30 वर्ष पूर्ण होने पर पतंजलि का संकल्प योग क्रांति के बाद पञ्च क्रांतियों का शंखनाद

30 वर्ष पूर्ण होने पर पतंजलि का संकल्प योग क्रांति के बाद पञ्च क्रांतियों का शंखनाद

आचार्य बालकृष्ण

   पतंजलि जन्म से जाति निर्धारण का पक्षधर नहीं है और  हमारी संस्कृति में जन्म से जाति की व्यवस्था है भी नहीं। हमारे शास्त्रों में लिखा है कि- जन्मना जायते शूद्र: कर्मणा द्विज उच्यते।  अर्थात् जन्म के समय तो हम एक जैसे ही पैदा होते हैं। इसी आधार पर पहले वर्ण व्यवस्था कर्म आधारित थी जो समय के प्रभाव में विकृत होकर जन्म आधारित हो गयी।
  • आगामी पाँच वर्षों में 5 लाख विद्यालयों को  भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोडऩे का लक्ष्य
  • पहले भारतवर्ष में और फिर पूरी दुनियां में नई शिक्षा व्यवस्था का शंखनाद करेंगे और उसका नेतृत्व भारत करेगा
  • बच्चों को केवल शब्दबोध नहीं कराना है, शब्दबोध के साथ विषयबोध, आत्मबोध, सत्यपरक भारतबोध अपने गौरवका बोध भी कराना है
  • अभी तक पतंजलि 1 लाख करोड़ से ज्यादा की चैरिटी कर चुका है 500 करोड़ से ज्यादा दुनियां के लोग योग धर्म सनातन धर्म में श्रद्धा रखते हैं
    पतंजलि योगपीठ का 30वाँ स्थापना दिवस पतंजलि वैलनेस, हरिद्वार स्थित योगभवन सभागार में सम्पन्न हुआ जिसमें देशभर के पतंजलि योगपीठ संगठन के 6000 से अधिक प्रभारीगणों की उपस्थिति में विगत 30 वर्षों की सेवा, संघर्ष साधना से जन सामान्य को परिचित कराया, साथ ही भावी योजनाओं पर व्यापक चर्चा हुई। योग क्रांति की अपार सफलता के बाद अब पतंजलि ने पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज के नेतृत्व में पञ्च क्रांतियों का शंखनाद किया है जिसमें शिक्षा, चिकित्सा, आर्थिक, वैचारिक-सांस्कृतिक रोगों-भोगों-ग्लानि-कुण्ठाओं से आजादी का बड़ा कार्य किया जाएगा। आइए, इन क्रांतियों पर चर्चा करते हैं-
पहली क्रांति : शिक्षा की आजादी
आज 50 से 90 और कहीं-कहीं तो 99 प्रतिशत पढ़े-लिखे बेरोजगार, नशेड़ी, चरित्रहीन निस्तेज बच्चे तैयार हैं जिनका बचपन, यौवन और हमारा कुलवंश खतरे में है। हमने यह तय किया है कि पहले भारतवर्ष में और फिर पूूरी दुनियां में नई शिक्षा व्यवस्था का शंखनाद करेंगे और उसका नेतृत्व भारत करेगा।
 
