पतंजलि ने पूरे विश्व में बढ़ाया भारत व ऋषि परम्परा का गौरव

पतंजलि ने पूरे विश्व में बढ़ाया भारत व ऋषि परम्परा का गौरव

कपिल कुमार,

योग संदेश विभाग, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार

विश्वव्यापी महामारी कोरोना की बहुप्रतिक्षित दवा बनाने का चुनौतिपूर्ण कार्य सर्वप्रथम पतंजलि ने पूर्ण किया। इस अवसर पर पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट के सैकड़ों वैज्ञानिकों ने अहर्निश अथक पुरुषार्थ करके पहले क्लिनिकल केस स्टडी तथा बाद में कंट्रोल्ड क्लिनिकल ट्रायल करके, औषधि अनुसंधान (DrugDiscovery) के सभी प्रोटोकॉल्स का अनुपालन करते हुए कोरोना के सम्पूर्ण मैनेजमेंट के लिए सफल औषधिकोरोनिलतथाश्वासारि वटीकी खोज की है। उन्होंने कहा कि जिस कोरोना की औषधि पूरा विश्व खोज रहा है, वह हमारे आसपास मौजूद आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में अकूत मात्र में उपलब्ध है। अन्तर केवल इसके ज्ञान का है। स्वामी जी ने कहा कि यह औषधि कोरोना संक्रमण से बचाव तथा इसके प्रबंधन दोनों में लाभकारी है। उन्होंने कहा कि हमने दिव्य श्वासारि वटी, पतंजलि गिलोय घनवटी, पतंजलि तुलसी घनवटी एवं पतंजलि अश्वगंधा कैप्सूल की संयुक्त एवं उचित मात्राओं तथा दिव्य अणु तैल के संयुक्त प्रयोग से सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए है। इन्हीं गुणकारी औषधियों के घनसत्व के संमिश्रण से कोरोना महामारी की औषधिकोरोनिलतथाश्वासारि वटीतैयार की गई है। स्वामी जी ने बताया कि हमने इस दवा का रेंडमाइज्ड प्लेसिबो कंट्रोल्ड क्लिनिकल ट्रायल 100 कोरोना संक्रमित रोगियों पर किया जिसमें 3 दिन में 69 प्रतिशत रोगी कोरोना नेगेटिव पाए गए जबकि 7 दिन में ही 100 प्रतिशत रोगी नेगेटिव हो गए। तथा एक भी रोगी की मृत्यु नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह कोरोना के प्रबंधन के लिए विश्व में आयुर्वेदिक औषधियों का पहला सफल क्लिनिकल ट्रायल है। 100 प्रतिशत रिकवरी तथा 0 प्रतिशत मृत्यु दर प्रमाणित करती है कि कोरोना का प्रबंधन आयुर्वेद में ही संभव है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि कोरोना से डरें अपितु कुछ सावधानी बरतते हुए इसका डटकर मुकाबला करें। कोरोनिल, श्वासारि वटी तथा अणु तैल शीघ्र ही देश के प्रत्येक जिले, तहसील ब्लॉक में उपलब्ध होंगी।
इस अवसर पर सदी के सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि सम्पूर्ण देशवासियों का भरोसा तथा पूज्य स्वामी जी का आशीर्वाद है कि पतंजलि नित नए इतिहास गढ़ रहा है। आज एक ऐतिहासिक दिन है जब ऋषियों के प्राचीन ज्ञान को विज्ञान-सम्मत बनाने में हमनें सफलता हासिल की है। क्योंकि जब तक औषधि की प्रामाणिकता सर्वमान्य नहीं होती तब तक उसका आंकलन सही प्रकार से नहीं किया जाता। आचार्य जी ने बताया कि इन औषधियों में, अश्वगंधा में निहित शक्तिशाली कम्पाउण्ड विथेनॉन, गिलोय के मुख्य कंपोनेंट टिनोकॉर्डिसाइड, तुलसी में पाए जाने वाले स्कूटेलेरिन, तथा दिव्य श्वासारि वटी की अत्यंत प्रभावशाली जड़ी-बूटियों जैसे- काकड़ाशृंगी (Pistacia integerrima), रुदंती (Cressa cretica), अकरकरा (Anacyclus pyrethrum) के साथ-साथ सैकड़ों फाइटोकैमिकल्स या फाइटो मेटाबोलाइट्स तथा अनेक प्रभावशाली खनिजों का वैज्ञानिक सम्मिश्रण है, जो कोरोना के लाक्षणिक (Symptomatic) एवं संस्थानिक (Systemic) चिकित्सा से लेकर रोगी की व्याधिक्षमत्व (Immunity) बढ़ाने में प्रामाणिक वैज्ञानिक रूप से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य की रूपरेखा को समझाते हुए बताया कि इन औषधियों की साइंटिफिक रिसर्च के सन्दर्भ में इन्टरनेशनल रिसर्च जर्नल्स में रिसर्च पेपर के पब्लिकेशन की प्रक्रिया अभी चल रही है।

