रोम-रोम गुरु के द्वारे

स्वामी हनुमान देव, वैदिक गुरुकुलम्

रोम-रोम ओ३म् बोले गुरु तेरे द्वारे

रोम-रोम ओ३म् बोले गुरु तेरे द्वारे

अपना ये जीवन गुरुवर तेरे ही सहारे

रोम-रोम ओ३म् बोले गुरु तेरे द्वारे

चरणों की तेरी ऐसी छाँव मिली हमें

तेरी करुणा की गुरुवर नाव ये मिली है हमें

डर नहीं कोई शंका जीवन की राहों में

समाधान रूपी वाणी की छाँव है मिली हमें

प्रश्नों के तेरे द्वारे रणाधान सारे

रोम-रोम ओ३म् बोले ...

बड़े भाग्य से हमको ये गुरुदर मिला है

ईश्वर कृपा का ही ये इक सिलसिला है

चरणों की तेरे हम धूली मात्र बन जाएँ

दूजी तमन्ना कोई शिकवा गिला है

चरणों में तेरे पाए तीरथ धाम सारे

रोम-रोम ओ३म् बोले ...

भक्ति कर्म योग की अद्भुत कला सिखाई है

समता समग्रता की राहें दिखाई हैं

केवल से कुछ होवे जीवन समर मे

पुरुषार्थ संकल्प की बातें सिखाई हैं

आचरण में तेरे गुरुवर वेद शास्त्र सारे

रोम-रोम ओ३म् बोले ...

 

तेरे प्रेम का गुरुवर पार हम पाएँ

पाकर के सम्मुख तुझको आँखें ये भर आएँ

तू ही माँ-पिता रे बन्धु तू ही सखा है

श्वास-श्वास अब तो गुरुवर तेरे गीत गाएँ

तुझसे ही जीवन मेरा और सम्बन्ध सारे

रोम-रोम ओ३म् बोले गुरु तेरे द्वारे

रोम-रोम ओ३म् बोले ...

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