पतंजलि के शिक्षण संस्थान गढ़ेंगे नए प्रतिमान
पतंजलि गुरुकुलम्, आचार्यकुलम्, पतंजलि विश्वविद्यालय और भारतीय शिक्षा बोर्ड अब नए प्रतिमान गढ़ेंगे। हमारा संकल्प है कि हम आगामी पाँच वर्षों में 5 लाख विद्यालयों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोड़ेंगें। ये शिक्षा की अभिनव क्रांति होगी।
हमें बच्चों को केवल शब्दबोध नहीं कराना है, शब्दबोध के साथ विषयबोध, आत्मबोध, सत्यपरक भारतबोध अपने गौरव का बोध कराना है। हम हिन्दी, अंग्रेजी संस्कृत में पूरे विश्व की जानकारियों का समावेश करेंगे, विद्यार्थियों को पूरे विश्व के साथ अपडेट रखेंगे, लेकिन उसमें भी 80 प्रतिशत कन्टेंट वेद, दर्शन, उपनिषद्, पुराणों का होगा, भारत के गौरव का होगा। उसमें अध्यात्म विद्या होगी, सनातन बोध होगा, भारत बोध होगा। यह मैकाले का एजुकेशन सिस्टम नहीं है। जब भारतीय शिक्षा बोर्ड से पहले एक लाख और बाद में 5 लाख स्कूल एफिलिएटिड हो जाएँगे तो भारत का बचपन और यौवन सुरक्षित हो जाएगा, यही शिक्षा की आजादी का संकल्प है।
दूसरी क्रांति : चिकित्सा की आजादी
रोग हमारा स्वभाव नहीं, योग ही हमारा स्वभाव है। आज पूरी दुनिया में सिंथेटिक दवा, अलग-अलग प्रकार के स्टेरॉयड, पेन किलर इत्यादि खा-खाकर लोगों के शरीर खराब हो रहे हैं। चिकित्सा की आजादी के लिए पतंजलि वैलनेस, योगग्राम, निरामयम, पतंजलि चिकित्सालयों एवं आरोग्य केन्द्रों से लेकर, आधुनिक रिसर्च के माध्यम से ऋषियों की विरासत और विज्ञान को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं।
योग-आयुर्वेद अनुंसधान है रोगों से मुक्ति का मार्ग
हमारा पहला ध्येय है कि सभी योग करें और स्वस्थ हों किन्तु यदि कोई रोगी हो भी गया है तो उसे योग-आयुर्वेद से स्वस्थ बनाएँ। इसके लिए हमारे कुशल वैज्ञानिकों की टीम निरंतर गहन अनुसंधान कर रही है। हमने 5000 से अधिक रिसर्च प्रोटोकॉल्स 500 से अधिक रिसर्च पेपर्स वर्ल्ड क्लास इंटरनेशनल जर्नल्स में पब्लिश करके असाध्य रोगों से मुक्ति का मार्ग दुनिया के सामने रखा है। हमारा संकल्प है कि हम लोगों को रोगी होने से बचायेंगे भी और रोग होने के बाद उन रोगों से योग-आयुर्वेद के माध्यम से लोगों को मुक्ति दिलाएँगे।
तीसरी क्रांति : आर्थिक आजादी
आज पूरी दुनिया में कुछ चंद मुट्ठीभर लोगों ने अपने क्रूर पंजों में पूरे अर्थतंत्र को जकड़ रखा है। हमारा लक्ष्य है समृद्धि सेवा के लिए अर्थ परमार्थ के लिए। अभी तक पतंजलि ने शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान, चरित्र निर्माण, राष्ट्र निर्माण आदि में 1 लाख करोड़ रुपए की चैरिटी की है। 10 हजार से अधिक सेंटर्स के साथ 25 लाख से अधिक प्रशिक्षित योग शिक्षकों तथा 1 करोड़ कार्यकर्ताओं की नि:स्वार्थ सेवा से यह सब राष्ट्र निर्माण चरित्र निर्माण का सेवा कार्य हो रहा है।
चौथी क्रांति : वैचारिक और सांस्कृतिक आजादी
जिस भारत ने पूरी दुनियाँ को सर्वप्रथम संस्कृति विश्वारा का संदेश दिया वो भारत यदि वैचारिक और सांस्कृतिक गुलामी से गुजरे तो ठीक नहीं। आज भारतवर्ष हर बात पर दुनिया के उन दरिद्र देशों पर निर्भर रहता है जिनके पास केवल चंद कागज के टुकड़े, चंद डॉलर्स या पाउण्ड्स हैं। सच्चा असली धन केवल पैसा नहीं है अपितु अच्छा स्वास्थ्य, सुखी घर-परिवार चरित्र, योगधन दैवीय सम्पद ही सच्चा धन है। हमें वैचारिक और सांस्कृतिक गुलामी से भारत को मुक्ति दिलानी है। इसलिए हम कहते हैं कि हमें इस सनातन धर्म को, वेदधर्म को, ऋषिधर्म को, योगधर्म को युगधर्म के रूप में बढ़ाना है।
