सेहत एवं पोषण के लिए शुद्ध एवं प्राकृतिक मिठास युक्त पतंजलि शहद
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डॉ. रश्मि अतुल जोशी
साइंटिस्ट-सी, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन, हरिद्वार
आदिकाल से ही विश्व की सभी सभ्यताओं में शहद (हनी, मधु) का प्रयोग खाद्य पदार्थों में मिठास एवं चिकित्सा के लिए किया गया है। इसका प्रमाण प्राचीन शिलालेखों एवं प्राचीन ग्रंथों जैसे वेद, कुरान, बाइबिल आदि में मिलता है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के अनुसार मनुष्य स्वस्थ तब होता है जब उसके शरीर के तीन मूलभूत तत्वों वात, पित्त और कफ के बीच संतुलन होता है। प्रत्येक व्यक्ति में इन तीनों का अनोखा संयोजन होता है, शहद इस त्रिदोष को उसकी संतुलन अवस्था में पुनस्र्थापित करने में सहायक होता है। आयुर्वेद में शहद का उपयोग पोषण और उपचार के लिए आंतरिक और बाह्य रूप में किया जाता है। इसका उपयोग अनुपान (वो पदार्थ जो दवा या खाने के बाद लिया जाता है जिसके द्वारा पाचन क्रिया में सहायता मिलती है) के रूप में भी किया जाता है। भारत सरकार के द्वारा 2020 में 'Sweet Revolution' की नीति को लागू किया गया जो कि शहद के उत्पादन एवं beekeepers को बढ़ावा देती है। वैश्विक स्तर पर शहद के क्षेत्र में पतंजलि एक अग्रणी ब्रांड है जो गुणवत्ता एवं खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों में खरा उतरता है। वर्तमान में आज शहद को हम एंटीसेप्टिक, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ट्यूमर, प्रीबायोटिक, प्रोबायोटिक, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-कैंसर, और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी एजेंट के रूप में समझते है एवं यह विभिन्न शोधों के द्वारा इनको प्रमाणित भी किया जा रहा है। पूरे विश्व में लगभग 300 विभिन्न प्रकार के शहद मधुमक्खियों के द्वारा बनाए जाते है। यह सब प्रकार के शहद, अपने स्वाद, रंग, विभिन्न रासायनिक घटक, भौतिक रासायनिक गुण (physicochemical properties), स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले (health promoting) गुणों में अलग-अलग पाए गए हैं। हालांकि कुछ प्रमुख रासायनिक घटक सभी प्रकार के शहद में समान भी पाए जाते हैं, जिसके कारण शहद का पूरे विश्व में विभिन्न चिकित्सीय पद्धतियों में उपयोग किया जाता है। अपने चिकित्सीय गुणों के लिए आज हम शहद को functional food के रूप में भी जानते हैं। functional food की सारणी में वो पदार्थ आते हैं जो कि स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं एवं पोषण से भी भरपूर होते हैं। कुछ-कुछ मायनो में ये पदार्थ स्वाभाविक रूप में मिलते हैं जैसे- शहद। इसके अलावा यह स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए पूरक पदार्थ होते हैं जिसमें अन्य अतिरिक्त सामग्रियां शामिल होती हैं जैसे- फोर्टिफाइड आटा जिसमें गेंहू के साथ पतंजलि द्वारा विभिन्न मिनरल्स, आयरन का समावेश किया गया है। नमक में भी आयरन की मात्रा डाली गयी है जिससे एनीमिया के प्रभाव से बचा जा सके।
शहद क्या है?
सामान्य भाषा में इसे समझे तो मधुमक्खियाँ (Apis species) पराग/ पुष्प रसों को ग्रहण कर अपने शरीर में संचित कर विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा शहद को बनाकर अपने छत्ते में रखती हैं जो कि समयानुसार शहद निकालने में प्रयोग होता है। अतैव जितने प्रकार के पुष्प रस ग्रहण किए जाते हैं वैश्विक स्तर पर उतने प्रकार का शहद उपलब्ध हो जाता है। यहाँ पर हम शहद को blossom honey (unifloral एवं multifloral) के रूप में पहचानते हैं। अगर शहद में उपलब्ध एक ही प्रकार के परागकण (>45%) होते हैं तो उसे unifloral कहा जाता है। भारत में प्रमुख रूप से सरसों (mustard), लीची (litchi), बबूल (Acacia), सूरजमुखी (sunflower), eucalyptus इत्यादि unifloral honey पाए जाते हैं। हालांकि ज्यादातर मिश्रित परागकणों वाला शहद ही प्रमुख रूप से पाया जाता है इसमें मुख्यत: multiflora Himalayan honey wild multiflora honey एवं Sundarbans multiflora honey है। इस प्रकार के शहद में विभिन्न प्रकार के परागकणों के कारण इनका स्वाद, रंग इत्यादि में फर्क देखने को मिलता है जो कि किसी भी उत्पादक के लिए उसकी गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए कठिन चुनौती है। शहद की भौतिक विशेषता, रासायनिक संरचना, एवं औषधीय गुण मुख्य रूप से मधुमक्खी के द्वारा लिए गए पुष्परस, विभिन्न भौगोलिक स्थान, जलवायु परिस्थिति इत्यादि, विभिन्न निष्कर्षण के तरीके, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और संरक्षण तकनीकों के अनुसार बदल जाता है इन्ही मापदंडों के अनुसार शहद की गुणवत्ता के मानदंड नियंत्रित होते हैं। व्यावसायिक या स्थानीय स्तर पर एकत्र किए गए शहद को आगे प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग किया जा सकता है एवं उसका तदनुसार वर्गीकरण भी किया जाता है इसमें प्रमुख – comb honey, crystallized honey, pasteurized honey, filtered honey, ultrasonicated honey, creamed honey, dry honey, bakers honey इत्यादि हैं जिनका उपयोग कई प्रकार के खाद्य पदार्थ बनाने के लिए पूरे विश्व में किया जाता है। Blossom honey के अलावा एक अन्य प्रकार का शहद भी प्राप्त होता है जिसे हम honeydew honey के नाम से भी जानते हैं। यह पुष्प शहद नहीं है परन्तु ये दो प्रकार के कीड़ों का उत्पाद है। ये कीड़े जैसे- द्रुमयूका, माहू (aphid), विभिन्न प्रकार के अन्य कीड़े (bugs, insects) पेड़ों की छाल और पत्तियों पर पाए जाने वाले मीठे तरल का उपयोग करके एक चिपचिपा तरल पदार्थ पैदा करते हैं जिसे हनीड्यू कहा जाता है और इसे दूर-दराज के जंगलों में रहने वाली मधुमक्खियों द्वारा एकत्र किया जाता है और honeydew honey के नाम से जाना जाता है। भारत में ये प्रमुखता स्वच्छ, प्राकृतिक एवं प्रदूषण से अप्रभावित कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रों से प्राप्त किया जाता हैं।



