स्वास्थ्य समाचार

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सिर्फ सात मिनट की कसरत से आप रह सकते हैं चुस्त-दुरुस्त
  • जाने-माने व्यायाम मनोविज्ञानी क्रिस जार्डन के इस कार्यक्रम को अपना रहे हैं लोग
  • बिना जिम गए फिट रहने के साथ आप निष्क्रिय जीवनशैली में ला सकते हैं बदलाव
जेएनएन एक बहुत ही प्रचलित कहावत है- तंदुरुस्ती हजार नियामत है। अगर आप जिम नहीं जा सकते हैं और खुद को फिट रखना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है। सिर्फ सात मिनट की कसरत सिर्फ आपको चुस्त-दुरुस्त रख सकती है, बल्कि निष्क्रिय जीवनशैली से सक्रिय जीवनशैली में बदलाव लाने में भी मदद कर सकती है।
आपाधापी भरे इस जीवन में समयाभाव के कारण जहां लोग अपने स्वास्थ्य पर अपेक्षाकृत उचित ध्यान नहीं दे पाते, वहीं सात मिनट की इस कसरत के लिए तो जिम जाने को मोटी रकम खर्च करने की कोई आवश्यकता है और ही कोई भारी उपकरण की दरकार है। बस कुर्सी या बेंच ही पर्याप्त है। इनमें से कुछ व्यायामों में जंपिंग जैक, पुश-अप और क्रंचेस शामिल हैं।
भारत में मोटापे की दर चिंताजनक
लैंसेट के एक अध्ययन से पता चलता है कि भारत में मोटापे की दर चिंताजनक है। यहां 70 प्रतिशत शहरी आबादी ज्यादा वजन वाली है। मोटापे के मामले में भारत दुनियाभर में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। मोटापे से ग्रसित लोगों के लिए जाने-माने व्यायाम मनोविज्ञानी क्रिस जार्डन का विशुद्ध वैज्ञानिक आधार पर तैयार व्यायाम कार्यक्रम बेहद लाभप्रद हो सकता है।
 व्यायाम कार्यक्रम को चुस्त-दुरुस्त रहने का रामबाण मान रहे लोग
उल्लेखनीय है कि क्रिस जार्डन ने एक दशक से भी अधिक समय पहले एक व्यायाम कार्यक्रम तैयार किया था जोगतिहीन जीवनजीने की समस्या को हल करता है- वो भी सिर्फ सात मिनट में। इसका उद्देश्य हर व्यायाम को अपनी शारीरिक गति के अनुकूल करना है।
दुनियां में असमय बढ़ता मोटापा, समय की कमी और जिम अथवा मंहगे व्यायाम उपकरण की खरीद में असमर्थ लोग क्रिस जार्डन के इस व्यायाम कार्यक्रम को चुस्त-दुरुस्त रहने का रामबाण मंत्र मानकर अपना रहे हैं। बढ़ती लोकप्रियता के इसी क्रम में जार्डन ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि ३० सेकेंड में जितना हो सके उतने जंपिंग जैक करें। अगर यह किसी और के मुकाबले कम है तो तनाव लें। उन्होंने बताया कि अपने शरीर के वजन के अनुरूप आप जंपिंग जैक कर सकते हैं। यह पारंपरिक हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (एचआइआइटी) को उसी विचारधारा का अनुसरण करता है जिसमें पांच सेकेंड का विश्राम होता है।
साभार : जागरण
https://www.jagran.com/lifestyle/health-you-can-stay-fit-with-justseven-minutes-of-exercise-23867509.html
 
