शरीर व मन का पूर्ण रूपांतरण निरंतर योग से है संभव: योगऋषि स्वामी रामदेव
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कोरोना महामारी के समय 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन हेतु पतंजलि ने पहले से कमर कस ली थी। योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने गँगा किनारे वीआइपी घाट पर सरकार द्वारा निर्धारित योग प्रोटोकॉल की रिहर्सल की। इस अवसर पर स्वामी जी ने आमजन से योग को अपने जीवन में आत्मसात करने की अपील की। |
पतंजलि योगपीठ-2 स्थित योगभवन ऑडिटोरियम में छठे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी महाराज ने उपस्थित योग साधक भाई-बहनों, वैदिक गुरुकुलम् के ब्रह्मचारी भाई व साध्वी बहनों, पतंजलि गुरुकुलम् के बाल ब्रह्म्मचारियों तथा पतंजलि योगपीठ के आसपास के गाँव से पधारे सभी वर्गों के लोगों को योग की क्रियाओं से लाभान्वित किया।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी महाराज ने निर्धारित योग प्रोटोकॉल के तहत 21 आसन, 5 प्राणायाम और 5 सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास कराया।

इसी क्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित भव्य योग सप्ताह का समापन भी छठे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम के साथ संम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगऋषि स्वामी रामदेव जी एवं यशस्वी कुलपति श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी के सान्निध्य में लाखों करोड़ों योग साधकों ने विभिन्न चौनलों व फेसबुक लाइव से जुडक़र इस महापर्व को बड़े हर्ष के साथ मनाया।

‘घर पर रहकर परिवार संग योग’विषय को ध्यान में रख, सामाजिक दूरी एवं स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करते हुए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित योग प्रोटोकॉल के साथ साथ देशवासियों ने परम पूज्य श्री स्वामीजी महाराज के पावन निर्देशन में अन्य उच्चस्तरीय योग तथा भारतीय व्यायाम का भी अभ्यास किया। सकारात्मकता तथा धैर्य का संदेश देते हुए उन्होंने स्वदेशी व स्वाभिमान का भी मंत्र दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपने ओजस्वी व प्रेरणादायी उद्बोधन से योग प्रेमियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि निरंतर योग के अभ्यास से शरीर-मन का रूपांतरण संभव है।

इस महापर्व पर संबोधित करते हुए आयुर्वेद मनीषी श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि योग, आयुर्वेद की विधा मानव मात्र के कल्याण के लिए निर्मित एक वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है। यह सम्प्रदाय, जाति आदि के भेदभाव से परे है। स्वदेशी से स्वावलंबन की अवधारणा को समझाते हुए उन्होंने कहा कि पूज्य स्वामीजी के नेतृत्व में पतंजलि योग व आयुर्वेद के क्षेत्र में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। अन्त में पूज्य गुरुदेव आचार्य प्रद्युम्न जी महाराज का भी पावन आर्शीवाद प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर विवि के प्रति कुलपति डॉ. महावीर अग्रवाल जी, विवि की कुलानुशासिका पूज्या साध्वी डॉ. देवप्रिया जी, सहायक कुलानुशासक एवं आयोजन सचिव स्वामी परमार्थदेव जी, भारत स्वाभिमान के केंद्रीय प्रभारी डॉ जयदीप जी, श्री राकेश जी, डॉ. पुनिया जी, संस्थान के सेवाभावी ब्रह्मचारी व सन्यासी भाई बहनों सहित वरिष्ठ अधिकारी जुड़े।
कोरोना काल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को सफल बनाने के लिए पतंजलि योगपीठ ने पहले से की थी तैयारी
कोरोना महामारी के समय २1 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन हेतु पतंजलि ने पहले से कमर कस ली थी। योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने गँगा किनारे वीआइपी घाट पर सरकार द्वारा निर्धारित योग प्रोटोकॉल की रिहर्सल की। इस अवसर पर स्वामी जी ने आमजन से योग को अपने जीवन में आत्मसात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि योगी कभी रोगी नहीं होता, इसलिए पूरी दुनिया को इसे अपनाना चाहिए।
स्वामी जी महाराज ने भारत के साथ पूरे विश्व के लोगों से 21 जून को 21 आसन, 5 प्राणायाम और 5 सूक्ष्म व्यायाम कर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को सफल बनाने की अपील की।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि चीन, नेपाल को उकसाकर भारत और नेपाल के बीच तनाव पैदा करना चाहता है लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं होगा, नेपाल और भारत का धर्म संस्कृति का रिश्ता है राम और सीता के समय से दोनों एक दूसरे के साथ जुड़े हुए है।
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इस अवसर पर स्वामी जी महाराज ने वर्तमान परिपेक्ष्य में सबसे बड़ी विश्वव्यापी समस्या कोरोना का मैनेजमेंट आयुर्वेद के माध्यम से करने का दावा किया और कहा कि पतंजलि ने पहले कोरोना पर क्लिनिकल कण्ट्रोल स्टडी की और अब क्लिनिकल कंट्रोल ट्रायल भी पूरा हो चुका है। आयुर्वेद को औषधि का दर्जा दिलाने हेतु पतंजलि की ये बड़ी उपलब्धि है।
चीन गैर जिम्मेदार एवं क्रूर राष्ट्र
पूज्य स्वामी जी महाराज ने चीन को एक गैर जिम्मेदार राष्ट्र की संज्ञा देते हुए क्रूर साम्राज्यवादी देश बताया और कहा कि हिंदी चीनी भाई भाई के सन्देश को भुलाकर पुराने नियम कानून को भी भुला देना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी जी चीन के अंदर घुसकर चीन सबक सीखना चाहिए और चाइना का बहिष्कार कर उसको आर्थिक मोर्चे पर भी प्रचार करना चाहिए।
स्वदेशी अपनाने का किया आह्वान
पूज्य योगऋषि स्वामी जी महाराज ने समस्त देशवासियों को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मल्टीनेशंस कंपनियों और चाइनीज प्रोडक्ट का बहिष्कार कर भारत को आत्मनिर्भर बनाने की अपील की। स्वामी जी ने योग को एक आंदोलन बताया।
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01 Mar 2025 17:58:05
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