योग, आयुर्वेद एवं स्वदेशी के विरोधी आसुरी शक्तियों एवं षड्यंत्रकारियों को 'जवाब दें’

योग, आयुर्वेद एवं स्वदेशी के विरोधी आसुरी शक्तियों एवं षड्यंत्रकारियों को 'जवाब दें’

राकेश कुमार, मुख्य केन्द्रीय प्रभारी, पतंजलि योग समिति

रम पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज करोड़ों लोगों की आशा और विश्वास हैं तथा उन्होंने करोड़ों लोगों को जीवन दिया है। पूज्य आचार्य श्री का स्वास्थ्य किसी व्यक्ति द्वारा कुछ खिलाने से 'फूड प्वाइज़नहुई, जो अब पूर्णत: ठीक है। कुछ आसुरी, वामपंथी शक्तियों, षड्यंत्र पूर्वक योग, आयुर्वेद, स्वदेशी व भारतीय संस्कृति को बदनाम करने में लगी हुई हैं। लोग पूज्य आचार्य श्री के लिए सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट करते हैं यह भी हमने देख लिया, लेकिन हम भी उस मिट्टी के बने हैं कि चाहे जग बैरी हो जाए लेकिन हम सत्य पथ से डिग नहीं सकते, अपने कर्तव्य से पलायन नहीं कर सकते।

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कुछ लोगों का काम ही यही है कि यह पतंजलि योगपीठ, योग, आयुर्वेद, स्वदेशी और ऋषियों का कार्य न हो बस इसी में लगे रहते हैं, तो हम आप लोगों से यही कहेंगे, चाहे लोग लाख षड्यंत्र करें, आपको हिम्मत नहीं हारनी है और तमाम संघर्षों के बीच रहते हुए आपको आगे बढऩा है। आप भी हौसला रखना और हम भी हौसला रख कर आगे बढ़ते हैं। हो सकता है लोगों ने कितनी भी बुरी बातें कही हों, लेकिन करोड़ों लोगों का आशीर्वाद पहले भी हमारे साथ था और हमेशा रहेगा।
हम सब को भगवान् का प्रतिनिधि बनना है, हम गुरु सत्ता, योग, आयुर्वेद, वैदिक संस्कृति के प्रतिनिधि हैं, प्रतिरूप हैं, हम उसके उत्तराधिकारी हैं और हमें इसी मार्ग पर चलना है। हमने योग को कभी नहीं छोड़ा, पतंजलि योगीठ में एक दिन भी योग नहीं छूटा है। योग करते हैं, यज्ञ करते हैं, गौसेवा करते हैं, इनको हमने कभी नहीं छोड़ा है। लोगो को चिंता है की पूज्य आचार्य श्री को क्या हुआ, तो हम कहना चाहते हैं कि पूज्य आचार्य श्री पूर्ण स्वस्थ हैं लेकिन कुछ दुष्ट लोगों की सोच है कि पूज्य आचार्य श्री का इलाज क्यों करा रहे हो? ऐसे भी लोग हैं, किसी ने कहा कि पूज्य आचार्य श्री का हार्ट फेल हो गया, किसी ने कहा कि उनको ब्रेन हेमरेज हो गया, किसी ने कहा उनके किडनी, फेफड़े सब फेल ही हो गए और पता नहीं लोगों ने कितनी घटिया बातें की। वो लोग इस देश के है, ये कोई विधर्मी लोग नहीं हैं, ये अपने आपको हिन्दू कहने वाले लोग हैं। तो हम इनके सभी प्रश्नों के उत्तर देने के बाध्य नहीं हैं, लेकिन एक बात कहना है कि बुरा सोचने वाले लाख बुरा सोचें लेकिन पूज्य आचार्य श्री पूर्ण स्वस्थ हैं, कुछ असुर कौआ प्रवृति के लोग हैं जो अपनी काँव-काँव करते रहते हैं लेकिन उससे हमारा कुछ नहीं बिगडऩे वाला है, कोई दुष्ट व्यक्ति खाने की चीज में कुछ नशीला, जहरीला मिलाकर खिला दें और सब लोग कहें पूज्य आचार्य श्री  बीमार हो गए ये सब गलत है। कोई लाख आलोचना करे, कोई लाख योग, आयुर्वेद, वेदों, ऋषियों और पतंजलि की आलोचना करे कोई धर्म, सत्य, न्याय की क्यों न आलोचना करे, लेकिन प्रत्यक्ष को कोई नहीं नकार सकता। हमारे लाखों करोड़ों आलोचक हैं, वह भी यह मानते हैं कि श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज के कारण करोड़ों लोगों का भला हुआ है।  शिक्षा, चिकित्सा का कार्य, धरती माँ से सेवा जैसे बहुत से कार्यों का दायित्व हमने लिया लिया हुआ है, और करोड़ों सात्विक आत्माओं के आशीषों से हम आगे बढ़ेंगे जिससे देवत्व, पुण्य, सत्य की प्रतिष्ठा होगी और यह योगधर्म, राष्ट्रधर्म आगे बढ़ता रहेगा।

