डेयरी व्यवसाय में पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास की महती भूमिका

डेयरी व्यवसाय में पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास की महती भूमिका

डॉ. बी.आर.जे. माथुर, पतंजलि ग्रोमोद्योग (न्यास)

भारतवर्ष को विश्व में सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाले देश का गौरव प्राप्त है किन्तु प्रतिपशु दूध उत्पादन एवं प्रतिव्यक्ति दूध की उपलब्धता की बात करें तो हमारा देश बहुत पिछड़ा हुआ है। इसका मुख्य कारण पशु पालन व्यवसाय में कुप्रबन्धन, कुपोषण, पशुओं के ब्यात में अन्तराल समय अधिक होना, शुष्क समय (dry period) का लम्बा होना और पशु पालकों का अशिक्षित होना है। यही कारण है कि विश्व में सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाले देश के पशु पालकों एवं डेयरी उद्योग की दशा बहुत अच्छी नहीं है। जिस देश में भगवान् श्री कृष्ण ने गौ पालन का सन्देश दिया उसी देश में आज युवा गौ पालन से विमुख हो रहा है। इसका प्रमुख कारण है इस व्यवसाय को सही ढंग से नहीं करने  से इसमें होने वाली अल्प आय अथवा घाटा। इस व्यवसाय की उन्नति तथा पशु पालकों की आर्थिक दशा सुधारने के उद्धेश्य से इस देश के महापुरुष - युगपुरुष  एवं चिन्तक परम श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महराज ने पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास की स्थापना कर इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। स्वामी जी की सोच है कि गौमाता का संरक्षण एवं संवर्धन करना है तो गाय को उपयोगी एवं आर्थिक रूप से लाभकारी बनाना आवश्यक है। गौपालन तथा पशुपालन का आय की दृष्टि से आकर्षण होना चाहिए।
तंजलि ग्रामोद्योग न्यास, हरिद्वार के माध्यम से पूज्य स्वामी जी महाराज, आचार्य श्री बालकृष्ण जी महाराज के आशीर्वाद एवं डॉ. यशदेव शास्त्री जी के निर्देशन में पशुपालकों के हितार्थ चहुँमुखी कार्यक्रमों को गति प्रदान की जा रही है जिसका लक्ष्य है दुधारू पशु से प्रतिवर्ष एक बच्चा एवं 300 दिन तक दूध की धार प्राप्त करना।
पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास द्वारा देश के पशुओं को स्वस्थ रखने एवं उत्पादनशील बनाये रखने के उद्देश्य से देशभर में कई महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं।
न्यास द्वारा पौष्टिक, संतुलित, बिना यूरिया, केमिकल्स अथवा हानिकारक तत्वों को मिलाये विशुद्ध 'दुग्धामृतपशु आहार का देश के प्रत्येक क्षेत्र में २५ संयत्रों से वैज्ञानिक तरीके से निर्माण  करवाया जाता है। इस गुणवत्तायुक्त पशु आहार को देशभर में फैले लगभग ५००० विक्रय केन्द्रों / डीलर, सब-डीलर, रिटेलर इत्यादि के माध्यम से सस्ती दरों पर देश के कोने-कोने में पहुचाने का प्रयास किया जा रहा है। पतंजलि का 'दुग्धामृतपशु आहार पशु पालक की क्रय क्षमता, आवश्यकता एवं पशु की उत्पादनशीलता के अनुरूप कई प्रकार की श्रेणियों में उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिसमें प्रमुख है: सिल्वर राशन (पेलेट्स एवं मेश), गोल्ड एनर्जी चिप्स, गोल्ड प्लस चिप्स, पशु प्रसादम् इनर्जी रिच इत्यादि। इन विविध पशु आहारों को और अधिक उत्पादनशील, पौष्टिक, संंतुलित, किफायती एवं पशुओं के स्वाद के अनुरूप बनाने के लिए न्यास के महासचिव श्री डॉ. यशदेव शास्त्री जी के निर्देशन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुरेश चन्द्र मलिक जी, डॉ. एस.एस. कुण्डू एवं अन्य वैज्ञानिक निरन्तर प्रयासरत हैं।
पशु आहार के अतिरिक्त पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास के वैज्ञानिकों द्वारा गहन अध्ययन और प्रयोगों के पश्चात् तैयार किये गये उत्तम क्वालिटी एवं असरकारक पशु आहार पूरक (फीड सप्लीमेंट्स) भी पशु पालकों को उचित दरों पर पशु आहार के साथ ही देश के प्रत्येक भाग में उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। इसमें प्रमुख है- कैल्शियम-फॉस्फोरस की पूर्ति हेतु संवृद्धि तरल, संवृद्धि गोल्ड तरल, संवृद्धि जैल एवं संवृद्धि बॉलस; खनिज लवण एवं प्रजनन चक्र को नियमित रखने व विटामिन्स की पूर्ति हेतु मिन्विट आर बॉलस एवं संवृद्धि मिनरल, विटामिन तरल; गर्भाशय की सम्पूर्ण देखभाल हेतु गर्भाञ्जलि; यकृत की क्रियाशीलता बढ़ाने हेतु यकृतामृत (लीवर टॉनिक); अविलम्ब शक्ति प्रदान करने तथा पशु को तनावमुक्त रखने हेतु शक्तिधारा (एनर्जी बूस्टर); थनैला (थन के रोगों) की रोकथाम एवं उसके उपचार में सहयोगी व पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिये पतंजलि बत्तीसा-प्रो इत्यादि।
न्यास द्वारा पशु पालकों को नियमित नि:शुल्क पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्धेश्य से देश के विभिन्न क्षेत्रों में अनुभवी पशु चिकित्सकों की सेवाएं फोन पर उपलब्ध करवाई जा रही है। सभी क्षेत्रों में स्थानीय अनुभवी वरिष्ठ पशु चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है ताकि स्थानीय संवाद में पशु पालकों की समस्याओं का निराकरण किया जा सके।
समय-समय पर न्यास के पशु चिकित्सकों अनुभवी अधिकारियों, डीलरों द्वारा ग्रामीण अंचलों में जाकर पशु पालकों की गोष्ठियाँ आयोजित कर पशुओं को स्वस्थ व उत्पादनशील बनाकर पशु पालकों द्वारा अधिक लाभ अर्जित करने की जानकारी उपलब्ध करवाई जाती है। पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर मौके पर निदान बतलाया जाता है। संस्था का उद्धेश्य है कि देश का पशुधन स्वस्थ, निरोगी एवं अधिक उत्पादनशील बनें ताकि देशवासियों को विशुद्ध दूध-दही, घी, मक्खन एवं अन्य पौष्टिक डेयरी उत्पाद उपलब्ध हो सके एवं देशवासी अधिक स्वस्थ, बलवान्, बुद्धिवान् बनें और देश प्रगति की ओर अग्रसर हो।

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