संस्था समाचार
स्वामी रामदेव जी जो काम कर रहें हैं आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करना है यह भी पंचप्रण के अंदर आता है और स्वामी जी जब आयुर्वेद की दवाओं को और उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रस्तुत करके विदेशी कंपनियों को चुनौती देते हैं तो यह भी आत्मगौरव की अनुभूति कराने वाला क्षण हम सबके सामने होता है। कृषि में स्वदेशी तकनीक उपयोग हो और अब तो आपने देखा होगा प्रधानमंत्री मोदी जी ने प्राकृतिक खेती को गौ आधारित खेती को पूरे देश के अंदर युद्धस्तर पर आगे बढ़ाने के लिए भी एक नए कार्यक्रम की शुरुआत की है।
- माननीय योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री (यूपी)
बाबा रामदेव जी ने आचार्य बालकृष्ण जी की कल्पना से यह निर्मित आचार्यकुलम् भारतीय परंपरा की अनोखी प्रयोगशाला है। भारत में नई शिक्षा नीति को लागू किया गया है, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तीन बिंदु प्रमुख हैं- व्यक्ति को जड़ से जोडऩा, व्यक्ति को आधुनिक बनाना, जड़ से जुड़ेंगे तो लम्बी छलांग ले पाएंगे नहीं तो लडख़ड़ा कर गिर जाएंगे। शिक्षा नीति ने यही कहा है, जड़ से जोडऩा दूरगामी देखना 21वीं सदी के बारे में देखना। तीसरी, व्यक्ति के अंदर जो सर्वांगीण विकास की कल्पना है, व्यक्ति स्वयं संपन्न है, व्यक्ति आत्मनिर्भर होगा, व्यक्ति परिप्रकाशित होगा, तब जाकर वह अपने सर्वश्रेष्ठ रिटर्न कर पाएगा, उसके लिए भाषा एक बहुत बड़ा माध्यम है।
अनेक विषयों के अन्दर एक प्रमुख विषय यह कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति मातृभाषा पर जोर देगी, हमें बहुत प्रसन्नता हुई जब इस इंस्टीट्यूशन में हमें पता चला देश के सारे प्रातों के लोग हैं। समय-समय पर महापुरुषों ने यह जिम्मेदारी ली है। आज देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति आ गई है 10 साल का एक लेबोरेटरी यहाँ बन चुकी है। अभी नई और लंबी छलांग लगाने की आवश्यकता है, इसीलिए भारत सरकार ने, भारतीय शिक्षा बोर्ड की अनुमति दी है और बाबा जी पर, आचार्य जी पर, एन.पी सिंह जी पर भरोसा किया है।
भारत की नई पीढ़ी को हम मौके से वंचित नहीं कर सकते हैं, मौका देना ही पड़ेगा और हम इस गलतफहमी में नहीं हैं कि मौका देने का काम केवल सरकार का है, हम नीति सुधार करके जो अच्छे काम कर रहे हैं उन्हीं को स्वतंत्रता दे रहे हैं, उन्हीं को ऑटोनॉमी दे रहे हैं आप भी इस प्रकार का सृजन कर सकते हैं। तो यह सफल प्रयोग है।
आज विश्व की जो स्थिति है, देश की जो स्थिति है, मैं मानता हूँ उसी में जो प्रयोग पतंजलि परिवार समूह ने किया, एक सामाग्रिक रूप में जब तक नई पीढ़ी तैयार नहीं होगी ठीक से तब तक देश भी सुरक्षित नहीं हो सकता है।
यह भारत है, भारत इसलिए विश्व गुरु होना चाहिए, भारत इसलिए ताकतवर होना चाहिए, भारत इसलिए सम्पन्न होना चाहिए, दूसरों की चिंता करने के लिए, इसी का नाम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ पूरे विश्व के मानव मेरा परिवार है, ऐसा विश्वास रखने वाली भारतीय परंपरा को हम आगे ले जाएं, यह आचार्यकुलम उसका सफल प्रयोग है।
- माननीय धर्मेंद्र प्रधान (शिक्षा मंत्री- भारत सरकार)
आप सब, हम सब लोगों को आशीर्वाद देने के लिए एक योग पुरुष, एक योग गुरु जिन्होनें महर्षि दयानंद की अंतिम इच्छा के अनुसार देश, देशान्तर में योग का, वेद का, आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार किया। जो दृढ़ संकल्प किया है। ऐसे हमारे पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज भी पधारे हैं उनका भी मैं अपनी तरफ से, आप लोगों की तरफ से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ ।