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सोशल मीडिया पर ऐसे बहुत से असुरगैंगों के लोग सक्रिय हैं। जिनको इसी बात से दिक्कत है कि पूज्य आचार्य जी स्वस्थ क्यों हैं, सकुशल क्यों हैं, उन्होंने मंसूबे पाले थे। पूज्य आचार्य जी को कुछ हो जाए। पूज्य आचार्य श्री स्वस्थ हो गए हैं और आश्रम में वापस आ गए हैं। ऐसे असुरगैंग के लोगों को उन्हीं की भाषा में मुँह तोड़ उत्तर दें।
'कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया में असुरगैंगों ने षड्यंत्र पूर्वक खबर फैलाई कि पूज्य स्वामी जी महाराज घुटने के ऑपरेशन के लिए जर्मनी गये हैं, जबकि पूज्य स्वामी जी महाराज का कभी कोई ऑपरेशन नहीं हुआ। जिस दिन खब़्ार फैलाई उस दिन पूज्य स्वामी जी महाराज ने आस्था पर स्वयं योगाभ्यास करवाया था। बाद में सभी प्रमुख मीडिया संस्थानों यथा- रक्चक्क न्यूज के वायरल सच/दैनिक भास्कर/आजतक के फैक्ट चैक के अन्तर्गत जब जाँच की तो इसको पूरी तरह फर्जी/फेक/झूठी न्यूज पाया।
याद रखें-राष्ट्र की हानि दुष्टों की दुष्टता से कम सज्जन व्यक्तियों की उदासीनता से अधिक होती है। अत: सोशल मीडिया या कहीं पर कोई अनावश्यक भ्रम/षड्यंत्र/भ्रामक खबर फैलाता है तो हम उसका पुरजोर उत्तर दें।
प्रामाणिक जानकारी के लिए निरन्तर पूज्य स्वामी जी महाराज व पूज्य आचार्य श्री के फेस बुक/ट्वीटर/यूट्यूब अकाउण्ट से जुड़ें। किसी भी प्रकार के बहकावे व षड्यंत्र के शिकार न बनें। पूज्य आचार्य श्री पूर्ण स्वस्थ हैं तथा आश्रम में अपनी निरन्तर राष्ट्रसेवा में लगे हुए हैं।
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 द्यपि मैं पतंजलि, रामदेव और बालकृष्ण इत्यादि के बारे में उतना ही जानता हूँ जितना कि अखबार या सर्वसुलभ पत्रिकाओं में छपा होगा। यह भी स्पष्ट कर दूँ कि न ही मैं व्योमकेश बक्शी हूँ, न ही शर्लाक होम्स और हाँ, न ही जेम्स बॉण्ड या अजीत डोभाल। तो मेरे पास ज्ञान सीमित है, आपकी तरह अथाह नहीं कि मैं दिवंगत हो गए अरुण जेटली को अपशब्द कहूँ या अस्पताल में भर्ती बालकृष्ण के बारे में अपना गूढ़ ज्ञान उगलूँ। एक सत्य और स्पष्ट कर दूँ कि मेरा उपरोक्त व्यक्तियों या संस्था से भी उतना ही प्रगाढ़ नाता है जितना कि आपका अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से है। तथापि मैं आपसे यह प्रश्न पूछना चाहता हूँ कि रामदेव, बालकृष्ण या पतंजलि ने आपका क्या लूटा है? कब आपको कट्टे की नोक पर एटीएम ले जाकर