दुनिया के 500 करोड़ से ज्यादा लोग रखते हैं सनातन धर्म में श्रद्धा
केवल हिन्दू ही नहीं अपितु दुनियां के 500 करोड़ से ज्यादा लोग योग धर्म, सनातन धर्म में श्रद्धा रखते हैं। सब मिलकर साथ चलेंगे तो पूरी दुनिया से रिलिजियस टैरेरिज्म, पॉलिटिकल टैरेरिज्म और ये शिक्षा चिकित्सा के नाम पर चल रहा आतंकवाद खत्म होगा।
पाँचवी क्रांति : नशा, रोग-भोग वासनाओं से आजादी
दुनियां में चारों तरफ नशे का खतरनाक खेल चल रहा है। भारत में नशा, रोग अश्लीलता के दलदल में धंसकर लोगों के जीवन तबाह हो रहे हैं। रोग, नशा, अश्लीलता से आजादी का हमारा संकल्प है। पतंजलि के 30 वर्ष पूर्ण होने पर यही है हमारा संकल्प कि हम पूरे विश्व को योगमय बनायेंगे, चरित्र निर्माण करके आदर्श विश्व नागरिकों का निर्माण करेंगे।
    श्रद्धेय स्वामी जी के अखण्ड प्रचण्ड पुरुषार्थ से पतंजलि का योगदान आज पूरी दुनियाँ को प्रेरणा दे रहा है। पतंजलि में लोगों को स्वास्थ्य देने के लिए अर्थ से परमार्थ का अभियान चलाया जा रहा है। पतंजलि का 100 प्रतिशत प्रॉफिट केवल चैरिटी के लिए है। पतंजलि के लिए भारत एक बाजार नहीं बल्कि परिवार है। पतंजलि में 500 से अधिक विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों की टीम लगातार रिसर्च करके रोगानुसार विविध प्रकार के रस, क्वाथ, वटियाँ, कैप्सूल, व्हीट ग्रास, एलोवेरा जूस, आँवला जूस, नीम रस, गिलोय रस आदि रिसर्च एवं एविडेंस बेस्ड दवाइयाँ पूरी दुनिया को उपलब्ध करा रहे हैं। भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा को आधुनिक विज्ञान का प्रयोग करके जन-जन तक पहुँचाने का कार्य भी सर्वप्रथम पतंजलि ने ही किया है। आज पतंजलि ने दुनिया के 200 देशों में करोड़ों लोगों तक योग को गुफाओं कन्दराओं से निकालकर जन-जन तक पहुँचाया है।
आओ! संकल्प लें कि हमें मैकाले की शिक्षा की गुलामी की बेडिय़ाँ तोडक़र स्वदेशी और सनातन शिक्षा को जीना है। हमें चिकित्सा की आजादी को, सनातन चिकित्सा पद्धति को, सनातन जीवन पद्धति को जीना है। हमें आर्थिक स्वाधीनता को जीना है, आर्थिक आजादी को जीना है। वैचारिक सांस्कृति स्वाधीनता निजता को जीना है। रोगों-भोगों से आजादी, ग्लानि, गुलामी, कुण्ठाओं से आजादी को जीना है।
भारतीय शिक्षा बोर्ड के माध्यम से रखेंगे भारत का सच्चा इतिहास
हम भारतीय शिक्षा बोर्ड के माध्यम से विदेशी आक्रमणकारियों, अकबर, औरंगजेब या अंग्रेजों की झूठी महानता नहीं बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप देश पर मर मिटने वाले क्रांतिकारियों का सच्चा इतिहास पाठ्यक्रम में रखेंगे। उन्हें पढ़ाइए कि अकबर, औरंगजेब या अंग्रेज महान नहीं थे, अपितु छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई, चन्द्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरु भगतसिंह महान थे। ये हमारे आदर्श पुरुष हैं। अभी भी 80 प्रतिशत किताबों में मुगलों ब्रिटिशर्स को महिमामण्डित किया जाता है। हम भारत का सच्चा इतिहास, भारत का शौर्य, वीरता पराक्रम विद्यार्थियों के समक्ष रखेंगे।
स्वदेशी आंदोलन से भारत बनेगा परम वैभवशाली
हमारा संकल्प है कि स्वदेशी का आंदोलन इतना बड़ा खड़ा हो कि आर्थिक लूट, गुलामी और दरिद्रता से भारत निकले तभी भारत परम वैभवशाली बनेगा। बीपी, शुगर, थायरॉइड, अस्थमा, आर्थराइटिस, स्ट्रैस, डिप्रेशन, नींद आदि बीमारियों की गोलियाँ छुड़वाकर हम देश के प्रतिवर्ष 100 से 200 लाख करोड़ रुपए बचाते हैं।

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