पूज्यश्री स्वामी रामदेव जी महाराज व श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के अनुभूत प्रयोग

पूज्यश्री स्वामी रामदेव जी महाराज व श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के अनुभूत प्रयोग

क -एक योग की प्रक्रिया और एक-एक जड़ी-बूटी पर हमारे पूर्वजों ने, ऋषि-मुनियों ने हजारों-लाखों व करोड़ों वर्षों तक निरन्तर अनुसंधान किया। ऐसी ही कुछ जड़ी-बूटियाँ जिनका प्रयोग परम पूज्य स्वामी रामदेवजी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य बालकृष्णजी ने लाखों-करोड़ों रोगियों पर किया व उन्हें लाभप्रद पाया और उनको औषध दर्शन आदि पुस्तकों में स्थान दिया। इनमें संचित कुछ नुस्खे जो महत्वपूर्ण हैं और योगसाधक अपने मन-मस्तिष्क में उन्हें ताजा रखना चाहते हैं, उनकी मांग को ध्यान में रखकर प्रस्तुत है:-

अंडरवेट (Underweight)

  • अंडरवेट व्यक्ति अश्वगंधा, शतावर व सफेद मूसली का पाउडर 1-2 ग्राम दूध के साथ सेवन करें।
  • नियमित रूप से सूर्य नमस्कार और यौगिक-जॉगिंग करें, युवा हैं तो दण्ड-बैठक लगायें।
  • दूध के साथ 5-10 खजूर लें। अस्थमा में लाभ होगा व वजन बढ़ेगा।
  • दूध के साथ आम का सेवन भी लाभकारी होता है।
  • अंडरवेट व्यक्ति दूध व केला लें, ओवरवेट, अस्थमा व ऐसिडिटी के रोगी केले का सेवन न करें।

पायरिया (Pyorrhea)

  • नीम, बबूल, तुम्बरू, आक की जड़ व अपामार्ग की दातुन करें, भुना चना खाएं व गन्ना चूसें।
  • नियमित रूप से कपालभाति प्राणायाम करें।
  • जिनको पायरिया है वे सप्ताह में १-२ दिन टूथपेस्ट करें, बाकि दिन दंत मंजन का प्रयोग करें।
  • हर्बल आयुर्वेदिक दंतकांति टूथपेस्ट का प्रयोग करें, दाँत सदैव मजबूत रहेंगे।
  • ज्यादा ठंडा या ज्यादा गर्म न खाएं व पीयें, आईसक्रीम न खाएं, चॉकलेट न खाएं। अंगुली से मसूड़ों की मालिश करें।
निम्नरक्तचाप(Low Blood Pressure)
  • अश्वगंधारिष्ट का सेवन करें। मधुमेह हो तो अश्वगंधारिष्ट न लें। अश्वगंधा कैप्सूल का प्रयोग करें, लाभ होगा।
  • नियमित रूप से योगाभ्सयास करें। प्राणायाम, आसन, यौगिक-जॉगिंग और सूर्य नमस्कार करें।
  • शिलाजीत सत् का प्रयोग करें। शिलाजीत कैप्सूल ले सकते हैं, १-२ गोली अश्वशिला कैप्सूल सेवन कर सकते हैं।
  • गाजर, सेव, पालक, बथुआ, मुनक्का, अंजीर व खजूर का नियमित रूप से सेवन करें।
मोतियाबिंद
  • दृष्टि आई-ड्रॉप का प्रयोग करें अथवा इस दवा को घर पर बनायें- १ चम्मच सफेद प्याज का रस, १ चम्मच अदरक का रस व ३ चम्मच शहद मिलाकर १-१ बूंद आँख में डालें, लाभ होगा।
  • नियमित रूप से कपालभाति प्राणायाम करें।
  • आमलकी रसायन २०० ग्राम, सप्तामृत लौह २० ग्राम, मुक्ताशुक्ति भस्म १० ग्राम, मोती पिष्टी २-४ ग्राम- इन सबको मिलाकर १-१ चम्मच सुबह-शाम खाने से पहले लें। मोतियाबिंद में लाभ होगा।
  • अमृत रसायन, आंवला मुरब्बा, आंवला कैण्डी व २-४ चम्मच आंवला रस पीयें व आंवला चूर्ण का सेेवन करने से लाभ होगा।
  • सुबह उठकर मुँह में पानी भरकर ठंडे पानी से आँखों को धोएं। दिन में ३-४ लीटर पानी पीयें व हरी सब्जियों का प्रयोग करें।
हाइड्रोसिल (Hydrocele)
  • चंद्रप्रभा वटी, वृद्धिवाधिका वटी व पुनर्नवादि मण्डूर की १-१ गोली प्रयोग करें, छोटे बच्चों को चंद्रप्रभा वटी आधी-आधी गोली दें। बच्चों को दिन में २ बार व बड़ों को ३ बार दें।
  • आंवला व ऐलोवेरा जूस का प्रयोग करें। त्रिफला चूर्ण लें, १-२ ग्राम हरड़ पाउडर को रात के खाने के बाद लें, लाभ होगा।
  • गोमुखासन व गरुड़ासन करें। कपालभाति, बाह्य प्राणायाम धीरे-धीरे करें।

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