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आचार्य जी ने बताया कि इन औषधियों की क्लिनिकल केस स्टडी दिल्ली, अहमदाबाद और मेरठ आदि से लेकर देश के विभिन्न शहरों में की गई तथा रेंडमाइज्ड प्लेसिबो कंट्रोल्ड क्लिनिकल ट्रायल (RCT) को National Institute of Medical Sciences & Research, NIMS University, Rajasthan, Jaipur के नेतृत्व में किया गया। जिसके लिए इंस्टीट्यूश्नल एथिक्स कमेटी के अप्रुवल से लेकर CTRI (Clinical Trial Registry of India) के रजिस्ट्रेशन आदि तथा क्लिनिकल कन्ट्रोल ट्रायल की सभी अर्हताएं पूर्ण की गईं।
 
आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता देखकर ड्रग माफियाओं में मची खलबली
कोरोना का भय दिखाकर दवा कम्पनियों की मंशा अपार पैसा कमाने की थी। ड्रग माफियाओं ने तो अरबों की योजनाएँ भी बना ली थी। किन्तु एक संन्यासी तथा एक आचार्य की जोड़ी ने उनके मनसूबों पर पानी फेर दिया था। ऐसे में उनमें खलबली मचना स्वाभाविक ही था। किन्तु पतंजलि ने भी पूरी तरह कमर कस रखी थी, पूरे वैज्ञानिक तथ्यों के साथ हमने कोरोनिल श्वासारि को आम नागरिकों के हितार्थ प्रस्तुत किया। पूज्य स्वामी जी महाराज ने कहा कि हमने आयुष मंत्रालय, भारत सरकार को अपने क्लीनिकल कंट्रोल्ड ट्रायल की सभी डाक्यूमेंट्स उपलब्ध करा दिए हैं, तथा मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया है कि पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ने कोविड-19 के मैनेजमेंट के लिए सभी आवश्यक कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित की है। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय तथा पतंजलि में अब इस विषय पर कोई भी असहमति नहीं है। स्वामी जी महाराज ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आयुष मंत्रालय के निर्देशानुसार, दिव्य कोरोनिल टैबलेट, दिव्य श्वासारि वटी एवं दिव्य अणु तेल, जैसा कि स्टेट लाइसेंस अथॉरिटी, आयुर्वेद-यूनानी सर्विसेज, उत्तराखंड सरकार से निर्माण एवं वितरण करने की जो पतंजलि को अनुमति मिली हुई है, उसके अनुरूप अब हम इसे सुचारु रुप से संपूर्ण भारत में निष्पादित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक ड्रग्स लाइसेंस क्लीनिकल कन्ट्रोल ट्रायल की दोनों धारायें बिलकुल अलग हैं। आयुर्वेद की सभी दवाओं के लाइसेंस की प्रक्रिया उनके परम्परागत गुणों के आधार पर ही है। इसके उपरान्त ही उनके साइन्टिफिक ट्रायल एवं वैलीडेशन को फॉलो किया जाता है। पतंजलि एवं दिव्य फार्मेसी ने भी दिव्य कोरोनिल टैबलेट एवं दिव्य श्वासारि वटी का औषधि लाइसेंस परम्परागत औषधि उपयोग के आधार पर ही लिया है और तदोपरान्त मॉडर्न रिसर्च बेस्ड क्लीनिकल ट्रायल को इससे जोड़ा गया है।