आपके सारे पैसे छीन लिए? ध्यातव्य होना चाहिए आपको कि यह जो 21 जून को पूरा विश्व 'विश्व योग दिवसमना रहा है, उसमें रामदेव की भूमिका, चंद्रयान छोडऩे में आपकी भूमिका के ठीक करोड़ों गुना अधिक है। यदि मैं सरल तथा अपनी भाषा में कहूँ, तो विश्व योग दिवस का सर्वाधिक श्रेय रामदेव को ही जाता है। यदि रामदेव और बालकृष्ण आपकी परिभाषा के अनुसार 'सच्चे योगीबनते तो ही आप उनका सम्मान करते?
ठीक भी है, आप सही स्थान पर हैं परन्तु, 'सच्चा योगीआप किसको मानते हैं? स्वामी रामकृष्ण को? जिन्होंने काली माता के साक्षात् दर्शन कर लिए थे, जो विवेकानंद के गुरु थे, परन्तु वे कैंसर की वजह से असमय मरे। विवेकानंद, महान् योगी, परन्तु हमारी उम्र में मर गए।
मदर टेरेसा, जिसको कि 'सैंटकी पदवी भी दी गई, जो ईशू के नाम पर छूकर सबको ठीक कर देती थी, वो भी अपने आखिरी दिनों में अस्पताल में तड़प तड़प कर मरी। स्वयं को छूकर स्वयं को स्वस्थ क्यों नहीं कर लिया?
तो मेरा प्रश्न केवल इतना ही है, कि आचार्य बालकृष्ण से इतनी शत्रुता क्यों? क्या उपरोक्त महाविभूतियों की तरह इन्होंने स्वयं को गॉड घोषित किया? क्या इन्होंने कहा कि मैं तुम्हें छू कर तुम्हारा दु:ख हर लूँगा? क्या इन्होंने भभूत और ताबीज बांटे? होश में आइये? यदि ये व्यापारी ही हैं तो भी इन्होंने आपको धोखा नहीं दिया है।
फेयर एंड लवली से आप गोरे हो गए? नहीं न? तो फिर यदि आपको पतंजलि से फायदा नहीं हुआ तो भाई, रामदेव कैसे दोषी हुआ? यदि उसके उत्पाद से आप 'अंग्रेजजैसे गोरे नहीं हुए, तो इस बात का शुक्र मनाइए कि केमिकल की वजह से 'चर्मरोगका शिकार भी नहीं हुए। उसने भारत का पैसा भारत के लोगों की सहायता से भारत में ही रोका, यदि पसेरी भर भी बुद्धि है आपमें, तो आप यह समझ जायेंगे। रामदेव की वजह से आप आयुर्वेद का 'जानना आरम्भ किये हैं। हर बात पर विरोध तथा ज्ञान की उलटी आवश्यक नहीं बंधू! क्योंकि अतिबुद्धिमानी कौआ अंत में गुह ही खाता है। आचार्य जी करोड़ों लोगों की आशा और विश्वास हैं और उन्होंने करोड़ों लोगों को जीवन दिया है। आचार्य जी ठीक नहीं हैं फिर भी लोग आचार्य जी के लिए सोशल मीडिया पर भद्दे-भद्दे कमेंट करते हैं, यह भी हमने देख लिया। लेकिन हम भी उस मिट्टी के बने हैं की चाहे जग बैरी हो जाए लेकिन हम सत्य पथ से डिग नहीं सकते, अपने कर्तव्य से पलायन नहीं कर सकते।         
-अज्ञात
स्रोत- सोशल मीडिया
 

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