारतीय अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक ने 45 ट्रिलियन डॉलर की लूट के प्रमाणों सहित 2018 में प्रतिष्ठित कोलम्बिया प्रेस के माध्यम से शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।
500 साल पहले भारत की अर्थव्यवस्था
अंग्रेजों से पहले अरबी, अफगानी, पठानी, इरानी, मंगोल, पुर्तगालियों, डचों, फ्रांसिसी एवं मुगलों की लूट का आंकड़ा इसमें सम्मिलित नहीं है। 1000 वर्षों की लूट को यदि औसत रूप में भी देखें तो यह कम से कम 100 ट्रिलियन से ऊपर होगी। देश की सकल अर्थव्यवस्था के आकार की दृष्टि से यदि लूट को 25% मानें तो भारत की कुल अर्थव्यवस्था 500 साल पहले अनुमानित 500 ट्रिलियन रही होगी। ऑक्सफैम के अनुसार अंग्रेजों ने दमनकारी नीतियाँ बनाकर भारत के घरेलू उद्योग धंधों को बर्बाद कर दिया।
उपनिवेशवाद के कारण आर्थिक असमानता
ऑक्सफैम की रिपोर्ट कहती है कि एतिहासिक उपनिवेशवाद के समय जो असामानता लूट का चलन था, वही वर्तमान समय में चल रहा है। ग्लोबल साउथ जिसमें एशिया, अफ्रीका दक्षिण अमेरिका के गरीब विकासशील देशों से धन का दोहन ग्लोबल नॉर्थ जिसमें अमेरिका, यूरोप के विकसित देशों के अमीर लोग उठा रहे हैं। दुनिया की 77% सम्पत्ति आज ग्लोबल नॉर्थ के पास है। दुनिया के अमीरों में से 68% अमीर केवल ग्लोबल नॉर्थ की 20% जनसंख्या से आते हैं। आज भी ग्लोबल साउथ में समान काम के लिए ग्लोबल नॉर्थ की तुलना में 87 से 95% कम भुगतान मिलता है। दुनियाँ के एक प्रतिशत लोगों के पास दुनिया का 45% धन है। वैश्विक सप्लाई चेन, एक्सपोर्ट, प्रोसेसिंग इंडस्ट्री पर एकाधिकार आदि से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा बाजार पर कब्जा करके ग्लोबल साउथ के श्रमिकों महिलाओं का शोषण से लेकर वर्तमान में भी प्रति घण्टे ग्लोबल नॉर्थ के अमीर 30 मिलियन डॉलर अर्थात लगभग 250 करोड़ रुपए प्रति घण्टे ग्लोबल साउथ से कमाते हैं। 44% लोग अभी भी गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं।
उपनिवेशवाद के जहरीले पेड़ के फल
1765 से 1900 के बीच लूटी गई 64.82 ट्रिलियन में से भारत से 33.8 ट्रिलियन डॉलर की सम्पत्ति ब्रिटेन के सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोगों के पास गई। यह इतनी बड़ी राशि थी जिसके यदि 50-50 पाउण्ड के नोट से कालीन बनाया जाए तो पूरे लंदन के 1572 स्क्वेयर किमी. को चार बार ढक़ा जा सकता है। उसके बाद एक बड़ी राशि ब्रिटेन के उच्च मध्यम वर्ग के अधिकारियों, बैंकर्स इंवेस्टर्स को लूट में से प्राप्त हुई। ऑक्सफैम का कहना है अंग्रेजों ने अफीम के नशे को मुनाफे के लिए प्रचारित किया, उद्योग धंधों को नष्ट करके बाजार पर कब्जा करके, बौद्धिक सम्पदा पर एकाधिकार करके, संसाधनों पर कब्जा करके, दास प्रथा, बाल मजदूरी, पूरी दुनिया में नस्लवाद, जातिवाद, लिंगभेद फैलाया जिसके कारण गरीबी, भुखमरी, अकाल, सूखा अपराध बढ़े। बाजार पर एकाधिकार के कारण कॉविड जैसी महामारी में गरीब देशों को दवाइयाँ नहीं मिली। इस धन से जो बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ पैदा हुई उन्होंने डब्ल्यू.टी.., आई.एम.एफ., वर्ल्ड बैंक आदि वैश्विक संस्थाओं के माध्यम से विदेशी कर्ज, ग्लोबलाइजेशन के नाम पर कानून बनाकर ग्लोबल साउथ का जमकर शोषण किया, जो आज भी जारी है। आज भी असमानता के उदाहरण के रूप में वल्र्ड बैंक ने एक औसत बैल्जियन को इथोपियन की तुलना में 180 गुणा अधिक मतदान की शक्ति प्राप्त है।
इतिहास गवाह है भारत के बंगाल में 1770 के अकाल में अंग्रेजों का स्वयं यह मानना था कि कम से कम एक करोड़ लोग मारे गए हैं। 1943 के अकाल में भी करीब 30 लाख लोग मारे गए, दु:खद यह है कि यह खाद्य संकट संसाधनों पर कब्जे लूट के कारण पैदा हुआ था। अंग्रेजों ने केवल भारत की सम्पत्ति को लूटा बल्कि ब्रिटिश नीतियों के कारण भारत में करोड़ों लोगों की मौत हुई।
 