कोविड-19 पॉजिटिव रोगियों पर, पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट, हरिद्वार एवं NIMS यूनिवर्सिटी, जयपुर ने संयुक्त रूप से रेंडमाइज्ड प्लेसिबो-कंट्रोल डबल-ब्लाइंड क्लिनिकल ट्रायल किया, ये ट्रायल इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी (IEC) तथा क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ  इण्डिया (CTRI) से समुचित मान्यता प्राप्त था। और इसके सकारात्मक परिणाम हमने 23 जून, 2020 को देश के सामने प्रस्तुत (डिस्क्लोज) किये। इसमें 15 से 65 आयु वर्ग के (स्त्री-पुरुष सम्मिलित) 95 रोगियों (ऐसिम्प्टोमैटिक, माइल्ड टू मोडरेट) ने स्वेच्छा से भाग लिया, इसमें से 45 रोगियों को पतंजलि की औषधियाँ दी गई एवं शेष 50 रोगियों को प्लेसिबो दिया गया। पतंजलि की औषधियों वाले ग्रुप के कोविड-19 रोगी, 3 दिन में 67% तथा 7 दिन में सभी 45 रोगी, अर्थात 100% रोगी, कोविड-19 नेगेटिव पाए गए। साथ ही C-Reactive Protein (CRP), Interleukin -6 (IL-6) एवं  TNF-alpha साइटोकाइन्स का ब्लॅड सीरम लेवल, इन रोगियों के ग्रुप में प्लेसिबो ग्रुप के मुकाबले न्यूनतम स्तर पर पाया गया। यह आयुर्वेदिक औषधियों का कोविड-19 पॉजिटिव रोगियों पर किया गया पहला सफल क्लीनिकल कन्ट्रोल ट्रायल था। हम अब इन औषधियों के मल्टीसेन्ट्रिक क्लीनिकल ट्रायल की दिशा में अग्रसर हैं। आयुर्वेद को एविडेन्स बेस्ट मेडिसनल सिस्टम के तौर पर स्थापित करने के लिए, हम पतंजलि में व्यापक अनुसंधानात्मक पुरुषार्थ कर रहे हैं। हम उच्च रक्तचाप, हृदयरोग, मधुमेह, अर्थराइटिस, लीवर, स्किन डिजीज, डेंगू एवं चिकनगुनिया जैसी वायरल डिजीज, मेधाशक्ति के बल के लिए, एनिमल प्रि-क्लीनिकल ट्रायल का कार्य पूरा कर चुके हैं और क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल के कार्य को भी निष्पादित कर रहे हैं। यह आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए बहुत बड़े गौरव की बात है।
पतंजलि के लगभग 500 से अधिक सीनियर सांईटिस्ट पतंजलि रिसर्च सेन्टर योग एवं आयुर्वेद के विकास के  अनुसंधाान में संलग्न हैं। पतंजलि ने इस सेवा में 10 हजार करोड़ से ज्यादा की सेवा राष्ट्र के नाम समर्पित की है।
हम भारत की सनातन वेद परम्परा और ऋषि परम्परा के प्रतिनिधि हैं। हमने कभी झूठा प्रोपेगन्डा किया है, करेंगे। ये हम करोड़ों लोगों को विश्वास दिलाना चाहते हैं। कुछ दवा माफिया और स्वदेशी भारतीयता विरोधी ताकतें चाहें लाख हमें बदनाम करने की नाकाम कोशिश करें, कितने ही हम पर पत्थर फेंके, हम दृढ़ संकल्पित हैं कि इन्हीं पत्थरों की सीढिय़ां बनाकर अपनी मंजिलें पायेंगे।
एक तरफ हम भारत को विश्व गुरु या विश्व की महाशक्ति बनाने का सपना देखते हैं, लोकल को ग्लोबल तथा उसके लिए वोकल होकर, आत्मनिर्भर भारत बनाना चाहते हैं। लेकिन इन्हीं बड़े उद्देश्यों के लिए जब पतंजलि, स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण पतंजलि के वरिष्ठ वैज्ञानिक अहर्निश नि:स्वार्थ पुरुषार्थ कर रहे हैं, तो बेवजह कुछ लोग गाली देने में लगे हैं, तो कुछ एफ.आई.आर. करके जेल भिजवाने के झूठे मंसूबे पाल रहे हैं, तो कुछ अज्ञान, आग्रह, ईर्ष्या के शिकार द्वेष-अग्नि में जल रहे हैं। यह एक सभ्य देश के लिए अशोभनीय बात है। हम कुछ तो हमदर्दी रखें, उन लोगों के लिए जो कोरोना एवं अन्य घातक बीमारियों से बेमौत मर रहे हैं। बिना किसी आलोचना की परवाह किए पतंजलि अपने संपूर्ण सामर्थ्य से सबकी सदा सेवा करता रहा है तथा करता रहेगा। सत्यमेव जयते, सेवाधर्म, मानवधर्म एवं राष्ट्रधर्म ही हमारा परम धर्म है।
 
 

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