अश्वगंधा आधारित ‘आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्राकृतिक समाधान’विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

अश्वगंधा आधारित ‘आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्राकृतिक समाधान’विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

   हरिद्वार, 1 जनवरी। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली और राज्य औषधीय पादप बोर्ड, देहरादून द्वारा प्रायोजित अश्वगंधा जागरूकता अभियान का आयोजन पतंजलि अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार द्वारा किया गया। यह कार्यक्रम पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज और हॉस्पिटल, हरिद्वार के सहयोग से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सभागार में आयोजित किया गया।

iStock-1347520753-980x551

संगोष्ठी में पतंजलि योगपीठ के संस्थापक अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने अश्वगंधा के औषधीय महत्व के विषय में बताया। उन्होंने अश्वगंधा की कृषि तकनीक और मूल्य संवर्धन पर विशेष चर्चा की। स्वामी जी ने बताया कि पतंजलि अनुसंधान संस्थान के तत्वाधान ने प्राचीन ऋषियों का अनुसरण करते हुए अश्वगंधा पर अनेकों शोध कर गुणकारी औषधियों का निर्माण किया है, जिनका लाभ आज रोगी मानवता को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पतंजलि के अनेकों अश्वगंधा आधारित शोधपत्र विश्वविख्यात अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च जर्नल बॉयोमॉलिक्यूल्स, जर्नल ऑफ एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी, प्लोस नेग्लेक्टिड ट्रोपिकल डिजीज, प्लांटा मेडिका, फाइटोमेडिसिन प्लस तथा फार्माकोलॉजी ऑफ मेडिकल प्लांट्स में प्रमुखता से प्रकाशित किए गए हैं।

National-Seminar-on-Ashwaga

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि, प्रो. (डॉ.) महेश कुमार दाधिच (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, नई दिल्ली) ने संगोष्ठी के उद्देश्यों और अश्वगंधा की खेती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। डॉ. निरपेन्द्र चौहान (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तराखण्ड राज्य औषधीय पादप बोर्ड) ने उत्तराखण्ड में विभिन्न सरकारी परियोजनाओं पर चर्चा की।
डॉ. वेद प्रिया आर्य (एचओडी, पीएचआरडी) ने संगोष्ठी के विषय में विस्तृत जानकारी दी। डॉ. अनुराग वाष्र्णेय (उपाध्यक्ष, पतंजलि अनुसंधान संस्थान) ने स्वागत भाषण में अतिथियों का परिचय दिया। कार्यक्रम में माननीय अतिथियों की उपस्थिति मेंअश्वगंधापुस्तिका का विमोचन किया गया।
तकनीकी सत्र में, डॉ. नरेंद्र बिष्ट, डॉ. प्रेम प्रकाश यादव (वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, औषधीय और प्रक्रिया रसायन विभाग, केंद्रीय औषध अनुसंधान संस्थान, लखनऊ), डॉ. त्रिप्ता झांग (प्रधान वैज्ञानिक, केंद्रीय औषधीय और सुगंधित पौधे संस्थान), डॉ. सुमित पुरोहित (वैज्ञानिक प्रभारी, क्षेत्रीय केंद्र पटवाडंगर, नैनीताल उत्तराखण्ड जैव प्रौद्योगिकी परिषद) आदि ने अश्वगंधा की कृषि तकनीकों तथा इसकी खेती के लिए जागरूकता बढ़ाने पर चर्चा की। डॉ. राम शंकर पाठक (वैज्ञानिक-, पीएचआरडी, पतंजलि अनुसंधान संस्थान) ने पतंजलि में अश्वगंधा परियोजना के बारे में बताया। डॉ. अनुपम श्रीवास्तव (एमेरिटस वैज्ञानिक और सीकेओ, पतंजलि हर्बल रिसर्च डिवीजन) ने समापन टिप्पणी दी। साथ ही एक समानांतर पोस्टर सत्र भी आयोजित किया गया जिसमें विद्वानों द्वारा प्रस्तुत पोस्टरों का मूल्यांकन माननीय न्यायाधीशों द्वारा किया गया।

Sammelan-

लगभग 200 किसानों और 400 से अधिक विद्वानों ने इस संगोष्ठी के लिए पंजीकरण कराया। प्रतिभागियों को अश्वगंधा पुस्तिका, अश्वगंधा बीजों वाला एक पर्यावरण अनुकूल पेन और संगोष्ठी किट वितरित की गई। इस अवसर पर अश्वगंधा के पौधों का नि:शुल्क वितरण भी किया गया। धरती का डॉक्टर (मिट्टी परीक्षण किट), जैविक कीटनाशक, डीएपी और पतंजलि जैविक उर्वरक स्टॉल भी संगोष्ठी के आकर्षण का केंद्र रहे। 

Related Posts

Advertisment

Latest News

Eternal wisdom Eternal wisdom
          With divine inspiration, I want to draw your attention towards 11 important facts. I am sure that you will
Patanjali's Yoga, Ayurveda and Swadeshi Movement
Address by Hon'ble Union Education Minister Shri Dharmendra Pradhan at the Annual function of Patanjali University "Abhyudaya 2024-25"
Realistic view of Life
Anti-aging, the modern science of staying young forever
Fevogrit
Who has the right over the fruits of actions?
Nasal disease Sinusitis
Patanjali Nutrela Collagenprash Skin Super Food for Taste and Beauty
Changing face of treatment of women in Europe