परम पूज्य योग-ऋषि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज की शाश्वत प्रज्ञा से निःसृत शाश्वत सत्य...

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आरोग्य सूत्र
1. आरोग्य के विकल्प- आरोग्य या हैल्थ शब्द सुनते ही योग-आयुर्वेद-प्राकृतिक चिकित्सा, सिद्धा, यूनानी, होम्योपैथी एवं एलोपैथी आदि शब्द हमारे मन-मस्तिष्क में घूमने लगते हैं। प्रत्येक मनुष्य अपने लिए सर्वश्रेष्ठ विकल्प को चुनना चाहता है लेकिन यहाँ सबसे बड़ी समस्या होती है कि हम गुण-दोष के आधार पर सही-गलत या श्रेष्ठता का निर्णय करके प्रचार, पढ़ा हुआ या अधिकतम लोग या कठोर शब्दों में कहूँ तो भीड़तन्त्र जिसको मानती है हम भी उसी का अंधानुसरण करने लगते हैं। मैं तर्क, तथ्य, युक्ति, प्रमाण (एविडेंस) के साथ निष्पक्ष, नि:स्वार्थ भाव से मानवमात्र के हित की दृष्टि से ऐलोपैथी की जीवन रक्षक औषधियाँ रोग को तत्काल नियन्त्रित करने शल्य चिकित्सा (सर्जरी) में बहुत उपयोगी मानता हूँ लेकिन रोगों को पूर्णत: निर्मूल (क्योर) करने एवं बहुत से असाध्य रोगों को हम केवल योगायुर्वेद एवं परम्परागत ज्ञान-विज्ञान के आधार पर ठीक कर सकते हैं, जैसे-उच्च रक्तचाप, मधुमेह, वात रोग, कफ एवं पित्त की सभी विकृतियाँ, थायराइड, यौन रोग, तनाव, प्रतिरक्षा तन्त्र की दुर्बलता एवं जीवन पद्धति से जुड़े रोग, जैसे मोटापा, अनिद्रा, इन्जाइटी, पाचनतंत्र के रोग, कम आयु में ही बुढ़ापे के लक्षण प्रकट हो जाना, आँखों, बालों एवं हड्डियों आदि के रोग, शरीर में डिजनरेशन, तन मन में बहुत प्रकार के असंतुलन एवं ओजक्षय आदि का सम्पूर्ण उपचार स्थाईत्व के साथ अर्थात् इन्क्लुसिव एवं सस्टेनेबल होलेस्टिक ट्रीटमेन्ट एवं क्योर केवल योगायुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा या भारतीय सनातन आर्य वैदिक पद्धति में ही है।
2. संकल्प स्वस्थ मानव का- पूरे विश्व में हैल्थ सेक्टर के साथ एक बहुत बड़ा व्यापार तंत्र भी जुड़ा हुआ है। व्यापार एवं उपचार के बीच एक बहुत बड़ा संघर्ष, विवाद, उन्माद, झूठ, षड्यंत्र एवं युद्ध जैसी स्थिति बन जाती है। जहाँ तक उपचार या आरोग्य का सम्बंध है इसमें सभी सहमत होते हैं कि कम से कम लागत में बिना किसी नुकसान, दुष्प्रभाव के कम से कम समय में अधिकतम आरोग्य लाभ मिलना चाहिए लेकिन डॉक्टर्स, हजारों करोड़ की लागत से बड़े-बड़े हॉस्पिटल्स एवं हजारों-लाखों करोड़ का दवा का व्यापार करने वाली कम्पनियों के मालिक या संचालक लोग अपने निहित व्यवसायिक हितों स्वार्थों के चलते सच को झूठ एलोपैथी के झूठ को सच साबित करने में पूरी ताकत का प्रयोग करते हैं। इसके लिए छल, छद्म, झूठ, षड्यन्त्र एवं दुष्प्रचार की पूरी बिसात बिछाते हैं। दवा निर्माता कम्पनियों के पास लाखों-करोड़ की आर्थिक ताकत है, क्योंकि पूरी दुनिया में १०० लाख करोड़ से अधिक का कारोबार इन एलोपैथी की दवा निर्माता कम्पनियों का है। अत: अपनी आर्थिक शक्ति का दुरुपयोग करके दुनिया की बड़ी-बड़ी संस्थाओं W.H.O. टॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट्स एवं सत्तासीन राजनैतिक दलों को भी हजारों-लाखों करोड़ का चंदा दुनिया भर में उपलब्ध करा देती हैं और सत्य का गला घोटने का काम करती हैं। ऐसे में जब आर्थिक तन्त्र एवं झूठ का षड्यंत्र- राजतंत्र, प्रजातंत्र एवं भीड़तंत्र पर भारी पडऩे लगता है तो सच कहना, सच करना, सच्चाई के साथ लोगों की भलाई के लिए नि:स्वार्थ भाव से व्यापार के साथ खड़े होकर उपचार के साथ खड़े होना एक बहुत बड़ी चुनौति एवं साहस है। हम सभी देशवासियों, बुद्धिजीवियों एवं चिकित्सा को व्यापार मानकर मानवमात्र के उपचार का साधन मानने वालों से आह्वान हैं कि वे दिव्य सात्विक संकल्प के साथ खड़े हों। हमने प्राचीन वैदिक ज्ञान योग-आयुर्वेद-प्राकृतिक चिकित्सा एवं वैदिक जीवन पद्धति पर वर्षों तक गहन अध्ययन, शोध, अनुसंधान एवं अनुभव किया है और पूरे वैज्ञानिक अनुसंधानों के साथ हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि यदि आप और अधिक ताकत के साथ हमारा साथ दें तो हम रोगमुक्त, व्यसनमुक्त, तनाव, दु:-दर्द एवं सभी अमानवीय कृत्यों से इस सम्पूर्ण मानवता को मुक्त करके एक पूर्ण स्वस्थ, समृद्ध, सात्विक, संस्कारवान्, परमवैभवशाली भारत एवं स्वस्थ आध्यात्मिक विश्व का निर्माण कर सकते हैं।
हमें विश्वास है आप सभी सात्विक आत्माओं का साथ, सहयोग एवं पूरा आशीर्वाद हमें मिला है और निरन्तर मिलेगा और हम स्वस्थ मानव, स्वस्थ राष्ट्र एवं स्वस्थ विश्व के सपने को साकार कर सकेंगे।
-स्वामी रामदेव

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