 पॉलिश किए गए अनाजों में भूसी युक्त दानों की तुलना में कम पोषक तत्व और फाइबर
बाहरी परत हटाने और पॉलिश से घट जाती है मोटे अनाजों की पौष्टिकता
 बाहरी परत हटाने और पॉलिश करने से मोटे अनाज (मिलेट) क़ी पौष्टिकता घट जाती है। बाहरी परत हटने से मोटे अनाजों के दाने जल्दी पक जाते हैं और लंबे समय तक ताजा बने रहते हैं, लेकिन पोषण खो देते हैं। यह जानकारी एक अध्ययन में सामने आई है।
शोधकर्ताओं ने जिन पांच छोटे बीजों वाले भारतीय मोटे अनाजों का अध्ययन किया है उनमें कंगनी (फॉक्सटेल मिलेट), सावा या कुटकी (लिटिल मिलेट), कोदो, सांवा (बार्नयार्ड मिलेट) और चेना या पुनर्वा (प्रोसो मिलेट) शामिल हैं। पॉलिश करने से मोटे अनाजों से फाइबर, वसा, फाइटेट्स और खनिज जैसे पोषक तत्व निकल
जाते हैं। पॉलिश किए गए मोटे अनाजों में भूसी युक्त दानों की तुलना में कम पोषक तत्व और फाइबर होता है। चेन्नई के मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन और हैदराबाद के आईसीएआर-भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। इसके नतीजे स्प्रिंगर लिंक जर्नल डिस्कवर फूड में प्रकाशित हुए हैं।
 प्रोटीन की मात्रा भी हुई कम
अनाज की मोटी परत हटाकर पॉलिश करने की वजह से सांवा और कुटकी को छोडक़र अन्य सभी तरह के मोटे अनाजों में प्रोटीन का स्तर भी घट गया। भूसी युक्त अनाज को पकाने में समय तो अधिक लगा लेकिन उनके पोषक तत्व बरकरार रहे। इसी तरह पॉलिश किए हुए बिना चोकर वाले मिलेट ने पकने के दौरान अधिक ठोस पदार्थ खो दिए और ज्यादा पानी भी सोख लिया। इससे पता चला कि बीज का बाहरी आवरण हटाने से वह संरचनात्मक रूप से कमजोर हो गए थे।
  • शोध के निष्कर्ष में कहा गया है कि पॉलिश किए हुए मोटे अनाजों में फाइबर और पोषक तत्व कम होते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें महंगा बेचा जाता है। इनकी चमक देखकर उपभोक्ता भ्रमित हो जाते हैं।
 मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर, फिर भी गेहूं, चावल ज्यादा खाते हैं लोग
मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, हालांकि इसके बावजूद इनका गेहूं, चावल जैसे दूसरे अनाजों की तुलना में कम ही उपयोग किया जाता है। इनमें विटामिन बी, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, जिंक जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। ये अनाज दुनिया के कई हिस्सों में खासकर एशिया और अफ्रीका में लोकप्रिय हैं। भारत में भी मोटे अनाजों का अच्छा खासा उत्पादन होता है। राजस्थान में श्री अन्न का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है। सोरगम, बाजरा, ज्वार, रागी, फोनियो, कोदो, कुटकी जैसे मोटे अनाज जिन्हेंकदन्नभी कहते हैं, अपने अनेकों गुणों के बावजूद वर्षों से उपेक्षित रहे हैं।
पॉलिश करने से अनाजों में कार्बोहाइड्रेट और स्टार्च का स्तर बढ़ जाता है। इसकी वजह से आहार में शर्करा का स्तर (ग्लाइसेमिक लोड) बढ़ सकता है। अनाज के इन दानों पर एक कठोर बाहरी परत होती है जिसे दानों को साफ करते समय निकाल दिया जाता है। इसके बाद उसमें से चोकर को अलग कर पॉलिश कर दिया जाता है, जिससे अनाज चमकदार और सुन्दर दिखने लगता है।
 बढ़ जाता है कार्बोहाइड्रेट और स्टार्च का स्तर
पौधों के बीज फास्फोरस नामक खनिज को प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले यौगिक में संग्रहित करते हैं जिसे फाइटिक एसिड कहा जाता है। यह पाचन तंत्र में कैल्शियम और आयरन जैसे अन्य खनिजों से जुड़ जाता है और फाइटेट्स के रूप में जाना जाने वाला पदार्थ बनाता है।
साभार : अमर जागरण
https://www.amarujala.com/india-news/removing-outer
layer-and-polishing-reduces-nutritional-value-of-coarse grains-2024-12-16
 
कम धूप निकलने से बढ़े डिप्रेशन के मरीज
 सर्दी बढऩे और पूरी तरह से धूप नहीं निकलने से शहर में डिप्रेशन के मरीज भी बढ़ गए हैं। अस्पतालों के मानसिक प्रकोष्ठ विभाग में रोजाना ऐसे कई मरीज इलाज के लिए रहे हैं, जो किसी मानसिक दबाव में नहीं हैं, लेकिन मौसम में बदलाव के कारण सामान्य महसूस नहीं कर रहे। इस स्थिति को मानसिक रोग विशेषज्ञ सीजनल इफेक्टेड डिसऑर्डर कहते हैं।
सर्दी बढऩे के बाद कई दिन से धूप नहीं निकलने और देर तक जागने से भी लोगों को परेशानी हो रही है। गाजियाबाद के मनोरोग विभाग के डॉ. साकेत नाथ तिवारी ने बताया कि सीजनल इफेक्टेड डिसऑर्डर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि रोजाना ऐसे कई मरीज रहे हैं जिनमें थकान, सुस्ती, निराशा, हताशा, कुछ ध्यान रहना इस डिसऑर्डर के लक्षण हैं। सर्दी के बाद ये लक्षण भी घट जाते हैं, लेकिन इसका इलाज करवाने से स्थित गंभीर हो सकती है।
रात में टी.वी.-मोबाइल से करें परहेज
अगर कोई सर्दी में थकान और सुस्ती महसूस कर रहा है तो रोजाना ज्यादा से ज्यादा धूप में बैठें। इसके साथ शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं। उन्होंने बताया कि सुबह व्यायाम करने, पूरी नींद लेने और बनावटी प्रकाश से दूर रहने से भी सुधार होता है। इसके अलावा रात नौ बजे के बाद टीवी, मोबाइल और इंटरनेट का प्रयोग करें।
 

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