व्यापार एवं उपचार का फर्क समझें

व्यापार एवं उपचार का फर्क समझें

आचार्य बालकृष्ण

हमारे लिए हर भारतवासी व विश्ववासी एक दिव्य आध्यात्मिक परिवार का सदस्य है और हम उसके स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा, संस्कार एवं किसी भी प्रकार से उसकी सेवा करने को अपना धर्म मानते हैं|
विदेशी कंपनियों एवं कार्पोरेट हाउस देश को एक बाजार मानते हैं जबकि पतंजलि देश व दुनिया को एक परिवार मानती है। हमारे लिए हर भारतवासी व विश्ववासी एक दिव्य आध्यात्मिक परिवार का सदस्य है और हम उसके स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा, संस्कार एवं किसी भी प्रकार से उसकी सेवा करने को अपना धर्म मानते हैं।
सैल्फ सस्टेनेबल एण्ड नोन प्रोफिटेबल फिलोसफी एवं प्रिंसिपल के आधार पर पतंजलि के सेवा प्रकल्प हैं। किसी भी बड़े सेवा कार्य के लिए आवश्यक साधनों की अपेक्षा रहती है। सेवा समर्थ व्यक्ति, संस्था व संगठन ही दे सकता है। जो असमर्थ है, वह सेवा लेता है। अत: आप सबके आशीर्वाद से हमने पतंजलि योगपीठ के माध्यम से योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा आदि स्वास्थ्य के क्षेत्र में तथा आचार्यकुलम्, पतंजलि गुरुकुलम्, वैदिक गुरुकुलम्, वैदिक कन्या गुरुकुलम्, पतंजलि विश्वविद्यालय आदि शिक्षा के क्षेत्र में, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन तथा पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट आदि अनुसंधान के क्षेत्र में, साथ ही अनेक संस्थाओं, देश के सभी जिला, तहसील व लाखों गावों तक फैले पतंजलि योग समिति, महिला पतंजलि योग समिति, भारत स्वाभिमान, युवा भारत, पतंजलि किसान सेवा समिति एवं हाम्रो स्वाभिमान संगठनों के माध्यम से हम जो भी सेवा कर रहे हैं उसके लिए सामथ्र्य, साधन एवं सहयोग आपका रहा है। सभी संस्थाओं, संगठनों एवं विविध सेवा प्रकल्पों को हम स्वावलम्बन से सेवा के सिद्धांत पर संचालित कर रहे हैं तथा देश व दुनिया के करोड़ों लोग इससे लाभान्वित हो रहे हैं। रोगोपचार का चमत्कार कुछ ऐसा हुआ कि चिकित्सा के क्षेत्र में रोगों के संदर्भ में 'क्योरशब्द का प्रयोग पहली बार पतंजलि की ओर से हुआ। अन्यथा चिकित्सा विज्ञान के नाम पर एक गहरा अज्ञान समाज में फैल गया था कि बी.पी., शुगर, थायराइड, अस्थमा, अर्थराइटिस, सोराइसिस, लीवर सिरोसिस एवं कैंसर जैसे रोगों को कन्ट्रोल तो कर सकते हैं किन्तु क्योर नहीं कर सकते। लेकिन लाखों-करोड़ों रोगियों को हमने इन रोगों से पूर्णत: मुक्त करके, पूरे वैज्ञानिक प्रमाणों एवं रिसर्च के आधार पर ९० से ९९ प्रतिशत रोगों के क्योर करने की एक नई पहल की एवं एक नया इतिहास बनाया। इस बार के योग संदेश को हमने 'आयुर्वेद विशेषांकका स्वरूप दिया है। इसमें दी गई रोगों की चिकित्सा से हमने अलग-अलग रोगों से पीडि़त लाखों रोगियों को पूर्णत: रोगमुक्त किया है और इसके पूरे प्रमाण हमारे पास हैं। अत: जिस विधि से जितने समय तक योगाभ्यास के लिए जिन आसन, प्राणायाम, ध्यान एवं षट्कर्म आदि के सन्दर्भ में श्रद्धेय स्वामी जी बताते हैं, पूरी श्रद्धा से निरन्तरतापूर्वक आप वैसे ही १००त्न करना, साथ ही आयुर्वेद का पंचकर्म एवं अन्य चिकित्सा जो इस बार के अंक में लिखी है, उसको हमारे पतंजलि मेगास्टोर, पतंजलि चिकित्सालय एवं आरोग्य केन्द्रों पर जाकर हमारे वरिष्ठ वैद्यों से परामर्श लेकर इसका पूरा लाभ उठाना।
योग संदेश के पाठकों को हम पिछले माह मासिक पत्रिका उपलब्ध नहीं करा सके थे क्योंकि हम एक विशेषांक के रूप में आपको बहुत बड़ी सौगात देना चाहते थे। हमें विश्वास है कि आप एवं आपके परिवार के लिए जिंदगी भर ये विशेषांक एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।
 

Related Posts