उपनिवेशवादी लूट अत्याचार के लिए विभिन्न देशों द्वारा मांगी गई माफी हर्जाने/जुर्माने/क्षतिपूर्ति
1.  बेल्जियम ने अपने अधीन रहने वाले कांगो, रवांडा और बुरुंडी आदि देशों में औपनिवेशिक शासन के दौरान अत्याचार पर सार्वजनिक माफी मांगी।
2.  जर्मनी ने नामिबिया में अपने शासन के दौरान हुए अत्याचार पर माफी मांगी तथा 1-1 बिलियन यूरो का भुगतान करने का वादा किया। साथ ही जर्मनी ने दूसरे विश्व युद्ध में यहूदियों पर हुए अत्याचार पर भी माफी मांगी।
3. इटली ने लीबिया में अपने औपनिवेशिक शासन के अन्याय पर 2008 में सार्वजनिक माफी मांगी तथा 5 अरब डॉलर की क्षतिपूर्ति दी।
4.  फ्रांस ने भी अल्जीरिया से औपनिवेशिक शासन के अत्याचारों को स्वीकार किया खेद व्यक्त किया।
 
ब्रिटेन से देश की 5611 लाख करोड़ रुपए की लूट को वापस लेना है तथा आगे की लूट से देश को बचाना है
इस गणतंत्र दिवस पर हमारा संकल्प है कि इस लूट के लिए हम हाऊस ऑफ कॉमन्स, ब्रिटेन से माफी मंगवाएँगे। आज हम आह्वान करने वाले हैं सब भारतवासियों से, आज हम भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनामी बनाने का संकल्प लेते हैं। अंग्रेजों से पहले इस लूट के साथ-साथ विदेशी आक्रमणकारी यहीं पर बसकर हमारी सनातन संस्कृति को नष्ट करके, धर्म परिवर्तन करके करोड़ों लोगों को इसाई मुसलमान बनाकर राष्ट्र की एकता, अखण्डता सम्प्रभुता पर खतरा पैदा करके फूट डालो राज करो की नीति से भयंकर हानि की। पहले आत्म अनुशासन के साथ भारत का चक्रवर्ती शासन पूरी दुनिया में चलता था। हमारा संकल्प है पहले जो लूट लिया, उसको लौटाने के लिए पूरे देश में एक आंदोलन चलाना है। लाखों करोड़ की लूट के बाद भी सबसे बड़ी बेशर्मी की बात यह है कि अंग्रेजों ने लंदन के म्यूजियम में भारत से लूटे गए कोहिनूर आदि लूट के सामान की नुमाइश लगाई है। हम ऐसा अभियान चलाकर भारत के एक-एक व्यक्ति के गौरव स्वाभिमान को जगाकर इस लूट अत्याचार के जिम्मेदार ब्रिटेन की सरकार, ब्रिटिश संसद वहाँ के लुटेरे राजाओं के वंशजों पर वैधानिक वैचारिक दबाव बनाकर लूट का धन वापस लेना है तथा भारत पर किए अत्याचारों के लिए अंग्रेजों से सार्वजनिक माफी मंगवाने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाना है। यह आर्थिक आजादी, वैचारिक आजादी के अभिया में देश की लूट को वापस लौटाना है, स्वदेशी अभियान से आगे की लूट से देश को बचाना है।
सभी राष्ट्रवासियों से आह्वान है कि ऑक्सफैम की वेबसाइट पर जाकर इस रिपोर्ट का अवलोकन करके ब्रिटिश संसद हाऊस ऑफ कॉमन्स को उनकी आधिकारिक -मेल आई.डी. hcinfo@parliament.uk पर -मेल करके लूट वापसी माफी मांगने का अभियान चलाएँ।

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